यातायात के दबाव को कम करते हुए यातायात के सुगम संचालन हेतु अधीनस्थ अधिकारियों को दिए आवश्यक निर्देश
देहरादून। शहर में बढ़ते ट्रैफिक दबाव को देखते हुए गुरुवार को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने प्रमुख चौराहों और व्यस्त मार्गों का निरीक्षण कर यातायात व्यवस्था का जायजा लिया। इस दौरान अधिकारियों को ट्रैफिक को सुचारू बनाने और अव्यवस्था दूर करने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
निरीक्षण के दौरान एसएसपी ने Rispana Chowk, Kargi Chowk और ISBT Dehradun सहित शहर के प्रमुख ट्रैफिक पॉइंट्स का स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने इन स्थानों पर यातायात के बढ़ते दबाव को कम करने और वाहनों के सुचारू आवागमन के लिए अधिकारियों को जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए।
रिस्पना चौक पर निरीक्षण के दौरान पाया गया कि रिस्पना पुल के पास बने ऑटो स्टैंड और सामने बने डिवाइडर के कारण ट्रैफिक जाम की स्थिति बन रही है। इस पर एसएसपी ने संबंधित विभाग से समन्वय स्थापित कर डिवाइडर को थोड़ा पीछे करने के निर्देश दिए, ताकि सड़क चौड़ी होने से यातायात का दबाव कम किया जा सके।
आईएसबीटी क्षेत्र में निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि सभी वाहनों को निर्धारित पार्किंग स्थलों पर ही खड़ा कराया जाए। सड़क किनारे नो-पार्किंग जोन में खड़े वाहनों को क्रेन के माध्यम से हटाने और सड़क पर सवारी उतारने-चढ़ाने वाली बसों व अन्य वाहनों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए गए। साथ ही आईएसबीटी चौकी के बाहर खड़े सीज वाहनों के लिए अलग स्थान चिन्हित कर उन्हें वहां शिफ्ट करने के निर्देश दिए गए, जिससे क्षेत्र में यातायात सुचारू रूप से चल सके।
निरीक्षण के दौरान एसएसपी ने आईएसबीटी चौकी में पहुंचे शिकायतकर्ताओं से भी बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं और संबंधित अधिकारियों को आमजन की शिकायतों पर संवेदनशीलता के साथ त्वरित कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
वहीं, कारगी चौक पर ट्रैफिक व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए चौक पर बने पुलिस बूथ को थोड़ा पीछे करने और सड़क पर अनावश्यक रूप से खड़े वाहनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए। अधिकारियों को खासतौर पर सड़क किनारे अवैध रूप से वाहन खड़ा कर ट्रैफिक बाधित करने वाले चालकों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करने को कहा गया।
इस दौरान पुलिस अधीक्षक नगर, क्षेत्राधिकारी यातायात, संबंधित थाना प्रभारी और यातायात निरीक्षक भी मौके पर मौजूद रहे।
नई ‘डायरेक्ट टू मोबाइल’ तकनीक से दूरदराज के छात्रों तक पहुंचेगी शिक्षा और मनोरंजन
देहरादून। बिना सिम और इंटरनेट के टीवी व मोबाइल पर फ़िल्में और मनोरंजन कार्यक्रम देखे जा सकेंगे। देश में इस नई टेक्नोलॉजी की शुरुआत करने वाली फ्रीस्ट्रीम के साथ ग्राफिक एरा ने एमओयू किया है। राज्य के शिक्षा व चिकित्सा मंत्री डॉ धन सिंह रावत ने इसे शिक्षा और मनोरंजन के क्षेत्र में एक बड़ी छलांग करार दिया है।
ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी में आज यह एमओयू किया गया। फ्रीस्ट्रीम ने आईआईटी कानपुर के स्टार्टअप के रूप में यह खोज की है। दुनिया में यह नई टेक्नोलॉजी है। इसके अंतर्गत डायरेक्ट टू मोबाइल तकनीक के माध्यम से फिल्में, मनोरंजन कार्यक्रम, शिक्षण सामग्री, पाठ्यक्रम और कौशल आधारित मॉड्यूल सीधा मोबाइल और टीवी पर देखे जा सकेंगे। दूरस्थ व इंटरनेट विहीन क्षेत्र के विद्यार्थियों को उच्च गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त हो सकेगी। साथ आई जैसी उभरती तकनीक के प्रति जागरूकता बढ़ाकर उन्हें भविष्य के लिए सक्षम बनाया जाएगा।
यह एमओयू राज्य के शिक्षा एवं चिकित्सा मंत्री डॉ धन सिंह रावत की मौजूदगी में किया गया। इस मौके पर डॉ धन सिंह रावत ने कहा कि यह पहल ग्रामीण और पर्वतीय क्षेत्रों में शिक्षा को सशक्त बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। इसके माध्यम से शिक्षा हर छात्र तक पहुंचाई जा सकेगी। यह पहल मेक इन इंडिया को मजबूती देते हुए शिक्षा प्रणाली और मनोरंजन क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव लाएगी। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के इस सबसे बड़े विश्वविद्यालय ने अपनी शिक्षा की गुणवत्ता और सर्वाधिक प्लेसमेंट के कारण देश में अपनी अलग पहचान बनाई है। बिना इंटरनेट और सिम के टीवी और मोबाइल पर मनोरंजन व शिक्षाप्रद कार्यक्रम दिखाने की यह नई टेक्नोलॉजी उन छात्रों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है जहां इंटरनेट की सुविधा नहीं है या डाटा पैक पर लोग खर्च नहीं कर सकते।
ग्राफिक एरा ग्रुप ऑफ़ इंस्टीट्यूशन के अध्यक्ष प्रो. डा. कमल घनशाला ने कहा कि भारत की बड़ी कंपनियां भी शोध कार्यों पर बहुत कम खर्च कर रही है, इससे देश को नहीं तकनीकी देने का कार्य प्रभावित हो रहा है। शोध कार्यों को बढ़ाने की उन्नति के लिए क्रांतिकारी हो सकता है। जो शोध और पेटेंट हो रहा है उन्हें व्यावसायिक उपयोग में लाना भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि शोध से हम अपनी कमियों को पहचान कर शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार लाकर विद्यार्थियों के लिए उज्जवल और सशक्त भविष्य का निर्माण कर सकते हैं।
ग्राफिक एरा की तरफ से एग्जीक्यूटिव काउंसिल के सदस्य और 5G टेक्नोलॉजी से जुड़े प्रख्यात वैज्ञानिक पराग नायक ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए। उन्होंने कहा कि डायरेक्ट टू मोबाइल तकनीक मोबाइल सिग्नल से बेहतर तकनीक साबित होगी और दूर दराज के विद्यार्थियों को शिक्षा से जोड़ने में अहम कड़ी बनेगी।
फ्रीस्ट्रीम की ओर से सीनियर एडवाइजर सी के जैन ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए। उन्होंने कहा कि इस पहल के माध्यम से लोगों को तकनीक से जुड़ने, बेहतर कंटेंट तक पहुंचे और शिक्षा व मनोरंजन के अवसर प्राप्त होंगे।
ब्रॉडकास्ट इंजीनियरिंग सोसाइटी ऑफ इंडिया के चेयरमैन सुनील ने कहा कि यह तकनीक सिम, डाटा और इंटरनेट पर निर्भर नहीं है। जिन क्षेत्रों में इंटरनेट की कनेक्टिविटी नहीं है यह उन क्षेत्रों के छात्रों को शिक्षा और मनोरंजन के साथ जोड़ने का माध्यम बनेगा। यह एक बड़ी ऐतिहासिक उपलब्धि है।
इस कार्यक्रम में ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी के प्रो. वाइस चांसलर डॉ संतोष एस सर्राफ, डीन इंटरनेशनल अफेयर्स डॉ डी. आर गंगोडकर, डीन इंटरनेशनल कोलैबोरेशन डॉ मांगेराम, डीन मैनेजमैंट डॉ विशाल सागर, विभिन्न विभागों के अध्यक्ष और पदाधिकारी शामिल हुए।
वानखेड़े में होगी हाई-वोल्टेज भिड़ंत
नई दिल्ली। आईसीसी पुरुष टी20 विश्व कप 2026 के दूसरे सेमीफाइनल में आज भारत और इंग्लैंड की टीमें आमने-सामने होंगी। यह अहम मुकाबला मुंबई के ऐतिहासिक वानखेड़े स्टेडियम में शाम 7 बजे से खेला जाएगा, जबकि टॉस साढ़े छह बजे होगा। पहले सेमीफाइनल में New Zealand ने South Africa को नौ विकेट से हराकर फाइनल में जगह बना ली है। ऐसे में अब क्रिकेट प्रेमियों की नजर भारत और इंग्लैंड के बीच होने वाले इस हाई-वोल्टेज मुकाबले पर टिकी है।
इस मैच की खास बात यह है कि जीतने वाली टीम टी20 विश्व कप इतिहास में चौथी बार फाइनल में पहुंचकर नया रिकॉर्ड बना सकती है। वहीं लगातार तीसरे टी20 विश्व कप में भारत और इंग्लैंड सेमीफाइनल में आमने-सामने होंगे, जिससे मुकाबला और भी रोमांचक हो गया है।
बारिश की स्थिति में क्या होगा?
आईसीसी ने सेमीफाइनल के लिए रिजर्व डे भी रखा है। यदि 5 मार्च को बारिश के कारण मैच नहीं हो पाता, तो मुकाबला 6 मार्च को खेला जाएगा। अगर मैच अधूरा रह जाता है तो भी उसे अगले दिन पूरा कराया जाएगा। लेकिन अगर दोनों दिन मौसम खराब रहा तो सुपर-8 चरण में बेहतर प्रदर्शन करने वाली टीम को फाइनल का टिकट मिलेगा।
सुपर-8 चरण में इंग्लैंड ने अपने तीनों मुकाबले जीतकर शानदार प्रदर्शन किया है। दूसरी ओर भारतीय टीम ने जिम्बाब्वे और वेस्टइंडीज को हराया, जबकि दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ उसे हार का सामना करना पड़ा था। ऐसे में नियमों के अनुसार मैच रद्द होने की स्थिति में इंग्लैंड को फायदा मिल सकता है।
मौसम का हाल
मौसम विभाग के अनुसार गुरुवार को मुंबई में बारिश की संभावना नहीं है। तापमान 27 से 37 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान है, जिससे दर्शकों को पूरे मुकाबले का आनंद लेने का मौका मिल सकता है।
इंग्लैंड के खिलाफ भारत का पलड़ा भारी
टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भारत का रिकॉर्ड इंग्लैंड के खिलाफ मजबूत रहा है। दोनों टीमों के बीच अब तक 29 मुकाबले खेले गए हैं, जिनमें भारत ने 17 मैच जीते हैं जबकि इंग्लैंड 12 मैचों में विजयी रहा है। पिछली बार 2024 के टी20 विश्व कप सेमीफाइनल में भारत ने इंग्लैंड को 68 रन से हराया था, जबकि 2022 में इंग्लैंड ने भारत को 10 विकेट से मात दी थी।
बल्लेबाजों के लिए अनुकूल है वानखेड़े की पिच
मुंबई का वानखेड़े स्टेडियम बल्लेबाजों के लिए अनुकूल माना जाता है। यहां की पिच फ्लैट रहती है और बाउंड्री छोटी होने के कारण बड़े स्कोर अक्सर देखने को मिलते हैं। नई गेंद से तेज गेंदबाजों को हल्की स्विंग मिल सकती है, लेकिन मैच आगे बढ़ने के साथ बल्लेबाजी आसान हो जाती है। इसी वजह से यहां 200 से ज्यादा का स्कोर भी सुरक्षित नहीं माना जाता।
टॉस की भूमिका
वानखेड़े में खेले गए टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में पहले बल्लेबाजी और लक्ष्य का पीछा करने वाली टीमों को बराबर सफलता मिली है। हालांकि रात के मैचों में ओस का असर देखने को मिलता है, इसलिए कई कप्तान टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करना पसंद करते हैं।
कब और कहां देखें मुकाबला
भारत और इंग्लैंड के बीच यह सेमीफाइनल मुकाबला 5 मार्च को शाम 7 बजे से खेला जाएगा। मैच का सीधा प्रसारण Star Sports नेटवर्क पर किया जाएगा, जबकि ऑनलाइन लाइव स्ट्रीमिंग JioHotstar ऐप और वेबसाइट पर उपलब्ध होगी।
मुकाबला: भारत बनाम इंग्लैंड
स्थान: वानखेड़े स्टेडियम, मुंबई
समय: शाम 7:00 बजे (टॉस 6:30 बजे)
सहस्त्रधारा पेयजल योजना और सतपुली बैराज निर्माण प्रस्ताव को स्वीकृति
देहरादून। मुख्य सचिव आनंद बर्धन की अध्यक्षता में सचिवालय में व्यय-वित्त समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में राज्य के विभिन्न जनपदों से संबंधित महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं पर विचार करते हुए उन्हें अनुमोदन प्रदान किया गया।
प्रमुख स्वीकृत योजनाएं
– अमृत 2.0 के ट्रांच-2 के अंतर्गत सहस्त्रधारा पेयजल योजना को स्वीकृति प्रदान की गई। इस योजना का क्रियान्वयन उत्तराखंड जल संस्थान द्वारा किया जाएगा।
– जनपद पौड़ी गढ़वाल के द्वारीखाल/एकेश्वर विकास खंड के अंतर्गत सतपुली बैराज के निर्माण (पुनरीक्षित) प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई।
– जनपद नैनीताल के हल्द्वानी स्थित फायर स्टेशन में टाइप-द्वितीय, टाइप-तृतीय तथा टाइप-चतुर्थ श्रेणी के कुल आवासों के निर्माण को मंजूरी दी गई।
– जनपद देहरादून के डांडा लखौंड क्षेत्र में सहस्त्रधारा रोड पर शहरी विकास निदेशालय के कार्यालय भवन के निर्माण के प्रस्ताव को अनुमोदित किया गया।
– नगर निगम रुद्रपुर के मुख्य कार्यालय भवन के पुनर्निर्माण के कार्य को भी स्वीकृति प्रदान की गई।
योजनाओं के क्रियान्वयन पर मुख्य सचिव के निर्देश
मुख्य सचिव ने सभी संबंधित विभागों को निर्देशित किया कि स्वीकृत योजनाओं का क्रियान्वयन व्यवहारिक, मितव्ययी, पारदर्शी तथा गुणवत्ता-परक तरीके से सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि सभी परियोजनाओं के कार्य निर्धारित समयसीमा में तेजी से पूर्ण किए जाएं।
उन्होंने परियोजनाओं के क्रियान्वयन के दौरान पारिस्थितिकी संतुलन का विशेष ध्यान रखने तथा योजनाओं को दीर्घकालिक रूप से टिकाऊ (सस्टेनेबल) बनाने के उद्देश्य से कार्य करने के निर्देश भी दिए।
बैठक में सचिव नितेश झा, शैलेश बगौली, एस.ए. अदांकी, युगल किशोर पंत सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
मुख्य सचिव आनंद बर्धन की अध्यक्षता में सचिवालय में व्यय-वित्त समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में राज्य के विभिन्न जनपदों से संबंधित महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं पर विचार करते हुए उन्हें अनुमोदन प्रदान किया गया।
प्रमुख स्वीकृत योजनाएं
– अमृत 2.0 के ट्रांच-2 के अंतर्गत सहस्त्रधारा पेयजल योजना को स्वीकृति प्रदान की गई। इस योजना का क्रियान्वयन उत्तराखंड जल संस्थान द्वारा किया जाएगा।
– जनपद पौड़ी गढ़वाल के द्वारीखाल/एकेश्वर विकास खंड के अंतर्गत सतपुली बैराज के निर्माण (पुनरीक्षित) प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई।
– जनपद नैनीताल के हल्द्वानी स्थित फायर स्टेशन में टाइप-द्वितीय, टाइप-तृतीय तथा टाइप-चतुर्थ श्रेणी के कुल आवासों के निर्माण को मंजूरी दी गई।
– जनपद देहरादून के डांडा लखौंड क्षेत्र में सहस्त्रधारा रोड पर शहरी विकास निदेशालय के कार्यालय भवन के निर्माण के प्रस्ताव को अनुमोदित किया गया।
– नगर निगम रुद्रपुर के मुख्य कार्यालय भवन के पुनर्निर्माण के कार्य को भी स्वीकृति प्रदान की गई।
योजनाओं के क्रियान्वयन पर मुख्य सचिव के निर्देश
मुख्य सचिव ने सभी संबंधित विभागों को निर्देशित किया कि स्वीकृत योजनाओं का क्रियान्वयन व्यवहारिक, मितव्ययी, पारदर्शी तथा गुणवत्ता-परक तरीके से सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि सभी परियोजनाओं के कार्य निर्धारित समयसीमा में तेजी से पूर्ण किए जाएं।
उन्होंने परियोजनाओं के क्रियान्वयन के दौरान पारिस्थितिकी संतुलन का विशेष ध्यान रखने तथा योजनाओं को दीर्घकालिक रूप से टिकाऊ (सस्टेनेबल) बनाने के उद्देश्य से कार्य करने के निर्देश भी दिए।
बैठक में सचिव नितेश झा, शैलेश बगौली, एस.ए. अदांकी, युगल किशोर पंत सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
आमतौर पर यह माना जाता है कि सुनने की क्षमता उम्र बढ़ने के साथ कम होती है, लेकिन अब यह समस्या केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रह गई है। हाल के वर्षों में युवाओं और बच्चों में भी कम सुनाई देने और बहरेपन के मामले तेजी से सामने आ रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार तेज आवाज में लंबे समय तक संगीत सुनना, कानों में संक्रमण, चोट, अधिक वैक्स जमा होना और कुछ दवाओं के दुष्प्रभाव भी सुनने की क्षमता को प्रभावित कर सकते हैं। समय रहते ध्यान न देने पर यह समस्या स्थायी बहरेपन में भी बदल सकती है।
बहरेपन के पीछे क्या हैं कारण
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि सुनने की क्षमता कम होने के कई कारण हो सकते हैं। उम्र बढ़ने के साथ कान के अंदर मौजूद संवेदनशील हिस्सों में धीरे-धीरे क्षति होने लगती है और रक्त संचार भी कम हो जाता है, जिससे सुनने में दिक्कत आती है। इसके अलावा तेज आवाज, जैसे डीजे या धमाके जैसी ध्वनियां कान के भीतर की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचा सकती हैं। कान में संक्रमण, खसरा जैसी बीमारियां और कुछ मामलों में आनुवंशिक कारण भी सुनने की समस्या के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं।
समय पर इलाज न होने पर बढ़ सकती है परेशानी
स्वास्थ्य संगठनों की रिपोर्ट के अनुसार दुनियाभर में बड़ी संख्या में लोग सुनने की क्षमता में कमी से जूझ रहे हैं। यदि कान की सामान्य समस्या का समय पर इलाज न कराया जाए तो यह स्थायी बहरेपन का कारण बन सकती है। कम सुनाई देने का असर केवल शारीरिक ही नहीं बल्कि मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। लंबे समय तक इस समस्या से जूझ रहे लोगों में अकेलापन और अवसाद जैसी समस्याएं भी देखी गई हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक लगातार 85 डेसिबल से अधिक तेज आवाज में रहने से कान के अंदरूनी हिस्से को नुकसान पहुंच सकता है। इसके अलावा मधुमेह और हाई ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियां भी सुनने की क्षमता कम होने के जोखिम को बढ़ाती हैं।
क्या बहरेपन का इलाज संभव है?
डॉक्टरों का कहना है कि हर प्रकार का बहरापन स्थायी नहीं होता। यदि सुनने की समस्या कान में मैल जमा होने या संक्रमण की वजह से है तो सही इलाज और दवाओं से सुनने की क्षमता वापस आ सकती है। हालांकि यदि कान के अंदर की संवेदनशील कोशिकाएं स्थायी रूप से क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं, तो इसे पूरी तरह ठीक करना मुश्किल हो जाता है। ऐसे मामलों में हियरिंग एड जैसे उपकरण मरीजों की मदद करते हैं।
नवजात शिशुओं में यदि सुनने की समस्या का समय रहते पता चल जाए तो कुछ मामलों में उपचार के जरिए स्थिति में सुधार संभव होता है।
जीन थेरेपी से नई उम्मीद
हाल के वर्षों में वैज्ञानिक शोधों ने बहरेपन के इलाज की दिशा में नई उम्मीदें भी जगाई हैं। वर्ष 2025 में स्वीडन के कारोलिंस्का इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए एक अध्ययन में जीन थेरेपी के जरिए जन्मजात बहरेपन के इलाज की संभावना सामने आई। अध्ययन में शामिल कुछ मरीजों में एक विशेष इंजेक्शन के बाद सुनने की क्षमता में सुधार देखा गया। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि इस तकनीक को व्यापक रूप से अपनाने से पहले अभी और बड़े स्तर पर परीक्षण की जरूरत है।
नोट: यह जानकारी विभिन्न मेडिकल रिपोर्ट्स और विशेषज्ञों की सलाह के आधार पर तैयार की गई है।
(साभार)
शिवराज सिंह चौहान के कुशल नेतृत्व में देश के किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए अनेक महत्वपूर्ण कार्य किए जा रहे हैं- गणेश जोशी
देहरादून। प्रदेश के कृषि मंत्री गणेश जोशी ने आज केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान के जन्मदिवस के अवसर पर उनके ‘प्रतिदिन एक पौधरोपण’ के संकल्प के क्रम में अपने शासकीय आवास पर पौधरोपण किया। इस अवसर पर कृषि मंत्री गणेश जोशी ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को जन्मदिवस की बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए उनके स्वस्थ, दीर्घायु और सफल जीवन की कामना की।
कृषि मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि शिवराज सिंह चौहान के कुशल नेतृत्व में देश के किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए अनेक महत्वपूर्ण कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जनसेवा के प्रति शिवराज सिंह चौहान का समर्पण, कर्तव्यनिष्ठा और संवेदनशीलता हम सभी के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए पौधरोपण जैसे प्रयास अत्यंत आवश्यक हैं और समाज के प्रत्येक व्यक्ति को प्रकृति के संरक्षण के लिए आगे आना चाहिए।
इस अवसर पर सरकार में दायित्वधारी जगत सिंह चौहान, भाजपा नेता रामशरण नौटियाल, लक्ष्मण सिंह रावत, युवा मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष ठाकुर धीरेन्द्र सिंह, दीपक भट्ट आदि उपस्थित रहे।
नागरिकता मुद्दे पर ममता बनर्जी ने कहा– पीढ़ियों से देश के नागरिक हैं मतुआ लोग
कोलकाता। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गुरुवार को केंद्र सरकार पर मतुआ समुदाय को लेकर राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि नागरिकता के मुद्दे पर केंद्र की नीतियों से मतुआ समुदाय के लोगों में असमंजस और असुरक्षा की स्थिति पैदा हो रही है। मतुआ समुदाय की आध्यात्मिक नेता बिनापानी देवी ‘बरोमा’ की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि वर्षों से देश में रह रहे लोगों की नागरिकता पर सवाल खड़ा करना उचित नहीं है।
कई पीढ़ियों से देश के नागरिक हैं मतुआ समुदाय के लोग
ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि मतुआ समुदाय के लोग कई पीढ़ियों से भारत में रह रहे हैं और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लेते आए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि नागरिकता के नाम पर उन्हें अनिश्चितता और भ्रम की स्थिति में डालने की कोशिश की जा रही है। बनर्जी ने कहा कि मतदाता सूची से नाम हटाने जैसी प्रक्रियाओं के जरिए समुदाय को परेशान किया जा रहा है।
अधिकारों से समझौता नहीं करेगी राज्य सरकार
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार मतुआ समुदाय के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार से समुदाय के अधिकारों को कमजोर करने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी। राज्य सरकार ऐसे हर कदम का विरोध करेगी जो बंगाल के लोगों के हितों के खिलाफ होगा।
बरोमा से रहा विशेष जुड़ाव
ममता बनर्जी ने कहा कि बिनापानी देवी के साथ उनका व्यक्तिगत और आध्यात्मिक संबंध रहा है और उन्हें उनका मातृस्नेह प्राप्त हुआ था। उन्होंने बरोमा के सामाजिक योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने जीवनभर समानता और भाईचारे के मूल्यों को आगे बढ़ाने का काम किया।
समुदाय के विकास के लिए कई पहल
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने मतुआ समुदाय के कल्याण के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं। इनमें मतुआ विकास बोर्ड की स्थापना और उत्तर 24 परगना के ठाकुरनगर में हरिचंद-गुरुचंद विश्वविद्यालय की स्थापना जैसे कदम शामिल हैं। उन्होंने कहा कि सरकार आगे भी समुदाय के सामाजिक और शैक्षिक विकास के लिए काम करती रहेगी।
पॉप संगीत की दुनिया के बेताज बादशाह माइकल जैक्सन के जीवन पर आधारित बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘माइकल’ का ट्रेलर रिलीज कर दिया गया है। ट्रेलर में उनके संघर्ष, सफलता और निजी जिंदगी के कई अहम पहलुओं को दिखाया गया है। दमदार डांस मूव्स और भावनात्मक दृश्यों से भरपूर यह फिल्म दर्शकों को माइकल जैक्सन के जीवन की अनकही कहानी से रूबरू कराएगी।
करीब 2 मिनट 27 सेकंड के ट्रेलर में माइकल जैक्सन के बचपन से लेकर सुपरस्टार बनने तक का सफर दिखाया गया है। ट्रेलर की शुरुआत उनके शुरुआती दिनों से होती है, जब उनके परिवार और करीबी लोग उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते नजर आते हैं। जैसे-जैसे वह सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंचते हैं, दुनिया भर में उनके प्रशंसकों की दीवानगी भी दिखाई गई है।
ट्रेलर में कई भावनात्मक पल भी शामिल हैं, जिनमें माइकल का अपने परिवार के साथ गहरा रिश्ता दिखता है। इसके साथ ही उनके मशहूर डांस स्टेप्स और स्टेज परफॉर्मेंस की झलक भी दर्शकों को देखने को मिलती है। ट्रेलर में उनकी सेहत से जुड़े कठिन दौर को भी दिखाया गया है। इसमें माइकल का एक संवाद खासा प्रभावशाली है—“संगीत दुनिया को बदलने की ताकत रखता है।”
फिल्म ‘माइकल’ की घोषणा फरवरी 2022 में की गई थी, जबकि इसकी शूटिंग 2024 में शुरू हुई। नवंबर 2025 में इसका टीजर जारी किया गया था। अब यह फिल्म 24 अप्रैल 2026 को अमेरिका के सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है।
फिल्म में माइकल जैक्सन की भूमिका उनके भतीजे जाफर जैक्सन निभा रहे हैं, जो इस फिल्म के जरिए अभिनय की दुनिया में कदम रख रहे हैं। इसके अलावा फिल्म में निया लॉन्ग, लौरा हैरियर, जूलियानो क्रू वाल्दी, माइल्स टेलर और कोलमैन डोमिंगो भी अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे। फिल्म का निर्देशन एंटोनी फुक्वा ने किया है।
(साभार)
मौसम विभाग का अनुमान, प्रदेश में तापमान छह से सात डिग्री तक बढ़ने के आसार
देहरादून। उत्तराखंड में मार्च की शुरुआत के साथ ही तापमान में तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। मौसम विभाग के अनुसार इस सप्ताह प्रदेश में मौसम शुष्क रहने की संभावना है, जिससे मैदान से लेकर पहाड़ी क्षेत्रों तक गर्मी का असर और बढ़ सकता है।
मौसम विज्ञान केंद्र के पूर्वानुमान के मुताबिक छह मार्च तक प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में मौसम साफ और शुष्क बना रहेगा। इसके चलते तापमान में सामान्य से छह से सात डिग्री तक बढ़ोतरी होने की संभावना जताई गई है। हालांकि सात मार्च के आसपास पर्वतीय क्षेत्रों में मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है और हल्की बारिश या बादल छाने की स्थिति बन सकती है।
इन दिनों दिनभर तेज धूप निकलने के कारण तापमान लगातार बढ़ रहा है। देहरादून समेत कई मैदानी इलाकों में मार्च की शुरुआत ही गर्म दिन के साथ हुई है। हाल के दिनों में देहरादून का अधिकतम तापमान सामान्य से अधिक दर्ज किया गया, जो लगभग 29.7 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। पिछले कई वर्षों के आंकड़ों के अनुसार मार्च के शुरुआती दिनों में इतना अधिक तापमान कम ही देखने को मिला है।
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि इस बार तापमान में बढ़ोतरी के पीछे जलवायु परिवर्तन और मौसम के बदलते पैटर्न को प्रमुख कारण माना जा रहा है। इसके अलावा जनवरी और फरवरी में सामान्य से कम बारिश होने की वजह से भी तापमान में तेजी से वृद्धि हो रही है।
विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि मौसम का यही रुख बना रहा तो इस वर्ष मार्च का महीना पिछले वर्षों की तुलना में अधिक गर्म रह सकता है और तापमान के नए रिकॉर्ड भी बन सकते हैं। प्रदेश में बढ़ती गर्मी को देखते हुए लोगों को दोपहर के समय धूप से बचाव करने और पर्याप्त पानी पीने की सलाह दी जा रही है।
जंगल की आग से वन्यजीवों और पर्यावरण पर मंडराया संकट
चमोली। उत्तराखंड के चमोली जिले के बद्रीनाथ वन प्रभाग में जंगलों में लगी आग ने विकराल रूप ले लिया है। मध्य पिंडर रेंज के कई वन क्षेत्र इसकी चपेट में आ गए हैं, जिससे आसपास के गांवों में दहशत का माहौल बन गया है। वन विभाग और अग्निशमन दल की टीमें आग पर काबू पाने के लिए लगातार प्रयास कर रही हैं, लेकिन दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियां राहत कार्य में बड़ी चुनौती बन रही हैं।
बताया जा रहा है कि मध्य पिंडर रेंज के अंतर्गत चेपड़ों और सौगांव गांवों के पास जंगलों में लगी आग तेजी से फैलते हुए खाड़ीबगड़, सौगांव जूनिधार और गोठिंडा क्षेत्र के वनों तक पहुंच गई है। आग इतनी भीषण है कि इसकी लपटें काफी ऊंचाई तक उठती दिखाई दे रही हैं। अब तक करीब 20 हेक्टेयर से अधिक वन क्षेत्र जलकर खाक हो चुका है।
आग का असर स्थानीय ग्रामीणों पर भी पड़ने लगा है। चेपड़ों गांव के पास स्थित कुछ गौशालाएं भी आग की चपेट में आ गई हैं, जिससे ग्रामीणों में चिंता बढ़ गई है। वहीं आग की लपटें जूनिधार गांव की ओर बढ़ने से आबादी वाले इलाकों के लिए खतरा पैदा हो गया है।
वन विभाग के अनुसार घने चीड़ के जंगल और खड़ी चट्टानों वाला इलाका होने के कारण आग बुझाने में काफी दिक्कत आ रही है। रात के समय अंधेरा, गिरते पत्थर और जलते हुए पेड़ों के कारण राहत और बचाव कार्य प्रभावित हो रहा है। वन क्षेत्राधिकारी मनोज देवराड़ी ने बताया कि विभाग की टीमें पूरी रात आग पर काबू पाने की कोशिश करती रहीं, लेकिन आग अभी पूरी तरह नियंत्रित नहीं हो पाई है।
आग का असर आसपास के यातायात पर भी पड़ रहा है। जलते हुए पेड़ और पत्थर थराली-देवाल स्टेट हाईवे पर गिरने से इस मार्ग पर आवाजाही करने वाले लोगों के लिए खतरा बढ़ गया है। इसके साथ ही जंगल में रहने वाले वन्यजीवों और वनस्पतियों को भी भारी नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है। वन विभाग की टीमें हालात पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
