इजरायल ने सैनिकों पर हमले का हवाला देकर की कार्रवाई
गाजा। गाजा पट्टी में घोषित संघर्ष विराम के बाद भी हालात सामान्य होते नजर नहीं आ रहे हैं। ताजा घटनाओं में इजरायली कार्रवाई के दौरान कम से कम 24 फलस्तीनी नागरिकों की मौत की खबर सामने आई है। मृतकों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल बताए जा रहे हैं। अस्पताल सूत्रों ने मौतों की पुष्टि की है। वहीं इस्राइल का कहना है कि यह कार्रवाई उसके सैनिकों पर हुई गोलीबारी के जवाब में की गई।
इजरायली सेना ने क्या वजह बताई?
इजरायली सेना के मुताबिक, गाजा में तैनात उसके सैनिकों पर उग्रवादियों ने फायरिंग की थी, जिसमें एक रिजर्व सैनिक गंभीर रूप से घायल हो गया। सेना का कहना है कि इसके बाद हवाई और जमीनी बलों के जरिए जवाबी कार्रवाई की गई। इस्राइल ने इसे संघर्ष विराम का उल्लंघन करार देते हुए कहा कि सैनिकों की सुरक्षा के लिए कार्रवाई करना जरूरी था।
महिलाओं और बच्चों की मौत से बढ़ी चिंता
स्थानीय अस्पताल अधिकारियों के अनुसार, मारे गए लोगों में सात महिलाएं और पांच बच्चे शामिल हैं। मृतकों में एक पांच महीने का बच्चा और मात्र दस दिन की नवजात बच्ची भी शामिल बताई गई है। गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि संघर्ष विराम लागू होने के बाद से अब तक 530 से अधिक फलस्तीनी इस्राइली हमलों में अपनी जान गंवा चुके हैं, जिससे हालात की गंभीरता साफ झलकती है।
अस्पताल प्रशासन ने जताई नाराजगी
गाजा सिटी के शिफा अस्पताल के निदेशक ने कहा कि संघर्ष विराम के बावजूद आम नागरिकों के लिए हालात युद्ध जैसे ही बने हुए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर संघर्ष विराम लागू है, तो फिर जमीन पर हिंसा क्यों जारी है। स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि लगातार हो रहे हमलों से आम लोगों में भय का माहौल है और जनजीवन पटरी पर नहीं लौट पा रहा।
गाजा के अलग-अलग इलाकों में हुए हमले
रिपोर्ट के अनुसार, उत्तरी गाजा के तुफ्फाह इलाके में एक इमारत पर की गई फायरिंग में 11 लोगों की मौत हो गई, जिनमें एक ही परिवार के कई सदस्य शामिल थे। दक्षिणी शहर खान यूनिस में एक परिवार के टेंट को निशाना बनाया गया, जिसमें तीन लोगों की जान चली गई, जिनमें एक 12 वर्षीय बच्चा भी था। वहीं गाजा सिटी के ज़ैतून इलाके में टैंक शेलिंग से पति-पत्नी समेत तीन लोगों की मौत हो गई।
अब तक का कुल आंकड़ा क्या कहता है?
गाजा स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक 71,800 से ज्यादा फलस्तीनी मारे जा चुके हैं। मंत्रालय आम नागरिकों और लड़ाकों के आंकड़े अलग-अलग जारी नहीं करता, लेकिन संयुक्त राष्ट्र और कई अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां इन आंकड़ों को विश्वसनीय मानती हैं। बढ़ती मौतों की संख्या ने संघर्ष विराम की प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
साउथ सुपरस्टार राम चरण इन दिनों निजी और प्रोफेशनल दोनों मोर्चों पर सुर्खियों में हैं। हाल ही में पिता बने राम चरण के घर जहां खुशियों ने दस्तक दी है, वहीं अब उनके करियर से जुड़ी एक बड़ी अपडेट भी सामने आई है। उनकी बहुप्रतीक्षित पैन इंडिया फिल्म ‘पेद्दी’ की रिलीज डेट का आधिकारिक ऐलान कर दिया गया है, जिससे फैंस की एक्साइटमेंट और बढ़ गई है।
30 अप्रैल 2026 को सिनेमाघरों में उतरेगी ‘पेद्दी’
फिल्म ‘पेद्दी’ के ऐलान के बाद से ही यह लगातार चर्चा में बनी हुई है। सोशल मीडिया पर फिल्म से जुड़ी हर अपडेट को लेकर दर्शकों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। अब मेकर्स ने फिल्म का नया पोस्टर जारी करते हुए इसकी रिलीज डेट का खुलासा कर दिया है। मेकर्स के मुताबिक, ‘पेद्दी’ 30 अप्रैल 2026 को वर्ल्डवाइड सिनेमाघरों में रिलीज होगी। रिलीज डेट सामने आते ही फैंस के बीच खुशी की लहर दौड़ गई है।
रफ-टफ अंदाज में दिखे राम चरण
जारी किए गए नए पोस्टर में राम चरण बेहद दमदार अवतार में नजर आ रहे हैं। लंबे बाल, घनी दाढ़ी, खून से सना चेहरा और धूल में लिपटा लुक उनके किरदार की ताकत और आक्रामकता को दर्शाता है। भीड़ के बीच खड़े राम चरण का यह अवतार एक मजबूत, मास अपील वाले किरदार की झलक देता है। पोस्टर के साथ मेकर्स ने कैप्शन में लिखा, “उसकी आने की तारीख बदल सकती है, लेकिन उसकी ताकत और जज्बा नहीं। ‘पेद्दी’ 30 अप्रैल 2026 को वर्ल्डवाइड रिलीज।”
बुची बाबू सना के निर्देशन में बन रही है फिल्म
‘पेद्दी’ का निर्देशन बुची बाबू सना ने किया है और इसे साल 2026 की सबसे बड़ी पैन इंडिया फिल्मों में शामिल किया जा रहा है। फिल्म में राम चरण के साथ जान्हवी कपूर अहम भूमिका निभाती नजर आएंगी। वहीं जगपति बाबू, शिवा राजकुमार और दिव्येंदु शर्मा जैसे दमदार कलाकार भी फिल्म का हिस्सा हैं। मजबूत स्टारकास्ट और दमदार कहानी के चलते ‘पेद्दी’ से दर्शकों को बड़ी उम्मीदें हैं।
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घायल को अस्पताल पहुंचाया गया
नैनीताल। बेतालघाट क्षेत्र में देर रात एक डंपर वाहन अनियंत्रित होकर सड़क से नीचे गहरी खाई में गिर गया। हादसे की सूचना रात लगभग 11:43 बजे जिला नियंत्रण कक्ष नैनीताल एवं जिला आपदा प्रबंधन द्वारा एसडीआरएफ को दी गई, जिसमें एक व्यक्ति के वाहन में फंसे होने की जानकारी मिली।
सूचना मिलते ही पोस्ट खैरना से इंस्पेक्टर राम सिंह बोरा के नेतृत्व में एसडीआरएफ की रेस्क्यू टीम आवश्यक उपकरणों के साथ तुरंत घटनास्थल के लिए रवाना हुई। मौके पर पहुंचकर टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए खाई में उतरकर डंपर (वाहन संख्या UK 12 CA 0585) में फंसे व्यक्ति को घायल अवस्था में बाहर निकाला।
रेस्क्यू टीम ने स्ट्रेचर और रोप की सहायता से कड़ी मशक्कत कर घायल को सुरक्षित मुख्य मार्ग तक पहुंचाया, जिसके बाद उसे एंबुलेंस के माध्यम से अस्पताल भेजा गया। घायल की पहचान जगत बोहरा (45 वर्ष), पुत्र प्रताप सिंह, निवासी सोन गांव (बस गांव), बेतालघाट, जिला नैनीताल के रूप में हुई है।
सीएम धामी ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए की प्रार्थना
भीमताल। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भीमताल विधानसभा क्षेत्र से विधायक राम सिंह कैड़ा के आवास पर पहुंचकर उनकी पूज्य माताजी के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने शोकाकुल परिजनों से मुलाकात कर उन्हें सांत्वना दी और दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि इस दुःख की घड़ी में राज्य सरकार एवं वे स्वयं शोक संतप्त परिवार के साथ खड़े हैं। उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की कि दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और परिजनों को यह अपार दुःख सहन करने की शक्ति प्रदान करें।
शून्यकाल में भट्ट ने बापूग्राम की समस्याओं की तरफ केंद्र का ध्यान आकृष्ट कराया
देहरादून। ऋषिकेश के बापूग्राम और मीरानगर को राजस्व ग्राम का अधिकार दिलाने की प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट ने संसद में पुरजोर पैरवी की है। उन्होंने शून्यकाल के दौरान इस मुद्दे को उठाकर, स्थानीय लोगों के वैधानिक अधिकार एवं विकास की चिंताओं की तरफ सरकार का ध्यान आकृष्ट कराया।
आज राज्यसभा के शून्यकाल में उनके द्वारा ऋषिकेश के बापूग्राम और मीरा नगर क्षेत्र से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय उठाया गया। जिसमें उन्होंने सरकार के संज्ञान में लाते हुए कहा, यह दोनों क्षेत्र पिछले कई दशकों से घनी आबादी वाले हैं। 1950 से यहां लोग निवास कर रहे हैं जिनकी 1980 में ही जनसंख्या 50 हजार पाई गई थी। आज वहां हजारों परिवार निवास करते हैं, जो नियमित रूप से नगर निगम को करोड़ों रुपए कर भुगतान भी करते हैं, परंतु आज तक इन्हें राजस्व ग्राम का दर्जा प्राप्त नहीं हुआ है। राजस्व ग्राम घोषित न होने के कारण इन क्षेत्रों के नागरिकों को अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। जैसे भूमि स्वामित्व से संबंधित प्रमाण पत्र प्राप्त नहीं हो पा रहे हैं, इसी तरह प्रधानमंत्री आवास योजना, किसान सम्मान निधि, सामाजिक सुरक्षा पेंशन जैसी केंद्र एवं राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ पूर्ण रूप से नहीं मिल पा रहा। वहीं इस तकनीकी दिक्कत के कारण वहां विकास कार्यों में अनावश्यक प्रशासनिक बाधाएँ उत्पन्न हो रही हैं। उनके द्वारा सदन में बताया गया कि स्थानीय जनप्रतिनिधियों एवं नागरिकों द्वारा इस विषय में बार-बार अनुरोध किए गए हैं, परंतु अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
उनके द्वारा इस दौरान केंद्र सरकार से अनुरोध किया कि वे उत्तराखण्ड सरकार से समन्वय कर ऋषिकेश के बापूग्राम एवं मीरा नगर क्षेत्रों को शीघ्र राजस्व ग्राम घोषित करने हेतु आवश्यक निर्देश प्रदान करें। ताकि वहाँ के निवासियों को उनके वैधानिक अधिकार एवं सरकारी योजनाओं का पूर्ण लाभ मिल सके।
बहुउद्देशीय शिविर में 40 शिकायतों का हुआ निस्तारण
मंत्री गणेश जोशी ने बांटे चेक और किट
देहरादून। कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने आज सहसपुर ब्लॉक के भगवन्तपुर में आयोजित बहुउद्देशीय शिविर में बतौर मुख्य अतिथि प्रतिभाग किया। इस अवसर पर उन्होंने विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टालों का निरीक्षण किया और शिविर में उपस्थित लाभार्थियों से संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं।
शिविर के दौरान कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने कृषि विभाग के लाभार्थियों को चेक वितरित किए, कृषक समूहों को फार्म मशीनरी बैंक के अंतर्गत उपकरण प्रदान किए तथा बाल विकास विभाग के लाभार्थियों को महालक्ष्मी किट एवं किशोरी किट वितरित की। इस दौरान कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को नशा मुक्ति की भी शपथ दिलाई।
कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने जन–जन की सरकार, जन–जन के द्वार प्रशासन चला गांव की ओर’ कार्यक्रम के अंतर्गत आमजन की समस्याएं सुनीं। शिविर में कुल 40 शिकायतें एवं समस्याएं दर्ज की गईं, जिनमें से अधिकांश का मौके पर ही समाधान कर दिया गया, जबकि शेष विकासपरक एवं योजनाओं से संबंधित शिकायतों के निस्तारण हेतु संबंधित अधिकारियों को समयबद्ध प्रस्ताव तैयार कर समाधान के निर्देश दिए गए।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री जोशी ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम की सफलता को देखते हुए मुख्यमंत्री द्वारा शिविरों की अवधि 15 दिन और बढ़ाई गई है, जो सरकार की संवेदनशीलता को दर्शाता है। उन्होंने बताया कि प्रदेशभर में आयोजित इन विशेष शिविरों से अब तक 6 लाख से अधिक लोग लाभान्वित हो चुके हैं। इसे उन्होंने सरकार की एक अनूठी और जनकल्याणकारी पहल बताया।
कैबिनेट मंत्री ने कहा कि डबल इंजन सरकार समाज के अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाएं आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। केंद्रीय बजट 2026 में लखपति दीदियों को ‘शी मार्ट’ से जोड़ने का प्रावधान किया गया है, जिससे महिलाओं की आजीविका संवर्धन को और मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि केंद्रीय बजट में महिलाओं, किसानों और सैनिकों सहित हर वर्ग का विशेष ध्यान रखा गया है, जिसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री एवं केंद्रीय वित्त मंत्री का आभार व्यक्त किया।
अपने संबोधन में मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि वीबीजी रामजी योजना, मनरेगा से एक कदम आगे बढ़कर ग्रामीण भारत के सर्वांगीण विकास की दिशा में भारत सरकार की एक सशक्त पहल है। उन्होंने बताया कि इस योजना के संचालन हेतु चालू वित्तीय वर्ष में भारत सरकार द्वारा ₹95,652.31 करोड़ का बजटीय प्रावधान किया गया है। योजना के अंतर्गत रोजगार के दिवस 100 से बढ़ाकर 125 कर दिए गए हैं तथा समय पर मजदूरी भुगतान के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं।
इस अवसर पर एसडीम मसूरी राहुल आनंद, जिला कार्यक्रम अधिकारी जितेंद्र कुमार, जिला विकास अधिकारी सुनील कुमार, मंडल प्रभारी ज्योति कोटिया, लक्ष्मण सिंह रावत, किरन, ग्राम प्रधान रेनू शर्मा, भारती जवाड़ी, सुनील छेत्री, अजय पुंडीर सहित संबंधित विभिन्न विभागों के अधिकारीगण उपस्थित रहे।
कैंसर आज दुनिया भर में एक गंभीर स्वास्थ्य संकट के रूप में उभर चुका है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, यह बीमारी वैश्विक स्तर पर मौतों के प्रमुख कारणों में शामिल है। वर्ष 2020 में करीब एक करोड़ लोगों की जान कैंसर के कारण गई, यानी हर छह में से एक मौत की वजह कैंसर रहा। ब्रेस्ट, फेफड़े, कोलन, रेक्टम और प्रोस्टेट कैंसर सबसे ज्यादा जानलेवा साबित हो रहे हैं। बीते कुछ दशकों में कैंसर के मामलों और इससे होने वाली मौतों में तेज़ बढ़ोतरी ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है।
इसी गंभीरता को देखते हुए कैंसर के प्रति जागरूकता बढ़ाने और इसकी रोकथाम, समय पर पहचान व बेहतर इलाज को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से हर साल 4 फरवरी को वर्ल्ड कैंसर डे मनाया जाता है।
दिल्ली की रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता, युवाओं पर भारी पड़ रहा कैंसर
इस बीच दिल्ली से सामने आई एक सरकारी रिपोर्ट ने हालात को और चिंताजनक बना दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 20 वर्षों में दिल्ली में कैंसर से होने वाली हर तीन में से एक मौत 44 वर्ष से कम उम्र के लोगों की हुई है। यह आंकड़ा युवाओं में कैंसर के बढ़ते खतरे की ओर साफ इशारा करता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि बीमारी की देर से पहचान, नियमित स्क्रीनिंग की कमी, तंबाकू और शराब का बढ़ता सेवन, प्रदूषण तथा तनाव जैसे कारण इस बढ़ते खतरे के लिए जिम्मेदार हैं। विशेषज्ञ समय से पहले होने वाली मौतों को रोकने के लिए शुरुआती जांच, जन-जागरूकता और जीवनशैली में सुधार पर जोर दे रहे हैं।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, बीते दो दशकों में दिल्ली में कैंसर से 1.1 लाख से अधिक लोगों की जान जा चुकी है।
मौतों का आंकड़ा लगातार बढ़ा
साल 2005 में जहां कैंसर से करीब 2,000 मौतें दर्ज की गई थीं, वहीं 2024 में यह संख्या बढ़कर लगभग 7,400 तक पहुंच गई।
साल 2011 में कैंसर से करीब 10,000 मौतें हुईं, जिनमें 45–64 वर्ष आयु वर्ग के लोग सबसे अधिक प्रभावित रहे। इसके अलावा, 14 साल से कम उम्र के बच्चों की हिस्सेदारी लगभग 8 प्रतिशत और 15–24 वर्ष के युवाओं की करीब 5.8 प्रतिशत रही।
दिल्ली में सालाना 7 प्रतिशत की दर से बढ़ रहीं कैंसर से मौतें
विशेषज्ञों के मुताबिक, दिल्ली में कैंसर से होने वाली मौतें हर साल औसतन 7 प्रतिशत की दर से बढ़ रही हैं, जो राजधानी की जनसंख्या वृद्धि दर से लगभग तीन गुना ज्यादा है।
कैंसर से होने वाली 90 प्रतिशत से अधिक मौतें अस्पतालों में दर्ज की गई हैं। वर्ष 2018 में यह आंकड़ा लगभग 98 प्रतिशत तक पहुंच गया था, जिससे यह स्पष्ट होता है कि समय के साथ कैंसर की रिपोर्टिंग और इलाज की पहुंच बढ़ी है।
2005 से 2024 के बीच अस्पतालों में 45–64 वर्ष आयु वर्ग के 38,481 लोगों की कैंसर से मौत हुई, जबकि 65 वर्ष से अधिक आयु के 23,141 और 25–44 वर्ष आयु वर्ग के 18,220 लोगों की जान गई।
कौन-सा कैंसर सबसे ज्यादा जानलेवा?
आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि महिलाओं की तुलना में पुरुषों में कैंसर से मौत के मामले अधिक हैं।
पुरुषों में करीब 40 प्रतिशत मौतें 45–64 वर्ष आयु वर्ग में दर्ज की गईं
महिलाओं में इसी आयु वर्ग में यह आंकड़ा 43 प्रतिशत से अधिक रहा
महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर (411 मौतें) और ओवेरियन कैंसर (194 मौतें) प्रमुख कारण रहे
पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर (117) और सांस की नली के कैंसर (553) सबसे ज्यादा जानलेवा साबित हुए
मुंह और गले के कैंसर से पुरुषों में 607 और महिलाओं में 214 मौतें दर्ज की गईं, जो तंबाकू सेवन से जुड़े जोखिम को दर्शाता है
25–44 वर्ष आयु वर्ग की महिलाओं में कैंसर से होने वाली अधिकांश मौतों की वजह ब्रेस्ट और सर्वाइकल कैंसर रहे।
देर से पहचान बन रही सबसे बड़ी वजह
कैंसर विशेषज्ञों का कहना है कि अधिकतर मामलों में मौतों की मुख्य वजह बीमारी का देर से पता चलना है। लोग शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं, यह सोचकर कि कम उम्र में कैंसर होना संभव नहीं। नतीजतन, बीमारी का पता तब चलता है जब वह एडवांस स्टेज में पहुंच चुकी होती है।
डॉक्टरों के अनुसार, युवाओं में कैंसर की बायोलॉजी अधिक आक्रामक होती है। शरीर में गांठ, असामान्य ब्लीडिंग, लंबे समय तक मुंह के छाले या आवाज में बदलाव जैसे संकेतों को सामान्य समझना इलाज में देरी का कारण बनता है।
डॉक्टरों की सलाह
विशेषज्ञ कैंसर से होने वाली मौतों को कम करने के लिए नियमित स्क्रीनिंग कार्यक्रम बढ़ाने, तंबाकू और शराब से दूरी बनाने, स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और लक्षण दिखते ही डॉक्टर से संपर्क करने की अपील कर रहे हैं।
नोट: यह लेख विभिन्न मेडिकल रिपोर्ट्स और आधिकारिक आंकड़ों के आधार पर तैयार किया गया है।
(साभार)
ट्रेनिंग के साथ नौकरी सुनिश्चित करने की पहल, युवाओं को फॉरवर्ड लिंकेज से जोड़ा जाएगा
देहरादून। कौशल विकास के अंतर्गत अब तक की कार्य प्रगति तथा स्किल प्राप्त युवाओं को फॉरवर्ड लिंकेज से जोड़ने के संबंध में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई।
रोजगार गैप पर मंथन
बैठक में इस तथ्य पर गहन चर्चा हुई कि राज्य में आईटीआई व तकनीकी संस्थानों तथा प्रशिक्षित युवाओं की संख्या बढ़ने के बावजूद उद्योगों में उनकी प्लेसमेंट और संतोषजनक वेतन क्यों नहीं मिल पा रहा है। मुख्यमंत्री ने इसे प्रबंधन, समन्वय और प्लेटफार्म स्तर पर कमी का संकेत बताते हुए तत्काल सुधार के निर्देश दिए।
बेरोजगारी बनाम कुशल श्रमिकों की कमी, समन्वय की जरूरत
मुख्यमंत्री ने कहा कि एक ओर नाई, प्लंबर, इलेक्ट्रीशियन, मिस्त्री, कारपेंटर जैसे दैनिक कार्यों के लिए कुशल श्रमिक आसानी से उपलब्ध नहीं हो पाते, वहीं दूसरी ओर अनेक युवा जो आईटीआई से तकनीकी शिक्षा प्राप्त कर चुके हैं वे रोजगार की आकांक्षा में रहते हैं। उन्होंने तकनीकी, शिक्षा, कौशल और अन्य संबंधित विभागों के बेहतर समन्वय से इस विरोधाभास को दूर करने के निर्देश दिए।
स्मार्ट मानव संसाधन पर फोकस, उद्योग मांग के अनुरूप पाठ्यक्रम
बैठक में मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि केवल स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं बल्कि स्मार्ट मानव संसाधन तैयार करना प्राथमिकता होगी। उद्योगों और भविष्य की तकनीकी मांग के अनुरूप रोजगारोन्मुख पाठ्यक्रम, प्रशिक्षित ट्रेनर-शिक्षक और आईटीआई जैसे तकनीकी संस्थानों को अपग्रेड करने पर जोर देने को कहा।
तीन स्तर की वर्कफोर्स और स्थानीय रोजगार मॉडल
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि स्थानीय स्तर पर दैनिक कार्यों के लिए बेसिक स्किल वर्कर, मीडियम तकनीक की वर्कफोर्स और उच्च कुशल तकनीकी वर्कफोर्स तैयार करने का समेकित मॉडल विकसित किया जाए, जिससे विकसित भारत @2047 की आकांक्षा को साकार करने को बल मिले।
ट्रेनिंग के साथ रोजगार सुनिश्चित, पाठ्यक्रमों की हो सतत समीक्षा
निर्देश दिए गए कि प्रशिक्षण के लिए चयन होते ही युवाओं को रोजगार प्रदाता संस्थानों से टैग किया जाए, ताकि ट्रेनिंग के दौरान ही जॉब सिक्योरिटी सुनिश्चित हो। तकनीकी पाठ्यक्रमों को समयानुसार रिवाइज करने तथा 6 माह, मध्य अवधि और दीर्घकालिक तीनों स्तरों पर आउटकम सुनिश्चित करने पर बल दिया जाय।
विदेशों में रोजगार, पारदर्शी भर्ती और न्यायिक प्रकरणों पर निर्देश
विदेशों में स्वरोजगार/रोजगार के अवसरों के लिए चयनित किए जाने वाले युवाओं को भारत सरकार की विभिन्न देशों के अनुरूप प्रबंधन के संबंध में गाइडलाइंस साझा की जाए। ताकि उनको संबंधित देश में अपने आपको अनुकूलित करने में अधिक आसानी हो।
सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करने तथा न्यायालय में लंबित प्रकरणों के प्रभावी निस्तारण के निर्देश दिए, ताकि भर्ती परिणाम अनावश्यक रूप से लंबित न रहे।
उद्योग सहभागिता और एकीकृत प्लेटफार्म पर जोर
कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा ने उद्योगों को प्रशिक्षण में भागीदार बनाने का सुझाव दिया, जिससे मांग आधारित कौशल विकसित हों। उन्होंने बताया कि यदि उद्योग भी प्रशिक्षण और तकनीकी पाठ्यक्रम के निर्धारण में शामिल होंगे तो वे उद्योगों की मांग के अनुरूप युवाओं को स्किल्ड कर पाएंगे। इससे युवाओं को जॉब पाने के अधिक अवसर प्राप्त होंगे। मुख्य सचिव आनंद बर्धन ने सभी संबंधित विभागों को एक प्लेटफार्म पर आकर रोजगार व कौशल से जुड़े कार्यों को गति देने के निर्देश दिए।
सचिव कौशल विकास एवं सेवायोजन विभाग सी. रविशंकर ने विभागीय प्रयासों, स्थानीय से ओवरसीज प्लेसमेंट तक की रणनीति और बेहतर प्रयासों पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया।
बैठक में प्रमुख सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम, सचिव दिलीप जावलकर, रंजीत सिन्हा, रविनाथ रामन, विनय शंकर पांडेय, दीपेंद्र चौधरी, डी एस गब्रियाल, हॉफ वन विभाग रंजन मिश्रा सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।
घायलों का हालचाल जाना, पारिवारिक जनों से बातचीत कर इलाज का पूरा भरोसा दिया
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कालसी क्षेत्र अंतर्गत क्वानू–मीनस मोटर मार्ग पर हिमाचल परिवहन निगम की बस दुर्घटना में घायल हुए हिमाचल प्रदेश एवं उत्तराखंड के यात्रियों का हाल-चाल जानने के लिए राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल का दौरा किया। मुख्यमंत्री ने दुर्घटना में दिवंगत हुए लोगों के प्रति गहरी शोक संवेदना व्यक्त करते हुए ईश्वर से उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।
मुख्यमंत्री ने अस्पताल में भर्ती घायलों से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात कर उनका कुशलक्षेम जाना तथा चिकित्सकों से उपचार की स्थिति की विस्तृत जानकारी प्राप्त की। उन्होंने चिकित्सकीय टीम को सभी घायलों को सर्वोत्तम एवं त्वरित उपचार उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने घायलों के परिजनों से भी बातचीत कर उन्हें विश्वास दिलाया कि राज्य सरकार द्वारा उपचार में किसी भी प्रकार की कमी नहीं आने दी जाएगी तथा सभी घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने विकासनगर के उप जिला चिकित्साधिकारी से दूरभाष पर विकासनगर में उपचाराधीन दुर्घटना के घायलों को भी समुचित एवं संवेदनशील चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने हिमाचल प्रदेश सरकार को भी आश्वस्त किया कि उत्तराखंड में उपचाराधीन हिमाचल के सभी घायल यात्रियों का समुचित एवं निःशुल्क उपचार राज्य सरकार द्वारा सुनिश्चित किया जा रहा है।
मार्च 2026 में बॉक्स ऑफिस पर बड़ी फिल्मों की टक्कर देखने को मिलने वाली थी, लेकिन अब इस क्लैश से एक फिल्म ने खुद को अलग कर लिया है। आदिवी शेष और मृणाल ठाकुर स्टारर फिल्म ‘डकैत: एक प्रेम कथा’ की रिलीज डेट को आगे बढ़ा दिया गया है। पहले 19 मार्च 2026 को रिलीज होने वाली यह फिल्म अब अप्रैल में दर्शकों के सामने आएगी।
अब 10 अप्रैल को सिनेमाघरों में उतरेगी ‘डकैत’
बॉक्स ऑफिस पर एक ही दिन दो बड़े प्रोजेक्ट—‘टॉक्सिक’ और ‘धुरंधर: द रिवेंज’—की रिलीज तय होने के चलते ‘डकैत’ के निर्माताओं ने रणनीतिक फैसला लिया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, फिल्म को अब 10 अप्रैल 2026 को रिलीज किया जाएगा। इस कदम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि फिल्म को पर्याप्त स्क्रीन, दर्शकों का ध्यान और लंबा थिएटर रन मिल सके।
फिल्म की टीम ने स्पष्ट किया कि यह निर्णय किसी प्रतिस्पर्धा से बचने के बजाय सभी फिल्मों को उनका उचित मंच देने के उद्देश्य से लिया गया है। निर्माताओं ने दूसरी फिल्मों की टीमों के प्रति सम्मान जताते हुए कहा कि इससे दर्शकों को हर फिल्म को बेहतर ढंग से अनुभव करने का मौका मिलेगा।
पैन-इंडिया स्तर पर रिलीज होगी फिल्म
शेनिल देव के निर्देशन में बनी ‘डकैत’ एक इमोशनल एक्शन ड्रामा है, जिसकी कहानी एक ऐसे कैदी के इर्द-गिर्द घूमती है जो अपने अतीत और विश्वासघात से जूझता नजर आता है। फिल्म हिंदी और तेलुगु भाषाओं में पैन-इंडिया स्तर पर रिलीज की जाएगी।
फिल्म में आदिवी शेष और मृणाल ठाकुर के अलावा अनुराग कश्यप और प्रकाश राज भी अहम भूमिकाओं में दिखाई देंगे। दिसंबर 2025 में जारी किए गए फिल्म के टीजर को दर्शकों से जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली थी, जिसके बाद से फिल्म को लेकर उत्साह लगातार बना हुआ है।
हालांकि रिलीज टलने के चलते दर्शकों को थोड़ा इंतजार जरूर करना पड़ेगा, लेकिन मेकर्स को उम्मीद है कि नई तारीख पर ‘डकैत’ बॉक्स ऑफिस पर मजबूत पकड़ बनाने में सफल रहेगी।
(साभार)
