अक्सर माता-पिता बच्चों के खर्राटों को सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार यह एक गंभीर स्वास्थ्य संकेत हो सकता है। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. माधवी भारद्वाज ने हाल ही में इस विषय पर जागरूकता बढ़ाते हुए बताया कि बच्चों में खर्राटे लेना कई बार अंदरूनी समस्या की ओर इशारा करता है, जिसे हल्के में नहीं लेना चाहिए।
उन्होंने बताया कि कई अभिभावक इसे वंशानुगत मानकर टाल देते हैं, लेकिन यह सोच गलत हो सकती है। उदाहरण के तौर पर एक ऐसे बच्चे का जिक्र किया गया, जिसका वजन उम्र के हिसाब से अधिक था और वह नियमित रूप से खर्राटे लेता था, फिर भी परिवार उसे पूरी तरह स्वस्थ मान रहा था। डॉक्टर के अनुसार मोटापा और खर्राटों के बीच सीधा संबंध हो सकता है।
खर्राटों का वैज्ञानिक कारण समझाते हुए उन्होंने कहा कि जब नाक से फेफड़ों तक जाने वाले वायु मार्ग में किसी तरह की रुकावट आती है, तो हवा के टकराने से आवाज पैदा होती है, जिसे खर्राटा कहा जाता है। सामान्य सर्दी-जुकाम में कुछ समय तक ऐसा होना आम है, लेकिन अगर बच्चा ठीक होने के बाद भी लगातार खर्राटे ले रहा है, तो यह टॉन्सिल्स या श्वसन मार्ग में सूजन या वृद्धि का संकेत हो सकता है।
इस समस्या का असर बच्चे की नींद और दिनचर्या पर भी पड़ता है। ऐसे बच्चे अक्सर ठीक से सो नहीं पाते, जिससे वे दिनभर थके हुए, चिड़चिड़े और ध्यान केंद्रित करने में कमजोर हो जाते हैं। पढ़ाई और खेल-कूद दोनों पर इसका नकारात्मक प्रभाव देखने को मिलता है।
डॉक्टर के अनुसार बच्चों में खर्राटों के प्रमुख कारणों में एलर्जी, एडिनोइड्स और टॉन्सिल्स की समस्या शामिल हैं। इसके अलावा बढ़ता वजन भी श्वसन मार्ग पर दबाव डालता है, जिससे सांस लेने में दिक्कत होती है और खर्राटे बढ़ जाते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि समय रहते सही जांच और इलाज से इस समस्या को पूरी तरह ठीक किया जा सकता है। इसलिए माता-पिता को चाहिए कि वे बच्चे के लक्षणों को नजरअंदाज न करें और डॉक्टर से परामर्श लेकर उचित उपचार कराएं, ताकि बच्चे की नींद, स्वास्थ्य और विकास बेहतर हो सके।
नोट: यह लेख विभिन्न मेडिकल जानकारियों और विशेषज्ञों की राय के आधार पर तैयार किया गया है।
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ISO 1893-2025 के बाद पूरे राज्य को भूकंप जोन-6 मानते हुए नए नियम बनेंगे
देहरादून। उत्तराखण्ड राज्य की बढ़ती भूकंपीय संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने भवन निर्माण नियमों को अधिक सुरक्षित और वैज्ञानिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है।
भारतीय मानक ISO 1893-2025 के अनुसार पूरे राज्य के भूकंप जोन छह में शामिल होने के बाद अब बिल्डिंग बायलाॅज में व्यापक संशोधन किया जाएगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन द्वारा वर्तमान बिल्डिंग बायलाॅज की समीक्षा एवं संशोधन हेतु सीएसआईआर-सीबीआरआई रुड़की के निदेशक प्रो. आर. प्रदीप कुमार की अध्यक्षता में 14 सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति का गठन किया गया है।
यूएलएमएमसी के निदेशक डाॅ. शांतनु सरकार को समिति का संयोजक बनाया गया है। बता दें कि वर्तमान में उत्तराखण्ड राज्य में बिल्डिंग बायलाॅज भारतीय मानक ब्यूरो के पुराने संस्करण ISO 1893-2002 पर आधारित हैं।
समिति में सीबीआरआई रुड़की, भारतीय मानक ब्यूरो, आईआईटी, ब्रिडकुल, लोक निर्माण विभाग, सिंचाई विभाग, नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग, विकास प्राधिकरणों तथा भू-वैज्ञानिक विशेषज्ञों सहित विभिन्न तकनीकी संस्थानों के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया है।
समिति वास्तुविदों के साथ ही विभिन्न अभियंताओं से भी विचार-विमर्श करेगी। समिति का उद्देश्य राज्य के मौजूदा बायलाॅज का गहन अध्ययन करते हुए उन्हें वर्तमान भूकंपीय मानकों, जलवायु परिस्थितियों और आधुनिक निर्माण तकनीकों के अनुरूप तैयार करना है।
मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने कहा कि उत्तराखण्ड की भौगोलिक परिस्थितियों और बढ़ती भूकंपीय संवेदनशीलता को देखते हुए भवन निर्माण के नियमों में परिवर्तन किया जा रहा है।
राज्य सरकार भवन बायलाॅज को अधिक प्रभावी, व्यावहारिक और आपदा-सुरक्षित बनाने की दिशा में ठोस कदम उठा रही है। इसी कड़ी में विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया है। समिति भवन बायलाॅज को अधिक व्यवहारिक, सुरक्षित और आपदा-रोधी बनाने के लिए अपने सुझाव देगी। उन्होंने कहा कि संशोधित नियमों से शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षित निर्माण को बढ़ावा मिलेगा और आपदा जोखिम में कमी आएगी।
सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य केवल नियमों में बदलाव करना नहीं बल्कि सुरक्षित निर्माण की संस्कृति विकसित करना है।
उन्होंने बताया कि संशोधित बिल्डिंग बायलाॅज में भूकंप-रोधी डिजाइन, भू-तकनीकी जांच, विंड लोड और स्ट्रक्चरल सेफ्टी से जुड़े प्रावधानों को शामिल करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। साथ ही स्थानीय पारंपरिक निर्माण तकनीकों और जलवायु अनुकूल विकास को भी बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे सतत एवं आपदा-सक्षम विकास सुनिश्चित हो सके।
बता दें कि नए बिल्डिंग बायलाॅज लागू होने से भवनों की संरचनात्मक मजबूती बढ़ेगी, आपदा के दौरान जन-धन की हानि कम होगी और सुरक्षित व टिकाऊ शहरी विकास व निर्माण को नई दिशा मिलेगी। समिति अपनी रिपोर्ट उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण तथा आवास विभाग को सौंपेगी। समिति द्वारा तैयार की जाने वाली रिपोर्ट के आधार पर आवास विभाग द्वारा बायलाॅज में आवश्यक संशोधन एवं कार्यान्वयन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
समिति का कार्यक्षेत्र
उत्तराखण्ड राज्य के वर्तमान बिल्डिंग बायलाॅज की विस्तृत समीक्षा, विश्लेषण एवं मौजूदा तकनीकों का आकलन।
राज्य में मौजूद भूकंप, भूस्खलन और अन्य आपदा जोखिमों को समाहित करते हुए संशोधित बिल्डिंग बायलाॅज का मसौदा तैयार करना।
भूकंप-रोधी डिजाइन, नई निर्माण तकनीकों एवं संरचनात्मक सुरक्षा से जुड़े प्रावधानों को शामिल करना।
पारंपरिक पहाड़ी निर्माण प्रणालियों को वैज्ञानिक रूप से आधुनिक नियमों में समाहित करना।
पर्यावरण संरक्षण और जलवायु अनुकूल निर्माण के लिए विशेष प्रावधान तैयार करना।
संशोधित नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु कार्ययोजना एवं दिशा-निर्देश प्रस्तुत करना।
इंजीनियरों, योजनाकारों एवं संबंधित विभागों के लिए प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण के सुझाव देना।
समिति में ये हैं शामिल
समिति की अध्यक्षता सीएसआईआर-सीबीआरआई, रुड़की के निदेशक प्रो. आर. प्रदीप कुमार करेंगे, जबकि यूएलएमएमसी, देहरादून के निदेशक डॉ. शांतनु सरकार को संयोजक बनाया गया है।
समिति में डॉ. अजय चौरसिया (मुख्य वैज्ञानिक, सीबीआरआई रुड़की), प्रो. महुआ मुखर्जी (वास्तुकला विभाग, आईआईटी रुड़की), सुश्री मधुरिमा माधव (वैज्ञानिक ‘ब्’, भारतीय मानक ब्यूरो, नई दिल्ली), डॉ. पी.के. दास (वरिष्ठ ग्रामीण आवास सलाहकार, यूएनडीपी), आर्किटेक्ट एस.के. नेगी (पूर्व मुख्य वैज्ञानिक, सीबीआरआई शिमला), उत्तराखण्ड आवास एवं नगर विकास प्राधिकरण के नामित प्रतिनिधि, ब्रिडकुल के प्रबंध निदेशक, लोक निर्माण विभाग तथा सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता एवं विभागाध्यक्ष, राज्य के नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग के प्रतिनिधि, मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण और हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण के प्रतिनिधियों के साथ-साथ भूकंप विशेषज्ञ धर्मेन्द्र कुशवाहा एवं भू-भौतिक विज्ञानी डॉ. विशाल वत्स सदस्य के रूप में शामिल किए गए हैं।
भारतीय सिनेमा में सामाजिक मुद्दों को दमदार तरीके से उठाने के लिए पहचाने जाने वाले अनुभव सिन्हा एक बार फिर अपनी नई फिल्म ‘अस्सी’ को लेकर सुर्खियों में हैं। कोर्टरूम ड्रामा पर आधारित यह फिल्म दर्शकों के बीच चर्चा में बनी हुई है।
बॉक्स ऑफिस पर ‘अस्सी’ का प्रदर्शन
फिल्म ने ओपनिंग डे पर करीब 1 करोड़ रुपये की कमाई के साथ शुरुआत की। वीकेंड पर दर्शकों की संख्या बढ़ने से दूसरे और तीसरे दिन कलेक्शन में उछाल आया और फिल्म ने दोनों दिन 1.6-1.6 करोड़ रुपये कमाए। हालांकि, सोमवार से कमाई में गिरावट देखने को मिली और चौथे दिन फिल्म ने लगभग 70 लाख रुपये का कारोबार किया।
पांचवें दिन की कमाई
20 फरवरी 2026 को रिलीज हुई इस फिल्म ने पांचवें दिन यानी मंगलवार को करीब 85 लाख रुपये का कलेक्शन किया। इसी के साथ फिल्म की कुल कमाई अब लगभग 5.75 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है।
फिल्म की कहानी
‘अस्सी’ एक संवेदनशील और गंभीर विषय पर आधारित कहानी है, जिसमें एक महिला वकील यौन उत्पीड़न के मामले को उठाती है और न्याय के लिए कानूनी लड़ाई लड़ती है। अदालत की कार्यवाही के जरिए फिल्म समाज की चुप्पी और न्याय व्यवस्था से जुड़े कई अहम सवालों को सामने लाती है। फिल्म में तापसी पन्नू ने एडवोकेट रावी का मुख्य किरदार निभाया है।
फिल्म से जुड़ी खास बातें
यह फिल्म कोर्टरूम ड्रामा जॉनर की है, जिसका निर्देशन अनुभव सिन्हा ने किया है। फिल्म का निर्माण भूषण कुमार, कृष्ण कुमार और अनुभव सिन्हा ने संयुक्त रूप से किया है। इसे बनारस मीडियावर्क्स और टी-सीरीज के बैनर तले तैयार किया गया है।
कुल मिलाकर, फिल्म का प्रदर्शन स्थिर जरूर है, लेकिन शुरुआती दिनों के बाद इसकी कमाई में गिरावट भी साफ नजर आ रही है।
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एसएसपी देहरादून ने सभी राजपत्रित अधिकारियो/थाना प्रभारियों के साथ की बैठक
थाना प्रभारियों के साथ- साथ अब क्षेत्राधिकारियों की जवाबदेही भी होगी तय
थाना क्षेत्र में कानून व्यवस्था प्रभावित होने पर थाना प्रभारी रहेंगे जिम्मेदार, होगी सख्त कार्यवाही
देहरादून। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून द्वारा जनपद के समस्त राजपत्रित अधिकारियों तथा थाना प्रभारियों के साथ गोष्टी की गई। गोष्टी के दौरान वर्तमान में चल रहे अभियानों की समीक्षा करते हुए एसएसपी देहरादून द्वारा उपस्थित अधिकारियों को को निम्न दिशा निर्देश दिये गए।
1- ऑपरेशन क्रैकडाउन के तहत चलाये जा रहे सत्यापन अभियान के तहत सभी संस्थानों, प्रतिष्ठानों, औद्योगिक क्षेत्रों व अन्य स्थानों पर निवासरत बाहरी व्यक्तियों के सत्यापन हेतु प्रभावी कार्रवाई करना सुनिश्चित करें, इसमें किसी भी प्रकार की कोताही न बरती जाये। अभियान में लापरवाही बरतने वाले थाना प्रभारियों की जवाबदेही तय करते हुए उनके विरूद्व कार्यवाही की जायेगी।
2- सभी क्षेत्राधिकारी/थाना प्रभारी अपने-अपने सर्किल/क्षेत्रों में नियमित रूप से प्रभावी चैकिंग सुनिश्चित करें, इसमें किसी भी प्रकार की शिथिलता न बरती जाये, इसके अतिरिक्त सभी थाना क्षेत्रों में नियमित चेकिंग पॉइन्ट के अलावा अन्य स्थानों पर भी आकस्मिक रूप से चैकिंग अभियान चलाया जाये तथा उक्त चैकिंग के स्थान व समय का निर्धारण सम्बन्धित क्षेत्राधिकारी/थाना प्रभारी द्वारा किया जाये।
3- पीक आवर्स के दौरान भीड़ भाड़ वाले स्थानों/ व्यस्ततम मार्गो/ चौराहों पर पुलिस की विजबिलिटी को बढ़ाया जाए, पीक आवर्स के दौरान सभी क्षेत्राधिकारी/थाना प्रभारी थाना क्षेत्र के व्यस्तम मार्गो/चौराहो पर स्वंय उपस्थित रहकर प्रभावी चैकिंग करना सुनिश्चित करें।
4- सभी थाना प्रभारी अपने-अपने थाना क्षेत्रों में संगठित अपराधों में लिप्त अभ्यस्थ अपराधियों को चिन्हित करते हुए उनके विरूद्व गैंगस्टर एक्ट के तहत प्रभावी कार्यवाही करते हुए उन्हें निरूद्व करना सुनिश्चित करे, इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरती जाये। यदि गैंगस्टर एक्ट में कार्यवाही के पश्चात भी ऐसे अभियुक्तों को निरूद्व करने में किसी प्रकार की लापरवाही परिलक्षित होती है तो सम्बन्धित थाना प्रभारी के साथ-साथ क्षेत्राधिकारी की जवाबदेही भी तय की जायेगी।
5- ईनामी अभियुक्तों की समीक्षा के दौरान सभी थाना प्रभारियों को ईनामी अभियुक्तों की धरपकड हेतु टीमें गठित कर प्रभावी कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिये गये।
6- वर्तमान में चल रहे रमजान के महीने व आगामी होली के पर्व के दृष्टिगत सभी थाना प्रभारी अपने-अपने थाना क्षेत्रों में सवेंदनशील स्थानों/मिश्रित आबादी वाले क्षेत्रों में सर्तक दृष्टि रखते हुए पूर्व में पर्वो के दौरान हुए विवादों की जानकारी प्राप्त कर सुरक्षा के समुचित प्रबंध करना सुनिश्चित करें। थाना क्षेत्र में किसी भी प्रकार की कानून व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न होने पर इसकी समस्त जिम्मेदारी सम्बन्धित थाना प्रभारी की होगी तथा उसके विरूद्व सख्त कार्यवाही की जायगी।
देहरादून- मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) द्वारा अवैध निर्माण और अवैध प्लाटिंग के खिलाफ लगातार सख्त कार्रवाई की जा रही है। प्राधिकरण की टीम ने ऋषिकेश क्षेत्र में एक और बड़ी कार्रवाई करते हुए अवैध रूप से बनाए जा रहे बहुमंजिला भवन को सील कर दिया। यह भवन लक्कड़घाट रोड, निर्मल बाग, ब्लॉक-सी में निशांत मालिक द्वारा निर्मित किया जा रहा था। प्राधिकरण को लगातार मिल रही शिकायतों और निरीक्षण के दौरान पाई गई अनियमितताओं के आधार पर यह कार्रवाई की गई। एमडीडीए की टीम मौके पर पहुंची और नियमानुसार सीलिंग की प्रक्रिया पूरी की। कार्रवाई के दौरान सहायक अभियंता अभिषेक भारद्वाज, अवर अभियंता पूनम सकलानी, मनीष डिमरी, सुपरवाइजर तथा पुलिस बल मौजूद रहा।
एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा कि प्राधिकरण क्षेत्र में किसी भी प्रकार का अवैध निर्माण या अवैध प्लाटिंग बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिना स्वीकृत मानचित्र के निर्माण कार्य करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई जारी रहेगी। तिवारी ने कहा कि नियमों का उल्लंघन करने वालों को पहले नोटिस जारी किया जाता है, उसके बाद भी कार्य नहीं रुकने पर सीलिंग और ध्वस्तीकरण जैसी कार्रवाई की जाती है। उन्होंने आम जनता से अपील की कि संपत्ति खरीदने से पहले उसकी वैधता की जांच अवश्य कर लें।
एमडीडीए सचिव मोहन सिंह बर्निया ने कहा कि अवैध निर्माण पर निगरानी बढ़ा दी गई है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में नियमित निरीक्षण किए जा रहे हैं और नियम विरुद्ध निर्माण पाए जाने पर तत्काल प्रभाव से कार्रवाई की जाएगी।
साकार होगा पौड़ी की विरासत को संजोने का सपना, जिलाधिकारी ने हेरिटेज म्यूजियम की प्रगति की समीक्षा की
पांच दीर्घाओं से म्यूजियम को बनाया जाएगा आकर्षक, जनपद के सांस्कृतिक इतिहास पर रहेगा जोर: जिलाधिकारी
पौड़ी के गौरवशाली इतिहास को मिलेगा स्थायी मंच, हेरिटेज म्यूजियम की तैयारियां तेज
पौड़ी। जनपद पौड़ी के समृद्ध इतिहास और सांस्कृतिक धरोहरों को संरक्षित एवं व्यवस्थित रूप में प्रस्तुत करने की दिशा में जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया ने जिला मुख्यालय स्थित एनआईसी कक्ष में हेरिटेज म्यूजियम की प्रगति की समीक्षा की। इस दौरान निर्माणदायी संस्था ने पीपीटी के माध्यम से प्रस्तावित स्वरूप और प्रदर्शित की जाने वाली सामग्रियों की जानकारी दी, जिस पर जिलाधिकारी ने म्यूजियम को जनपद की पहचान के अनुरूप विकसित करने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
जिलाधिकारी ने कहा कि प्रस्तावित म्यूजियम पौड़ी के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सामाजिक विकास को एक समग्र रूप में प्रस्तुत करेगा। उन्होंने निर्देशित किया कि इसमें पारंपरिक ढोल-दमाऊ, प्राचीन आभूषण एवं वेशभूषा, दुर्लभ छायाचित्र, हिमालय से जुड़ी थ्री-डी प्रस्तुतियां और अन्य महत्वपूर्ण धरोहरों को इस प्रकार प्रदर्शित किया जाए, जिससे आगंतुकों को जनपद की विरासत का वास्तविक अनुभव हो सके।
बैठक में प्रस्तावित हेरिटेज म्यूजियम की अवधारणा को और अधिक समृद्ध एवं आकर्षक बनाने के उद्देश्य से इसकी विभिन्न थीम आधारित दीर्घाओं (हॉल) पर विस्तार से चर्चा की गई। जिलाधिकारी ने बताया कि म्यूजियम में ‘विरासत भूमि हॉल’ के माध्यम से जनपद के ऐतिहासिक विकास, प्राचीन सभ्यता और महत्वपूर्ण पड़ावों को प्रदर्शित किया जाएगा, वहीं ‘वीर भूमि हॉल’ में वीरभूमि पौड़ी के शहीदों, स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों एवं सैन्य परंपरा से जुड़े गौरवशाली योगदान को सम्मानपूर्वक स्थान दिया जाएगा। ‘लोक संस्कृति हॉल’ में जनपद की समृद्ध लोक परंपराओं, पारंपरिक वाद्य यंत्रों, वेशभूषा, आभूषण, लोक कला एवं रीति-रिवाजों को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया जाएगा, जबकि ‘तपोभूमि हॉल’ में जनपद के प्राचीन मंदिरों, आध्यात्मिक स्थलों, ऋषि-मुनियों की तपस्थली और धार्मिक महत्व को दर्शाया जाएगा। इसके अतिरिक्त ‘प्राकृतिक हॉल’ में हिमालय की अनुपम प्राकृतिक सुंदरता, जैव विविधता, नदियों, वन संपदा और प्राकृतिक विरासत को आधुनिक तकनीक के माध्यम से प्रदर्शित किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि म्यूजियम परिसर में आगंतुकों के लिए कैफेटेरिया की भी व्यवस्था प्रस्तावित की गई है, जिसमें पारंपरिक पहाड़ी व्यंजनों को शामिल किया जाएगा, ताकि यहां आने वाले पर्यटक न केवल जनपद की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत से रूबरू हो सकें, बल्कि स्थानीय खान-पान की विशिष्टता का अनुभव भी कर सकें। यह कैफेटेरिया स्थानीय उत्पादों और व्यंजनों को बढ़ावा देने के साथ-साथ स्थानीय लोगों के लिए रोजगार सृजन का माध्यम भी बनेगा।
जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि म्यूजियम में जनपद के प्रमुख आंदोलनों, ऐतिहासिक घटनाओं और सामाजिक योगदानों को भी समुचित स्थान दिया जाए। साथ ही भवन को पारंपरिक स्वरूप प्रदान करते हुए पठाल का फर्श, प्राचीन उपयोगी वस्तुएं तथा मंदिरों के इतिहास को भी शामिल किया जाए। उन्होंने प्रमाणिक जानकारी संकलित करने के लिए विषय विशेषज्ञों से समन्वय स्थापित करने और 28 फरवरी तक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए, ताकि कार्य समयबद्ध रूप से प्रारंभ किया जा सके।
इस अवसर पर अधिशासी अभियंता लोनिवि रीना नेगी, सहायक अभियंता पुरातत्व अनिल सिंह सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
अग्निवीर योजना में सुधार पर मंथन जरूरी- भागवत
देहरादून। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत के उत्तराखंड प्रवास के दूसरे दिन पूर्व सैनिकों एवं पूर्व सेना अधिकारियों के साथ प्रमुख जन गोष्ठी एवं समन्वित संवाद कार्यक्रम आयोजित हुआ। इस मौके पर भागवत ने कहा कि संघ का उद्देश्य व्यक्ति निर्माण है, चुनावी राजनीति नहीं।
भागवत ने अग्निवीर योजना को एक प्रयोग बताते हुए कहा कि अनुभव के आधार पर इसमें सुधार की आवश्यकता पर विचार किया जाना चाहिए। कश्मीर के संदर्भ में उन्होंने कहा कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए सतर्क नीति आवश्यक है।
भागवत ने कहा कि भारतीय समाज “वसुधैव कुटुंबकम्” की भावना पर आधारित है और समाज में सभी के लिए समान अवसर होने चाहिए। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर कटुता के बजाय संवाद की परंपरा को बढ़ावा देना आवश्यक है। उन्होंने संस्कार, बचत और समाज के प्रति योगदान की भावना विकसित करने पर जोर दिया।
कार्यक्रम की शुरुआत में पूर्व मेजर जनरल गुलाब सिंह रावत, कर्नल अजय कोठियाल और कर्नल मयंक चौबे ने भागवत को शाल ओढ़ाकर और पारंपरिक टोपी पहनाकर स्वागत किया। कार्यक्रम में सेना का नेतृत्व कर चुके छह सेवानिवृत्त जनरल, एक वाइस एडमिरल, डीजी कॉस्ट गार्ड, ब्रिगेडियर और 50 से अधिक कर्नल रैंक के अधिकारी शामिल हुए। इसके अलावा कप्तान और हवलदार रैंक से सेवानिवृत्त सैकड़ों पूर्व सैनिक सैन्य वेशभूषा में उपस्थित रहे। मंच संचालन राजेश सेठी ने किया।
अपने संबोधन में भागवत ने कहा कि राष्ट्र निर्माण में समाज की केंद्रीय भूमिका होती है। समाज मजबूत होगा तो राष्ट्र की रक्षा भी सशक्त होगी। उन्होंने कहा कि संगठित और चरित्रवान समाज ही राष्ट्र को स्थायी शक्ति प्रदान करता है।
संवाद सत्र में अग्निवीर, कश्मीर, सामाजिक समरसता और पलायन पर चर्चा की गई। संवाद सत्र में पूर्व सैनिकों ने राष्ट्रीय सुरक्षा, अग्निवीर योजना, सामाजिक समरसता, पलायन और युवाओं से जुड़े विषयों पर प्रश्न पूछे। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम और क्रांतिकारी आंदोलनों का उल्लेख करते हुए कहा कि राष्ट्रभक्ति की परंपरा निरंतर चलती रही है। पलायन के मुद्दे पर कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य और स्थानीय उद्यमिता के माध्यम से रोजगार के अवसर बढ़ाने होंगे। समान नागरिक संहिता को उन्होंने राष्ट्रीय एकात्मता के लिए महत्वपूर्ण बताया।
भागवत ने पूर्व सैनिकों से सेवा कार्यों में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया। राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
क्या लो ब्लड शुगर हाई ब्लड शुगर से ज्यादा खतरनाक है? आइये जानते हैं क्या कहते हैं स्वास्थ्य विशेषज्ञ
डायबिटीज से जुड़ी चर्चाओं में अक्सर हाई ब्लड शुगर पर ही ध्यान दिया जाता है, लेकिन लो ब्लड शुगर यानी हाइपोग्लाइसीमिया कहीं ज्यादा खतरनाक साबित हो सकता है। यह ऐसी स्थिति है जो अचानक आती है और समय पर संभाला न जाए तो कुछ ही मिनटों में जानलेवा बन सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि इसके शुरुआती संकेतों को पहचानना और तुरंत कदम उठाना बेहद जरूरी है।
हाइपोग्लाइसीमिया तब होता है जब शरीर में ग्लूकोज का स्तर 70 mg/dL से नीचे गिर जाता है। इस स्थिति में दिमाग को पर्याप्त ऊर्जा नहीं मिल पाती, जिससे व्यक्ति बेहोशी या कोमा में जा सकता है। अक्सर लोग इसके शुरुआती लक्षणों—जैसे पसीना आना, कंपकंपी और घबराहट—को नजरअंदाज कर देते हैं, जो गंभीर गलती साबित हो सकती है।
यह समस्या खासकर तब ज्यादा खतरनाक हो जाती है जब मरीज सो रहा हो या अकेला हो। ऐसे में समय पर मदद मिलना मुश्किल हो सकता है, इसलिए हर डायबिटीज मरीज और उसके परिवार को इसके बारे में पूरी जानकारी होनी चाहिए।
लो ब्लड शुगर के पीछे कई कारण हो सकते हैं। दवाओं या इंसुलिन की ज्यादा मात्रा लेना, समय पर खाना न खाना, जरूरत से ज्यादा शारीरिक मेहनत करना या खाली पेट शराब का सेवन करना इसके प्रमुख कारण हैं। कई बार मरीज दवा लेने के बाद पर्याप्त भोजन नहीं करते, जिससे शरीर का ग्लूकोज संतुलन बिगड़ जाता है।
इसके लक्षण तेजी से सामने आते हैं। अत्यधिक पसीना, दिल की धड़कन तेज होना, हाथ-पैर कांपना, धुंधला दिखना या अचानक तेज भूख लगना—ये सभी संकेत हैं कि शुगर लेवल गिर रहा है। कुछ मामलों में चिड़चिड़ापन, भ्रम या बोलने में दिक्कत भी देखी जाती है। अगर समय रहते इन संकेतों पर ध्यान न दिया जाए, तो मस्तिष्क को स्थायी नुकसान पहुंच सकता है।
ऐसी स्थिति में तुरंत कार्रवाई जरूरी है। मरीज होश में हो तो उसे तुरंत मीठी चीजें—जैसे ग्लूकोज, जूस या टॉफी—देनी चाहिए। कुछ समय बाद शुगर दोबारा जांचें और जरूरत पड़ने पर यही प्रक्रिया दोहराएं। शुगर सामान्य होने के बाद संतुलित भोजन देना भी जरूरी है, ताकि स्तर फिर से न गिरे।
विशेषज्ञों के अनुसार, डायबिटीज मरीजों को हमेशा अपने साथ कोई मीठी चीज और पहचान से जुड़ी जानकारी रखनी चाहिए। दवाओं की मात्रा में खुद बदलाव न करें और नियमित रूप से शुगर की जांच करते रहें। याद रखें, जहां हाई शुगर को नियंत्रित करने के लिए समय मिलता है, वहीं लो शुगर में हर पल महत्वपूर्ण होता है।
(साभार)
कोर्ट से प्रतिबंधित जमीन की फर्जी बिक्री, भू-माफियाओं पर कसा शिकंजा
देहरादून। देहरादून में प्रतिबंधित भूमि के अवैध क्रय-विक्रय से जुड़े एक बड़े फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है, जिस पर जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। जिलाधिकारी सविन बंसल ने मामले का संज्ञान लेते हुए क्रेता और विक्रेता के खिलाफ थाना शहर कोतवाली में एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं।
प्राथमिक जांच में सामने आया कि मौजा आमवाला तरला की विवादित भूमि, जिस पर न्यायालय द्वारा पहले ही खरीद-फरोख्त पर रोक लगाई गई थी, उसे फर्जी दस्तावेज तैयार कर रजिस्ट्री कर दी गई। शिकायतकर्ता के अनुसार, संबंधित भूमि पीएसीएल (Pearls Agro Tech Corporation Limited) से जुड़ी प्रतिबंधित श्रेणी में आती है। इसके बावजूद विक्रेता ने वास्तविक तथ्य छिपाकर विलेख संख्या 8614/2025 और 8615/2025 का पंजीकरण करा लिया।
जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि भूमि का संबंध Golden Forests से जुड़ी परिसंपत्तियों से हो सकता है, जिन पर पहले से विभिन्न स्तरों पर प्रतिबंध लागू हैं। इस पूरे मामले को गंभीर मानते हुए प्रशासन ने रजिस्ट्रार कार्यालय और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी जांच शुरू कर दी है।
जिलाधिकारी के निर्देश पर रजिस्ट्रार देहरादून और उप जिलाधिकारी सदर को विलेखों की दोबारा जांच करने को कहा गया है। साथ ही, यदि इन विलेखों के आधार पर दाखिल-खारिज की प्रक्रिया पूरी हुई है, तो उसे तत्काल निरस्त करने के निर्देश दिए गए हैं।
रजिस्ट्रेशन अधिनियम, 1908 की धारा 83 के तहत कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर पंजीकरण कराने के आरोप में संबंधित लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। प्रशासन ने साफ किया है कि न्यायालय के आदेशों की अवहेलना और फर्जीवाड़े में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
देहरादून में ‘कृषि कुम्भ-2026’ का समापन, गणेश जोशी रहे मुख्य अतिथि
देहरादून। प्रदेश के कृषि मंत्री गणेश जोशी ने आज देवभूमि उत्तराखण्ड विश्वविद्यालय प्रेमनगर द्वारा आयोजित ‘कृषि कुम्भ-2026’ के समापन कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर उन्होंने मेले में लगाए गए विभिन्न कृषि, बागवानी एवं नवाचार आधारित स्टालों का अवलोकन किया तथा उत्कृष्ट कार्य करने वाले प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया। साथ ही मंत्री जोशी ने कृषि वानिकी पर आधारित पुस्तक का भी विमोचन किया।
अपने संबोधन में कृषि मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि भारत की आत्मा गाँवों में बसती है और गाँवों की आत्मा हमारे किसान हैं। किसान केवल अन्नदाता ही नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था के सशक्त स्तंभ, पर्यावरण के संरक्षक और संस्कृति के संवाहक भी हैं। उन्होंने कहा कि जब विश्व खाद्य सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन और सतत विकास जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है, तब भारतीय किसान अपनी मेहनत, नवाचार और संकल्प से समाधान प्रस्तुत कर रहा है।
कृषि मंत्री जोशी ने कहा कि प्रदेश के किसानों ने जैविक खेती, बागवानी, औषधीय पौधों, श्री अन्न (मिलेट्स), मधुमक्खी पालन, मशरूम उत्पादन एवं पशुपालन के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल की हैं। उन्होंने कहा कि “किसान मेला” केवल प्रदर्शनी नहीं, बल्कि ज्ञान, अनुभव और नवाचार का संगम है, जहाँ किसान, वैज्ञानिक, छात्र और उद्यमी एक मंच पर संवाद कर कृषि के भविष्य की दिशा तय करते हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन को सफल आयोजन के लिए बधाई देते हुए कहा कि शिक्षा और खेत के बीच की दूरी जितनी कम होगी, कृषि उतनी ही प्रगति करेगी। आज कृषि तकनीक आधारित, वैज्ञानिक और बाज़ार उन्मुख क्षेत्र बन चुकी है। उन्होंने कहा कि ड्रोन तकनीक, सटीक खेती, मिट्टी परीक्षण, स्मार्ट सिंचाई, जैव उर्वरक एवं डिजिटल मार्केटिंग आधुनिक कृषि के महत्वपूर्ण आयाम हैं।
कृषि मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि उत्तराखंड जैसे राज्य में जैविक उत्पादों की ब्रांडिंग, मंडुवा और झंगोरा जैसे मोटे अनाज का प्रसंस्करण, हर्बल उत्पाद, फल प्रसंस्करण, शहद एवं मशरूम उद्योग में अपार संभावनाएँ हैं। राज्य सरकार स्टार्टअप, मुद्रा योजना, आत्मनिर्भर भारत अभियान और कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय एवं तकनीकी सहायता उपलब्ध करा रही है। उन्होंने छात्र-छात्राओं से आह्वान किया कि वे केवल रोजगार खोजने वाले नहीं, बल्कि रोजगार सृजित करने वाले बनें और कृषि को उद्यम के रूप में अपनाकर राज्य की अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें।
इस अवसर पर कुलपति प्रो० अजय कुमार, रितिका मेहरा, अमन बंसल, पूर्व पार्षद मंजीत रावत सहित बड़ी संख्या में छात्र छात्राएं एवं कृषकगण शिक्षक शिक्षिकाएं उपस्थित रहे।
