निर्देशक आदित्य धर की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘धुरंधर: द रिवेंज’ (धुरंधर 2) को लेकर दर्शकों में उत्साह बढ़ता जा रहा है। हाल ही में फिल्म का नया पोस्टर जारी किया गया है, जिसने रिलीज से पहले ही फैंस के बीच हलचल मचा दी है। पोस्टर में अभिनेता रणवीर सिंह के दो अलग-अलग लुक दिखाई दे रहे हैं, जिन्हें देखकर दर्शकों में फिल्म की कहानी को लेकर उत्सुकता और बढ़ गई है।
पोस्टर में दिखे रणवीर सिंह के दो दमदार किरदार
फिल्म के नए पोस्टर में रणवीर सिंह दो अलग-अलग किरदारों—जसकिरत सिंह रंगी और हमजा अली मजारी—के रूप में नजर आ रहे हैं। दोनों ही किरदारों में उनका अंदाज काफी अलग और प्रभावशाली दिख रहा है। पोस्टर के साथ एक रहस्यमयी संदेश भी साझा किया गया है, जिससे फिल्म को लेकर दर्शकों की दिलचस्पी और बढ़ गई है।
19 मार्च 2026 को होगी रिलीज
एक्शन और रोमांच से भरपूर यह फिल्म 19 मार्च 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। फिल्म को हिंदी के साथ-साथ तेलुगु, तमिल, कन्नड़ और मलयालम भाषाओं में भी दुनियाभर के सिनेमाघरों में प्रदर्शित किया जाएगा।
ट्रेलर में दिखा दमदार एक्शन
फिल्म का ट्रेलर पहले ही जारी किया जा चुका है, जिसमें पहले भाग की तुलना में ज्यादा बड़ा और रोमांचक एक्शन देखने को मिल रहा है। कहानी में रणवीर सिंह एक भारतीय गुप्त जासूस की भूमिका निभा रहे हैं, जो दुश्मन देशों के खतरनाक अपराधियों और राजनीतिक गिरोहों के बीच घुसकर भारत के खिलाफ रची जा रही साजिशों को नाकाम करने की कोशिश करता है। बताया जा रहा है कि फिल्म की कहानी वास्तविक घटनाओं से प्रेरित है और दूसरे भाग में पहले से ज्यादा ड्रामा और एक्शन देखने को मिलेगा।
कई दिग्गज कलाकार आएंगे नजर
फिल्म में रणवीर सिंह के अलावा संजय दत्त, अर्जुन रामपाल, आर. माधवन, सारा अर्जुन, राकेश बेदी, गौरव गेरा और दानिश पंडोर जैसे कलाकार भी अहम भूमिकाओं में दिखाई देंगे। दमदार स्टारकास्ट और एक्शन से भरपूर कहानी के कारण फिल्म को लेकर दर्शकों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। अब सभी को 19 मार्च 2026 को इसके सिनेमाघरों में रिलीज होने का इंतजार है।
(साभार)
गैरसैंण। उत्तराखंड विधानसभा के भराड़ीसैंण स्थित भवन में चल रहे बजट सत्र के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वित्तीय वर्ष 2026–27 का बजट सदन में पेश किया। करीब 1,11,703 करोड़ रुपये के इस बजट को प्रदेश के समग्र और संतुलित विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या ने बजट का स्वागत करते हुए कहा कि सरकार ने महिलाओं, बच्चों और समाज के कमजोर वर्गों के कल्याण को प्राथमिकता दी है। उन्होंने कहा कि बजट में ‘सक्षम आंगनबाड़ी एवं पोषण 2.0’ के लिए 598 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, वहीं मुख्यमंत्री महालक्ष्मी किट योजना, आंचल अमृत योजना और वात्सल्य योजना जैसी योजनाओं के लिए भी बजट में व्यवस्था की गई है।
रेखा आर्या ने कहा कि सामाजिक सुरक्षा पेंशन के लिए 1,327 करोड़ रुपये का प्रावधान सरकार की संवेदनशील सोच को दर्शाता है। इसके अलावा ग्रामीण विकास, सड़क निर्माण, स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार, तकनीकी विकास और युवाओं के स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए भी महत्वपूर्ण बजट प्रावधान किए गए हैं।
देहरादून। प्रदेश के कृषि एवं ग्राम्य विकास मंत्री गणेश जोशी ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा गैरसैंण विधानसभा में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए लगभग ₹1,11,703.21 करोड़ का ऐतिहासिक और समावेशी बजट प्रस्तुत करने पर मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि यह बजट गरीबों, युवाओं, किसानों (अन्नदाताओं) और नारीशक्ति के उत्थान के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है और प्रदेश के सतत विकास की दिशा में एक मजबूत कदम साबित होगा।
कृषि मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि यह बजट केवल एक वित्तीय दस्तावेज नहीं, बल्कि प्रदेश के प्रत्येक नागरिक की आशाओं और आकांक्षाओं का प्रतिबिंब है। उन्होंने कहा कि पिछले चार वर्षों में केंद्र और राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का जो सकारात्मक प्रभाव धरातल पर दिखाई दे रहा है, यह बजट उन प्रयासों को और अधिक विस्तार देने का कार्य करेगा। साथ ही उन्होंने कहा कि यह बजट ‘विकसित भारत 2047’ के संकल्प को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
उन्होंने कहा कि बजट में विकसित भारत रोजगार गारंटी एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) के तहत पारदर्शी और समयबद्ध भुगतान, परिसंपत्तियों के निर्माण तथा आजीविका से जुड़े कार्यों के माध्यम से स्थायी आय बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया गया है। इस योजना के अंतर्गत VB-GRAM G के लिए लगभग ₹705.25 करोड़ का बजट प्रावधान किया गया है। इसके अतिरिक्त ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत पूंजीगत मद में लगभग ₹1642.20 करोड़ का प्रावधान किया गया है।
कृषि मंत्री जोशी ने कहा कि कृषि और उद्यान क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए बजट में कई महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं। महक क्रांति योजना के लिए ₹10 करोड़, फसलों की सुरक्षा के लिए घेरबाड़ हेतु ₹20 करोड़, मिशन एप्पल के लिए ₹42 करोड़, उच्च मूल्य वाले फलों जैसे कीवी और ड्रेगन फ्रूट के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए ₹30.70 करोड़, राज्य में चाय विकास योजना के लिए ₹25.93 करोड़, सगंध पौधा केंद्र को अनुदान एवं सगंध पौधों के क्लस्टर विकास के लिए ₹24.75 करोड़, उद्यान बीमा योजना के लिए ₹40 करोड़ तथा मुख्यमंत्री राज्य कृषि विकास योजना के लिए ₹20 करोड़ का बजट प्रावधान किया गया है।
कृषि मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि यह बजट कृषि, ग्रामीण विकास और रोजगार के नए अवसरों को बढ़ावा देने वाला बजट है, जिससे प्रदेश के किसानों, युवाओं और ग्रामीण क्षेत्रों के समग्र विकास को नई दिशा मिलेगी।
स्वीकृत मानचित्र के अनुरूप नहीं हो रहा था निर्माण, शिकायत के बाद टीम ने मौके पर पहुंचकर रोका काम
देहरादून। मसूरी–देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने अवैध निर्माण के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत ऋषिकेश में एक बहुमंजिला भवन को सील कर दिया। मनीराम मार्ग स्थित गली नंबर-10 में बिना स्वीकृत मानचित्र के किए जा रहे निर्माण पर यह कार्रवाई की गई। प्राधिकरण को निर्माण की शिकायत मिलने के बाद अधिकारियों की टीम ने मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया और नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर तत्काल भवन को सील कर दिया।
जानकारी के अनुसार सरला अग्रवाल और रेनू गोयल द्वारा मनीराम मार्ग क्षेत्र में बहुमंजिला भवन का निर्माण कराया जा रहा था। प्राधिकरण को इस निर्माण के संबंध में शिकायत प्राप्त हुई थी, जिसके बाद संबंधित अधिकारियों को मौके पर जांच के लिए भेजा गया। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि भवन निर्माण न तो स्वीकृत मानचित्र के अनुरूप था और न ही इसके लिए प्राधिकरण से आवश्यक अनुमति ली गई थी। नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होने के बाद एमडीडीए की टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए भवन को सील कर दिया और निर्माण कार्य पूरी तरह से रोक दिया गया। सीलिंग की कार्रवाई के दौरान भवन परिसर को बंद कर दिया गया और किसी भी प्रकार की गतिविधि पर रोक लगा दी गई। प्राधिकरण अधिकारियों का कहना है कि शहर में बिना अनुमति के हो रहे निर्माण न केवल शहरी नियोजन को प्रभावित करते हैं, बल्कि इससे यातायात, सुरक्षा और आधारभूत ढांचे पर भी अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इसलिए ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की जा रही है।
प्राधिकरण क्षेत्र में अवैध निर्माणों की लगातार निगरानी की जा रही है। इसके लिए अलग-अलग टीमों का गठन किया गया है, जो समय-समय पर विभिन्न क्षेत्रों का निरीक्षण कर रही हैं। जहां भी बिना स्वीकृति या मानचित्र से अलग निर्माण की सूचना मिलती है, वहां तत्काल कार्रवाई की जाती है। प्राधिकरण का मानना है कि शहर के संतुलित और नियोजित विकास के लिए निर्माण नियमों का पालन करना बेहद जरूरी है। इस कार्रवाई के दौरान सहायक अभियंता अभिषेक भारद्वाज, अवर अभियंता पूनम सकलानी, अवर अभियंता अमित भारद्वाज, सुपरवाइजर तथा पुलिस बल मौके पर मौजूद रहा। टीम ने पूरे क्षेत्र का निरीक्षण करने के बाद निर्माण स्थल को सील किया और संबंधित दस्तावेजी कार्रवाई भी पूरी की। प्राधिकरण का कहना है कि अवैध निर्माण के खिलाफ यह अभियान आगे भी जारी रहेगा।
उपाध्यक्ष एमडीडीए बंशीधर तिवारी का बयान
एमडीडीए के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा कि प्राधिकरण क्षेत्र में अवैध निर्माण किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि शहर के सुव्यवस्थित विकास और सुरक्षित शहरी ढांचे के लिए निर्माण नियमों का पालन अनिवार्य है। बिना स्वीकृत मानचित्र के बहुमंजिला भवनों का निर्माण गंभीर उल्लंघन है और प्राधिकरण इस पर लगातार निगरानी बनाए हुए है। ऋषिकेश में की गई सीलिंग कार्रवाई इसी दिशा में उठाया गया कदम है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नियमों के विपरीत निर्माण करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और आवश्यकता पड़ने पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई भी की जा सकती है।
सचिव एमडीडीए मोहन सिंह बर्निया का बयान
एमडीडीए के सचिव मोहन सिंह बर्निया ने कहा कि प्राधिकरण क्षेत्र में अवैध निर्माणों के खिलाफ नियमित अभियान चलाया जा रहा है। ऋषिकेश के मनीराम मार्ग में बिना अनुमति बहुमंजिला भवन का निर्माण किया जा रहा था, जिस पर नियमानुसार सीलिंग की कार्रवाई की गई है। उन्होंने कहा कि निरीक्षण टीमें लगातार क्षेत्र का भ्रमण कर रही हैं और जहां भी नियमों का उल्लंघन सामने आता है, वहां तुरंत कार्रवाई की जाती है। उन्होंने लोगों से अपील की कि किसी भी निर्माण से पहले प्राधिकरण से आवश्यक अनुमति अवश्य लें।
देहरादून। प्रदेश के कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने विगत दिनों दैनिक समाचार पत्रों में प्रकाशित समाचारों का गंभीरता से संज्ञान लिया है, जिनमें कृषि विभाग के अंतर्गत निर्धारित कानूनों का पालन न किए जाने तथा इससे किसानों, आमजन, पर्यावरण और जनस्वास्थ्य को खतरा उत्पन्न होने की बात कही गई है।
कृषि मंत्री गणेश जोशी ने प्रकाशित समाचार के अनुसार विभाग द्वारा नियमों के विरुद्ध अपात्र व्यक्तियों एवं फर्मों को पेस्ट कंट्रोल के लाइसेंस जारी करने तथा कुछ दुकानों पर प्रतिबंधित कीटनाशकों की अवैध बिक्री किए जाने के प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए उन्होंने विभागीय सचिव को पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच करने के निर्देश दिए हैं।
कृषि मंत्री गणेश जोशी ने स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकार की अनियमितता या नियमों के उल्लंघन को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर शीघ्र रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए और यदि किसी भी स्तर पर दोषी पाए जाते हैं तो उनके विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों के हितों की सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण तथा जनस्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है और इस दिशा में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
यशपाल आर्य ने कहा, अपने लंबे जीवन में उन्होंने इतना कमजोर और वास्तविकता से कटा हुआ अभिभाषण पहले कभी नहीं सुना
देहरादून। उत्तराखंड विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर प्रतिक्रिया देते हुए नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने इसे निराशाजनक, दिशाहीन, संकल्पविहीन और विकास विरोधी बताया। उन्होंने कहा कि अपने लंबे सार्वजनिक और संसदीय जीवन में उन्होंने इतना कमजोर और वास्तविकता से कटा हुआ अभिभाषण पहले कभी नहीं सुना।
यशपाल आर्य ने कहा कि यह अभिभाषण “सफेद कागज पर झूठ की काली स्याही से लिखी गई इबारत” जैसा है। इसमें प्रदेश की वास्तविक समस्याओं, जनता की पीड़ा और राज्य के सामने खड़ी चुनौतियों का कहीं भी उल्लेख नहीं दिखाई देता।
उन्होंने कहा कि राज्यपाल का अभिभाषण सरकार की प्राथमिकताओं, नीतियों और लक्ष्यों का दस्तावेज होता है और इसमें पिछले वर्ष की उपलब्धियों का भी उल्लेख होता है। लेकिन इस बार सरकार ने यह बताने की आवश्यकता भी नहीं समझी कि पिछले चार वर्षों में निर्धारित लक्ष्यों में से कितने पूरे हुए और कितने अधूरे रह गए।
आर्य ने कहा कि वर्ष 2022 में भाजपा सरकार बनने के बाद यह राज्यपाल का पाँचवाँ अभिभाषण है, लेकिन इतने लंबे समय के बाद भी सरकार के पास बताने के लिए ठोस उपलब्धियाँ नहीं हैं। सरकार हर वर्ष अपने लक्ष्य बदल देती है या अपने ही घोषित लक्ष्यों से पीछे हट जाती है। यही कारण है कि प्रदेश को उपलब्धियों के नाम पर कुछ भी ठोस नहीं मिल पा रहा है।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सरकार इस वर्ष भी अपनी प्रमुख उपलब्धि के रूप में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लागू करने का दावा कर रही है। सरकार के अनुसार इस कानून के अंतर्गत 5 लाख 27 हजार आवेदन प्राप्त हुए हैं, लेकिन आर्य का आरोप है कि इनमें से अधिकांश आवेदन सरकारी कर्मचारियों के हैं, जिन्हें प्रशासनिक दबाव या वेतन रोकने के भय से पुराने विवाहों का पुनः पंजीकरण कराने के लिए बाध्य किया गया है।
उन्होंने कहा कि यूसीसी में लिव-इन रिलेशन से जुड़े प्रावधानों के दुष्प्रभाव भी सामने आने लगे हैं। लिव-इन संबंधों में रह रही युवतियों की हत्या की घटनाएँ तथा बच्चों के जन्म के बाद महिलाओं को परित्यक्त छोड़ देने जैसी घटनाएँ यह दर्शाती हैं कि यह कानून राज्य की सामाजिक और सांस्कृतिक परिस्थितियों के अनुरूप नहीं है। इससे जनसांख्यिकीय परिवर्तन की आशंकाएँ भी पैदा हो रही हैं।
आर्य ने अभिभाषण में किए गए “लखपति दीदी” संबंधी दावे पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार का दावा है कि प्रदेश में ढाई लाख महिलाएँ लखपति बन चुकी हैं। यदि यह दावा सही है तो सरकार इन महिलाओं की सूची सार्वजनिक करे। उनका आरोप है कि महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के बजाय उन्हें कर्ज के बोझ तले दबा दिया गया है।
उन्होंने पर्यटन और चारधाम यात्रा व्यवस्था को लेकर भी सरकार को घेरा। उनका कहना है कि सरकार शीतकालीन यात्रा को बड़ी उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत कर रही है, जबकि पिछले दो यात्रा सीजन में अव्यवस्था और कुप्रबंधन के कारण होटल व्यवसायी, टैक्सी चालक, घोड़ा-खच्चर संचालक और छोटे व्यापारी प्रभावित हुए हैं।
आर्य ने कहा कि बागवानी और कृषि योजनाओं में भी किसानों को नुकसान उठाना पड़ा है। सब्सिडी और प्रोत्साहन के बड़े-बड़े दावे किए गए, लेकिन कई किसानों को अपनी लागत तक नहीं मिल पाई, जिससे वे आर्थिक संकट में फंसते जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार चार वर्षों की वास्तविक उपलब्धियाँ बताने के बजाय वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र और विकसित प्रदेश बनाने जैसे दूरगामी नारों के माध्यम से जनता को भ्रमित करने का प्रयास कर रही है। वर्तमान समस्याओं का समाधान किए बिना दूर के सपने दिखाना केवल जनता को भ्रमित करना है।
आर्य ने कहा कि इस अभिभाषण को “विजन डॉक्यूमेंट” के बजाय “कन्फ्यूजन डॉक्यूमेंट” कहा जाए तो यह अतिशयोक्ति नहीं होगी। उनका कहना है कि उत्तराखंड की जनता अब सरकार के दावों और वास्तविकता के बीच का अंतर समझ चुकी है और समय आने पर इसका जवाब देगी।
राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने देहरादून में सुनी 25 फरियादें; घरेलू हिंसा से लेकर लैंड फ्रॉड के मामलों पर कड़ा रुख
महिला कल्याणकारी योजनाओं की ग्राउंड लेवल पर करें मॉनिटरिंग, अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश
देहरादून। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष पर महिला सशक्तिकरण के संकल्प को धरातल पर उतारने हेतु राष्ट्रीय महिला आयोग के अभियान ‘महिला आयोग आपके द्वार’ के अंतर्गत आज उत्तराखंड में इस विशेष मुहिम की औपचारिक शुरुआत की गई। इस राष्ट्रव्यापी अभियान के तहत देहरादून जनपद के जिलाधिकारी कार्यालय परिसर स्थित कोषागार सभागार में एक महत्वपूर्ण जनसुनवाई का आयोजन किया गया। राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल की अध्यक्षता और सदस्य विमला नैथानी की अध्यक्षता में आयोजित इस सत्र में कुल 25 फरियादियों ने अपनी समस्याओं को आयोग के सम्मुख रखा।
जनसुनवाई के दौरान घरेलू हिंसा, आर्थिक सहायता, संपत्ति विवाद और लैंड फ्रॉड जैसे कई गंभीर मामले सामने आए। अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने कई संवेदनशील मामलों का मौके पर ही निस्तारण सुनिश्चित किया, जबकि कुछ जटिल प्रकरणों को आगामी कार्रवाई हेतु प्रस्तावित करते हुए संबंधित अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए।
इस जनसुनवाई के दौरान घरेलू हिंसा के दो मामलों में महिला आयोग के अध्यक्ष द्वारा गंभीरता दिखाते हुए उन्हें सुलझाने का प्रयास किया गया तथा दोनों परिवारों को समझाते हुए कुशलता के साथ रहने की सलाह दी गई तथा एक माह बाद उन्हें पुनः आयोग के सम्मुख उपस्थित होने के निर्देश दिए है।
वही अपर सारथी विहार देहरादून से एक सीनियर सिटीजन द्वारा आयोग की अध्यक्ष से उनकी 93 वर्षीय माता की पेंशन निकालने के लिए बैंक कर्मचारियों को घर न आने की शिकायत की गई जबकि पूर्व मे कर्मचारी घर आया करते थे। अध्यक्ष कुसुम कंडवाल द्वारा बैंक मेनेजर से वार्ता कर वृद्धा की समस्या के निस्तारण के आदेश दिए गए।
वही एक मामले में पीड़िता द्वारा बताया गया कि उनकी शादी को 7 साल हो गए हैं पति द्वारा उनकी तबीयत खराब होने पर तुरंत उनके मायके छोड़ दिया जाता है देखभाल नहीं की जाती है नहीं अच्छा खान-पान दिया जाता है, इस पर आयोग की अध्यक्ष ने नाराजगी जताते हुए पीड़िता के पति को ₹5000/- प्रति माह व्यक्तिगत खर्च के लिए देने के निर्देश दिए है।
जनसुनवाई के दौरान एक पीड़िता ने फरियाद लगाते हुए बताया कि उसके एक मुकदमे में उसकी आरोप पत्र की प्रति उपलब्ध नहीं कराई गई जबकि वह पिछले डेढ़ साल से उसके लिए परेशान घूम रही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने एसएचओ नेहरू कॉलोनी को तत्काल निर्देश दिए कि पीड़िता को उक्त मुकदमे के आरोप पत्र की प्रति अविलंब उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि न्याय में अनावश्यक विलंब कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
एक पीड़िता द्वारा पर फरियाद लगाते हुए बताया गया कि उनकी बेटी पिछले कई दिनों से लापता है जिसकी गुमशुद की दर्ज कराई गई है परंतु अभी तक कोई जानकारी नहीं मिल पाई है जिसके लिए अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने सीओ रीना राठौर को तत्काल प्रभाव से कार्रवाई करते हुए उनकी बेटी को जल्द से जल्द ढूंढ कर सकुशल वापस लाने के निर्देश दिए हैं।
इस जनसुनवाई का एक विशेष पहलू यह रहा कि महिलाओं के साथ-साथ पत्नी से प्रताड़ित कुछ पुरुषों ने भी आयोग के सामने उपस्थित होकर अपनी समस्याओं के समाधान के लिए मदद की गुहार लगाई। अध्यक्ष ने इन मामलों को भी पूरी संवेदनशीलता से सुना और पारिवारिक सामंजस्य एवं उचित परामर्श के निर्देश दिए।
अध्यक्ष कुसुम कंडवाल का कहना है कि जो महिला दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं या पीड़िताएं अपनी पहुंच आयोग के मुख्यालय देहरादून तक नहीं बना सकती उनके लिए महिला आयोग द्वारा महिला आयोग आपके द्वार अभियान के तहत जनसुनवाई का आयोजन किया जा रहा है, ताकि समाज के अंतिम छोर पर बैठी पीड़िता को भी समयबद्ध और सुलभ न्याय प्राप्त हो सके। उन्होंने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि उत्तराखंड सरकार द्वारा महिलाओं के लिए विभिन्न योजनाएं चलाई जा रही हैं, ग्राउंड स्तर पर उनकी मॉनिटरिंग की जाए ताकि पात्र महिलाओं को उनका वास्तविक लाभ मिल सके।
अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने आगामी जनसुनवाई कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए बताया कि वे स्वयं प्रदेश के 5 जनपदों में उपस्थित रहकर जनसुनवाई की कमान संभालेंगी, 10 मार्च को जनपद पौड़ी गढ़वाल, 11 मार्च को जनपद हरिद्वार, 12 मार्च को जनपद चंपावत, 13 मार्च को जनपद उधम सिंह नगर सहित प्रदेश के अन्य जनपदों में आयोग की उपाध्यक्ष एवं सदस्य उपस्थित रहकर जनसुनवाई करते हुए शिकायतों का समाधान सुनिश्चित करेंगे।
अध्यक्ष ने जोर दिया कि प्रशासन और पुलिस ग्रामीण क्षेत्रों की शिकायतों पर पूरी संवेदनशीलता के साथ कार्य करें।
जनसुनवाई के दौरान आयोग की सदस्य विमला नैथानी, अपार जिलाधिकारी केके मिश्रा, आयोग की सदस्य सचिव उर्वशी चौहान, उपजिलाधिकारी न्यायिक, एसडीएम सदर देहरादून, डोईवाला, जिला उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से अधिवक्ता स्वाति शर्मा एवं प्रियंका बिष्ट, पुलिस विभाग से पुलिस क्षेत्रअधिकारी रीना राठौर, महिला एवं बाल कल्याण विभाग से प्रोफेशन अधिकारी मीना बिष्ट एवं शिखा कंडवाल, जिला कार्यक्रम अधिकारी जितेंद्र कुमार, विधि अधिकारी दयाराम सिंह, सहित शिक्षा विभाग, स्वास्थ्य विभाग, पर्यटन विभाग, लोक निर्माण विभाग अन्य विभागों के अधिकारीगण उपस्थित रहे।
पिछले साल के मुकाबले बजट में 10.41% की बढ़ोतरी
गैरसैंण। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को वर्ष 2026–27 का बजट प्रस्तुत किया। लगभग ₹1,11,703.21 करोड़ के इस बजट में जहां विकास की गति को बढ़ाने पर जोर है, वहीं मजबूत राजकोषीय प्रबंधन की झलक भी स्पष्ट दिखाई देती है। वर्ष 2025-26 के सापेक्ष 10.41 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। सीएम धामी ने भोजनावकाश के बाद पेश किए बजट को उत्तराखंड में वित्तीय अनुशासन और विकास के संतुलन को मजबूत करने वाला बजट बताया।
देखें बजट की मुख्य बातें
1.11 लाख करोड़ का अब तक का सबसे बड़ा बजट
गांव-गरीब, युवा और महिला सशक्तिकरण पर जोर
पर्यटन, कृषि, तकनीक और आधारभूत ढांचे में बड़े निवेश का ऐलान
सामाजिक सुरक्षा और स्वास्थ्य योजनाओं को भी मजबूती
उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण के भराड़ीसैंण स्थित विधानसभा भवन में सोमवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 1,11,703.21 करोड़ रुपये का बजट पेश किया। यह राज्य के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा बजट है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 10 प्रतिशत अधिक है। सरकार ने इस बजट के जरिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, युवाओं को रोजगार से जोडऩे, महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने और आधारभूत ढांचे के विकास पर खास फोकस किया है।
विधानसभा के बजट सत्र की शुरुआत राज्यपाल के अभिभाषण से हुई, जिसमें सरकार की उपलब्धियों और आगामी योजनाओं का खाका रखा गया। इसके बाद मुख्यमंत्री ने सदन में बजट पेश करते हुए कहा कि सरकार का लक्ष्य राज्य को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना और विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है। सरकार ने बजट में कृषि, पर्यटन, उद्योग और तकनीकी विकास को राज्य की अर्थव्यवस्था के प्रमुख इंजन के रूप में आगे बढ़ाने की रणनीति बनाई है। इसके साथ ही स्वास्थ्य, शिक्षा, महिला-बाल विकास और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के लिए भी बड़े प्रावधान किए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के दूरस्थ और पर्वतीय क्षेत्रों में विकास को गति देने के लिए सड़क, स्वास्थ्य और डिजिटल कनेक्टिविटी को मजबूत किया जाएगा। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत सड़कों के निर्माण और सुधार के लिए 1,050 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है, जबकि गड्ढा मुक्त सड़क अभियान के लिए 400 करोड़ रुपये अलग से रखे गए हैं। सरकार ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए ग्रामीण विकास विभाग में 1,642.20 करोड़ रुपये और पंचायती राज संस्थाओं के सशक्तिकरण के लिए 1,491 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इसके अलावा सीमांत क्षेत्रों के विकास के लिए विशेष योजनाओं को भी बजट में प्राथमिकता दी गई है।
स्वास्थ्य क्षेत्र में अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना के लिए 600 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिससे राज्य के लोगों को कैशलेस इलाज की सुविधा जारी रहेगी। वहीं वृद्ध, विधवा और दिव्यांगों के लिए सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं के तहत 1,327.73 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। महिला और बाल कल्याण के लिए भी कई महत्वपूर्ण योजनाओं को बजट में शामिल किया है। सक्षम आंगनबाड़ी एवं पोषण 2.0 के लिए 598.33 करोड़ रुपये, प्रधानमंत्री पोषण मिशन के लिए 149.45 करोड़ रुपये और मुख्यमंत्री महालक्ष्मी किट, आंचल अमृत और वात्सल्य योजना के लिए भी अलग-अलग बजट प्रावधान किए गए हैं।
सरकार ने तकनीकी विकास पर भी जोर देते हुए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मिशन के लिए 25 करोड़ रुपये और राज्य के डेटा सेंटर को मजबूत बनाने के लिए 105 करोड़ रुपये का बजट रखा है। इसके अलावा आईटी विकास एजेंसी को 25 करोड़ रुपये का अनुदान देने की घोषणा की गई है। उद्योग और स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना में 60 करोड़ रुपये और एमएसएमई सेक्टर के लिए 75 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। वहीं किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से मिशन एप्पल के लिए 42 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है।
बजट विकास और वित्तीय अनुशासन के संतुलन का उदाहरण -सीएम
राज्य सरकार ने बजट में वित्तीय जिम्मेदारी और पारदर्शिता बनाए रखते हुए FRBM अधिनियम के प्रावधानों का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित किया है। बजट के अनुसार राज्य में राजस्व आधिक्य (Revenue Surplus) की स्थिति बनी हुई है, जो दर्शाता है कि सरकार की आय उसके राजस्व व्यय से अधिक है। यह स्थिति किसी भी राज्य की मजबूत वित्तीय सेहत का संकेत मानी जाती है। बजट में 2536.33 करोड़ का राजस्व सरप्लस दिखाया गया है।
राजकोषीय अनुशासन के तहत राज्य का राजकोषीय घाटा जीएसडीपी के 3 प्रतिशत की सीमा के भीतर रखा गया है। इसी प्रकार लोक ऋण भी जीएसडीपी के 32.50 प्रतिशत की निर्धारित सीमा के अंदर बनाए रखा गया है। यह दर्शाता है कि सरकार विकास कार्यों पर खर्च करते हुए भी ऋण प्रबंधन और वित्तीय संतुलन पर पूरा ध्यान दे रही है।
राजस्व आधिक्य, सीमित राजकोषीय घाटा और नियंत्रित सार्वजनिक ऋण जैसे संकेतक बताते हैं कि राज्य सरकार ने वित्तीय प्रबंधन में सावधानी और दूरदर्शिता अपनाई है। इससे भविष्य में विकास परियोजनाओं को स्थिर वित्तीय आधार मिलने की संभावना और मजबूत होगी।
कुल मिलाकर यह बजट विकास और वित्तीय अनुशासन के संतुलन का उदाहरण प्रस्तुत करता है, जो राज्य की अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक मजबूती देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
मलबे में दबे लोगों की तलाश जारी
जकार्ता। इंडोनेशिया में भारी बारिश के बाद एक बड़े लैंडफिल में कचरे का विशाल ढेर अचानक ढह गया, जिससे बड़ा हादसा हो गया। इस दुर्घटना में अब तक पांच लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका जताई जा रही है। राहत और बचाव दल मौके पर लगातार अभियान चला रहे हैं।
यह हादसा इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता के पास बेकासी शहर में स्थित बंटारगेबांग वेस्ट ट्रीटमेंट फैसिलिटी में हुआ। लगातार हो रही तेज बारिश के कारण कचरे का विशाल ढेर अचानक खिसककर गिर गया और आसपास मौजूद कई लोग इसकी चपेट में आ गए।
घटना के बाद प्रशासन ने बड़े स्तर पर राहत और बचाव अभियान शुरू कर दिया है। मलबे में दबे लोगों को निकालने के लिए 300 से अधिक बचावकर्मियों को तैनात किया गया है। बचाव दल भारी मशीनों और खोजी कुत्तों की मदद से मलबा हटाकर लोगों की तलाश कर रहे हैं।
जकार्ता सर्च एंड रेस्क्यू ऑफिस की प्रमुख देसियाना कार्तिका बहारी के मुताबिक कचरे के ढेर अभी भी अस्थिर स्थिति में हैं, इसलिए बचावकर्मी बेहद सावधानी के साथ काम कर रहे हैं ताकि किसी और हादसे से बचा जा सके।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, इस हादसे में जान गंवाने वालों में दो कचरा ट्रक चालक और दो खाद्य स्टॉल संचालक शामिल हैं, जो उस समय लैंडफिल के पास मौजूद थे। वहीं चार लोग सुरक्षित बाहर निकलने में सफल रहे। पुलिस, सेना और स्वयंसेवी संगठनों की टीमें अभी भी तीन लापता लोगों की तलाश में जुटी हुई हैं। अधिकारियों का कहना है कि मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
बंटारगेबांग लैंडफिल जकार्ता का सबसे बड़ा कचरा निस्तारण स्थल है, जहां शहर का अधिकांश घरेलू कचरा डाला जाता है। लंबे समय से इसकी क्षमता से अधिक कचरा जमा होने को लेकर चेतावनी दी जाती रही है। इससे पहले भी ऐसे हादसों की घटनाएं सामने आ चुकी हैं।
सरकार ने इस समस्या से निपटने के लिए पिछले साल के अंत में इस लैंडफिल को साफ करने की योजना बनाई थी, जिसके तहत कचरे को ऊर्जा में बदलने की परियोजनाओं को बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि खुले में कचरा जमा करने की पुरानी व्यवस्था को धीरे-धीरे खत्म किया जा सके।
कान हमारे शरीर का बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण अंग है, जिसकी सही देखभाल करना जरूरी है। अक्सर लोग कानों की सफाई के लिए कॉटन वाले ईयरबड्स का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसे सुरक्षित नहीं मानते। डॉक्टरों के मुताबिक, गलत तरीके से कान साफ करना कई बार संक्रमण, चोट और सुनने की समस्या तक पैदा कर सकता है। इसलिए कानों की सफाई को लेकर सही जानकारी होना बेहद जरूरी है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि हमारे कान खुद को साफ रखने की प्राकृतिक क्षमता रखते हैं। कान के अंदर बनने वाला ईयरवैक्स (मैला) कई लोगों को गंदगी लगता है, जबकि वास्तव में यह कानों के लिए एक सुरक्षात्मक परत का काम करता है। यह धूल, बैक्टीरिया और अन्य हानिकारक तत्वों को कान के अंदर जाने से रोकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, कई लोग कान साफ करने के लिए कॉटन प्लग या ईयरबड्स का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन यह तरीका सुरक्षित नहीं है। इससे अक्सर वैक्स बाहर निकलने की बजाय और अंदर की ओर चला जाता है, जिससे कान में ब्लॉकेज बनने की आशंका बढ़ जाती है। इस स्थिति में कान बंद होने जैसा महसूस होना, सुनाई कम देना और असहजता जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
डॉक्टरों का कहना है कि कान के अंदर की त्वचा बहुत पतली और संवेदनशील होती है। ऐसे में ईयरबड्स या किसी नुकीली वस्तु का इस्तेमाल करने से कान के अंदर खरोंच या चोट लग सकती है। यदि कान में चोट लग जाए तो वहां बैक्टीरिया पनप सकते हैं, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि कान केवल सुनने के लिए ही नहीं, बल्कि शरीर के संतुलन को बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाते हैं। इसलिए कान में किसी भी तरह की चोट या समस्या होने पर चक्कर आना या संतुलन बिगड़ने जैसी परेशानी भी हो सकती है।
इसके अलावा, अगर कॉटन प्लग गलती से ज्यादा अंदर चला जाए तो यह कान के पर्दे को नुकसान पहुंचा सकता है। कई मामलों में ईयरबड्स के गलत इस्तेमाल से कान के पर्दे को नुकसान पहुंचने तक की स्थिति बन जाती है। बार-बार ईयरबड्स इस्तेमाल करने से कान में सूखापन, खुजली और ज्यादा वैक्स बनने की समस्या भी हो सकती है।
डॉक्टरों की सलाह है कि कानों की सफाई के लिए ईयरबड्स का नियमित इस्तेमाल करने से बचना चाहिए। यदि कान में ज्यादा वैक्स जमा हो जाए, दर्द हो या सुनने में परेशानी महसूस हो तो खुद से उपचार करने के बजाय किसी ईएनटी विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर होता है।
नोट: यह लेख स्वास्थ्य विशेषज्ञों और मेडिकल रिपोर्ट्स में दी गई जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है।
(साभार)
