एनएसए के तहत लिया गया निर्णय, सोनम वांगचुक की हिरासत रद्द
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने लद्दाख के चर्चित क्लाइमेट एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक को बड़ी राहत देते हुए उनकी हिरासत समाप्त करने का फैसला किया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बताया कि राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत की गई उनकी हिरासत को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया गया है। सरकार का कहना है कि यह कदम लद्दाख में शांति, स्थिरता और संवाद की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से उठाया गया है।
गृह मंत्रालय के अनुसार, वांगचुक को लद्दाख के लेह में कथित तौर पर भड़काऊ बयान देकर लोगों को उकसाने के आरोप में करीब छह महीने पहले हिरासत में लिया गया था। हालांकि, हालात की समीक्षा और विभिन्न पहलुओं पर विचार करने के बाद सरकार ने उनकी हिरासत समाप्त करने का निर्णय लिया है। मंत्रालय ने यह भी बताया कि वांगचुक पहले ही हिरासत की तय अवधि का लगभग आधा समय पूरा कर चुके थे।
सरकार ने अपने बयान में कहा कि लद्दाख में शांति और विश्वास का माहौल बनाना उसकी प्राथमिकता है, ताकि सभी पक्षों के साथ सकारात्मक और सार्थक संवाद संभव हो सके। इसी दिशा में यह फैसला लिया गया है।
दरअसल, राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत किसी व्यक्ति को अधिकतम 12 महीने तक हिरासत में रखा जा सकता है, लेकिन परिस्थितियों के आधार पर इसे पहले भी समाप्त किया जा सकता है।
वांगचुक को सितंबर 2025 में लद्दाख में हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद गिरफ्तार किया गया था। ये प्रदर्शन लद्दाख को राज्य का दर्जा देने और संविधान के छठे अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर हो रहे थे। उस दौरान प्रदर्शन हिंसक हो गए थे और पुलिस कार्रवाई में चार लोगों की मौत भी हुई थी।
गृह मंत्रालय ने कहा कि केंद्र सरकार लद्दाख के विभिन्न सामाजिक समूहों, संगठनों और सामुदायिक नेताओं के साथ लगातार संवाद कर रही है, ताकि क्षेत्र से जुड़े मुद्दों का शांतिपूर्ण समाधान निकाला जा सके। मंत्रालय ने यह भी चिंता जताई कि लगातार बंद और विरोध प्रदर्शनों से छात्रों, रोजगार तलाशने वालों, व्यापारियों, पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोगों और पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ा है।
सरकार ने भरोसा दिलाया कि लद्दाख के लोगों की चिंताओं को दूर करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे और बातचीत के जरिए समाधान खोजने की कोशिश जारी रहेगी।
गौरतलब है कि वांगचुक की पत्नी गीतांजलि अंगमो ने सुप्रीम कोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर कर उनकी हिरासत को गैरकानूनी बताते हुए रिहाई की मांग की थी। हाल ही में अदालत में सुनवाई के दौरान सरकार द्वारा पेश किए गए भाषण के ट्रांसक्रिप्ट पर भी सवाल उठाए गए थे। इसी बीच केंद्र सरकार ने उनकी हिरासत समाप्त करने का फैसला ले लिया।
लोकसंस्कृति और परंपराओं को सहेजने का संदेश देता है फूलदेई पर्व- धामी
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को मुख्यमंत्री आवास में सपरिवार लोकपर्व फूलदेई मनाया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रदेश वासियों को फूलदेई की शुभकामनाएं दीं।
मुख्यमंत्री आवास में लोकपर्व फूलदेई, हर्षोल्लास और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया गया। पारंपरिक परिधान पहनकर आए बच्चों ने घर की देहरी पर फूल व चावल अर्पित किए और सभी के सुख-समृद्धि की कामना की। बच्चों ने “फूल देई-छम्मा देई, जतुके दियाला- उतुके सई” जैसे लोकगीत गाए। मुख्यमंत्री ने बच्चों का स्वागत करते हुए उन्हें उपहार भेंट किए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकपर्व फूलदेई राज्य की समृद्ध लोकसंस्कृति, परंपराओं और प्रकृति के प्रति सम्मान के भाव को बनाए रखने का त्योहार है। उन्होंने कहा यह त्योहार बसंत ऋतु के आगमन के साथ प्रकृति की सुंदरता और जीवन में नई ऊर्जा का संदेश देता है। यह त्योहार दर्शाता है कि जीवन में हमेशा प्रकृति का आभार व्यक्त करना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा उत्तराखंड की लोक संस्कृति और लोकपर्व हमारी सांस्कृतिक धरोहर हैं, जिन्हें संरक्षित करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा हमने अपने लोक त्योहारों को धूमधाम से मनाना चाहिए जिससे कि यह त्यौहार आने वाली पीढ़ी तक पहुंचे और हमारी लोक संस्कृति हमेशा अमर रहे।
मुख्यमंत्री ने कहा प्रकृति के प्रति कृतज्ञता, बसंत के स्वागत और हमारी लोकसंस्कृति के संरक्षण का संदेश देने वाला फूलदेई पर्व हमें अपनी जड़ों से जुड़े रहने और आने वाली पीढ़ियों को इन अमूल्य परंपराओं से परिचित कराने की प्रेरणा देता है।
इस अवसर पर श्रीमती गीता पुष्कर धामी भी मौजूद रहीं।
मनीषा चौहान के गोल से भारत ने इटली को 1-0 से हराया
नई दिल्ली। एफआईएच महिला विश्व कप क्वालिफायर में भारतीय महिला हॉकी टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सेमीफाइनल मुकाबले में इटली को 1-0 से मात दी। इस जीत के साथ भारत ने फाइनल में जगह बना ली है, जहां उसका सामना इंग्लैंड की टीम से होगा। मैच में भारत की जीत की नायिका मनीषा चौहान रहीं, जिन्होंने निर्णायक गोल दागा।
सेमीफाइनल मुकाबले में भारतीय टीम ने शुरुआत से ही आक्रामक खेल दिखाया, हालांकि इटली की टीम ने भी कड़ा मुकाबला किया और लगातार हमले करने की कोशिश की। पहले हाफ में दोनों टीमों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिली और कोई भी टीम गोल करने में सफल नहीं हो सकी।
तीसरे क्वार्टर में भारत को अहम मौका मिला, जब 40वें मिनट में पेनल्टी कॉर्नर हासिल हुआ। इस मौके का फायदा उठाते हुए मिडफील्डर मनीषा चौहान ने शानदार ड्रैग फ्लिक लगाई, जो सीधे गोलपोस्ट में जा लगी और भारत को 1-0 की बढ़त मिल गई।
मैच के दौरान भारतीय गोलकीपर बीचू देवी खारिबाम ने भी शानदार बचाव करते हुए इटली के कई हमलों को नाकाम किया। अंतिम क्वार्टर में भारत को दो और पेनल्टी कॉर्नर मिले, लेकिन टीम बढ़त को और बड़ा नहीं कर सकी।
दूसरी ओर, मैच के अंतिम मिनटों में इटली ने बराबरी के लिए पूरा जोर लगाया और 59वें मिनट में पेनल्टी कॉर्नर भी हासिल किया, लेकिन भारतीय डिफेंस ने उसे गोल में बदलने नहीं दिया।
इस जीत के साथ भारत फाइनल में पहुंच गया है, जहां उसका मुकाबला इंग्लैंड से होगा। इंग्लैंड ने दूसरे सेमीफाइनल में स्कॉटलैंड को 2-0 से हराकर खिताबी मुकाबले में जगह बनाई। वहीं भारतीय टीम पहले ही अगस्त में नीदरलैंड और बेल्जियम में होने वाले महिला हॉकी विश्व कप के लिए क्वालिफाई कर चुकी है।
पॉलिटिकल-क्राइम जॉनर की चर्चित फिल्म सीरीज ‘सरकार’ को लेकर एक बार फिर बड़ी खबर सामने आई है। फिल्ममेकर राम गोपाल वर्मा ने इस फ्रेंचाइजी के अगले पार्ट ‘सरकार 4’ बनाने की घोषणा कर दी है। इस ऐलान के बाद से फिल्म प्रेमियों और फैंस के बीच नई फिल्म को लेकर उत्सुकता बढ़ गई है।
फिल्म निर्देशक राम गोपाल वर्मा ने अपनी लोकप्रिय फिल्म फ्रेंचाइजी ‘सरकार’ के चौथे भाग ‘सरकार 4’ को लेकर आधिकारिक घोषणा की है। उन्होंने बताया कि इस फिल्म की शूटिंग जल्द ही शुरू की जाएगी और अगले महीने से इसकी तैयारी शुरू होने वाली है।
राम गोपाल वर्मा ने यह जानकारी एक कार्यक्रम के दौरान साझा की। इस दौरान उन्होंने अपने दूसरे प्रोजेक्ट ‘द सिंडिकेट’ का भी जिक्र किया और हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि यह फिल्म उनके सारे पाप धो देगी।
‘सरकार’ फिल्म सीरीज की शुरुआत वर्ष 2005 में हुई थी। पहली फिल्म में अमिताभ बच्चन ने सुभाष नागरे का किरदार निभाया था, जो दर्शकों के बीच काफी लोकप्रिय हुआ। इस फिल्म में अभिषेक बच्चन ने उनके बेटे शंकर की भूमिका निभाई थी।
इसके बाद वर्ष 2008 में ‘सरकार राज’ रिलीज हुई, जिसमें ऐश्वर्या राय बच्चन ने भी अहम भूमिका निभाई। वहीं 2017 में आई ‘सरकार 3’ में अमिताभ बच्चन के साथ यामी गौतम, मनोज बाजपेयी और अमित साध जैसे कलाकार नजर आए थे।
अब ‘सरकार 4’ की घोषणा के साथ ही दर्शकों में एक बार फिर इस पॉलिटिकल-क्राइम ड्रामा को लेकर उत्साह बढ़ गया है। हालांकि फिल्म की स्टार कास्ट और कहानी से जुड़ी ज्यादा जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
(साभार)
परमार्थ निकेतन आश्रम में आयोजित अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव के 38वें संस्करण में शामिल हुए मुख्यमंत्री धामी
ऋषिकेश। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ऋषिकेश स्थित परमार्थ निकेतन आश्रम में आयोजित अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव के 38वें संस्करण में भाग लिया। इस दौरान उन्होंने देश-विदेश से आए योग आचार्यों, योग साधकों और श्रद्धालुओं को संबोधित किया तथा गंगा आरती में सहभागिता कर प्रदेशवासियों की समृद्धि, सुख-शांति और कल्याण की कामना की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि योग भारत की पवित्र भूमि से उदित वह दिव्य चेतना है, जिसने पूरे विश्व को स्वस्थ, संतुलित और सकारात्मक जीवन जीने की प्रेरणा दी है। आज दुनिया के करोड़ों लोग योग के माध्यम से शारीरिक सुदृढ़ता, मानसिक स्थिरता और आध्यात्मिक संतुलन प्राप्त कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड सदियों से योग और अध्यात्म की तपोभूमि रही है। इस परंपरा को आगे बढ़ाते हुए राज्य सरकार नई योग नीति के माध्यम से योग को जन-जन तक पहुँचाने और वैश्विक स्तर पर इसकी पहचान को और सशक्त बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
इस अवसर पर स्वामी चिदानंद सरस्वती, साध्वी भगवती सरस्वती, पद्मश्री सम्मानित गायक कैलाश खेर तथा विभिन्न देशों के राजनयिक और बड़ी संख्या में योग साधक मौजूद रहे।
जनसुनवाई में अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने पारिवारिक मामले, संपति विवादों सहित करंट से झुलसे मासूम की मदद और परिवारों को जोड़ने के लिए दिए सख्त निर्देश
रिश्तों को बचाना और परिवारों को जोड़ना ही आयोग की सर्वोच्च प्राथमिकता- कुसुम कंडवाल
रुद्रपुर (ऊधम सिंह नगर)। राष्ट्रीय महिला आयोग के आह्वान पर प्रदेशव्यापी अभियान ‘महिला आयोग आपके द्वार’ के अंतिम दिन जनपद ऊधम सिंह नगर के मुख्यालय रुद्रपुर स्थित जिलाधिकारी सभागार में राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल की अध्यक्षता में विशेष जनसुनवाई आयोजित की गई। जनपद मुख्यालय पहुँचने पर जिलाधिकारी नितिन भदोरिया ने अध्यक्ष महोदया का पौधा भेंट कर स्वागत किया। इस अवसर पर मेयर रुद्रपुर विकास शर्मा भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। जनसुनवाई में कुल 13 मामले सामने आए, जिनमें से 7 का मौके पर ही निस्तारण किया गया।
जनसुनवाई के दौरान जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आई महिलाओं ने पारिवारिक विवाद, घरेलू हिंसा और सामाजिक योजनाओं से जुड़ी समस्याएं आयोग के समक्ष रखीं।
अध्यक्ष ने मौके पर मौजूद विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्राप्त शिकायतों पर त्वरित और निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। कार्यक्रम के दौरान महिलाओं को उनके कानूनी अधिकारों की जानकारी दी गई तथा सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के बारे में भी जागरूक किया गया।
अपने संबोधन में अध्यक्ष कुसुम कण्डवाल ने कहा कि महिला आयोग का उद्देश्य दूरस्थ क्षेत्रों की महिलाओं तक पहुंचकर उनकी समस्याओं को सुनना, उन्हें न्याय दिलाना और आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करना है।
उन्होंने राज्य सरकार के प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं। उन्होंने अधिकारियों से यह भी कहा कि महिलाओं से जुड़े मामलों को संवेदनशीलता के साथ सुना जाए और उन्हें उचित सहयोग दिया जाए।
जनसुनवाई के दौरान एक पीड़िता ने अपने 9 वर्षीय पुत्र के साथ हुई हृदयविदारक घटना को साझा किया। उन्होंने बताया कि बीती 14 जुलाई 2024 को उनका बेटा 33,000 केवी की बिजली लाइन की चपेट में आने से गंभीर रूप से झुलस गया था। इस मामले में अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने विद्युत विभाग के अधिकारियों को गंभीरता दिखाने के निर्देश दिए। उन्होंने विभाग को स्पष्ट आदेश दिए कि मासूम के इलाज हेतु तत्काल हर संभव आर्थिक और चिकित्सीय सहयोग प्रदान किया जाए। अध्यक्ष ने कहा कि विभाग की लापरवाही का खामियाजा एक मासूम भुगत रहा है, अतः सहायता में कोई देरी बर्दाश्त नहीं होगी।
एक महिला की शिकायत पर कि आरोपी की माँ पॉक्सो पीड़िता को रास्ते में रोककर प्रताड़ित करती है, अध्यक्ष ने पुलिस को पीड़िता की सुरक्षा सुनिश्चित करने और दोषियों पर तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए।
सिडकुल महिला सुरक्षा: सिडकुल में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करने वाली महिला के घर पर कब्जे का प्रयास करने वाले उसके देवर के विरुद्ध पुलिस को कड़ी कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए गए। जनसुनवाई के दौरान दो मामले ऐसे रहे जो आयोग के पूर्व प्रयासों से सुलझ चुके थे और अब वे परिवार सुखी हैं। एक अन्य मामले में अध्यक्ष ने काउंसलिंग कर बिखरते परिवार को 15 दिन का समय दिया और कहा कि “रिश्तों को बचाना और परिवारों को जोड़ना ही आयोग की सर्वोच्च प्राथमिकता है।”
अध्यक्ष ने बताया कि 9 से 13 मार्च तक चला यह अभियान उन महिलाओं के लिए उम्मीद की किरण बना जो देहरादून मुख्यालय नहीं पहुँच सकती थीं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि शासन-प्रशासन के माध्यम से महिलाओं की समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर त्वरित निस्तारण किया जाए।
पांच दिवसीय प्रदेशव्यापी अभियान का उद्देश्य उन महिलाओं तक पहुँचना था जो देहरादून नहीं आ सकतीं। रुद्रपुर में इस अभियान का समापन हो रहा है, लेकिन महिलाओं को न्याय दिलाने का हमारा संकल्प निरंतर जारी रहेगा।”
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जनपद के सभी औद्योगिक संस्थानों और सरकारी विभागों में ICC (आंतरिक शिकायत समिति) का सक्रिय होना अनिवार्य है।
थानों में आने वाली पीड़ित महिलाओं के साथ पुलिस का व्यवहार संवेदनशील और मददगार होना चाहिए। वन स्टॉप सेंटर और महिला हेल्पलाइन का व्यापक प्रचार-प्रसार हो ताकि औद्योगिक क्षेत्र की श्रमिक महिलाएं भी जागरूक हो सकें।
इस अवसर पर आयोग की सदस्य कंचन कश्यप मेयर रुद्रपुर विकास शर्मा, मुख्य विकास अधिकारी दिवेश शाशनी, जिला प्रोबेशन अधिकारी व्योमा जैन, जिला कार्यक्रम अधिकारी मुकुल चौधरी, पुलिस क्षेत्राधिकारी रुद्रपुर प्रशांत कुमार व दौलत वर्मा, डीपीआरओ, निजी सचिव आयोग अध्यक्ष आधार वर्मा सहित विभिन्न विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।
प्राधिकरण क्षेत्र में बिना स्वीकृति विकसित की जा रही कॉलोनियों और अवैध लॉटिंग के खिलाफ कार्रवाई जारी
देहरादून। देहरादून में अनियोजित विकास और अवैध प्लॉटिंग के खिलाफ मसूरी–देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने एक बार फिर सख्त कार्रवाई करते हुए बड़ा अभियान चलाया। प्राधिकरण क्षेत्र में बिना स्वीकृति विकसित की जा रही कॉलोनियों और अवैध लॉटिंग के खिलाफ जारी कार्रवाई के तहत गणेशपुर, शिमला बाईपास रोड क्षेत्र में व्यापक ध्वस्तीकरण अभियान चलाया गया।एमडीडीए की टीम ने मौके पर पहुंचकर करीब 20 से 30 बीघा भूमि पर विकसित की जा रही अवैध प्लॉटिंग को चिन्हित किया और जेसीबी मशीनों की मदद से उसे ध्वस्त कर दिया। प्राधिकरण को लगातार मिल रही शिकायतों और जांच के बाद यह कार्रवाई अमल में लाई गई। प्राधिकरण से मिली जानकारी के अनुसार गणेशपुर क्षेत्र में इन्द्रजीत, अरुण पाल और विकास नामक व्यक्तियों द्वारा बड़े पैमाने पर बिना प्राधिकरण की स्वीकृति के भूमि का विकास किया जा रहा था। संबंधित व्यक्तियों ने भूमि को छोटे-छोटे प्लॉटों में विभाजित कर उसे बेचने की तैयारी कर ली थी। बताया गया कि इस पूरी प्लॉटिंग में न तो प्राधिकरण से लेआउट स्वीकृत कराया गया था और न ही किसी प्रकार की आवश्यक अनुमति ली गई थी।
मामले की शिकायत मिलने के बाद एमडीडीए की टीम ने मौके पर निरीक्षण किया, जिसमें अवैध प्लॉटिंग की पुष्टि हुई। इसके बाद नियमानुसार कार्रवाई करते हुए ध्वस्तीकरण का अभियान चलाया गया। कार्रवाई के दौरान अवैध रूप से बनाए गए रास्तों, प्लॉटों की सीमांकन दीवारों तथा अन्य संरचनाओं को जेसीबी मशीनों की सहायता से ध्वस्त कर दिया गया। इस दौरान प्राधिकरण के अधिकारियों की टीम के साथ स्थानीय प्रशासन और पुलिस बल भी मौजूद रहा, ताकि कार्रवाई के दौरान किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न न हो। एमडीडीए की इस कार्रवाई से अवैध रूप से प्लॉटिंग करने वाले लोगों में हड़कंप मच गया है। प्राधिकरण अधिकारियों का कहना है कि देहरादून शहर तेजी से विस्तार कर रहा है और इस दौरान कई स्थानों पर बिना अनुमति के कॉलोनियां विकसित करने की कोशिशें भी सामने आ रही हैं। ऐसी अवैध प्लॉटिंग से न केवल शहर का सुनियोजित विकास प्रभावित होता है बल्कि भविष्य में वहां रहने वाले लोगों को भी मूलभूत सुविधाओं की कमी का सामना करना पड़ता है। एमडीडीए ने स्पष्ट किया है कि प्राधिकरण क्षेत्र में बिना स्वीकृति किसी भी प्रकार की प्लॉटिंग या कॉलोनी विकसित करना पूरी तरह अवैध है और ऐसे मामलों में नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
उपाध्यक्ष एमडीडीए बंशीधर तिवारी का बयान
एमडीडीए के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा कि प्राधिकरण क्षेत्र में अवैध प्लॉटिंग और बिना अनुमति विकसित की जा रही कॉलोनियों के खिलाफ लगातार सख्त अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि गणेशपुर, शिमला बाईपास रोड क्षेत्र में लगभग 20 से 30 बीघा भूमि पर बिना प्राधिकरण की स्वीकृति के प्लॉटिंग की जा रही थी, जिसे चिन्हित कर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई है। बंशीधर तिवारी ने कहा कि देहरादून के सुनियोजित और व्यवस्थित विकास के लिए यह बेहद जरूरी है कि सभी निर्माण और भूमि विकास कार्य प्राधिकरण के नियमों के अनुरूप ही किए जाएं। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति को अवैध रूप से कॉलोनी विकसित करने या प्लॉटिंग करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने आम जनता से भी अपील की कि किसी भी जमीन या प्लॉट को खरीदने से पहले उसकी वैधता, भू-उपयोग और प्राधिकरण से स्वीकृति की पूरी जानकारी अवश्य प्राप्त कर लें, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
सचिव एमडीडीए मोहन सिंह बर्निया का बयान
एमडीडीए के सचिव मोहन सिंह बर्निया ने बताया कि गणेशपुर क्षेत्र में बिना स्वीकृति की जा रही अवैध प्लॉटिंग के खिलाफ नियमानुसार ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई है। उन्होंने कहा कि प्राधिकरण क्षेत्र में इस प्रकार की गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और जहां भी अवैध प्लॉटिंग या निर्माण की सूचना मिलती है, वहां तत्काल कार्रवाई की जाती है। उन्होंने लोगों से अपील की कि किसी भी अवैध प्लॉटिंग में निवेश करने से पहले उसकी वैधता की पूरी जांच अवश्य करें। यदि किसी क्षेत्र में अवैध निर्माण या प्लॉटिंग की जानकारी मिलती है तो इसकी सूचना एमडीडीए को दें, ताकि समय रहते उचित कार्रवाई की जा सके।
जिला प्रशासन की संवेदनशील पहल, जरूरतमंद परिवारों को मिला राहत का सहारा
देहरादून। जनपद में जरूरतमंद और असहाय परिवारों की मदद के लिए जिला प्रशासन लगातार मानवीय पहल कर रहा है। इसी क्रम में जिलाधिकारी के हस्तक्षेप से विपरीत परिस्थितियों का सामना कर रही दो महिलाओं को कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) फंड से एक-एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की गई है। प्रशासन का कहना है कि यह सहायता राशि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने और अपने परिवार के भरण-पोषण में सहारा देगी।
प्राप्त जानकारी के अनुसार सुद्धोवाला निवासी मीना ठाकुर ने जिलाधिकारी से मिलकर अपनी समस्या बताई थी। उनके पति पिछले करीब आठ वर्षों से लापता हैं, जिसके कारण परिवार की पूरी जिम्मेदारी उन पर आ गई है। मीना ठाकुर के परिवार में चार बेटियां और एक बेटा है, जिनमें दो बेटियां दिव्यांग हैं। आर्थिक तंगी के चलते वह किराये के मकान में रहकर बच्चों की पढ़ाई और परिवार की जरूरतों को पूरा करने में कठिनाई झेल रही थीं।
मामले को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी के निर्देश पर उपजिलाधिकारी न्याय कुमकुम जोशी ने जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत की। इसके बाद जिलाधिकारी ने सीएसआर फंड से मीना ठाकुर को एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान करने के निर्देश दिए, जो सीधे उनके बैंक खाते में स्थानांतरित कर दी गई। प्रशासन के अनुसार इस राशि से वह स्वरोजगार शुरू कर स्थायी आय का साधन विकसित कर सकेंगी।
इसके साथ ही जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि मीना ठाकुर के परिवार को विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाया जाए। उनकी बेटियों की पढ़ाई को “प्रोजेक्ट नंदा-सुनंदा” के माध्यम से जारी रखने और दिव्यांग बेटियों के लिए समाज कल्याण विभाग की योजनाओं का लाभ प्राथमिकता से उपलब्ध कराने को भी कहा गया है।
वहीं दूसरा मामला खुड़बुड़ा क्षेत्र का है, जहां किराये के मकान में रहने वाली परित्यक्ता महिला अमृता जोशी घरेलू कामकाज कर किसी तरह अपने दो बच्चों का पालन-पोषण कर रही थीं। उनके बड़े बेटे को मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्या है, जिसके इलाज में लगातार खर्च हो रहा था। आर्थिक तंगी के कारण छोटे बेटे की स्कूल फीस जमा न हो पाने से उसे स्कूल से निकाल दिया गया था, जबकि मकान का किराया न दे पाने के कारण मकान मालिक ने परिवार को घर से बाहर कर दिया।
अमृता जोशी की स्थिति को देखते हुए जिलाधिकारी ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए सीएसआर फंड से उन्हें भी एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान करने के निर्देश दिए। यह राशि सीधे उनके बैंक खाते में भेजी गई है।
प्रशासन के अनुसार इस सहायता से अमृता जोशी अपने बड़े बेटे का उपचार करा सकेंगी, छोटे बेटे की स्कूल फीस जमा कर सकेंगी और मकान का बकाया किराया भी चुका पाएंगी। साथ ही वह इस धनराशि से कोई छोटा व्यवसाय शुरू कर परिवार के लिए स्थायी आय का स्रोत भी विकसित कर सकती हैं।
जिला प्रशासन का कहना है कि जरूरतमंद और पीड़ित नागरिकों की समस्याओं के समाधान के लिए मानवीय दृष्टिकोण के साथ त्वरित कार्रवाई की जा रही है और आगे भी ऐसे परिवारों की हरसंभव सहायता की जाएगी।
देशभर में 18 आयुष फार्मेसियों और 7 परीक्षण प्रयोगशालाओं को मिली वित्तीय सहायता
देहरादून / नई दिल्ली। हरिद्वार से सांसद एवं उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत द्वारा संसद में पूछे गए प्रश्न के लिखित उत्तर में आयुष मंत्रालय ने आयुष औषधि गुणवत्ता एवं उत्पादन संवर्धन योजना (AOGUSY) के तहत देशभर में हुई प्रगति का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया।
आयुष मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रतापराव जाधव ने बताया कि केंद्र सरकार वर्ष 2021-22 से 2025-26 तक 122 करोड़ रुपये के कुल बजट के साथ इस केंद्रीय क्षेत्र योजना का संचालन कर रही है। योजना का उद्देश्य आयुर्वेद, सिद्ध, यूनानी और होम्योपैथी (ASU&H) औषधियों की गुणवत्ता में सुधार, परीक्षण प्रयोगशालाओं का सुदृढ़ीकरण तथा विनिर्माण इकाइयों को उच्च मानकों के अनुरूप विकसित करना है।
मंत्रालय के अनुसार, अब तक इस योजना के अंतर्गत देशभर में 18 आयुष फार्मेसियों और 7 औषधि परीक्षण प्रयोगशालाओं (DTL) को वित्तीय सहायता प्रदान की गई है। इसके लिए कुल 40.13 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की जा चुकी है। संसद में प्रस्तुत विवरण के अनुसार कई राज्यों में आयुष फार्मेसियों और औषधि परीक्षण प्रयोगशालाओं को सुदृढ़ करने के लिए वित्तीय सहायता दी गई है।
सांसद त्रिवेन्द्र ने इस योजना के माध्यम से देश में आयुष क्षेत्र के सुदृढ़ीकरण और गुणवत्ता मानकों को बेहतर बनाने की दिशा में केंद्र सरकार के प्रयासों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि आयुष औषधियों की वैश्विक मांग लगातार बढ़ रही है, ऐसे में उनके उत्पादन, गुणवत्ता नियंत्रण और परीक्षण प्रयोगशालाओं को मजबूत करना अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने यह भी कहा कि इस प्रकार की योजनाओं से आयुष क्षेत्र में शोध, विनिर्माण और रोजगार के नए अवसर उत्पन्न होंगे तथा भारत की पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली को वैश्विक स्तर पर और अधिक मजबूती मिलेगी।
सांसद त्रिवेन्द्र ने आशा व्यक्त की कि आने वाले समय में देश के अधिक से अधिक राज्यों की आयुष इकाइयाँ इस योजना का लाभ उठाकर उच्च गुणवत्ता मानकों को प्राप्त करेंगी और भारत को आयुष औषधियों के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने में योगदान देंगी।
जिला सहकारी विकास समिति की बैठक में सहकारिता समितियों को सशक्त कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने पर जोर
सरकारी देयों की वसूली में लापरवाही पर जिलाधिकारी ने जतायी कड़ी नाराजगी, कहा, बेहतर प्रदर्शन करने वाली समितियों को किया जाएगा सम्मानित
पौड़ी। जिला कार्यालय स्थित एनआईसी कक्ष में जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया की अध्यक्षता में जिला सहकारी विकास समिति की बैठक आयोजित की गयी। बैठक में सहकारिता विभाग की विभिन्न योजनाओं, समितियों की प्रगति तथा ग्रामीण क्षेत्रों में सहकारिता तंत्र को सशक्त बनाने के संबंध में विस्तृत समीक्षा की गयी।
समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने सहकारी देयों की वसूली की धीमी प्रगति पर कड़ी नाराज़गी व्यक्त की। उन्होंने स्पष्ट कहा कि वसूली कार्य में एमपैक्स के सचिवों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है और इसमें लापरवाही किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि जिन एमपैक्स (बहुउद्देशीय प्राथमिक सहकारी समितियों) द्वारा 50 प्रतिशत से कम वसूली की गई है, उनके सचिवों का वेतन रोके जाने की भी कार्यवाही की जाए। वहीं 90 प्रतिशत से अधिक वसूली करने वाली समितियों को प्रोत्साहन स्वरूप सम्मानित करने के निर्देश भी दिए गए।
जिलाधिकारी ने कहा कि जिन ग्राम पंचायतों में अभी तक सहकारी समितियों का गठन नहीं हुआ है, वहां नयी बहुउद्देशीय समितियों के गठन की प्रक्रिया तेज की जाय, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में सहकारिता के माध्यम से आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल सके। साथ ही समितियों को राष्ट्रीय सहकारी डेटाबेस में शत-प्रतिशत पंजीकृत करने के निर्देश भी दिए गए। जिलाधिकारी ने सहकारी समितियों को जन सेवा केंद्र के रूप में अधिक सक्रिय बनाए जाने तथा उनकी आय बढ़ाने के लिए नए अवसरों और संभावनाओं को चिन्हित किए जाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि जहां भी आर्थिक गतिविधियों की संभावनाएं हैं, वहां योजनाबद्ध तरीके से कार्य करते हुए समितियों को आत्मनिर्भर बनाया जाए। इसके लिए जिला सहकारिता निबंधक को प्रशिक्षण कार्यक्रमों पर विशेष ध्यान देने को भी कहा गया।
जिलाधिकारी ने समितियों को प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केंद्र के रूप में विकसित करने के प्रयास तेज करने के निर्देश दिए, ताकि किसानों को एक ही स्थान पर कृषि से संबंधित आवश्यक सेवाएं और संसाधन उपलब्ध कराए जा सकें। साथ ही एमपैक्स के माध्यम से नए एफपीओ (किसान उत्पादक संगठन) गठित करने तथा उन्हें विपणन केंद्र के रूप में विकसित करने के निर्देश दिए, जिससे किसानों को अपनी उपज के बेहतर विपणन के अवसर मिल सकें। साथ ही एफपीओ की नियमित निगरानी करने तथा उनके माध्यम से दी जा रही सेवाओं के प्रभाव का मूल्यांकन करने के निर्देश भी दिए गए। जिलाधिकारी ने कहा कि समितियों के माध्यम से जनसेवाओं के बेहतर वितरण पर विशेष ध्यान दिया जाए तथा इनके सकारात्मक प्रभाव का व्यापक प्रचार-प्रसार भी किया जाए, ताकि अधिक से अधिक लोग इनसे लाभान्वित हो सकें।
बैठक में जिलाधिकारी ने सुझाव दिया कि अन्न भंडारण की व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए कृषि उत्पादन मंडी समिति के गोदामों का उपयोग किया जा सकता है, जिससे भंडारण क्षमता का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होगा।
बैठक के दौरान जिला सहकारिता निबंधक सौरभ कुमार द्वारा सहकारिता विभाग के अंतर्गत संचालित योजनाओं, समितियों की गतिविधियों तथा आगामी कार्ययोजनाओं का विस्तृत प्रस्तुतिकरण दिया गया। बैठक में सहकारी समितियों के माध्यम से पशु चिकित्सा केंद्र स्थापित करने के प्रस्ताव पर भी चर्चा की गई, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालकों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हो सकें। साथ ही समितियों के आधुनिकीकरण के तहत पैक्स कंप्यूटरीकरण की प्रगति की समीक्षा करते हुए बताया गया कि जनपद की कुल 114 समितियों में से 95 समितियों का कंप्यूटरीकरण पूरा किया जा चुका है, जबकि शेष समितियों के लिए ई-पैक्स के तहत कार्य प्रगति पर है।
इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी गिरीश गुणवंत, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. विशाल शर्मा सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं संबंधित कर्मचारी उपस्थित रहे
