देहरादून। उत्तराखण्ड में अवैध, घटिया और दुरुपयोग की आशंका वाली औषधियों के खिलाफ खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने सख्त रुख अपनाते हुए निर्णायक कार्रवाई शुरू कर दी है। विभाग की औषधि निरीक्षक शाखा द्वारा एक औषधि निर्माण इकाई का गहन निरीक्षण किया गया, जिसमें निर्माण प्रक्रिया, कच्चे माल की गुणवत्ता, भंडारण व्यवस्था और अभिलेखों की विस्तार से जांच की गई।
निरीक्षण के दौरान यह सामने आया कि संबंधित फर्म द्वारा निर्मित कुछ औषधियां निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप नहीं थीं, जो जन स्वास्थ्य के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकती थीं। इस पर त्वरित कार्रवाई करते हुए विभाग ने कोडीन युक्त कफ सिरप के विनिर्माण पर तत्काल रोक लगा दी। साथ ही संबंधित औषधि का अनुज्ञापन अग्रिम आदेशों तक निलंबित कर दिया गया।
विभाग ने स्पष्ट किया कि औषधियों के निर्माण और आपूर्ति में किसी भी प्रकार की लापरवाही सीधे आम जनता के स्वास्थ्य से जुड़ी होती है, इसलिए ऐसे मामलों में किसी भी स्तर पर ढील नहीं दी जाएगी।
न्यायिक मोर्चे पर भी बड़ी सफलता
प्रवर्तन के साथ-साथ न्यायिक स्तर पर भी विभाग को अहम सफलता मिली है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन, उत्तराखण्ड के अंतर्गत जनपद नैनीताल में एनडीपीएस अधिनियम के तहत वर्ष 2019 और 2020 में दर्ज मामलों में माननीय सत्र न्यायालय ने चार अभियुक्तों को 12 वर्ष की कठोर कारावास की सजा और 1.20 लाख रुपये के जुर्माने से दंडित किया है। यह फैसला अवैध नशीली दवाओं के कारोबार में संलिप्त तत्वों के लिए कड़ा संदेश माना जा रहा है।
पूरे प्रदेश में अलर्ट
सचिव/आयुक्त के निर्देश पर राज्य के सभी जनपदों में औषधि अधिकारियों को कोडीन सिरप और अन्य मनःप्रभावी औषधियों के दुरुपयोग की रोकथाम के लिए विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। मेडिकल स्टोर्स, थोक विक्रेताओं, निर्माण इकाइयों और वितरण नेटवर्क पर नियमित और आकस्मिक निरीक्षण तेज कर दिए गए हैं।
निगरानी, प्रवर्तन और जागरूकता पर जोर
विभाग ने स्पष्ट किया कि अवैध दवाओं के नेटवर्क को जड़ से खत्म करने के लिए निगरानी, प्रवर्तन और जन-जागरूकता—तीनों पर समान रूप से काम किया जा रहा है। आम नागरिकों से अपील की गई है कि वे केवल अधिकृत मेडिकल स्टोर्स से ही दवाएं खरीदें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना विभाग को दें।
अपर आयुक्त, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (उत्तराखण्ड) ताजबर सिंह जग्गी ने कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता जनता को सुरक्षित, गुणवत्तापूर्ण और मानक अनुरूप औषधियां उपलब्ध कराना है। औषधियों की गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता जन स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ के समान है, जिसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कुम्भ मेला-2027 की तैयारियों के सम्बन्ध में समीक्षा बैठक की
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय स्थित वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली सभागार में कुम्भ मेला-2027, हरिद्वार की तैयारियों के सम्बन्ध में समीक्षा बैठक की।
इस दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि कुंभ से संबंधित सभी तैयारियों को अक्टूबर माह तक पूरा किया जाए। साथ ही कुंभ की आवश्यकताओं को देखते हुए सभी प्रकार के निर्माण कार्य तय समय के अंदर पूरे हों। सभी निर्माण कार्य की गुणवत्ता का भी विशेष ध्यान रखा जाए। शासन स्तर पर कुंभ से संबंधित कोई भी कार्य/फाइल लंबित न रहे। किसी भी कार्य को लंबित रखने पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदही तय की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा राज्य सरकार की प्राथमिकता है की कुंभ मेले का भव्य दिव्य और सफल आयोजन हो।
मुख्यमंत्री ने सचिव, पीडब्ल्यूडी को अगले 24 घंटे के अंदर कुंभ मेले के लिए टेक्निकल पद के अधिकारियों की नियुक्ति के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कुंभ क्षेत्र में बने सभी पुलों का ऑडिट किया जाए। साथ ही कुंभ क्षेत्र में स्थित सभी घाटो का सौंदर्यकरण और आवश्यकता अनुसार पुनर्निर्माण कार्य भी किया जाए। उन्होंने कहा श्रद्धालुओं के लिए हर की पैड़ी के साथ ही अन्य सभी घाटों में भी स्नान की व्यवस्था की जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मेला क्षेत्र की स्वच्छता के लिए विस्तृत कार्य योजना तैयार की जाए। सभी प्रमुख स्थानों पर शौचालय और पीने के पानी की व्यवस्था हो। पर्याप्त मात्रा में सुरक्षा बलों, जल पुलिस की तैनाती हो। साथ ही सुरक्षा के मद्देनजर ड्रोन, सीसीटीवी , एवं अन्य आधुनिक उपकरणों का उपयोग भी हो। उन्होंने कहा मेले के दौरान कानून व्यवस्था, पार्किंग, भीड़ प्रबंधन की विस्तृत कार्य योजना अलग से बनाई जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कुंभ मेला क्षेत्र में विभिन्न अखाड़ों को भूमि आवंटन तय समय पर किया जाए। इसकी मेलाधिकारी स्वयं मॉनिटरिंग करें। साथ ही सभी अखाड़ों, मठों ,संत समाज, संस्थाओं, समितियां एवं स्थानीय लोगों से परस्पर्म समन्वय किया जाए। साथ ही उनके सुझावों के अनुरूप मेले की तैयारी हो। मुख्यमंत्री ने कहा कुंभ के दौरान लोगों को आवागमन में दिक्कतों का सामना न करना पड़े, इसके लिए कुंभ क्षेत्र में व्यापक स्तर पर अतिक्रमण की खिलाफ अभियान चलाया जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वन संबंधित मामलों पर जल्द अनुमति ली जाए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को अन्य प्रदेशों से भी परस्पर समन्वय स्थापित करने के निर्देश दिया। उन्होंने कहा मेले से संबंधित सभी विकास कार्य कागजों के साथ धरातल में भी दिखाई देने चाहिए। मुख्यमंत्री ने आवास व टेंट सिटी की तैयारी समय से पूरी करने एवं मेला क्षेत्र में अस्थायी अस्पताल, एम्बुलेंस व मोबाइल चिकित्सा दल की व्यवस्था करने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कुंभ मेला हमारी संस्कृति, आस्था और करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए एक बड़ा धार्मिक आयोजन है। इस आयोजन को सफल बनाना हम सभी का कर्तव्य है। जो भी श्रद्धालु राज्य में आए वह अच्छा अनुभव यहां से लेकर जाएं।
बैठक में कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल, विधायक मदन कौशिक, विधायक आदेश चौहान, विधायक रेनू बिष्ट, विधायक अनुपमा रावत, विधायक रवि बहादुर, उत्तराखण्ड अवस्थापना अनुश्रवण परिषद के उपाध्यक्ष विश्वास डाबर, मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, डीजीपी दीपम सेठ, प्रमुख सचिव एल. फैनई, आरके सुधांशु, सचिव शैलेश बगौली, सचिव नितेश झा, कुंभ मेलाधिकारी सोनिका सिंह एवं अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
देहरादून। मसूरी–देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) द्वारा प्राधिकरण क्षेत्रान्तर्गत अवैध प्लॉटिंग के विरुद्ध सघन अभियान जारी है। इसी क्रम में देहरादून जनपद के सेलाकुई क्षेत्र में नियमों को ताक पर रखकर की जा रही अवैध प्लॉटिंग पर आज सख़्त कार्रवाई करते हुए ध्वस्तीकरण की कार्यवाही की गई। यह कार्रवाई एमडीडीए की ज़ीरो टॉलरेंस नीति के तहत की गई, जिसका उद्देश्य सुनियोजित विकास, पर्यावरण संरक्षण और आमजन के हितों की रक्षा करना है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार वीरू भण्डारी एवं अन्य द्वारा जी.डी. गोयंका स्कूल बस स्टॉप के निकट, सेलाकुई देहरादून क्षेत्र में लगभग 10 बीघा भूमि पर बिना मानचित्र स्वीकृति एवं प्राधिकरण की अनुमति के अवैध प्लॉटिंग की जा रही थी। मामले की जांच के बाद एमडीडीए द्वारा नियमानुसार नोटिस जारी किए गए, परंतु अनियमित गतिविधियाँ जारी रहने पर आज मौके पर ध्वस्तीकरण की कार्यवाही की गई। ध्वस्तीकरण की यह कार्रवाई सहायक अभियंता शशांक सक्सेना, अवर अभियंता सिद्धार्थ सेमवाल एवं मनीष नौटियाल, सुपरवाइजर तथा पर्याप्त पुलिस बल की मौजूदगी में शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराई गई। कार्रवाई के दौरान अवैध रूप से बनाए गए आंतरिक मार्ग, बाउंड्री चिन्हांकन एवं अन्य संरचनाओं को हटाया गया। एमडीडीए ने स्पष्ट किया कि भविष्य में भी अवैध निर्माण एवं प्लॉटिंग के विरुद्ध इसी प्रकार कठोर कदम उठाए जाएंगे।
उपाध्यक्ष एमडीडीए बंशीधर तिवारी का बयान
मसूरी–देहरादून विकास प्राधिकरण क्षेत्र में अवैध प्लॉटिंग और निर्माण किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे। प्राधिकरण का स्पष्ट निर्देश है कि बिना मानचित्र स्वीकृति एवं नियमानुसार अनुमति के कोई भी विकास कार्य अवैध है। आज की कार्रवाई उसी प्रतिबद्धता का परिणाम है। आम नागरिकों से अपील है कि भूमि क्रय-विक्रय या निर्माण से पूर्व एमडीडीए से विधिवत अनुमति अवश्य प्राप्त करें, अन्यथा कठोर कार्रवाई की जाएगी।
सचिव एमडीडीए मोहन सिंह बर्निया का बयान
एमडीडीए द्वारा लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है और जहां भी अवैध प्लॉटिंग या निर्माण की शिकायतें मिल रही हैं, वहां त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है। यह अभियान आगे भी जारी रहेगा। हमारा उद्देश्य लोगों को ठगी से बचाना, नियोजित शहरी विकास को बढ़ावा देना और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना है। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
एमडीडीए ने पुनः नागरिकों से आग्रह किया है कि वे किसी भी प्रकार की अवैध प्लॉटिंग में निवेश करने से पहले प्राधिकरण से जानकारी अवश्य लें। प्राधिकरण द्वारा जारी मानचित्र स्वीकृति और अनुमति ही वैध मानी जाएगी।
टिहरी। जनपद टिहरी में आयोजित एक्रो फेस्टिवल एवं नेशनल SIV चैंपियनशिप के समापन समारोह में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के साथ कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने प्रतिभाग किया तथा खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया।
इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन एवं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए ऐतिहासिक योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है। आज टिहरी वाटर स्पोर्ट्स एवं एक्रो स्पोर्ट्स के क्षेत्र में विश्व मानचित्र पर अपनी विशेष पहचान बना रही है।
उन्होंने बताया कि इस आयोजन में देश-विदेश से आए 11 देशों के 25 पायलटों तथा विभिन्न राज्यों से आए 57 खिलाड़ियों की सहभागिता इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि उत्तराखंड अब अंतरराष्ट्रीय साहसिक पर्यटन केंद्र के रूप में तेजी से उभर रहा है।
मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि इस प्रकार के अंतरराष्ट्रीय आयोजनों से न केवल प्रदेश की वैश्विक पहचान सशक्त होती है, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार, स्वरोजगार एवं पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा मिलती है।
इस अवसर पर विधायक किशोर उपाध्याय, शक्ति लाल शाह, भाजपा टिहरी जिलाध्यक्ष उदय सिंह रावत एवं जिला पंचायत अध्यक्ष ईशिता सजवान सहित अनेक गणमान्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित रहे।
साहित्य और सिनेमा में योगदान के लिए सीएम धामी ने प्रसून जोशी की सराहना की
देहरादून। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से गीतकार व केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) के अध्यक्ष प्रसून जोशी ने शिष्टाचार भेंट की। मुख्यमंत्री धामी ने प्रसून जोशी के साहित्य और सिनेमा के क्षेत्र में दिए गए उल्लेखनीय योगदान की सराहना की। इस दौरान कला, संस्कृति, साहित्य और सिनेमा से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई।
बैठक में उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत, लोक कला, लोक संगीत तथा राज्य में फिल्म निर्माण की संभावनाओं पर भी विचार-विमर्श किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड सरकार राज्य को फिल्म निर्माण और शूटिंग के अनुकूल केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। इसके लिए आवश्यक नीतिगत सहयोग और सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
मुख्यमंत्री ने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में प्रसून जोशी द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना करते हुए भविष्य में उत्तराखंड में सिनेमा, साहित्य और सांस्कृतिक गतिविधियों के विस्तार के लिए सहयोग की अपेक्षा व्यक्त की।
मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में सचिव समिति बैठक
देहरादून। मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में सोमवार को सचिवालय में सचिव समिति की बैठक सम्पन्न हुयी। इस अवसर पर मुख्य सचिव ने सचिवगणों के साथ विभिन्न विषयों पर चर्चा कर दिशानिर्देश दिए।
मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि अगले वित्तीय वर्ष में कराए जाने वाले नए कार्यों के लिए 15 फरवरी तक स्वीकृतियां ले ली जाएं। उन्होंने कहा कि प्रत्येक विभाग अपने सभी कार्यों को लेकर वार्षिक कैलेण्डर तैयार कर, उसके अनुसार अपनी सभी गतिविधियों को संचालन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कुम्भ मेला – 2027 से सम्बन्धित कार्यों को भी प्राथमिकता पर लेते हुए सभी प्रकार की स्वीकृतियां और प्रक्रियाएं समय पर पूर्ण करते हुए निर्धारित प्रक्रिया समय पर पूर्ण किए जाने के निर्देश दिए।
मुख्य सचिव ने खाद्य सुरक्षा के मापदण्डों का प्रवर्तन एवं निगरानी को और मजबूत किए जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने इसके लिए टेस्टिंग लैब आदि बढ़ाए जाने एवं इससे सम्बन्धित मामलों के निस्तारण में तेजी लाए जाने के भी निर्देश दिए हैं। उन्होंने पूंजी निवेश के लिए राज्यों को दी जाने वाली विशेष सहायता के तहत् सभी प्रोजेक्ट्स को गतिशक्ति पोर्टल पर अपलोड किए जाने एवं निर्धारित समय सीमा पर कार्य पूर्ण किए जाने हेतु लगातार निगरानी किए जाने के निर्देश दिए।
जन-जन की सरकार कार्यक्रम की सफलता को देखते हुए मुख्य सचिव ने तहसील एवं थाना दिवसों को वर्षभर नियमित आयोजन किए जाने के निर्देश भी दिए। उन्होंने इसके लिए कार्ययोजना तैयार किए जाने की बात कही। उन्होंने कहा कि ई-ऑफिस को मुख्यालयों एवं जनपद स्तरीय कार्यालयों में लागू किए जाने को लेकर अब तक हुयी प्रगति पर सभी विभागीय सचिवों और जिलाधिकारियों से प्रत्येक सचिव समिति की बैठक में चर्चा की जाएगी।
मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि नक्शा पास करने वाली सभी ऑथॉरिटीज नक्शा पास करने के उपरान्त सम्बन्धित स्थानीय निकाय के साथ उक्त नक्शा और जानकारियां भी साझा करें ताकि स्थानीय निकाय उक्त प्रॉपर्टी के सम्बन्ध में अपना डाटाबेस अपडेट कर सकें। उन्होंने कहा कि कुछ विभागों में श्रमिकों के लिए लेबर कंप्लायंस टूल (Labour Compliance Tool) का प्रयोग किया जा रहा है, यह एक अच्छा प्रयोग है, और इसे प्रदेशभर में लागू किया जाना चाहिए, ताकि श्रमिकों की विभिन्न समस्याओं का निस्तारण इसी से हो सकेगा।
इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, एल. फैनाई, धनंजय चुतर्वेदी, सचिव शैलेश बगौली, नितेश कुमार झा, सचिन कुर्वे, डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरूषोत्तम, रविनाथ रमन, डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय, डॉ. रंजीत कुमार सिन्हा, चंद्रेश कुमार यादव, बृजेश कुमार संत, डॉ. वी. षणमुगम, डॉ. सुरेन्द्र नारायण पाण्डेय, विनोद कुमार सुमन, सी. रवि शंकर, रणवीर सिंह चौहान एवं धीराज सिंह गर्ब्याल सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री ने डॉ. नित्यानंद की जन्मशताब्दी वर्ष पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी कार्यक्रम में किया प्रतिभाग
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को दून विश्वविद्यालय, देहरादून में डॉ. नित्यानंद की जन्मशताब्दी वर्ष समारोह के उपलक्ष्य पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने सत्तत हिमालयी पर्यावरण पुरस्कार 2025 -26 से जयेंद्र सिंह राणा एवं संजय सत्यवली को सम्मानित किया।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने डॉ. नित्यानंद को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उन्होंने अपना पूरा जीवन हिमालय, प्रकृति, समाज और राष्ट्र को समर्पित किया। उनकी सोच, हिमालय की शिखरों जैसी ऊँची और उनका सेवा-भाव हिमालय की घाटियों से भी गहरा था। उनका मानना था कि हिमालय की रक्षा करना, भारतीय सभ्यता और राष्ट्र के भविष्य के लिए भी आवश्यक है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ. नित्यानंद ने विज्ञान को अध्यात्म से, शोध को लोक-जीवन से और चिंतन को राष्ट्रहित से जोड़ने का कार्य किया। वो समाज के प्रत्येक वर्ग में राष्ट्रभाव और सामाजिक चेतना का संचार करते रहे। उन्होंने गांवों के सशक्तिकरण के लिए भी आजीवन कार्य किया। वे प्रतिवर्ष अपनी आय से लगभग 40 विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति प्रदान किया करते थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 1991 में उत्तरकाशी और 1999 में चमोली की आपदा के बाद डॉ. नित्यानंद ने बिना किसी विलंब के स्वयंसेवकों के साथ मिलकर राहत एवं पुनर्वास कार्यों का ऐसा मॉडल प्रस्तुत किया, जो आज भी श्रेष्ठ माना जाता है। उन्होंने मनेरी गाँव को अपना केंद्र बनाकर वहाँ 400 से अधिक भूकंप रोधी मकानों के निर्माण का कार्य भी कराया। उन्होंने उस क्षेत्र के 50 से अधिक गाँवों को मॉडल गाँवों के रूप में विकसित करने का कार्य भी किया।
मुख्यमंत्री ने कहा डॉ. नित्यानंद ने ‘उत्तरांचल दैवीय आपदा पीड़ित सहायता समिति’ का गठन कर उन्होंने सेवा को संस्थागत स्वरूप दिया, जो आज भी देशभर में आपदाओं के समय मानवता की सेवा का सबसे बेहतर उदाहरण प्रस्तुत कर रही है। उन्होंने कहा देहरादून में संचालित डॉ. नित्यानंद हिमालय शोध एवं अध्ययन केंद्र उनके विचारों को आगे बढ़ाने का सशक्त माध्यम बन चुका है। यह केंद्र हिमालयी अध्ययन, सतत विकास, आपदा प्रबंधन और नीति-निर्माण के क्षेत्र में नई दिशा दे रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार हिमालय संरक्षण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। हम डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम, ग्लेशियर रिसर्च सेंटर, जल स्रोत संरक्षण अभियान जैसे विभिन्न माध्यम से हिमालय के दीर्घकालिक संरक्षण की दिशा में कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा राज्य सरकार ने सिंगल यूज़ प्लास्टिक के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लागू किया है। राज्य में प्लास्टिक वेस्ट के प्रबंधन के लिए डिजिटल डिपॉजिट रिफंड सिस्टम के माध्यम से अब तक हिमालयी क्षेत्र में 72 टन कार्बन उत्सर्जन को कम किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमालयी क्षेत्रों में पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के लिए पौधारोपण अभियान, जल संरक्षण अभियान और पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रमों चलाए जा रहे हैं। जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने के लिए सौर ऊर्जा सहित अन्य हरित ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देने के लिए भी कई योजनाएं प्रारंभ की गई हैं। राज्य सरकार ने प्रदेश के नौले, धारे एवं वर्षा आधारित नदियों जैसे परंपरागत जल स्रोतों के संरक्षण हेतु ‘स्प्रिंग एंड रिवर रिजुविनेशन अथॉरिटी (SARRA) का गठन किया है।
मुख्यमंत्री ने सभी से आह्वान करते हुए कहा कि हम सभी जीवन के प्रत्येक प्रमुख अवसर पर जैसे जन्मदिन, विवाह की वर्षगांठ या कोई अन्य स्मरणीय दिन पर एक पौधा अवश्य लगाएं और उसकी नियमित देखभाल भी करें। जिससे हम सभी देवभूमि में पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा दे पाएंगे।
इस अवसर पर आर.एस.एस के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य डॉ दिनेश, आर.एस.एस प्रान्त प्रचारक डॉ. शैलेन्द्र, विधायक विनोद चमोली, विधायक मुन्ना सिंह चौहान, विधायक बृजभूषण गैरोला, डॉ. कमलेश कुमार, उत्तरांचल उत्थान परिषद के संरक्षक प्रेम बड़ाकोटी, कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल, रविदेवानंद, एवं अन्य लोग मौजूद रहे।
प्रशासन ने एक दिन में मशीनरी हटाने के दिए निर्देश
देहरादून। शहर में सुरक्षा मानकों की अनदेखी करते हुए किए जा रहे निर्माण कार्यों पर जिला प्रशासन ने सख्त कार्रवाई करते हुए समस्त कार्य अनुमतियों को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया है। साथ ही जनवरी माह में आकस्मिक परिस्थितियों के दृष्टिगत आपदा कंट्रोल रूम से जारी सभी कार्यालय अनुमतियां भी रद्द कर दी गई हैं। जिला प्रशासन ने कार्यदायी संस्थाओं को एक दिन के भीतर निर्माण स्थलों से मशीनरी एवं निर्माण सामग्री हटाने तथा 10 दिन के भीतर सड़कों को पूर्व स्थिति में लाने के निर्देश दिए हैं।
अधीक्षण अभियंता पीडब्ल्यूडी, अधीक्षण अभियंता एनएच तथा अन्य सड़क निर्माण संस्थाओं को निर्देशित किया गया है कि अभियंताओं की रोस्टरवार ड्यूटी लगाते हुए तत्काल सड़कों के सुधारीकरण एवं मरम्मत कार्य शुरू करें और निर्धारित समयावधि के भीतर शहर की सभी सड़कों को पूर्व स्थिति में लाएं। जिला प्रशासन के संज्ञान में आया कि विभिन्न कार्यदायी संस्थाओं द्वारा किए जा रहे रोड कटिंग कार्यों के दौरान निर्धारित सुरक्षा मानकों, संकेतक, बैरिकेडिंग तथा आमजन की सुरक्षा से जुड़े अन्य उपायों का पालन नहीं किया जा रहा था। साथ ही संबंधित अधिकारियों द्वारा कार्यस्थल पर उपस्थित रहकर कार्यों की समीक्षा एवं सुरक्षा मानकों के अनुपालन की निगरानी भी नहीं की जा रही थी।
जिला प्रशासन की क्यूआरटी द्वारा समय-समय पर किए गए स्थलीय निरीक्षण में पाई गई अनियमितताओं पर पेनाल्टी, मुकदमा एवं अन्य दंडात्मक कार्रवाई किए जाने के बावजूद अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। इसके परिणामस्वरूप कई स्थानों पर अव्यवस्था की स्थिति उत्पन्न हो रही थी तथा सड़क दुर्घटनाओं और गंभीर हादसों की आशंका बनी हुई थी। जनसुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने यह निर्णय लिया है।
परियोजना समन्वय समिति, देहरादून द्वारा विभिन्न विभागों से प्राप्त अनुरोधों के आधार पर पूर्व में कई कार्यदायी संस्थाओं को रोड कटिंग की अनुमति प्रदान की गई थी। इनमें उत्तराखंड जल संस्थान, पावर ट्रांसमिशन कारपोरेशन, उत्तराखंड पेयजल संस्थान विकास एवं निर्माण निगम, यूयूएसडीए, उत्तराखंड पावर कारपोरेशन, देहरादून स्मार्ट सिटी लिमिटेड सहित अन्य संस्थाएं तथा जिलाधिकारी एवं आपदा प्रबंधन प्राधिकरण कार्यालय शामिल थे।
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आदेश जारी होने के बाद यदि किसी भी स्थान पर रोड कटिंग कार्य संचालित पाया गया तो संबंधित संस्थाओं की मशीनरी एवं निर्माण सामग्री जब्त करते हुए दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए पुलिस अधीक्षक यातायात को भी आवश्यक निर्देश जारी किए गए हैं।
आज की तेज़ रफ्तार ज़िंदगी में अनियमित खान-पान, बढ़ता मोटापा, शराब का सेवन और शारीरिक गतिविधियों की कमी लोगों की सेहत पर भारी पड़ रही है। इन्हीं कारणों से फैटी लिवर डिज़ीज़ के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। शुरुआती दौर में यह बीमारी बिना किसी खास लक्षण के रहती है, लेकिन लापरवाही बरतने पर आगे चलकर लिवर में सूजन, डैमेज और सिरोसिस जैसी गंभीर समस्याएं पैदा कर सकती है। विशेषज्ञों के मुताबिक, सही डाइट और हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाकर फैटी लिवर को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
क्या है फैटी लिवर?
जब लिवर में सामान्य से अधिक चर्बी जमा होने लगती है, तो उसे फैटी लिवर कहा जाता है। यह समस्या दो प्रकार की होती है—
अल्कोहलिक फैटी लिवर, जो अधिक शराब के सेवन से होता है।
नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर, जो मोटापा, डायबिटीज़ और गलत खान-पान से जुड़ा होता है।
डाइट के साथ बदलें ये आदतें
फैटी लिवर से बचाव के लिए खान-पान के साथ-साथ दिनचर्या में सुधार बेहद जरूरी है।
रोज़ कम से कम 30 मिनट टहलना या योग करना
वजन को धीरे-धीरे कम करना
रात का भोजन हल्का रखना
7 से 8 घंटे की पर्याप्त नींद
समय-समय पर हेल्थ चेकअप
फैटी लिवर में क्या खाएं?
हरी सब्जियां:
पालक, ब्रोकली, लौकी और तोरी जैसी सब्जियां लिवर में जमा फैट को कम करने में मदद करती हैं। इनमें फाइबर भरपूर मात्रा में होता है।
फल (सीमित मात्रा में):
सेब, पपीता, नाशपाती और बेरीज एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होते हैं, लेकिन शुगर की मात्रा का ध्यान रखना जरूरी है।
साबुत अनाज:
ओट्स, ब्राउन राइस और जौ वजन नियंत्रित करने में मदद करते हैं और इंसुलिन रेजिस्टेंस को कम करते हैं।
प्रोटीन युक्त आहार:
दालें, चना, राजमा, अंडे का सफेद भाग और लो-फैट पनीर लिवर के लिए फायदेमंद माने जाते हैं।
हेल्दी फैट:
अखरोट, अलसी के बीज और जैतून का तेल ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर होते हैं, जो लिवर की सेहत सुधारने में सहायक हैं।
ग्रीन टी और हल्दी:
ग्रीन टी फैट बर्न करने में मदद करती है, जबकि हल्दी लिवर की सूजन कम करने में कारगर मानी जाती है।
किन चीज़ों से करें परहेज?
शराब: फैटी लिवर की सबसे बड़ी वजह, जो लिवर डैमेज को तेजी से बढ़ाती है।
तला-भुना और जंक फूड: समोसा, पिज़्ज़ा और बर्गर में मौजूद ट्रांस फैट लिवर को नुकसान पहुंचाता है।
ज्यादा मीठा: मिठाइयां, केक और कोल्ड ड्रिंक में मौजूद शुगर सीधे लिवर फैट में बदलती है।
मैदा और रिफाइंड कार्ब्स: सफेद ब्रेड और बिस्किट वजन और फैटी लिवर दोनों बढ़ाते हैं।
प्रोसेस्ड फूड: पैकेट वाले स्नैक्स में अधिक नमक और केमिकल्स लिवर के लिए हानिकारक होते हैं।
निष्कर्ष
विशेषज्ञों का कहना है कि फैटी लिवर कोई लाइलाज बीमारी नहीं है। समय रहते खान-पान और जीवनशैली में बदलाव कर लिवर को फिर से स्वस्थ बनाया जा सकता है। सेहतमंद लिवर ही पूरे शरीर की सेहत की बुनियाद है।
नोट: यह लेख विभिन्न मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह पर आधारित है।
(साभार)
परमाणु वार्ता के बीच ईरान का अमेरिका को दो टूक संदेश
तेहरान। ईरान और अमेरिका के बीच शुरू हुई परमाणु वार्ता के बीच ईरान ने एक बार फिर अपने रुख को स्पष्ट कर दिया है। ईरान ने साफ शब्दों में कहा है कि वह किसी भी सूरत में यूरेनियम संवर्धन का अधिकार नहीं छोड़ेगा और अमेरिकी सैन्य दबाव के आगे झुकने का सवाल ही नहीं उठता। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका की मंशा पर संदेह जताते हुए कहा कि क्षेत्र में बढ़ती सैन्य तैनाती से ईरान डरने वाला नहीं है।
एक कार्यक्रम में बोलते हुए अराघची ने कहा कि पश्चिम एशिया में अमेरिका की सैन्य मौजूदगी ईरान के फैसलों को प्रभावित नहीं कर सकती। उनका यह बयान ऐसे समय सामने आया है, जब अमेरिका ने अपने सबसे शक्तिशाली युद्धपोत यूएसएस अब्राहम लिंकन को क्षेत्र में तैनात किया है। अराघची ने कहा कि ईरान को अमेरिका पर बेहद सीमित भरोसा है और बातचीत की गंभीरता को लेकर भी सवाल बने हुए हैं।
अमेरिका की नीयत पर संदेह, चीन-रूस से भी सलाह
ईरानी विदेश मंत्री ने कहा कि यह स्पष्ट नहीं है कि अमेरिका वास्तव में समाधान चाहता है या सिर्फ दबाव की रणनीति अपना रहा है। उन्होंने बताया कि ईरान इस वार्ता को लेकर अपने रणनीतिक साझेदार चीन और रूस के साथ भी लगातार विचार-विमर्श कर रहा है।
पश्चिमी देशों और इस्राइल की ओर से ईरान पर परमाणु हथियार बनाने के आरोप लगाए जाते रहे हैं, हालांकि तेहरान ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। अराघची ने दोहराया कि ईरान किसी भी परमाणु बम की ओर नहीं बढ़ रहा है और उसकी असली ताकत स्वतंत्र निर्णय लेने की क्षमता में है।
उन्होंने कहा, “वे हमारे परमाणु बम से डरते हैं, जबकि हम परमाणु बम नहीं चाहते। हमारी असली शक्ति महाशक्तियों को ‘न’ कहने की क्षमता है।”
इस बीच, इस्राइल के विदेश मंत्री गिदोन सार ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को वैश्विक शांति के लिए खतरा बताया है। अमेरिका और इस्राइल की मांग है कि बातचीत में ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम और क्षेत्रीय सशस्त्र संगठनों को समर्थन जैसे मुद्दों को भी शामिल किया जाए, लेकिन ईरान ने इसे वार्ता के दायरे से बाहर रखने की बात कही है।
अराघची ने यूरेनियम संवर्धन पर किसी भी प्रकार के समझौते से साफ इनकार करते हुए इसे रणनीतिक नहीं, बल्कि संप्रभुता का सवाल बताया। उन्होंने कहा कि चाहे ईरान पर युद्ध ही क्यों न थोपा जाए, किसी भी देश को उसके वैध अधिकार तय करने का हक नहीं है।
