राधा रतूड़ी को RTI व्यवस्था की जिम्मेदारी, अधिसूचना जारी..
उत्तराखंड: पूर्व मुख्य सचिव राधा रतूड़ी मुख्य सूचना आयुक्त बन गई हैं। शासन ने नियुक्ति को लेकर अधिसूचना भी जारी कर दी है। बता दें कि सीएस पद से राधा रतूड़ी का कार्यकाल 31 मार्च को खत्म हो गया था। जिसके बाद राज्यपाल ने राधा रतूड़ी को मुख्य सूचना आयुक्त नियुक्त किया गया है। बता दें यह नियुक्ति पदभार ग्रहण करने की तिथि से प्रभावी होगी। वे तीन साल की अवधि तक या 65 वर्ष की आयु प्राप्त करने तक (जो भी पहले हो) पद पर रहेंगी। बता दें राधा रतूड़ी उत्तराखंड की चौथी पूर्व मुख्य सचिव हैं। जिन्हें राज्य मुख्य सूचना आयुक्त की जिम्मेदारी दी गई है।
सरकारी ऐप से चलेगी अब टैक्सी सेवा, उत्तराखंड में ओला-उबर को मिलेगी टक्कर..
उत्तराखंड: प्रदेश में टैक्सी सेवाओं को सुव्यवस्थित और डिजिटल बनाने की दिशा में सरकार ने एक अहम कदम उठाया है। प्रदेश में अब ओला-ऊबर की तरह काम करने वाला सरकारी मोबाइल एप विकसित किया जाएगा, जिससे टैक्सी और मैक्सी सेवाओं को एक पंजीकृत प्लेटफॉर्म पर लाया जा सके। सचिव परिवहन बृजेश संत ने इस संबंध में उत्तराखंड टैक्सी मैक्सी महासंघ के साथ हुई बैठक में निर्देश जारी किए। इसके साथ ही देहरादून में वाहनों की मैन्युअल फिटनेस जांच दोबारा शुरू करने के लिए परिवहन मुख्यालय द्वारा केंद्र सरकार को पत्र भेजा जाएगा।
उत्तराखंड टैक्सी-मैक्सी महासंघ की सचिव परिवहन बृजेश कुमार संत के साथ हुई बैठक में वाहनों की फिटनेस जांच को लेकर अहम चर्चा हुई। बैठक में परिवहन मुख्यालय के अधिकारी भी शामिल हुए। महासंघ ने मांग की कि चूंकि हाईकोर्ट ने 15 मई तक ऑटोमेटेड फिटनेस जांच पर स्टे दिया है, इसलिए देहरादून में मैन्युअल फिटनेस जांच की सुविधा भी बहाल की जाए, ताकि वाहन मालिकों को असुविधा का सामना न करना पड़े।
15 दिन का ग्रीन कार्ड देने पर चर्चा
वाहनों की फिटनेस जांच को लेकर उठ रही मांगों के बीच, सचिव परिवहन बृजेश कुमार संत ने परिवहन मुख्यालय के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि हाईकोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए इस मुद्दे पर केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय को पत्र भेजा जाए। वर्तमान में, मंत्रालय द्वारा डोईवाला में ऑटोमेटेड फिटनेस सेंटर संचालित होने के कारण देहरादून में मैन्युअल फिटनेस जांच के लिए शुल्क जमा कराने की प्रक्रिया बंद कर दी गई थी, जिससे वाहन मालिकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बैठक में चारधाम यात्रा पर बाहरी राज्यों से आने वाले व्यावसायिक वाहनों को 15 दिन का ग्रीन कार्ड देने पर चर्चा हुई। सचिव परिवहन ने इस पर अपनी सहमति दे दी है। जल्द ही इस संबंध में आदेश जारी हो जाएगा। राज्य के भीतर के वाहनों का ग्रीन कार्ड पूर्व की भांति पूरे यात्रा सीजन के लिए ही बनेगा।
ब्रिटिश कालीन रास्ता बंद करने पर हाईकोर्ट सख्त, पंगोट के ग्रामीणों को मिले न्याय के संकेत..
उत्तराखंड: हाईकोर्ट ने नैनीताल जिले के पंगोट क्षेत्र के बुढ़ पंगोट गांव में ब्रिटिश कालीन पैदल रास्ता बंद किए जाने पर वन विभाग को कड़ी फटकार लगाई है। मुख्य न्यायाधीश जी. नरेंद्र और न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की खंडपीठ ने शुक्रवार को हुई सुनवाई में सम्बंधित डीएफओ को निर्देश दिया कि वे शनिवार तक ग्रामीणों के लिए रास्ता खोलें और इसकी रिपोर्ट न्यायालय में पेश करें। कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई शनिवार यानि को भी जारी रखने के आदेश दिए हैं, जिससे ग्रामीणों को राहत मिलने की उम्मीद जगी है।
बर्ड सेंचुरी के नाम पर रास्ता बंद करने का आरोप..
बुढ़ पंगोट निवासी याचिकाकर्ता भावना और प्रेमलता बुधलाकोटी ने जनहित याचिका में आरोप लगाया है कि यह रास्ता एक पारंपरिक वन-वे (बटिया) है, जो गांव के निवासियों की आवाजाही का एकमात्र साधन रहा है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि बाद में इस क्षेत्र को बर्ड सेंचुरी घोषित कर रास्ते को बंद कर दिया गया, जबकि वन विभाग ने एक बिल्डर को अवैध लाभ पहुंचाने के लिए यह कार्रवाई की। याचिका में यह भी उल्लेख है कि संबंधित बिल्डर ने वन भूमि पर अवैध सड़क का निर्माण भी कर लिया है। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि पूर्व में भी वन विभाग ने इसी तरह का निर्णय लेकर एक अन्य गांव का रास्ता बंद कर दिया था। उसको भी कोर्ट ने खोलने के आदेश दिए थे। याचिका में आगे कहा गया कि उनके वहां कई तरह के मरीज हैं। रास्ता बंद होने के कारण वे लोग उपचार करने के लिए गांव से बाहर नहीं जा पा रहे हैं। इसलिए इस प्रतिबंध को हटाया जाये।
उत्तराखंड हाईकोर्ट में बुढ़ पंगोट के ग्रामीणों द्वारा दायर जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान वन विभाग के डीएफओ ने कोर्ट में पेश होकर विभाग का पक्ष रखते हुए कहा कि विवादित रास्ता एनजीटी के आदेश के तहत बंद किया गया है। इस पर ग्रामवासियों की ओर से तीखा विरोध जताया गया, जिनका कहना है कि वे न सिर्फ प्रकृति प्रेमी हैं, बल्कि जंगल की संरक्षा और अग्निशमन कार्यों में सबसे आगे रहते हैं। ग्रामीणों ने कोर्ट को बताया कि यह रास्ता उनकी रोज़मर्रा की ज़रूरतों से जुड़ा है और उसे बंद करके उनके अधिकारों का हनन किया गया है। ग्रामीणों ने यह भी तर्क दिया कि जब जंगल में आग लगती है, तो सबसे पहले वही लोग फर्स्ट फायरमैन की भूमिका निभाते हैं, जबकि अधिकारी बाद में पहुंचते हैं। मामले की सुनवाई आज शनिवार को भी जारी है।
बता दे उत्तराखंड के नैनीताल जिले में स्थित पंगोट एक बेहद खूबसूरत और शांत पहाड़ी गांव है, जो पक्षी प्रेमियों, ट्रेकर्स और नेचर फोटोग्राफर्स के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं है। बर्ड सेंचुरी के रूप में प्रसिद्ध यह क्षेत्र 25 से अधिक विलक्षण पक्षी प्रजातियों का घर है, जिसे देखने देश-विदेश से पर्यटक यहां पहुंचते हैं। पंगोट से नज़दीक ही जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क का रास्ता भी खुलता है, जिससे इसका पर्यटन महत्व और बढ़ जाता है। खासकर गर्मी के मौसम में, जब शहरों की तपिश से राहत की तलाश होती है, पंगोट एक लोकप्रिय डेस्टिनेशन बनकर उभरता है।
हिमखंड हटाकर गौरीकुंड-केदारनाथ मार्ग खोला गया, छह से दस फीट बर्फ काटी गई..
उत्तराखंड: केदारनाथ धाम जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए राहत की खबर है। भारी बर्फबारी के कारण बंद हुआ गौरीकुंड-केदारनाथ पैदल मार्ग अब आवाजाही के लिए खोल दिया गया है। हिमखंड जोन में 6 से 10 फीट तक बर्फ काटकर रास्ता बनाया गया हैं। मार्ग को घोड़ा-खच्चर संचालन के लिए सुरक्षित किया जा रहा है। जल्द ही केदारनाथ धाम तक आवश्यक सामानों की ढुलाई शुरू होगी। प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि मार्ग पूरी तरह सुरक्षित होने तक सतर्कता बरतें और अनावश्यक जोखिम न लें।
बुधवार देर शाम को मजदूरों की टीम ने लिनचोली से छानी कैंप और छानी कैंप से रुद्रा प्वाइंट होते हुए केदारनाथ तक बर्फ हटाने का काम पूरा कर लिया। हिमखंड जोन में 6 से 10 फीट तक जमी बर्फ काटकर मार्ग को सुगम बनाया गया। वहीं, फिसलन वाले स्थानों पर मिट्टी और पत्थर डालकर सुरक्षा के इंतजाम किए जा रहे हैं। हालांकि मार्ग खोल दिया गया है, लेकिन प्रशासन ने यात्रियों से सावधानी बरतने और सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की है। खासकर हिमखंड जोन और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में फिसलन को लेकर सतर्कता आवश्यक है।
20 दिन में नौ किमी क्षेत्र में बर्फ हटाई..
हिमखंड जोन में आठ से दस फीट तक बर्फ काटकर रास्ता तैयार किया गया है। लोनिवि के अधिशासी अभियंता विनय झिक्वांण का कहना हैं कि गौरीकुंड-केदारनाथ पैदल मार्ग को धाम तक पैदल आवाजाही के लिए खोल दिया गया है। 70 मजूदरों ने 20 दिन में 9 किमी क्षेत्र में बर्फ हटा दी है। दूसरे चरण में रुद्रा प्वाइंट से हेलिपैड और हेलिपैड से मंदिर तक बर्फ हटाई जाएगी। एमआई-26 हेलिपैड क्षेत्र से बर्फ हटाना पहली प्राथमिकता है। दस अप्रैल तक केदारनाथ में सभी प्रमुख जगहों से बर्फ हटा दी जाएगी।
सरकारी स्कूलों में घटती छात्र संख्या पर सख्त रुख, शिक्षा मंत्री ने दिए जांच के आदेश..
उत्तराखंड: उत्तराखंड के सरकारी स्कूलों में लगातार घटती छात्र संख्या को लेकर शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने गंभीर चिंता जताते हुए जांच के निर्देश दिए हैं। इसके लिए शिक्षा महानिदेशालय स्तर पर जांच समिति गठित की जाएगी। समिति विभिन्न पहलुओं का अध्ययन कर एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट सौंपेगी। शिक्षा मंत्री ने कहा कि सरकारी विद्यालयों की स्थिति सुधारने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे। समस्या की जड़ तक पहुंचकर समाधान निकाला जाएगा।
उत्तराखंड में सरकारी विद्यालयों में छात्र-छात्राओं की संख्या में तेजी से गिरावट आ रही है। 2800 से अधिक ऐसे विद्यालय हैं, जहां छात्र संख्या 10 या उससे भी कम रह गई है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने तत्काल जांच के आदेश दिए हैं। विभागीय समीक्षा बैठक में शिक्षा मंत्री ने शिक्षा महानिदेशालय को एक सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश। रिपोर्ट के आधार पर छात्रवृद्धि के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
वही मंत्री ने निजी स्कूलों को लेकर भी सख्त निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आरटीई (निःशुल्क शिक्षा) के तहत बच्चों के प्रवेश को सुनिश्चित किया जाए। किताबों, स्कूल ड्रेस और मनमानी फीस वृद्धि से संबंधित शिकायतों का शीघ्र निस्तारण हो। इसके लिए विभाग द्वारा जारी टोल-फ्री नंबर पर आने वाली शिकायतों की निगरानी बढ़ाई जाए।
विद्यालयों में जरूरत के अनुसार शुरू होंगे नए विषय..
उत्तराखंड के सरकारी स्कूलों में जल्द ही आवश्यकतानुसार नए विषय शुरू किए जाएंगे। शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने सभी जिलों के मुख्य शिक्षा अधिकारियों (CEO) को अपने जिलों के प्रस्ताव शिक्षा महानिदेशालय को भेजने के निर्देश दिए हैं। उनका कहना हैं कि स्थानीय जनप्रतिनिधियों और अभिभावक संघों की मांग को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है। हर जिले के प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में दो-दो विद्यालयों के उच्चीकरण का प्रस्ताव तैयार होगा। राजीव गांधी नवोदय विद्यालयों की स्थापना के लिए भी प्रस्ताव भेजने को कहा गया है। शिक्षा मंत्री का कहना हैं कि सरकारी विद्यालयों को छात्रों के अनुरूप आधुनिक और विषयगत रूप से सशक्त बनाना हमारा उद्देश्य है। नए विषयों की शुरुआत से छात्र-छात्राओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलेगी।
इसी महीने शासन को प्रस्ताव भेजने के निर्देश..
शिक्षा मंत्री ने कहा कि विद्यालयों के उच्चीकरण, क्लस्टर विद्यालयों की स्थापना, डी व सी श्रेणी के स्कूलों से संबंधित प्रस्ताव इस माह तक शासन को भेजने के निर्देश दिए गए हैं। वर्तमान वित्तीय वर्ष के लिए जिन जिलों से प्रस्ताव समय पर प्राप्त नहीं होंगे, ऐसे जिलों के मुख्य शिक्षा अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। इसके साथ ही डॉ. रावत ने अधिकारियों को सभी विद्यालयों में पेयजल, विद्युत, फर्नीचर, कंप्यूटर और शौचालय की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
चारधाम यात्रा से पहले विश्राम गृहों का होगा सौंदर्यीकरण, बीकेटीसी ने प्रबंधकों को दिए सख्त निर्देश..
चारधाम यात्रा से पहले विश्राम गृहों का होगा सौंदर्यीकरण, बीकेटीसी ने प्रबंधकों को दिए सख्त निर्देश..
उत्तराखंड: बद्री-केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) के मुख्य कार्याधिकारी का कहना हैं कि चारधाम यात्रा से पहले सभी विश्राम गृहों की व्यवस्थाओं को दुरुस्त किया जाएगा। इसके लिए बीकेटीसी के मुख्य कार्याधिकारी विजय प्रसाद थपलियाल ने विश्राम गृह प्रबंधकों को निर्देश दिए हैं। उनका कहना हैं साफ-सफाई, पेयजल, बिजली, बिस्तर, सुरक्षा और अन्य सुविधाओं को दुरुस्त किया जाएगा। यात्रा के दौरान तीर्थयात्रियों को आरामदायक और सुरक्षित विश्राम गृह मिलें, इसके लिए यह कदम अहम साबित होगा।
बुधवार को वर्चुअल बैठक में सीईओ ने कहा, केदारनाथ धाम के कपाट दो मई और बद्रीनाथ धाम के कपाट चार मई को खुल रहे हैं। यात्रा से पहले मंदिर समिति के विश्राम गृहों में सौंदर्यीकरण, विद्युत, पेयजल, स्वच्छता, आवासीय व्यवस्था, सीसीटीवी लगाने का काम किया जा रहा है। जिससे तीर्थयात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिल सके। चारधाम यात्रा की तैयारियों को और अधिक सशक्त बनाने का प्रयास है, जिससे तीर्थयात्रियों को सुगम और सुरक्षित यात्रा का अनुभव मिले। इन व्यवस्थाओं से न केवल यात्रियों को आरामदायक और सुरक्षित यात्रा का अनुभव मिलेगा, बल्कि चारधाम यात्रा के दौरान भीड़ प्रबंधन और निगरानी भी प्रभावी होगी। उन्होंने विश्राम गृह प्रबंधकों से भी अलग-अलग बातचीत की तथा प्रबंधकों की समस्याओं को सुना। बैठक में अधिशासी अभियंता अनिल ध्यानी ने कहा कि यात्रा से पहले सभी विश्राम गृहों में मूलभूत सुविधाओं में सुधार किया जाएगा।
देहरादून, ऋषिकेश, पौड़ी, टिहरी, देवप्रयाग श्रीनगर, रुद्रप्रयाग, गुप्तकाशी, सोनप्रयाग, चमोली, नंदप्रयाग, पीपलकोटी, जोशीमठ, बद्रीनाथ धाम स्थित विश्राम गृहों के व्यवस्थापकों ने समस्याओं को सीईओ के समक्ष रखा। इस मौके पर सहायक अभियंता गिरीश देवली, विपिन तिवारी, मीडिया प्रभारी डाॅ. हरीश गौड़, इंटरनेट कार्डिनेटर दीपेंद्र रावत, कुलदीप नेगी मौजूद रहे।
चारधाम यात्रा से पहले दमकल सेवा होगी मजबूत, 15वें वित्त आयोग के बजट से 20 नए फायर टेंडर तैनात..
उत्तराखंड: दमकल वाहनों की कमी से जूझ रही फायर सर्विस को जल्द ही नए वाहन मिलने वाले हैं। इनमें छोटे बड़े 20 वाटर और फोम टेंडर (दमकल वाहन) चार धाम यात्रा से पहले विभिन्न जिलों की फायर सर्विस यूनिट और स्टेशन में तैनात किए जाएंगे। इनमे से दो दमकल वाहन देहरादून जिले को भी आवंटित किए गए हैं। इन नए दमकल वाहनों से पर्वतीय और शहरी क्षेत्रों में आग बुझाने की क्षमता बढ़ेगी, जिससे यात्रा मार्ग और धार्मिक स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
इसके साथ ही फायर सर्विस जल्द ही कई और वाहनों को खरीदने जा रही है।विश्व बैंक से दमकल वाहनों की खरीद के लिए वित्तीय सहायता मांगी गई है। लंबे समय से प्रदेश के दमकल विभाग में मूलभूत सुविधाओं का टोटा बना हुआ है। कई जिलों में फायर सर्विस के भवन तक नहीं हैं, जिससे आपातकालीन सेवाओं में बाधा आती है। यह कदम महत्वपूर्ण है, क्योंकि फायर सर्विस केवल आगजनी की घटनाओं तक सीमित नहीं होती, बल्कि प्राकृतिक आपदाओं और अन्य आपात स्थितियों में भी अहम भूमिका निभाती है। यदि बजट स्वीकृत होता है और नई गाड़ियाँ व सुविधाएँ उपलब्ध होती हैं, तो यह प्रदेश की आपातकालीन सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाएगा। ऐसे में पिछले दिनों विश्व बैंक की मदद से 19 फायर स्टेशन और यूनिट के लिए बजट मिला था। इनमें से कुछेक जगहों पर काम शुरू हो गया है। जबकि, हरिद्वार के बहादराबाद में भवन बनकर तैयार हो गया है। इसी तरह दमकल विभाग में आग बुझाने वाले वाहनों की भी कमी चली आ रही है।
चारधाम यात्रा से पहले तैनाती स्थलों पर भेजा जाएगा
यह दमकल विभाग के लिए एक बड़ी राहत की खबर है, खासकर चारधाम यात्रा और पर्वतीय इलाकों में आगजनी की घटनाओं को देखते हुए। देहरादून जिले की ही बात करें तो यहां पिछले साल 5 पुराने वाहन निष्प्रयोज्य घोषित किए गए थे, जिनमें से एक वाहन ने 26 साल तक सेवा दी थी। लेकिन अब विभाग ने विभिन्न मदों से मिले बजट से 20 नए दमकल वाहन खरीदे हैं। जिनमें से 10 वाटर टेंडर (पानी से आग बुझाने वाले वाहन) 10 फोम टेंडर (तेल व रसायन जनित आग बुझाने के लिए विशेष वाहन हैं। जिन्हें चारधाम यात्रा से पहले सभी वाहनों को उनके तैनाती स्थलों पर भेजा जाएगा। छोटे वाहन विशेष रूप से पहाड़ी और संकरे इलाकों में आग बुझाने के लिए तैनात किए जाएंगे।
इसके साथ ही अधिकारियों का कहना हैं कि 15वें वित्त आयोग से भी अच्छा खासा बजट मिला है। इससे छोटे फायर टेंडर खरीदे जाएंगे, जो संकरे और पहाड़ी क्षेत्रों में आग बुझाने के लिए उपयोगी होंगे। ताकि, फायर सर्विस के बेड़े को मजबूत किया जा सके। साथ ही विश्व बैंक को भी दमकल वाहन खरीद के लिए प्रस्ताव विभाग की ओर से भेजा गया है।
ये होंगे दमकल वाहन..
फोम टेंडर- 05 सात हजार लीटर और 05 तीन हजार लीटर
वाटर टेंडर-05 तीन हजार लीटर ओर 05 सात हजार लीटर
फायर सर्विस के लिए 20 दमकल वाहनों की खरीद गई है। इन्हें जल्द ही विभिन्न जिलों के लिए भेज दिया जाएगा। इसके साथ ही कुछ और वाहन खरीदने की प्रक्रिया चल रही है। विश्व बैंक को भी वाहन खरीदने के लिए बजट का प्रस्ताव भेजा गया है।
वन संसाधनों से राजस्व बढ़ाने के प्रयास किए जाने चाहिए- सीएम धामी..
उत्तराखंड: सीएम पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में वन विभाग और ऊर्जा निगम की गेम चेंजर योजनाओं की समीक्षा की। बैठक में उन्होंने वन विभाग को वनों के संरक्षण के साथ-साथ वन संपदाओं से राजस्व बढ़ाने के लिए और अधिक प्रभावी प्रयास करने के निर्देश दिए। साथ ही ऊर्जा निगम को ऊर्जा क्षेत्र में नई संभावनाओं पर कार्य करने की सलाह दी। सरकार नवीकरणीय ऊर्जा, जलविद्युत और अन्य ऊर्जा स्रोतों के बेहतर उपयोग पर फोकस कर रही है, जिससे प्रदेश की ऊर्जा क्षमता को बढ़ावा दिया जा सके।
सीएम धामी ने वन विभाग को निर्देश दिए कि गेस्ट हाउस के आधुनिकीकरण पर विशेष ध्यान दिया जाए ताकि पर्यटन को बढ़ावा मिल सके।
इसके साथ ही उन्होंने मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए कारगर उपाय अपनाने की जरूरत पर जोर दिया। सीएम ने कहा कि वन संपदाओं के बेहतर उपयोग से प्रदेश में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार को बढ़ावा दिया जाए, जिससे स्थानीय लोगों को आर्थिक लाभ हो सके।
बैठक में अधिकारियों ने कहा कि इको टूरिज्म के अंतर्गत इको कैंपिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर का विकास, पुराने फॉरेस्ट रेस्ट हाउस के रिस्टोर, स्थानीय युवाओं को विभिन्न गतिविधियों जैसे नेचर गाइड का प्रशिक्षण और क्षमता विकास कार्यक्रमों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इको टूरिज्म के लिए समर्पित एक वेबसाइट बनाई जाएगी। अभी तक विभिन्न क्षेत्रों में संचालित इको टूरिज्म क्षेत्र से स्थानीय युवाओं को लगभग पांच करोड़ रुपये, जिप्सी संचालन से 17 करोड़ और स्वयं सहायता समूह को 30 लाख की आय हुई है।
कागजों में नहीं धरातल पर दिखाई दें प्रयास..
सीएम पुष्कर सिंह धामी ने वनाग्नि (जंगल की आग) की रोकथाम के लिए प्रभावी कार्ययोजना और रणनीति तैयार करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि ये प्रयास केवल कागजों तक सीमित नहीं रहने चाहिए, बल्कि धरातल पर प्रभावी रूप से लागू होने चाहिए। सीएम धामी ने यह भी कहा कि मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं को रोकने के लिए अन्य राज्यों की बेस्ट प्रैक्टिस का अध्ययन किया जाए और राज्य में इसके आधार पर एक ठोस कार्ययोजना बनाई जाए। सरकार का उद्देश्य वन संरक्षण को मजबूत करने, जंगलों में आग की घटनाओं को कम करने और स्थानीय समुदायों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर केंद्रित है।
ऊर्जा के क्षेत्र में अनेक संभावनाओं पर कार्य करने की जरूरत..
सीएम धामी ने ऊर्जा निगम की समीक्षा बैठक में कहा कि राज्य में ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने की दिशा में तेजी से कार्य किया जाए। लघु जल विद्युत परियोजनाओं पर विशेष ध्यान दें। कहा कि राज्य की मुख्य अवधारणा में ऊर्जा और पर्यटन प्रदेश था। पर्यटन के क्षेत्र में राज्य में तेजी से कार्य हो रहे हैं, लेकिन ऊर्जा के क्षेत्र में अनेक संभावनाओं पर कार्य करने की जरूरत है। शहरी क्षेत्रों में बिजली लाइन को भूमिगत करने का कार्य मानसून शुरू होने से पहले पूरा किया जाए। सरकारी भवनों में सोलर रूफ टॉप लगाने का कार्य जल्द पूरा करें। यूजेवीएनएल, यूपीसीएल की जो परिसंपत्तियां उपयोग में नहीं है, उनको उपयोग में लाने के लिए प्रभावी कार्य योजना बनाएं।
बैठक में अधिकारियों ने कहा कि वर्ष- 2023 में संशोधित जल विद्युत नीति के अनुसार वन टाइम एमनेस्टी के तहत कुल 160.80 मेगावाट के आठ प्रोजेक्ट को मंजूरी दी गई हैं। ये प्रोजेक्ट 2030 तक 1790 करोड़ की लागत से पूरे होंगे। साथ ही 121 मेगावाट के छह प्रोजेक्ट्स को मंजूरी मिली है। इससे क्षेत्र का सामाजिक आर्थिक विकास होगा। यूजीवीएनएल 2028 से तीन पंप स्टोरेज का कार्य शुरू कर 2031 में पूरा करेगा। लगभग 5660 करोड़ की लागत इन तीनों पंप स्टोरेज में इच्छारी , लखवार-व्यासी और व्यासी-कटापत्थर प्रोजेक्ट शामिल हैं।
15 अप्रैल से बहाल होंगे राष्ट्रीय खेलों के कोच, अन्य विभागों के बजट से वेतन देने की तैयारी..
उत्तराखंड: राष्ट्रीय खेलों के दौरान संविदा पर नियुक्त 279 कोचों को 15 अप्रैल से दोबारा बहाल किया जाएगा। पहले बजट की कमी के कारण इन कोचों के वेतन पर संकट बना हुआ था, लेकिन सरकार और खेल विभाग ने अन्य विभागों के बचे बजट से वेतन देने का समाधान निकाला है। इस फैसले से राज्य में खेल विकास को बढ़ावा मिलेगा और खिलाड़ियों को निरंतर प्रशिक्षण मिल सकेगा।
बजट की कमी के कारण राज्य की खेल तैयारियों पर असर पड़ने की आशंका को देखते हुए सरकार ने अन्य विभागों के बचे हुए बजट से कोचों के वेतन का समाधान निकालने का फैसला किया है। फिलहाल 20 करोड़ रुपये का इंतजाम किए जाने की बात कही जा रही है। बता दे कि राष्ट्रीय खेलों से पहले कोचों के वेतन के लिए 2025-26 के बजट में 11 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए थे, लेकिन मात्र 10 लाख रुपये ही मिले। बजट संकट के चलते 28 फरवरी को सभी कोचों को एक महीने का ब्रेक दे दिया गया था। अब सरकार 15 अप्रैल से कोचों को फिर से बहाल करने और उनके वेतन का प्रबंध करने का दावा कर रही है, जिससे राज्य में खेल गतिविधियां प्रभावित न हों।
खेल एवं युवा कल्याण सचिव अमित सिन्हा का कहना हैं कि राष्ट्रीय खेलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके सभी संविदा कोच 15 अप्रैल से तय अनुबंध के अनुसार बहाल कर दिए जाएंगे। हालांकि अभी उनके वेतन के लिए बजट का प्रावधान पूरी तरह से नहीं हो सका है, जिससे वेतन मिलने में कुछ देरी हो सकती है। सरकार अन्य विभागों के बचे बजट से वेतन देने का प्रयास कर रही है, जिससे कोचों को जल्द से जल्द भुगतान किया जा सके। बाद में इसके लिए अनुपूरक बजट भी जारी किया जाएगा। राज्य में कई खेल गतिविधियां जारी हैं और आगामी प्रतियोगिताओं की तैयारी के लिए कोचों की सक्रिय भूमिका बेहद जरूरी होगी। इस फैसले से राज्य के खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण और मार्गदर्शन मिलने की उम्मीद है।
नया शिक्षा सत्र शुरू, किताबें समय पर न पहुंचने से छात्रों की पढ़ाई प्रभावित होगी..
उत्तराखंड: सरकारी और अशासकीय विद्यालयों में आज से नया शिक्षा सत्र 2025-26 शुरू हो गया है। हालांकि हर साल की तरह इस बार भी 10 लाख से अधिक छात्र-छात्राओं को समय पर मुफ्त पाठ्य पुस्तकें नहीं मिलीं, जिससे छात्रों और अभिभावकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। एक अप्रैल से पहले सभी छात्रों को मुफ्त किताबें मिल जानी चाहिए। विद्यालयों में पढ़ने वाले छात्रों के लिए यह सरकार की महत्वपूर्ण योजना है। हर साल की तरह इस बार भी छात्रों को खाली हाथ लौटना पड़ा। अभिभावकों को निजी दुकानों से महंगे दामों पर किताबें खरीदनी पड़ रही हैं।
सरकार की ओर से सरकारी और अशासकीय विद्यालयों में कक्षा एक से 12वीं तक पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को पाठ्य पुस्तकें दी जाती हैं। नया शिक्षा सत्र शुरू होने से पहले विभाग के पास छात्रों तक पाठ्य पुस्तकें पहुंचाने के लिए साल भर का समय रहता है। सिस्टम की सुस्ती का आलम यह है कि शासन से विभाग को इसके लिए मात्र 11 दिन पहले सहमति मिली। साल भर का समय होने के बावजूद विभाग को छात्रों तक किताबें पहुंचाने के लिए 11 दिन पहले ही सहमति मिल पाई। यह देरी नए शिक्षा सत्र की शुरुआत में छात्रों को किताबों के बिना पढ़ाई शुरू करने के लिए मजबूर करती है। समय पर किताबें नहीं मिलने से छात्रों की पढ़ाई में व्यवधान आ रहा है।
वहीं पिछले सप्ताह प्रिंटर को एनसीईआरटी से उपलब्ध सीडी दी गई। जबकि अन्य राज्यों में ब्लॉक स्तर तक पाठ्य पुस्तकें पहुंच चुकी है। माध्यमिक शिक्षा निदेशक डाॅ. मुकुल कुमार सती का कहना है कि पाठ्य पुस्तकों के लिए शासन से सहमति मिल चुकी है। तीन अप्रैल से छात्र-छात्राओं को पाठ्य पुस्तकें मिलने लगेंगी। जब तक पाठ्य पुस्तकें नहीं पहुंचेंगी विद्यालयों में बने बुक बैंक से छात्र-छात्राओं को इसे उपलब्ध कराया जाएगा।
कापियां मिलने में लगेगा अभी समय..
सरकारी और अशासकीय विद्यालयों के छात्र-छात्राओं को मुफ्त पाठ्य पुस्तकों के बाद मुफ्त कापियां दी जानी है। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि मुफ्त कापियों के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। अनुमति मिलने के बाद पहली बार छात्र-छात्राओं को मुफ्त कापियां उपलब्ध कराई जाएंगी। बता दे कि प्रदेश में पौड़ी जिले में सबसे अधिक 1994 सरकारी स्कूल हैं। अल्मोड़ा में 1713, बागेश्ववर में 768, चमोली में 1325, चंपावत में 682, देहरादून में 1296, हरिद्वार में 938, नैनीताल में 1349, पिथौरागढ़ में 1487, रुद्रप्रयाग में 765, टिहरी में 1901, ऊधमसिंह नगर में 1110 और उत्तरकाशी में करीब 1173 सरकारी स्कूल हैं। निदेशक माध्यमिक शिक्षा डाॅ. मुकुल कुमार सती का कहना है कि मुफ्त पाठ्य पुस्तकों के लिए 20 मार्च को शासन से सहमति मिली है। प्रिंटर के साथ इसके लिए एमओयू हो चुका है। जल्द छात्रों को पुस्तकें मिलने लगेंगी।
