प्रदेश के मंत्रियों के विभागों की समीक्षा के क्रम में बुधवार को मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कैबिनेट मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत के साथ वन, सेवायोजन एवं कौशल विकास, श्रम तथा आयुष विभाग को लेकर बैठक की। समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को कई निर्देश दिए।
वन विभाग की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश के वन्यजीव संरक्षित क्षेत्रों में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए बुकिंग के लिए सिंगल विंडो सिस्टम शुरू किया जाए। वन विभाग द्वारा जहां भी वृक्षारोपण करवाया जा रहा है, उन वृक्षों की सुरक्षा के लिए सुनियोजित कार्ययोजना तैयार हो। वृक्षारोपण करने तक का ही उद्देश्य न हो, बल्कि इनकी सुरक्षा के लिए भी जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। इस कार्य में जन सहयोग सुनिश्चित हो। वन विभाग राजस्व वृद्धि पर विशेष ध्यान दे। उन्होंने वनाग्नि को रोकने के लिए समुचित प्रयासों की जरूरत पर जोर दिया।
आयुष विभाग की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने निर्देश दिये कि पौड़ी (गढ़वाल) के चरक डांडा में अंतर्राष्ट्रीय शोध संस्थान की स्थापना के लिए जल्द डीपीआर बनाई जाए। मुख्यमंत्री ने सेवायोजन एवं कौशल विकास को लेकर अधिकारियों को निर्देश दिये कि प्रदेश में जिन 25 आईटीआई को अपग्रेड किया जा रहा है, उनमें प्रशिक्षण की बेहतर व्यवस्था के साथ ही प्रशिक्षण लेने वाले विद्यार्थियों के प्रतिभा प्रदर्शन एवं प्रोत्साहित करने के लिए प्रोडक्शन एवं मार्केटिंग की व्यवस्था भी हो। मुख्यमंत्री ने उत्तराखण्ड के औद्योगिक संस्थानों में 70 प्रतिशत स्थानीय लोगों को रोजगार देने के लिए उद्योग विभाग की जिम्मेदारी सुनिश्चित की है।
इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने बताया कि कार्बेट टाइगर रिजर्व के अन्तर्गत ढेला ‘रेस्क्यू सेन्टर’ एवं पाखरो ‘टाइगर सफारी’ की स्थापना का कार्य प्रगति पर है। उन्होंने कहा की प्रदेश में पिछले तीन सालों में प्रतिवर्ष औसतन 1500 हेक्टेयर क्षेत्र में वृक्षारोपण किया गया। प्रदेश में 14.77 प्रतिशत क्षेत्र संरक्षित है, जो राष्ट्रीय औसत से तीन गुना है। राज्य में 2006 में बाघों की संख्या 178 थी, जो 2018 तक बढ़कर 442 हो गई है। हाथियों की संख्या 2017 तक 1839 थी, जो अब बढ़कर 2026 हो गई है। वर्षा जल संरक्षण की दिशा में 02 वर्षों में लगभग 68.37 करोड़ ली0 वर्षा जलसंचय की संरचनाओं का निर्माण किया गया। वन विभाग द्वारा पिछले तीन सालों में विभिन्न योजनाओं के तहत 1 लाख 20 हजार लोगों को रोजगार दिया गया।
यदि आप लंबे समय तक नींद न आने यानी अनिद्रा की समस्या से ग्रस्त हैं, तो यह खबर आपको राहत पहुंचा सकती है। शोधकर्ताओं ने भारत की पारंपरिक चिकित्सा पद्धति से इस समस्या का समाधान तलाशने में सफलता पाई है। शोधकर्ताओं ने शिरोधारा और अश्वगंधा तेल के साथ शमन चिकित्सा को अनिद्रा की समस्या से छुटकारा दिलाने में उपयोगी पाया है।
भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के अधीन कार्यरत शिलांग स्थित पूर्वोत्तर आयुर्वेद एवं होम्योपैथी संस्थान (North Eastern Institute Of Ayurveda & Homoeopathy) की शोध पत्रिका ‘आयुहोम’ में प्रकाशित एक हालिया वैयक्तिक अध्ययन के अनुसार, अनिद्रा से संबंधित समस्याओं को दूर करने में आयुर्वेद की प्रभावकारिता के नए प्रमाण मिले हैं। यह अध्ययन जयपुर स्थित राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान (National Institute Of Ayurveda) के एसोसिएट प्रोफेसर और पंचकर्म विभाग के प्रमुख डॉ गोपेश मंगल और दो शोधार्थियों निधि गुप्ता व प्रवीश श्रीवास्तव ने किया है।
चिकित्सा विज्ञान ने अपर्याप्त नींद को मोटापे से लेकर शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता के कम होने तक कई स्वास्थ्य समस्याओं से जोड़ा है। आयुर्वेद भी नींद या निद्रा को स्वास्थ्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानता है। आयुर्वेद भी पर्याप्त नींद को सुख और अच्छे जीवन के लिए आवश्यक आयामों में से एक मानता है। पूर्ण निद्रा दिमाग को एक सुकून से भरी हुई मानसिक स्थिति की ओर ले जाती है। अनिद्रा को चिकित्सकीय रुप से उन्निद्रता से सहसंबंधित किया जा सकता है जो दुनिया भर में नींद न आने की एक आम समस्या है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार बेहतर स्वास्थ्य पूर्ण शारीरिक, मानसिक या सामाजिक कल्याण की अवस्था है और साथ ही किसी भी बीमारी की अनुपस्थिति है। नींद इसका एक आवश्यक पहलू है। अनियमित जीवन शैली, तनाव और अन्य अप्रत्याशित पर्यावरणीय कारकों की वजह से ही वर्तमान समय में बड़ी संख्या में लोगों को नींद न आने की समस्या होने लगी है। अमेरिका के नेशनल स्लीप फाउंडेशन के एक अनुमान के अनुसार, दुनिया भर में लगभग एक तिहाई लोग नींद की समस्या से पीड़ित हैं।
ऐसी स्थिति को देखते हुए अनिद्रा की समस्या को दूर करने के लिए आयुर्वेद की पारंपरिक पंचकर्म चिकित्सा की क्षमताओं को उपयोग में लाया जा सकता है। इस वैयक्तिक अध्ययन के दौरान मिले सकारात्मक परिणाम आयुर्वेद की प्रभावशीलता का प्रमाण देते हैं। इस अध्ययन की रिपोर्ट में बताया गया है कि, आयुर्वेद उपचार से अनिद्रा से पीड़ित व्यक्ति की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। अध्ययन में उन सभी लक्षणों की उपचार से पहले और बाद में की गई गहन परीक्षा और मूल्यांकन ग्रेडिंग शामिल थी, जिन्हें आंकलन के लिए चुना गया था। इनमें जम्हाई आना, उनींदापन, थकान होना तथा नींद की गुणवत्ता आदि शामिल थे और सभी मापदंडों में सुधार देखा गया।
अध्ययन के अनुसार शिरोधारा और अश्वगंधा तेल के साथ शमन चिकित्सा अनिद्रा को दूर करने में उपयोगी साबित हुई है। अध्ययन में पाया गया कि शिरोधारा केंद्रीय तंत्रिका तंत्र के कार्य को सामान्य करने में मदद करता है। तंत्रिका तंत्र को आराम और सिर में रक्त के संचलन को संतुलित करता है। साथ ही उत्तेजित वात दोष को शांत करता है। इसमें अश्वगंधा तेल के साथ-साथ अन्य जड़ी-बूटियों का प्रयोग कर रोगियों का उपचार किया गया।
उत्तराखंड राज्य स्थापना की 20 वीं वर्षगांठ पर ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण में भी कार्यक्रमों की धूम
उत्तराखंड राज्य स्थापना की 20 वीं वर्षगांठ पर प्रदेश की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैण में भी कार्यक्रमों की धूम रहेगी। स्थापना दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत दो दिन तक गैरसैंण में आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लेंगे। विगत 4 मार्च को ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित किए जाने के बाद से त्रिवेंद्र सरकार लगातार गैरसैंण को तवज्जो देने में लगी हुई है। त्रिवेंद्र ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर पहले अस्थाई राजधानी देहरादून और फिर ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण में विधान भवन में ध्वजारोहण कर इतिहास ही नहीं रचा, अपितु गैरसैंण को लेकर ताबड़तोड़ घोषणाएं कर विपक्षियों पर भी बढ़त कायम की।
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र की अध्यक्षता में मंगलवार को आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में राज्य स्थापना दिवस समारोह के अवसर पर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों की विस्तृत रुप रेखा तय की गई। मुख्यमंत्री ने स्थापना दिवस के कार्यक्रमों को राज्य मुख्यालय के साथ ही सभी जिला मुख्यालयों में भी सादगी के साथ गरिमामय ढंग से आयोजित किए जाने पर बल दिया। बैठक में शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे, उच्च शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. धन सिंह रावत, सचिव वित्त अमित नेगी, सचिव मुख्यमंत्री राधिका झा एवं अपर सचिव मुख्यमंत्री तथा महानिदेशक सूचना डॉ. मेहरबान सिंह बिष्ट उपस्थित थे।
बैठक में तय किया गया कि राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर 8 से 11 नवम्बर तक
राजधानी देहरादून समेत सभी जनपदों के मुख्य राजकीय भवनों को प्रकाशमान किया जाएगा। स्थापना दिवस के कार्यक्रमों की शुरुआत 8 नवम्बर को मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र द्वारा माउण्टेन बाईक रैली के शुभारंभ के साथ होगी। इसी दिन राज्य के समस्त महाविद्यालयों में फ्री वाई-फाई कनेक्टिविटी से जोड़ने की शुरुआत मुख्यमंत्री द्वारा डोईवाला से की जाएगी। यहीं पर आयोजित कार्यक्रम से मुख्यमंत्री टिहरी झील पर निर्मित प्रसिद्ध डोबरा-चांठी पुल का लोकार्पण भी करेंगे।
राज्य स्थापना दिवस 9 नवम्बर को सबसे पहले उत्तराखण्ड राज्य निर्माण के दौरान शहीद हुए आंदोलनकारियों को श्रद्धांजलि दी जाएगी। इसके लिए देहरादून स्थित शहीद स्मारक में कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। शहीदों को श्रद्धांजलि के बाद देहरादून पुलिस लाईन में राज्य स्थापना परेड आयोजित होगी। इसमें उत्तराखण्ड पुलिस के जवानों द्वारा प्रतिभाग किया जाएगा। इस मौके पर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सूचना विभाग द्वारा प्रकाशित विकास पुस्तिका का भी विमोचन करेंगे।
राजधानी देहरादून में आयोजित कार्यक्रमों में भाग लेने के बाद मुख्यमंत्री 9 नवम्बर को ही अपराह्न में गैरसैंण (भराड़ीसैंण) पहुंचेंगे। गैरसैंण में आईटीबीपी एवं पुलिस बल की परेड आयोजित होगी। तत्पश्चात सांस्कृतिक कार्यक्रमों होंगे। 10 नवम्बर को मुख्यमंत्री गैरसैंण के निकट दूधातोली जाएंगे। वहां वे पेशावर कांड के नायक वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली की समाधि में पुष्पांजलि अर्पित करेंगे। मुख्यमंत्री गैरसैंण में विभिन्न योजनाओं का लोकार्पण व शिलान्यास भी करेंगे।
बैठक में यह भी तय किया गया कि राज्य स्थापना पर समस्त जिला मुख्यालयों में भी कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। कोविड-19 महामारी को दृष्टिगत रखते हुए सभी कार्यक्रमों में सोशल डिस्टेंसिंग तथा अन्य बचाव सम्बन्धी दिशा-निर्देश का कड़ाई से अनुपालन किया जाएगा। राज्य स्थापना समारोह के अवसर पर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों हेतु सूचना एवं लोक सम्पर्क विभाग को नोडल विभाग बनाया गया है। इस हेतु महानिदेशक सूचना डॉ0 मेहरबान सिंह बिष्ट को नामित किया गया है।
मंत्रियों के विभागों की समीक्षा के क्रम में मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने सोमवार को कृषि मंत्री सुबोध उनियाल के साथ कृषि, उद्यान, रेशम विकास विभागों की समीक्षा की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने राज्य में सेब, नाशपाती सहित अन्य फलों के बागों के पुनर्जीविकरण व विस्तारीकरण के लिए भरसार विवि और जीबी पंत विवि के कुलपतियों की एक समिति बनाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही किसानों के स्किल डेवलपमेंट की योजना बनाने को कहा। उन्होंने सूअर, बंदर आदि जंगली जानवरों से खेती को होने वाले नुकसान का सर्वे करते हुए अधिक प्रभावित क्षेत्रों में किसानों को राहत पहुंचाने के लिए तार-बाड़, दीवार बनाने का काम प्राथमिकता से करने के निर्देश दिए।
आधुनिकतम तकनीक से फलों की खेती को लाभप्रद बनाया जाए
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान में सेब व अन्य फलों की खेती को आधुनिकतम तकनीक के उपयोग द्वारा लाभप्रद बनाया जाए। आवश्यकता होने पर दूसरी किस्मों से बदला भी जा सकता है। इसके लिए औद्यानिकी विभाग ठोस काम करे।
फार्म मशीनरी बैंक से जुड़ें अधिकाधिक गांव
मुख्यमंत्री ने कहा कि फार्म मशीनरी बैंक किसानों के लिए काफी लाभप्रद हो रहे हैं। प्रयास किए जाएं कि अधिक से अधिक गांव इसके अंतर्गत आ सकें। माइक्रो इरीगेशन पर भी विशेष ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है। विभाग इसके लिए कार्ययोजना बनाए।
जंगली जानवरों से नुकसान का हो सर्वे
मुख्यमंत्री ने कहा कि खेती में एक बड़ी समस्या जंगली जानवरों के कारण आ रही है। सूअर, बंदर आदि जानवरों से खेती को होने वाले नुकसान का व्यापक सर्वे किया जाए। जिन क्षेत्रों में समस्या ज्यादा गंभीर है, वहां प्राथमिकता के आधार पर तार-बाड़, दीवार आदि बनाने का काम किया जाए।
किसान सम्मान निधि में सावधानी से हो डाटा फीडिंग
मुख्यमंत्री ने कहा कि जैविक खेती का और विस्तार किए जाने की जरूरत है। जैविक उत्पादों के विपणन के लिए ग्रोथ सेंटरों का उपयोग किया जाए। नमामि गंगे के तहत गंगा किनारे जैविक कृषि के लिए चयनित गांवों में मानिटरिंग की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। किसान सम्मान निधि में किसी तरह की शिकायत न आए। इसके लिए डाटा फीडिंग सावधानीपूर्वक की जाए।
कृषि से जुड़ी शिक्षण संस्थान निकटवर्ती गांवों में काम करें
मुख्यमंत्री ने कहा कि कीड़ा जड़ी, मशरूम आदि उत्पादों पर रिसर्च की जाए। कृषि व औद्यानिकी से जुड़ी शिक्षण संस्थानों के छात्रों को प्रायोगिक ज्ञान के लिए निकटवर्ती गांवों में भेजा जाए। अधिकारी फील्ड में जाएं और वहां किसानों से मिलकर उनकी समस्याओं को दूर करें।
3 K आर्गेनिक उत्तराखण्ड आउटलेट
कृषि मंत्री सुबोध उनियांल ने कहा कि प्रदेश के आर्गेनिक उत्पादों की मार्केटिंग के लिए ‘3 K आर्गेनिक उत्तराखण्ड आउटलेट’ स्थापित किए जाएंगे। यहां 3 K यानी कृषि एवं कृषक कल्याण। अगले 2 वर्ष में 1300 आउटलेट बनाए जाने का लक्ष्य रखा गया है। राज्य में किसानों को लाभकारी खेती के लिए प्रेरित किया जा रहा है। हरिद्वार में बहुत से किसानों ने गन्ने की खेती के स्थान लेमनग्रास की खेती शुरू की है। उन्हें इसकी अच्छी कीमत भी मिल रही है। एकीकृत फार्मिंग के कन्सेप्ट पर भी काम किया जा रहा है।
किसान सम्मान निधि में 8.57 लाख किसान लाभान्वित
बैठक में बताया गया कि किसान सम्मान निधि के अन्तर्गत पात्र 8.74 लाख कृषकों मे से 8.57 लाख कृषको को 852.04 करोड का भुगतान किया गया है। वर्ष 2017-18 से अब तक 230 कस्टम हायरिंग सेन्टर, 1444 फार्म मशीनरी बैंक स्थापित हुए हैं।
8.82 लाख कृषको को मृदा स्वास्थ्य कार्ड उपलब्ध
वर्ष 2017-18 से वर्तमान तक जंगली जानवरों से खेती की सुरक्षा हेतु 94 गांव लाभान्वित हुये, जिनमें 101 किमी घेर बाड़ की गई। प्रदेश के 8.82 लाख कृषकों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड उपलब्ध कराए गए।इससे उत्पादकता वृद्धि के साथ-साथ भूमि की उर्वरकता में भी सुधार हो रहा है।
प्रदेश में 3900 जैविक क्लस्टर चयनित
प्रदेश को जैविक प्रदेश बनाने हेतु संचालित योजना में वर्ष 2018-19 से वर्ष 2020-21 तक के लिए 3900 कलस्टरों का चयन किया गया। नमामि गंगे के तहत गंगा किनारे बसे ग्राम पंचायतों में जैविक कृषि को प्रोत्साहित किया जा रहा है ताकि गंगा नदी के जल को प्रदूषित होने से रोका जा सके। गंगा बेसिन पर बसे 5 जनपदों के 42 ग्रामों को चयनित किया गया। इससे लगभग 1,25,000 कृषक लाभान्वित होंगें।
बैठक में सचिव हरबंस सिंह चुघ, विशेष सचिव मुख्यमंत्री डा. पराग मधुकर धकाते, जीबी पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के कुलपति डा. तेज प्रताप, वीर चंद्र सिंह गढ़वाली उत्तराखण्ड औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, भरसार के कुलपति डा. अजीत कुमार कर्नाटक सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

माई रिफिल स्टोर का उद्घाटन
राजधानी देहरादून स्थित एक होटल में आयोजित अन्य कार्यक्रम में मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने उत्तराखण्ड वन संसाधन प्रबन्धन परियोजना के तत्वाधान में वन पंचायतों में गठित महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार किये गये कृषि तथा अन्य उत्पादों के विक्रय केन्द्र ‘‘माई रिफिल स्टोर’’ का उद्घाटन किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने सभी विभागों को राज्य में लोगों के लिए स्वरोजगार उपलब्ध कराने के लिए टारगेट दिये हुए हैं। किस तरह से लोगों की आजीविका में वृद्धि की जा सकती है और महिला स्वयं सहायता समूहों की भागीदारी कैसे और बढ़ाई जा सकती है। इस दिशा में अनेक प्रयास किये जा रहे हैं। इस अवसर पर वन एवं पर्यावरण मंत्री डाॅ. हरक सिंह रावत, विधायक गणेश जोशी, मेयर सुनील उनियाल गामा, प्रमुख सचिव वन आनन्द वर्द्धन, प्रमुख वन संरक्षक रंजना काला आदि उपस्थित थे।
भारत कोविड-19 से स्वस्थ होने वालों रोगियों की संख्या में वैश्विक रैंकिंग में शीर्ष पर बना हुआ है। कुल स्वस्थ होने वालों का आंकड़ा सोमवार को 75,44,798 को पार कर गया। देश में पिछले 24 घंटे के दौरान कोरोना वायरस से 53,285 लोग स्वस्थ हुए हैं। सक्रिय मामलों में भी लगातार कमी दर्ज की जा रही है। वर्तमान में देश में कोविड-19 के सक्रिय मरीजों की संख्या 5,61,908 है। देश में पिछले 24 घंटे के दौरान 45,321 नए मरीजों में संक्रमण की पुष्टि हुई है और 496 मरीजों की मौत हुई है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा सोमवार को जारी आंकड़ों के अनुसार देश में कोविड-19 के सक्रिय मामले कुल पॉजिटिव मामलों के सिर्फ 6.83 प्रतिशत ही हैं। सिर्फ दो महीने की अवधि के दौरान, सक्रिय मामलों के प्रतिशत में 3 गुना से अधिक की कमी देखी गई है। 3 सितंबर को सक्रिय मामलों का प्रतिशत 21.16 था।
भारत ने जनवरी 2020 से कोविड-19 के संचयी परीक्षणों की संख्या में तेजी से वृद्धि दर्ज की है। इस विस्तारित परीक्षण से शीघ्र पहचान और फिर उचित उपचार करने में मदद मिलती है। इसके बाद कुल परीक्षणों की संख्या सोमवार को 11 करोड़ (11,07,43,103) का आंकड़ा पार कर गया है। देश की परीक्षण क्षमता 2037 प्रयोगशालाओं के साथ तेजी से आगे बढ़ रही है

पिछले 24 घंटे के दौरान 78 प्रतिशत स्वस्थ होने वाले सिर्फ 10 राज्यों से हैं। केरल और कर्नाटक में सबसे ज्यादा 8000-8000 से ज्यादा मरीज एक दिन में स्वस्थ हुए हैं, जबकि इसके बाद दिल्ली तथा पश्चिम बंगाल में 4000-4000 से अधिक मरीज स्वस्थ हुए हैं।
देश में पिछले 24 घंटे के दौरान 45,321 नए मरीजों में संक्रमण की पुष्टि हुई है। इनमें से 80 प्रतिशत मामले सिर्फ 10 राज्यों में ही सामने आए हैं। केरल में एक दिन में सबसे अधिक 7,025 मरीजों में संक्रमण की पुष्टि हुई, जबकि उसके बाद दिल्ली और महाराष्ट्र में 5000-5000 से अधिक नए मामले सामने आए।
पिछले 24 घंटे के दौरान हुई 496 मौतों में से 82 प्रतिशत मामले सिर्फ 10 राज्यों से संबद्ध हैं। 113 मरीजों यानि 22 प्रतिशत की मौत के साथ महाराष्ट्र में सबसे अधिक एक दिन में मौत दर्ज की गई। वहीं पश्चिम बंगाल में 59 मरीजों की मौत हुई है।
अपने आक्रामक बयानों के लिए चर्चित हिंदूवादी नेता साध्वी प्राची ने लव जेहाद के बहाने राहुल गांधी व प्रियंका वाड्रा पर निशाना साधा है। उन्होंने राहुल व प्रियंका का नाम लिए बगैर कहा की बंटी-बबली राजनीती करने के लिए हाथरस तो चले जाते हैं। मगर बल्लभगढ़ नहीं जाते हैं।
साध्वी प्राची ने यह बयान हरिद्वार में हिंदूवादी संगठनों द्वारा फरीदाबाद की निकिता हत्याकांड के आरोपियों को फांसी देने की मांग को लेकर आयोजित प्रदर्शन के बाद पत्रकारों से बातचीत में दिया। साध्वी प्राची ने लव जिहाद को लेकर कानून बनाने की मांग की। उन्होंने कहा कि लव जिहादियों को चौराहे पर फांसी दी जानी चाहिए। उनकी न कोई अपील हो और न ही सुनवाई। उन्होंने कहा कि देश में बेटियों पर पहले बहला फुसलाकर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया जाता था। अब जबरन धर्म परिवर्तन कराया जा रहा है।
उत्तराखंड (Uttarakhand) भाजपा (BJP) के प्रदेश महामंत्री (संगठन) अजेय ने पार्टी के भीतर एक नई पहल शुरु की है। विगत दिवस कुमायूं मंडल के विस्तृत भ्रमण के दौरान उन्होंने तमाम स्थानों पर पार्टी कार्यकर्ताओं की बैठकें लीं। मगर ये बैठकें रुटीन में आयोजित होने वाली बैठकों से अलग थीं। इन बैठकों में कई स्थानों पर भावुक कर देने वाले दृश्य भी देखने को मिले। ऐसे दृश्यों के पीछे बड़ा और स्वाभाविक कारण था।
संगठन मंत्री अजेय ने बैठकों में वर्तमान पदाधिकारियों के साथ-साथ पार्टी के पुराने और बुजुर्ग कार्यकर्ताओं भी आमंत्रित किया था। आमतौर पर पुराने व पद पर न रहने वाले कार्यकर्ताओं को भुला दिया जाता है। उन्हें अपेक्षित सम्मान नहीं मिल पाता है और वे पार्टी में अपने को उपेक्षित महसूस करते हैं। कई बार ऐसे कार्यकर्त्ता व नेता अपनी पीड़ा जाहिर भी करते हैं। उनकी अपेक्षा मात्र इतनी रहती है कि उनके क्षेत्र अथवा नगर में आ रहे वरिष्ठ नेताओं, निर्वाचित जन प्रतिनिधियों के आगमन की सूचना उन तक भी पहुंचा दी जाए। ताकि, वो भी उनको मिलने पहुंच सकें और अपनी बात उन तक पहुंचा सके।

अजेय द्वारा वरिष्ठ और पुराने कार्यकर्ताओं को बैठक में बुलाने और उनके हाल-चाल जानने से कई कार्यकर्ता भावुक हो गए। ऐसे कार्यकर्ताओं ने संगठन मंत्री के सामने अपने मन की बात रखी। पुराने अनुभव व संस्मरण भी सुनाए। इस दौरान संगठन मंत्री ने उनके योगदान की चर्चा की और कहा की पार्टी आज जिन ऊंचाइयों तक पहुंची है, उसमें उनके महत्वपूर्ण योगदान को नहीं नकारा जा सकता है। अजेय ने पुराने व बुजुर्ग कार्यकर्ताओं को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया। यही नहीं वे कई बुजुर्ग और अस्वस्थ चल रहे कार्यकर्ताओं के घर गए और उनकी कुशल क्षेम भी पूछी। प्रदेश संगठन मंत्री की इस पहल का पार्टी कार्यकर्त्ता सराहना कर रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि संगठन मंत्री के रुप में अजेय का उत्तराखंड में अभी मात्र एक वर्ष का कार्यकाल हुआ है। वो इससे पूर्व कई वर्षों तक संघ के प्रचारक बतौर उत्तराखंड में ही कार्य कर चुके हैं। उत्तराखंड आने से पहले वे भाजपा की पश्चिम उत्तर प्रदेश इकाई के संगठन मंत्री के पद पर कार्यरत रहे हैं।
नाबालिग बच्ची के उत्पीड़न के आरोप में निलंबित चल रही हरिद्वार (Haridwar) की सिविल जज (सीनियर डिवीजन) दीपाली शर्मा को नैनीताल हाई कोर्ट (High Court of Uttarakhand) के आदेश पर उत्तराखंड सरकार ने बर्खास्त कर दिया है। प्रदेश की अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने इस संबंध में अधिसूचना जारी की है।
शासन ने उत्तराखंड उच्च न्यायालय की पूर्ण पीठ द्वारा 14 अक्टूबर को पारित संकल्प के आधार पर शासन को प्रेषित संस्तुति के क्रम में निलंबित सिविल जज (सीनियर डिवीजन) दीपाली शर्मा की उत्तराखंड सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील), 2003 के प्रावधानों के तहत सेवा समाप्त की है।
यह था मामला
वर्ष 2018 को नैनीताल हाईकोर्ट को एक पत्र मिला था। पत्र के आधार पर हाई कोर्ट ने हरिद्वार के तत्कालीन जिला जज राजेंद्र सिंह चौहान और एसएसपी कृष्ण कुमार वीके को जज दीपाली शर्मा आवास पर छापा मारने के आदेश दिए थे। इस टीम ने दीपाली शर्मा के जजेज कॉलोनी स्थित आवास में छापा मारकर एक किशोरी को मुक्त कराया था।
जिला जज की मौजूदगी में जिला अस्पताल में किशोरी का मेडिकल कराया गया था। इस दौरान किशोरी के शरीर पर चोट के 20 निशान पाए गए थे। हाई कोर्ट के निर्देश पर दीपाली शर्मा के विरुद्ध पुलिस में मामला दर्ज किया गया था और बाद में उन्हें निलंबित कर दिया था। दीपाली शर्मा ने इस मामले में राहत पाने के लिए न्यायालय की शरण भी ली थी। मगर उन्हें कोई राहत नहीं मिली।
आयकर विभाग (Income Tax) ने फर्जी बिल बनाकर बड़े पैमाने पर पैसों की हेरा-फेरी करने वाले एक बड़े नेटवर्क का भांडाफोड़ करते हुए छापे मारी और जब्ती (Search and Seizure) की कार्रवाई की। इस सिलसिले में दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड और गोवा में 42 स्थानों पर छापे मारे गए और तलाशी ली गई।
इस दौरान फर्जी बिल के आधार पर पैसों की हेरा-फेरी करने वाले एंट्री ऑपरेटरों, बिचौलियों, लाभार्थियों और कंपनियों के खिलाफ कई सबूत जब्त किए गए। अब तक, इस मामले में नकली बिलों के आधार पर 500 करोड़ रुपये से ज्यादा की हेरा-फेरी के सबूत मिले हैं जिन्हें जब्त कर लिया गया है।
तलाशी के दौरान कई ऐसे सबूत हाथ लगे हैं जिनसे पता चला है कि एंट्री ऑपरेटरों ने फर्जी बिल के आधार पर बेहिसाब धन की निकासी और असुरक्षित ऋण देने के लिए कई फर्जी कंपनियों के नाम का इस्तेमाल किया। इसमें ऐसे ऑपरेटरों, उनके नकली भागीदारों / कर्मचारियों के साथ-साथ लाभार्थियों के विवरण भी स्पष्ट रूप से दर्ज हैं।
जिन लोगों के खिलाफ तलाशी की गई है उनके परिजनों और उनके करीबी कर्मचारियों के नाम पर कई बैंक खाते और लॉकर तथा फर्जी कंपनियां खोले जाने की जानकारी भी मिली है। ये सारे काम बैंक अधिकारियों की मिलीभगत से किए गए हैं।
इस फर्जी धंधे से लाभ उठाने वाले लोगों ने कई बड़े शहरों में रियल एस्टेट कारोबार में निवेश किया है और करोड़ों रुपये बैंक में फिक्स्ड डिपॉजिट किए हैं।
तलाशी के दौरान 2.37 करोड़ रुपये नकद और 2.89 करोड़ रुपये मूल्य के जवाहरात बरामद हुए हैं। इसके साथ ही ऐसे 17 बैंक लॉकरों का भी पता चला है जिनका अभी तक इस्तेमाल नहीं किया गया है।
आयकर विभाग इस मामले में आगे और जांच कर रहा है।
उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में आए दिन लोगों पर भालुओं (Bear) के हमले को देखते हुए प्रदेश सरकार दो रेस्क्यू सेंटर बनाएगी। इसके साथ ही किसानों की फसलों को जंगली जानवरों से बचाने के लिए जंगलों में फलदार पेड़ लगाए जाएंगे।
यह जानकारी मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने राजधानी देहरादून में वन मुख्यालय में ई-ऑफिस कार्यप्रणाली के शुभारम्भ के लिए आयोजित कार्यक्रम में दी। उन्होंने घोषणा की कि चमोली एवं पिथौरागढ़ में भालुओं के लिए एक-एक रेस्क्यू सेंटर बनाया जाएगा। इसके अलावा बंदरों के लिए चार रेस्क्यू सेंटर बनाने का प्रस्ताव भारत सरकार को भेजा गया है।
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि अगले वर्ष हरेला पर्व पर एक करोड़ फलदार वृक्ष लगाए जाएंगे। उन्होंने वन विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि इसके लिए अभी से तैयारियां शुरू की जाएं। फलदार वृक्ष जंगलों में भी लगाए जाएंगे, जिससे जंगली जानवरों को आहार की उपलब्धता जंगलों में ही पूरी हो और वह किसानों की फसलों को नुकसान ना पहुंचा सकें।

मुख्यमंत्री ने वन विभाग के अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए कि ई-ऑफिस प्रणाली को जल्द ही जिला एवं क्षेत्रीय कार्यालयों में भी विस्तारित किया जाए। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कार्यों में तेजी और पारदर्शिता लाने के लिए डिजिटल इंडिया की जो शुरूआत की उसके बेहतर परिणाम आज सबके सम्मुख हैं। राज्य में ई-कैबिनेट की शुरूआत की गई है। ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण को ई-विधानसभा बनाया जा रहा है। 37 कार्यालय ई-ऑफिस प्रणाली से जुड़ चुके हैं। उन्होंने कहा कि डिजिटल कार्यप्रणाली की ओर हम जितने तेजी से बढ़ेंगे, उतनी तेजी से जन समस्याओं का निदान होगा।
उन्होंने कहा कि राज्य में पिरूल पर जो कार्य हो रहा है, इसे और विस्तार देने की जरूरत है। पिरूल एकत्रीकरण पर राज्य सरकार द्वारा 02 रूपये प्रति किग्रा एवं विकासकर्ता द्वारा 1.5 रूपये प्रति किग्रा एकत्रकर्ता को दिया जा रहा है। इसका उपयोग ऊर्जा के लिए तो किया ही जायेगा, लेकिन इसका सबसे ज्यादा फायदा वन विभाग को होगा। वनाग्नि और जंगली जानवरों की क्षति को रोकने में यह नीति बहुत कारगर साबित होगी। स्थानीय स्तर पर गरीबों के लिए स्वरोजगार के लिए पिरूल एकत्रीकरण का कार्य एक अच्छा माध्यम बन रहा है।
इस अवसर पर वन विभाग के सलाहकार व ग्रामीण विकास एवं पलायन आयोग के उपाध्यक्ष डाॅ. एस.एस.नेगी, मुख्यमंत्री के आईटी सलाहकार रवींद्र दत्त, वन पंचायत सलाहकार समिति के अध्यक्ष वीरेन्द्र सिंह बिष्ट, मुख्य वन संरक्षक जयराज, पीसीसीएफ रंजना काला, विनोद कुमार सिंघल, मुख्य वन संरक्षक आईटी नरेश कुमार एवं वन विभाग के अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
