स्पिरिचुअल जोन, आयुर्वेद एम्स और भराड़ीसैंण में मंदिर अवसंरचनात्मक निर्माण को प्राथमिकता में लेने के मुख्यमंत्री के निर्देश
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में सचिवालय में उत्तराखंड ग्लोबल इन्वेस्टर समिट के अंतर्गत हुए एमओयू तथा उनकी ग्राउंडिंग (क्रियान्वयन) की प्रगति की समीक्षा हेतु उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में विभिन्न विभागों द्वारा किए गए एमओयू की वर्तमान स्थिति, जमीनी प्रगति, अवरोधों तथा आगे की रणनीति पर विस्तृत चर्चा की गई।
एमओयू ग्राउंडिंग में ऐतिहासिक प्रगति, मुख्यमंत्री ने बताया राज्य के लिए बड़ी उपलब्धि
बैठक में अवगत कराया गया कि ग्लोबल इन्वेस्टर समिट के अंतर्गत कुल 3,57,693 करोड़ रुपये के 1,779 एमओयू संपादित किए गए थे, जिनमें से अब तक 1,06,953 करोड़ रुपये के एमओयू की ग्राउंडिंग सफलतापूर्वक हो चुकी है। मुख्यमंत्री ने इसे उत्तराखंड के औद्योगिक एवं आर्थिक भविष्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए कहा कि यह राज्य में निवेशकों के विश्वास, बेहतर कानून-व्यवस्था, सुशासन और उद्योग अनुकूल वातावरण का प्रत्यक्ष प्रमाण है। उन्होंने कहा कि इस सकारात्मक परिणाम को और आगे बढ़ाने की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं, जिनका लाभ राज्यहित में लिया जाना चाहिए।
एमओयू ग्राउंडिंग में तेजी लाने के लिए मुख्यमंत्री के स्पष्ट और सख्त निर्देश
मुख्यमंत्री धामी ने सभी विभागों को निर्देशित किया कि एमओयू एवं परियोजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी स्तर पर आ रहे अवरोधों का त्वरित निस्तारण किया जाए।
प्रत्येक संबंधित विभाग में एक-एक नोडल अधिकारी नामित किया जाए, जो एमओयू ग्राउंडिंग की सतत मॉनिटरिंग करे। यदि किसी नीति में संशोधन, सरलीकरण अथवा शिथिलीकरण की आवश्यकता हो तो उसका प्रस्ताव तैयार कर शीघ्र पैरवी की जाए। उद्योगपतियों के साथ नियमित संवाद और संपर्क बढ़ाया जाए तथा उन्हें राज्य में कानून-व्यवस्था, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस, डिजिटलीकरण,सरलीकृत प्रक्रियाएं और उद्योग फ्रेंडली इकोसिस्टम से संबंधित सुधारों की जानकारी दी जाए। निर्देश दिए कि परियोजनाओं के इम्प्लीमेंटेशन में अनावश्यक देरी बिल्कुल न हो, कार्यों पर शीघ्र निर्णय लिया जाए, स्पष्ट टाइमलाइन के अनुसार कार्य पूर्ण हों और किसी भी प्रकार की पेंडेंसी न रखी जाए। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि कुछ विभागों द्वारा उत्कृष्ट कार्य किया जा रहा है, जिसकी उन्होंने प्रशंसा भी की।
पर्यटन, उद्योग और निवेश के नए अवसरों पर विशेष फोकस
मुख्यमंत्री ने पर्यटन विभाग को निर्देशित किया कि हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में जिन क्षेत्रों में होटल निर्माण की व्यापक संभावनाएं हैं—जैसे पिथौरागढ़, कैंची धाम सहित अन्य प्रमुख पर्यटन स्थलों—वहाँ निवेश के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया जाए। पर्यटन विभाग द्वारा अवगत कराया गया कि विभाग स्पेशल टूरिस्ट ज़ोन के लिए विभिन्न क्षेत्रों में एरिया आधारित फोकस पॉलिसी तैयार करने की दिशा में कार्य कर रहा है।
उद्योगों को और अधिक सशक्त बनाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री ने उद्योग विभाग को निर्देश दिए कि राज्य के सभी जनपदों में प्रत्येक माह “उद्योग मित्र समिति” की बैठक आयोजित की जाए, जिसमें उद्योगों से जुड़े मुद्दों का समाधान तथा उद्योग-अनुकूल निर्णयों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए।
संस्कृति, अध्यात्म और संतुलित विकास को प्राथमिकता
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और प्राचीन गौरवशाली विरासत का केंद्र बिंदु है। इसे ध्यान में रखते हुए उन्होंने इकोलॉजी और इकोनॉमी के संतुलन पर आधारित यूनिवर्सिटी की स्थापना हेतु आवश्यक होमवर्क करने, हिंदू स्टडीज सेंटर एवं प्राच्य शोध केंद्र से संबंधित पूर्व निर्देशों पर अग्रिम कार्रवाई करने, स्पिरिचुअल ज़ोन डेवलपमेंट, भराड़ीसैंण में मंदिर एवं अन्य रचनात्मक निर्माण कार्य तथा आयुर्वेद एम्स की स्थापना से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाने के निर्देश दिए।
बैठक में सचिव सचिन कुर्वे, विनय शंकर पांडेय, रणजीत सिन्हा, एस. अदांकी, सी. रवि शंकर, डी.एस. गर्ब्याल, रंजन कुमार मिश्रा, अपर सचिव मुख्यमंत्री बंशीधर तिवारी सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी एवं संबंधित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।
उपनल कर्मचारी महासंघ ने सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी का उपनल कर्मियों को समान कार्य–समान वेतन के जिओ जारी होने पर जताया आभार
देहरादून। सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी से आज उपनल कर्मचारी महासंघ के पदाधिकारियों ने उनके कैंप कार्यालय में भेंट कर 10 वर्ष की निरंतर सेवा पूर्ण करने वाले उपनल कर्मियों को समान कार्य–समान वेतन का लाभ दिए जाने का जिओ जारी होने पर मंत्री गणेश जोशी का आभार व्यक्त किया। सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने सभी को बधाई एवं शुभकामनाएं भी दी।
सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का भी आभार व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार कर्मचारी हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए उनके कल्याण के लिए लगातार कार्य कर रही है।
इस अवसर पर एमडी उपनल ब्रिगेडियर जेएनएस बिष्ट, उपनल कर्मचारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष विनोद गोदियाल, महामंत्री विनय प्रसाद सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।
हरिद्वार में सबसे अधिक तीन करोड़ 42 लाख 49 हजार 380 पर्यटक/तीर्थयात्री पहुंचे
देहरादून। प्रदेश में पर्यटकों की बढ़ती संख्या ने नया कीर्तिमान बनाया है। वर्ष 2025 में छह करोड़ तीन लाख से अधिक पर्यटक उत्तराखण्ड आए हैं, जो राज्य गठन के बाद से अब तक की सर्वाधिक संख्या है।
हरिद्वार में सबसे अधिक तीन करोड़ 42 लाख 49 हजार 380 पर्यटक/तीर्थयात्री पहुंचे हैं। जबकि देहरादून में 67 लाख 35 हजार 71 और टिहरी जनपद में 53 लाख 29 हजार 759 सैलानी आए हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में पर्यटन विकास के लिए जहां कई महत्वपूर्ण योजनाएं शुरू की गई हैं, वहीं पर्यटन/तीर्थ स्थलों में बुनियादी सुविधाओं के विकास पर खास जोर दिया गया है। पर्यटकों/तीर्थयात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए आवश्यक सुरक्षा प्रबंध भी किए गए हैं। धामी सरकार के इन प्रयासों का ही परिणाम है कि उत्तराखण्ड में पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।
पर्यटन विभाग के अनुसार वर्ष 2025 में कुल 06 करोड़ 03 लाख 21 हजार 194 पर्यटक/तीर्थयात्री उत्तराखण्ड आए हैं। इनमें एक लाख 92 हजार 533 विदेशी सैलानी शामिल हैं। उत्तराखण्ड राज्य गठन के बाद पहली बार पर्यटकों/तीर्थयात्रियों की संख्या छह करोड़ के पार पहुंची है। पूर्व के आंकड़ों पर नजर दौड़ाएं तो वर्ष 2021 में 2,00,18,115, 2022 में 5,39,81,338, 2023 में 5,96,36,601 और वर्ष 2024 में 5,95,50,277 पर्यटक/तीर्थयात्रियों ने उत्तराखण्ड का रुख किया है।
पर्यटन उत्तराखण्ड की अर्थव्यवस्था का बड़ा आधार है। हमारी सरकार राज्य में पूरे वर्ष पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा दे रही है, ताकि पर्यटन कारोबार से जुड़े स्थानीय निवासियों और युवाओं को सालभर रोजगार के अवसर उपलब्ध हों। शीतकालीन यात्रा इसी की एक कड़ी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के मां गंगा जी के दर्शन को उनके शीतकालीन प्रवास स्थल मुखबा की यात्रा पर आने के बाद राज्य में शीतकालीन यात्रा को बढ़ावा मिला है और बड़ी संख्या में यात्री उत्तराखण्ड पहुंचे हैं। हमने पर्यटक सुविधाएं बढ़ाने के साथ उनकी सुरक्षा को भी सर्वोच्च प्राथमिकता दी है और इन्हीं सब प्रयासों का परिणाम है कि उत्तराखण्ड में पर्यटकों की बढ़ती संख्या हर वर्ष नया रिकॉर्ड बना रही है।
-पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री, उत्तराखण्ड
तेजी से बदलती लाइफस्टाइल का असर अब केवल बड़ों तक सीमित नहीं रहा। जो बीमारियां कभी उम्र बढ़ने के साथ जुड़ी मानी जाती थीं, वे अब बच्चों और युवाओं में भी तेजी से देखने को मिल रही हैं। हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा, तनाव और हार्मोनल असंतुलन जैसी समस्याएं कम उम्र में बढ़ना दुनियाभर के स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए चिंता का विषय बन चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसकी सबसे बड़ी वजह शारीरिक गतिविधियों में कमी और बढ़ता स्क्रीन टाइम है।
बैठे-बैठे गुजर रहा दिन, बढ़ रहा खतरा
हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार, आज की सेंडेंटरी लाइफस्टाइल यानी अधिकतर समय बैठे रहकर काम करना या मोबाइल-कंप्यूटर पर समय बिताना कई गंभीर बीमारियों की जड़ बन चुका है। खासकर बच्चों में मोबाइल, टैबलेट, टीवी और कंप्यूटर का बढ़ता इस्तेमाल उनकी शारीरिक और मानसिक सेहत पर सीधा असर डाल रहा है। पहले ही कई अध्ययनों में स्क्रीन टाइम को सेहत के लिए ‘स्लो पॉयजन’ बताया जा चुका है।
स्क्रीन टाइम क्यों माना जाता है खतरनाक?
अध्ययनों से साफ हुआ है कि लंबे समय तक स्क्रीन के सामने रहने से शारीरिक, मानसिक और सामाजिक विकास प्रभावित होता है। बच्चों में डिजिटल आई स्ट्रेन की समस्या तेजी से बढ़ रही है, जिससे आंखों में जलन, धुंधलापन, सिरदर्द और ड्राई आई जैसी परेशानियां हो सकती हैं।
इसके अलावा ज्यादा स्क्रीन देखने से नींद का पैटर्न भी बिगड़ता है, जिससे मोटापा, डायबिटीज, तनाव और हृदय रोगों का खतरा बढ़ सकता है। बच्चों में ध्यान केंद्रित करने की क्षमता कम होना, चिड़चिड़ापन बढ़ना और भाषा व सामाजिक कौशल का कमजोर पड़ना भी हाई स्क्रीन टाइम से जुड़ी बड़ी समस्याएं हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) भी 5 साल से कम उम्र के बच्चों को स्क्रीन के अधिक संपर्क से दूर रखने की सलाह देता है।
स्क्रीन टाइम को लेकर चौंकाने वाला खुलासा
हालिया अध्ययन में स्क्रीन टाइम को लेकर एक अहम और चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार, बड़े भाई-बहनों की तुलना में घर के छोटे भाई-बहन मोबाइल, कंप्यूटर और टीवी जैसी स्क्रीन पर ज्यादा समय बिताते हैं। इसका सीधा असर उनके बौद्धिक विकास और जीवन की गुणवत्ता पर पड़ सकता है।
अध्ययन में क्या सामने आया?
यह निष्कर्ष ऑस्ट्रेलियन बच्चों पर की गई एक लॉन्गिट्यूडिनल स्टडी के डेटा के आधार पर निकाला गया। अध्ययन में 2 से 15 साल की उम्र के करीब 5,500 बच्चों की 24 घंटे की दिनचर्या का विश्लेषण किया गया।
शोध में पाया गया कि बाद में पैदा हुए बच्चे, पहले जन्मे बच्चों की तुलना में रोजाना 9 से 14 मिनट अधिक स्क्रीन पर बिताते हैं। भले ही यह समय कम लगे, लेकिन प्रतिशत के लिहाज से यह 7 से 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी है, जो सप्ताह में लगभग 1 से 1.5 घंटे अतिरिक्त स्क्रीन टाइम के बराबर है।
छोटे बच्चों के लिए ज्यादा नुकसानदेह
विशेषज्ञों के मुताबिक, यह अतिरिक्त स्क्रीन टाइम बच्चों की फिजिकल एक्टिविटी, आउटडोर खेल और सामाजिक गतिविधियों के समय को कम कर देता है। इसका असर उनके शारीरिक विकास के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ता है।
अध्ययन में यह भी संकेत मिले हैं कि ज्यादा स्क्रीन टाइम के कारण छोटे भाई-बहनों का आईक्यू लेवल और सीखने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।
माता-पिता को किया गया अलर्ट
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि परिवार बढ़ने के साथ माता-पिता के पास छोटे बच्चों के लिए समय कम हो जाता है, जिसके चलते स्क्रीन एक आसान विकल्प बन जाती है। हालांकि, विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि यह आदत लंबे समय में बच्चों को नुकसान पहुंचा सकती है।
बढ़ता स्क्रीन टाइम बच्चों को ऑनलाइन गलत कंटेंट के संपर्क में भी ला सकता है, जिससे उनके बौद्धिक और सामाजिक विकास पर नकारात्मक असर पड़ने की आशंका रहती है।
(साभार)
थाना स्तर तक वर्क कल्चर सुधारने पर जोर, निर्दोषों को परेशान करने पर होगी कार्रवाई
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में अखिल भारतीय डीजी/आईजी सम्मेलन से प्राप्त निष्कर्षों की समीक्षा की। बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि कानून-व्यवस्था, प्रशासनिक कार्यप्रणाली और जनसेवा में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि पुलिस और प्रशासन के सभी विभाग आमजन के प्रति संवेदनशील, उत्तरदायी और परिणामोन्मुखी दृष्टिकोण अपनाते हुए कार्य करें।
मुख्यमंत्री ने पुलिस व्यवस्था को मजबूत करने पर विशेष जोर देते हुए थाना स्तर तक वर्क कल्चर में सुधार, आम नागरिकों के साथ सम्मानजनक एवं संवेदनशील व्यवहार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही निर्दोष नागरिकों को परेशान किए जाने की शिकायतों पर कड़ी कार्रवाई करने और भूमि धोखाधड़ी (लैंड फ्रॉड) पर प्रभावी रोक लगाने के लिए सख्त कानून बनाने के भी निर्देश अधिकारियों को दिए गए।

बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि अपराध नियंत्रण केवल कार्रवाई तक सीमित न रहे, बल्कि प्रशासनिक आत्ममंथन, विभागीय समन्वय और सतत निगरानी के माध्यम से कानून-व्यवस्था को और सुदृढ़ किया जाए। उन्होंने दो टूक कहा कि कानून-व्यवस्था से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।
इसके अलावा बैठक में दिल्ली–देहरादून एक्सप्रेसवे के खुलने के बाद राज्य में पर्यटन गतिविधियों में संभावित वृद्धि को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने होटल, आवास, पार्किंग, ट्रैफिक प्लान, यातायात प्रबंधन और सुरक्षा से जुड़ी सभी तैयारियां तय समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि कैंची धाम बाईपास का निर्माण जून माह तक पूरा कर लिया जाएगा।
चारधाम यात्रा की तैयारियों की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने सड़कों के डामरीकरण का कार्य 15 फरवरी से गुणवत्ता के साथ शुरू करने के निर्देश भी अधिकारियों को दिए, ताकि श्रद्धालुओं को सुरक्षित और सुगम यात्रा सुविधा उपलब्ध कराई जा सके
लंबे समय से जिस पल का दर्शक इंतजार कर रहे थे, वह आखिरकार आ ही गया। रणवीर सिंह की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘धुरंधर 2’ का धमाकेदार टीज़र आज जारी कर दिया गया है। टीज़र सामने आते ही सोशल मीडिया पर फैंस की जबरदस्त प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। एक दिन पहले ही रणवीर सिंह ने टीज़र को लेकर इशारा किया था, जबकि आज सुबह फिल्म का पहला पोस्टर जारी कर उन्होंने उत्सुकता और बढ़ा दी थी। अब ‘धुरंधर: द रिवेंज’ के टीज़र ने फिल्म की कहानी और किरदारों को लेकर दर्शकों की जिज्ञासा चरम पर पहुंचा दी है।
रणवीर सिंह के पहले पोस्टर ने बढ़ाया था रोमांच
टीज़र से पहले सामने आए फिल्म के पोस्टर में रणवीर सिंह हमजा अली मजारी के इंटेंस और आक्रामक रूप में नजर आए थे। लाल रंग की पृष्ठभूमि, मूसलाधार बारिश और गंभीर भाव-भंगिमा में खड़े रणवीर ने फिल्म के मूड को साफ तौर पर बयां कर दिया था। पोस्टर के साथ रणवीर ने कैप्शन में लिखा था— “अब बिगड़ने का वक्त आ गया है”, जिसने फैंस के बीच चर्चा तेज कर दी। फिल्म 19 मार्च को सिनेमाघरों में रिलीज होगी।
बदले की कहानी पर टिका है ‘धुरंधर: द रिवेंज’
‘धुरंधर 2’ की शूटिंग अभी जारी है और हाल ही में सामने आई बिहाइंड-द-सीन तस्वीरों ने कहानी को लेकर कई कयासों को जन्म दिया है। तस्वीरों में मेजर इकबाल (अर्जुन रामपाल) और एसपी असलम चौधरी (संजय दत्त) के बीच तनावपूर्ण हालात दिखाए गए हैं। सीक्वल की कहानी मुख्य रूप से हमजा के बदले के इर्द-गिर्द घूमती नजर आएगी, साथ ही ‘बड़े साहब’ की असली पहचान से भी पर्दा उठेगा। इसके अलावा फिल्म में जसकिरत सिंह रंगी, यानी हमजा की पिछली जिंदगी की झलक भी देखने को मिलेगी।
बॉक्स ऑफिस पर पहली ‘धुरंधर’ ने रचा था इतिहास
पिछले साल रिलीज हुई ‘धुरंधर’ ने बॉक्स ऑफिस पर नए कीर्तिमान स्थापित किए थे। फिल्म ने भारत में 800 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई की थी, जबकि वर्ल्डवाइड कलेक्शन 1300 करोड़ रुपये के पार पहुंच गया था। रणवीर सिंह के साथ फिल्म में अक्षय खन्ना, संजय दत्त, अर्जुन रामपाल, सारा अर्जुन और आर. माधवन जैसे दिग्गज कलाकारों ने अहम भूमिकाएं निभाई थीं। अब सीक्वल से भी दर्शकों को उसी स्तर के एक्शन और ड्रामा की उम्मीद है।
(साभार)
बस में 30 से अधिक यात्री थे सवार, कई घायल
विकासनगर। उत्तराखंड के विकासनगर क्षेत्र में एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। हिमाचल प्रदेश परिवहन निगम की एक बस अनियंत्रित होकर गहरी खाई में जा गिरी। हादसे की सूचना मिलते ही एसडीआरएफ, पुलिस और प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंचीं और तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार हिमाचल प्रदेश के नेरवा से पांवटा साहिब जा रही एचपी रोडवेज की बस हरिपुर-कोटी-मीनस राजमार्ग पर क्वानू के समीप अचानक नियंत्रण खो बैठी और खाई में गिर गई। बस में 30 से अधिक यात्री सवार थे। इस हादसे में अब तक दो महिलाओं और एक पुरुष की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि कई यात्री घायल बताए जा रहे हैं।
एसडीआरएफ की टीम खाई में उतरकर घायलों को रेस्क्यू कर रही है। थाना प्रभारी कालसी दीपक धारीवाल ने बताया कि सभी घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया जा रहा है। राहत कार्य तेजी से जारी है।
हादसे पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गहरा गहरा दुख जताया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा कि कालसी क्षेत्र में हिमाचल ट्रांसपोर्ट की बस दुर्घटना की सूचना अत्यंत दुखद है। मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन से फोन पर बात कर राहत एवं बचाव कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं।
जिला प्रशासन और पुलिस ने सभी नजदीकी मेडिकल सेंटरों को अलर्ट पर रखा है। गंभीर रूप से घायल यात्रियों को आवश्यकता पड़ने पर एयरलिफ्ट कर उच्च चिकित्सा केंद्रों में भेजे जाने की भी तैयारी की जा रही है।
मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने राजस्व विभाग की समीक्षा बैठक की
देहरादून। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने सचिवालय स्थित वीर चंद्र सिंह गढ़वाली सभागार में राजस्व विभाग की समीक्षा बैठक की। उन्होंने राजस्व मामलों के त्वरित निस्तारण पर विशेष जोर देते हुए लंबित प्रकरणों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाने के निर्देश दिए।
मुख्य सचिव ने सभी जिलाधिकारियों को धारा 34 एवं 143 के अंतर्गत लंबित वादों के निस्तारण के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए। उन्होंने नैनीताल जनपद की तर्ज पर निर्विवाद मामलों के त्वरित निस्तारण हेतु कैंप आयोजित कर इस व्यवस्था को प्रदेश के सभी जनपदों में लागू करने पर जोर दिया। धारा 143 के मामलों के छह माह या उससे अधिक समय तक लंबित रहने पर चिंता व्यक्त करते हुए इनके निस्तारण के लिए 45 दिन की समय-सीमा निर्धारित करने के निर्देश दिए।
उन्होंने मंडल स्तर पर मंडलायुक्तों तथा जनपद स्तर पर जिलाधिकारियों को अपने न्यायालयों में सबसे पुराने पांच मामलों को चिन्हित कर उनके निस्तारण पर कार्य करने को कहा। इसके लिए प्रत्येक माह नियमित बैठक आयोजित करने तथा पुराने मामलों के निस्तारण के बाद अन्य सबसे पुराने मामलों को सूची में शामिल करने के निर्देश दिए।
मुख्य सचिव ने बताया कि प्रदेशभर में पांच वर्षों से अधिक समय से लंबित कुल 1760 मामलों में से 10 प्रतिशत मामलों का निस्तारण मार्च 2026 तक किया जाना है। बेहतर कार्य करने वाले अधिकारियों को प्रशस्ति पत्र दिए जाने के साथ-साथ उनकी वार्षिक गोपनीय आख्या में भी इसका उल्लेख किया जाएगा।
उन्होंने ‘जन-जन की सरकार’ कार्यक्रम को शहरी क्षेत्रों में भी तत्काल शुरू करने के निर्देश दिए। इसके लिए कैंप आयोजन की योजना तैयार करने और आयोजन से पूर्व व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करने को कहा, ताकि अधिक से अधिक लोग इसका लाभ उठा सकें।
मुख्य सचिव ने मंडलायुक्तों, जिलाधिकारियों, एसडीएम आदि को अपने अधीन तहसीलों, विकासखंडों एवं थानों का नियमित निरीक्षण अनिवार्य रूप से करने के निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि प्रदेशभर में मॉडर्न पटवारी चौकियों का निर्माण किया जा रहा है तथा पटवारी और कानूनगो को शीघ्र लैपटॉप उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे ऑनलाइन कार्यों का निस्तारण तेज हो सके। साथ ही, आधुनिक रिकॉर्ड रूम तैयार करने और आवश्यकता पड़ने पर नए वित्तीय वर्ष में बजट प्रावधान करने के निर्देश भी दिए।
मुख्य सचिव ने राजस्व विभाग में रिक्त पदों के सापेक्ष भर्तियों के अधियाचन शीघ्र भेजने, पदोन्नतियां समय पर कराने तथा पीएम किसान योजना के तहत किसानों के पंजीकरण कार्य को शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए।
बैठक में प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम, सचिव एस.एन. पाण्डेय, राजस्व परिषद आयुक्त रंजना राजगुरु सहित मंडलायुक्त दीपक रावत, विनय शंकर पाण्डेय तथा सभी जनपदों के जिलाधिकारी उपस्थित रहे।
देवभूमि में महिलाओं के विरुद्ध इस प्रकार के नृशंस अपराध स्वीकार्य नहीं, अपराधियों के विरुद्ध होगी कड़ी कार्रवाई : कुसुम कंडवाल
अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने मृतका के शोकाकुल परिजनों को बंधाया ढांढस, बोली न्याय के लिए आयोग व सरकार आपके साथ है
देहरादून- देहरादून के मछली बाजार क्षेत्र में एक 23 वर्षीय युवती की सरेआम गला रेतकर की गई जघन्य हत्या के मामले को उत्तराखंड राज्य महिला आयोग को अत्यंत गंभीरता से लिया है। आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने मीडिया रिपोर्टों के आधार पर घटना का स्वतः संज्ञान (Suo Motu Cognizance) लेते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय सिंह को आरोपी के विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने इस बात पर गहरा रोष व्यक्त किया है कि मृतका द्वारा पूर्व में पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई थी। उन्होंने कहा कि यदि पुलिस समय रहते उक्त शिकायत पर प्रभावी कार्रवाई करती, तो आज एक मासूम युवती की जान बचाई जा सकती थी। पुलिस की इस कथित ढिलाई और संवेदनहीनता को पर संबंधित पुलिस अधिकारियों को तलब किया जाएगा।

घटना की गंभीरता को देखते हुए आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने मृतका के घर जाकर शोकाकुल परिजनों से भेंट की। उन्होंने परिवार को ढांढस बंधाया और आश्वस्त किया कि दुख की इस घड़ी में राज्य महिला आयोग उनके साथ खड़ा है। आयोग अध्यक्ष ने परिवार को भरोसा दिलाया कि इस मामले की स्वयं उनके द्वारा मॉनिटरिंग की जाएगी और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि मृतका व शोकाकुल परिवार को न्याय अवश्य मिले।
देवभूमि में महिलाओं के विरुद्ध इस प्रकार के नृशंस अपराध स्वीकार्य नहीं हैं। यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है, दोषी को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा और शिकायत के बाद भी कार्रवाई न करने पर चौकी के पुलिसकर्मियों की जवाबदेही भी तय की जाएगी।
उन्होंने कहा मामले की जांच त्वरित गति से कर आरोपी को कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जाए।
अध्यक्ष ने कहा कि पुलिस अधिकारी इस बात को पूरी गंभीरता से ले कि यदि किसी भी महिला या पीड़िता द्वारा कोई शिकायत दी जा रही है, तो उस पर तत्काल और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिकायतों पर ढिलाई बरतने से ही अपराधियों के हौसले बुलंद होते हैं। भविष्य में इस प्रकार के जघन्य अपराधों की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए पुलिस को अपनी कार्यप्रणाली में संवेदनशीलता और तत्परता लानी होगी। वहीं आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने शहर के व्यस्ततम क्षेत्रों में महिला सुरक्षा हेतु पुलिस गश्त और निगरानी बढ़ाई जाने के निर्देश दिए है।
उन्होंने बताया कि ऐसे संवेदनशील मामलों को लेकर वो पुलिस महानिदेशक के साथ बैठक करेंगी ताकि देवभूमि को दूषित करने वाले अपराधियों पर अंकुश लग सके।
सरकार ने रखी प्रगति रिपोर्ट
देहरादून/नई दिल्ली। भाजपा के राष्ट्रीय सह-कोषाध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद डॉ. नरेश बंसल ने सदन में जल प्रदूषण और जल संरक्षण से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार से जवाब मांगा। पूरक प्रश्न के माध्यम से उन्होंने जल शक्ति मंत्री से यह जानना चाहा कि देश में जल संचयन को लेकर अब तक क्या प्रगति हुई है, क्या इस दिशा में कोई विशेष अभियान चलाया जा रहा है, नदियों और जल स्रोतों में बढ़ते प्रदूषण को रोकने के लिए सरकार ने कौन-से ठोस कदम उठाए हैं और नमामि गंगे मिशन के तहत कितना कार्य पूर्ण हो चुका है तथा कितना अभी शेष है।
इस पर उत्तर देते हुए जल शक्ति राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी ने सदन को बताया कि जल शक्ति अभियान के तहत देशभर में दो करोड़ से अधिक जल रिचार्ज स्ट्रक्चर तैयार किए जा चुके हैं। इसके साथ ही ‘जल संचयन–जन भागीदारी’ अभियान के अंतर्गत लगभग 40 लाख से अधिक जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण किया गया है, जिसमें आम जनता की सक्रिय भागीदारी रही है।
मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के आह्वान पर जनभागीदारी के माध्यम से जल संरक्षण को जन आंदोलन का रूप दिया गया है। लोगों ने स्वयं आगे आकर अपनी-अपनी मातृभूमि में पुराने जल स्रोतों के पुनर्जीवन और नए जल संरचनाओं के निर्माण में योगदान दिया है, जिससे जल संचयन को व्यापक स्तर पर मजबूती मिली है।
नमामि गंगे मिशन के तहत बड़े स्तर पर कार्य
नमामि गंगे परियोजना की प्रगति पर जानकारी देते हुए मंत्री ने बताया कि गंगा की सफाई के लिए अब तक 218 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) परियोजनाएं शुरू की गई हैं, जिनकी कुल लागत लगभग 35,698 करोड़ रुपये है। इन परियोजनाओं के माध्यम से 6,610 एमएलडी क्षमता के एसटीपी प्लांटों का निर्माण या पुनर्वास और 5,238 किलोमीटर लंबे सीवरेज नेटवर्क का कार्य किया गया है।
उन्होंने बताया कि इनमें से 138 परियोजनाएं, जिनकी क्षमता लगभग 3,977 एमएलडी है, पूरी की जा चुकी हैं। साथ ही 4,571 किलोमीटर लंबा सीवरेज नेटवर्क भी पूर्ण कर लिया गया है। शेष परियोजनाओं पर कार्य तेजी से जारी है।
