जब एक IAS अधिकारी बना अभिभावक, बालिकाओं संग सादगी से मनाया अपना जन्मदिन
हर साल वही जगह, वही मुस्कानें-बच्चियों के बीच जन्मदिन मनाने की परंपरा
देहरादून। प्रशासनिक व्यस्तताओं और औपचारिक आयोजनों से इतर एक संवेदनशील पहल के तहत अपर सचिव मुख्यमंत्री, उपाध्यक्ष मसूरी–देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) एवं महानिदेशक सूचना एवं लोकसम्पर्क विभाग, आईएएस बंशीधर तिवारी ने अपना जन्मदिन नेताजी सुभाष चंद्र बोस आवासीय बालिका छात्रावास की बालिकाओं के साथ सादगी एवं संवेदना के साथ मनाया।
उन्होंने यह दिन किसी भव्य आयोजन के बजाय सादगी और सामाजिक सरोकार के साथ देहरादून के बनियावाला क्षेत्र में स्थित नेताजी सुभाष चंद्र बोस आवासीय बालिका छात्रावास में बिताया।
सहसपुर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले इस छात्रावास में आईएएस बंशीधर तिवारी अपने परिजनों के साथ पहुंचे, जहां बालिकाओं ने स्वागत गीत प्रस्तुत किए। छात्रावास का माहौल किसी औपचारिक सरकारी कार्यक्रम के बजाय आत्मीय और पारिवारिक नजर आया। इस छात्रावास में अनाथ, एकल अभिभावक वाली तथा सामाजिक रूप से वंचित पृष्ठभूमि से आई बालिकाएं निवास करती हैं, जिन्हें शिक्षा और सुरक्षित वातावरण प्रदान किया जा रहा है।

बंशीधर तिवारी ने छात्रावास में बच्चियों के साथ बैठकर केक काटा, उपहार वितरित किए और उनसे उनकी पढ़ाई, रुचियों और भविष्य की योजनाओं पर संवाद किया। उन्होंने किसी प्रकार का औपचारिक संबोधन नहीं दिया, बल्कि बच्चियों से सहज और अपनत्वपूर्ण बातचीत की।
इस अवसर पर परिसर में वृक्षारोपण भी किया गया। आईएएस तिवारी ने कहा कि जिस प्रकार एक पौधा समय के साथ विकसित होकर फल और छाया देता है, उसी तरह यदि बालिकाओं को सही मार्गदर्शन, शिक्षा और सहयोग मिले तो वे समाज के लिए प्रेरणास्रोत बन सकती हैं।
बालिकाओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि जीवन में लक्ष्य तय करना आवश्यक है और विपरीत परिस्थितियों में भी आत्मविश्वास तथा ईमानदारी के साथ आगे बढ़ने से सफलता के मार्ग खुलते हैं। उन्होंने बच्चियों को केवल सफल होने तक सीमित न रहकर नेतृत्व क्षमता विकसित करने और समाज के लिए उदाहरण बनने की प्रेरणा दी।
कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने कहा कि वर्तमान समय में जब जन्मदिन अक्सर दिखावे और खर्चीले आयोजनों तक सीमित हो गए हैं, ऐसे में एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी द्वारा हर वर्ष अनाथ बालिकाओं के साथ जन्मदिन मनाना समाज के लिए सकारात्मक संदेश देता है। यह पहल प्रशासन के मानवीय और संवेदनशील पक्ष को दर्शाती है तथा बालिकाओं के मन में आत्मविश्वास और उम्मीद का संचार करती है।
धामी सरकार की नीतियों को मिली बड़ी सराहना
देहरादून। देश के प्रतिष्ठित एविएशन आयोजन WINGS INDIA 2026 में उत्तराखंड ने एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत पहचान दर्ज कराई है। हैदराबाद स्थित बेगमपेट एयरपोर्ट में 29 से 31 जनवरी 2026 तक आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय एविएशन इवेंट में उत्तराखंड को ‘Best State for Promotion of Aviation & Ecosystem’ के प्रतिष्ठित राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
यह सम्मान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा अपनाई गई दूरदर्शी एविएशन नीति, सुदृढ़ हवाई कनेक्टिविटी और पर्वतीय क्षेत्रों में उड्डयन सुविधाओं के प्रभावी विस्तार के लिए प्रदान किया गया। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री की ओर से यह पुरस्कार प्रदान किया गया, जिसमें सचिव सचिन कुर्वे, अपर सचिव आशीष चौहान, संजय टोलिया सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और एविएशन सेक्टर से जुड़े गणमान्य मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड सरकार ने हवाई सेवाओं को केवल परिवहन तक सीमित न रखते हुए, उन्हें चारधाम यात्रा, आपदा प्रबंधन और आपातकालीन सेवाओं से जोड़कर एक मजबूत एविएशन इकोसिस्टम विकसित किया है। प्रदेश में केदारनाथ, बदरीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के लिए हेली सेवाओं का व्यापक विस्तार किया गया है, साथ ही हेलीपोर्ट और हेलीपैड के विकास पर भी विशेष ध्यान दिया गया है।
चारधाम यात्रा के दौरान हेली सेवाओं के माध्यम से वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांग यात्रियों और कम समय में यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं को सुरक्षित और सुगम दर्शन की सुविधा मिली, जिसकी सराहना देशभर में हुई। इसके साथ ही सीमांत और दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों को हवाई नेटवर्क से जोड़ने, उड़ान (UDAN) योजना के प्रभावी क्रियान्वयन, एयर स्ट्रिप्स के उन्नयन और हेली-टूरिज्म को बढ़ावा देने के प्रयासों को भी राष्ट्रीय मंच पर विशेष रूप से सराहा गया।
इस उपलब्धि पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि यह सम्मान उत्तराखंड की जनता, राज्य सरकार की टीम और एविएशन सेक्टर से जुड़े सभी हितधारकों के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार भविष्य में चारधाम यात्रा को और अधिक सुरक्षित, तकनीक-समर्थ और पर्यावरण के अनुकूल बनाने के साथ-साथ उत्तराखंड को देश का अग्रणी एविएशन और हेली-टूरिज्म हब बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत रहेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह राष्ट्रीय सम्मान प्रदेश में पर्यटन, निवेश, रोजगार और आधारभूत ढांचे के विकास के लिए नए अवसरों के द्वार खोलेगा।
देहरादून। मसूरी–देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) द्वारा प्राधिकरण क्षेत्रान्तर्गत किए जा रहे अवैध निर्माणों के विरुद्ध सख़्त रुख अपनाते हुए सीलिंग एवं ध्वस्तीकरण की कार्यवाही लगातार जारी है। प्राधिकरण की ओर से स्पष्ट किया गया है कि बिना स्वीकृति एवं नियमों के विरुद्ध किए जा रहे किसी भी प्रकार के निर्माण को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसी क्रम में देहरादून के प्रगति विहार क्षेत्र में अवैध निर्माणों पर कार्रवाई की गई। प्रगति विहार लेन संख्या-06, देहरादून में उपेन्द्र कुमार अग्रवाल द्वारा किए जा रहे अवैध निर्माण पर नियमानुसार कार्रवाई करते हुए सीलिंग की कार्यवाही की गई।
वहीं, इसी क्षेत्र में श्रेयष अग्रवाल द्वारा निर्मित अवैध टिन शैड को चिन्हित करते हुए ध्वस्तीकरण की कार्रवाई अमल में लाई गई। दोनों ही मामलों में निर्माण प्राधिकरण से बिना स्वीकृति के किए जा रहे थे। उक्त कार्रवाई संयुक्त सचिव गौरव चटवाल के निर्देशों पर की गई, जिसमें सहायक अभियंता निशांत कुकरेती, अवर अभियंता जयदीप राणा एवं प्राधिकरण के सुपरवाइजर मौके पर उपस्थित रहे।
एमडीडीए ने आम नागरिकों से अपील की है कि किसी भी प्रकार के निर्माण कार्य से पूर्व प्राधिकरण से विधिवत स्वीकृति अवश्य प्राप्त करें। नियमों की अनदेखी करने वालों के विरुद्ध भविष्य में भी इसी प्रकार सख़्त कार्रवाई जारी रहेगी। यह अभियान शहर को सुनियोजित, सुरक्षित एवं अवैध निर्माण मुक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
उपाध्यक्ष एमडीडीए, बंशीधर तिवारी का बयान
प्राधिकरण क्षेत्र में अवैध निर्माण किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं हैं। मसूरी–देहरादून विकास प्राधिकरण शहर के सुनियोजित विकास के लिए प्रतिबद्ध है। नियमों को ताक पर रखकर किए जा रहे निर्माण न केवल शहर की व्यवस्था को प्रभावित करते हैं, बल्कि भविष्य में गंभीर समस्याएं भी पैदा करते हैं। एमडीडीए द्वारा लगातार निरीक्षण कर अवैध निर्माणों को चिन्हित किया जा रहा है और उनके विरुद्ध सख़्त कार्रवाई की जा रही है। आमजन से अपील है कि निर्माण से पूर्व प्राधिकरण की स्वीकृति अवश्य लें, अन्यथा नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
सचिव एमडीडीए, मोहन सिंह बर्निया का बयान
एमडीडीए द्वारा अवैध निर्माणों के विरुद्ध अभियान लगातार जारी रहेगा। प्राधिकरण क्षेत्र में बिना अनुमति किए गए निर्माणों को चिन्हित कर सीलिंग एवं ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जा रही है। यह कदम शहर के सुनियोजित विकास और नियमों के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है। नागरिक सहयोग से ही अवैध निर्माणों पर प्रभावी नियंत्रण संभव है।
देहरादून/नई दिल्ली। सदन मे शून्य काल के माध्यम से राज्यसभा सांसद एवं भाजपा राष्ट्रीय सह कोषाध्यक्ष डा. नरेश बंसल ने देवभूमि उत्तराखण्ड में ग्रामीण पर्यटन के विकास व विश्व प्रसिद्ध चारधाम के अलावा राज्य में अन्य स्थानों पर स्थित धार्मिक महत्व के पुरातन मन्दिर श्रृंखला जैसे पर्यटन को बढ़ावा देने की मांग सदन के माध्यम से केंद्र सरकार से की।
डा. नरेश बंसल ने सदन मे कहा कि ग्रामीण पर्यटन प्रकृति आधारित पर्यटन है जो प्रकृति प्रेमियों के लिए एक लोकप्रिय गंतव्य स्थान होता है। उन्होने कहा कि देवभूमि उत्तराखण्ड एक पौराणिक, धार्मिक महत्व प्राकृतिक सौंदर्य के पूर्ण एक अत्यंत सुंदर क्षेत्र है, जो प्राकृतिक सुंदरता के साथ जीवन की हलचल से दूर शांतिपूर्ण विश्राम की तलाश करने वाले पर्यटकों को खूब आकर्षित करता है व खास तौर पर ग्रामीण पर्यटन और गंगा, यमुना, सरस्वती, सरयू नदी विभिन्न नदियों को संजोये विदेशी पर्यटकों और अपने देश के पर्यटकों को बहुत आकर्षित करता है।
डा. नरेश बंसल ने सदन मे कहा कि यह गंगा स्नान और शांत माहौल के लिए जाना जाता है। विश्राम और पानी के खेल के लिए भी आदर्श है। यह शहर और क्षेत्र पर्यटकों को ट्रेकिंग, कैम्पिंग और समृद्ध वनस्पतियों की खोज का अवसर प्रदान करता है। लाखामण्डल, पाताल भुवनेश्वरी आदि प्राचीन गुफायें, शहीद स्मारक व ऐतिहासिक स्थलों का भी घर है। जो उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को भी दर्शाता है। इसके अलावा कई वाटरफाॅल, जगंल और रमणीक स्थल हैं। इसके अलावा काफी पुरातन मन्दिर भी हैं जैसे लाखामण्डल, हनोल, धारी देवी लगभग हर तरफ गांव व शहर में प्राचीन धार्मिक महत्व के चिह्न विराजमान हैं।
डा. नरेश बंसल ने कहा कि इसके अलावा माता गंगा पर सभी स्थानों पर धार्मिक महत्व का कार्य जहां संतोषजनक है, वहीं यमुना नदी पर घाटों का निर्माण, स्नान व्यवस्था व नित्य आरती का ठोस इंतजाम होना बाकी है। यहां पर कई पौराणिक महोत्सव, मेले होते हैं जो कि, काफी सालों से पर्यटकों का आकर्षक स्थल बन चुके हैं।
डा. नरेश बंसल ने सदन मे कहा कि उत्तराखण्ड में ऐसे कई आईडेन्टिफाइड स्थान हैं और अनडेवलप्ड विलेज हैं जिनकों हम डेवलप्ड कर सकते हैं। हम सभी जानते हैं कि पर्यटन के इस रूप के विकास के कारण स्थानीय अर्थव्यवस्था पर जबरदस्त प्रभाव पड़ता है। आने वाले समय में ग्रामीण पर्यटन इस देवभूमि उत्तराखण्ड क्षेत्र के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण साधन के रूप में उभरेगा।
डा. नरेश बंसल ने सदन के माध्म से सरकार व पर्यटन मंत्री से आग्रह किया कि, उत्तराखण्ड जो प्रधानमंत्री के दिल में बसा है के सम्पूर्ण पर्यटन विकास खासतौर पर ग्रामीण पर्यटन और यमुना घाटों का निर्माण, पौराणिक मंदिर सर्किट पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए उचित कार्यक्रम बनाने के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देशित दें। हमें विश्वास है कि आपके महत्वपूर्ण मार्गदर्शन और उचित वित्तीय सहायता से उत्तराखण्ड की पर्यटन क्षमता को बढ़ाया जा सकता है।
युवाओं के कौशल विकास पर विशेष ध्यान देने के निर्देश
स्वरोजगार के लिए अधिकतम अवसर उपलब्ध कराने हेतु विभागों को तेजी से कार्य करने के निर्देश
पात्र लोगों को योजनाओं का समय पर एवं पूर्ण लाभ मिले- मुख्यमंत्री
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को सचिवालय में कृषि, पशुपालन, पर्यटन एवं उद्योग क्षेत्रों से जुड़ी विभिन्न योजनाओं की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं के माध्यम से लोगों को रोजगार एवं स्वरोजगार से जोड़ने की दिशा में विशेष ध्यान दिया जाए। ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ अभियान के माध्यम से लोगों को इन योजनाओं की संपूर्ण जानकारी प्रदान की जाए, ताकि वे इनका लाभ उठा सकें।
मुख्यमंत्री ने युवाओं के कौशल विकास पर विशेष ध्यान देने तथा उन्हें स्वरोजगार के लिए अधिकतम अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में प्रभावी कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पात्र लोगों को योजनाओं का समय पर एवं पूरा लाभ मिले, इस पर सभी विभाग विशेष ध्यान दें। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि आवंटित बजट का पूर्ण आउटकम प्राप्त हो।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि उच्च स्तरीय बैठकों के कार्यवृत्त उन्नति पोर्टल पर अनिवार्य रूप से अपलोड किए जाएं। उन्होंने सेब की अतिसघन बागवानी योजना की समीक्षा करते हुए कहा कि इस महत्वाकांक्षी योजना को प्रभावी ढंग से संचालित कर निर्धारित लक्ष्यों को समय से प्राप्त किया जाए तथा किसानों को अधिकाधिक प्रोत्साहन प्रदान किया जाए। यह भी सुनिश्चित किया जाए कि किसानों से संबंधित देयकों का भुगतान समय पर हो। किसानों को उनके उत्पादन का बेहतर मूल्य मिले, इसके लिए राज्य में कीवी उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में तेजी से कार्य किया जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शहद उत्पादन के क्षेत्र में उत्तराखंड में व्यापक संभावनाएं हैं। इसे देखते हुए ‘हनी मिशन’ के अंतर्गत शहद उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए और अधिक प्रभावी प्रयास किए जाएं। राज्य में शहद का ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि बागवानी एवं मौन पालन के क्षेत्र में जिन राज्यों में अच्छा कार्य हुआ है, उनके अध्ययन हेतु अधिकारियों एवं विशेषज्ञों की टीमें उन राज्यों में भेजी जाएं।
बैठक में जानकारी दी गई कि प्रदेश के 29 उत्पादों को जी.आई. टैग प्राप्त हुआ है, जिनमें से 18 कृषि एवं कृषि कल्याण से संबंधित हैं। इस वर्ष 25 अन्य उत्पादों को जी.आई. टैग के लिए चिन्हित किया जाएगा। राज्य में 134 करोड़ रुपये की लागत से लागू स्टेट मिलेट पॉलिसी के अंतर्गत मंडुवा, झंगोरा, रामदाना, कौणी एवं चीना को शामिल किया गया है। इसके अंतर्गत प्रथम चरण में 30 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल के 24 विकासखंडों तथा द्वितीय चरण में 40 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल के 44 विकासखंडों का चयन किया गया है। प्रथम चरण में 5 हजार से अधिक गांवों को आच्छादित कर लगभग डेढ़ लाख कृषकों को लाभान्वित किया गया है। मिलेट फसलों की क्रय-विक्रय हेतु 216 क्रय केंद्र खोले गए हैं तथा सहकारिता विभाग के अंतर्गत 20 करोड़ रुपये का रिवाल्विंग फंड बनाया गया है। इस वित्तीय वर्ष में 5 हजार मीट्रिक टन के लक्ष्य के सापेक्ष अब तक 5,386 मीट्रिक टन मिलेट फसलों का क्रय किया जा चुका है।
बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना एवं मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना 2.0 के अंतर्गत चार वर्षों में 32 हजार के लक्ष्य के सापेक्ष 33,620 लाभार्थियों को 202.72 करोड़ रुपये की धनराशि उपलब्ध कराई गई है। आगामी वर्ष में 9 हजार लोगों को लाभान्वित किए जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। पर्यटन विभाग के अंतर्गत दीन दयाल उपाध्याय होम स्टे योजना के तहत चार वर्षों में 780 होम स्टे स्थापित किए गए हैं, जिसके लिए 188.58 करोड़ रुपये का वित्त पोषण किया गया है। वीर चंद्र सिंह गढ़वाली पर्यटन स्वरोजगार योजना के अंतर्गत चार वर्षों में एक हजार से अधिक लोगों को लाभान्वित किया गया है, जिसमें कुल 105 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि का वित्त पोषण किया गया है। राज्य में प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत मत्स्य पालन क्षेत्र में 17,450 लोगों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार प्राप्त हुआ है।
बैठक में कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज, गणेश जोशी, प्रमुख सचिव डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम, सचिव नितेश झा, दिलीप जावलकर, विनय शंकर पाण्डेय, एस.एन. पाण्डेय, वी. षणमुगम, धीराज गर्ब्याल सहित संबंधित विभागों के उच्च अधिकारी उपस्थित रहे।
आज की बदलती जीवनशैली में मोटापा एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बनता जा रहा है। यह समस्या अब केवल उम्रदराज़ लोगों तक सीमित नहीं रही, बल्कि बच्चे, युवा और कामकाजी वर्ग भी तेजी से इसकी चपेट में आ रहा है। मोटापा न सिर्फ शारीरिक बनावट को प्रभावित करता है, बल्कि हृदय रोग, मधुमेह, उच्च रक्तचाप जैसी कई गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ़ा देता है।
वजन घटाने के लिए लोग अक्सर बिना सही जानकारी के कठोर डाइट, जरूरत से ज्यादा व्यायाम या गलत उपाय अपनाने लगते हैं, जिससे लाभ की जगह नुकसान होने की आशंका बढ़ जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि मोटापे को लेकर समाज में कई तरह की गलतफहमियां फैली हुई हैं, जिन पर आंख बंद कर भरोसा करना सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है।
यदि सही जानकारी के साथ संतुलित आहार और स्वस्थ जीवनशैली को अपनाया जाए, तो मोटापे से बचाव संभव है। आइए जानते हैं मोटापे से जुड़ी कुछ आम मिथक और उनके पीछे का सच।
मिथ: मोटापा केवल जंक फूड खाने से होता है
यह मानना पूरी तरह सही नहीं है। असंतुलित आहार मोटापे का एक कारण जरूर है, लेकिन यह अकेला कारण नहीं है। आनुवांशिक कारण, शारीरिक गतिविधियों की कमी, नींद पूरी न होना, मानसिक तनाव और लंबे समय तक स्क्रीन के सामने बैठना भी मोटापे के जोखिम को बढ़ाते हैं। अध्ययनों में पाया गया है कि जो लोग घंटों मोबाइल, लैपटॉप या टीवी का उपयोग करते हैं, उनमें शारीरिक निष्क्रियता बढ़ जाती है, जिससे वजन तेजी से बढ़ने लगता है।
मिथ: वजन घटाने के लिए खाना कम कर देना ही काफी है
मोटापा कम करने के लिए केवल खाना छोड़ देना या बहुत कम खाना समाधान नहीं है। शरीर को सही मात्रा में पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। विशेषज्ञों के अनुसार संतुलित आहार के साथ नियमित शारीरिक गतिविधि सबसे प्रभावी उपाय है।
दिन में कम से कम 30 मिनट टहलना, योग या हल्का व्यायाम करना और पौष्टिक भोजन लेना वजन नियंत्रित रखने में मदद करता है।
मिथ: मोटापे से ग्रस्त हर व्यक्ति को डायबिटीज हो जाती है
मोटापा टाइप-2 डायबिटीज का एक जोखिम कारक जरूर है, लेकिन यह जरूरी नहीं कि हर मोटे व्यक्ति को मधुमेह हो ही जाए। कई लोग मोटापे के बावजूद स्वस्थ रहते हैं, जबकि कुछ सामान्य वजन वाले लोगों को भी डायबिटीज हो सकती है। स्वस्थ खानपान, नियमित व्यायाम और सक्रिय जीवनशैली अपनाकर मोटापा और डायबिटीज दोनों के खतरे को कम किया जा सकता है।
मिथ: अगर परिवार में मोटापा है तो आपको भी होगा
आनुवांशिकता का प्रभाव जरूर पड़ता है, लेकिन यह तय नहीं करता कि आपको मोटापा होगा ही। विशेषज्ञों का कहना है कि जिन लोगों के परिवार में मोटापे का इतिहास रहा है, उन्हें अपने आहार और दिनचर्या को लेकर अधिक सतर्क रहने की जरूरत होती है। सही आदतें अपनाकर मोटापे के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
नोट: यह लेख विभिन्न मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह पर आधारित है।
(किसी भी बदलाव से पहले डॉक्टर की सलाह अवश्य लें।)
(साभार )
सोलर ऊर्जा से रोशन हुआ गांव, सुरक्षित और सतत विकास की ओर सशक्त कदम
पौड़ी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के हरित ऊर्जा, आत्मनिर्भरता और ग्रामीण सशक्तिकरण के दूरदर्शी विजन को धरातल पर साकार करते हुए विकासखंड बीरोंखाल की ग्राम पंचायत नौगांव ने सोलर ऊर्जा के माध्यम से सतत विकास की एक प्रेरणादायी पहल की है। सीमित संसाधनों के बावजूद दूरदर्शी योजना और सामूहिक प्रयासों से नौगांव आज जिले ही नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों के लिए एक आदर्श मॉडल के रूप में उभर रहा है।
पूर्व में जहां गांव के अधिकांश मार्ग रात्रि में अंधेरे में डूबे रहते थे, वहीं अब सोलर ऊर्जा की बदौलत पूरा गांव उजाले से जगमगा रहा है। ग्राम पंचायत भवन की छत पर स्थापित तीन किलोवाट क्षमता के सोलर प्लांट से प्रतिदिन लगभग 16 यूनिट स्वच्छ ऊर्जा का उत्पादन किया जा रहा है। इस ऊर्जा को गांव में स्थापित 40 सोलर स्ट्रीट लाइटों से जोड़ा गया है, जिससे सभी प्रमुख मार्गों, सार्वजनिक स्थलों एवं आवासीय क्षेत्रों में समुचित प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित हुई है।
ग्राम प्रधान ओमपाल सिंह ने बताया कि यह सोलर प्लांट राज्य वित्त से लगभग दो लाख रुपये की लागत से एक वर्ष पूर्व स्थापित किया गया। उन्होंने कहा कि इस पहल का उद्देश्य केवल प्रकाश व्यवस्था सुदृढ़ करना नहीं, बल्कि गांव को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना भी है। उन्होंने बताया कि गांव में लगभग 70 परिवार निवास करते हैं और सोलर स्ट्रीट लाइटों से न केवल विद्युत व्यय में कमी आयी है, बल्कि रात्रिकालीन सुरक्षा एवं सुगमता भी सुनिश्चित हुई है।
जिला पंचायतीराज अधिकारी जितेंद्र कुमार ने नौगांव की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्र में सोलर ऊर्जा का प्रभावी उपयोग ग्राम पंचायत की सक्रियता और विकासोन्मुख सोच को दर्शाता है। उन्होंने बताया कि यह नवाचार अन्य ग्राम पंचायतों के लिए भी प्रेरणास्रोत बनेगा। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि ग्राम पंचायत नौगांव स्वच्छता के क्षेत्र में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन कर चुकी है। वर्ष 2023–24 में स्वच्छता कार्यों के लिए नौगांव को जनपद स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त हुआ था, जिसके लिए पंचायत को पांच लाख रुपये की पुरस्कार राशि से सम्मानित किया गया।
जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया ने कहा कि नौगांव ग्राम पंचायत द्वारा सौर ऊर्जा के माध्यम से की गयी यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों में संसाधनों के कुशल उपयोग का उत्कृष्ट उदाहरण है। इससे न केवल ऊर्जा की उपलब्धता सुनिश्चित हुई है, बल्कि रात्रिकालीन सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और सार्वजनिक सुविधाओं की गुणवत्ता में भी सुधार हुआ है। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन का प्रयास है कि इस प्रकार के सफल मॉडल को अन्य ग्राम पंचायतों में भी चरणबद्ध रूप से अपनाया जाय, ताकि हर गांव सुरक्षित, स्वच्छ और आत्मनिर्भर बन सके।
गांव की रीना देवी, मीनाक्षी देवी, रविन्द्र रावत एवं जगदीप सिंह ने बताया कि सोलर प्लांट स्थापित होने के बाद गांव की तस्वीर पूरी तरह बदल गई है। प्रत्येक मार्ग पर प्रकाश व्यवस्था होने से सुरक्षा की भावना मजबूत हुई है और ग्रामीणों को सुविधाजनक वातावरण मिला है। ग्रामीणों ने इस पहल को मुख्यमंत्री के विकास विजन से जुड़ा हुआ बताते हुए ग्राम पंचायत के प्रयासों की सराहना की।
नौगांव की यह पहल इस बात का सशक्त प्रमाण है कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में उत्तराखंड का हर गांव हरित, सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनने की दिशा में निरंतर अग्रसर है।
छात्रों को मिलेगा एआई और कोडिंग का प्रशिक्षण
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय से छात्र कौशल संवर्धन हेतु लैब ऑन व्हील्स (इंफोसिस स्प्रिंगबोर्ड) का फ्लैग ऑफ किया।
यह लैब ऑन व्हील्स छात्रों को ए.आई, कोडिंग, आई.ओ.टी एवं अन्य इमर्जिंग टेक क्षेत्रों में कौशल संवर्धन के लिए हैण्ड्स ऑन सुविधा उपलब्ध कराएगा। इसके साथ ही विज्ञान विषय के विभिन्न प्रयोगों को वर्चुअल मोड से सीखने में सहायता प्रदान करेगा।
लैब ऑन व्हील्स छात्रों को लर्निंग बाई डूइंग के लिए बेहतर प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराएगा। इंफोसिस स्प्रिंगबोर्ड लैब ऑन व्हील्स आगामी 05 वर्ष तक पूरे राज्य संस्थाओं में जाकर छात्रों को जागरूक करते हुए उनको हैण्स ऑन प्रशिक्षण प्रदान करेगा और उनको वैश्विक संभावनाओं से जोड़ेगा।
लैब ऑन व्हील्स राज्य में छात्रों के लिए हैण्स ऑन प्रशिक्षण की अनुपलब्धता को न्यून करेगा। लैब ऑन व्हील्स में उपलब्ध हैण्ड्स ऑन एवं प्रैक्टिकल्स उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं विद्यालयी शिक्षा ग्रहण कर रहे छात्रों हेतु उपयोगी है।
इस अवसर पर विधायक सविता कपूर, प्रमोद नैनवाल,उच्च शिक्षा उन्नयन समिति के उपाध्यक्ष डॉ. देवेन्द्र भसीन, डॉ. जयपाल सिंह चौहान, सचिव उच्च शिक्षा डॉ. रंजीत कुमार सिन्हा, उच्च शिक्षा, तकनीकि शिक्षा के अधिकारी एवं इंफोसिस प्रतिनिधि उपस्थित थे।
फिल्म “गोदान” का टीजर, गाना और पोस्टर लॉन्च
देहरादून। सनातन की आत्मा गौमाता में बसती है। आज के समय में जब हम अपनी जड़ों से दूर हो रहे हैं, यह फिल्म गुम हो रही गौमाता को बचाने और उनकी अहमियत को समझाने की एक बड़ी कोशिश है।
उक्त बात प्रदेश के पर्यटन धर्मस्व एवं संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज ने गुरुवार को सुभाष रोड़ स्थित अपने कैम्प कार्यालय में कामधेनु इंटरनेशनल प्रोडक्शन के बैनर तले गौ माता के महत्व पर बनी फिल्म “गोदान” के टीजर, गाने और पोस्टर लॉन्चिंग के अवसर पर कही। उन्होंने फिल्म निर्माण के लिए पूरी टीम को बधाई देते हुए कहा कि बॉलीवुड फिल्म इंडस्ट्री इन दिनों बदलाव के एक बड़े दौर से गुजर रही है। अब यहाँ की फिल्में केवल पारंपरिक, पारिवारिक कहानियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि फिल्म निर्माता और निर्देशक अब सामाजिक मुद्दों से लेकर सस्पेंस-थ्रिलर जैसे अलग-अलग और लीग से हटकर विषयों पर फिल्में बना रहे हैं।
धर्मस्व एवं संस्कृति मंत्री महाराज ने कहा कि भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म में गौमाता की अहमियत को समझाने के लिए विनोद चौधरी के निर्देशन में बनी फीचर फिल्म ‘गोदान’ 6 फरवरी 2026 से पूरे देश के सिनेमाघरों में प्रदर्शित होने वाली है। “गोदान” फिल्म को वैज्ञानिक नजरिये के साथ प्रस्तुत कर फिल्म के निर्माता निर्देशक, कलाकारों और गेस्ट ने समाज को एक बड़ा मैसेज देने का काम किया है। यह फिल्म केवल किसी व्यक्ति विशेष के लिए नहीं, बल्कि देश के युवाओं को अपनी संस्कृति और सनातन मूल्यों से जोड़ने का एक मजबूत जरिया है।
महाराज ने कहा कि उनका विश्वास है कि अगर गौ हत्या जैसे अपराधों में शामिल लोग एक बार इस फिल्म को देख लें, तो उनका हृदय परिवर्तन अवश्य होगा। उन्होंने बताया कि 40 करोड़ रुपये की लागत से बनी फिल्म ‘गोदान’ की भव्यता को दर्शाने के लिए इसकी शूटिंग उत्तराखंड की वादियों, नोएडा, मथुरा और मुंबई के विभिन्न स्थानों पर की गई है। फिल्म की कहानी को जीवंत बनाने के लिए इसमें कई सच्ची घटनाओं को भी शामिल किया गया है। ‘गोदान’ फिल्म मनोरंजन के साथ-साथ एक गंभीर सामाजिक और आध्यात्मिक संदेश भी लेकर आ रही है।
फिल्म “गोदान” के टीजर, गाने और पोस्ट लॉन्चिंग के अवसर पर श्री बद्रीनाथ श्री केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी, विश्व संवाद केंद्र के प्रबंधक सुरेंद्र मित्तल, कामधेनु गौशाला समिति की सदस्य सुश्री मनिका शर्मा सहित टीम के कई सदस्य उपस्थित थे।
सिनेमाघरों में इन दिनों बॉक्स ऑफिस की जंग दिलचस्प मोड़ पर है। एक ओर जहां कई बड़ी फिल्में दर्शकों को लुभाने की कोशिश कर रही हैं, वहीं 23 जनवरी को रिलीज हुई फिल्म ‘बॉर्डर 2’ ने आते ही कमाई के मामले में मजबूत पकड़ बना ली है। ओपनिंग डे से लेकर अब तक फिल्म की रफ्तार थमती नजर नहीं आ रही है। वीकेंड के बाद भी फिल्म ने शानदार कलेक्शन जारी रखते हुए कई बड़ी फिल्मों के रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं। इसी बीच फिल्म ‘धुरंधर’ से इसकी सीधी टक्कर भी देखने को मिल रही है। आइए जानते हैं दोनों फिल्मों का ताजा बॉक्स ऑफिस हाल।
छह दिनों में 200 करोड़ के पार पहुंची ‘बॉर्डर 2’
अनुराग सिंह के निर्देशन में बनी ‘बॉर्डर 2’ बॉक्स ऑफिस पर लगातार इतिहास रच रही है। बुधवार को फिल्म ने 13 करोड़ रुपये की कमाई की, जिसके साथ ही इसका कुल कलेक्शन 213 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। फिल्म ने महज छह दिनों में 200 करोड़ क्लब में एंट्री कर ली है।
‘बॉर्डर 2’ का दिनवार कलेक्शन
पहले दिन: 13 करोड़ रुपये
दूसरे दिन: 36.5 करोड़ रुपये
तीसरे दिन: 54.5 करोड़ रुपये
चौथे दिन: 59 करोड़ रुपये
पांचवें दिन: 20 करोड़ रुपये
छठे दिन: 13 करोड़ रुपये
इन बड़ी फिल्मों के टूटे रिकॉर्ड
‘बॉर्डर 2’ ने छह दिनों की कमाई में कई सुपरहिट फिल्मों को पीछे छोड़ दिया है।
‘सुल्तान’: 195.90 करोड़ रुपये
‘टाइगर 3’: 196.00 करोड़ रुपये
‘छावा’: 197.75 करोड़ रुपये
इन सभी फिल्मों के रिकॉर्ड को पछाड़ते हुए ‘बॉर्डर 2’ ने नया बेंचमार्क सेट किया है।
‘बॉर्डर 2’ बनाम ‘धुरंधर’
अगर छठे दिन की कमाई की बात करें तो ‘धुरंधर’ ने 27 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया था, जबकि ‘बॉर्डर 2’ ने उसी दिन 13 करोड़ रुपये कमाए। हालांकि, कुल कमाई के मामले में तस्वीर बिल्कुल अलग है।
‘बॉर्डर 2’: 213 करोड़ रुपये (6 दिन)
‘धुरंधर’: 180.25 करोड़ रुपये (6 दिन)
यानी दैनिक कमाई में भले ही ‘धुरंधर’ आगे रही हो, लेकिन कुल कलेक्शन में ‘बॉर्डर 2’ ने बाज़ी मार ली है।
फिल्म की स्टारकास्ट और कहानी
‘बॉर्डर 2’ का निर्देशन अनुराग सिंह ने किया है। फिल्म में सनी देओल, वरुण धवन, दिलजीत दोसांझ और अहान शेट्टी अहम भूमिकाओं में नजर आ रहे हैं। यह फिल्म 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध की पृष्ठभूमि पर आधारित है और 1997 में आई सुपरहिट फिल्म ‘बॉर्डर’ का सीक्वल है। देशभक्ति, दमदार अभिनय और भव्य एक्शन के चलते फिल्म को दर्शकों का जबरदस्त समर्थन मिल रहा है।
(साभार)
