कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने मसूरी की पार्किंग व्यवस्था एवं वेंडर जोन निर्माण को लेकर की महत्वपूर्ण बैठक
देहरादून। कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने आज अपने शासकीय आवास में मसूरी की पार्किंग व्यवस्था एवं वेंडर जोन निर्माण को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक की। बैठक में नगर पालिका अध्यक्ष मीरा सकलानी, एसडीएम मसूरी राहुल आनंद, नगर पालिका अधिशासी अधिकारी गौरव भसीन सहित जिला प्रशासन एवं नगर पालिका के अधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक के दौरान कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मसूरी में पार्किंग समस्या तथा वेंडर जोन से संबंधित सभी कार्यों की कागजी प्रक्रिया शीघ्र पूर्ण की जाए। उन्होंने कहा कि नगर पालिका और प्राइवेट प्लेयर के सहयोग से मसूरी में जल्द ही वेंडर जोन एवं पार्किंग का निर्माण किया जाएगा, जिससे स्थानीय लोगों के साथ-साथ पर्यटकों को भी राहत मिलेगी।
कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि मसूरी की प्रमुख सड़कों का भी शीघ्र जीर्णोद्धार किया जाएगा, ताकि यातायात व्यवस्था सुचारु हो सके और पर्यटन को बढ़ावा मिले। उन्होंने इस संबंध में जिला प्रशासन एवं नगर पालिका के अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश देते हुए कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। कैबिनेट मंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार मसूरी के सुव्यवस्थित विकास के लिए प्रतिबद्ध है और सभी योजनाओं को समयबद्ध ढंग से धरातल पर उतारा जाएगा।
आज की बदलती जीवनशैली और गलत खान-पान के कारण शरीर में यूरिक एसिड का बढ़ना एक आम लेकिन गंभीर समस्या बनता जा रहा है। अगर इसे समय रहते नियंत्रित न किया जाए, तो यही समस्या आगे चलकर गाउट जैसे दर्दनाक गठिया रोग का रूप ले सकती है। मेडिकल विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक खून में यूरिक एसिड का स्तर अधिक रहने की स्थिति को हाइपरयूरिसेमिया कहा जाता है, जो जोड़ों में सूजन और असहनीय दर्द का कारण बनती है।
यूरिक एसिड दरअसल शरीर में मौजूद प्यूरीन नामक तत्व के टूटने से बनने वाला एक अपशिष्ट पदार्थ है। सामान्य स्थिति में किडनी इसे फिल्टर कर पेशाब के जरिए बाहर निकाल देती है, लेकिन जब किडनी ठीक से काम नहीं कर पाती या यूरिक एसिड जरूरत से ज्यादा बनने लगता है, तो यह जोड़ों में क्रिस्टल के रूप में जमा होने लगता है। इसका असर खासतौर पर पैरों के अंगूठे, घुटनों और टखनों में अधिक देखा जाता है, जहां सूजन, लालिमा और जकड़न की शिकायत बढ़ जाती है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि गलत डाइट, मोटापा, पानी की कमी और निष्क्रिय जीवनशैली यूरिक एसिड बढ़ने के प्रमुख कारण हैं। समय पर ध्यान न दिया जाए तो यह समस्या सिर्फ जोड़ों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि किडनी स्टोन और हृदय रोगों के खतरे को भी बढ़ा सकती है। ऐसे में जरूरी है कि खान-पान और जीवनशैली में सही बदलाव किए जाएं।
किन खाद्य पदार्थों से बनाएं दूरी?
यूरिक एसिड को नियंत्रित रखने के लिए सबसे पहले डाइट पर ध्यान देना जरूरी है।
रेड मीट और कुछ मछलियों में प्यूरीन की मात्रा अधिक होती है, इसलिए इनका सेवन सीमित करें।
राजमा, उड़द, अरहर और काबुली चना जैसी दालों का अत्यधिक सेवन भी यूरिक एसिड बढ़ा सकता है, इन्हें संतुलन में लें।
कोल्ड ड्रिंक्स और सोडा जैसे शुगर-युक्त पेय यूरिक एसिड लेवल तेजी से बढ़ाते हैं, इनसे परहेज करें।
प्यूरीन युक्त भोजन कम करने से भविष्य में जोड़ों की सूजन और दर्द के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
पानी और विटामिन-C की अहम भूमिका
शरीर से अतिरिक्त यूरिक एसिड बाहर निकालने में पानी सबसे अहम हथियार माना जाता है।
दिनभर में कम से कम 8 से 10 गिलास पानी पीने की सलाह दी जाती है।
पर्याप्त पानी से किडनी को टॉक्सिन्स बाहर निकालने में मदद मिलती है।
इसके साथ ही संतरा, नींबू और आंवला जैसे विटामिन-C से भरपूर फल डाइट में शामिल करें। विटामिन-C किडनी के कार्य को बेहतर बनाकर यूरिक एसिड के स्तर को कम करने में सहायक होता है।
फाइबर और चेरी क्यों हैं फायदेमंद?
फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ शरीर में अतिरिक्त यूरिक एसिड को अवशोषित करने में मदद करते हैं।
दलिया, साबुत अनाज और हरी सब्जियां रोजाना आहार में शामिल करें।
चेरी को यूरिक एसिड और गाउट के मरीजों के लिए बेहद लाभकारी माना जाता है।
चेरी में मौजूद एंथोसायनिन नामक तत्व जोड़ों की सूजन और दर्द को कम करने में मदद करता है।
जीवनशैली में जरूरी बदलाव
नियमित व्यायाम: रोजाना हल्की एक्सरसाइज या वॉक से मेटाबॉलिज्म बेहतर रहता है।
वजन नियंत्रण: बढ़ा हुआ वजन जोड़ों पर अतिरिक्त दबाव डालता है, इसलिए वजन संतुलित रखना जरूरी है।
समय पर जांच: जोड़ों में लगातार दर्द, सूजन या लालिमा होने पर सीरम यूरिक एसिड टेस्ट जरूर कराएं।
शुरुआती सावधानी: छोटे-छोटे बदलाव अपनाकर इस समस्या को गंभीर होने से पहले ही रोका जा सकता है।
नोट: यह लेख विभिन्न मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह के आधार पर तैयार किया गया है। किसी भी तरह की दवा या उपचार शुरू करने से पहले चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें।
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देहरादून पीआरटी परियोजना बनेगी ईबीआरटीएस की फीडर, तीन कॉरिडोर पर प्रस्ताव
देहरादून। शहर में प्रस्तावित पीआरटी (पॉड टैक्सी) परियोजना तथा मसूरी एवं नैनीताल में प्रस्तावित रोपवे परियोजनाओं की फिजिबिलिटी अध्ययन को लेकर सचिवालय में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता सचिव, आवास, उत्तराखण्ड शासन डॉ. आर. राजेश कुमार ने की। बैठक में उत्तराखण्ड मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (यूएमआरसी) सहित संबंधित विभागों एवं परामर्शदात्री संस्थाओं के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक की शुरुआत में प्रबंध निदेशक, उत्तराखण्ड मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन द्वारा देहरादून शहर में प्रस्तावित पीआरटी परियोजना तथा मसूरी एवं नैनीताल शहर में प्रस्तावित रोपवे परियोजनाओं की फिजिबिलिटी अध्ययन की अद्यतन स्थिति पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया गया। प्रस्तुतीकरण के दौरान परियोजनाओं के तकनीकी, सामाजिक, पर्यावरणीय एवं वित्तीय पहलुओं की जानकारी दी गई।
प्रस्तुतीकरण में बताया गया कि देहरादून शहर में प्रस्तावित पीआरटी (पॉड टैक्सी) परियोजना को ईबीआरटीएस के फीडर सिस्टम के रूप में विकसित किए जाने का प्रस्ताव है। इस परियोजना के अंतर्गत तीन प्रमुख कॉरिडोर प्रस्तावित हैं, जिनमें क्लेमेंटाउन से बल्लूपुर चौक, पंडितवाड़ी से रेलवे स्टेशन तथा गांधी पार्क से आईटी पार्क तक के मार्ग शामिल हैं। अधिकारियों ने बताया कि यह परियोजना शहर में यातायात दबाव को कम करने के साथ-साथ पर्यावरण अनुकूल परिवहन व्यवस्था को भी सुदृढ़ करेगी। बैठक में निगम द्वारा तैयार की गई डीपीआर (डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट) पर विस्तार से चर्चा की गई। आवास सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने मुख्यमंत्री के दिशा-निर्देशों के अनुरूप परियोजना की उपयोगिता को और अधिक स्पष्ट करने पर बल देते हुए निर्देश दिए कि डीपीआर में परियोजना की आवश्यकता, पर्यावरणीय प्रभाव आंकलन (ईआईए), सामाजिक प्रभाव तथा वित्तीय व्यवहार्यता को ठोस रूप में प्रस्तुत किया जाए। उन्होंने आगामी समीक्षा बैठक में संशोधित डीपीआर के साथ पुनः प्रस्तुतीकरण करने के निर्देश दिए।
आवास सचिव ने देहरादून में प्रस्तावित पीआरटी कॉरिडोर के संरेखण का स्थलीय निरीक्षण किए जाने की भी इच्छा जताई, ताकि जमीनी स्तर पर परियोजना की व्यवहारिकता का प्रत्यक्ष आकलन किया जा सके। इसके अतिरिक्त बैठक में मसूरी एवं नैनीताल शहरों में प्रस्तावित रोपवे परियोजनाओं की फिजिबिलिटी अध्ययन की स्थिति की भी समीक्षा की गई। प्रबंध निदेशक द्वारा अवगत कराया गया कि रोपवे परियोजनाएं पर्वतीय शहरों में यातायात जाम, पार्किंग समस्या एवं प्रदूषण को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। इस पर आवास सचिव ने मुख्यमंत्री के निर्देशों के क्रम में रोपवे परियोजनाओं के अंतर्गत आने वाली समस्त भूमि का विस्तृत विवरण, स्वामित्व की स्थिति सहित तैयार करने तथा संबंधित विभागों से पत्राचार कर शीघ्र अग्रतर कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि भूमि संबंधी पहलुओं का समयबद्ध समाधान परियोजनाओं के क्रियान्वयन के लिए आवश्यक है। बैठक में संयुक्त सचिव आवास धीरेंद्र कुमार सिंह, निदेशक (वित्त) संजीव मेहता, महाप्रबंधक (सिविल) संजय जी. पाठक सहित उत्तराखण्ड मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के वरिष्ठ अभियंता, मै. मैकेन्जी एवं मै. सिस्ट्रा के सलाहकार अधिकारी उपस्थित रहे।
पर्यावरण संरक्षण और पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा– डॉ. आर. राजेश कुमार
आवास सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के विजन के अनुरूप राज्य सरकार शहरी परिवहन व्यवस्था को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुसार विकसित कर रही है। देहरादून में प्रस्तावित पीआरटी परियोजना तथा मसूरी और नैनीताल में प्रस्तावित रोपवे परियोजनाएं इस दिशा में महत्वपूर्ण पहल हैं। इन परियोजनाओं से यातायात दबाव कम होगा, पर्यावरण संरक्षण को बल मिलेगा और पर्यटन गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि सभी परियोजनाओं को पारदर्शी, व्यावहारिक और समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा।
इजरायल ने सैनिकों पर हमले का हवाला देकर की कार्रवाई
गाजा। गाजा पट्टी में घोषित संघर्ष विराम के बाद भी हालात सामान्य होते नजर नहीं आ रहे हैं। ताजा घटनाओं में इजरायली कार्रवाई के दौरान कम से कम 24 फलस्तीनी नागरिकों की मौत की खबर सामने आई है। मृतकों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल बताए जा रहे हैं। अस्पताल सूत्रों ने मौतों की पुष्टि की है। वहीं इस्राइल का कहना है कि यह कार्रवाई उसके सैनिकों पर हुई गोलीबारी के जवाब में की गई।
इजरायली सेना ने क्या वजह बताई?
इजरायली सेना के मुताबिक, गाजा में तैनात उसके सैनिकों पर उग्रवादियों ने फायरिंग की थी, जिसमें एक रिजर्व सैनिक गंभीर रूप से घायल हो गया। सेना का कहना है कि इसके बाद हवाई और जमीनी बलों के जरिए जवाबी कार्रवाई की गई। इस्राइल ने इसे संघर्ष विराम का उल्लंघन करार देते हुए कहा कि सैनिकों की सुरक्षा के लिए कार्रवाई करना जरूरी था।
महिलाओं और बच्चों की मौत से बढ़ी चिंता
स्थानीय अस्पताल अधिकारियों के अनुसार, मारे गए लोगों में सात महिलाएं और पांच बच्चे शामिल हैं। मृतकों में एक पांच महीने का बच्चा और मात्र दस दिन की नवजात बच्ची भी शामिल बताई गई है। गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि संघर्ष विराम लागू होने के बाद से अब तक 530 से अधिक फलस्तीनी इस्राइली हमलों में अपनी जान गंवा चुके हैं, जिससे हालात की गंभीरता साफ झलकती है।
अस्पताल प्रशासन ने जताई नाराजगी
गाजा सिटी के शिफा अस्पताल के निदेशक ने कहा कि संघर्ष विराम के बावजूद आम नागरिकों के लिए हालात युद्ध जैसे ही बने हुए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर संघर्ष विराम लागू है, तो फिर जमीन पर हिंसा क्यों जारी है। स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि लगातार हो रहे हमलों से आम लोगों में भय का माहौल है और जनजीवन पटरी पर नहीं लौट पा रहा।
गाजा के अलग-अलग इलाकों में हुए हमले
रिपोर्ट के अनुसार, उत्तरी गाजा के तुफ्फाह इलाके में एक इमारत पर की गई फायरिंग में 11 लोगों की मौत हो गई, जिनमें एक ही परिवार के कई सदस्य शामिल थे। दक्षिणी शहर खान यूनिस में एक परिवार के टेंट को निशाना बनाया गया, जिसमें तीन लोगों की जान चली गई, जिनमें एक 12 वर्षीय बच्चा भी था। वहीं गाजा सिटी के ज़ैतून इलाके में टैंक शेलिंग से पति-पत्नी समेत तीन लोगों की मौत हो गई।
अब तक का कुल आंकड़ा क्या कहता है?
गाजा स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक 71,800 से ज्यादा फलस्तीनी मारे जा चुके हैं। मंत्रालय आम नागरिकों और लड़ाकों के आंकड़े अलग-अलग जारी नहीं करता, लेकिन संयुक्त राष्ट्र और कई अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां इन आंकड़ों को विश्वसनीय मानती हैं। बढ़ती मौतों की संख्या ने संघर्ष विराम की प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
साउथ सुपरस्टार राम चरण इन दिनों निजी और प्रोफेशनल दोनों मोर्चों पर सुर्खियों में हैं। हाल ही में पिता बने राम चरण के घर जहां खुशियों ने दस्तक दी है, वहीं अब उनके करियर से जुड़ी एक बड़ी अपडेट भी सामने आई है। उनकी बहुप्रतीक्षित पैन इंडिया फिल्म ‘पेद्दी’ की रिलीज डेट का आधिकारिक ऐलान कर दिया गया है, जिससे फैंस की एक्साइटमेंट और बढ़ गई है।
30 अप्रैल 2026 को सिनेमाघरों में उतरेगी ‘पेद्दी’
फिल्म ‘पेद्दी’ के ऐलान के बाद से ही यह लगातार चर्चा में बनी हुई है। सोशल मीडिया पर फिल्म से जुड़ी हर अपडेट को लेकर दर्शकों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। अब मेकर्स ने फिल्म का नया पोस्टर जारी करते हुए इसकी रिलीज डेट का खुलासा कर दिया है। मेकर्स के मुताबिक, ‘पेद्दी’ 30 अप्रैल 2026 को वर्ल्डवाइड सिनेमाघरों में रिलीज होगी। रिलीज डेट सामने आते ही फैंस के बीच खुशी की लहर दौड़ गई है।
रफ-टफ अंदाज में दिखे राम चरण
जारी किए गए नए पोस्टर में राम चरण बेहद दमदार अवतार में नजर आ रहे हैं। लंबे बाल, घनी दाढ़ी, खून से सना चेहरा और धूल में लिपटा लुक उनके किरदार की ताकत और आक्रामकता को दर्शाता है। भीड़ के बीच खड़े राम चरण का यह अवतार एक मजबूत, मास अपील वाले किरदार की झलक देता है। पोस्टर के साथ मेकर्स ने कैप्शन में लिखा, “उसकी आने की तारीख बदल सकती है, लेकिन उसकी ताकत और जज्बा नहीं। ‘पेद्दी’ 30 अप्रैल 2026 को वर्ल्डवाइड रिलीज।”
बुची बाबू सना के निर्देशन में बन रही है फिल्म
‘पेद्दी’ का निर्देशन बुची बाबू सना ने किया है और इसे साल 2026 की सबसे बड़ी पैन इंडिया फिल्मों में शामिल किया जा रहा है। फिल्म में राम चरण के साथ जान्हवी कपूर अहम भूमिका निभाती नजर आएंगी। वहीं जगपति बाबू, शिवा राजकुमार और दिव्येंदु शर्मा जैसे दमदार कलाकार भी फिल्म का हिस्सा हैं। मजबूत स्टारकास्ट और दमदार कहानी के चलते ‘पेद्दी’ से दर्शकों को बड़ी उम्मीदें हैं।
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घायल को अस्पताल पहुंचाया गया
नैनीताल। बेतालघाट क्षेत्र में देर रात एक डंपर वाहन अनियंत्रित होकर सड़क से नीचे गहरी खाई में गिर गया। हादसे की सूचना रात लगभग 11:43 बजे जिला नियंत्रण कक्ष नैनीताल एवं जिला आपदा प्रबंधन द्वारा एसडीआरएफ को दी गई, जिसमें एक व्यक्ति के वाहन में फंसे होने की जानकारी मिली।
सूचना मिलते ही पोस्ट खैरना से इंस्पेक्टर राम सिंह बोरा के नेतृत्व में एसडीआरएफ की रेस्क्यू टीम आवश्यक उपकरणों के साथ तुरंत घटनास्थल के लिए रवाना हुई। मौके पर पहुंचकर टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए खाई में उतरकर डंपर (वाहन संख्या UK 12 CA 0585) में फंसे व्यक्ति को घायल अवस्था में बाहर निकाला।
रेस्क्यू टीम ने स्ट्रेचर और रोप की सहायता से कड़ी मशक्कत कर घायल को सुरक्षित मुख्य मार्ग तक पहुंचाया, जिसके बाद उसे एंबुलेंस के माध्यम से अस्पताल भेजा गया। घायल की पहचान जगत बोहरा (45 वर्ष), पुत्र प्रताप सिंह, निवासी सोन गांव (बस गांव), बेतालघाट, जिला नैनीताल के रूप में हुई है।
सीएम धामी ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए की प्रार्थना
भीमताल। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भीमताल विधानसभा क्षेत्र से विधायक राम सिंह कैड़ा के आवास पर पहुंचकर उनकी पूज्य माताजी के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने शोकाकुल परिजनों से मुलाकात कर उन्हें सांत्वना दी और दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि इस दुःख की घड़ी में राज्य सरकार एवं वे स्वयं शोक संतप्त परिवार के साथ खड़े हैं। उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की कि दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और परिजनों को यह अपार दुःख सहन करने की शक्ति प्रदान करें।
शून्यकाल में भट्ट ने बापूग्राम की समस्याओं की तरफ केंद्र का ध्यान आकृष्ट कराया
देहरादून। ऋषिकेश के बापूग्राम और मीरानगर को राजस्व ग्राम का अधिकार दिलाने की प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट ने संसद में पुरजोर पैरवी की है। उन्होंने शून्यकाल के दौरान इस मुद्दे को उठाकर, स्थानीय लोगों के वैधानिक अधिकार एवं विकास की चिंताओं की तरफ सरकार का ध्यान आकृष्ट कराया।
आज राज्यसभा के शून्यकाल में उनके द्वारा ऋषिकेश के बापूग्राम और मीरा नगर क्षेत्र से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय उठाया गया। जिसमें उन्होंने सरकार के संज्ञान में लाते हुए कहा, यह दोनों क्षेत्र पिछले कई दशकों से घनी आबादी वाले हैं। 1950 से यहां लोग निवास कर रहे हैं जिनकी 1980 में ही जनसंख्या 50 हजार पाई गई थी। आज वहां हजारों परिवार निवास करते हैं, जो नियमित रूप से नगर निगम को करोड़ों रुपए कर भुगतान भी करते हैं, परंतु आज तक इन्हें राजस्व ग्राम का दर्जा प्राप्त नहीं हुआ है। राजस्व ग्राम घोषित न होने के कारण इन क्षेत्रों के नागरिकों को अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। जैसे भूमि स्वामित्व से संबंधित प्रमाण पत्र प्राप्त नहीं हो पा रहे हैं, इसी तरह प्रधानमंत्री आवास योजना, किसान सम्मान निधि, सामाजिक सुरक्षा पेंशन जैसी केंद्र एवं राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ पूर्ण रूप से नहीं मिल पा रहा। वहीं इस तकनीकी दिक्कत के कारण वहां विकास कार्यों में अनावश्यक प्रशासनिक बाधाएँ उत्पन्न हो रही हैं। उनके द्वारा सदन में बताया गया कि स्थानीय जनप्रतिनिधियों एवं नागरिकों द्वारा इस विषय में बार-बार अनुरोध किए गए हैं, परंतु अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
उनके द्वारा इस दौरान केंद्र सरकार से अनुरोध किया कि वे उत्तराखण्ड सरकार से समन्वय कर ऋषिकेश के बापूग्राम एवं मीरा नगर क्षेत्रों को शीघ्र राजस्व ग्राम घोषित करने हेतु आवश्यक निर्देश प्रदान करें। ताकि वहाँ के निवासियों को उनके वैधानिक अधिकार एवं सरकारी योजनाओं का पूर्ण लाभ मिल सके।
बहुउद्देशीय शिविर में 40 शिकायतों का हुआ निस्तारण
मंत्री गणेश जोशी ने बांटे चेक और किट
देहरादून। कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने आज सहसपुर ब्लॉक के भगवन्तपुर में आयोजित बहुउद्देशीय शिविर में बतौर मुख्य अतिथि प्रतिभाग किया। इस अवसर पर उन्होंने विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टालों का निरीक्षण किया और शिविर में उपस्थित लाभार्थियों से संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं।
शिविर के दौरान कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने कृषि विभाग के लाभार्थियों को चेक वितरित किए, कृषक समूहों को फार्म मशीनरी बैंक के अंतर्गत उपकरण प्रदान किए तथा बाल विकास विभाग के लाभार्थियों को महालक्ष्मी किट एवं किशोरी किट वितरित की। इस दौरान कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को नशा मुक्ति की भी शपथ दिलाई।
कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने जन–जन की सरकार, जन–जन के द्वार प्रशासन चला गांव की ओर’ कार्यक्रम के अंतर्गत आमजन की समस्याएं सुनीं। शिविर में कुल 40 शिकायतें एवं समस्याएं दर्ज की गईं, जिनमें से अधिकांश का मौके पर ही समाधान कर दिया गया, जबकि शेष विकासपरक एवं योजनाओं से संबंधित शिकायतों के निस्तारण हेतु संबंधित अधिकारियों को समयबद्ध प्रस्ताव तैयार कर समाधान के निर्देश दिए गए।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री जोशी ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम की सफलता को देखते हुए मुख्यमंत्री द्वारा शिविरों की अवधि 15 दिन और बढ़ाई गई है, जो सरकार की संवेदनशीलता को दर्शाता है। उन्होंने बताया कि प्रदेशभर में आयोजित इन विशेष शिविरों से अब तक 6 लाख से अधिक लोग लाभान्वित हो चुके हैं। इसे उन्होंने सरकार की एक अनूठी और जनकल्याणकारी पहल बताया।
कैबिनेट मंत्री ने कहा कि डबल इंजन सरकार समाज के अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाएं आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। केंद्रीय बजट 2026 में लखपति दीदियों को ‘शी मार्ट’ से जोड़ने का प्रावधान किया गया है, जिससे महिलाओं की आजीविका संवर्धन को और मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि केंद्रीय बजट में महिलाओं, किसानों और सैनिकों सहित हर वर्ग का विशेष ध्यान रखा गया है, जिसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री एवं केंद्रीय वित्त मंत्री का आभार व्यक्त किया।
अपने संबोधन में मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि वीबीजी रामजी योजना, मनरेगा से एक कदम आगे बढ़कर ग्रामीण भारत के सर्वांगीण विकास की दिशा में भारत सरकार की एक सशक्त पहल है। उन्होंने बताया कि इस योजना के संचालन हेतु चालू वित्तीय वर्ष में भारत सरकार द्वारा ₹95,652.31 करोड़ का बजटीय प्रावधान किया गया है। योजना के अंतर्गत रोजगार के दिवस 100 से बढ़ाकर 125 कर दिए गए हैं तथा समय पर मजदूरी भुगतान के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं।
इस अवसर पर एसडीम मसूरी राहुल आनंद, जिला कार्यक्रम अधिकारी जितेंद्र कुमार, जिला विकास अधिकारी सुनील कुमार, मंडल प्रभारी ज्योति कोटिया, लक्ष्मण सिंह रावत, किरन, ग्राम प्रधान रेनू शर्मा, भारती जवाड़ी, सुनील छेत्री, अजय पुंडीर सहित संबंधित विभिन्न विभागों के अधिकारीगण उपस्थित रहे।
कैंसर आज दुनिया भर में एक गंभीर स्वास्थ्य संकट के रूप में उभर चुका है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, यह बीमारी वैश्विक स्तर पर मौतों के प्रमुख कारणों में शामिल है। वर्ष 2020 में करीब एक करोड़ लोगों की जान कैंसर के कारण गई, यानी हर छह में से एक मौत की वजह कैंसर रहा। ब्रेस्ट, फेफड़े, कोलन, रेक्टम और प्रोस्टेट कैंसर सबसे ज्यादा जानलेवा साबित हो रहे हैं। बीते कुछ दशकों में कैंसर के मामलों और इससे होने वाली मौतों में तेज़ बढ़ोतरी ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है।
इसी गंभीरता को देखते हुए कैंसर के प्रति जागरूकता बढ़ाने और इसकी रोकथाम, समय पर पहचान व बेहतर इलाज को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से हर साल 4 फरवरी को वर्ल्ड कैंसर डे मनाया जाता है।
दिल्ली की रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता, युवाओं पर भारी पड़ रहा कैंसर
इस बीच दिल्ली से सामने आई एक सरकारी रिपोर्ट ने हालात को और चिंताजनक बना दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 20 वर्षों में दिल्ली में कैंसर से होने वाली हर तीन में से एक मौत 44 वर्ष से कम उम्र के लोगों की हुई है। यह आंकड़ा युवाओं में कैंसर के बढ़ते खतरे की ओर साफ इशारा करता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि बीमारी की देर से पहचान, नियमित स्क्रीनिंग की कमी, तंबाकू और शराब का बढ़ता सेवन, प्रदूषण तथा तनाव जैसे कारण इस बढ़ते खतरे के लिए जिम्मेदार हैं। विशेषज्ञ समय से पहले होने वाली मौतों को रोकने के लिए शुरुआती जांच, जन-जागरूकता और जीवनशैली में सुधार पर जोर दे रहे हैं।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, बीते दो दशकों में दिल्ली में कैंसर से 1.1 लाख से अधिक लोगों की जान जा चुकी है।
मौतों का आंकड़ा लगातार बढ़ा
साल 2005 में जहां कैंसर से करीब 2,000 मौतें दर्ज की गई थीं, वहीं 2024 में यह संख्या बढ़कर लगभग 7,400 तक पहुंच गई।
साल 2011 में कैंसर से करीब 10,000 मौतें हुईं, जिनमें 45–64 वर्ष आयु वर्ग के लोग सबसे अधिक प्रभावित रहे। इसके अलावा, 14 साल से कम उम्र के बच्चों की हिस्सेदारी लगभग 8 प्रतिशत और 15–24 वर्ष के युवाओं की करीब 5.8 प्रतिशत रही।
दिल्ली में सालाना 7 प्रतिशत की दर से बढ़ रहीं कैंसर से मौतें
विशेषज्ञों के मुताबिक, दिल्ली में कैंसर से होने वाली मौतें हर साल औसतन 7 प्रतिशत की दर से बढ़ रही हैं, जो राजधानी की जनसंख्या वृद्धि दर से लगभग तीन गुना ज्यादा है।
कैंसर से होने वाली 90 प्रतिशत से अधिक मौतें अस्पतालों में दर्ज की गई हैं। वर्ष 2018 में यह आंकड़ा लगभग 98 प्रतिशत तक पहुंच गया था, जिससे यह स्पष्ट होता है कि समय के साथ कैंसर की रिपोर्टिंग और इलाज की पहुंच बढ़ी है।
2005 से 2024 के बीच अस्पतालों में 45–64 वर्ष आयु वर्ग के 38,481 लोगों की कैंसर से मौत हुई, जबकि 65 वर्ष से अधिक आयु के 23,141 और 25–44 वर्ष आयु वर्ग के 18,220 लोगों की जान गई।
कौन-सा कैंसर सबसे ज्यादा जानलेवा?
आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि महिलाओं की तुलना में पुरुषों में कैंसर से मौत के मामले अधिक हैं।
पुरुषों में करीब 40 प्रतिशत मौतें 45–64 वर्ष आयु वर्ग में दर्ज की गईं
महिलाओं में इसी आयु वर्ग में यह आंकड़ा 43 प्रतिशत से अधिक रहा
महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर (411 मौतें) और ओवेरियन कैंसर (194 मौतें) प्रमुख कारण रहे
पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर (117) और सांस की नली के कैंसर (553) सबसे ज्यादा जानलेवा साबित हुए
मुंह और गले के कैंसर से पुरुषों में 607 और महिलाओं में 214 मौतें दर्ज की गईं, जो तंबाकू सेवन से जुड़े जोखिम को दर्शाता है
25–44 वर्ष आयु वर्ग की महिलाओं में कैंसर से होने वाली अधिकांश मौतों की वजह ब्रेस्ट और सर्वाइकल कैंसर रहे।
देर से पहचान बन रही सबसे बड़ी वजह
कैंसर विशेषज्ञों का कहना है कि अधिकतर मामलों में मौतों की मुख्य वजह बीमारी का देर से पता चलना है। लोग शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं, यह सोचकर कि कम उम्र में कैंसर होना संभव नहीं। नतीजतन, बीमारी का पता तब चलता है जब वह एडवांस स्टेज में पहुंच चुकी होती है।
डॉक्टरों के अनुसार, युवाओं में कैंसर की बायोलॉजी अधिक आक्रामक होती है। शरीर में गांठ, असामान्य ब्लीडिंग, लंबे समय तक मुंह के छाले या आवाज में बदलाव जैसे संकेतों को सामान्य समझना इलाज में देरी का कारण बनता है।
डॉक्टरों की सलाह
विशेषज्ञ कैंसर से होने वाली मौतों को कम करने के लिए नियमित स्क्रीनिंग कार्यक्रम बढ़ाने, तंबाकू और शराब से दूरी बनाने, स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और लक्षण दिखते ही डॉक्टर से संपर्क करने की अपील कर रहे हैं।
नोट: यह लेख विभिन्न मेडिकल रिपोर्ट्स और आधिकारिक आंकड़ों के आधार पर तैयार किया गया है।
(साभार)
