ग्राम्य विकास मंत्री गणेश जोशी ने काशीपुर में वीबी-जी राम जी बिल–2025 पर आधारित कार्यशाला को किया सम्बोधित
काशीपुर। प्रदेश के ग्राम्य विकास मंत्री गणेश जोशी ने काशीपुर में आयोजित विकसित भारत–रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) वीबी-जी राम जी बिल–2025 पर आधारित कार्यशाला में मुख्य अतिथि के रूप में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर उन्होंने किसानों एवं स्थानीय लोगों से संवाद कर सरकार की ग्रामीण रोजगार नीति की जानकारी दी।
ग्राम्य विकास मंत्री गणेश जोशी ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्ष द्वारा मनरेगा को समाप्त किए जाने की अफवाहों को निराधार कहा है। उन्होंने कहा कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में योजना को और अधिक मजबूत हुई है। उन्होंने बताया कि वर्ष 1989 में जवाहर रोजगार योजना से शुरू होकर समय-समय पर योजना का नाम परिवर्तित किया गया है। ग्राम्य विकास मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि अब वीबी-जी राम जी योजना के तहत ग्रामीण परिवारों को 100 के स्थान पर 125 दिन का गारंटीशुदा रोजगार मिलेगा। उन्होंने कहा कि योजना में सामान्य राज्यों के लिए 60:40 तथा हिमालयी व पूर्वोत्तर राज्यों के लिए 90:10 का केंद्र-राज्य वित्तीय अनुपात निर्धारित किया गया है। मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्यों में रिटेनिंग वॉल को अनुमन्य कार्यों में शामिल किया गया है।
ग्राम्य विकास मंत्री जोशी ने कहा कि कृषि के व्यस्त समय को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार वर्ष में 60 दिन ऐसे निर्धारित कर सकेगी, जब योजना के अंतर्गत कार्य नहीं कराया जाएगा। साथ ही जल जीवन मिशन के तहत बनी परिसंपत्तियों के रखरखाव, स्थायी परिसंपत्तियों के निर्माण, जल संरक्षण, ग्रामीण आधारभूत ढांचे तथा कृषि एवं आजीविका संवर्धन को प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने मनरेगा का बजट 86 हजार करोड़ रुपये से बढ़ाकर 95,692 करोड़ रुपये कर दिया है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
इस अवसर पर स्थानीय विधायक त्रिलोक सिंह चीमा, राज्यमंत्री विनय रोहिला,राज्यमंत्री मंजीत राजू, मेयर दीपक बाली, जिलाध्यक्ष मनोज पाल, ब्लॉक प्रमुख चंद्र प्रथा, गुरविंदर चंडोक, मंडल अध्यक्ष अर्जुन, बृजेश पाल, जसपाल जस्सी, जिला महामंत्री अमित नारंग सहित कई लोग उपस्थित रहे।
जनस्वास्थ्य से खिलवाड़ पर उठे तीखे सवाल
देहरादून। कारगी कूड़ा डंपिंग यार्ड के विरोध में उत्तराखंड महिला कांग्रेस ने देहरादून नगर निगम कार्यालय का घेराव कर जोरदार प्रदर्शन किया। महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष ज्योति रौतेला के नेतृत्व में हुए इस धरना-प्रदर्शन में डंपिंग यार्ड के स्थानांतरण और वैज्ञानिक ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की मांग प्रमुखता से उठाई गई।
प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने कारगी डंपिंग यार्ड से एकत्र किया गया प्रतीकात्मक कूड़ा नगर निगम परिसर में रखकर स्थानीय लोगों की दुर्दशा को उजागर किया। महिला कांग्रेस नेताओं ने कहा कि जिस गंदगी और दुर्गंध में क्षेत्रवासी रहने को मजबूर हैं, उसकी जिम्मेदारी से नगर निगम नहीं बच सकता।
महिला कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मेयर को ज्ञापन सौंपने के लिए करीब तीन घंटे तक प्रतीक्षा की, लेकिन नगर निगम कार्यालय में मौजूद होने के बावजूद मेयर ज्ञापन लेने बाहर नहीं आए। इसे लेकर प्रदर्शनकारियों ने जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही पर सवाल खड़े किए। बाद में नगर आयुक्त नमामि बंसल ने मौके पर पहुंचकर ज्ञापन लिया और शीघ्र कार्रवाई का आश्वासन दिया, जिसके बाद धरना-प्रदर्शन स्थगित कर दिया गया।
इस अवसर पर प्रदेश अध्यक्ष ज्योति रौतेला ने कहा कि कई दिनों तक कूड़े को जमा कर पहाड़ की तरह खड़ा कर दिया जाता है, जिससे आम जनता बीमारियों के खतरे में जीने को मजबूर है। उन्होंने आरोप लगाया कि कारगी डंपिंग यार्ड घनी आबादी वाले रिहायशी क्षेत्र के बीच स्थित है, जहां महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग लगातार दुर्गंध, प्रदूषण और स्वास्थ्य समस्याओं का सामना कर रहे हैं। यह ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2016 का उल्लंघन होने के साथ-साथ नागरिकों के स्वच्छ पर्यावरण और स्वस्थ जीवन के अधिकार पर भी सीधा प्रहार है।
महिला कांग्रेस ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र ही डंपिंग यार्ड के स्थानांतरण और वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी नगर निगम प्रशासन की होगी।
प्रदर्शन में उर्मिला थापा, निधि नेगी, नजमा खान, इंदु थापा, अरविंद शर्मा, अभिनव थापर, बबलू पंवार, नरेश सकलानी, हेमंत उप्रेती, गौरव रावत, नंदू, प्रशांत नेगी सहित कई कांग्रेस कार्यकर्ता और स्थानीय निवासी मौजूद रहे।
भराड़ीसैंण गैरसैंण विधानसभा में सजी उत्तराखंड की लोककला, स्थानीय कलाकारों को मिला सम्मान और प्रोत्साहन- ऋतु खण्डूडी भूषण
गैरसैंण। उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी भराड़ीसैंण, गैरसैंण स्थित विधानसभा भवन अब केवल लोकतांत्रिक विमर्श का केंद्र ही नहीं, बल्कि उत्तराखंड की समृद्ध लोककला, संस्कृति और परंपराओं का जीवंत प्रतीक भी बनता जा रहा है। विधानसभा अध्यक्ष उत्तराखंड श्रीमती ऋतु खण्डूडी भूषण की पहल पर विधानसभा परिसर में राज्य की स्थानीय कला एवं कलाकारों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से विभिन्न लोक-सांस्कृतिक विषयों पर आधारित पेंटिंग्स एवं रम्माण के पारंपरिक मुखौटे स्थापित किए गए हैं।
इन कलाकृतियों में नंदा राजजात यात्रा, छोलिया नृत्य, रम्माण उत्सव, पारंपरिक वाद्य यंत्र, ऐपन कला तथा रम्माण के मुखौटे सहित उत्तराखंड की विशिष्ट सांस्कृतिक विरासत को अत्यंत सजीव और प्रभावशाली रूप में उकेरा गया है। यह सभी कलाकृतियाँ राज्य के स्थानीय कलाकारों द्वारा निर्मित हैं, जिससे उन्हें न केवल एक प्रतिष्ठित मंच मिला है, बल्कि उनकी कला को सम्मान और पहचान भी प्राप्त हुई है। उल्लेखनीय है कि गत वर्ष देहरादून स्थित विधानसभा भवन में भी स्थानीय महिलाओं द्वारा सुंदर ऐपन कला का सृजन किया गया था, जिसे सभी वर्गों द्वारा व्यापक रूप से सराहा गया।
इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खण्डूडी भूषण ने कहा कि उत्तराखंड की लोककला और संस्कृति हमारी पहचान और विरासत का आधार है। कलाकारों को प्रोत्साहन देना तथा उनकी कला को सार्वजनिक और गरिमामय स्थलों पर स्थान देना संस्कृति संरक्षण की दिशा में एक आवश्यक और सार्थक प्रयास है। उन्होंने कहा कि एक महिला होने के नाते उनका कला, संस्कृति और रचनात्मक अभिव्यक्ति से विशेष जुड़ाव है और वे चाहती हैं कि उत्तराखंड की परंपराएँ आने वाली पीढ़ियों तक जीवंत रूप में पहुँचे।
पेंटिंग तैयार करने वाले कलाकारों मुकुल बड़ूनी, ज्योति जोशी सहित अन्य कलाकारों ने विधानसभा अध्यक्ष का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि पहली बार उन्हें अपनी कला को इतने प्रतिष्ठित मंच पर प्रदर्शित करने का अवसर मिला है, जिससे उनका मनोबल बढ़ा है और भविष्य में और बेहतर कार्य करने की प्रेरणा मिली है। कलाकारों ने यह भी बताया कि उनके द्वारा निर्मित कलाकृतियाँ एवं उपहारों को विधानसभा अध्यक्ष द्वारा देश के विभिन्न गणमान्य व्यक्तियों को भेंट किया जाता रहा है। उन्होंने ऐपन कला से सुसज्जित शॉल, पेंटिंग एवं अन्य स्मृति-चिन्ह देश की राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, गृह मंत्री, लोकसभा अध्यक्ष सहित अनेक विशिष्ट व्यक्तियों को भेंट कर उत्तराखंड की कला और संस्कृति को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई है।
इस अवसर पर भराड़ीसैंण गैरसैंण में कार्यरत वाहन प्रभारी शेखर पंत ने विधानसभा अध्यक्ष को परिसर में चल रहे विभिन्न विकासात्मक एवं व्यवस्थागत कार्यों की जानकारी दी तथा बताया कि विधानसभा क्षेत्र में अधोसंरचना, आवागमन एवं नागरिक सुविधाओं के विस्तार हेतु निरंतर कार्य किए जा रहे हैं।
यह पहल न केवल उत्तराखंड की लोकसंस्कृति को सहेजने का प्रयास है, बल्कि स्थानीय कलाकारों के सम्मान, आत्मनिर्भरता और सांस्कृतिक स्वाभिमान को सशक्त करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है।
पैराग्लाइडिंग चैंपियनशिप ने कपकोट को दिलाई पर्यटन मानचित्र पर खास जगह
राष्ट्रीय स्तर के आयोजन से कपकोट में साहसिक पर्यटन को मिला नया प्रोत्साहन
बागेश्वर। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के उत्तराखंड में साहसिक पर्यटन को बढ़ावा देने के विज़न के अनुरूप, सुदूर पर्वतीय क्षेत्र कपकोट अब एडवेंचर टूरिज्म के राष्ट्रीय मानचित्र पर मजबूती से उभर रहा है।
फरवरी 5 से प्रारंभ बागेश्वर जनपद में आयोजित पांच दिवसीय राष्ट्रीय एक्युरेसी पैराग्लाइडिंग प्रतियोगिता ने इस शांत ग्रामीण अंचल को देशभर के रोमांच प्रेमियों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना दिया है।
जालेख की पहाड़ियों से उड़ान भरते रंग-बिरंगे पैराग्लाइडरों से सजा कपकोट का आसमान पूरे आयोजन के दौरान उत्सव का अहसास कराता रहा। देश के विभिन्न राज्यों से आए 92 पायलटों ने इस प्रतियोगिता में पंजीकरण कराया, जिनमें से 78 प्रतिभागियों ने अपने कौशल का प्रदर्शन किया। हजारों स्थानीय दर्शकों और पर्यटकों की उपस्थिति ने यह सिद्ध कर दिया कि कपकोट में साहसिक खेलों के प्रति जबरदस्त उत्साह है।
प्रतियोगिता का शुभारंभ जिलाधिकारी आकांक्षा कोंडे और क्षेत्रीय विधायक सुरेश गड़िया द्वारा किया गया। जिलाधिकारी ने इसे बागेश्वर के लिए ऐतिहासिक पहल बताते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों से न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलता है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था सशक्त होती है और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होते हैं।
पहले दिन से लेकर समापन तक प्रतियोगिता का रोमांच चरम पर रहा। विशेषज्ञों के अनुसार कपकोट का भौगोलिक परिवेश पैराग्लाइडिंग, ट्रैकिंग और अन्य साहसिक खेलों के लिए अत्यंत अनुकूल है। आयोजन के दौरान प्रतिभागियों के लिए तकनीकी प्रशिक्षण और सुरक्षा संबंधी सत्र भी आयोजित किए गए, जिससे प्रतियोगिता का स्तर और अधिक पेशेवर बना।
समापन समारोह में जिलाधिकारी आकांक्षा कोंडे ने स्वयं जालेख से उड़ान भरकर इस रोमांच का अनुभव लिया और कहा कि “कपकोट–बागेश्वर अब एडवेंचर टूरिज्म के नए गंतव्य के रूप में स्थापित हो चुका है। भविष्य में इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए निरंतर प्रयास किए जाएंगे।”
प्रतियोगिता में प्रथम स्थान पर रहे मनीष उप्रेती को ₹1,00,000, द्वितीय स्थान पर रहे मनीष भंडारी को ₹50,000 तथा तृतीय स्थान पर पंकज कुमार को ₹30,000 की पुरस्कार राशि प्रदान की गई। महिला पायलटों को भी विशेष प्रोत्साहन राशि देकर सम्मानित किया गया।
इस आयोजन की सफलता ने स्पष्ट संदेश दिया है—कभी शांत समझा जाने वाला कपकोट अब केवल एक ग्रामीण इलाका नहीं, बल्कि देश का उभरता हुआ साहसिक पर्यटन केंद्र बन चुका है। प्राकृतिक सुंदरता, अनुकूल भौगोलिक परिस्थितियां और स्थानीय प्रशासन की सक्रिय पहल इसे भविष्य का प्रमुख एडवेंचर डेस्टिनेशन बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ा रही हैं।
कपकोट ने सचमुच नई उड़ान भर ली है—पर्यटन की, पहचान की और संभावनाओं की।
विद्यालय भवनों के मरम्मत व निर्माण कार्य को 568 लाख की धनराशि मंजूर
विभागीय अधिकारियों को निर्देश, नियत समय पर पूर्ण हो निर्माण कार्य
देहरादून। प्राथमिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत जर्जर हो चुके एक दर्जन से अधिक प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों का शीघ्र पुनर्निर्माण किया जायेगा। इन विद्यालयों के भवनों के निर्माण व मरम्मत कार्यों के लिये रू0 568.85 लाख की धनराशि मंजूर कर दी है साथ ही उक्त निर्माण कार्यों के लिये कार्यदायी संस्था भी नामित कर दी गई है। शीघ्र ही इस संबंध में शासन स्तर से आदेश जारी कर दिये जायेंगे।
सूबे के विद्यालयी शिक्षा मंत्री डाॅ. धन सिंह रावत ने बताया कि राज्य सरकार शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिये विभिन्न स्तरों पर लगातार प्रयास कर रही है। विद्यालयों में भौतिक संसाधनों, अवसंरचनात्मक कार्यों से लेकर शिक्षकों की तैनाती कर उन्हें सुविधा सम्पन्न बनाया जा रहा है, ताकि प्राथमिक स्तर पर प्रदेश के नौनिहालों को बेहतर शिक्षा मुहैया हो सके। इसी कड़ी में सरकार ने प्रदेश के विभिन्न जनपदों रूद्रप्रयाग, पिथौरागढ़, टिहरी, देहरादून व चमोली में जर्जर व क्षतिग्रस्त हो चुके 16 राजकीय प्राथमिक विद्यालयों के पुनर्निर्माण को रू0 568.85 लाख की धनराशि मंजूर कर दी है। जिसमें रूद्रप्रयाग जनपद के अंतर्गत राजकीय प्राथमिक विद्यालय सुराड़ी, छतोड़ा, कमसाल, जसोली, सल्या में विद्यालय भवन के पुनर्निर्माण के लिये 32-32 लाख स्वीकृत किये हैं जबकि राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय पौड़ीखाल में पुनर्निर्माण के लिये 40.30 लाख की धनराशि स्वीकृत की गई है।
इसी प्रकार पिथौरागढ़ जनपद में राजकीय प्राथमिक विद्यालय लास्पासांई में भवन पुनर्निमाण के लिये 39 लाख, गैला में कक्षा-कक्ष व प्राधानाध्यापक कक्ष के निर्माण को 20.47 लाख जबकि मल्ला वल्थी के लिये 20.30 लाख की धनराशि मंजूर की गई है। टिहरी जनपद में राजकीय प्राथमिक विद्यालय तिखोन के लिये 34.86, सौन्दकोटी मल्ली 37.36, मंजूरीडागर 39.94 तथा राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय क्यारी-जमुण्डा के पुनर्निर्माण के लिये 29.59 लाख की धनराशि स्वीकृत की गई है। इसी प्रकार जनपद चमोली में राजकीय प्राथमिक विद्यालय सुभाषनगर के भवन पुनर्निर्माण को 77.11 लाख जबकि देहरादून जिले में राजकीय प्राथमिक विद्यालय बद्रीपुर के भवन पुनर्निर्माण को 33.05 लाख तथा प्राथमिक विद्यालय बापूनगर जाखन के पुनर्निर्माण को 36.87 लाख की धनराशि स्वीकृत की गई है। इसके साथ इन विद्यालयों में निर्माण कार्य के लिये ग्रामीण निर्माण विभाग के साथ ही पेयजल निगम को कार्यदायी संस्था नामित किया गया है। डा. रावत ने बताया कि इन सभी प्राथमिक विद्यालयों में मरम्मत व पुनर्निर्माण कार्यों को शीघ्र पूर्ण करने के लिये विभागीय अधिकारियों को जरूरी निर्देश दे दिये गये हैं।
डीबीटी के माध्यम से 484 लाभार्थियों को भेजी ₹3.45 करोड़ से अधिक की धनराशि
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यसेवक सदन में मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना का औपचारिक शुभारंभ किया। इस अवसर पर योजना के पहले चरण में राज्य के छह जनपदों की 484 महिलाओं के बैंक खातों में ₹3.45 करोड़ से अधिक की धनराशि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से पहली किस्त के रूप में स्थानांतरित की गई।
योजना के तहत पात्र महिलाओं को स्वरोजगार के लिए अधिकतम ₹2 लाख तक की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। इसमें 75 प्रतिशत राशि राज्य सरकार द्वारा दी जाएगी, जबकि 25 प्रतिशत अंशदान लाभार्थी को स्वयं वहन करना होगा। सरकार का उद्देश्य इस योजना के माध्यम से एकल और निराश्रित महिलाओं को रोजगार से जोड़कर एक वर्ष के भीतर आत्मनिर्भर बनाना है।

सरकार की ओर से बताया गया कि इसी माह के अंत तक अथवा मार्च के पहले सप्ताह में योजना के दूसरे चरण के अंतर्गत शेष सात जनपदों की 540 महिलाओं को भी लगभग ₹4 करोड़ की धनराशि डीबीटी के जरिए प्रदान की जाएगी। इससे राज्यभर में बड़ी संख्या में महिलाओं को स्वरोजगार शुरू करने का अवसर मिलेगा।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग द्वारा जारी कैलेंडर का भी विमोचन किया। उन्होंने कहा कि यह योजना महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक सशक्त और दूरगामी कदम है, जिससे महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और उन्हें समाज में सम्मानजनक पहचान मिलेगी।
इस अवसर पर महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।
सोनप्रयाग। रुद्रप्रयाग जनपद के सोनप्रयाग क्षेत्र से एक दर्दनाक हादसा सामने आया है। रामपुर न्यालसू के जंगल क्षेत्र में घास काटने गई एक महिला की पहाड़ी से गिरकर मौत हो गई। घटना की सूचना मिलते ही एसडीआरएफ की टीम ने तत्काल रेस्क्यू अभियान शुरू किया।
एसडीआरएफ को यह सूचना कोतवाली सोनप्रयाग के माध्यम से प्राप्त हुई। इसके बाद एसडीआरएफ पोस्ट सोनप्रयाग से उप निरीक्षक संतोष परिहार के नेतृत्व में रेस्क्यू टीम घटनास्थल के लिए रवाना हुई। टीम सड़क मार्ग से रामपुर पहुंची और इसके बाद मंदाकिनी नदी को पैदल पार कर करीब दो किलोमीटर की खड़ी और दुर्गम पहाड़ी चढ़ाई करते हुए घटनास्थल तक पहुंच बनाई।
रेस्क्यू टीम ने मौके पर पाया कि घास काटते समय पहाड़ी से गिरी महिला गीता देवी (40), पत्नी गजपाल सिंह, निवासी रामपुर न्यालसू की घटनास्थल पर ही मौत हो चुकी थी। क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों के चलते शव को निकालना चुनौतीपूर्ण रहा।
एसडीआरएफ कर्मियों ने विशेष रेस्क्यू उपकरणों की मदद से अत्यंत कठिन और तीव्र ढाल वाले पहाड़ी इलाके से महिला के शव को करीब तीन किलोमीटर पैदल नीचे लाया। इसके बाद शव को आवश्यक कार्रवाई के लिए जिला पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया।
आज के डिजिटल युग में घंटों एक ही मुद्रा में बैठकर काम करना, शारीरिक गतिविधियों की कमी और गलत लाइफस्टाइल ने कमर दर्द को आम लेकिन गंभीर समस्या बना दिया है। पहले यह परेशानी बढ़ती उम्र से जुड़ी मानी जाती थी, लेकिन अब युवा वर्ग भी इसकी चपेट में तेजी से आ रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार गलत बैठने की आदत, अचानक भारी वजन उठाना और नियमित व्यायाम न करना रीढ़ की हड्डी पर अतिरिक्त दबाव डालता है, जिससे मांसपेशियों में सूजन और तेज दर्द शुरू हो जाता है।
चिकित्सकीय भाषा में इसे मस्कुलोस्केलेटल पेन कहा जाता है। यदि समय रहते इसका समाधान न किया जाए तो यह दर्द लंबे समय तक बना रह सकता है और व्यक्ति की रोजमर्रा की गतिविधियों को प्रभावित कर सकता है। हालांकि राहत की बात यह है कि शुरुआती अवस्था में कमर दर्द को घरेलू और प्राकृतिक तरीकों से काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। विशेषज्ञ भी मानते हैं कि सही देखभाल, हल्का व्यायाम और जीवनशैली में बदलाव से बिना दवाओं के भी दर्द से राहत मिल सकती है।
गर्म और ठंडी सिकाई से मिलेगी राहत
कमर दर्द में सिकाई को सबसे प्रभावी उपाय माना जाता है। यदि दर्द किसी ताजा चोट या खिंचाव के कारण हुआ है, तो पहले 48 से 72 घंटे तक ठंडी सिकाई करना फायदेमंद होता है। बर्फ की सिकाई सूजन को कम करने में मदद करती है। इसके बाद गर्म पानी की थैली या हीटिंग पैड का उपयोग मांसपेशियों की जकड़न को खोलता है। गर्म सिकाई से रक्त संचार बेहतर होता है, जिससे दर्द में कमी आती है।
पूरी तरह आराम नहीं, हल्की सक्रियता जरूरी
दर्द होने पर अक्सर लोग पूरी तरह बिस्तर पर आराम करने लगते हैं, लेकिन विशेषज्ञ इसे गलत मानते हैं। लंबे समय तक निष्क्रिय रहने से मांसपेशियां और कमजोर हो सकती हैं। इसके बजाय हल्की सैर, स्ट्रेचिंग या तैराकी को दिनचर्या में शामिल करना चाहिए। योग में भुजंगासन और मर्कटासन जैसे आसन रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाते हैं और दर्द को कम करने में सहायक होते हैं। हल्की शारीरिक गतिविधि से शरीर में एंडोर्फिन हार्मोन रिलीज होता है, जो प्राकृतिक रूप से दर्द को कम करता है।
मालिश से मांसपेशियों को मिले आराम
कमर दर्द में सही तेल से हल्की मालिश भी काफी लाभकारी मानी जाती है। सरसों के तेल में लहसुन की कलियां डालकर गर्म किया गया तेल पारंपरिक रूप से असरदार माना जाता है। तिल के तेल से की गई मालिश भी मांसपेशियों के तनाव को कम करती है। ध्यान रहे कि मालिश हमेशा हल्के हाथों से करें और रीढ़ की हड्डी पर सीधा दबाव न डालें।
पोस्चर सुधारना है सबसे जरूरी
विशेषज्ञों के अनुसार कमर दर्द से स्थायी राहत तभी संभव है, जब व्यक्ति अपनी बैठने और उठने की आदतों में सुधार करे। काम करते समय पीठ सीधी रखें, पैरों को जमीन पर टिकाकर बैठें और बहुत नरम गद्दे से बचें। भारी सामान उठाते समय कमर झुकाने के बजाय घुटनों को मोड़ें। छोटे-छोटे बदलाव भविष्य में गंभीर रीढ़ संबंधी समस्याओं से बचा सकते हैं।
नोट: यह लेख विभिन्न मेडिकल रिपोर्ट्स और विशेषज्ञों की सलाह के आधार पर तैयार किया गया है। किसी भी गंभीर या लंबे समय तक बने रहने वाले दर्द की स्थिति में डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें।
(साभार)
जनता दर्शन में उमड़ी भीड़, 195 फरियादी पहुंचे समाधान की आस में
भूमि विवाद और अवैध कब्जे के मामलों पर डीएम ने अधिकारियों को दिए त्वरित कार्रवाई के आदेश
देहरादून। जिलाधिकारी सविन बंसल की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट परिसर स्थित ऋषिपर्णा सभागार में आयोजित जनता दरबार में जिलेभर से आए फरियादियों की समस्याओं पर सुनवाई की गई। जनता दरबार के दौरान भूमि विवाद, अवैध कब्जा, सीमांकन, पारिवारिक विवाद, आर्थिक सहायता, रोजगार, शिक्षा, नगर निगम और एडीए से जुड़ी कुल 195 शिकायतें जिलाधिकारी के समक्ष रखी गईं।
जिलाधिकारी ने सभी शिकायतों को गंभीरता से सुनते हुए संबंधित विभागीय अधिकारियों को समयबद्ध, गुणवत्तापूर्ण और प्रभावी निस्तारण के सख्त निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि महिलाओं, बुजुर्गों और समाज के कमजोर वर्गों की समस्याओं के समाधान में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
कमजोर और पीड़ित वर्ग की समस्याओं पर विशेष फोकस
जनसुनवाई के दौरान समाज के कमजोर, बुजुर्ग और पीड़ित वर्ग से जुड़ी कई गंभीर समस्याएं सामने आईं। जिलाधिकारी ने प्रत्येक प्रकरण में संवेदनशीलता दिखाते हुए अधिकारियों को त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
न्यायालय में विचाराधीन भूमि पर यथास्थिति के आदेश
अम्बीवाला निवासी नेशनल पैरा ओलंपिक खिलाड़ी विजय चौधरी ने शिकायत की कि न्यायालय में विचाराधीन उनकी माता के नाम दर्ज भूमि पर पड़ोसी महिला द्वारा पेड़ काटे जा रहे हैं। इस पर जिलाधिकारी ने मौके पर ही एसडीएम को न्यायालय के अग्रिम आदेशों तक भूमि में यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए।
भूतपूर्व सैनिक को दिलाया जाएगा भूमि पर कब्जा
भूतपूर्व सैनिक राजेश कुमार ने 2016 में खरीदी गई भूमि पर अवैध कब्जे की शिकायत की। जांच में विपक्षी की कार्रवाई निराधार पाए जाने पर जिलाधिकारी ने एसडीएम विकासनगर को शिकायतकर्ता को तत्काल भूमि पर कब्जा दिलाने के निर्देश दिए।
बुजुर्ग महिला की शिकायत फास्ट ट्रैक पर
डोईवाला निवासी मीना क्षेत्री ने अपने पुत्र और पुत्रवधू से जान-माल के खतरे की शिकायत दर्ज कराई। मामला तहसील में लंबित पाए जाने पर जिलाधिकारी ने इसे जिला कार्यालय स्थानांतरित कर फास्ट ट्रैक सुनवाई कराने के निर्देश दिए।
चिकित्सा प्रतिपूर्ति भुगतान पर तलब की रिपोर्ट
जौलीग्रांट निवासी बुजुर्ग विधवा लक्ष्मी तोमर ने अपने दिवंगत पति की ₹1.37 लाख की चिकित्सा प्रतिपूर्ति लंबित होने की शिकायत की। जिलाधिकारी ने शिक्षा अधिकारी से तत्काल स्पष्ट आख्या प्रस्तुत करने को कहा।
अवैध निर्माण और ठगी के मामलों में सख्त निर्देश
एटनबाग के काश्तकारों द्वारा सिंचाई नहर पर अवैध निर्माण की शिकायत पर अधिशासी अभियंता को दो दिन में जांच कर समाधान के निर्देश दिए गए।
डालनवाला क्षेत्र में फर्जी जमीन दिखाकर ₹8 लाख की ठगी के मामले में क्षेत्राधिकारी पुलिस को कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
बुजुर्गों की शिकायतों पर तुरंत संज्ञान
ऋषिकेश निवासी बुजुर्ग छज्जू राम ने पुत्रवधू द्वारा मारपीट और घर से निकालने की शिकायत की। वहीं हरिपुर कलां निवासी 80 वर्षीय बुजुर्ग ने निजी भूमि और सरकारी सड़क पर अवैध कब्जे की शिकायत दर्ज कराई। दोनों मामलों में संबंधित अधिकारियों को त्वरित जांच और कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
सीवर लाइन और कानूनी सहायता के मामले
कारगी चौक कुंज विहार निवासी ममता नौटियाल की गली में सीवर लाइन न बिछाए जाने की शिकायत पर जिलाधिकारी ने संबंधित संस्था को तत्काल कार्यवाही के निर्देश दिए। डोईवाला निवासी दीपा की निःशुल्क कानूनी सहायता की मांग पर प्रकरण जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को भेजा गया।
अधिकारी रहे मौजूद
जनता दरबार में अपर जिलाधिकारी (वि.रा.) के.के. मिश्रा, एसडीएम अपूर्वा सिंह, कुमकुम जोशी, विनोद कुमार, उप नगर आयुक्त संतोष कुमार पांडेय, परियोजना निदेशक विक्रम सिंह, जिला विकास अधिकारी सुनील कुमार सहित विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे।
‘द केरल स्टोरी’ के बाद अब इसके सीक्वल ‘द केरल स्टोरी 2: गोज बियॉन्ड’ को लेकर दर्शकों की उत्सुकता लगातार बढ़ती जा रही है। फिल्म का टीजर पहले भाग की तुलना में कहीं ज्यादा धारदार, गंभीर और सघन नजर आता है। नेशनल अवॉर्ड से सम्मानित निर्देशक कामाख्या नारायण सिंह के निर्देशन में बनी यह फिल्म समाज से जुड़े संवेदनशील पहलुओं को एक बार फिर केंद्र में लाती है। इसी बीच फिल्म का नया भावनात्मक गीत ‘ओ माई री’ रिलीज किया गया है, जिसने दर्शकों पर गहरा असर डाला है।
मां की ममता को समर्पित ‘ओ माई री’
फिल्म का नया गीत ‘ओ माई री’ मां और बच्चे के अटूट रिश्ते को बेहद संवेदनशील अंदाज में पेश करता है। मशहूर गायिका श्रेया घोषाल की भावपूर्ण आवाज इस गाने को खास बनाती है। मन्नन शाह का सोलफुल संगीत और मनोज मुंतशिर के दिल छू लेने वाले बोल गीत की गहराई को और बढ़ा देते हैं। यह गीत मां के उस निस्वार्थ प्रेम, सुरक्षा और अपनत्व को दर्शाता है, जो हर संतान के जीवन की सबसे बड़ी ताकत होता है।
‘ओ माई री’ के साथ एक बार फिर निर्माता विपुल अमृतलाल शाह और गायिका श्रेया घोषाल की चर्चित जोड़ी ने दर्शकों को भावनात्मक रूप से जोड़ दिया है। इससे पहले भी दोनों की ओर से कई यादगार गीत सामने आ चुके हैं, जो आज भी श्रोताओं की पसंद बने हुए हैं। यही वजह है कि यह नया गीत रिलीज के साथ ही लोगों के दिलों में जगह बनाता नजर आ रहा है।
तीन युवतियों की कहानी, जो सुकून से साजिश तक पहुंचती है
फिल्म की कहानी तीन युवतियों के इर्द-गिर्द घूमती है, जिनके किरदार उल्का गुप्ता, ऐश्वर्या ओझा और अदिति भाटिया निभा रही हैं। उनकी जिंदगी उस वक्त बदल जाती है, जब वे कुछ ऐसे रिश्तों में बंधती हैं जो धीरे-धीरे उनके लिए मुश्किलें और सवाल खड़े करने लगते हैं। शुरुआत में भावनाओं से भरी यह कहानी आगे चलकर एक गंभीर और भयावह सच्चाई से पर्दा उठाती है, जिसमें पहचान और आस्था से जुड़े मुद्दे उभरकर सामने आते हैं।
इस दिन सिनेमाघरों में देगी दस्तक
‘द केरल स्टोरी 2 – गोज बियॉन्ड’ का निर्माण विपुल अमृतलाल शाह ने किया है, जबकि आशिन ए शाह ने इसे सनशाइन पिक्चर्स के बैनर तले को-प्रोड्यूस किया है। यह फिल्म 27 फरवरी 2026 को देशभर के सिनेमाघरों में रिलीज होगी।
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