रक्षा मंत्रालय ने भारतीय सेना में महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन (Permanent Commission) प्रदान करने के लिए औपचारिक सरकारी मंजूरी पत्र जारी कर दिया है। इससे महिला अधिकारियों को सेना में बड़ी भूमिकाओं के निर्वहन के लिए रास्ता साफ़ हो गया है।
रक्षा मंत्रालय के मुख्य प्रवक्ता ने ट्वीट कर यह जानकारी दी। अभी तक सेना की जज एवं एडवोकेट जनरल (जेएजी) व आर्मी एजुकेशनल कॉर्प्स (एईसी) शाखा में ही महिला अधिकारीयों को स्थायी कमीशन था। केंद्र सरकार के आ के आदेश के बाद भारतीय सेना के सभी दस वर्गों अर्थात आर्मी एयर डिफेंस (एएडी), सिग्नल्स, इंजीनियर्स, आर्मी ऐवियेशन, इलेक्ट्रोनिक्स एंड मैकेनिकल इंजीनियर्स (ईएमई), आर्मी सर्विस कॉर्प्स (एएससी), आर्मी आर्डनेंस कॉर्प्स (एओसी) और इंटेलीजेंट कॉर्प्स में शॉर्ट सर्विस कमीशंड (एसएससी) महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन की स्वीकृति मिल गयी है।
आदेश की प्रत्याशा में, सेना मुख्यालय ने प्रभावित महिला अधिकारियों के लिए स्थायी आयोग चयन बोर्ड के संचालन के लिए तैयारी संबंधी कार्रवाइयों शुरू कर दी थीं। मंत्रालय के आदेश के बाद जैसे ही सभी प्रभावित एसएससी महिला अधिकारी अपने विकल्प का उपयोग करेंगी और वांछनीय दस्तावेजीकरण को पूर्ण करेंगी, चयन बोर्ड कार्रवाई शुरू कर देगा।
अभी तक आर्मी में 14 साल तक शॉर्ट सर्विस कमीशन (एसएससी) में सेवा दे चुके पुरुष अधिकारीयों को ही स्थायी कमीशन का विकल्प मिल रहा था। महिला अधिकारी इससे वंचित थीं। स्थायी कमीशन से महिलाएं 20 साल तक काम कर पाएंगी। शॉर्ट सर्विस कमिशन के तहत अधिकारियों को चौदह साल में रिटायर कर दिया जाता है और उन्हें पेंशन भी नहीं मिलती है। ऐसे में रिटायरमेंट के बाद महिला अधिकारियों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो जाता। इसके अलावा भी कई ऐसी सुविधाएं हैं जो इन्हें नहीं मिलती है। वायुसेना और नौसेना में महिला अफसरों को पहले से ही स्थायी कमीशन मिल रहा है।
अलग जो भीड़ से हट कर जगह अपनी बनाते हैं
सितारों की तरह से वो जहां में जगमगाते हैं।
सफ़र की मुश्किलों का दौर होता है बड़ा प्यारा
मगर क़ायर सदा आधे सफ़र से लौट जाते हैं।
अगर आ जाएं ऐसे लोग तो तहज़ीब से मिलना
हथेली पर कहाँ सब लोग ही सरसों उगाते हैं।
जिन्हें फूलों के जैसे रखते हैं हम हर मुसीबत में
हमारी राह में अक्सर वही काँटे बिछाते हैं।
न उठ जाए कहीं इस कशमकश में राज़ से पर्दा
कभी वो आज़माते हैं कभी हम आज़माते हैं।
- बलजीत सिंह बेनाम
सम्प्रति:संगीत अध्यापक
मुशायरों व सभा संगोष्ठियों में काव्य पाठ
विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित
विभिन्न मंचों द्वारा सम्मानित
सम्पर्क सूत्र: 103/19 पुरानी कचहरी कॉलोनी, हाँसी
ज़िला हिसार(हरियाणा)
Uttarakhand Chief Minister Trivendra Singh Rawat invites Google to invest in state. Chief Minister Trivendra urged Google CEO Sundar Pichai to invest in the state, saying there is a great scope for investments in the information technology (IT) sector in small towns.
In a letter to Pichai, Rawat requested him to include Uttarakhand in Google’s India investment plan and said need is being felt in the time of the COVID-19 pandemic to work on an alternative development model.
Rawat said there is a great scope for investments in the IT sector in small towns, and also assured the firm of all co-operation from the state government in the venture, an official release said.
Rawat asked Chief Secretary Utpal Kumar Singh and Additional Chief Secretary Manisha Panwar to coordinate with the management of Google regarding the matter.
कोविड-19 महामारी ने फेस मास्क के उपयोग को दैनिक जीवन का अनिवार्य हिस्सा बना दिया है। लोग मास्क का उपयोग कर रहे हैं, लेकिन इसके कारण उन्हें कुछ असुविधाओं का भी सामना करना पड़ रहा है। जैसे छोड़ी गई कार्बन डाइऑक्साइड (सीओ 2) को फिर से सांस के रूप में वापस लेना। विषेशज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक ऐसा होने से मानव दक्षता कम हो सकती है और यह मस्तिष्क-हाइपोक्सिया का भी कारण बन सकता है। इसके अलावा मास्क के उपयोग के दौरान साँस की नमी पैदा होती है, जो चश्मे को धूमिल करती है। मास्क के अंदर पसीने और गर्म वातावरण जैसे सुरक्षा मुद्दे भी चिंतित करने वाले मुद्दे हैं। मास्क के उपयोग से व्यक्ति की बातचीत में अस्पष्टता आदि की समस्या पैदा हो रही है।
भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के तहत एक स्वायत्त अनुसंधान संस्थान एसएन बोस नेशनल सेंटर फॉर बेसिक साइंसेज (SNBNCBS), कोलकाता के निदेशक प्रोफेसर समित कुमार रे के मार्गदर्शन में प्रोफेसर समीर के पाल और उनकी टीम ने स्वच्छ व आराम से साँस लेने के लिए एक सक्रिय रेस्पिरेटर मास्क विकसित किया है, जिसमें सांस छोड़ने के लिए वाल्व और सूक्ष्म कण नियंत्रण के लिए फ़िल्टर लगा हुआ है।
संस्थान, डीएसटी द्वारा वित्त पोषित तकनीकी अनुसंधान केंद्रों (टीआरसी) में से एक को होस्ट भी कर रहा है। सक्रिय रेस्पिरेटर मास्क कार्बन डाइऑक्साइड को पुनः सांस लेने, उत्सर्जित नमी तथा पसीने और गर्म वातावरण की समस्या से छुटकारा दिलाने में सक्षम है। यह फेस मास्क व्यक्ति की बातचीत की स्पष्टता में भी सुधार करता है और पहनने वाले को वायुजनित दूषित पदार्थों के संपर्क से बचाते हुए आरामदायक, स्वच्छ सांस लेने की सुविधा देता है।
इसके अलावा, संस्थान द्वारा एक एंटी माइक्रोबॉयल लेयर के साथ नैनो-सेनीटाइजर भी विकसित किया गया है। यह नैनो- सेनीटाइजर सामान्य सेनीटाइजर के उपयोग से होने वाली समस्याओं से छुटकारा दिलाता है। सामान्य सेनीटाइजर के लगातार उपयोग के कारण त्वचा के निर्जलीकरण की समस्या होती है। संस्थान द्वारा विकसित यह सेनीटाइजर लंबी अवधि तक उपयोग के बावजूद आरामदायक तरीके से हाथ को स्वच्छ रखता है।
विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय, भारत सरकार के डीएसआईआर के उद्यम, राष्ट्रीय अनुसंधान विकास निगम (एन आर डी सी) ने इन दोनों तकनीकों को कोलकाता स्थित कंपनी, मेसर्स पॉलमेक इन्फ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड को हस्तांतरित किया है। दोनों उत्पादों के पहले बैच को लॉन्च करने का लक्ष्य 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस पर रखा गया है। हालांकि अभी इनकी कीमतों के बारे में खुलासा नहीं किया गया है।
मुख्तार अब्बास नकवी
केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री
वैसे तो अगस्त माह इतिहास में महत्वपूर्ण घटनाओं के पन्नों से भरपूर है। 8 अगस्त भारत छोडो आंदोलन, 15 अगस्त भारतीय स्वतंत्रता दिवस, 19 अगस्त विश्व मानवीय दिवस, 20 अगस्त सद्भावना दिवस, 5 अगस्त को 370 खत्म होना, जैसे इतिहास के सुनहरे लफ्जों में लिखे जाने वाले दिन हैं।
वहीं 1 अगस्त, मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक की कुप्रथा, कुरीति से मुक्त करने का दिन, भारत के इतिहास में मुस्लिम महिला अधिकार दिवस के रूप में दर्ज हो चुका है। तीन तलाक या तिलाके बिद्दत जो ना संवैधानिक तौर से ठीक था, ना इस्लाम के नुक्तेनजर से जायज़ था। फिर भी हमारे देश में मुस्लिम महिलाओं के उत्पीड़न से भरपूर गैर-क़ानूनी, असंवैधानिक, गैर-इस्लामी कुप्रथा तीन तलाक वोट बैंक के सौदागरों के सियासी संरक्षण में फलता- फूलता रहा।
1 अगस्त 2019 भारतीय संसद के इतिहास का वह दिन है जिस दिन कांग्रेस, कम्युनिस्ट पार्टी, सपा, बसपा, तृणमूल कांग्रेस सहित तमाम तथाकथित सेक्युलरिज़्म के सियासी सूरमाओं के विरोध के बावजूद तीन तलाक कुप्रथा को ख़त्म करने के विधेयक को कानून बनाया गया। देश की आधी आबादी और मुस्लिम महिलाओं के लिए यह दिन संवैधानिक-मौलिक-लोकतांत्रिक एवं समानता के अधिकारों का दिन बन गया। यह दिन भारतीय लोकतंत्र और संसदीय इतिहास के स्वर्णिम पन्नों का हिस्सा रहेगा।
तीन तलाक कुप्रथा के खिलाफ कानून तो 1986 में भी बन सकता था जब शाहबानों केस में सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक पर बड़ा फैसला लिया था। उस समय लोकसभा में अकेले कांग्रेस सदस्यों की संख्या 545 में से 400 से ज्यादा और राज्यसभा में 245 में से 159 सीटें थी। मगर कांग्रेस की राजीव गाँधी सरकार ने 5 मई 1986 को इस संख्या बल का इस्तेमाल मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों को कुचलने और तीन तलाक क्रूरता-कुप्रथा को ताकत देने के लिए सुप्रीम कोर्ट के फैसले को निष्प्रभावी बनाने के लिए संसद में संवैधानिक अधिकारों का इस्तेमाल किया।
कांग्रेस ने कुछ दकियानूसी कट्टरपंथियों के कुतर्कों और दबाव के आगे घुटने टेक कर मुस्लिम महिलाओं को उनके संवैधानिक अधिकार से वंचित करने का आपराधिक पाप किया था। कांग्रेस के लम्हों की खता मुस्लिम महिलाओं के लिए दशकों की सजा बन गई। जहाँ कांग्रेस ने सियासी वोटों के उधार की चिंता की थी, वहीँ मोदी सरकार ने सामाजिक सुधार की चिंता की।
भारत संविधान से चलता है। किसी शरीयत या धार्मिक कानून या व्यवस्था से नहीं। इससे पहले भी देश में सती प्रथा, बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीतियों को खत्म करने के लिए भी कानून बनाये गए। तीन तलाक कानून का किसी मजहब, किसी धर्म से कोई लेना देना नहीं था। शुद्ध रूप से यह कानून एक कुप्रथा, क्रूरता, सामाजिक बुराई और लैंगिक असमानता को खत्म करने के लिए पारित किया गया। यह मुस्लिम महिलाओं के समानता के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा से जुड़ा विषय था। मौखिक रुप से तीन बार तलाक़ कह कर तलाक देना। पत्र, फ़ोन, यहाँ तक की मैसेज, व्हाट्सऐप के जरिये तलाक़ दिए जाने के मामले सामने आने लगे थे। जो कि किसी भी संवेदनशील देश-समावेशी सरकार के लिए अस्वीकार्य था।

दुनिया के कई प्रमुख इस्लामी देशों ने बहुत पहले ही तीन तलाक को गैर-क़ानूनी और गैर-इस्लामी घोषित कर ख़त्म कर दिया था। मिस्र दुनिया का पहला इस्लामी देश है जिसने 1929 में तीन तलाक को ख़त्म किया, गैर क़ानूनी एवं दंडनीय अपराध बनाया। 1929 में सूडान ने तीन तलाक पर प्रतिबन्ध लगाया। 1956 में पाकिस्तान ने, 1972 बांग्लादेश, 1959 में इराक, सीरिया ने 1953 में, मलेशिया ने 1969 में इस पर रोक लगाई। इसके अलावा साइप्रस, जॉर्डन, अल्जीरिया, ईरान, ब्रूनेई, मोरक्को, क़तर, यूएई जैसे इस्लामी देशों ने तीन तलाक ख़त्म किया और कड़े क़ानूनी प्रावधान बनाये। लेकिन भारत को मुस्लिम महिलाओं को इस कुप्रथा के अमानवीय जुल्म से आजादी दिलाने में लगभग 70 साल लग गए।
नरेंद्र मोदी की सरकार ने तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को प्रभावी बनाने के लिए कानून बनाया। सुप्रीम कोर्ट ने 18 मई 2017 को तीन तलाक को असंवैधानिक करार दिया था। जहाँ कांग्रेस ने अपने संख्या बल का इस्तेमाल मुस्लिम महिलाओं को उनके अधिकारों से वंचित रखने के लिए किया था, वहीँ मोदी सरकार ने मुस्लिम महिलाओं के सामाजिक,आर्थिक,मौलिक,लोकतान्त्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए फैसला किया।
आज एक वर्ष हो गया है। इस दौरान तीन तलाक या तिलाके बिद्दत की घटनांओं में 82 प्रतिशत से ज्यादा की कमीं आई है। जहाँ ऐसी घटना हुई भी है वहां कानून ने अपना काम किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार हर वर्ग के सशक्तिकरण और सामाजिक सुधार को समर्पित है। कुछ लोगों का कुतर्क होता है कि मोदी सरकार को सिर्फ मुस्लिम महिलाओं के तलाक की ही चिंता क्यों है? उनके आर्थिक, सामाजिक, शैक्षिक सशक्तिकरण के लिए कुछ क्यों नहीं करते ? तो उनकी जानकारी के लिए बताना चाहता हूँ कि इन पिछले 6 वर्षों में मोदी सरकार के समावेशी विकास-सर्वस्पर्शी सशक्तिकरण के प्रयासों का लाभ समाज के सभी वर्गों के साथ मुस्लिम महिलाओं को भी भरपूर हुआ है।
पिछले छह वर्षो में 3 करोड़, 87 लाख अल्पसंख्यक छात्र-छात्राओं को स्कॉलरशिप दी गई, जिसमें 60 प्रतिशत लड़कियाँ हैं। पिछले 6 वर्षो में हुनर हाट के माध्यम से लाखों दस्तकारों-शिल्पकारों को रोजगार-रोजगार के मौके मिलें, जिनमे बड़ी संख्या में मुस्लिम महिलाएं शामिल हैं। सीखों और कमाओं , गरीब नवाज़ स्वरोजगार योजना, उस्ताद, नई मंजिल, नई रौशनी आदि रोजगारपरक कौशल विकास योजनाओं के माध्यम से पिछले 6 वर्षों में 10 लाख से ज्यादा अल्पसंख्यकों को रोजगार और रोजगार के मौके उपलब्ध कराये गए हैं, जिनमे बड़ी संख्या में मुस्लिम महिलाएं शामिल हैं। इसके अतिरिक्त मोदी सरकार के अंतरगर्त 2018 में शुरू की गई बिना मेहरम (पुरुष रिश्तेदार) के महिलाओं को हज पर जाने की प्रक्रिया के तहत अब तक बिना मेहरम के हज पर जाने वाली महिलाओं की संख्या 3040 हो चुकी है। इस वर्ष भी 2300 से अधिक मुस्लिम महिलाओं ने बिना मेहरम के हज पर जाने के लिए आवेदन किया था। इन महिलाओं को हज 2021 में इसी आवेदन के आधार पर हज यात्रा पर भेजा जायेगा। साथ ही अगले वर्ष भी जो महिलाएं बिना मेहरम हज यात्रा हेतु नया आवेदन करेंगी उन सभी को भी हज यात्रा पर भेजा जायेगा।
मोदी सरकार की अन्य सामाजिक सशक्तिकरण योजनाओं का लाभ मुस्लिम महिलाओं को भरपूर हुआ है। यही वजह है कि आज विपक्ष भी यह नहीं कह पाता कि सामाजिक, आर्थिक, शैक्षिक सशक्तिकरण के लिए किये जा रहे कामों में किसी भी वर्ग के साथ भेद-भाव हुआ है, मोदी सरकार के सम्मान के साथ सशक्तिकरण, बिना तुष्टिकरण विकास का नतीजा है कि 2 करोड़ गरीबों को घर दिया तो उसमे 31 प्रतिशत अल्पसंख्यक विशेषकर मुस्लिम समुदाय हैं। 22 करोड़ किसानों को किसान सम्मान निधि के तहत लाभ दिया, तो उसमे भी 33 प्रतिशत से ज्यादा अल्पसंख्यक समुदाय के गरीब किसान हैं। 8 करोड़ से ज्यादा महिलाओं को उज्ज्वला योजना के तहत निशुल्क गैस कनेक्शन दिया तो उसमे 37 प्रतिशत अल्पसंख्यक समुदाय के गरीब परिवार लाभान्वित हुए। 24 करोड़ लोगों को मुद्रा योजना के तहत व्यवसाय सहित अन्य आर्थिक गतिविधियों के लिए आसान ऋण दिए गए हैं, जिनमे 36 प्रतिशत से ज्यादा अल्पसंख्यकों को लाभ हुआ। दशकों से अँधेरे में डूबे हजारों गांवों में बिजली पहुंचाई तो इसका बड़ा लाभ अल्पसंख्यकों को हुआ। इन सभी योजनाओं का लाभ बड़े पैमाने पर मुस्लिम महिलाओं को भी हुआ है और वो भी तरक्की के सफल सफर की हमसफ़र बनी हैं।
(PIB)
ग्राहकों के साथ आए दिन होने वाले धोखाधड़ी को रोकने के लिए मोदी सरकार ने सोमवार 20 जुलाई से नया उपभोक्ता संरक्षण कानून लागू कर दिया है। उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम-2019 लागू होने के बाद उपभोक्ताओं को व्यापक अधिकार मिलेंगे। यह उपभोक्ता संरक्षण कानून-1986 का स्थान लेगा। नए कानून के तहत उपभोक्ता किसी भी उपभोक्ता अदालत में मामला दर्ज करा सकेगा। भ्रामक विज्ञापनों पर जुर्माना एवं जेल जैसे प्रावधान जोड़े गए हैं। पहली बार ऑनलाइन और टेलीशॉपिंग कंपनियों को भी कानून के दायरे में लाया गया है।
केंद्र सरकार ने उपभोक्ता संरक्षण बिल-2019 को संसद के उच्च सदन में 8 जुलाई 2019 को पेश किया था। यह 30 जुलाई, 2019 को लोकसभा में पास हो गया था और उसके बाद 6 अगस्त, 2019 को राज्यसभा ने इसे पारित कर दिया था। इस बिल पर पिछले साल 9 अगस्त को राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने हस्ताक्षर किए थे। पहले इस कानून को जनवरी में लागू किया जाना था, जिसे बाद में मार्च कर दिया गया। मार्च में कोरोना के प्रकोप और लॉकडाउन के कारण इसे लागू नहीं किया जा सका था। अब 20 जुलाई से सरकार ने इसे लागू कर दिया है। इसके लागू हो जाने के बाद उपभोक्ता की शिकायत पर तुरंत कार्रवाई शुरू हो जाएगी। खासकर अब ऑनलाइन कारोबार में उपभोक्ताओं के हितों की अनदेखी भी कंपनियों पर भारी पड़ सकती है।
इस अधिनियम के तहत प्रत्येक ई-कॉमर्स इकाई को अपने मूल देश समेत रिटर्न, रिफंड, एक्सचेंज, वारंटी और गांरटी, डिलीवरी एवं शिपमेंट, शिकायत निवारण तंत्र, भुगतान के तरीके, भुगतान के तरीकों की सुरक्षा, शुल्क वापसी संबंधित विकल्प आदि के बारे में सूचना देना अनिवार्य है। इससे उपभोक्ता को अपने प्लेटफॉर्म पर खरीददारी करने से पहले उपयुक्त निर्णय लेने में सहूलियत होगी। अधिनियम के तहत ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स को 48 घंटों के भीतर उपभोक्ता को शिकायत प्राप्ति की सूचना देनी होगी और शिकायत प्राप्ति की तारीख से एक महीने के भीतर उसका निपटारा करना होगा।
अधिनियम में एक सक्षम न्यायालय द्वारा मिलावटी अथवा नकली सामानों के निर्माण या बिक्री के लिए सजा का प्रावधान है। पहली बार दोषी पाए जाने की स्थिति में संबंधित अदालत दो साल तक की अवधि के लिए व्यक्ति को जारी किए गए किसी भी लाइसेंस को निलंबित कर सकती है। दूसरी बार या उसके बाद दोषी पाए जाने पर उस लाइसेंस को रद्द कर सकती है। अब उपभोक्ता के साथ किसी प्रकार की धोखाधड़ी करना किसी भी उत्पादक व सेवा कम्पनी के लिए महंगा साबित होगा। नए काननू में उपभोक्ता को ज्यादा अधिकार दिए गए हैं। नए अधिनियम से भ्रामक विज्ञापनों पर महत्वपूर्ण असर पड़ेगा, जो लोगों को भ्रमित व गुमराह कर कारोबार करते थे। किसी उत्पाद के संबंध में गलत और भ्रामक विज्ञापन देने पर जेल की सजा और जुर्माने का प्रावधान है। इस कानून के लागू होने के बाद विभिन्न विज्ञापनों में काम करने वाली सेलिब्रेटी को सोच-समझ कर ब्रांड अथवा उत्पाद का प्रचार करना पड़ेगा। अन्यथा वो भी कानून के फंदे में फंस सकते हैं।
इसी प्रकार, खाद्य पदार्थों में मिलावट करने, हानिकारक खाद्य पदार्थ बनाने और बेचने पर भी जेल की सजा व जुर्माने का प्रावधान है। नए उपभोक्ता संरक्षण काननू के प्रावधानों के मुताबिक अब कंज्यूमर फोरम यानी उपभोक्ता अदालत में जनहित याचिका दायर की जा सकती है। उपभोक्ता देश के किसी भी उपभोक्ता अदालत में अपनी शिकायत दर्ज करवा सकते हैं। इसके अलावा, पक्षों के बीच आपसी सहमति से मध्यस्थता का विकल्प चुनने और मध्यस्थता से विवादों के निपटारे के लिए उपभोक्ता मध्यस्थता सेल का गठन करने का भी प्रावधान है।
उपभोक्ता संरक्षण कानून देता है ये 6 अधिकार
1- सुरक्षा का अधिकार- इसके तहत ग्राहक को किसी गुड्स या सर्विस की मार्केटिंग से जीवन या प्रॉपर्टी के नुकसान से बचाया जाता है।
2- सूचना का अधिकार- ग्राहक को पूरा अधिकार है कि उसे प्रोडक्ट की क्वालिटी, उसकी मात्रा, शुद्धता, कीमत आदि के बारे में सही जानकारी दी जाए।
3- छांटने का अधिकार- इसके तहत ग्राहक को गुड्स और सर्विसेस की कई वैरायटी उपलब्ध कराई जाती हैं, ताकि वह अपने अनुकूल गुड्स या सर्विस को छांट सके।
4- सुने जाने का अधिकार- ग्राहक को सुने जाने का पूरा अधिकार है। उसे किसी तरह की दिक्कत होने पर फोरम में उसकी शिकायत को सुना जाएगा।
5- किसी भी गलत प्रैक्टिस के खिलाफ शिकायत करने का भी ग्राहक को अधिकार है, ताकि उसका शोषण ना हो।
6- कंज्यूमर एजुकेशन का अधिकार – यानी एक ग्राहक अपनी पूरी जिंदगी एक पूरी जानकारी रखने वाला ग्राहक रहेगा, जिससे वह शोषण से बचा रहेगा।
मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं में शुमार ऋषिकेश- कर्णप्रयाग रेल लाइन निर्माण कार्यों की आज मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने समीक्षा की और निर्माण कार्य में तेजी के निर्देश दिए। राजधानी देहरादून में अपने आवास पर आयोजित बैठक में मुख्यमंत्री ने रेल विकास निगम लि. के अधिकारियों के साथ प्रस्तावित डोईवाला-उत्तरकाशी-बड़कोड़ रेलवे लाइन के सर्वे की प्रगति की भी जानकारी ली।
गौरतलब है कि लगभग 16 हज़ार करोड़ की लागत से तैयार हो रही ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं में शामिल है। यह परियोजना उत्तराखंड के पहाड़ों में रेल यात्रा के दशकों पुराने सपने को साकार करेगी। परियोजना पर तेजी के साथ निर्माण कार्य चल रहा है। परियोजना के पूरा होने पर स्थानीय लोगों के अलावा बदरीनाथ, केदारनाथ, हेमकुंड साहिब आदि धामों की यात्रा करने वाले तीर्थयात्रियों और पर्यटकों को सहूलियत मिलेगी। इस नए रेल मार्ग में 12 स्टेशन बनाये जा रहे हैं। ऋषिकेश में आधुनिक व भव्य रेलवे स्टेशन का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। विगत दिवस मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र ने अपने ट्वीटर हैंडल पर इस रेलवे स्टेशन कुछ फोटो ट्वीट किए, जो वायरल हुए।
125.20 किमी लंबी इस रेल लाइन में ट्रेन 105.47 किमी की दूरी 17 सुरंगों के जरिए तय करेगी। एक सुरंग का निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है, जबकि पांच में निर्माण कार्य प्रगति पर है। तीन प्रमुख रेलवे ब्रिज पर कार्य प्रारम्भ हो चुका है। जिन 03 ब्रिज पर कार्य शुरू किया गया है, उनमें चन्द्रभागा नदी पर 300 मीटर का ब्रिज, लछमोली में अलकनन्दा नदी पर 275 मीटर का ब्रिज एवं श्रीनगर में अलकनन्दा पर 450 मीटर का ब्रिज शामिल है। शेष पुलों का कार्य टनल निर्माण के साथ ही किया जायेगा। श्रीनगर, गौचर एवं सिवाई (कालेश्वर)में एप्रोच रोड ब्रिजेज का कार्य प्रगति पर है।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि रेलवे लाइन निर्माण कार्य में और तेजी लाई जाय। किसी भी समस्या के समाधान के लिए राज्य सरकार की ओर से पूरा सहयोग दिया जायेगा। कार्यों में गुणवत्ता, गति व पारदर्शिता का विशेष ध्यान रखा जाय। उन्होंने कहा कि इस रेलवे लाईन का निर्माण कार्य पूर्ण होने के बाद उत्तराखण्ड की जनता और राज्य में आने वाले श्रद्धालुओं व पर्यटकों को तमाम सुविधाएं मिलेंगी। उन्होंने कहा कि ऋषिकेश रेलवे स्टेशन पर एक गुलाब की वाटिका विकसित की जाय। जिसमें विभिन्न प्रजातियों के गुलाब हों।
इस अवसर पर रेल विकास निगम लि. द्वारा डोईवाला-उत्तरकाशी-बड़कोड़ रेलवे लाईन पर भी प्रस्तुतीकरण दिया गया। बैठक में जानकारी दी गई की इस रेल लाईन का सर्वे किया जा चुका है। सर्वे का कार्य मार्च 2018 से किया जा रहा था। इस प्रोजक्ट में कुल 24 हजार करोड़ रूपये की लागत का अनुमान है। उत्तरकाशी से डोईवाला तक कुल 10 स्टेशन के लिए सर्वे किया गया है। इस रेल लाईन के लिए 24 टनल एवं 19 ब्रिज के लिये सर्वे किया गया है। यह रेल लाईन लगभग 122 किमी की होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह रेल लाईन उत्तराखण्ड में पर्यटन को बढ़ावा देने एवं कृषि बागवानी एवं स्थानीय उत्पादों की मार्केटिंग के लिए भी मददगार साबित होगी।
इस अवसर पर रेल विकास निगम लि. के चीफ प्रोजक्ट मैनेजर हिमांशु बडोनी, एडिशनल जनरल मैनेजर विजय डंगवाल, प्रोजक्ट डायरेक्टर सुरेन्द्र कुमार, विकास बहुगुणा आदि उपस्थित थे।
देश में कोविड-19 से मृत्यु दर में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। यह आज घटकर 2.46% रह गई है। भारत दुनिया में सबसे कम मृत्यु दर वाले देशों में से एक है।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार देखभाल प्रोटोकॉल के मानक को अच्छी तरह लागू करते हुए कोविड संक्रमण के मध्यम और गंभीर मरीजों के प्रभावी नैदानिक उपचार से कोविड मरीजों को बड़ी संख्या में स्वस्थ होना सुनिश्चित किया जा सका है। केंद्र सरकार सामूहिक रूप से कोविड-19 का मुकाबला करने में राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों की सरकारों की मदद कर रही है। ऐसी ही एक पहल एम्स, नई दिल्ली का ई-आईसीयू कार्यक्रम है। एम्स ने मृत्यु दर को कम करने के उद्देश्य से 11 राज्यों के 43 बड़े अस्पतालों को आईसीयू रोगियों के नैदानिक प्रबंधन में विशेषज्ञों के अनुभवों को साझा करने और तकनीकी सलाह के माध्यम से मदद की है। इससे गंभीर मरीजों की देखभाल और उपचार में उनकी क्षमता में काफी वृद्धि हुई है।

अब तक 7 लाख से अधिक मरीजों को कोविड-19 के संक्रमण से ठीक कर दिया गया है और उन्हें अस्पताल से छुट्टी देकर घर भेज दिया गया है। इसके साथ ही कोविड-19 के सक्रिय रोगियोंकी संख्या और इस बीमारी से ठीक होने वाले लोगों की संख्या (7,00,086)के बीच का अंतर बढ़कर 3,09,627 हो गया है। पिछले 24 घंटों में कोविड-19 के संक्रमण से 22,664 मरीज स्वस्थ हुए हैं। इसके साथ ही इस बीमारी से ठीक होने की दर बढ़कर अब 62.62% है। अस्पतालों और घरों में आईसोलेशन में रहकर इलाज करा रहे सभी 3,90,459 मरीजों पर चिकित्सकीय ध्यान दिया जा रहा है।
केंद्र सरकार द्वारा कोविड-19 से संबंधित तकनीकी मुद्दों, दिशा-निर्देशों एवं परामर्शों पर सभी प्रामाणिक और अद्यतन जानकारी के लिए कृपया नियमित रूप से
मंत्रालय की वेबसाइट पर दी जा रही है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोविड-19 से संबंधित तकनीकी सवाल के लिए technicalquery.covid19@gov.in और अन्य सवालों के लिए ncov2019@gov.in मेल आईडी जारी की है। इसके अलावा कोविड-19 को लेकर यदि कोई सवाल हो तो स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के हेल्पलाइन नंबर: + 91-11-23978046 या 1075 (टोल-फ्री) पर कॉल कर प्राप्त की जा सकती है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की विभिन्न मुद्दों पर संवेदनशीलता व सक्रियता समय-समय पर प्रदर्शित होती रहती है। खास कर सेना से जुड़े मामलों में उनकी तत्परता विपक्षियों को भी हैरान कर डालती है। सेना के मान-सम्मान की बात हो या सैनिकों का मनोबल बढ़ाने का मसला, मोदी हर मौके पर मोर्चे पर नजर आते हैं।
शनिवार को देहरादून में करीब डेढ़ दर्जन सैनिकों के कोरोना पॉजिटिव पाए जाने की खबर मिली, तो रविवार को प्रधानमंत्री मोदी ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से फोन पर सैनिकों के बारे में जानकारी ली और उनका हाल जाना। प्रधानमंत्री ने कोरोना संक्रमित हुए सैनिकों के स्वास्थ्य लाभ की कामना की और कहा कि राज्य सरकार व सेना के अधिकारी आपसी समन्वय बनाए रखते हुए सैनिकों के समुचित इलाज की व्यवस्था सुनिश्चित करें।
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को जानकारी दी कि प्रदेश सरकार सेना से लगातार सम्पर्क में है। सेना को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। मुख्यमंत्री ने राज्य में कोविड-19 की अद्यतन स्थिति की जानकारी देते हुए कहा कि पिछले दिनों कोरोना पाजिटिव मामलों में वृद्धि हुई है। मगर स्थिति नियंत्रण में है। राज्य में सर्विलांस व सेम्पलिंग में काफी बढ़ोतरी की गई है। आईसीयू, वेंटिलेटर व आक्सीजन सपोर्ट की सुविधाएं भी लगातार बढ़ाई जा रही हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने बरसात को देखते हुए राज्य में आपदा प्रबंधन पर भी विशेष ध्यान देने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार से आवश्यकतानुसार हर सहयोग दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि कोविड-19 और आपदा प्रबंधन की निरंतर समीक्षा की जा रही है।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कोरोना महामारी के मद्देनज़र आगामी 20 जुलाई को पड़ने वाली सोमवती अमावस्या पर श्रद्धालुओं से मां गंगा में स्नान करने के लिए हरिद्वार जाने के बजाय घर पर ही मां गंगा का श्रद्धापूर्वक स्मरण करने की अपील की है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि सोमवती अमावस्या के दिन तमाम हिन्दुओं की इच्छा होती है कि हरिद्वार पहुंच कर मां गंगा में स्नान करें। मगर कोरोना महामारी के कारण उत्पन्न परिस्थितियां इसके लिए अनुमति नहीं दे रही हैं। परिस्थितियां सामान्य होंगी तो फिर हम पूरी सादगी, श्रद्धा व विश्वास के साथ हरिद्वार में मां गंगा में स्नान कर सकेंगे।
उन्होंने कहा कि हम सब जानते हैं कि देश में पिछले चार-पांच महीनों से कोरोना महामारी का प्रकोप चल रहा है। ऐसे में आप सबके सहयोग से इस महामारी को रोकने का प्रयास किया जा रहा है और उसके परिणाम भी सामने देखने को मिल रहे हैं। भारत एक त्योहारों का देश है। हमारी धार्मिक मान्यताएं हैं और तमाम ऐसे सामाजिक कार्य इस दौरान होते रहे हैं। मगर उसका स्वरूप परिस्थितियों के अनुसार हमने परिवर्तित किया है। उन्होंने कहा कि मेरी आप सभी से विनम्र प्रार्थना है कि आप सरकार के साथ मिल कर के इस महामारी से लड़ने के लिए संकल्प लें। कोरोना को भगाना है और देश को जिताना है। उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की कि वे सोमवती अमावस्या के मौके पर अपने घरों पर मां गंगा का पूरे श्रद्धापुर्वक स्मरण करें और पवित्र भावों से स्नान करें।
मुख्यमंत्री ने वीडियो कान्फ्रेसिंग से प्रदेश में कोविड-19 की समीक्षा की
उधर, आज सचिवालय में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कोविड-19 के संक्रमण की रोकथाम तथा बचाव हेतु स्वास्थ्य विभाग और जिलाधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिये कि कोविड-19 के फ्रंटलाईन कार्मिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। गम्भीर कोरोना संक्रमित मामलों पर जिलाधिकारी खुद नजर रखें। समय पर रेस्पोंस सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है। कोरोना संक्रमित व्यक्ति को तत्काल इलाज उपलब्घ करवाना, जल्द से जल्द उसके सम्पर्क में आए लोगों की पहचान कर उनकी टेस्टिंग कराना सुनिश्चित किया जाए। इसमें किसी प्रकार की देरी नहीं की जा सकती है। मुख्यमंत्री ने शनिवार को
जनप्रतिनिधियों, सामाजिक और व्यापारिक संगठनों से संवाद रखें
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले कुछ दिनों में कोविड के पाॅजिटिव मामलों में हुई वृद्धि को देखते हुए चार जिलों में शनिवार व रविवार को लाॅकडाउन लागू किया गया है। जरुरी हुवा तो आगे भी इस पर विचार किया जाएगा। पूर्व में देहरादून में दो दिन के लाॅकडाउन के अच्छे परिणाम मिले थे। इसे देखकर अन्य राज्यों ने भी अपने यहां लागू किया था। कोविड-19 में आम जन का सहयोग बहुत जरूरी है। इसके लिए जिलाधिकारी जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और व्यापारिक संगठनों से लगातार सम्पर्क बनाए रखें। लोगों से संवाद बना रहना चाहिए।
आक्सीजन सपोर्ट पर विशेष ध्यान दिया जाए
मुख्यमंत्री ने कहा कि हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर पहले से काफी मजबूत हुआ है। आई.सी.यू., वेंटिलेटर, आक्सीजन सपोर्ट, टेस्टिंग मशीन व लेब आदि सुविधाओं में बढ़ोतरी हुई है। जिलाधिकारी इनकी क्षमताओं की जांच भी करा ले। ये सुनिश्चित कर लिया जाए कि इनके संचालन के लिए पर्याप्त संख्या में प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध हैं। आक्सीजन सपोर्ट पर विशेष ध्यान दिया जाए। कोरोना संक्रमण के मामले आएंगे। मगर सही समय पर इलाज मिल जाना चाहिए। गम्भीर मामलों को चिकित्सक व्यक्तिगत तौर पर देखें और जिलाधिकारी भी इसकी माॅनिटरिंग करें। मृत्यु दर को बढ़ने नहीं देना है।
बीमारी के प्रति संवदेनशील लोगों की सतत जानकारी रखी जाए
मुख्यमंत्री ने कहा कि सेम्पलिंग और टेस्टिंग में लगातार वृद्धि हुई है। इसे और बढ़ाए जाने की आवश्यकता है। सर्विलांस में जिलों ने अच्छा काम किया है। सर्विलांस में 60 वर्ष से अधिक आयु के लोगों और गम्भीर बीमारियों से ग्रस्त रहने वालों के बारे में पूरी जानकारी जुटाई जाए। हमारे फ्रंटलाईन वर्करों को लगातार प्रोत्साहित करें। उनको हर जरूरी सुविधा उपलब्ध कराई जाए। ये सुनिश्चित कर लिया जाए कि आशा और आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के लिए स्वीकृत की गई प्रोत्साहन राशि उनके खातें में चली गई है।
डेंगू को लेकर हो विशेष अभियान
मुख्यमंत्री ने कहा कि डेंगू पर भी सतर्क और सावधान रहना है। हर रविवार को विशेष अभियान चलया जाए। लोगों को प्रेरित किया जाए कि हर रविवार को केवल 15 मिनिट का समय निकालें और अपने घर में या घर के आसपास इकट्ठा पानी को हटा दें। डेंगू को न पनपने दें।
धार्मिक उत्सवों के अवसर पर भीड़ न जुटे, धर्मगुरूओं का लें सहयोग
मुख्यमंत्री ने कहा कि समय-समय पर धार्मिक त्यौहार, उत्सव और स्थानीय मेले होते हैं। इनमें लोगों की भीड़ न हो। इसके लिए समाज के गणमान्य लोगों और धार्मिक गुरूओं का सहयोग लिया जाए। मेलों और उत्सवों के आयेाजकों को भी बातचीत से विश्वास में लें और कोविड-19 के लिए निर्धारित प्रोटोकाल का पालन किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह भी देखने में आया है कि राज्य में आए कुछ पर्यटक, कोविड-फ्री का फर्जी प्रमाणपत्र लेकर आए। पर्यटकों द्वारा निगेटिव कोरोना जांच संबंधी प्रमाण पत्रों की पुख्ता चेकिंग की जाए। परंतु यह भी सुनिश्चित किया जाए कि पर्यटकों को इससे परेशानी न हो। मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारियों को राज्य में लौटे प्रवासियों का ग्राम पंचायत वार विवरण संकलन करने के निर्देश दिए। इससे इन लोगों के लिए योजनाएं बनाने में और आसानी होगी।
वीडियो कान्फ्रेसिंग में सचिव स्वास्थ्य अमित नेगी, डीजी लाॅ एंड आर्डर अशोक कुमार, सचिव शैलेश बगोली, आयुक्त गढ़वाल रविनाथ रमन, आयुक्त कुमायूं अरविंद सिंह ह्यांकि, डा. पंकज कुमार पाण्डेय, आई जी गढ़वाल अभिनव कुमार, आई जी संजय गुन्ज्याल सहित शासन के वरिष्ठ अधिकारी और जिलाधिकारी उपस्थित थे।