लोक भवन में 27 फरवरी से 1 मार्च तक चलेगा ‘वसंतोत्सव’
देहरादून। देहरादून में बसंत ऋतु के स्वागत के लिए इस बार भी रंग-बिरंगा ‘वसंतोत्सव’ आयोजित होने जा रहा है। लोक भवन में 27 फरवरी से 1 मार्च तक चलने वाले इस उत्सव की थीम “फ्लोरल हीलिंग” रखी गई है, जिसका उद्देश्य फूलों के जरिए प्रकृति, स्वास्थ्य और मानसिक सुकून के महत्व को उजागर करना है। यह आयोजन न केवल पर्यटन को बढ़ावा देता है, बल्कि स्थानीय उत्पादों और किसानों को भी एक मजबूत मंच प्रदान करता है।
इस संबंध में गुरमीत सिंह ने बताया कि वसंतोत्सव अब देहरादून की सांस्कृतिक और आर्थिक पहचान बन चुका है। उन्होंने कहा कि यह उत्सव पुष्प पर्यटन के साथ-साथ स्थानीय पर्यटन को भी नई दिशा देता है। 27 फरवरी को सुबह 11 बजे उद्घाटन के बाद पहले दिन दोपहर 1 बजे से शाम 6 बजे तक और बाकी दिनों में सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक आम लोगों के लिए प्रवेश निशुल्क रहेगा।
उत्सव में इस बार कुल 15 प्रमुख प्रतियोगिताएं और 55 उपश्रेणियां शामिल होंगी, जिनमें कट फ्लावर, पॉटेड प्लांट और हैंगिंग गार्डन जैसी आकर्षक श्रेणियां होंगी। विजेताओं को कुल 165 पुरस्कार दिए जाएंगे। खास बात यह है कि दिव्यांग बच्चों के लिए पेंटिंग प्रतियोगिता भी आयोजित की जाएगी, वहीं पहली बार हाइड्रोपोनिक तकनीक पर आधारित प्रतियोगिता को भी शामिल किया गया है।
तकनीक का इस्तेमाल भी इस बार वसंतोत्सव की खास पहचान होगा। उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय और आईटीडीए मिलकर एक विशेष ऐप के जरिए आगंतुकों की संख्या और उनकी भावनात्मक प्रतिक्रिया (इमोशनल मैपिंग) का अध्ययन करेंगे। इसके अलावा एनआईईपीवीडी के छात्र रिदमिक योगा का लाइव प्रदर्शन भी करेंगे।
कार्यक्रम में फूड कोर्ट में मिलेट्स आधारित व्यंजन, आर्ट गैलरी, डाक टिकट प्रदर्शनी और कई सांस्कृतिक गतिविधियां भी आकर्षण का केंद्र रहेंगी। साथ ही उत्कृष्ट कार्य करने वाले तीन किसानों और तीन महिला किसानों को ‘गवर्नर अवॉर्ड’ से सम्मानित किया जाएगा।
कुल मिलाकर, वसंतोत्सव न केवल फूलों की खूबसूरती का उत्सव है, बल्कि यह प्रकृति, नवाचार, कृषि और संस्कृति के संगम का भी एक खास अवसर बनकर उभर रहा है।
बराक ओबामा के बयान पर बवाल, ट्रंप ने उठाए सवाल
वाशिंगटन। एलियंस और UFO को लेकर लंबे समय से चल रही बहस एक बार फिर सुर्खियों में है। डोनाल्ड ट्रंप ने अब बड़ा कदम उठाते हुए एलियंस और अनआइडेंटिफाइड एरियल फेनोमेना (UAP) से जुड़ी सरकारी फाइलों को सार्वजनिक करने की बात कही है। इस घोषणा के बाद दुनियाभर में जिज्ञासा और चर्चाएं तेज हो गई हैं, क्योंकि लोग लंबे समय से इन रहस्यमयी घटनाओं के सच को जानना चाहते हैं।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर किए गए अपने पोस्ट में ट्रंप ने कहा कि वह पेंटागन और अन्य एजेंसियों को निर्देश देंगे कि वे UFO और एलियन से जुड़ी फाइलों की पहचान कर उन्हें सार्वजनिक करने की प्रक्रिया शुरू करें। उन्होंने इसे “लोगों की दिलचस्पी से जुड़ा अहम मुद्दा” बताते हुए पारदर्शिता की जरूरत पर जोर दिया।
इस मुद्दे ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। ट्रंप ने पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा पर आरोप लगाया कि उन्होंने एलियंस के विषय में सार्वजनिक टिप्पणी कर संवेदनशील जानकारी को उजागर किया। हालांकि, ट्रंप ने अपने आरोपों के समर्थन में कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि ओबामा की बात खुफिया जानकारी पर आधारित थी, तो यह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मामला हो सकता है।
दरअसल, एक पॉडकास्ट बातचीत के दौरान ओबामा से एलियंस के अस्तित्व को लेकर सवाल किया गया था। इस पर उन्होंने कहा था कि ब्रह्मांड की विशालता को देखते हुए अन्य ग्रहों पर जीवन की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता, लेकिन उन्होंने खुद कभी एलियंस को नहीं देखा। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनके कार्यकाल में एलियंस के पृथ्वी से संपर्क का कोई ठोस प्रमाण सामने नहीं आया।
ट्रंप की इस घोषणा और ओबामा के बयानों के बाद UFO और एलियन से जुड़े रहस्य एक बार फिर वैश्विक चर्चा का विषय बन गए हैं। अब नजर इस बात पर है कि क्या वाकई इन फाइलों के सार्वजनिक होने से दशकों पुराने रहस्यों से पर्दा उठ पाएगा या यह मुद्दा सिर्फ अटकलों तक ही सीमित रहेगा।
ईसीएचएस पॉलीक्लिनिक देहरादून द्वारा उत्तराखंड में वरिष्ठ पूर्व सैनिकों एवं व्हाइट कार्ड धारकों के लिए पहली बार दवाओं की होम डिलीवरी सेवा शुरू
देहरादून। भूतपूर्व सैनिक अंशदायी स्वास्थ्य योजना (ईसीएचएस) के अंतर्गत संचालित ईसीएचएस पॉलीक्लिनिक (टाइप ‘A’) देहरादून की स्थापना वर्ष 2004 में रीजेनल सेंटर ईसीएचएस, लखनऊ के अधीन ओल्ड मिलिट्री हॉस्पिटल (एमएच) देहरादून परिसर में की गई थी। 19 नवंबर 2007 को पॉलीक्लिनिक को ईसीएचएस मुख्य भवन में स्थानांतरित किया गया तथा बाद में इसे रीजेनल सेंटर ईसीएचएस देहरादून के अधिकार क्षेत्र में शामिल किया गया।
ईसीएचएस पॉलीक्लिनिक देहरादून ने उत्तराखंड में एक नई पहल करते हुए 70 वर्ष से अधिक आयु के लाभार्थियों एवं व्हाइट कार्ड धारकों के लिए नॉन-अवेलेबिलिटी (NA) एवं एएलसी दवाओं की पहली बार अपने स्तर पर होम डिलीवरी सेवा प्रारंभ की है। यह राज्य में अपनी तरह की पहली सुविधा है।
इस पहल के अंतर्गत 11 फरवरी 2026 को गढ़ी कैंट स्थित मानद सूबेदार मेजर प्रेम चंद ठाकुर (91 वर्ष) तथा 13 फरवरी 2026 को रायपुर के ग्राम रंज्हावाला निवासी मानद कैप्टन सुरेंद्र सिंह छेत्री (76 वर्ष) को उनके निवास स्थान पर दवाओं की सफलतापूर्वक आपूर्ति की गई।
ईसीएचएस पॉलीक्लिनिक देहरादून, देहरादून, उत्तरकाशी, टिहरी, चमोली और पौड़ी जनपदों के ईसीएचएस लाभार्थियों को स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए उत्तरदायी है। इसके अतिरिक्त विकासनगर, रायवाला और क्लेमेंट टाउन स्थित पॉलीक्लिनिक से संदर्भित मामलों को मिलिट्री हॉस्पिटल (एमएच) देहरादून तथा सूचीबद्ध अस्पतालों में भेजने की व्यवस्था भी यहीं से की जाती है। व्यापक चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता के कारण हिमाचल प्रदेश एवं उत्तर प्रदेश जैसे पड़ोसी राज्यों से भी लाभार्थी उपचार हेतु यहां आते हैं।
वर्तमान में ईसीएचएस पॉलीक्लिनिक देहरादून पर कुल 1,49,052 लाभार्थी निर्भर हैं, जिनमें 51,912 प्राथमिक लाभार्थी एवं 97,140 आश्रित शामिल हैं। पॉलीक्लिनिक में प्रतिमाह औसतन 850 से 950 मरीज उपचार हेतु आते हैं।
यह पहल वरिष्ठ नागरिकों एवं प्राथमिकता श्रेणी के लाभार्थियों सहित पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों को सुलभ एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने की दिशा में ईसीएचएस पॉलीक्लिनिक देहरादून की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
मौसम में तेजी से हो रहे बदलाव के साथ वायरल संक्रमण के मामलों में अचानक बढ़ोतरी देखी जा रही है। दिन में बढ़ती गर्मी और सुबह-शाम की हल्की ठंड शरीर पर असर डाल रही है, जिससे लोग सर्दी, खांसी और बुखार जैसी समस्याओं की चपेट में आ रहे हैं। अस्पतालों और क्लीनिकों में गले में खराश, नाक बंद, छींक और हल्के बुखार की शिकायत लेकर पहुंचने वाले मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, तापमान में उतार-चढ़ाव शरीर के लिए एक तरह का दबाव (थर्मल स्ट्रेस) पैदा करता है। ऐसे में शरीर को नए मौसम के अनुसार खुद को ढालने में समय लगता है, जिससे इम्यून सिस्टम कमजोर पड़ सकता है। यही स्थिति वायरस को संक्रमण फैलाने का मौका देती है। इसी वजह से मौसम बदलते ही फ्लू, वायरल फीवर और सर्दी-खांसी के मामले तेजी से बढ़ने लगते हैं।
जनरल फिजिशियन डॉ अरविंद शर्मा के अनुसार, पिछले कुछ दिनों में ओपीडी में वायरल संक्रमण के मरीजों की संख्या में काफी इजाफा हुआ है। मरीजों में तेज बुखार, सिरदर्द, बदन दर्द, गले में खराश, खांसी और कमजोरी जैसे लक्षण सामान्य रूप से देखे जा रहे हैं। कई लोगों में स्वाद और गंध की क्षमता अस्थायी रूप से प्रभावित हो रही है, हालांकि ज्यादातर मामलों में यह कुछ दिनों में ठीक हो जाती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अचानक मौसम परिवर्तन वायरस के पनपने के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करता है। इसके अलावा भीड़-भाड़ वाले स्थानों पर जाना, संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आना और स्वच्छता में कमी संक्रमण के खतरे को बढ़ा देती है। बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और कमजोर प्रतिरक्षा वाले लोगों को इस समय विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
वायरल फीवर मुख्य रूप से इन्फ्लूएंजा जैसे वायरस के कारण फैलता है, जो खांसने-छींकने से निकलने वाली बूंदों या संक्रमित सतहों के संपर्क से तेजी से फैल सकता है। बदलते मौसम में यह संक्रमण ज्यादा सक्रिय हो जाता है।
बचाव के लिए डॉक्टर संतुलित आहार, पर्याप्त नींद और नियमित व्यायाम पर जोर देते हैं। हाथों की सफाई बनाए रखना, भीड़-भाड़ में मास्क पहनना और बीमार लोगों से दूरी रखना भी जरूरी है। अगर बुखार तीन दिन से ज्यादा बना रहे, सांस लेने में दिक्कत हो या अत्यधिक कमजोरी महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि थोड़ी सावधानी और मजबूत इम्युनिटी के जरिए इस मौसमी वायरल संक्रमण से काफी हद तक बचा जा सकता है।
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3 घंटे में हटाना होगा आपत्तिजनक कंटेंट
नई दिल्ली। देश में तेजी से बढ़ते आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल के बीच केंद्र सरकार ने डिजिटल कंटेंट को लेकर नए और कड़े नियम लागू कर दिए हैं। 10 फरवरी 2026 को जारी अधिसूचना के बाद ये नियम अब 20 फरवरी से प्रभावी हो गए हैं। भारत सरकार के इस फैसले के तहत अब एआई से तैयार किसी भी फोटो, वीडियो या ऑडियो पर स्पष्ट लेबल लगाना अनिवार्य होगा, ताकि लोगों को असली और नकली कंटेंट में फर्क समझने में आसानी हो।
इन नए नियमों के मुताबिक, एआई जनरेटेड कंटेंट पर “AI Generated” जैसे स्पष्ट निशान दिखाना जरूरी होगा। इसके अलावा हर फाइल के मेटाडेटा में उसकी पूरी जानकारी दर्ज रहेगी—जैसे कंटेंट कब बना, किस टूल से तैयार हुआ और पहली बार कहां अपलोड किया गया। इसे एक तरह का “डिजिटल डीएनए” माना जा रहा है, जिससे जांच एजेंसियों को जरूरत पड़ने पर कंटेंट के स्रोत तक पहुंचने में मदद मिलेगी।
सरकार ने यह भी साफ किया है कि एआई कंटेंट से जुड़े लेबल या तकनीकी जानकारी के साथ छेड़छाड़ करना अब गैर-कानूनी होगा। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को ऐसी तकनीक अपनानी होगी जिससे किसी भी तरह की छेड़छाड़ को रोका जा सके या संदिग्ध कंटेंट स्वतः हटाया जा सके। इसके साथ ही यूजर्स को कंटेंट अपलोड करते समय यह बताना भी जरूरी होगा कि वह एआई से तैयार किया गया है या नहीं।
नए नियमों में सोशल मीडिया कंपनियों की जिम्मेदारी भी बढ़ा दी गई है। अब किसी भी आपत्तिजनक या गैर-कानूनी कंटेंट की शिकायत मिलने पर प्लेटफॉर्म्स को सिर्फ 3 घंटे के भीतर उसे हटाना होगा, जबकि पहले इसके लिए 36 घंटे का समय दिया जाता था। इस बदलाव से डिजिटल स्पेस में जवाबदेही और सख्ती दोनों बढ़ेंगी।
एक दिन पहले आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी डिजिटल कंटेंट पर ‘ऑथेंटिसिटी लेबल’ की जरूरत पर जोर दिया था। उन्होंने कहा था कि जैसे खाद्य उत्पादों पर जानकारी दी जाती है, वैसे ही डिजिटल सामग्री पर भी उसकी प्रकृति स्पष्ट होनी चाहिए, ताकि लोग भ्रमित न हों।
सरकार ने खास तौर पर डीपफेक और आपत्तिजनक सामग्री पर सख्त रुख अपनाया है। अगर एआई का इस्तेमाल किसी व्यक्ति की पहचान की नकल करने, फर्जी वीडियो बनाने, बच्चों से जुड़ी आपत्तिजनक सामग्री फैलाने या धोखाधड़ी के लिए किया जाता है, तो इसे गंभीर अपराध माना जाएगा और कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय का कहना है कि इन नियमों का मकसद एक सुरक्षित, भरोसेमंद और जवाबदेह इंटरनेट व्यवस्था तैयार करना है, जिससे एआई के दुरुपयोग पर लगाम लगाई जा सके और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर पारदर्शिता बढ़े।
‘केजीएफ’ फेम स्टार यश की मोस्ट अवेटेड फिल्म टॉक्सिक: ए फेयरी टेल फॉर ग्रोन अप्स का टीजर रिलीज होते ही चर्चा में आ गया है। लंबे इंतजार के बाद सामने आए इस टीजर ने फिल्म की झलक जरूर दिखाई है, लेकिन कहानी को लेकर सस्पेंस बरकरार रखा गया है। टीजर में जबरदस्त एक्शन की भरमार है, जिससे साफ है कि फिल्म पूरी तरह हाई-ऑक्टेन स्टाइल में दर्शकों के सामने आने वाली है।
करीब 1 मिनट 55 सेकंड के इस टीजर में शुरुआत से अंत तक तेज रफ्तार एक्शन सीक्वेंस देखने को मिलते हैं। बर्फीले पहाड़ों से लेकर डांस बार तक, हर लोकेशन पर लड़ाई और मिशन की झलक दिखाई गई है। हालांकि, फिल्म की कहानी या किरदारों के बैकग्राउंड के बारे में ज्यादा जानकारी सामने नहीं आती। पूरे टीजर में मुख्य रूप से यश का ही दबदबा देखने को मिलता है, जबकि अन्य कलाकारों को फिलहाल छुपाकर रखा गया है।
टीजर के आखिरी हिस्से में एक दिलचस्प ट्विस्ट नजर आता है, जहां एक अलग अंदाज में एक किरदार फाइट की ट्रेनिंग करता दिखाई देता है। उसका चेहरा पूरी तरह साफ नहीं दिखाया गया, लेकिन कयास लगाए जा रहे हैं कि यह भी यश का ही दूसरा अवतार हो सकता है। इसी वजह से फिल्म में उनके डबल रोल की चर्चाएं तेज हो गई हैं।
फिल्म का निर्देशन गीतू मोहनदास ने किया है। इसमें कियारा आडवाणी, नयनतारा, हुमा कुरैशी, तारा सुतारिया और रुक्मणी वसंत जैसे कलाकार भी अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे। फिल्म 19 मार्च 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही है।
खास बात यह है कि बॉक्स ऑफिस पर इस फिल्म का मुकाबला धुरंधर 2 से होगा, जिसमें रणवीर सिंह लीड रोल में हैं। दोनों बड़ी फिल्मों के एक ही दिन रिलीज होने से सिनेमाघरों में जबरदस्त टक्कर देखने को मिल सकती है, जिसे लेकर दर्शकों के बीच अभी से उत्साह बना हुआ है।
(साभार)
ग्रामीणों को मिलेगा 125 दिन का रोजगार, योजना के लिए 1.51 लाख करोड़ का प्रावधान
खटीमा। कृषि एवं सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने खटीमा में आयोजित “विकसित भारत रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) – VB-G RAM-G” पर आधारित कार्यशाला में प्रतिभाग किया। इस दौरान उन्होंने उपस्थित किसानों और ग्रामीणों को योजना के उद्देश्यों, प्रावधानों और इससे मिलने वाले लाभों की विस्तृत जानकारी दी।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए मंत्री ने बताया कि चालू वित्तीय वर्ष में इस योजना के लिए राज्यों के अंशदान सहित लगभग 1.51 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके तहत ग्रामीण परिवारों को वर्ष में 125 दिनों का सुनिश्चित रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य के लिए केंद्र और राज्य के बीच 90:10 के वित्तीय सहयोग मॉडल से संसाधनों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित होगी, जिससे ग्रामीण विकास को नई गति मिलेगी।

मंत्री ने कहा कि यह मिशन नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में तैयार किया गया है, जो ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
इस अवसर पर गणेश जोशी ने पूर्व सैनिकों से मुलाकात की और स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा तैयार किए गए उत्पादों का भी अवलोकन किया। उन्होंने समूहों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रयास ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
सख्त निगरानी में होंगी 10वीं-12वीं की परीक्षाएं, नकलविहीन व्यवस्था पर जोर
देहरादून। उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद की हाईस्कूल (10वीं) व इंटरमीडिएट (12वीं) की परीक्षाएं आगामी 21 फरवरी से शुरू होगी। इस बार प्रदेश भर में 2 लाख से अधिक छात्र-छात्राएं बोर्ड परीक्षा में शामिल हो रहे हैं। बोर्ड परीक्षा को नकलविहीन, निष्पक्ष और पारदर्शी कराने के लिये विभागीय अधिकारियों को जरूरी निर्देश दे दिये गये हैं, साथ ही संवेदनशील व अति संवेदनशील परीक्षा केन्द्रों पर अतिरिक्त सतर्कता बरतने को भी कहा गया है।
विद्यालयी शिक्षा मंत्री डाॅ. धन सिंह रावत ने मीडिया को जारी बयान में बताया कि 21 फरवरी से शुरू होने वाली उत्तराखंड बोर्ड परीक्षाओं को लेकर सभी तैयारियां पूरी कर दी गई है। उन्होंने बताया कि 10वीं व 12वीं कक्षाओं की परिषदीय परीक्षाएं निर्धारित परीक्षा केन्द्रों पर शांतिपूर्ण, निष्पक्ष एवं नकलविहीन वातावरण में संपन्न कराने के लिए गाइडलाइन जारी कर दी गई है, जिसमें विभागीय अधिकारियों, जिला प्रशासन व पुलिस विभाग को आपसी समन्वय स्थापित करने के निर्देश भी दिये गये हैं। डॉ. रावत ने बताया कि बोर्ड परीक्षाओं के लिहाज से संवेदनशील एवं अति संवेदनशील परीक्षा केन्द्रों पर अतिरिक्त व्यवस्था करने, विशेष उड़नदस्तों की तैनाती तथा लगातार निगरानी करने के निर्देश भी अधिकारियों को दिये गये हैं।
परीक्षा केन्द्रों के आसपास धारा-144 के नियमों का पालन, अनाधिकृत व्यक्तियों के प्रवेश पर रोक तथा प्रश्नपत्रों की सुरक्षित आपूर्ति, संग्रहण व गोपनियता सुनिश्चित करने को केन्द्र व्यवस्थापकों, निरीक्षकों और संबंधित अधिकारियों को इन निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है।
डाॅ. रावत ने बताया कि बोर्ड परीक्षा में इस बार लगभग 2 लाख 15 हजार से अधिक परीक्षार्थी शामिल होंगे, इसके लिये प्रदेशभर में 1261 परीक्षा केन्द्र बनाये गये हैं, जिसमें 156 संवेदनशील जबकि 6 अति संवेदनशील केन्द्र हैं।
डॉ. रावत ने सभी छात्र-छात्राओं को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वे बिना किसी तनाव के आत्मविश्वास व सकारात्मक सोच के साथ परीक्षा दें। उन्होंने अभिभावकों और शिक्षकों से भी आग्रह किया कि वे बच्चों को प्रोत्साहित करें ताकि बच्चे परीक्षा हाॅल में अच्छे से परीक्षाएं दे सके।
जनगणना-2027 को त्रुटिरहित एवं सफल बनाने हेतु अधिकारियों को व्यापक प्रशिक्षण
डिजिटल माध्यम से होगी पहली पूर्णतः ऑनलाइन जनगणना, सीएमएमएस पोर्टल रहेगा मुख्य आधार
पौड़ी। आगामी जनगणना-2027 की तैयारियों के क्रम में जिला कार्यालय सभागार में तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला के शुभारम्भ अवसर पर जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया ने उपस्थित चार्ज अधिकारियों, चार्ज सहायकों एवं संबंधित कर्मचारियों को निर्देशित किया कि वे प्रशिक्षण को पूर्ण गंभीरता एवं उत्तरदायित्व के साथ ग्रहण करें।
उन्होंने कहा कि जनगणना एक अत्यंत महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्यक्रम है, जिसकी सूचनाएँ देश की विकास नीतियों, योजनाओं एवं संसाधनों के न्यायसंगत वितरण का आधार बनती हैं। उन्होंने कहा कि इसे शत-प्रतिशत शुद्धता एवं पारदर्शिता के साथ संपन्न करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
जिलाधिकारी ने जनगणना निदेशालय से आए अधिकारियों से अपेक्षा की कि प्रशिक्षण सत्र व्यवहारिक, संवादात्मक एवं रोचक हो, ताकि चार्ज अधिकारी जमीनी स्तर पर कार्य करते समय किसी प्रकार की कठिनाई का सामना न करें। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षित अधिकारी ही इस महत्त्वपूर्ण कार्यक्रम की सफलता की कुंजी हैं और उनके माध्यम से ही विश्वसनीय एवं प्रमाणिक आंकड़े संकलित किए जा सकेंगे।
जिलाधिकारी ने कहा कि जनगणना के दौरान आमजन का सहयोग अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने अधिकारियों से अपेक्षा की कि वे जनजागरूकता बढ़ाने के लिए विशेष प्रयास करें, ताकि प्रत्येक नागरिक सही एवं पूर्ण जानकारी उपलब्ध कराए और यह राष्ट्रीय दायित्व सफलतापूर्वक संपन्न हो सके।
गौरतलब हो कि भारत में पूर्व जनगणना वर्ष 2011 में संपन्न हुई थी। अब आगामी जनगणना-2027 का प्रथम चरण (मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना) वर्ष 2026 में तथा द्वितीय चरण (जनसंख्या गणना) वर्ष 2027 में किया जाना प्रस्तावित है। राज्य में प्रथम चरण का कार्य 25 अप्रैल 2026 से 24 मई 2026 तक संचालित होगा। इसके अतिरिक्त 10 अप्रैल 2026 से 24 अप्रैल 2026 तक स्व-गणना की सुविधा उपलब्ध रहेगी, जिसके अंतर्गत परिवार पहली बार वेब पोर्टल के माध्यम से स्वयं अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे। इसके उपरांत प्रगणक द्वारा उक्त विवरण का सत्यापन किया जाएगा।
द्वितीय चरण के अंतर्गत जनसंख्या गणना का कार्य 09 फरवरी 2027 से 28 फरवरी 2027 तक संचालित होगा। उत्तराखंड राज्य के हिमाच्छादित क्षेत्रों हेतु विशेष प्रावधान के अंतर्गत यह कार्य 11 सितम्बर 2026 से 30 सितम्बर 2026 तक प्रस्तावित है।
इस बार की जनगणना कई दृष्टियों से ऐतिहासिक एवं विशेष होगी, क्योंकि यह प्रथम अवसर होगा जब संपूर्ण प्रक्रिया शत-प्रतिशत डिजिटल माध्यम से संपादित की जाएगी। प्रगणक एवं पर्यवेक्षक अपने स्वयं के मोबाइल फोन के माध्यम से मोबाइल एप्लिकेशन आधारित प्रणाली से आंकड़ों का संकलन करेंगे। आरंभ से अंत तक संपूर्ण संचालन, पर्यवेक्षण एवं प्रबंधन हेतु जनगणना प्रबंधन एवं निगरानी प्रणाली (सीएमएमएस पोर्टल) का उपयोग किया जाएगा, डिजिटल प्रणाली लागू होने से आंकड़ों की गुणवत्ता, सटीकता एवं त्वरित संकलन में उल्लेखनीय सुधार अपेक्षित है।
अपर जिलाधिकारी अनिल गर्ब्याल ने कहा कि जनगणना कार्य केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि संवैधानिक दायित्व है। उन्होंने चार्ज अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने क्षेत्र में सूक्ष्म स्तर पर तैयारी सुनिश्चित करें, सीमाओं का सही निर्धारण करें तथा किसी भी प्रकार की पुनरावृत्ति या छूट न हो। उन्होंने कहा कि चार्ज अधिकारी अपने अधीनस्थ प्रगणकों एवं पर्यवेक्षकों के साथ नियमित समन्वय बनाए रखें तथा फील्ड मॉनिटरिंग को प्राथमिकता दें।
उपनिदेशक जनगणना निदेशालय प्रवीण कुमार ने बताया कि प्रशासनिक संरचना के अंतर्गत जनपद के प्रत्येक तहसील एवं नगर को एक विशिष्ट जनगणना चार्ज के रूप में चिन्हित किया गया है। प्रत्येक चार्ज में एक चार्ज अधिकारी नामित किया गया है , जो जियो-टैगिंग, हाउस लिस्टिंग ब्लॉकों का निर्माण, सीमाओं का निर्धारण एवं सत्यापन, फील्ड कार्य की निगरानी तथा वेब पोर्टल एवं सीएमएमएस के माध्यम से समग्र प्रबंधन का दायित्व निभाएगा। चार्ज अधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि कार्य समयबद्ध, पूर्ण कवरेज के साथ एवं त्रुटिरहित ढंग से संपन्न हो प्रशिक्षण व्यवस्था भी पूर्णतः डिजिटल प्रणाली के अनुरूप होगी। सर्वप्रथम क्षेत्रीय प्रशिक्षकों को प्रशिक्षित किया जा रहा है, इसके उपरांत वे प्रगणकों एवं पर्यवेक्षकों को प्रशिक्षण प्रदान करेंगे। सभी प्रशिक्षण संबंधी गतिविधियाँ सीएमएमएस पोर्टल के माध्यम से संचालित की जाएंगी।
प्रशिक्षण सत्र में जनगणना की प्रक्रिया, प्रपत्रों की भराई, क्षेत्र निर्धारण, वेब मैपिंग ऐप एवं क्रिएटर ऐप के माध्यम से जियो-टैगिंग, निगरानी व्यवस्था एवं रिपोर्टिंग प्रणाली पर विस्तृत जानकारी प्रदान की गई।
कार्यशाला में तहसीलदार दीवान सिंह राणा, जिला सूचना विज्ञान अधिकारी हेमंत काला, मास्टर ट्रेनर शिवकुमार एवं कमल सहित सभी नामित चार्ज अधिकारी उपस्थित रहे।
“जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” कार्यक्रम से आम जन को मिली राहत- मुख्यमंत्री
उत्तरकाशी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को विकास खंड परिसर चिन्यालीसौड़ में आयोजित जन-जन की सरकार,जन -जन के द्वार कार्यक्रम में विभागीय स्टालों का निरीक्षण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री ने ग्रामीणों की समस्या एवं शिकायतें सुनते हुए मौके पर ही अधिकारियों की उपस्थिति में अधिकांश समस्याओं का निस्तारण किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा संचालित “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” कार्यक्रम से आम जन को राहत मिली है तथा प्रशासनिक व्यवस्था और अधिक सुगम और पारदर्शी हुई है। इस अभियान के तहत अब तक 600 से अधिक शिविर आयोजित किए जा चुके हैं। इन शिविरों में पाँच लाख से अधिक लोगों ने भाग लिया, जबकि 40 हजार से ज्यादा लोगों को विभिन्न योजनाओं का सीधा लाभ प्रदान किया गया है।
उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा है कि दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को छोटी-छोटी समस्याओं के समाधान के लिए जिला मुख्यालय तक न जाना पड़े। इसी उद्देश्य से अभियान चलाकर गांव-गांव में शिविर लगाए जा रहे हैं, जहां मौके पर ही समस्याओं का निराकरण किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पहल से आमजन को राहत मिली है और प्रशासनिक व्यवस्था अधिक सुलभ एवं पारदर्शी बनी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में हैली सेवा के विस्तार के लिए सरकार ने अहम निर्णय लिए है। उन्होंने कहा कि चिन्यालीसौड़ एवं गौचर हवाई पट्टी से हैली सेवा शुरू होगी। दोनों हवाई पट्टी सेना के माध्यम से संचालित करने की योजना है। उन्होंने कहा कि अप्रैल से चारधाम यात्रा शुरू हो जाएगी। सरकार ने यात्रा की तैयारी पहले से ही शुरू कर दी है। ताकि यात्री, श्रद्धालु यहां से अच्छा अनुभव लेकर जाएं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार यात्रा शुरू कराने में समन्वयक के रूप में है जबकि असली यात्रा शुरू कराने में स्थानीय हितधारक, तीर्थ पुरोहित, होटल,टैक्सी, मैक्सी स्थानीय लोग है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज पूरी दुनिया में सनातन का उद्घोष हो रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत दुनिया का सिरमौर बनेगा प्रधानमंत्री ने जो विकसित भारत का संकल्प लिया है उसमें उत्तराखंड भी अपना महत्वपूर्ण रूप से योगदान देगा। मुख्यमंत्री ने महिला सशक्तिकरण का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य सरकार ने तय किया है कि हमारी बहनों द्वारा उत्पादित उत्पादों की देश ही नही बल्कि दुनिया में पहचान मिल सके जिसके लिए निरंतर काम किया जा रहा है। कहा कि महिलाओं द्वारा जो भी उत्पाद बनाये जा रहे है उसकी देश और दुनिया में मांग बढ़ी है। इस दिशा में राज्य सरकार ने अब तक दो लाख से अधिक लखपति दीदियों को सशक्त किया है। इस दौरान मुख्यमंत्री ने स्थानीय लोगों की मांग पर सीएचसी चिन्यालीसौड़ एवं महाविद्यालय का उच्चीकरण को सीएम घोषणा में सम्मिलित करने का आश्वसन दिया।
मुख्य सचिव आनन्द वर्द्धन ने इस अवसर पर अपने सम्बोधन में कहा कि मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में जन-जन की सरकार,जन जन के द्वार अभियान सफलतापूर्वक चलाया गया है। जिसमें अब तक 5 लाख से अधिक नागरिकों ने प्रतिभाग किया तथा 40 हजार से अधिक नागरिकों के विभिन्न प्रकार के प्रमाण पत्र जारी किए गए। ग्रामीणों की छोटी-छोटी समस्याओं के निस्तारण के लिए संयुक्त टीमें गठित कर समस्याओं का मौके पर समाधान किया जा रहा है। जिनका निस्तारण नही किया जा सका उन्हें ऑनलाइन कर नियमित रूप से फॉलोअप करते हुए उनका निस्तारण किया जाएगा।
इस अवसर पर मुख्य सचिव आनन्द वर्द्धन, यमुनोत्री विधायक संजय डोभाल, दर्जाधारी राज्य मंत्री रामसुंदर नौटियाल, प्रताप पंवार, गीताराम गौड़, गढ़वाल समन्वयक किशोर भट्ट, प्रदेश मीडिया प्रभारी भाजपा मनवीर चौहान, प्रदेश उपाध्यक्ष भाजपा डॉ. स्वराज विद्वान, ब्लाक प्रमुख रणबीर सिंह महंत, नगर पालिका अध्यक्ष मनोज कोहली, अन्य जनप्रतिनिधिगण एवं जिलाधिकारी प्रशान्त आर्य, पुलिस अधीक्षक कमलेश उपाध्याय, सहित अन्य जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे।
