इन जिलों में बदल सकता है मौसम
देहरादून। उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में एक बार फिर मौसम करवट ले सकता है। मौसम विज्ञान केंद्र के पूर्वानुमान के मुताबिक मंगलवार को प्रदेश के कुछ जिलों में हल्की बारिश व बर्फबारी के आसार हैं।
मंगलवार को उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग, बागेश्वर और पिथौरागढ़ जिलों में हल्की वर्षा और ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी की संभावना जताई गई है। विशेष रूप से 3000 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फ गिरने के आसार हैं।
मैदानी इलाकों में रहेगा साफ मौसम
मौसम विभाग के अनुसार राज्य के मैदानी और निचले क्षेत्रों में मौसम शुष्क बना रहेगा। 18 फरवरी को भी पहाड़ी जिलों में इसी तरह का मौसम रहने की संभावना है, जबकि 19 से 21 फरवरी तक पूरे प्रदेश में मौसम साफ और शुष्क रहने का अनुमान है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि इस बदलाव का तापमान पर बहुत अधिक असर पड़ने की संभावना नहीं है।
धूप से बढ़ा तापमान
रविवार को मैदान से लेकर पहाड़ तक खिली तेज धूप ने गर्मी का अहसास करा दिया। राजधानी देहरादून में दिन का अधिकतम तापमान सामान्य से करीब चार डिग्री अधिक बढ़कर 26.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं, न्यूनतम तापमान भी सामान्य से दो डिग्री ऊपर 11.2 डिग्री सेल्सियस रहा। प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी तापमान में इसी तरह की बढ़ोतरी देखी गई।
आज के स्मार्टफोन और डिजिटल गैजेट्स के दौर में इयरफोन और हेडफोन हमारी रोजमर्रा की जरूरत बन चुके हैं। कामकाज, पढ़ाई, मनोरंजन या सफर—हर जगह इनका इस्तेमाल आम हो गया है। लेकिन जिस सुविधा ने जीवन को आसान बनाया है, वही आदत अगर लापरवाही से अपनाई जाए तो सुनने की क्षमता के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।
तेज आवाज से बढ़ता बहरापन का खतरा
चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक तेज आवाज में इयरफोन या हेडफोन लगाने से कान के अंदर मौजूद बेहद संवेदनशील कोशिकाएं क्षतिग्रस्त हो सकती हैं। खासतौर पर 85 डेसिबल से अधिक की आवाज को लगातार सुनना सुनने की शक्ति को धीरे-धीरे कमजोर करता है। इस स्थिति को ‘नॉइज-इंड्यूस्ड हियरिंग लॉस’ कहा जाता है, जो अक्सर स्थायी होती है।
धीरे-धीरे उभरते हैं लक्षण
बहरापन किसी एक दिन में नहीं होता। शुरुआत में कान में भारीपन, सीटी जैसी आवाज, या बातचीत के दौरान शब्द साफ न सुनाई देना जैसे संकेत दिखते हैं। अगर इन चेतावनियों को नजरअंदाज किया गया, तो कम उम्र में ही गंभीर श्रवण समस्या का सामना करना पड़ सकता है।
इयरफोन से कानों को कैसे पहुंचता है नुकसान
इयरबड्स सीधे कान की नली में फिट होते हैं, जिससे ध्वनि और कान के पर्दे के बीच कोई दूरी नहीं रहती। तेज आवाज का सीधा दबाव अंदर मौजूद तरल और नसों को प्रभावित करता है। लगातार ऐसा होने पर सुनने वाली नसें कमजोर हो जाती हैं और सामान्य आवाजें भी अस्पष्ट लगने लगती हैं।
कानों की सुरक्षा का आसान उपाय: 60/60 नियम
विशेषज्ञों की सलाह है कि हेडफोन या इयरफोन का इस्तेमाल करते समय ‘60/60 नियम’ अपनाना चाहिए। यानी, वॉल्यूम को अधिकतम 60 प्रतिशत से ऊपर न रखें और लगातार 60 मिनट से ज्यादा इस्तेमाल न करें। हर घंटे के बाद 10–15 मिनट का ब्रेक देना कानों के लिए जरूरी है, ताकि वे खुद को रिकवर कर सकें।
इयरफोन या हेडफोन—कौन सा बेहतर?
स्वास्थ्य के लिहाज से ओवर-द-इयर हेडफोन को इयरबड्स से थोड़ा सुरक्षित माना जाता है, क्योंकि वे कान के पर्दे से कुछ दूरी पर रहते हैं और बाहरी शोर को भी कम करते हैं। इससे तेज वॉल्यूम की जरूरत कम पड़ती है। हालांकि, गलत इस्तेमाल दोनों ही मामलों में नुकसानदायक हो सकता है।
इन संकेतों को न करें नजरअंदाज
अगर कान में दर्द, झनझनाहट, बार-बार आवाज समझने में परेशानी या बातचीत के दौरान शब्द गुम हो जाने जैसी दिक्कत महसूस हो, तो तुरंत इयरफोन का इस्तेमाल कम करें और विशेषज्ञ से सलाह लें। याद रखें, सुनने की शक्ति एक बार चली जाए तो उसे वापस पाना बेहद मुश्किल होता है।
निष्कर्ष:
डिजिटल दुनिया में रहते हुए तकनीक से दूरी बनाना मुश्किल है, लेकिन थोड़ी सावधानी और सही आदतें अपनाकर हम अपनी सुनने की अनमोल शक्ति को लंबे समय तक सुरक्षित रख सकते हैं।
(यह लेख सामान्य मेडिकल जानकारियों और विशेषज्ञ सलाह पर आधारित है।)
(साभार)
दमकल विभाग की टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद पाया आग पर काबू
ऋषिकेश। शहर के चंद्रेश्वर नगर क्षेत्र में सुबह उस वक्त हड़कंप मच गया, जब एक बर्तन की दुकान में रखे गैस सिलेंडर में अचानक विस्फोट हो गया। तेज धमाके के साथ दुकान से आग की ऊंची लपटें और घना धुआं उठने लगा, जिससे आसपास के रिहायशी इलाके में अफरा-तफरी मच गई।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सुबह के समय हुए जोरदार धमाके से आसपास के लोग घरों से बाहर निकल आए। स्थानीय लोगों ने तुरंत दुकानदार को सूचना दी और अपने स्तर पर आग बुझाने का प्रयास शुरू किया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तुरंत दमकल विभाग को मौके पर बुलाया गया।
सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची और कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। हालांकि, तब तक दुकान में रखा बर्तनों का पूरा सामान जलकर राख हो चुका था, जिससे दुकानदार को भारी नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है।
गनीमत यह रही कि घटना के समय दुकान में कोई मौजूद नहीं था, जिससे किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। बड़ा हादसा टलने पर स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली।
कर्नाटक में सियासी घमासान, मंत्री प्रियांक खरगे का आरएसएस पर तीखा हमला
बेंगलुरु। कर्नाटक की राजनीति में सियासी तापमान एक बार फिर चढ़ गया है। मंत्री प्रियांक खरगे ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर तीखा हमला बोलते हुए उसे भारतीय जनता पार्टी की “वैचारिक धुरी” बताया। उन्होंने संघ की फंडिंग, कानूनी हैसियत और संवैधानिक जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए।
“भाजपा छाया है, असली ताकत आरएसएस”
खरगे ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी का अस्तित्व संघ के समर्थन के बिना कमजोर पड़ जाता है। उनके मुताबिक, यदि आरएसएस का वैचारिक और सांगठनिक सहयोग न हो, तो भाजपा की स्थिति और भी कमजोर हो सकती है। उन्होंने कहा कि देश की राजनीति में केवल “छाया” से नहीं, बल्कि असली शक्ति केंद्र से सवाल पूछने की जरूरत है।
फंडिंग और जवाबदेही पर सवाल
मंत्री ने संघ की आय के स्रोतों पर सवाल उठाते हुए कहा कि “गुरु दक्षिणा” के नाम पर होने वाले चंदे की पारदर्शिता स्पष्ट होनी चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि जब आम नागरिकों, सामाजिक संगठनों और संस्थाओं को अपने वित्तीय लेन-देन का हिसाब देना पड़ता है, तो संघ इससे अलग कैसे हो सकता है। खरगे ने कहा कि बिना पंजीकरण और स्पष्ट कानूनी ढांचे के कोई भी संस्था जवाबदेही से बच नहीं सकती।
पंजीकरण और कानून का मुद्दा
खरगे ने आरएसएस की कानूनी स्थिति पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि संगठन कानून और संविधान के दायरे में आता है या नहीं। उन्होंने संघ प्रमुख मोहन भागवत के एक पुराने बयान का हवाला देते हुए कहा कि यदि आरएसएस खुद को केवल व्यक्तियों का समूह मानता है, तो फिर क्लबों और एसोसिएशनों की तरह उसका पंजीकरण और कर दायित्व क्यों नहीं है।
धार्मिक विमर्श पर टिप्पणी
धार्मिक और सामाजिक मुद्दों पर बोलते हुए खरगे ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण की मूल भावना और आज की व्याख्याओं में अंतर दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि धर्म के नाम पर हिंसा या विभाजन को बढ़ावा देना किसी भी रूप में उचित नहीं है।
भारत ने सुपर-आठ में मारी एंट्री, ग्रुप ए में शीर्ष पर कब्जा
नई दिल्ली। टी20 विश्व कप में भारत ने चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान पर करारी जीत दर्ज करते हुए अपने दबदबे का ऐलान किया। आईसीसी पुरुष टी20 विश्व कप के इस अहम मुकाबले में भारतीय क्रिकेट टीम ने पाकिस्तान क्रिकेट टीम को 61 रनों से हराकर सुपर-आठ में जगह पक्की कर ली। भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 175 रन बनाए, जिसके जवाब में पाकिस्तान की पूरी टीम 114 रन पर सिमट गई।
ईशान किशन की धमाकेदार पारी
भारत की जीत की नींव सलामी बल्लेबाज ईशान किशन ने रखी। उन्होंने स्पिन के अनुकूल विकेट पर आक्रामक अंदाज में 40 गेंदों में 77 रन ठोके, जिसमें 10 चौके और तीन छक्के शामिल रहे। तिलक वर्मा के साथ दूसरे विकेट के लिए 87 रनों की साझेदारी ने भारत को मजबूत स्थिति में पहुंचाया। कप्तान सूर्यकुमार यादव और शिवम दुबे ने भी उपयोगी योगदान दिया।
गेंदबाजों का दबदबा, पाकिस्तान ढेर
176 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए पाकिस्तान की शुरुआत बेहद खराब रही। शुरुआती ओवरों में ही तीन विकेट गिरने से टीम दबाव में आ गई। भारतीय गेंदबाजों ने लगातार आक्रामक लाइन-लेंथ बनाए रखी और पाकिस्तान को वापसी का कोई मौका नहीं दिया। उस्मान खान के 44 रन के अलावा कोई भी बल्लेबाज बड़ी पारी नहीं खेल सका।
अंक तालिका में उलटफेर
इस भारी हार के बाद पाकिस्तान ग्रुप ए की अंक तालिका में अमेरिका से नीचे खिसक गया है। सुपर-आठ में पहुंचने की उम्मीदें बनाए रखने के लिए उसे अब नामीबिया के खिलाफ हर हाल में जीत दर्ज करनी होगी। दूसरी ओर, भारत ने लगातार तीन जीत के साथ छह अंकों पर पहुंचकर ग्रुप में शीर्ष स्थान मजबूत कर लिया है।
रिकॉर्डतोड़ जीत
यह जीत टी20 क्रिकेट में पाकिस्तान के खिलाफ रनों के अंतर से भारत की सबसे बड़ी जीत साबित हुई। इससे पहले 2012 में बना रिकॉर्ड भी इस मुकाबले के साथ पीछे छूट गया। भारत अब ग्रुप चरण का आखिरी मैच नीदरलैंड के खिलाफ खेलेगा, जबकि टीम का आत्मविश्वास चरम पर है।
1857 की क्रांति के महान नायक तात्या टोपे की जयंती पर मुख्यमंत्री धामी ने किया याद
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 1857 की क्रांति के महान नायक तात्या टोपे की जयंती पर उन्हें कोटिशः नमन किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि अमर शहीद तात्या टोपे का जीवन अदम्य साहस, असाधारण रणनीतिक कौशल और राष्ट्रभक्ति की अनुपम मिसाल है।
मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि सीमित संसाधनों के बावजूद तात्या टोपे ने अंग्रेजी हुकूमत को कड़ी चुनौती दी और अपनी सैन्य सूझबूझ से स्वतंत्रता संग्राम को नई दिशा दी। उन्होंने कहा कि तात्या टोपे का त्याग और बलिदान आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा।
पास कराने के बदले मांगते थे 10 लाख रुपये
देहरादून। देहरादून में प्रतियोगी परीक्षाओं में नकल के खिलाफ बड़ी कार्रवाई सामने आई है।मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के स्पष्ट निर्देशों के क्रम में, परीक्षाओं की शुचिता बनाए रखने के लिए उत्तराखंड पुलिस ने संगठित नकल गिरोहों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ के नेतृत्व में उत्तराखंड पुलिस ने नकल माफिया के खिलाफ सख्त कार्रवाई के संकेत पहले ही दे दिए थे।
इसी क्रम में उत्तराखंड एसटीएफ और उत्तरप्रदेश एसटीएफ की संयुक्त टीम ने कर्मचारी चयन आयोग की एसएससी मल्टी टास्किंग स्टाफ (MTS) भर्ती परीक्षा के दौरान एक हाईटेक नकल गिरोह का भंडाफोड़ किया है।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नवनीत सिंह भुल्लर ने बताया कि परीक्षा के दौरान अभ्यर्थियों को पास कराने के नाम पर ठगी और नकल कराए जाने की सूचनाओं पर लगातार निगरानी रखी जा रही थी। 13 फरवरी 2026 को प्राप्त पुख्ता इनपुट के आधार पर देहरादून स्थित महादेव डिजिटल जोन, एमकेपी इंटर कॉलेज परीक्षा केंद्र में दबिश दी गई।
कार्रवाई के दौरान परीक्षा लैब के पास बने यूपीएस रूम में 24×24 इंच का एक गुप्त अंडरग्राउंड चैंबर मिला, जिसमें दो लैपटॉप और राउटर सक्रिय अवस्था में पाए गए। जांच में सामने आया कि इन उपकरणों के माध्यम से अभ्यर्थियों के कंप्यूटर को रिमोट एक्सेस कर प्रश्नपत्र हल किए जा रहे थे। एसटीएफ टीम ने तकनीकी और फॉरेंसिक उपकरणों की मदद से सभी इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सील कर कब्जे में लिया।
इस मामले में दो आरोपियों—नीतिश कुमार (निवासी देवरिया, वर्तमान दिल्ली) और भास्कर नैथानी (निवासी देहरादून)—को गिरफ्तार किया गया है। पूछताछ में खुलासा हुआ कि गिरोह अभ्यर्थियों से परीक्षा पास कराने के बदले करीब 10 लाख रुपये की मांग करता था और अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर नकल कराई जाती थी।
गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ उत्तराखंड प्रतियोगी परीक्षा अधिनियम 2023, भारतीय न्याय संहिता (BNS) और आईटी एक्ट की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। इस प्रकरण की जांच अपर पुलिस अधीक्षक स्तर के अधिकारी द्वारा की जाएगी। वहीं, गिरोह से जुड़े अन्य आरोपियों की तलाश में पुलिस टीमों द्वारा लगातार दबिश और छापेमारी की जा रही है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि परीक्षाओं की निष्पक्षता से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ आगे भी इसी तरह सख्त और निर्णायक कार्रवाई जारी रहेगी।
महिला सुरक्षा, लॉ एण्ड आर्डर तथा यातायात सुधार की दिशा में और अधिक ठोस प्रयासों को बताया अपनी प्रार्थमिकता
पुलिसकर्मियों के मनोबल को ऊंचा रखते हुए कार्यक्षमता को बढाने पर रहेगा फोकस
सामजिक सौहार्द बिगाडने का प्रयास करने वालों के विरूद्ध जीरो टालरेंस का दिया संदेश, होगी सख्त वैधानिक कार्यवाही
देहरादून। प्रमेन्द्र डोभाल ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) देहरादून के पद का औपचारिक रूप से कार्यभार ग्रहण किया। कार्यभार संभालने के बाद उन्होंने प्रेस वार्ता कर जिले में कानून-व्यवस्था को लेकर अपनी प्राथमिकताओं को स्पष्ट किया।
प्रेस वार्ता के दौरान एसएसपी प्रमेन्द्र डोभाल ने कहा कि महिला सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। इसके साथ ही जिले में कानून-व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करने तथा यातायात व्यवस्था में व्यापक सुधार के लिए ठोस और प्रभावी कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने बताया कि इन क्षेत्रों में जल्द ही सख्त और परिणामोन्मुखी कार्ययोजनाएं लागू की जाएंगी।
एसएसपी डोभाल ने पुलिस बल के मनोबल और कार्यक्षमता को बढ़ाने पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मियों को बेहतर कार्य वातावरण उपलब्ध कराते हुए उनकी दक्षता बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयास किए जाएंगे, ताकि आम जनता को और अधिक प्रभावी पुलिसिंग का लाभ मिल सके।
इसके साथ ही उन्होंने साम्प्रदायिक सौहार्द और धार्मिक समरसता को बिगाड़ने की कोशिश करने वाले असामाजिक तत्वों को सख्त चेतावनी दी। एसएसपी ने स्पष्ट किया कि ऐसे अराजक तत्वों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई जाएगी और कानून के तहत कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
शहीदों का बलिदान कभी व्यर्थ नहीं जाएगा, आने वाली पीढ़ियों को करता रहेगा प्रेरित- जोशी
देहरादून। सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने पुलवामा आतंकी हमले की सातवीं बरसी पर सैनिक कल्याण निदेशालय में आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस दौरान उन्होंने वीर शहीदों को नमन करते हुए पुष्प चक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।
सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने अपने संबोधन में कहा कि 14 फरवरी 2019 को जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में हुए आतंकी हमले में देश ने अपने 40 वीर जवानों को खोया था, जिसकी पीड़ा आज भी प्रत्येक भारतीय के हृदय में जीवित है। उन्होंने कहा कि देश अपने वीर शहीदों के बलिदान को कभी नहीं भूलेगा। उन्होंने नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि पुलवामा हमले के बाद भारत ने आतंकवाद के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया। 26 फरवरी 2019 को भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के बालाकोट में घुसकर आतंकी ठिकानों को नष्ट किया।
सैनिक कल्याण मंत्री जोशी ने कहा कि बालाकोट एयर स्ट्राइक भारत की सैन्य शक्ति और दृढ़ संकल्प का प्रमाण है, जिसके बाद शत्रु राष्ट्र भारत की ताकत को हल्के में लेने की भूल नहीं करेगा। सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि किसी भी शहीद को हम वापस नहीं ला सकते, लेकिन उनकी वीरता और बलिदान की गाथाएं आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेंगी। उन्होंने समाज से आह्वान किया कि शहीदों के परिवारों के प्रति संवेदनशील रहें और हरसंभव सहयोग प्रदान करें।
उन्होंने बताया कि पुलवामा हमले में शहीद हुए 40 जवानों में उत्तराखंड के दो वीर सपूत भी शामिल थे। उत्तराखंड की वीरभूमि सदैव अपनी सैन्य परंपरा और शौर्य के लिए जानी जाती रही है। यहां के जवानों का साहस और बलिदान पूरे देश के लिए प्रेरणा है। सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि राज्य सरकार शहीदों के सम्मान और उनके परिजनों की सहायता के लिए विभिन्न कल्याणकारी योजनाएं चला रही है और सरकार उनके साथ हर परिस्थिति में खड़ी है।
श्रद्धांजलि कार्यक्रम के दौरान मेजर जनरल सम्मी सबरवाल (सेनि), उपनल एमडी ब्रिगेडियर जेएनएस बिष्ट (सेनि), उपनिदेशक कर्नल योगेन्द्र कुमार (सेनि), उपनिदेशक विंग कमांडर निधि बधानी (सेनि), शमशेर सिंह बिष्ट सहित कई पूर्व सैनिक एवं स्थानीय लोग उपस्थित रहे।
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग ऐसी डाइट की तलाश में रहते हैं, जो कम मात्रा में अधिक पोषण दे सके। इसी कड़ी में कीवी फल को सेहत के लिए बेहद लाभकारी माना जा रहा है। पोषण विशेषज्ञों के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति रोजाना एक कीवी का सेवन करता है, तो इससे इम्युनिटी मजबूत होने के साथ-साथ पाचन, हृदय और त्वचा से जुड़ी कई समस्याओं से राहत मिल सकती है। विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर कीवी को अब सुपरफूड की श्रेणी में गिना जाने लगा है।
इम्युनिटी मजबूत करने में कारगर
कीवी में भरपूर मात्रा में विटामिन-C पाया जाता है, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह फल मौसमी सर्दी-खांसी, वायरल संक्रमण और फ्लू से बचाव में मदद करता है। नियमित सेवन से शरीर अंदर से मजबूत बनता है और थकान भी कम महसूस होती है।
प्लेटलेट्स बढ़ाने में सहायक
डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों के दौरान प्लेटलेट्स कम होने की समस्या आम है। ऐसे समय में डॉक्टर कीवी खाने की सलाह देते हैं। इसमें मौजूद फोलेट और विटामिन-C नई कोशिकाओं के निर्माण में मदद करते हैं, जिससे प्लेटलेट्स का स्तर तेजी से सुधर सकता है।
त्वचा और आंखों के लिए फायदेमंद
कीवी में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स त्वचा को समय से पहले बूढ़ा होने से बचाते हैं। यह झुर्रियों को कम करने और चेहरे पर प्राकृतिक चमक लाने में सहायक है। वहीं, इसमें पाए जाने वाले ल्यूटिन और जेक्सैन्थिन आंखों की रोशनी बनाए रखने और उम्र से जुड़ी दृष्टि समस्याओं से बचाव में मदद करते हैं।
पाचन तंत्र को रखे दुरुस्त
पाचन संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोगों के लिए कीवी काफी लाभकारी माना जाता है। इसमें मौजूद फाइबर और एक्टिनिडिन एंजाइम भोजन को आसानी से पचाने में मदद करता है। इससे कब्ज, गैस और एसिडिटी जैसी समस्याओं में राहत मिल सकती है।
वजन घटाने में भी उपयोगी
कम कैलोरी और अधिक फाइबर होने के कारण कीवी वजन कम करने वालों के लिए एक अच्छा विकल्प है। यह लंबे समय तक पेट भरा होने का एहसास कराता है, जिससे बार-बार खाने की आदत कम होती है और अनहेल्दी स्नैकिंग से बचाव होता है।
हृदय को देता है सुरक्षा
कीवी में पोटेशियम और ओमेगा फैटी एसिड पाए जाते हैं, जो ब्लड प्रेशर को संतुलित रखने और दिल को स्वस्थ बनाए रखने में मदद करते हैं। नियमित सेवन से रक्त संचार बेहतर होता है और हार्ट से जुड़ी बीमारियों का खतरा कम हो सकता है।
निष्कर्ष
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि रोजमर्रा की डाइट में कीवी को शामिल करना एक छोटा लेकिन असरदार बदलाव हो सकता है। यह न केवल शरीर को अंदर से मजबूत बनाता है, बल्कि लंबे समय तक सक्रिय और ऊर्जावान बनाए रखने में भी सहायक है।
नोट: यह लेख विभिन्न स्वास्थ्य विशेषज्ञों और मेडिकल रिपोर्ट्स पर आधारित जानकारियों के अनुसार तैयार किया गया है।
(साभार)
