दक्षिणी गोलार्ध में दिखाई देगा सूर्य ग्रहण का अद्भुत नजारा
नई दिल्ली। साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण आज, मंगलवार को लगने जा रहा है। यह ग्रहण चक्राकार सूर्य ग्रहण होगा, जिसे खगोलीय भाषा में ‘रिंग ऑफ फायर’ कहा जाता है।आज का सूर्य ग्रहण दोपहर में 3 बजकर 26 मिनट पर लगेगा और शाम को 7 बजकर 57 मिनट पर इसका समापन होगा। हालांकि यह दृश्य बेहद आकर्षक होगा, लेकिन भारत में इसके दर्शन नहीं हो पाएंगे।
चक्राकार सूर्य ग्रहण उस स्थिति में होता है जब सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी एक सीध में आ जाते हैं और चंद्रमा सूर्य के सामने से गुजरता है। इस दौरान चंद्रमा पृथ्वी से अपेक्षाकृत अधिक दूरी पर होता है, जिसके कारण वह सूर्य को पूरी तरह ढक नहीं पाता। NASA के मुताबिक, इसी वजह से सूर्य के चारों ओर चमकदार प्रकाश का छल्ला दिखाई देता है, जिसे ‘रिंग ऑफ फायर’ कहा जाता है। इस ग्रहण में चंद्रमा सूर्य के लगभग 96 प्रतिशत हिस्से को ढक लेगा, लेकिन किनारों से सूर्य की तेज रोशनी नजर आती रहेगी।
भारत में क्यों नहीं दिखेगा ग्रहण
यह सूर्य ग्रहण मुख्य रूप से दक्षिणी गोलार्ध में घटित होगा। उस समय भारत में सूर्य क्षितिज के नीचे रहेगा, इसलिए देश के किसी भी हिस्से से इस खगोलीय घटना को प्रत्यक्ष रूप से देख पाना संभव नहीं होगा।
ऑनलाइन देख सकेंगे खगोल प्रेमी
हालांकि भारत में ग्रहण दिखाई नहीं देगा, लेकिन खगोल विज्ञान में रुचि रखने वाले लोग अंतरराष्ट्रीय वेधशालाओं और स्पेस एजेंसियों की लाइव स्ट्रीमिंग और वीडियो प्रसारण के जरिए इसका नजारा देख सकेंगे। वैज्ञानिकों और खगोल प्रेमियों के लिए यह ग्रहण अध्ययन और अवलोकन का अहम अवसर माना जा रहा है।
इन क्षेत्रों में दिखेगा ग्रहण
इस सूर्य ग्रहण का सबसे स्पष्ट दृश्य अंटार्कटिका में देखने को मिलेगा, खासकर कॉनकॉर्डिया और मिर्नी अनुसंधान केंद्रों के आसपास। इसके अलावा दक्षिण अफ्रीका, तंजानिया, जाम्बिया और जिम्बाब्वे सहित दक्षिणी अफ्रीकी देशों में यह आंशिक रूप से नजर आएगा। दक्षिण अमेरिका के कुछ हिस्सों, विशेष रूप से अर्जेंटीना और चिली में भी लोग इस खगोलीय घटना के साक्षी बन सकेंगे।






