शहीदों का बलिदान राष्ट्र की चेतना में सदैव अमर रहेगा- सीएम धामी
देहरादून। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वर्ष 2019 में पुलवामा में हुए आतंकी हमले में शहीद हुए वीर जवानों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि देश की रक्षा के लिए अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान देने वाले जवानों का साहस, समर्पण और देशभक्ति राष्ट्र की चेतना में सदैव अमर रहेगी।
मुख्यमंत्री धामी ने शहीदों को नमन करते हुए कहा कि मातृभूमि की रक्षा के लिए दिया गया उनका बलिदान कभी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि वीर जवानों का अदम्य साहस और अटूट संकल्प प्रत्येक भारतीय के लिए प्रेरणा का शाश्वत स्रोत है।
सीएम धामी ने इस अवसर पर कहा कि पूरा देश शहीदों के परिजनों के साथ खड़ा है और राष्ट्र हमेशा अपने अमर बलिदानियों का ऋणी रहेगा।
ओ रोमियो सिनेमाघरों में दस्तक दे चुकी है। विशाल भारद्वाज के निर्देशन में बनी इस फिल्म में शाहिद कपूर और तृप्ति डिमरी पहली बार साथ नजर आ रहे हैं। लंबे समय से चर्चा में रही इस फिल्म को लेकर दर्शकों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा था। रिलीज के साथ ही इसके पहले दिन के बॉक्स ऑफिस आंकड़े भी सामने आ गए हैं, जिनसे फिल्म की शुरुआती रफ्तार का अंदाजा लगाया जा सकता है।
बॉक्स ऑफिस पर सतर्क शुरुआत
रिलीज से पहले मजबूत प्रचार और स्टारकास्ट के बावजूद ‘ओ रोमियो’ ने बॉक्स ऑफिस पर उम्मीद से थोड़ी धीमी शुरुआत की है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, फिल्म ने अपने पहले दिन करीब 8.25 करोड़ रुपये का कारोबार किया है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि वीकेंड पर फिल्म की कमाई में कितना उछाल आता है।
रिलीज डे पर मुकाबला
शनाया कपूर और आदर्श गौरव की सर्वाइवल-थ्रिलर फिल्म ‘तू या मैं’ से ‘ओ रोमियो’ का सीधा मुकाबला है। आंकड़ों के अनुसार, ‘तू या मैं’ पहले दिन महज 55 लाख रुपये ही जुटा सकी। इस लिहाज से देखा जाए तो धीमी शुरुआत के बावजूद ‘ओ रोमियो’ फिलहाल इस रेस में आगे नजर आ रही है।
दर्शकों और समीक्षकों की राय बंटी
फिल्म को लेकर दर्शकों और समीक्षकों की प्रतिक्रिया मिली-जुली रही है। जहां कुछ लोग विशाल भारद्वाज की कहानी कहने की शैली और फिल्म के ट्रीटमेंट की सराहना कर रहे हैं, वहीं कुछ दर्शकों को उनसे और बेहतर प्रस्तुति की उम्मीद थी। खासतौर पर अविनाश तिवारी की परफॉर्मेंस को सराहा जा रहा है, जिसे फिल्म की बड़ी ताकत माना जा रहा है।
कहानी और स्टारकास्ट
‘ओ रोमियो’ की कहानी माफिया क्वींस ऑफ मुंबई से प्रेरित बताई जा रही है। फिल्म में शाहिद कपूर और तृप्ति डिमरी के साथ अविनाश तिवारी, नाना पाटेकर और दिशा पाटनी अहम भूमिकाओं में नजर आ रहे हैं। इसके अलावा तमन्ना भाटिया, फरीदा जलाल और हुसैन दलाल भी फिल्म का हिस्सा हैं, जो कहानी को और मजबूत बनाते हैं।
अब देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में वर्ड ऑफ माउथ के दम पर ‘ओ रोमियो’ बॉक्स ऑफिस पर अपनी पकड़ मजबूत कर पाती है या नहीं।
(साभार)
अब तक 62 लाख रुपये की मदद से 126 बालिकाओं की पढ़ाई दोबारा शुरू
देहरादून। कलेक्ट्रेट परिसर में आयोजित प्रोजेक्ट ‘नंदा–सुनंदा’ के 13वें संस्करण में जिला प्रशासन ने एक सराहनीय पहल करते हुए आर्थिक रूप से कमजोर 34 बालिकाओं की बाधित शिक्षा को पुनः शुरू कराया। कार्यक्रम के दौरान जिलाधिकारी सविन बंसल ने बालिकाओं को सहायता राशि के चेक वितरित किए।
इस चरण में कुल 9 लाख रुपये की धनराशि से छात्राओं की पढ़ाई दोबारा प्रारंभ कराई गई। प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार, अब तक इस परियोजना के माध्यम से लगभग 62 लाख रुपये की सहायता देकर 126 बालिकाओं की शिक्षा को पुनर्जीवित किया जा चुका है।
जिलाधिकारी सविन बंसल ने कहा कि बालिकाएं नंदा–सुनंदा देवियों के समान हैं और उनकी शिक्षा को पुनर्जीवित कर उन्हें योग्य बनाना ही सच्ची वंदना है। उन्होंने छात्राओं को शिक्षा के प्रति समर्पित रहने, महापुरुषों की जीवनियों से प्रेरणा लेने और लक्ष्य निर्धारित कर आगे बढ़ने का संदेश दिया।
फीस के अभाव में रुकी पढ़ाई, प्रशासन ने संभाली जिम्मेदारी
आर्थिक तंगी के चलते कई बालिकाओं को फीस जमा न होने के कारण स्कूलों में अपमानजनक परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। कुछ छात्राओं को 15–15 दिन तक कक्षाओं से बाहर रखा गया और परीक्षा में बैठने से रोकने की चेतावनी दी गई। ऐसे मामलों में जिला प्रशासन ने हस्तक्षेप कर उनकी शिक्षा की जिम्मेदारी अपने हाथों में ली।
योजना के तहत कैंसर पीड़ित पिता की पुत्री सृष्टि की बीसीए पांचवें सेमेस्टर की पढ़ाई, विकलांग पिता की बेटी शिवांगी की उच्च शिक्षा तथा पिता के निधन के बाद अलाईना रावत (बीएससी नर्सिंग), आकृति बडोनी (बीकॉम), तनिका (कक्षा 10), लावण्या (कक्षा 9), दिव्या (कक्षा 6), नंदनी (यूकेजी) और ईशिका (कक्षा 3) सहित अन्य छात्राओं की बाधित पढ़ाई को पुनः शुरू कराया गया।
कार्यक्रम में उप जिलाधिकारी सदर हरिगिरि, उप जिलाधिकारी कुमकुम जोशी, जिला कार्यक्रम अधिकारी (बाल विकास) जितेंद्र कुमार, जिला प्रोबेशन अधिकारी मीना बिष्ट तथा बालिकाओं के अभिभावक उपस्थित रहे। जिला प्रशासन की यह पहल जरूरतमंद बेटियों के लिए नई आशा और भरोसे की मिसाल बनकर सामने आई है।
राज्य में किफायती एवं गुणवत्तापूर्ण आवास उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है- डॉ. आर. राजेश कुमार
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के विजन को साकार करने के लिए राज्य सरकार सुनियोजित, किफायती और नागरिक-अनुकूल आवासीय विकास को प्राथमिकता दे रही है। इसी क्रम में आवास सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने प्राधिकरण की आमवाला तरला आवासीय योजना का स्थलीय निरीक्षण कर निर्माण कार्यों की प्रगति, गुणवत्ता और लाभार्थियों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की समीक्षा की। निरीक्षण के दौरान उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी कार्य निर्धारित समयसीमा और गुणवत्ता मानकों के अनुरूप पूर्ण किए जाएं।
ईडब्ल्यूएस भवनों का निरीक्षण, लाभार्थियों से सीधा संवाद
सचिव आवास ने प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत निर्मित ईडब्ल्यूएस (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) भवनों का विस्तृत निरीक्षण किया। उन्होंने आवासों की संरचनात्मक गुणवत्ता, पेयजल, विद्युत, सीवरेज, स्वच्छता एवं आंतरिक सड़कों की स्थिति का अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने वहां निवास कर रहे लोगों से वार्ता कर उनकी समस्याओं और सुझावों को सुना। लाभार्थियों ने योजना के तहत आवास उपलब्ध कराने पर सरकार का आभार व्यक्त किया। सचिव महोदय ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्राप्त सुझावों के आधार पर आवश्यक सुधार शीघ्र सुनिश्चित किए जाएं।
निर्माणाधीन अन्य वर्गों के भवनों की प्रगति की समीक्षा
निरीक्षण के दौरान प्राधिकरण द्वारा निर्माणाधीन एलआईजी, एमआईजी एवं एचआईजी वर्ग के भवनों का भी जायजा लिया गया। अधिकारियों ने योजना की प्रगति, बुकिंग स्थिति और वित्तीय प्रबंधन से संबंधित विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की। सचिव को अवगत कराया गया कि एचआईजी वर्ग के लगभग सभी फ्लैट बुक किए जा चुके हैं। इस उपलब्धि पर सचिव ने प्राधिकरण के प्रयासों की सराहना की और अन्य वर्गों के फ्लैटों के विक्रय की प्रक्रिया को भी शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए।
समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण निर्माण पर सख्त निर्देश
सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार ने स्पष्ट किया कि निर्माण कार्यों में गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने संबंधित अधिकारियों और निर्माणदायी संस्था को निर्देश दिए कि परियोजना को निर्धारित समयसीमा के भीतर पूर्ण किया जाए। उन्होंने नियमित मॉनिटरिंग, चरणबद्ध समीक्षा और तकनीकी मानकों के अनुपालन पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि आवासीय योजनाएं केवल भवन निर्माण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनमें सुरक्षित वातावरण, हरित क्षेत्र, सामुदायिक सुविधाएं और समुचित पार्किंग व्यवस्था भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
अधिकारियों को समन्वित कार्यप्रणाली अपनाने के निर्देश
निरीक्षण के दौरान प्राधिकरण के अधिशासी अभियन्ता सुनील कुमार, अवर अभियन्ता सुनील उप्रेती, मार्केटिंग एक्जिक्यूटिव रितिका सिंह तथा निर्माणदायी संस्था के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। सचिव ने सभी अधिकारियों को टीम भावना और समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए, ताकि योजना को एक आदर्श आवासीय मॉडल के रूप में विकसित किया जा सके।
आवास सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में राज्य में किफायती एवं गुणवत्तापूर्ण आवास उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। आमवाला तरला आवासीय योजना इस दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत निर्मित ईडब्ल्यूएस भवनों की गुणवत्ता संतोषजनक है, किंतु निर्माणाधीन कार्यों को भी समयबद्ध और मानकों के अनुरूप पूर्ण करना आवश्यक है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि पारदर्शिता, गुणवत्ता और समयसीमा का पूर्ण पालन सुनिश्चित करते हुए इस योजना को राज्य में आदर्श आवासीय विकास मॉडल के रूप में स्थापित किया जाए।
देहरादून। इस बार प्रदेश में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस वृद्ध महिलाओं को समर्पित किया जाएगा। कैंप कार्यालय में आयोजित बैठक में मंत्री ने अधिकारियों को तैयारियों के संबंध में आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इस बार महिला दिवस हमारी दादियों और नानियों को समर्पित होगा, जिन्होंने अपने त्याग, परिश्रम और संस्कारों से समाज की नींव मजबूत की है।
रेखा आर्या ने कहा, “हमारी दादियां और नानियां हमारे परिवार और समाज की धरोहर हैं। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर उन्हें आमंत्रित कर सम्मानित करना हमारे लिए गौरव का विषय होगा। साथ ही, उनके कल्याण के लिए एक ठोस योजना को धरातल पर उतारना हमारी प्राथमिकता है।”
मंत्री ने निर्देश दिए कि प्रदेश के प्रत्येक जनपद से वृद्ध महिलाओं को इस आयोजन में ससम्मान आमंत्रित किया जाए। इसके साथ ही दूरदराज के गांवों में सर्वे कर यह आकलन किया जाए कि वृद्ध महिलाओं को किस प्रकार की सहायता की आवश्यकता है। सर्वे रिपोर्ट के आधार पर एक कल्याणकारी योजना का प्रारूप तैयार किया जाएगा, ताकि जरूरतमंद महिलाओं तक वास्तविक लाभ पहुंच सके।
बैठक में विभागीय निदेशक बंशीलाल राणा, उपनिदेशक विक्रम सिंह, मोहित चौधरी सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
सतपाल महाराज ने किया विंटर कार्निवल का उद्घाटन
उत्तराखंड को विंटर स्पोर्ट्स हब बनाने की दिशा में बड़ा कदम- सतपाल महाराज
औली। कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने औली की पावन और मनोहारी धरती पर ‘विश्व प्रसिद्ध नेशनल हिमक्रीड़ा स्कीइंग विंटर कार्निवल-2026’ का दीप प्रज्वलित कर विधिवत शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि समुद्र तल से हजारों मीटर की ऊंचाई पर स्थित औली अपनी विशिष्ट भौगोलिक संरचना के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर की विंटर स्पोर्ट्स प्रतियोगिताओं के लिए एक आदर्श स्थल बन चुका है।
कैबिनेट मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार उत्तराखंड को एक स्थायी ‘विंटर स्पोर्ट्स हब’ और विश्वस्तरीय पर्यटन डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि 13 से 16 फरवरी तक आयोजित होने वाला यह विंटर कार्निवल न केवल साहसिक खेलों को बढ़ावा देगा, बल्कि स्थानीय लोककलाओं, होमस्टे व्यवस्था और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करेगा।
कार्यक्रम के दौरान बताया गया कि राज्य सरकार आने वाले महीनों में पर्यटन को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए कई बड़े आयोजनों की तैयारी कर रही है। अप्रैल माह में भारतीय सेना के सहयोग से ‘सूर्य देवभूमि चैलेंज’, मई में नीति घाटी में ‘नीति एक्सट्रीम अल्ट्रा रन’ और जून में बद्रीनाथ-माणा क्षेत्र में ‘देवभूमि कल्चरल फेस्टिवल’ के आयोजन का प्रस्ताव है।
इसके साथ ही 80 के दशक की ऐतिहासिक ‘हिमालयन कार रैली’ को पुनः शुरू करने की योजना पर भी काम किया जा रहा है। वहीं, श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए केदारनाथ और हेमकुंड साहिब में रोपवे निर्माण जैसी महत्वाकांक्षी परियोजनाओं को भी गति दी जा रही है।
कैबिनेट मंत्री ने विश्वास जताया कि ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘आत्मनिर्भर उत्तराखंड’ की भावना से प्रेरित यह विंटर कार्निवल राज्य के पर्यटन और आर्थिक विकास में मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने देश-विदेश के पर्यटकों से देवभूमि उत्तराखंड की समृद्ध संस्कृति और साहसिक खेलों का अनुभव लेने का आह्वान किया।
शान्तिपूर्ण एवं सुव्यवस्थित परीक्षा संचालन हेतु विभागों में समन्वय के निर्देश
परीक्षा संचालन में पूरी गंभीरता बरतें, किसी प्रकार की लापरवाही नहीं होगी क्षम्य- जिलाधिकारी
23 फरवरी से 18 मार्च तक परीक्षाएं, 125 परीक्षा केन्द्रों पर 12,605 छात्र-छात्रा होंगे शामिल
पौड़ी। आगामी हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट बोर्ड परीक्षाओं को नकलविहीन, पारदर्शी एवं शान्तिपूर्ण ढंग से सम्पन्न कराने के लिए जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया ने राजकीय इण्टर कॉलेज पौड़ी में जनपद के शिक्षाधिकारियों की महत्वपूर्ण बैठक ली। बैठक में परीक्षा व्यवस्थाओं की विस्तृत समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने सभी तैयारियों को समयबद्ध एवं सुव्यवस्थित ढंग से पूर्ण करने के निर्देश दिये, ताकि विद्यार्थियों को निष्पक्ष एवं अनुकूल परीक्षा वातावरण उपलब्ध कराया जा सके।
जिलाधिकारी ने सभी खण्ड शिक्षाधिकारियों को निर्देशित किया कि वे अपने-अपने विकासखण्ड स्तर पर शीघ्र बैठक आयोजित कर परीक्षा संबंधी सभी आवश्यक तैयारियां सुनिश्चित करें। उन्होंने बोर्ड परीक्षाओं को नकलविहीन बनाने हेतु शिक्षा विभाग एवं पुलिस विभाग के अधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ नियमों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा। परीक्षा केन्द्रों के आसपास अनधिकृत व्यक्तियों की आवाजाही पर रोक, प्रश्नपत्रों की सुरक्षित अभिरक्षा, सीसीटीवी की कार्यशीलता, सभी केन्द्रों पर निगरानी तथा उड़नदस्तों की सक्रियता सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिये गये। साथ ही उन्होंने परीक्षा ड्यूटी में लगे कार्मिकों को समय से तैनाती, प्रशिक्षण एवं उत्तरपुस्तिकाओं के सुरक्षित संकलन एवं मूल्यांकन केन्द्रों तक सुरक्षित प्रेषण की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिये।
जिलाधिकारी ने प्रधानाचार्यों को परीक्षार्थियों के हितों पर ध्यान केंद्रित करते हुए निर्देश दिए कि बोर्ड परीक्षाओं से पूर्व छात्रों के लिए ओरिएंटेशन सत्र आयोजित किए जाएं। इन सत्रों में परीक्षा संबंधी दिशा- निर्देश, उत्तर पुस्तिका नामांकन की प्रक्रिया, समय प्रबंधन, निर्देश, परीक्षा केंद्र की आचार संहिता और तनाव प्रबंधन से संबंधित आवश्यक जानकारी दी जाए। उन्होंने कहा कि स्कूल को सकारात्मक एवं अभिनव वातावरण प्रदान करना भी विद्यालय प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
मुख्य शिक्षाधिकारी अत्रेय सयाना को निर्देशित करते हुए जिलाधिकारी ने स्पष्ट कहा कि सभी 125 परीक्षा केन्द्रों पर मूलभूत सुविधाएं पेयजल, विद्युत, पर्याप्त फर्नीचर, स्वच्छ शौचालय, प्रकाश व्यवस्था तथा प्राथमिक उपचार की व्यवस्था पूर्व से सुनिश्चित कर ली जाए। जिलाधिकारी ने विशेष रूप से दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए सुगम व्यवस्था, परीक्षा कक्षों में बैठने की समुचित योजना, प्रश्नपत्र वितरण की गोपनीयता तथा आकस्मिक परिस्थितियों से निपटने हेतु वैकल्पिक व्यवस्थाएं तैयार रखने के निर्देश भी दिये।
मुख्य शिक्षाधिकारी ने बताया कि 23 फरवरी से 18 मार्च 2026 तक संचालित होने वाली इन बोर्ड परीक्षाओं के लिए जनपद में कुल 125 परीक्षा केन्द्र बनाये गये हैं। इनमें से 124 परीक्षा केन्द्रों पर कक्षा 10वीं एवं 12वीं दोनों की परीक्षाएं आयोजित होंगी, जबकि राजकीय इण्टर कॉलेज देवीखाल में केवल कक्षा 10वीं की परीक्षा आयोजित की जाएगी। जनपद में कुल 12,605 छात्र-छात्राएं बोर्ड परीक्षा में सम्मिलित होंगे, जिनमें 6,185 छात्र हाईस्कूल तथा 6420 छात्र-छात्राएं इंटरमीडिएट परीक्षा में प्रतिभाग करेंगे।
बैठक में प्रधानाचार्य जी.आई.सी. मोहन चंद्र घिल्डियाल, जिला खेल समन्वयक योगंबर नेगी, उप-निरीक्षक पुलिस विभाग मेहराजुद्दीन सहित जनपद के सभी खण्ड शिक्षाधिकारी तथा केंद्र व्यवस्थापक उपस्थित रहे।
आज की तेज़ रफ्तार ज़िंदगी में लोग अक्सर पेट की समस्याओं को मामूली समझकर नज़रअंदाज़ कर देते हैं, लेकिन विशेषज्ञों की मानें तो यही लापरवाही आगे चलकर जानलेवा साबित हो सकती है। हाल के वर्षों में पाचन तंत्र से जुड़े कैंसर, खासतौर पर कोलोरेक्टल यानी बाउल कैंसर के मामलों में दुनिया भर में चिंताजनक बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। इसका सीधा असर स्वास्थ्य सेवाओं पर भी पड़ रहा है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के मुताबिक, कोलोरेक्टल कैंसर दुनिया में तीसरा सबसे आम कैंसर बन चुका है और कैंसर से होने वाली मौतों के मामलों में यह दूसरे स्थान पर है। कुल कैंसर मामलों में इसकी हिस्सेदारी करीब 10 प्रतिशत बताई जाती है। पहले यह बीमारी मुख्य रूप से 50 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में देखी जाती थी, लेकिन अब कम उम्र के लोग भी इसकी चपेट में आ रहे हैं।
आंतों की पुरानी बीमारी बढ़ा सकती है कैंसर का जोखिम
कोलन या कोलोरेक्टल कैंसर बड़ी आंत या मलाशय में विकसित होता है। शौच की आदतों में बदलाव, मल में खून, पेट में लगातार दर्द या ऐंठन जैसे लक्षण इसके शुरुआती संकेत माने जाते हैं। विशेषज्ञों ने हाल ही में चेतावनी दी है कि आंतों से जुड़ी एक आम लेकिन गंभीर बीमारी इस कैंसर के खतरे को कई गुना बढ़ा सकती है।
वैज्ञानिकों के अनुसार, इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज (IBD) से पीड़ित लोगों में आगे चलकर बाउल कैंसर का खतरा सामान्य लोगों की तुलना में करीब 600 प्रतिशत तक अधिक हो सकता है। IBD के मरीजों में लंबे समय तक आंतों में सूजन बनी रहती है, जो कैंसर के लिए अनुकूल स्थिति बना देती है।
अगर किसी व्यक्ति को बार-बार दस्त या कब्ज, पेट में तेज दर्द, बार-बार शौच जाने की जरूरत या बिना कारण वजन घटने जैसी समस्याएं हो रही हैं, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। ये IBD के संकेत हो सकते हैं।
विशेषज्ञों की चेतावनी
ब्रिटेन के किंग्स कॉलेज लंदन की न्यूट्रिशन साइंटिस्ट प्रोफेसर सारा बेरी का कहना है कि IBD से पीड़ित लोगों में कम उम्र में ही कोलोरेक्टल कैंसर विकसित होने का खतरा ज्यादा रहता है। उनके अनुसार, आंतों में लंबे समय तक बनी रहने वाली सूजन कैंसर को ट्रिगर कर सकती है।
उन्होंने बताया कि IBD एक अम्ब्रेला टर्म है, जिसके अंतर्गत क्रोहन रोग और अल्सरेटिव कोलाइटिस जैसी बीमारियां आती हैं। ये दोनों ही आंतों को गंभीर नुकसान पहुंचाती हैं और समय के साथ कैंसर का खतरा बढ़ा देती हैं।
भारत में भी बढ़ रहे मामले
भारत में भी बाउल कैंसर के मामलों में लगातार इजाफा हो रहा है। यह देश के टॉप-पांच कैंसर में शामिल हो चुका है। शहरी क्षेत्रों में इसके मामले अधिक सामने आ रहे हैं। वर्ष 2022 में भारत में कोलन कैंसर के 64 हजार से ज्यादा नए मामले दर्ज किए गए, जिनमें 15 से 20 प्रतिशत मरीज 50 साल से कम उम्र के थे।
विशेषज्ञों के अनुसार, मोटापा, शारीरिक गतिविधि की कमी, शराब का सेवन और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स का अधिक उपयोग इस बीमारी के जोखिम को बढ़ाने वाले प्रमुख कारण हैं।
बचाव ही सबसे बेहतर उपाय
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर बाउल कैंसर के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। प्रोसेस्ड फूड्स और मीठे पेय पदार्थों से दूरी बनाना, पेट से जुड़ी समस्याओं को समय रहते गंभीरता से लेना और नियमित जांच कराना इस जानलेवा बीमारी से बचाव में अहम भूमिका निभा सकता है।
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मातृशक्ति के उत्कर्ष और महिला सशक्तिकरण की प्रेरक मिसाल बनीं प्रतिभा
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड की बेटी एवं अंतरराष्ट्रीय महिला बॉडीबिल्डर प्रतिभा थपलियाल को बॉडीबिल्डिंग क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने उन्हें शॉल ओढ़ाकर एवं गमला भेंट कर सम्मान प्रदान किया।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रतिभा थपलियाल की उपलब्धियों को उत्तराखंड की मातृशक्ति के गौरव तथा महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक सशक्त और प्रेरणादायक कदम बताया। उन्होंने कहा कि प्रतिभा की सफलता से प्रदेश, विशेषकर दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों में रहने वाली बेटियों को खेल सहित विभिन्न क्षेत्रों में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलेगी। मातृशक्ति अब खेलों के साथ-साथ अन्य विविध क्षेत्रों में भी अपने कैरियर की संभावनाएं तलाश रही हैं, जो प्रदेश के उज्ज्वल भविष्य का संकेत है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की भूमि मातृप्रधान रही है तथा पहाड़ की महिलाएं कृषि, सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन की धुरी रही हैं। समय-समय पर उत्तराखंड की महिलाओं ने पर्यावरण संरक्षण, समाज सेवा, खेल और सुशासन के क्षेत्र में देश-दुनिया का मार्गदर्शन किया है। हमें अपनी मातृशक्ति पर गर्व है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की ऐसी प्रतिभाशाली महिलाएं जो विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां अर्जित कर रही हैं, उन्हें राजकीय सेवा में अवसर प्रदान करने का भी प्रयास किया जाएगा, ताकि वे समाज के लिए प्रेरणा स्रोत बन सकें।
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिभा का परचम
43 वर्षीय प्रतिभा थपलियाल की प्रमुख उपलब्धियां (पिछले चार वर्षों में):
वर्ष 2023 में राष्ट्रीय बॉडीबिल्डिंग चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक।
एशियाई बॉडीबिल्डिंग चैंपियनशिप में कांस्य पदक।
9 फरवरी 2026 को तेलंगाना के करीमनगर में आयोजित राष्ट्रीय महिला बॉडीबिल्डिंग प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक।
प्रतिभा थपलियाल बॉडीबिल्डिंग क्षेत्र में महिला विश्व चैंपियनशिप एवं एशिया चैंपियनशिप में पदक जीतने वाली महिला बॉडीबिल्डर हैं। उनकी यह उपलब्धि न केवल राज्य बल्कि पूरे देश के लिए गौरव का विषय है।
प्रदेश सरकार महिला खिलाड़ियों को हर संभव प्रोत्साहन एवं सहयोग प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि उत्तराखंड की बेटियां राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर निरंतर सफलता का परचम लहराती रहें।
इस दौरान राज्य आंदोलनकारी रविंद्र जुगरान भी उपस्थित थे।
