पूर्व आईएएस अधिकारी राजीव कुमार ने आज मंगलवार को भारत के नए चुनाव आयुक्त (EC) के रूप में पदभार संभाल लिया। वर्तमान में आयोग में मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा और एक चुनाव आयुक्त सुशील चंद्रा कार्यरत हैं। राजीव कुमार चुनाव आयुक्त अशोक लवासा का स्थान लेंगे। चुनाव आयुक्त अशोक लवासा ने हाल ही में अपने पद से इस्तीफा दिया था। लवासा एशियाई विकास बैंक (ADB) में उपाध्यक्ष के रूप में नई जिम्मेदारी संभालने जा रहे हैं।
नए चुनाव आयुक्त राजीव कुमार 1984 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी हैं। 36 वर्षों से अधिक समय तक अपनी सेवाएं देने के दौरान उन्होंने केंद्र के साथ-साथ बिहार व झारखंड के अपने राज्य कैडर में विभिन्न पदों पर काम किया है। सेवानिवृत होने से पहले वे केंद्र में वित्त सचिव थे। इसके बाद उन्हें अप्रैल 2020 से सार्वजनिक उद्यम चयन बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया।
राजीव कुमार एक शौकीन ट्रैकर हैं। इसके साथ ही वह भारतीय शास्त्रीय और भक्ति संगीत में गहरी रुचि रखते हैं।
The Union Cabinet condoled the sad demise of Pranab Mukherjee, former President of India. Cabinet also observed silence for two minutes in the memory of PranabMukherjee.
The Cabinet today passed the following resolution:
“The Cabinet expresses profound sorrow at the sad demise of Shri Pranab Mukherjee, former President of India.
In his passing away, the country has lost a distinguished leader and an outstanding parliamentarian.
Shri Pranab Mukherjee, 13th President of India was a man of unparalleled experience in governance who served as Union Foreign, Defence, Commerce and Finance Minister.
Born on December 11, 1935 in the small village of Mirati in Birbhum District of West Bengal, Shri Mukherjee acquired a Master’s degree in History and Political Science as well as a degree in Law from the University of Kolkata. He then embarked on his professional life as a college teacher and journalist. Inspired by his father’s contribution to the national movement, Shri Mukherjee started his full time public life following his election to Rajya Sabha in 1969.
Shri Mukherjee served as Deputy Minister, Industry; Shipping and Transport, Steel and Industry and Minister of State for Finance during 1973-75. He assumed office as Finance Minister of India for the first time in 1982 and was Leader of the House in Rajya Sabha from 1980 to 1985. He became Deputy Chairman of the Planning Commission from 1991 to 1996; concurrently Minister for Commerce from 1993 to 1995 and Minister of External Affairs from 1995 to 1996; Minister of Defence from 2004 to 2006. He again served as Minister of External Affairs from 2006 to 2009 and Minister of Finance from 2009 to 2012. He was Leader of House in Lok Sabha from 2004 to 2012.
Shri Pranab Mukherjee assumed office of the President of India on July 25, 2012 and served his full term of five years. As President, Shri Mukherjee lent dignity to the high office and brought to bear his scholarly and humanitarian outlook on national and international affairs.
A prolific reader, Shri Mukherjee has authored several books on the Indian Economy and on Nation Building. The many awards and honours conferred on him include the Best Parliamentarian Award in 1997, Padma Vibhusan in 2008 and India’s highest civilian award Bharat Ratna in 2019.
Shri Mukherjee has left his imprint on our national life. In his death the country has lost a distinguished national leader, accomplished Parliamentarian and a tall statesman.
The Cabinet records its deep appreciation of the services of Shri Pranab Mukherjee to the nation and extends its heartfelt condolences to the members of his bereaved family on behalf of the Government and the entire nation.”
‘भारत रत्न’ पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का सोमवार को निधन हो गया। 84 वर्षीय प्रणब दा पिछले कुछ दिनों से अस्वस्थ थे और दिल्ली में सेना के रिसर्च एंड रेफरल (RR) अस्पताल में भर्ती थे। उनके बेटे अभिजीत मुखर्जी ने ट्वीट कर अपने निधन की सूचना दी है। मुखर्जी पिछले 21 दिनों से अस्पताल में भर्ती थे।
11 दिसंबर, 1935 को पश्चिम बंगाल के वीर भूमि जिले में जन्मे प्रणब दा कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता थे। उनके पिता स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे। प्रणब दा एक वकील और कॉलेज प्राध्यापक रहे। फिर पत्रकारिता की। उनका संसदीय जीवन पांच दशकों का रहा। इस दौरान वे कांग्रेस पार्टी और सरकार में विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर रहे। वर्ष 2012 में वे देश के तेरहवें राष्ट्रपति नियुक्त हुए।

उनके निधन पर देश भर में शोक की लहर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत तमाम नेताओं ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। प्रधानमंत्री मोदी ने कई ट्वीट कर प्रणब दा को अपनी श्रद्धांजलि दी है। उन्होंने प्रणब दा के पांव छुते हुए एक फोटो भी ट्वीट किया है।
पहाड़ों की रानी मसूरी और उसके आसपास के इलाकों में भू- स्खलन का खतरा मंडरा रहा है। एक अध्ययन में पता चला है कि क्षेत्र के 15 प्रतिशत हिस्से में भूस्खलन का सर्वाधिक खतरा है। अधिकतर पहाड़ी इलाकों की तरह ही उत्तराखंड के पर्यटन स्थल मसूरी और उसके आसपास के क्षेत्रों में भी भूस्खलन की कई घटनाएं हो चुकी हैं। क्षेत्र में ऐसी प्राकृतिक आपदा के बढ़ते खतरों ने वैज्ञानिकों को मसूरी और उसके आसपास के क्षेत्रों की भूस्खलन के प्रति संवेदनशीलता का मानचित्रण करने के लिए प्रेरित किया।
भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा जारी एक विज्ञप्ति में जानकारी दी गई है कि मंत्रालय के अधीन संचालित स्वायत्तशासी संस्थान, वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी (WIHG) के वैज्ञानिकों ने निचले हिमालयी क्षेत्र में मसूरी और उसके आसपास के 84 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र का अध्ययन किया। अध्ययन में पाया गया कि भूस्खलन वाले अतिसंवेदनशील क्षेत्र का बड़ा हिस्सा बाटाघाट, जॉर्ज एवरेस्ट, केम्प्टी फॉल, खट्टापानी, लाइब्रेरी रोड, गलोगीधार और हाथीपांव जैसे बसावट वाले क्षेत्रों के अंतर्गत आता है, जो 60 डिग्री से अधिक ढलान वाले अत्यधिक खंडित क्रोल चूना पत्थर से आच्छादित हैं।
भूस्खलन संवदेनशीलता मानचित्रण पर जर्नल ऑफ अर्थ सिस्टम साइंस में प्रकाशित इस अध्ययन में दिखाया गया है कि क्षेत्र का 29 प्रतिशत हिस्सा हल्के भूस्खलन और 56 प्रतिशत हिस्सा बहुत बड़े स्तर पर भूस्खलन वाले अति संवेदनशील क्षेत्र में आता है।
WIHG के शोधकर्ताओं ने इस अध्ययन के लिए भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) और उपग्रह से प्राप्त हाई-रिज़ॉल्यूशन चित्रों का उपयोग करते हुए द्विभाजक सांख्यिकीय यूल गुणांक (वाईसी) विधि का उपयोग किया।

वैज्ञानिकों के अनुसार अध्ययन करते समय क्षेत्र में भूस्खलन के विभिन्न संभावित कारकों में लिथोलॉजी, लैंड्यूज-लैंडकवर (एलयूएलसी), ढलान, पहलू, वक्रता, ऊंचाई, सड़क-कटान जल निकासी और लाइनामेंट आदि को शामिल किया गया। अध्ययन टीम ने भूस्खलन के कारणों के एक विशेष वर्ग का पता लगाने के लिए लैंडस्लाइड ऑक्युवेशन फेवरोबिलिटी स्कोर (एलओएफएस) के आंकड़े एकत्र किए और बाद में जीआईएस प्लेटफॉर्म में लैंडस्लाइड सुसाइड इंडेक्स (एलएसआई) बनाने के लिए भूस्खलन के प्रत्येक कारक के प्रभावों की अलग अलग गणना की। एलएसआई को प्राकृतिक मानकों के आधार पर पांच क्षेत्रों में पुनर्वर्गीकृत किया गया है।
इस मानचित्र की सटीकता को सक्सेस रेट कर्व (एसआरसी) और प्रिडिक्शन रेट कर्व (पीआरसी) का उपयोग करके सत्यापित किया गया, जो एसआरसी के लिए एरिया अंडर कर्व (एयूसी) को 0.75 के रूप में और पीआरसी को 0.70 के रूप में दिखाता है। यह भूस्खलन वाले विभिन्न तरह के अतिसंवेदनशील क्षेत्रों और भूस्खलन की घटना वाले क्षेत्रों के बीच परस्पर संबंधों को दर्शाता है।
मंत्रालय के अनुसार इस अध्ययन से भारत के विभिन्न हिस्सों में बड़े पैमाने पर होने वाले भूस्खलन, इसके जोखिम और इस बारे में पर्वतीय कस्बों की संवेदनशीलता का मूल्यांकन करने में काफी मदद मिल सकती है।
निर्देशों के बावजूद कर्मचारियों की समयबद्ध पदोन्नति ना किये जाने के मामले में प्रदेश सरकार ने सख्त रूख दिखाया है। सरकार ने समयबद्ध तरीके से पदोन्नति की कार्रवाई नहीं किये जाने पर नाराजगी जताते हुए इसे अनुचित करार दिया है। शासन की ओर से सोमवार को कर्मचारियों की पदोन्नति के सम्बन्ध में शीघ्रातिशीघ्र कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिएअनुस्मारक जारी किया है।
प्रदेश की अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी द्वारा राज्याधीन सेवाओं, शिक्षण संस्थानों, सार्वजनिक उद्यमों, निगमों व स्वायत्तशासी संस्थाओं में पदोन्नति के संबंध में जारी किये गए अनुस्मारक पत्र में शासन के इस वर्ष 18 मार्च व 20 मई को जारी शासनादेशों का हवाला दिया गया है, जिसके तहत समस्त विभागों में पदोन्नति के रिक्त पदों पर प्रत्येक दशा में एक सप्ताह के भीतर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए थे। अनुस्मारक पत्र में कहा गया है कि विभिन्न कर्मचारी संगठनों द्वारा शासन के संज्ञान में लाया गया है कि अभी तक कई विभागों में पदोन्नतियां लंबित हैं और विभागों द्वारा समयबद्ध रूप से कार्रवाई नहीं की जा रही है।
सवाल – आखिर क्यों नहीं होती समयबद्ध पदोन्नति ?
गौरतलब है, कि प्रदेश में विभिन्न विभागों में लम्बे समय से पदोन्नतियां लटकी पड़ी हैं। विभागाध्यक्ष अथवा शासन स्तर पर कर्मचारियों की पदोन्नति के मामले में अधिकारी रूचि नहीं लेते हैं। इसे विडंबना ही कहना चाहिए कि जहाँ एक ओर अधिकारियों के पदोन्नति के प्रकरणों में एक दिन की भी देरी नहीं होती है, वहीं कर्मचारियों के प्रकरण में वर्षों तक कोई कार्रवाई नहीं होती है। कार्मिकों की पदोन्नति की फाइलें विभागों व सचिवालय की अंधेरी गलियों में गुम होकर रह जाती हैं और कई कार्मिक बिना पदोन्नति के ही सेवानिवृत्त हो जाते हैं। यहाँ इस तथ्य का उल्लेख करना भी जरुरी होगा, कि अधिकांश मामलों में कर्मचारियों की पदोन्नति के फलस्वरूप सरकार पर किसी प्रकार से राजस्व का अतिरिक्त बोझ भी नहीं पड़ता है। अधिकांश कार्मिक वरिष्ठता के कारण पदोन्नत होने वाले पद के समतुल्य अथवा उससे अधिक वेतन पा रहे होते हैं। इन कार्मिकों को पदोन्नति का लाभ वरिष्ठ पद के सम्मान से जुड़ा होता है। मगर उच्च अधिकारियों के गैर जिम्मेदाराना रवैये के चलते कर्मचारी पदोन्नति से वंचित ही नहीं होते हैं, अपितु उनके मनोबल व कार्यक्षमता पर भी इसका सीधा असर पड़ता है। नतीजन, कर्मचारी संगठनों को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ता है।

यदि आप मशरूम उत्पादन के क्षेत्र में हाथ आजमाना चाहते हैं और इसके उत्पादन के बारे में तकनीकी ज्ञान प्राप्त करना चाहते हैं, तो आपके पास एक अच्छा अवसर है। आप घर बैठे ऑनलाइन मशरूम की खेती का प्रशिक्षण ले सकते हैं।
उत्तराखंड के पंतनगर स्थित गोविन्द बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के मशरूम अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र द्वारा मशरूम की खेती पर 9 से 11 सितम्बर तक ऑनलाइन प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। प्रशिक्षण कार्यक्रम में बटन, ढिंगरी पुआल मशरूम व दूधिया मशरूम की खेती की विस्तृत जानकारी दी जाएगी। प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल होने के इच्छुक अभ्यर्थियों को पांच सौ रूपये बतौर पंजीकरण शुल्क 5 सितम्बर तक जमा करना होगा।
शुल्क भारतीय स्टेट बैंक की किसी भी शाखा में जमा कराया जा सकता है। शुल्क नियंत्रक, गोविन्द बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, पंतनगर के इस खाता संख्या में जमा कराएं – 30081736247, जिसका IFSC code है – SBIN0001133
शुल्क जमा करने के बाद जमा रशीद अथवा ट्रांजेक्शन की डिटेल इस e-mail: totmrtcpant@gmail.com एवं WhatsApp No.- 9389017092 पर भेजनी अनिवार्य है। प्रशिक्षण का आयोजन Google Meet पर किया जायेगा। पंजीकृत अभ्यर्थियों को Google Meet का लिंक उनके व्हाट्सएप्प नंबर पर भेजा जायेगा।
ये है विश्वविद्यालय की वेबसाइट

B S Yediyurappa, Chief Minister of Karnataka and Shri Suresh C. Angadi, Minister of State of Railways today flagged off first ever Roll On Roll Off (RORO) service of South Western Railway from Nelamangla (near Bengaluru) to Bale (near Solapur).
Speaking on the occasion, Shri B S Yediyurappa, Chief Minister of Karnataka said, Prime Minister Shri Narendra Modi is emphasizing on Multimodal connectivity. APMC Markets in the region offer tremendous scope for RORO. He congratulated Suresh C. Angadi, Minister of State of Railways for taking lead in the initiative and assured full cooperation from State Government.
Speaking on the occasion, Suresh C. Angadi, Minister of State of Railways said, Multimodal connectivity is dream of Prime Minister. Thousands of trucks plying between Bengaluru and Solapur. With RORO travel time will be just 17 hours. This is trial run that got delayed due to COVID. Kisan Rail started to help farmers-agricultural produce can be transported across the country. The RORO service will bring faster development in the region.

RORO is a concept of carrying road vehicles loaded with various commodities, on open flat railway wagons. PM ,in his recent Independence day speech ,has envisaged multimodal connectivity to take India to next level of development. RORO services are combination of best features of road and rail transports in the sense that they offer door to door service with minimal handling transported by fat and direct rail link . Road transport has advantage of door to door delivery of goods. However, increasing traffic on roads is leading to congestion and delays to passenger vehicles. This will cause unsafe travel conditions. Also, delays at interstate check posts due to inspection of various documents, etc. contribute to increased travel time.
On the other hand, Railways provide hassle free and environmentally friendly transport to medium to large quantum of freight. Rail transport is most fuel efficient of all means of transport and is much safer than road. RORO is a multimodal delivery model with many advantages. Faster movement of goods and essentials, reducing Time taken by trucks to reach destinations due to traffic congestion in between cities. Reduces congestion on the roads. Saves precious fuel. Reduces carbon footprint. Relief to crew of truck as it avoids long distance driving. No hassles of check posts/toll gates etc. Seamless Inter-operability between roadways & railways-Inter-modal transport on existing track. Ensuring uninterrupted supply of essential commodities.
Free time for loading/ unloading is 3 hours Ro-RO will be reckoning force in “vocal for local” –Will boost our local MSME units by encouraging piecemeal /decentralized loading through trucks. RO-RO will help government initiatives like “operation green” to stabalize prices of TOP(tomato,potato and Onion). Provides link between agriculture producing regions and agro consumption centres. Ensures farmers get the right market and right price for their produce. Connects and Balances the commodity deficient and surplus markets. RO-ROtrain services were first introduced in Indian Railways on Konkan Railways in 1999, and are running successfully since then.
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि अलग राज्य निर्माण के आंदोलन से लेकर राज्य के विकास तक में हमारी मातृ शक्ति का बहुत महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने कहा कि महिला शक्ति की भागीदारी के बिना राज्य की आर्थिकी में सुधार की कल्पना नहीं की जा सकती। मातृ शक्ति के सहयोग से ही आत्मनिर्भर उत्तराखण्ड की परिकल्पना सम्भव है।
यह वक्तव्य मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने उत्तराखण्ड के विकास में महिला शक्ति की भूमिका विषय पर आयोजित वेबनार में दिया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार, महिला कल्याण और महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए अनेक योजनाएं संचालित कर रही है। बड़ी संख्या में महिला स्वयं सहायता समूह बेहतरीन काम कर रहे हैं। राज्य में स्थापित किये गये ग्रोथ सेंटरों में भी महिलाएं अच्छा काम कर रही हैं। मुख्यमंत्री ने कोविड-19 के दौरान आशा, आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों, महिला स्वास्थ्य कर्मियों व महिला पुलिस कर्मियों की भूमिका की विशेष सराहना की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शासन में पारदर्शिता और भ्रष्टाचार पर रोक लगाने के लिए प्रत्येक क्षेत्र में तकनीकी के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है। ई-ऑफिस, ई-कैबिनेट, सीएम डैशबोर्ड, सीएम हेल्पलाईन सुशासन की दिशा में बड़ा कदम है। स्कूलों में वर्चुअल क्लासेज प्रारंभ की गई है। टेलीमेडिसीन, टेलीरेडियोलाजी बहुत उपयोगी सिद्ध हो रही है। हर गांव को इंटरनेट से जोड़ने पर काम चल रहा है। पिछले तीन वर्ष में उत्तराखण्ड फिल्म शूटिंग के केन्द्र के रूप मे उभर कर सामने आया है। राज्य को बेस्ट फिल्म फ्रेंडली स्टेट का अवार्ड मिला है।
वेबिनार में इनकी रही भागीदारी
वेबिनार में हंस फाउंडेशन की प्रमुख माता मंगला, विधायक ऋतु खण्डूड़ी, प्रसिद्ध लेखिका व फिल्म स्क्रिप्ट राइटर अद्वैता काला, अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, सचिव सौजन्या, पेटीएम की सीनियर वाईस प्रेसीडेंट रेणु सती, क्रिकेटर एकता बिष्ट, पत्रकार श्रेया ढौंडियाल सहित विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत महिलाओं ने प्रतिभाग किया और अपने विचार रखे।
कोरोना महामारी के चलते वर्ष 2021 में हरिद्वार में प्रस्तावित कुम्भ मेले के आयोजन को लेकर संशय के बादल छंट गए हैं। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के पदाधिकारियों के साथ हुई बैठक में कुम्भ मेले को अपने निर्धारित समय पर आयोजित करने का निर्णय लिया गया है। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि कुम्भ मेले को दिव्य व भव्य रूप से आयोजित किये जाने के लिये राज्य सरकार दृढ़ संकल्पित है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सभी अखाड़ों के सन्त महात्माओं के सहयोग एवं आशीर्वाद से यह आयोजन सफल होगा।
शनिवार को सचिवालय में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के पदाधिकारियों के साथ मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कुम्भ मेले के आयोजन के सम्बन्ध में व्यापक-विचार विमर्श किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों के साथ कुम्भ मेले को लेकर सरकार द्वारा की जा रही तैयारियों समीक्षा भी की। उन्होंने कहा कि कोविड-19 के कारण उपजी परिस्थितियों में कुम्भ मेला कार्यों में कुछ अवरोध पैदा हुआ है। मगर इन परिस्थितियों से भी हम निजात पायेंगे और संतों के आशीर्वाद से इस आयोजन को बेहतर तरीके से सम्पन्न कर पायेंगे। उन्होंने कहा कि इस सम्बन्ध में देश काल व परिस्थिति के अनुसार भी निर्णय लिया जायेगा। आगे स्थितियां कैसी होगी, इसका पूर्वानुमान लगाया जाना कठिन है। उन्होंने सभी स्थायी व अस्थायी निर्माण कार्यों को 15 दिसम्बर से पूर्व सम्पन्न करने के निर्देश सम्बन्धित अधिकारियों को दिये। बैठक में अखाड़ों के सुझावों पर मुख्यमंत्री ने नील धारा सहित अन्य क्षेत्रों में निर्मित होने वाले स्नान घाटों के नाम 13 अखाड़ों के ईष्ट देवों के नाम पर रखे जाने के निर्देश दिए।
इस अवसर पर नगर विकास मंत्री मदन कौशिक ने कहा कि कुम्भ मेले के आयोजन में सभी अखाड़ों का सहयोग मिल रहा है। अखाड़ों की सुविधा के लिये भी सभी व्यवस्थायें की जा रही हैं। निर्माण कार्यों में तेजी लायी गई है। कुम्भ मेले से सम्बन्धित सभी पुलों, स्नान घाटों, सड़कों, आस्था पथों आदि का निर्माण 15 दिसम्बर तक पूर्ण हो, इसका प्रयास किया जा रहा है।
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेन्द्र गिरी ने उज्जैन व प्रयागराज की भांति हरिद्वार कुम्भ में भी अखाड़ों को धनराशि व अन्य सुविधायें उपलब्ध कराये जाने की बात रखी। उन्होंने अखाड़ों में साफ-सफाई व अतिक्रमण को हटाने, आवागमन व पेशवाई मार्ग निर्धारण, पुलों, घाटों के निर्माण में तेजी लाये जाने का भी अनुरोध किया। उन्होंने कुम्भ मेले के सफल आयोजन के लिये सभी अखाड़ों की ओर से हर संभव सहयोग का भी आश्वासन दिया।
बैठक में मुख्य सचिव ओमप्रकाश, अपर पुलिस महानिदेशक (कानून व व्यवस्था) अशोक कुमार, मेलाधिकारी दीपक रावत, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महामंत्री महन्त हरि गिरि, महन्त प्रेम गिरि, महन्त महेश पुरी, महन्त सत्यगिरि, महन्त कैलाशपुरी, महन्त मुकुन्दानन्द ब्रह्माचारी, महन्त सोमेश्वरानन्द ब्रह्मचारी, महन्त ओंकार गिरि, महन्त रविन्द्र पुरी सहित बड़ी संख्या में संत महात्मा एवं अधिकारी गण उपस्थित थे।
गणतंत्र दिवस के अवसर पर घोषित किए जाने वाले पद्म पुरस्कारों के लिए ऑनलाइन नामांकन अथवा सिफारिशें 15 सितंबर तक की जा सकती हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा जारी एक विज्ञप्ति में यह जानकारी दी गयी है। पद्म पुरस्कारों के लिए नामांकन की प्रक्रिया 1 मई से को शुरू हुई थी। पद्म पुरस्कारों के लिए नामांकन केवल ऑनलाइन होंगें। इन पुरस्कारों के लिए अब तक 8035 पंजीकरण किए जा चुके हैं।
क्या हैं पद्म पुरस्कार
पद्म पुरस्कारों के नाम पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्म श्री हैं, जो देश के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कारों में से एक हैं। वर्ष 1954 में स्थापित इन पुरस्कारों की घोषणा हर साल गणतंत्र दिवस के अवसर पर की जाती है। पद्म पुरस्कार के लिए विशिष्ट कार्य को पहचाना जाता है और यह सभी क्षेत्रों अथवा विषयों, जैसे- कला, साहित्य, शिक्षा, खेल, चिकित्सा, सामाजिक कार्य, विज्ञान तथा इंजीनियरिंग, सार्वजनिक जीवन, सिविल सेवा, व्यापार एवं उद्योग आदि में प्रतिष्ठित और असाधारण उपलब्धियों अथवा सेवाओं के लिए दिए जाते हैं। सभी व्यक्ति वर्ग , जाति, पेशा, पद या लिंग के भेद के बिना इन पुरस्कारों के पात्र हैं। डॉक्टरों और वैज्ञानिकों के आलावा सार्वजनिक उपक्रमों में काम करने वालों सहित सरकारी कर्मचारी पद्म पुरस्कार के पात्र नहीं हैं।
कैसे करें नामांकन
केंद्र सरकार इन पद्म पुरस्कारों को लोगों का पद्म के रूप में तब्दील करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसलिए केंद्र सरकार ने नागरिकों से अनुरोध किया है कि वे स्व-नामांकन अथवा किसी विशिष्ट व्यक्ति के नामांकन की सिफारिशें करें। स्व-नामांकन अथवा सिफारिश पद्म पुरस्कारों की वेबसाइट पर उपलब्ध प्रारूप में निर्दिष्ट सभी प्रासंगिक विवरण शामिल होने चाहिए, जिसमें स्पष्ट रूप से प्रतिष्ठित व्यक्ति की असाधारण उपलब्धियां, सेवा, संबंधित क्षेत्र आदि की पूरी जानकारी और उसके लिए अनुशंसित उद्धरण (अधिकतम 800 शब्द) शामिल हों।
यहाँ करें ऑनलाइन नामांकन
पुरस्कारों के लिए ऑनलाइन नामांकन अथवा सिफारिश निम्न वेबसाइट पर की जा सकती है। वेबसाइट पर पुरस्कारों से संबंधित विस्तृत विवरण और मानकों इत्यादि की पूरी जानकारी उपलब्ध कराई गयी है। https://padmaawards.gov.in
सरकार ने की विशिष्ट व्यक्तियों की खोज की अपील
पुरस्कार चयन प्रक्रिया को संपन्न करने वाले केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय ने केंद्र के सभी मंत्रालयों व विभागों, राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों, भारत रत्न व पूर्व में पद्म विभूषण प्राप्त कर चुके लोगों और विभिन्न संस्थानों से पद्म पुरुस्कारों के लिए प्रतिभाशाली लोगों की पहचान में सहयोग करने की अपील की है। गृह मंत्रालय ने कहा है कि उन प्रतिभाशाली व्यक्तियों की पहचान करने की दिशा में पूर्ण प्रयास किये जाएं, जिनके कार्य व जीवन वास्तव में महिलाओं, समाज के कमजोर वर्गों, अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति, दिव्यांगजनों और समाज के लिए निस्वार्थ सेवा में लगा हुआ हो। मंत्रालय ने ऐसे लोगों के नामांकन की सिफारिश का अनुरोध किया है।