हाथरस हादसे से सबक, अब यहां में सत्संग-मेलों में भीड़ नियंत्रण के लिए बनेगी SOP..
उत्तराखंड: हाथरस में सत्संग के दौरान हुई भगदड़ के बाद उत्तराखंड पुलिस मुख्यालय ने भी अतिरिक्त सुरक्षा बरतने के निर्देश दिए हैं। एडीजी कानून व्यवस्था एपी अंशुमान ने सभी जिला प्रभारियों को कहा है कि मेले व अन्य आयोजन की अनुमति से पहले ही भीड़ नियंत्रण के प्रबंध देखे जाएं। यदि वहां पर पर्याप्त प्रबंध नहीं हैं तो एनओसी न दें। इसके साथ ही उन्होंने हर जिले से एक एसओपी बनाकर मुख्यालय को उपलब्ध कराने को कहा है। इसके बाद पुलिस मुख्यालय इन एसओपी के अध्ययन के बाद विस्तृत एसओपी तैयार करेगा।
ये दिए निर्देश
भीड़ प्रबंधन के मद्देनजर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों को संवेदनशीलता से लिए जाने, आयोजन हेतु एनओसी दिए जाने से पहले थाना प्रभारी वहां स्वयं निरीक्षण करेंगे।
आयोजन स्थल की भीड़ क्षमता, प्रवेश/निवासी द्वार, पार्किंग आदि का आंकलन करने के बाद ही कार्यक्रम की एनओसी दी जाए।
विभिन्न मेले, धार्मिक आयोजन व अन्य कार्यक्रम अनुमति के बाद ही आयोजित किए जाएंगे।
छोटे-बड़े आयोजनों के संबंध में एसओपी तैयार कर जल्द से जल्द पुलिस मुख्यालय को उपलब्ध कराएं।
जनपदों में वर्ष में होने वाले मेले, त्योहारों और अन्य अवसरों पर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों का वार्षिक कैलेंडर तैयार कर उसके अनुरूप ही आवश्यक पुलिस बल का प्रबंध कराया जाए।
बिना अनुमति के आयोजित होने वाले कार्यक्रमों के आयोजकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।
किसी भी मेले और धार्मिक आयोजनों की आयोजक 15 दिन पहले से प्रचार प्रसार करेंगे।
यूएस नगर को मिली बड़ी सौगात, खटीमा सहित इन जगह पर बनेंगे चार स्टेडियम..
उत्तराखंड: खेलों में रूचि रखने वाले युवाओं को अपनी प्रतिभा निखारने के लिए अब दूसरे प्रदेशों की ओर रुख नहीं करना पड़ेगा। सूबे की धामी सरकार ने प्रदेश को नौ स्टेडियम निर्माण की स्वीकृति दी है। इसमें से ऊधमसिंह नगर को चार स्टेडियम की बड़ी सौगात मिली है। प्रदेश सरकार ने जिले के जसपुर, नगला, खटीमा व किच्छा में स्टेडियम निर्माण को स्वीकृति दी है।
प्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2024-25 में प्रदेश के 50 हजार से अधिक आबादी वाली जगहों पर स्टेडियम निर्माण की स्वीकृति दी है। इसके लिए प्रदेश के कुल नौ स्थानों को चिह्नित किया गया है, जिसमें चार केवल ऊधमसिंह नगर के हैं। प्रदेश सरकार की सूची में रुड़की, ऋषिकेश, रामनगर, मंगलौर व डोईवाला शामिल हैं। तो वहीं जिले में जसपुर, नगला, खटीमा व किच्छा को शामिल किया गया है। यहां स्टेडियम का निर्माण हो जाने से ग्रामीण प्रतिभाओं को तराशा जाएगा। 21 जून को निदेशक युवा कल्याण एवं प्रांतीय रक्षक दल जितेंद्र कुमार सोनकर ने हरिद्वार, देहरादून, नैनीताल व ऊधमसिंह नगर के लिए पत्र जारी किया है।
यह होंगी सुविधाएं..
इंडोर स्टेडियम- 18.5 मीटर लंबाई, 17.5 मीटर चौड़ाई एवं 7.5 मीटर ऊंचाई। दो प्रशिक्षक व स्टोर कक्ष, अलग-अलग बालक-बालिका पांच-पांच-शौचालय व बाथरूम, विद्युत, पानी की व्यवस्था, बाउंड्रीवाल व गेट।
ओपन स्टेडियम- 120 मीटर लंबाई व 80 मीटर चौड़ाई। प्रशिक्षक व स्टोर कक्ष मय शौचालय-बाथरूम, खिलाड़ियों के लिए अलग-अलग बालक-बालिका पांच-पांच-शौचालय व बाथरूम, विद्युत, पानी की व्यवस्था, बाउंड्रीवाल व गेट।
यूएसनगर में हो जाएंगे 10 स्टेडियम..
ऊधमसिंह नगर के ग्रामीण इलाके सकैनिया, बिचपुरी, दिनेशपुर व कूल्हा में मिनी स्टेडियम संचालित हैं। वहीं खटीमा में मलखंब का स्टेडियम शासन से प्रस्तावित है। इधर प्रदेश सरकार ने जिले के चार जगहों पर इंडोर व ओपन स्टेडियम की बड़ी सौगात दे दी है। निदेशक युवा कल्याण एवं प्रांतीय रक्षक दल की ओर से पत्र जारी किया गया है। इसमें जसपुर, नगला, खटीमा व किच्छा को स्टेडियम के लिए चुना गया है।
मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना को लेकर हुई पहली बैठक..
महिलाओं को 1 लाख तक की वित्तीय सहायता देगी सरकार..
उत्तराखंड: मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना इसी साल लागू होगी। योजना के तहत 95 विकासखंडों में उन एकल महिलाओं को स्वरोजगार शुरू करने में वित्तीय सहयोग देगा, जो तलाकशुदा, विधवा, परित्यक्ता, किन्नर व एसिड हमलों से पीडि़त हैं। योजना के लिए 10 करोड़ की धनराशि निर्धारित की गई है। यह धनराशि आबकारी विभाग से प्राप्त होने वाले अतिरिक्त शुल्क से मिलेगी। मंगलवार को कैबिनेट मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल की अध्यक्षता में गठित उपसमिति की बैठक में योजना के सभी पहलुओं पर विचार किया गया। बैठक में तय हुआ कि उप समिति की आगामी बैठक में योजना के ड्राफ्ट को अंतिम रूप देने के बाद इसे शासन में भेजा जाएगा। मंत्री का कहना हैं कि मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना प्रदेश के सभी जिलों में लागू की जाएगी। इसमें हर ब्लाॅक की एकल महिलाओं (विधवा, तलाकशुदा, परित्यक्ता, किन्नर, अपराध एवं एसिड हमलों से पीड़ित महिला) को योजना के अन्तर्गत शामिल किया जाएगा।
बैठक में सदस्य सचिव, उप समिति चंद्रेश कुमार यादव, निदेशक, उप समिति, प्रशान्त आर्य आदि मौजूद थे। विधानसभा सभागार में वित्त मंत्री प्रेम चन्द अग्रवाल की अध्यक्षता में मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना के क्रियान्वयन के लिए गठित मंत्री मंडलीय उप समिति की पहली बैठक हुई। इस योजना 18 से 50 आयुसीमा वाली एकल महिलाओं के लिए निर्धारित किया गया है। स्वरोजगार के तहत कृषि, बागवानी, पशुपालन, कुक्कुट पालन, भेड़ पालन, बकरी पालन, उद्यान, बुटीक, टेलरिंग, जनरल स्टोर, टिफिन सेवा, कैंटीन, कैटरिंग, प्लम्बर, इलेक्ट्रिशियन, डाटा एंट्री कार्य, कम्प्यूटर हार्डवेयर रिपेयरिंग, टेली काॅलिंग आदि जैसे कार्यों को जोड़ा गया है।
उत्तराखंड। साल 2020 में कोरोना नामक वैश्विक महामारी ने पूरी दुनिया की गति अनायास रोक दी थी। उत्तराखंड भी इससे बुरी तरह प्रभावित हुआ। पहले लॉकडाउन और उसके बाद महामारी से जूझने के लिए अमल में लाई गई उपायों की लंबी श्रृंखला ने चारधाम यात्रा को लगभग ठप्प कर दिया था। इससे श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) की वित्तीय स्थिति भी डगमगा गयी थी।
महामारी के भय से उबरी दुनिया ने जब दोबारा गति पकड़ी तो प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के प्रयासों से यात्रा मार्गों पर भी हलचल नज़र आने लगी। वर्ष 2022 प्रदेश सरकार ने भाजपा के वरिष्ठ नेता अजेंद्र अजय को बीकेटीसी के अध्यक्ष का दायित्व सौंपा। अजेंद्र के नेतृत्व में बीकेटीसी ने नई ऊर्जा के साथ काम शुरू किया और शासन के सहयोग से यात्रा के लिए आवश्यक अवस्थापना विकास से लेकर परिवेश निर्माण तक के कार्यों को गतिमान किया।
पूर्व में कार्मिकों के वेतन, दैनिक क्रियाकलापों के संचालन और विभिन्न अवस्थापना सुविधाओं के विकास के लिए बीकेटीसी को आर्थिक कठिनाइयों से जूझना पड़ता था। अजेंद्र के कार्यकाल में आय के नए स्रोतों के समुचित नियोजन से बीकेटीसी का वित्तीय तलपट आशातीत लाभ दर्शाने लगा है। विगत ढाई वर्षों में बीकेटीसी की परिधि में आने वाले अनेक पौराणिक मंदिरों के जीर्णोद्धार व सौंदर्यीकरण की सराहनीय पहल की गई। इसके साथ ही यात्रा मार्गों पर स्थित विभिन्न विश्राम गृहों के उच्चीकरण के भी अभूतपूर्व कार्य किये गए।
बाबा केदार की शीतकालीन गद्दी स्थल ऊखीमठ स्थित श्री ओंकारेश्वर मंदिर परिसर में कोठा भवन के जीर्णोद्वार और मंदिर परिसर के विस्तारीकरण व सौंदर्यीकरण की मांग स्थानीय जनता द्वारा तीन दशकों से मांग उठायी जाती रही है। राजनीतिक लाभ के लिए पूर्व में करीब आधा दर्जन से अधिक बार यहां पर भूमि पूजन भी किये गए। मगर अजेंद्र ने इस परियोजना को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल किया और वर्तमान में न्यू इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप के सहयोग से पांच करोड़ रूपये की लागत से प्रथम चरण के कार्य तेजी से गतिमान हैं।
वर्ष 2013 की आपदा में केदारनाथ धाम में पूरी तरह से ध्वस्त हो चुके श्री ईशानेश्वर मंदिर का निर्माण गत वर्ष एक दानीदाता के सहयोग से एक वर्ष के रिकॉर्ड समय में कराया गया। गुप्तकाशी स्थित विश्वनाथ मंदिर परिसर में ध्वस्त हो चुके भैरव मंदिर के पुनर्निर्माण की मांग क्षेत्रीय जनता करीब एक दशक से उठाती रही है। मगर अजेंद्र के प्रयासों से कुछ माह पूर्व शुरू हुआ मंदिर निर्माण का कार्य शीघ्र ही पूरा होने को है। इसके अलावा तुंगनाथ व विश्वनाथ मंदिर की जर्जर हो चुकी छतरियों का पुनर्निर्माण कार्य भी सम्पन्न कराये गए हैं।
अजेंद्र के कार्यकाल का सबसे चर्चित कार्य केदारनाथ मंदिर के गर्भ गृह को स्वर्ण मंडित कराना रहा है। सोमनाथ, काशी विश्वनाथ, सिद्धि विनायक, राम मंदिर अयोध्या जैसे तमाम प्रमुख मंदिरों में स्वर्ण मंडित विभिन्न कार्य कराने वाले मुंबई के लाखी परिवार ने केदारनाथ मंदिर के गर्भ गृह को पूरी तरह से स्वर्ण मंडित किया। हालांकि, राजनीतिक कारणों से कुछ लोगों ने इस पर विवाद खड़ा करने की कोशिश की। मगर कुछ लोगों के दुष्प्रचार को नजरअंदाज कर दिया जाए तो वास्तव में बाबा केदार के गर्भगृह की स्वर्णमयी आभा देश-विदेश के श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनी हुयी है।
बीकेटीसी में वित्तीय नियोजन एक चुनौतीपूर्ण कार्य था। आश्चर्यजनक रूप से पूर्व में यहां इसके नियंत्रण की कोई सटीक व्यवस्था नहीं थी। अजेंद्र ने पदभार ग्रहण करते ही सबसे पहले वित्तीय पारदर्शिता के लिए वित्त अधिकारी का पद सृजित करने की पहल की और इस पर शासन से प्रदेश वित्त सेवा के अधिकारी की तैनाती करवाई। इससे आर्थिक गतिविधियों का नियामन त्रुटिहीन हो गया है। कुशल वित्तीय प्रबंधन का परिणाम है कि बीकेटीसी आधारभूत ढांचे के विकास के लिए विभिन्न निर्माण कार्यों को सम्पादित करने के बावजूद आर्थिक दृष्टि से मजबूत स्थिति में आ गयी है। बीकेटीसी ने वर्तमान यात्राकाल में केदारनाथ व बदरीनाथ धाम में यात्रा सुविधाओं के विकास के लिए प्रदेश सरकार को दस करोड़ रूपये की धनराशि प्रदान की। प्रदेश के इतिहास में यह पहला अवसर होगा कि जब किसी निगम अथवा बोर्ड ने प्रदेश सरकार को सहयोग के रूप में धनराशि दी होगी।
वर्ष 1939 में अंग्रेजों के समय में गठित बीकेटीसी में कर्मचारियों की नियुक्ति, पदोन्नति आदि के लिए कोई पारदर्शी व्यवस्था नहीं थी और ना ही कार्मिकों के लिए कोई सेवा नियमावली थी। बीकेटीसी के इतिहास में पहली बार अजेंद्र ने इसके लिए पहल की और तमाम गतिरोधों के बावजूद सेवा नियमावली बनायीं। धार्मिक संस्थाओं के लिए इस तरह की नियमावली का निर्माण करना दरअसल एक संवेदनशील विषय रहा है। प्रचलित परंपराओं के साथ आवश्यक वैधानिक शर्तों का संयोजन एक चुनौतीपूर्ण टास्क होता है। लिहाजा, इससे पूर्व किसी ने भी इस संवेदनशील विषय को छूने का साहस नहीं किया।
प्रशासनिक व्यवस्था के निर्बाध प्रचालन और कार्य संस्कृति में बदलाव लाने के लिए भी कई प्रयास किये गए। इसमें सबसे प्रमुख निर्णय कार्मिकों का स्थानांतरण था। मंदिर समिति के इतिहास में पहली बार कार्मिकों के स्थानांतरण किये गए। स्थानांतरण प्रक्रिया ने मंदिर समिति में भूचाल ला दिया था। मगर अध्यक्ष ने कुशल प्रशासनिक क्षमता का परिचय देते हुए स्थानांतरण आदेशों को लागू करा कर छोड़ा। कर्मचारियों की लंबित पदोन्नति का मार्ग प्रशस्त कर उनके मनोबल को बढ़ाने के साथ कार्मिकों को गोल्डन कार्ड सुविधा प्रदान करने जैसे अनेक निर्णय लिए गए।
सुधारों के क्रम में धामों में दर्शन व्यवस्था को अधिक प्रभावशाली बनाने के लिए बीकेटीसी ने अपना सुरक्षा संवर्ग बनाने का प्रस्ताव प्रदेश सरकार को भेजा है। इसको सरकार ने स्वीकृति दे दी है। उम्मीद है कि शीघ्र ही बदरीनाथ व केदारनाथ मंदिरों में दर्शन व सुरक्षा की कमान बीकेटीसी के सुरक्षाकर्मियों के पास होगी।
हालांकि, सुधारों की राह कभी भी आसान नहीं होती है। बीकेटीसी में भी सुधार की बयार कुछ लोगों को पसंद नहीं आयी और वे अध्यक्ष अजेंद्र के विरुद्ध लगातार बात-बेबात के मुद्दों को लेकर विवाद खड़ा करने का प्रयास करते रहते हैं। मगर अजेंद्र ने सारे विरोधों को दरकिनार करते हुए अपना अभियान जारी रखा है।
निजी विश्वविद्यालयों में छात्रों की बैक डोर एंट्री बंद,शासन ने नकेल कसनी की शुरू..
उत्तराखंड: अब अधिकारों की स्वायत्तता की आड़ में राज्य के प्राइवेट विश्वविद्यालय एग्जाम से ठीक पहले तक छात्रों की बैक डोर एंट्री नहीं कर सकेंगे। प्राइवेट विवि के लिए अधिनियम बनने के बाद शासन ने नकेल कसते हुए नए सत्र में छात्रों को प्रवेश को लेकर निर्देश जारी किए हैं। जिसके तहत सभी प्राइवेट विवि पाठ्यक्रमों में प्रवेश की अंतिम तिथि को शैक्षिक कैलेंडर के साथ शासन को ई-मेल करेंगे।यही नहीं निर्धारित तिथि तक प्रवेश लेने के बाद एक सप्ताह के भीतर प्रवेशित छात्रों का विवरण वेबसाइट पर अपलोड करेंगे।
इस तिथि के बाद विवि कोई प्रवेश नहीं ले सकेंगे। 31 जनवरी 2024 को उत्तराखंड निजी विश्वविद्यालय अधिनियम-2023 के लागू होने के बाद अब प्राइवेट विश्वविद्यालयों की मनमानी पर नकेल कसी जा रही है। अधिनियम में पहले ही प्राइवेट विश्वविद्यालय में प्रबंधन के चांसलर और प्रो चांसलर पदों को समाप्त कर दिए गए हैं। इसके साथ ही राज्य सरकार का दखल भी बढ़ गया है। जिसके तहत अनियमितता से जुड़े मामलों में राज्य सरकार को दखल करने के साथ ही कार्रवाई के अधिकार भी मिल गए हैं।
शिकायतों की जांच कराई..
नए सत्र में प्रवेश को लेकर शासन की ओर से जारी पत्र को भी इससे जोड़कर देखा जा रहा है। सूत्रों के अनुसार राज्य के प्राइवेट संस्थानों की ओर से शासन को लगातार शिकायत की जा रही थी कि प्राइवेट संस्थान, विवि की ओर से निर्धारित तिथि के बाद एडमिशन नहीं ले पाते हैं। जबकि प्राइवेट विश्वविद्यालय साल भर प्रवेश लेते हैं। अधिकारिक सूत्रों के अनुसार शासन ने अपने स्तर से भी शिकायतों की जांच कराई। जिसके बाद आठ जून को उपसचिव, उत्तराखंड शासन व्योमकेश दूबे की ओर से समस्त निजी विश्वविद्यालयों के कुलसचिव को पत्र भेजा गया। जिससे हड़कंप मचा है।
गुपचुप तरीके से छात्राें के प्रवेश नहीं ले सकेंगे..
इस पत्र का निहितार्थ यह माना जा रहा है कि अब प्राइवेट विवि गुपचुप तरीके से छात्राें के प्रवेश नहीं ले सकेंगे। विवि को निर्देश दिए गए हैं कि शैक्षणिक सत्र 2024-25 में संचालित पाठ्यक्रमों में प्रवेश प्रक्रिया की समय सारणी निर्धारित कर शैक्षणिक कैलेंडर के साथ शासन को ई-मेल सूचना भेजेंगे। यही नहीं प्रवेश के लिए निर्धारित की गई अंतिम तिथि तक प्रवेशित छात्र-छात्राओं का नाम, पाठ्यक्रम और प्रवेश की तिथि के साथ संपूर्ण विवरण, अंतिम तिथि की समाप्ति के एक सप्ताह की समयावधि में विवि की वेबसाइट पर अपलोड कर दें। संवाद
बाहरी प्रदेशों के छात्रों के प्रवेश को लेकर उठते रहे हैं सवाल..
आपको बता दे कि प्राइवेट विश्वविद्यालय खुद ही पाठ्यक्रम का सिलेबस तैयार करते हैं। परीक्षा कार्यक्रम से लेकर कॉपियां जांचने और रिजल्ट जारी करने का काम भी खुद ही करते हैं। इसी तरह कक्षा में उपस्थिति की मॉनिटरिंग भी विवि के हाथ में होती है। ऐसे में कुछ प्राइवेट विवि पर प्रोफेशनल कोर्स में बड़ी संख्या में सैकड़ों मील दूरी से छात्रों के यहां आकर प्रवेश लेने को लेकर सवाल उठते रहे हैं। सूत्रों के अनुसार इन छात्रों के एडमिशन परीक्षा से कुछ समय पहले तक किए जाते हैं।
टिहरी में भयानक सड़क हादसा, टायर फटने से खाई में गिरी वैन, 3 घायल..
उत्तराखंड: टिहरी में चलती मारुति ईको वैन का टायर फट गया। टायर फटने के कारण वैन गहरी खाई में जा गिरी। इस हादसे में वाहन में सवार तीन लोग घायल हो गए। सभी की हालत गंभीर बताई जा रही है। घायलों को स्थानीय लोगों की मदद से सीएचसी ले जाया गया। जहां से उन्हें हायर सेंटर रेफर कर दिया गया है।कोडार -दीनगांव-मुखेम मोटर मार्ग पर स्थित दीनगांव में शुक्रवार शाम दर्दनाक हादसा हो गया। शाम को ग्राम पंचायत दीनगांव निवासी गोकल सिंह पंवार के वाहन का अचानक टायर फटने के कारण वाहन अनियंत्रित हो गया और खाई में जा गिरा। हादसे में चालक समेत तीन लोग घायल हो गए। मिली जानकारी के अनुसार हादसे में चालक गोकुल सिंह पंवार, मदन लाल निवासी दीनगांव और सोहनपाल सिंह रावत निवासी हेरवालगांव गंभीर रूप से घायल हो गए। सड़क मार्ग से वाहन लगभग 800 मी गहरी खाई में जा गिरी। घायल लोगों को स्थानीय लोगों की मदद से सीएचसी चोंड लंबगांव लाया गया। जहां घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने हायर सेन्टर रेफर कर दिया। घायलों की हालत गंभीर बताई जा रही है।
पेटीएम के बाद अब इस बैंक पर आरबीआई का शिकंजा, जानें आपके पैसे का क्या होगा..
देश-विदेश: रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया बैंकों द्वारा मनमानी करने पर समय-समय पर कार्रवाई करता रहता हैं। अब एक बार फिर कार्ड से संबंधित कुछ निर्देशों का पालन नहीं करने पर हांगकांग व शंघाई बैंकिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड के खिलाफ कार्रवाई की गई है। रिजर्व बैंक ने एचएसबीसी बैंक पर 29.6 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है। जुर्माना लगाने के के कारणों के बारे में बताते हुए आरबीआई ने कहा है कि क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड और रुपया मूल्यवर्गित सह-ब्रांडेड प्रीपेड कार्ड ऑपरेशन पर जारी कुछ निर्देशों का पालन नहीं किया है। जिसके चलते संबंधित बैंक के खिलाफ कार्रवाई की गई है।
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया का कहना हैं कि जुर्माना वैधानिक तथा नियामकीय अनुपालन में कमियों के चलते लगाय गया है। इसका मकसद बैंक द्वारा अपने ग्राहकों के साथ किए गए किसी लेनदेन या समझौते की वैधता पर सवाल उठाना नहीं है। इसलिए ग्राहक बैंक से पहले की तरह ही संबंध बनाए रखें। मौद्रिक जुर्माना लगाने से आरबीआई द्वारा बैंक के खिलाफ शुरू की जाने वाली किसी भी अन्य कार्रवाई पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। इसलिए किसी भी ग्राहक को परेशान होने की कोई जरूरत नहीं है। जुर्माना बैंक द्वारा नियमों का पालन न करने पर लगाया गया है। ये नियामक कार्रवाई है, जो नियमों का पालन न करने वाले बैंकों पर होती रहती है।
आरबीआई का कहना हैं कि 31 मार्च 2022 तक बैंक की वित्तीय स्थिति के संदर्भ में वित्तीय मूल्यांकने को लेकर रूटीन निरीक्षण किया गया था। जिसमें पाया गया कि आरबीआई के निर्देशों का पालन नहीं किया गया। उस संबंध में संबंधित पत्राचार के आधार पर बैंक को एक नोटिस जारी किया गया था। लेकिन बैंक ने नोटिस का जवाब अभी तक नहीं दिया है। साथ ही नियमों का पालन करने में बैंक अभी तक भी विफल रहा है। जिसके बाद आरबीआई को बैंक के खिलाफ जुर्माने की कार्यवाही की गई।
प्रभास की फिल्म ने की महाबंपर ओपनिंग, पहले ही दिन ‘सालार’, ‘साहो ‘और ‘आदिपुरुष’ का तोड़ा रिकॉर्ड..
उत्तराखंड: अभिनेता प्रभास, दीपिका पादुकोण, अमिताभ बच्चन, और कमल हासन की फिल्म ‘कल्कि 2898 एडी’ 27 जून को सिनेमाघरों में रिलीज की जा चुकी है। ऐसे में फिल्म ने तीसरी सबसे बड़ी ओपनिंग की है। पैन इंडिया इस फिल्म को पांच भाषाओं तमिल, हिंदी कन्नड़, तेलुगु और मलयालम में रिलीज किया गया। इस फिल्म ने पहले दिन देशभर में करीब 95 करोड़ की ओपनिंग की। तो वहीं फिल्म की अनुमानित कमाई 115 करोड़ (Kalki 2898 AD Collection Day 1) के आस-पास है। तो वहीं दुनिया भर में फिल्म ने 180 करोड़(Kalki 2898 AD Worldwide Collection Day 1) का कारोबार किया है।खबरों की माने तो शुरुआती आकड़ों की माने तो फिल्म Kalki 2898 AD ने पहले दिन भारत मे 115 करोड़ की कमाई की है। तो वहीं ओवरसिज फिल्म ने 65 करोड़ का कलेक्शन किया है। फिल्म ने पहले दिन टोटल 180 करोड़ की कमाई कर अपने नाम रिकॉर्ड दर्ज कर लिया है।
फिल्म कल्कि 2898 एडी ने ‘केजीएफ 2’, ‘लियो’, ‘सालार’, ‘जवान’ आदि फिल्मों को पहले दिन कमाई के मामले मे पीछे छोड़ दिया है। जहां ‘केजीएफ 2’ ने 159 करोड़ से ओपनिंग की थी। तो वहीं पहले दिन सालार ने 158 करोड़, लियो ने 142.75 करोड़ और जवान ने 129 करोड़ की कमाई की थी। ऐसे में Kalki 2898 AD तीसरी सबसे बड़ी ओपनिंग करने वाली फिल्म बन गई। बता दें कि इस लिस्ट में 223 करोड़ की ओपनिंग के साथ RRR सबसे ऊपर है। तो वहीं इसके बाद दूसरे नंबर पर 217 करोड़ की ओपनिंग के साथ ‘बाहुबली 2’ है।
UKSSSC ने नकलची अभ्यर्थियों पर की सख्ती, नियमावली तैयार..
उत्तराखंड: भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक प्रकरणों से उबरने के बाद अब उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (यूकेएसएसएससी) ने नकलचियों पर और सख्ती कर दी है। वह कानूनी दांव-पेच में आयोग की डिबार होने की कार्रवाई से अदालत में जाकर नहीं बच पाएंगे। इसके लिए आयोग ने नियमावली तैयार की है, जिसके तहत आयोग एक से पांच साल के लिए सीधे तौर पर प्रतिवारित (डिबार) करेगा। आपको बता दे कि आयोग ने आठ भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक प्रकरणों में 249 अभ्यर्थियों को परीक्षाओं से पांच साल के लिए डिबार किया था। इनमें से करीब 65 अभ्यर्थी हाईकोर्ट से स्टे ले आए थे। आयोग ने डिबार की कार्रवाई पुलिस की जांच के आधार पर की थी, लेकिन पुलिस ने ज्यादातर अभ्यर्थियों को सरकारी गवाह बना लिया। इसके चलते यह अभ्यर्थी फिलहाल परीक्षाओं में शामिल हो सकते हैं। लेकिन इन कानूनी दांव-पेच से अब आने वाले समय में अभ्यर्थी डिबार होने बच नहीं पाएंगे।
आयोग के अध्यक्ष जीएस मर्तोलिया का कहना हैं कि आयोग ने एक नियमावली तैयार करके शासन को भेजी है। इसके तहत पांच श्रेणियों में अभ्यर्थियों को दंडित किया जाएगा। इसमें परीक्षा कक्ष में मोबाइल या कैलकुलेटर का इस्तेमाल करने, किसी अन्य के स्थान पर परीक्षा में शामिल होने, ओएमआर शीट की अदला-बदली करके नकल करने, परीक्षा में ओएमआर की डुप्लीकेट कॉपी भी अपने साथ ले जाने और अन्य किसी तरह से नकल करने की श्रेणी शामिल है।
उन्होंने कहा कि इसमें श्रेणीवार आयोग ने एक से पांच साल तक डिबार करने का नियम बनाया है। शासन से मंजूरी मिलने के बाद आयोग आने वाली सभी भर्ती परीक्षाओं में इस नियमावली का लागू कर देगा। इसके लागू होने के बाद बेहद बारीकी से आयोग अभ्यर्थियों को डिबार करेगा।
नकलरोधी कानून से नहीं होगा कोई टकराव..
यूकेएसएसएससी के अध्यक्ष जीएस मर्तोलिया ने कहा कि राज्य में जो नकलरोधी कानून लागू है, वह पुलिस के स्तर से कार्रवाई होने की सूरत में लागू है। इस कानून के तहत अभ्यर्थियों के लिए दंड के अलग प्रावधान हैं। लेकिन आयोग ने अपने स्तर पर कार्रवाई करने के लिए ये नियमावली बनाई है। मामले की गंभीरता के हिसाब से आयोग एफआईआर भी कराएगा।
श्रमिकों के बच्चों को निःशुल्क मिलेगी तकनीकी शिक्षा, श्रम विभाग उठाएगा जिम्मा..
उत्तराखंड: प्रदेश में श्रमिकों के बच्चों को निःशुल्क तकनीकी शिक्षा देने का जिम्मा अब श्रम विभाग उठाएगा। तकनीकी शिक्षा के साथ ही विद्यार्थियों को रहने-खाने की भी निःशुल्क सुविधा दी जाएगी। सीएम पुष्कर सिंह धामी 28 जून को इसकी घोषणा करने वाले हैं। श्रम विभाग के भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड (बीओसीडब्ल्यू) में पंजीकृत श्रमिकों को इसका लाभ दिया जाएगा। हालांकि, तकनीकी शिक्षा का ज्ञान लेने के लिए हर साल प्रदेश में सिर्फ 75 विद्यार्थियों को ही चुना जाएगा। इन विद्यार्थियों का चयन एक कमेटी करेगी।
आइटीआइ या पालीटेक्निक के विभिन्न कोर्सों में रुचि रखने वाले श्रमिकों के बच्चों को निःशुल्क शिक्षा सहायता देने के लिए श्रम विभाग यह पहल करने जा रहा है। इससे पूर्व निर्माण साइटों पर रहने वाले श्रमिकों के बच्चों को बेसिक ज्ञान देने के लिए श्रम विभाग ने डिजिटल लर्निंग बस शुरू की थी, जिसमें 400 से अधिक बच्चों को बस में डिजिटल तकनीक से शिक्षा का ज्ञान दिया गया।
विभाग अब 10वीं व 12वीं पास विद्यार्थियों को विभिन्न तकनीकी कोर्स कराने के लिए उन्हें निश्शुल्क शिक्षा दिलाएगा। विद्यार्थियों को आवासीय छात्रावास के साथ ही भरपेट भोजन भी दिया जाएगा। इसके बाद तकनीकी कोर्स पूरा कर उन्हें कंपनियों में नौकरी के लिए प्लेसमेंट भी दिया जाएगा। तकनीकी कोर्स करने के बाद विद्यार्थी स्वरोजगार भी कर सकते हैं। नौनिहालों को डिजिटल शिक्षा देने के लिए श्रम विभाग ने नैनीताल व देहरादून जिले में डिजिटल लर्निंग बस शुरू की है। अब इसकी तर्ज पर हरिद्वार व ऊधमसिंह नगर जिले में भी लर्निंग बस शुरू की जाएगी, जिसका सीएम पुष्कर सिंह धामी 28 जून को उद्घाटन करेंगे। इसके बाद दोनों जिलों में कंस्ट्रक्शन साइट में कार्य करने वाले श्रमिकों के बच्चों को बस के अंदर बैठाकर डिजिटल शिक्षा दी जाएगी।
