देहरादून। राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में कानून व्यवस्था, स्वास्थ्य सेवाओं, श्रमिक कल्याण और स्वरोजगार योजनाओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।
कैबिनेट के निर्णय
1.राज्य मंत्रिमंडल के निर्णय के बाद उत्तराखंड में ड्रग फ्री मुहिम और तेज होगी। अभी तक एंटी नारकोटिक्स टॉस्क फोर्स में पुलिस फोर्स से प्रतिनियुक्ति पर कार्मिक लिए जा रहे थे। टॉस्क फोर्स का गठन 2022 में किया गया था। अब इस फोर्स के लिए अलग से ढांचा खड़ा करने की शुरूआत हुई है। इस क्रम में राज्य मुख्यालय में पहली बार 22 पदों का सृजन किया गया है। एक पुलिस उपाधीक्षक, दो ड्रग निरीक्षक, एक निरीक्षक, दो उपनिरीक्षक, चार मुख्य आरक्षी और आठ आरक्षी, दो आरक्षी चालक समेत कुल 22 पद सृजित किए जाएंगे।
2.राज्य मंत्रिमंडल ने वन विभाग में कार्यरत दैनिक श्रमिकों को न्यूनतम वेतनमान दिए जाने का निर्णय लिया है। इस संबंध में मंत्रिमंडलीय उप-समिति ने सरकार को संस्तुति दी थी। इस आधार पर सरकार ने 589 दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को न्यूनतम 18 हजार रूपये वेतन देने का निर्णय लिया है। वन विभाग/वन विकास निगम में कार्यरत दैनिक श्रमिकों की कुल संख्या 893 है, जिसमें से 304 श्रमिकों को पूर्व से ही न्यूनतम वेतनमान का लाभ प्राप्त हो रहा है।
3.राज्य मंत्रिमंडल ने कर्मचारी राज्य बीमा योजना (ईएसआई) के अंतर्गत चिकित्सा सेवा संवर्ग के चिकित्सा अधिकारियों और उच्चतर पदों की सेवा-शर्तों के निर्धारण के संबंध में भी महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। इस क्रम में उत्तराखण्ड कर्मचारी राज्य बीमा योजना, श्रम चिकित्सा सेवा नियमावली, 2026” को प्रख्यापित किया गया है, जिसके तहत कुल 94 पद होगें। इनमें 76 चिकित्सा अधिकारी, 11 सहायक निदेशक, छह संयुक्त निदेशक और एक अपर निदेशक का पद शामिल है। इससे पहले, ईएसआई के ढांचे में एक सीएमओ और 13 चिकित्सा अधिकारी के पद शामिल थे।
4.मुख्यमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना की कार्यान्वयन अवधि वित्तीय वर्ष 2025-26 तक विस्तारित किए जाने के संबंध में भी राज्य मंत्रिमंडल ने निर्णय लिया है। खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा केंद्र प्रायोजित योजना प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना की कार्यान्वयन अवधि को एक वर्ष के लिए 31 मार्च 2026 (वित्तीय वर्ष 2025-26) तक बढ़ाया गया है। इस क्रम में राज्य सेक्टर के अंतर्गत संचालित “मुख्यमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना की कार्यान्वयन अवधि को भी वित्तीय वर्ष 2025-26 (दिनांक 31 मार्च 2026) तक विस्तारित करने का निर्णय लिया गया है। साथ ही यह भी निर्णय लिया गया है कि भविष्य में यदि भारत सरकार के स्तर पर इस योजना की अवधि विस्तारित होती है, तो राज्य में भी इसे विस्तारित माना जाएगा।
5.राज्य मंत्रिमंडल ने उत्तराखंड कारागार और सुधारात्मक सेवाएं (संशोधन) अधिनियम, 2026 के प्रारूपण के संबंध में भी निर्णय लिया है। माननीय सर्वाेच्च न्यायालय के आदेशों में यह निर्देशित किया गया है कि कारागार नियमावलियों/मॉडल प्रिजन मैनुअल में प्रयुक्त “आदतन अपराधी (Habitual offenders)” शब्द की परिभाषा संबंधित राज्य विधानमंडलों द्वारा अधिनियमित कानूनों के अनुरूप होनी चाहिए। संशोधन विधेयक को आगामी सत्र में माननीय उत्तराखंड विधान सभा के समक्ष पुनः स्थापित किए जाने की राज्य मंत्रिमंडल ने अनुमोदन प्रदान कर दिया है।
6.कोविड-19 वैश्विक महामारी के दौरान उद्योगों को राहत प्रदान किए जाने के उद्देश्य से बोनस संदाय (उत्तराखण्ड संशोधन) विधेयक, 2020 के अंतर्गत यह प्रावधान किया गया था कि नियोजक के पास आवंटनीय अधिशेष (Allocable Surplus) उपलब्ध होने की स्थिति में ही कर्मचारियों को न्यूनतम बोनस का भुगतान किया जाएगा। उक्त विधेयक में किए गए प्रावधानों के संबंध में श्रम एवं रोजगार मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा असहमति व्यक्त की गई। साथ ही वर्तमान में कोविड-19 महामारी जैसी परिस्थितियाँ विद्यमान न होने तथा गृह मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा प्रस्तावित विधेयक को राष्ट्रपति की अनुमति के बिना विधायी एवं संसदीय कार्य विभाग, उत्तराखण्ड शासन को उपलब्ध कराए जाने के कारण विधेयक को आगे बढ़ाया जाना संभव नहीं हो पाया। उपरोक्त तथ्यों के दृष्टिगत बोनस संदाय (उत्तराखण्ड संशोधन) विधेयक, 2020 को यथास्थिति विधान सभा से वापस लिए जाने का निर्णय राज्य सरकार द्वारा लिया गया है।
स्कूल गोलीकांड के बाद ब्रिटिश कोलंबिया में हाई अलर्ट
ब्रिटिश कोलंबिया, कनाडा। कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया प्रांत से एक बेहद दर्दनाक और सनसनीखेज घटना सामने आई है। टम्बलर रिज शहर में स्थित एक स्कूल में हुई गोलीबारी में हमलावर समेत कुल दस लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। घटना की पुष्टि रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (RCMP) ने की।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, संदिग्ध हमलावर घटनास्थल पर मृत अवस्था में मिला। प्रारंभिक जांच में आशंका जताई जा रही है कि हमलावर ने गोलीबारी के बाद खुद को भी गोली मार ली। हालांकि, जांच एजेंसियां इस बात की भी पड़ताल कर रही हैं कि क्या इस हमले में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका थी।
छोटे शहर में दहशत का माहौल
यह गोलीबारी टम्बलर रिज नामक कस्बे में हुई है, जिसकी आबादी करीब 2,400 है। घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत फैल गई। पुलिस ने एहतियातन लोगों से घरों में ही रहने और सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने की अपील की है। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए आसपास के इलाकों से अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।
स्कूल बंद, सुरक्षा कड़ी
पीस रिवर साउथ स्कूल डिस्ट्रिक्ट ने सुरक्षा कारणों से टम्बलर रिज सेकेंडरी स्कूल और टम्बलर रिज एलीमेंट्री स्कूल को तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया है। दोनों स्कूलों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। जानकारी के अनुसार, टम्बलर रिज सेकेंडरी स्कूल में कक्षा 7 से 12 तक करीब 175 छात्र अध्ययनरत हैं।
मेडिकल और आपात सेवाएं तैनात
घटना के बाद इलाके में बड़ी संख्या में पुलिस, एंबुलेंस और आपातकालीन चिकित्सा दलों को भेजा गया है। पीस रिवर साउथ के विधायक लैरी न्यूफेल्ड ने बताया कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है, हालांकि सुरक्षा कारणों से विस्तृत जानकारी साझा नहीं की जा सकती।
उन्होंने स्थानीय लोगों से अपील की है कि अफवाहों पर ध्यान न दें और जिनके परिजन सुरक्षित हैं, वे घर लौट जाएं ताकि जांच एजेंसियों को अपना काम करने में कोई बाधा न आए। पुलिस ने भरोसा दिलाया है कि शहर में जल्द ही हालात सामान्य किए जाएंगे।
अक्सर यह माना जाता है कि धूम्रपान न करने वाले लोग फेफड़ों की बीमारियों और कैंसर जैसी घातक समस्याओं से सुरक्षित रहते हैं, लेकिन यह धारणा पूरी तरह सही नहीं है। सिगरेट या बीड़ी न पीने के बावजूद यदि कोई व्यक्ति दूसरे के धुएं के संपर्क में आता है, तो वह भी गंभीर स्वास्थ्य जोखिम झेल सकता है। इसी खतरे को चिकित्सा भाषा में पैसिव स्मोकिंग कहा जाता है, जो धीरे-धीरे शरीर को नुकसान पहुंचाती है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार सिगरेट के धुएं में करीब 7,000 से अधिक जहरीले रसायन पाए जाते हैं, जिनमें से दर्जनों तत्व सीधे कैंसर का कारण बन सकते हैं। यह धुआं लंबे समय तक हवा में बना रहता है, जिससे बंद कमरे, दफ्तर या वाहन में इसका असर और भी खतरनाक हो जाता है।
हृदय और रक्त वाहिकाओं पर तुरंत असर
अध्ययनों से सामने आया है कि पैसिव स्मोकिंग के संपर्क में आने के 30 मिनट के भीतर ही हृदय और रक्त वाहिकाओं पर नकारात्मक प्रभाव शुरू हो जाता है। धुएं में मौजूद निकोटीन और कार्बन मोनोऑक्साइड धमनियों की भीतरी सतह को क्षतिग्रस्त कर देती हैं, जिससे रक्त संचार बाधित होता है। लंबे समय तक संपर्क में रहने से हार्ट अटैक और कोरोनरी हार्ट डिजीज का खतरा 25 से 30 प्रतिशत तक बढ़ सकता है।
फेफड़ों का कैंसर और सांस की बीमारियां
जो लोग स्वयं धूम्रपान नहीं करते, उनमें भी फेफड़ों के कैंसर का एक बड़ा कारण पैसिव स्मोकिंग मानी जाती है। यह धुआं फेफड़ों की संवेदनशील कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाता है, जिससे शरीर में ऑक्सीजन की आपूर्ति प्रभावित होती है। इसके परिणामस्वरूप अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD) जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। साथ ही, यह धुआं फेफड़ों की प्राकृतिक सफाई प्रणाली को भी निष्क्रिय कर देता है।
बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए सबसे ज्यादा जोखिम
चिकित्सकों का कहना है कि पैसिव स्मोकिंग का सबसे गंभीर असर बच्चों और गर्भवती महिलाओं पर पड़ता है। बच्चों के फेफड़े पूरी तरह विकसित नहीं होते, ऐसे में यह धुआं उनके लिए धीमे ज़हर की तरह काम करता है। इसके संपर्क में रहने वाले बच्चों में कान के संक्रमण, निमोनिया और अचानक शिशु मृत्यु सिंड्रोम (SIDS) का खतरा बढ़ जाता है। वहीं गर्भवती महिलाओं में समय से पहले प्रसव और नवजात का वजन कम होने जैसी जटिलताएं देखी गई हैं।
धुआं मुक्त वातावरण ही है बचाव का उपाय
पैसिव स्मोकिंग से बचने का सबसे प्रभावी तरीका धुआं मुक्त माहौल बनाना है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि घर, कार्यस्थल और सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान पर सख्ती से रोक लगाई जाए। परिवार के किसी भी सदस्य को घर के अंदर सिगरेट या बीड़ी पीने की अनुमति न देना स्वास्थ्य सुरक्षा की दिशा में एक जरूरी कदम है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि दूसरे के धुएं को नजरअंदाज करना भविष्य में गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है। समय रहते जागरूकता और सावधानी ही आने वाली पीढ़ियों को स्वस्थ और सुरक्षित जीवन दे सकती है।
नोट: यह लेख विभिन्न मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य अध्ययनों पर आधारित है।
(साभार)
सरस मेला और फूड फेस्टिवल 2026 की तैयारियों को लेकर मंत्री गणेश जोशी ने की समीक्षा बैठक
देहरादून। ग्राम्य विकास मंत्री गणेश जोशी ने कैंप कार्यालय में ग्राम्य विकास विभाग के अधिकारियों के साथ आगामी सरस मेला एवं फूड फेस्टिवल 2026 की तैयारियों को लेकर समीक्षा बैठक की। बैठक के दौरान ग्राम्य विकास मंत्री गणेश जोशी ने निर्देश दिए कि जनपद उधम सिंह नगर में 14 से 23 फरवरी तक आयोजित होने वाले 10 दिवसीय सरस मेला तथा जनपद चम्पावत में 18 से 24 फरवरी तक प्रस्तावित सात दिवसीय फूड फेस्टिवल की सभी आवश्यक तैयारियां समयबद्ध रूप से पूर्ण की जाएं, ताकि कार्यक्रमों का सफल आयोजन सुनिश्चित हो सके।
इस अवसर पर मंत्री गणेश जोशी ने ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ ब्रांड की प्रगति की भी जानकारी ली। विभागीय अधिकारियों ने अवगत कराया कि पहाड़ की महिलाओं द्वारा तैयार उत्तराखण्डी उत्पादों के इस ब्रांड ने लॉन्चिंग के मात्र दो वर्षों के भीतर साढ़े तीन करोड़ रुपये से अधिक की बिक्री कर उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की है। उन्होंने बताया कि आगामी समय में हाउस ऑफ हिमालयाज के उत्पाद विदेशों में भी बिक्री के लिए उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे स्थानीय महिलाओं को रोजगार के नए अवसर प्राप्त होंगे।
ग्राम्य विकास मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि राज्य सरकार ग्रामीण आजीविका, महिला सशक्तिकरण एवं स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। इस अवसर पर अपर सचिव ग्राम्य विकास झरना कमठान सहित अन्य अधिकारीगण उपस्थित रहे।
वारदात को अंजाम देने के बाद फरार हुए आरोपी
देहरादून। शहर के तिब्बती मार्केट क्षेत्र में दिनदहाड़े गोलीकांड की सनसनीखेज वारदात सामने आई। अज्ञात बदमाशों ने एक युवक को गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया। प्रारंभिक जांच में घटना के पीछे आपसी रंजिश की आशंका जताई जा रही है। सूचना मिलते ही पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे और पूरे इलाके को घेरकर जांच शुरू कर दी गई।
पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक हमलावर दोपहिया वाहन से मौके पर पहुंचे थे और वारदात को अंजाम देने के बाद फरार हो गए। मृतक की पहचान अर्जुन सिंह (40) के रूप में हुई है, जो अमरदीप गैस एजेंसी के संचालक बताए जा रहे हैं। बताया गया है कि अर्जुन परेड ग्राउंड में टेनिस खेलने आए थे और इसी दौरान जब वह अपनी कार में बैठे थे, तभी अचानक आए हमलावरों ने उन पर गोली चला दी, जो सीधे सीने में लगी।
पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी में रखवा दिया है। एसपी सिटी प्रमोद कुमार ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जांच की जा रही है। आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है तथा पुलिस की कई टीमें जांच में जुटी हुई हैं।
गौरतलब है कि देहरादून जिले में दो सप्ताह के भीतर यह चौथी हत्या है। इससे पहले 29 जनवरी को विकासनगर क्षेत्र में एक छात्रा की हत्या हुई थी। 31 जनवरी को ऋषिकेश में एक महिला प्रीति रावत की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। जबकि 2 फरवरी को देहरादून के मच्छी बाजार में गुंजन नामक युवती की चापड़ से हत्या कर दी गई थी। इन घटनाओं ने राजधानी में कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
फिल्म ‘बॉर्डर 2’ ने रिलीज के बाद से बॉक्स ऑफिस पर अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखी है। 23 जनवरी को सिनेमाघरों में दस्तक देने वाली इस फिल्म को शुरुआत से ही दर्शकों का भरपूर समर्थन मिला। पहले चार दिनों में शानदार ओपनिंग के बाद फिल्म ने वीकेंड और 26 जनवरी की छुट्टी का पूरा लाभ उठाया, जिससे इसकी कमाई में तेजी देखने को मिली।
बीते वीकेंड भी फिल्म के कलेक्शन में अच्छा उछाल दर्ज किया गया था। हालांकि सोमवार को कारोबार में गिरावट आई और फिल्म की कमाई सीमित रही, लेकिन मंगलवार को एक बार फिर आंकड़ों में सुधार देखने को मिला। मंगलवार को फिल्म ने 2.84 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया, जिसके साथ ही घरेलू बॉक्स ऑफिस पर इसकी कुल कमाई 314.59 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है।
वैलेंटाइन वीक के दौरान भी यह एक्शन ड्रामा दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींचने में सफल रही है। देशभक्ति और दमदार एक्शन से सजी इस फिल्म में सनी देओल, दिलजीत दोसांझ, अहान शेट्टी और वरुण धवन अहम भूमिकाओं में नजर आ रहे हैं। मजबूत स्टारकास्ट और विषयवस्तु के दम पर ‘बॉर्डर 2’ का बॉक्स ऑफिस पर सफर अभी जारी रहने की उम्मीद है।
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विभागीय आपदा प्रबंधन योजना बनाने की डेडलाइन तय, 28 फरवरी तक का दिया समय
देहरादून। सेंदाई फ्रेमवर्क (2015-2030) के लक्ष्यों की समयबद्ध प्राप्ति सुनिश्चित करने के लिए सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने राज्य के सभी रेखीय विभागों को अपने-अपने विभागीय आपदा प्रबंधन प्लान को 28 फरवरी तक अनिवार्य रूप से अंतिम रूप देने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि आपदा प्रबंधन योजनाएं केवल औपचारिक दस्तावेज न रहकर विभागीय कार्यप्रणाली का अभिन्न हिस्सा बननी चाहिए, ताकि आपदा के समय त्वरित, समन्वित और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन योजना में सेंडई फ्रेमवर्क के अंतर्गत आपदा जोखिम न्यूनीकरण, तैयारी, प्रतिक्रिया और पुनर्बहाली से जुड़े लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए सभी विभागों को अपने-अपने दायित्वों को स्पष्ट रूप से परिभाषित करना होगा। योजनाओं में यह स्पष्ट रूप से अंकित होना चाहिए कि आपदा से पहले, आपदा के दौरान और आपदा के बाद विभाग की भूमिका क्या होगी तथा किस अधिकारी और इकाई द्वारा कौन-सा कार्य किया जाएगा।
राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र में आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान सचिव सुमन ने निर्देश दिए कि प्लान में विभागीय अधिकारियों, कर्मचारियों एवं आम जनमानस के क्षमता विकास को विशेष प्राथमिकता दी जाए। इसके लिए प्रत्येक विभाग वार्षिक प्रशिक्षण कैलेंडर तैयार करे, जिसमें यह स्पष्ट रूप से दर्शाया जाए कि किस माह में कौन-सा प्रशिक्षण, अभ्यास या जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इस वार्षिक कैलेंडर को विभागीय आपदा प्रबंधन प्लान का अनिवार्य भाग बनाया जाए, ताकि तैयारी एक सतत प्रक्रिया के रूप में चलती रहे।
उन्होंने सभी विभागों को अपने-अपने विभाग में उपलब्ध मानव संसाधनों, मशीनरी, उपकरणों एवं तकनीकी संसाधनों की विस्तृत सूची तैयार कर इन संसाधनों की जीआईएस आधारित मैपिंग करने तथा इसे प्लान में शामिल करने के निर्देश दिए ताकि आपदा के समय संसाधनों की त्वरित पहचान और उपयोग संभव हो सके। साथ ही भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए नए एवं अत्याधुनिक उपकरणों की खरीद की योजना को भी विभागीय प्लान में सम्मिलित करने के निर्देश दिए गए।
समीक्षा के दौरान विभागों द्वारा आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई के लिए योजना, संकट के समय निर्णय एवं समन्वय की प्रक्रिया, सूचना एवं संचार की योजना, राहत एवं बचाव कार्यों की तैयारी, आपदा के बाद पुनर्बहाली एवं पुनर्निर्माण की व्यवस्था, प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली, भविष्य में होने वाले नुकसान को कम करने के उपाय, स्थानीय समुदाय की सहभागिता तथा नुकसान के आकलन और जोखिम मूल्यांकन से संबंधित व्यवस्थाओं के बारे जानकारी दी गई। सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने बताया कि विभागीय आपदा प्रबंधन प्लान विभाग को आपदा के समय स्पष्ट दिशा, तय जिम्मेदारी और पूर्व-निर्धारित कार्यप्रणाली उपलब्ध कराने में उपयोगी सिद्ध होगा।
उन्होंने बताया कि विभागीय आपदा प्रबंधन योजना के माध्यम से विभागीय संसाधनों का बेहतर उपयोग, अंतर-विभागीय समन्वय, त्वरित निर्णय प्रक्रिया तथा प्रभावी राहत एवं पुनर्वास सुनिश्चित किया जा सकता है। साथ ही यह योजना विकास कार्यों में आपदा जोखिम न्यूनीकरण को मुख्यधारा में लाने और बिल्ड बैक बेटर की अवधारणा को लागू करने में भी सहायक होगी। बैठक में स्वास्थ्य एवं शिक्षा विभाग के अधिकारियों द्वारा स्कूल आपदा प्रबंधन प्लान तथा हॉस्पिटल आपदा प्रबंधन प्लान के संबंध में भी जानकारी दी गई।
बैठक में यूएसडीएमए के वित्त नियंत्रक अभिषेक कुमार आनंद, संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी मो0 ओबैदुल्लाह अंसारी, डाॅ पीडी माथुर, डाॅ. बिमलेश जोशी, यूजेवीएनएल के ईई मनोज रावत, शहरी विकास के सहायक निदेशक विनोद कुमार, डिप्टी डायरेक्टर सोनिका पंत, पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक डाॅ. सुनील कुमार अवस्थी, डाॅ अशोक कुमार, शिक्षा विभाग से रचना रावत, विमल असवाल, राजेश लाम्बा, नवीन सिंघल, एसई पिटकुल बीएस पांगती के साथ ही विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
विभागों को माॅक ड्रिल कराने के निर्देश
सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने निर्देश दिए कि सभी विभाग नियमित रूप से आपदा के दौरान अपने-अपने विभाग से संबंधित कार्यों को लेकर मॉक अभ्यास आयोजित करें, जिससे आपदा के समय विभागीय मानव संसाधन, उपकरणों, संचार व्यवस्था एवं समन्वय क्षमता का वास्तविक परीक्षण हो सके। मॉक अभ्यास के दौरान सामने आने वाली कमियों को दूर किया जाए ताकि आपदा की स्थिति में प्रभावी रूप से राहत एवं बचाव कार्य संचालित किए जा सकें।
आपदा प्रबंधन प्लान में ये रहेंगे शामिल
* राज्य एवं विभाग से संबंधित आपदा जोखिम एवं संवेदनशीलता विश्लेषण
* रोकथाम एवं न्यूनीकरण के उपाय
* तैयारी एवं प्रतिक्रिया योजना
* उपलब्ध मानव, मशीनरी एवं तकनीकी संसाधनों का विवरण
* इमरजेंसी एक्शन प्लान एवं एसओपी
* अर्ली वार्निंग एवं सूचना प्रसारण व्यवस्था
* राहत, पुनर्वास, रिकवरी एवं रिकंस्ट्रक्शन योजना
* डैमेज एंड लॉस असेसमेंट की प्रक्रिया
* क्षमता विकास एवं वार्षिक प्रशिक्षण कैलेंडर
* बिल्ड बैक बेटर एवं विकास योजनाओं में आपदा जोखिम न्यूनीकरण का समावेशन
हरिद्वार–रुड़की महायोजना- 2041 के प्रारूप पर समीक्षा, शहरी विकास को मिलेगी नई दिशा
देहरादून। उत्तराखंड में नियोजित, संतुलित एवं सतत शहरी विकास को गति देने के उद्देश्य से आवास विभाग द्वारा लगातार ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। इसी क्रम में भारत सरकार द्वारा वित्त पोषित अमृत 1.0 योजना के अंतर्गत प्रस्तावित हरिद्वार एवं रुड़की महायोजना–2041 के प्रारूप पर नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग की समीक्षा बैठक आयोजित की गई।
भविष्य के शहरों का रोडमैप
बैठक में हरिद्वार एवं रुड़की क्षेत्र के दीर्घकालिक विकास को दृष्टिगत रखते हुए महायोजना के विभिन्न प्रावधानों पर विस्तृत चर्चा की गई। इसमें भूमि उपयोग, आवासीय एवं औद्योगिक क्षेत्रों का संतुलित विकास, यातायात प्रबंधन, आधारभूत सुविधाओं का विस्तार, पर्यावरण संरक्षण तथा सार्वजनिक सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं को प्राथमिकता दी गई। शशि मोहन श्रीवास्तव, चीफ टॉउन एंड कन्ट्री प्लॉनर ने इस योजना की बावत सभी महत्वपूर्ण जानकारी सचिव आवास डॉ आर राजेश कुमार से साझा की। शशि मोहन श्रीवास्तव द्वारा महायोजना के प्रारूप की विस्तृत प्रस्तुति देते हुए अब तक की गई कार्यवाही और आगामी चरणों की जानकारी दी गई।
सार्वजनिक सहभागिता को मिला विशेष महत्व
उल्लेखनीय है कि हरिद्वार एवं रुड़की महायोजना–2041 के प्रारूप पर सार्वजनिक सुनवाई की प्रक्रिया सफलतापूर्वक संपन्न की जा चुकी है। इस प्रक्रिया के अंतर्गत हरिद्वार महायोजना के लिए लगभग 350 तथा रुड़की महायोजना के लिए लगभग 550 सुझाव एवं आपत्तियां प्राप्त हुई हैं। बैठक के दौरान इन सभी आपत्तियों एवं सुझावों पर बिंदुवार चर्चा करते हुए उनके निस्तारण की प्रक्रिया को अंतिम रूप देने पर मंथन किया गया। आवास सचिव डॉ आर राजेश कुमार ने स्पष्ट निर्देश दिए कि जनता से प्राप्त प्रत्येक सुझाव का गंभीरता, पारदर्शिता एवं नियमानुसार परीक्षण किया जाए, ताकि महायोजना जनअपेक्षाओं के अनुरूप और व्यावहारिक बन सके।
नियोजित विकास से सशक्त होगा हरिद्वार–रुड़की क्षेत्र
आवास सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने बैठक के दौरान कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार उत्तराखंड के शहरों को आधुनिक, सुव्यवस्थित और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप विकसित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। हरिद्वार एवं रुड़की महायोजना–2041 का उद्देश्य केवल भौतिक विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें पर्यावरण संरक्षण, बेहतर यातायात व्यवस्था, सुदृढ़ आधारभूत ढांचा और नागरिकों को उच्च जीवन स्तर प्रदान करना भी शामिल है। सार्वजनिक सुनवाई के माध्यम से प्राप्त सुझावों एवं आपत्तियों को गंभीरता से लिया गया है, ताकि महायोजना वास्तविक जरूरतों को प्रतिबिंबित कर सके। अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूर्ण करते हुए महायोजना को शीघ्र अंतिम रूप दिया जाए, जिससे क्षेत्र के नियोजित एवं सतत विकास को नई गति मिल सके।
शीघ्र अनुमोदन की दिशा में कार्रवाई
बैठक के अंत में आवास सचिव द्वारा नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि महायोजना–2041 को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में समयबद्धता सुनिश्चित की जाए, ताकि इसे शीघ्र शासन स्तर पर अनुमोदन हेतु प्रस्तुत किया जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि महायोजना का प्रभावी क्रियान्वयन आने वाले वर्षों में हरिद्वार एवं रुड़की को आधुनिक शहरी केंद्र के रूप में विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
बैठक में नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग के मुख्य नगर एवं ग्राम नियोजक सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
सोशल मीडिया की चकाचौंध में खो रही नई पीढ़ी और बिखर रहे संस्कार, महिला आयोग की अध्यक्ष ने माता-पिता को किया आगाह
स्क्रीन की चमक से रिश्ते नहीं चमकते- कुसुम कंडवाल
सोशल मीडिया पर अनजान लोगों से संपर्क बढ़ा रहा साइबर अपराध और अनैतिक रिश्तों का जाल- कुसुम कंडवाल
देहरादून। आधुनिकता की दौड़ में सोशल मीडिया का बढ़ता प्रभाव अब समाज के लिए एक गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। उत्तराखंड राज्य महिला आयोग ने सोशल मीडिया के माध्यम से समाज में बढ़ते दुष्प्रभावों और बिखरते पारिवारिक ताने-बाने पर गहरी चिंता व्यक्त की है।
राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी और बच्चे सोशल मीडिया की चकाचौंध में अपनी वास्तविक राह से भटक रहे हैं। आयोग ने इस समस्या की मुख्य जड़ ‘पारिवारिक समन्वय की कमी’ को माना है। उत्तराखंड राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने समाज में सोशल मीडिया के बढ़ते घातक प्रभावों और उससे उपजी गंभीर समस्याओं पर संज्ञान लिया है।
उन्होंने अनुभव के आधार पर विश्लेषण के साथ भयावह पहलू पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सोशल मीडिया पर अनजान लोगों के संपर्क में आने से महिलाएं और बेटियां लगातार साइबर अपराध और अनैतिक रिश्तों के जाल में फंस रही हैं। ‘डिजिटल फ्रेंडशिप’ के नाम पर बन रहे ये अवैध रिश्ते न केवल वैवाहिक जीवन को तबाह कर रहे हैं, बल्कि मासूम जिंदगियों को भी गलत रास्ते पर ले जा रहे हैं।
आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज की युवा पीढ़ी और बच्चे सोशल मीडिया की आभासी दुनिया में इस कदर फंस गए हैं कि उनका अपने परिवार, अपनी संस्कृति और संस्कारों से नाता पूरी तरह टूटता जा रहा है। घर के बुजुर्गों और माता-पिता के साथ बच्चों का रिश्ता अब नाममात्र का रह गया है क्योंकि बच्चे मोबाइल की चकाचौंध में अपनी एक अलग ही काल्पनिक दुनिया बना लेते हैं और उसे ही अपना सब कुछ मान बैठते हैं।
उन्होंने कहा कि संस्कारों से यही कटाव बेटियों और महिलाओं के भटकने की मुख्य कड़ी बन रहा है। सोशल मीडिया के मायाजाल में फंसकर लड़कियां धीरे-धीरे परिवार से भावनात्मक रूप से कट जाती हैं और इस दलदल में धंसती चली जाती हैं। विशेष रूप से जो लड़कियां घर से बाहर पढ़ाई या नौकरी के लिए दूसरे शहरों में रह रही हैं, वे अक्सर अनजान लोगों के संपर्क में आकर बिना सोचे-समझे ‘लिव-इन’ जैसे रिश्तों में बंध रही हैं। आयोग ने चेतावनी दी है कि ऐसे रिश्तों के परिणाम प्रायः दुखद और असफल होते हैं, जो न केवल एक जीवन को बर्बाद करते हैं बल्कि पूरे परिवार को मानसिक और सामाजिक पीड़ा देते हैं।
विकट स्थिति को देखते हुए कुसुम कंडवाल ने बतौर राज्य महिला आयोग अध्यक्ष अभिभावकों के लिए एक विशेष अपील की है कि माता-पिता अपने बच्चों से नियमित संवाद करें और उनके साथ दोस्ताना व्यवहार रखते हुए उनके दिनभर की गतिविधियों की जानकारी लें। यह अत्यंत आवश्यक है कि समय-समय पर बच्चों के रहन-सहन, उनकी संगत और उनकी बदलती आदतों को बारीकी से परखा जाए। माता-पिता की सक्रिय निगरानी और बच्चों के साथ उनका मजबूत भावनात्मक रिश्ता ही उन्हें इस डिजिटल दलदल से बाहर निकाल सकता है और समाज को पतन की ओर जाने से रोक सकता है।
उन्होंने महिलाओं और बेटियों को कहा कि ”स्क्रीन की चमक से रिश्ते नहीं चमकते, रिश्तों की चमक अपनों के साथ समय बिताने और संवाद से आती है। तकनीक का उपयोग स्वयं की उन्नति के लिए, अपनी संस्कृति और संस्कारों को समझने के लिए करें।”
उन्होंने कहा कि राज्य महिला आयोग इस मामले पर संज्ञान लेते हुए हर प्रकार से हमारी भावी पीढ़ी सहित उनके अभिभावकों एवं परिजनों को भी जागरूक करने का प्रयास करेगा। उन्होंने कहा महिलाओं एवं बेटियों की सुरक्षा के सरकार एव आयोग पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है, परंतु परिवार के लोगों को भी इसमें अपनी अहम भूमिका निभानी होगी। सोशल मीडिया के माध्यम से समाज की मुख्य धारा से जुड़ने के साथ साथ हमें अपने परिवार में समन्वय बनाकर संस्कृति के नैतिक मूल्यों और संस्कारों को सीखना एवं समझना होगा।
ग्राम्य विकास मंत्री गणेश जोशी ने काशीपुर में वीबी-जी राम जी बिल–2025 पर आधारित कार्यशाला को किया सम्बोधित
काशीपुर। प्रदेश के ग्राम्य विकास मंत्री गणेश जोशी ने काशीपुर में आयोजित विकसित भारत–रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) वीबी-जी राम जी बिल–2025 पर आधारित कार्यशाला में मुख्य अतिथि के रूप में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर उन्होंने किसानों एवं स्थानीय लोगों से संवाद कर सरकार की ग्रामीण रोजगार नीति की जानकारी दी।
ग्राम्य विकास मंत्री गणेश जोशी ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्ष द्वारा मनरेगा को समाप्त किए जाने की अफवाहों को निराधार कहा है। उन्होंने कहा कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में योजना को और अधिक मजबूत हुई है। उन्होंने बताया कि वर्ष 1989 में जवाहर रोजगार योजना से शुरू होकर समय-समय पर योजना का नाम परिवर्तित किया गया है। ग्राम्य विकास मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि अब वीबी-जी राम जी योजना के तहत ग्रामीण परिवारों को 100 के स्थान पर 125 दिन का गारंटीशुदा रोजगार मिलेगा। उन्होंने कहा कि योजना में सामान्य राज्यों के लिए 60:40 तथा हिमालयी व पूर्वोत्तर राज्यों के लिए 90:10 का केंद्र-राज्य वित्तीय अनुपात निर्धारित किया गया है। मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्यों में रिटेनिंग वॉल को अनुमन्य कार्यों में शामिल किया गया है।
ग्राम्य विकास मंत्री जोशी ने कहा कि कृषि के व्यस्त समय को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार वर्ष में 60 दिन ऐसे निर्धारित कर सकेगी, जब योजना के अंतर्गत कार्य नहीं कराया जाएगा। साथ ही जल जीवन मिशन के तहत बनी परिसंपत्तियों के रखरखाव, स्थायी परिसंपत्तियों के निर्माण, जल संरक्षण, ग्रामीण आधारभूत ढांचे तथा कृषि एवं आजीविका संवर्धन को प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने मनरेगा का बजट 86 हजार करोड़ रुपये से बढ़ाकर 95,692 करोड़ रुपये कर दिया है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
इस अवसर पर स्थानीय विधायक त्रिलोक सिंह चीमा, राज्यमंत्री विनय रोहिला,राज्यमंत्री मंजीत राजू, मेयर दीपक बाली, जिलाध्यक्ष मनोज पाल, ब्लॉक प्रमुख चंद्र प्रथा, गुरविंदर चंडोक, मंडल अध्यक्ष अर्जुन, बृजेश पाल, जसपाल जस्सी, जिला महामंत्री अमित नारंग सहित कई लोग उपस्थित रहे।
