अर्थ एवं संख्या विभाग के 117 सहित चार विभागों में नियुक्ति—सीएम बोले, ईमानदारी से निभाएँ दायित्व
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरूवार को मुख्यमंत्री कैम्प कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में आयोजित कार्यक्रम में लोक सेवा आयोग के माध्यम से चयनित अर्थ एवं संख्या, कृषि एवं उद्यान तथा महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग के 178 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए। जिसमें अर्थ एवं संख्या विभाग के 117, कृषि विभाग के 12 उद्यान विभाग के 30 तथा महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग के 19 अभ्यर्थी शामिल है। उन्होंने नवनियुक्त अभ्यर्थियों को बधाई देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि सभी ईमानदारी, निष्ठा एवं समर्पण के साथ दायित्वों का निर्वहन कर उत्तराखंड को विकसित, आत्मनिर्भर एवं देश के अग्रणी राज्यों में शामिल करने के संकल्प को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगे।
मुख्यमंत्री ने नव-चयनित अभ्यर्थियों को बधाई देते हुए कहा कि गुणवत्तापूर्ण, विश्वसनीय एवं समयबद्ध आँकड़े ही योजनाओं की प्रभावी रूपरेखा, क्रियान्वयन और मूल्यांकन का आधार हैं तथा अर्थ एवं संख्या विभाग राज्य में डेटा संग्रह एवं विश्लेषण का नोडल विभाग होने के कारण अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि सहायक सांख्यिकी अधिकारी सरकार की विभिन्न योजनाओं और नीतियों के प्रभाव का आकलन कर तंत्र को तथ्यपरक फीडबैक उपलब्ध कराएँ, ताकि आवश्यकतानुसार सुधारात्मक कदम समय पर उठाए जा सकें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में पिछले साढ़े चार वर्षों के दौरान साढ़े 26 हजार से अधिक युवाओं को पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से सरकारी सेवा में अवसर प्रदान किए गए हैं, जो राज्य के गठन के बाद पूर्ववर्ती सरकारों के कार्यकाल की तुलना में दोगुने से भी अधिक हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने नकल माफियाओं पर कड़ा प्रहार करते हुए सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया है, जिससे भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता, गति और विश्वसनीयता सुनिश्चित हुई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना, नई स्टार्टअप एवं उद्यमिता नीति, नई पर्यटन नीति, कृषि एवं फल उत्पादन तथा होम-स्टे जैसी योजनाओं के माध्यम से राज्य में रोजगार एवं स्वरोजगार के व्यापक अवसर सृजित हुए हैं, जिसके परिणामस्वरूप प्रदेश में रिवर्स माइग्रेशन के आँकड़ों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
इस अवसर पर श्री कल्कि पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम, कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, रेखा आर्या, राज्यसभा सांसद नरेश बंसल, विधायक भरत चौधरी, सविता कपूर, 20 सूत्रीय कार्यक्रम एवं क्रियान्वयन समिति श्री के उपाध्यक्ष ज्योति प्रसाद गैरोला, प्रमुख सचिव आर.मीनाक्षी सुंदरम, सचिव एस.एन. पाण्डेय एवं संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।
मंत्री गणेश जोशी बोले—पारदर्शिता और सेवा भाव से ही सफल होती हैं सहकारी समितियां
देहरादून। कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने आज देहरादून स्थित ग्रीन व्यू गार्डन, सिनोला में बहुउद्देशीय साधन सहकारी समिति लिमिटेड चन्द्रोटी के नव-निर्वाचित सभापति, उपसभापति एवं संचालकों के शपथ ग्रहण समारोह में बतौर मुख्य अतिथि प्रतिभाग किया। शपथ ग्रहण समारोह के दौरान मंत्री गणेश जोशी की उपस्थिति में नव-निर्वाचित पदाधिकारियों ने अपने दायित्वों का ईमानदारी, पारदर्शिता और समर्पण के साथ निर्वहन करने की शपथ ली।
कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने नवगठित टीम को बधाई देते हुए कहा कि सहकारी समितियां ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में आर्थिक सशक्तिकरण की सबसे प्रभावी इकाइयों में से एक हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार भी सहकारी समितियों को मजबूत बनाने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है, जिससे किसानों, महिलाओं, युवाओं और स्थानीय उद्यमियों को नए अवसर उपलब्ध हो सकें।
उन्होंने कहा कि सहकारी समितियां तभी सफल होती हैं जब उनके चुने गए प्रतिनिधि संवेदनशीलता, पारदर्शिता और सेवा की भावना के साथ काम करें। उन्होंने भरोसा जताते हुए कहा कि नव-निर्वाचित पदाधिकारी समाज के अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से काम करेंगे।
कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने समिति को क्षेत्र में कृषि आधारित गतिविधियों, स्वरोजगार, समूह आधारित उत्पादन, विपणन चैनल मजबूत करने और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित भी किया।
इस अवसर पर सभापति किशन सिंह पुंडीर, उपसभापति जीत सिंह, श्याम सिंह पुंडीर, पंकज सैनी, योगेश कुमारी, किरन, अनुराग, लक्ष्मण सिंह रावत, संध्या थापा, रेणु शर्मा, सुनील क्षेत्री, हरिंदर रावत, माया राणा सहित कई लोग उपस्थित रहे।
शिक्षा से आपदा प्रबंधन तक—एआई से बदलेगा उत्तराखंड का भविष्य
देहरादून। उत्तराखंड सरकार ने राज्य की पहली एआई नीति का ड्राफ्ट जारी कर डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। नीति का उद्देश्य पहाड़ से लेकर मैदानी इलाकों तक शिक्षा, स्वास्थ्य, आपदा प्रबंधन और शासन को एआई आधारित सेवाओं से मजबूत करना है। सूचना प्रौद्योगिकी विभाग ने ड्राफ्ट पर जनता और विशेषज्ञों से सुझाव आमंत्रित किए हैं। सरकार ने मिशन को लागू करने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर, डेटा क्षमता, एआई एप्लिकेशन डेवलपमेंट और क्लीन एनर्जी को मुख्य आधार बनाया है।
एआई मिशन के सात प्रमुख सिद्धांत
टेलीमेडिसिन, ई-लर्निंग सहित मौजूदा योजनाओं को एआई तकनीक से अपग्रेड कर सरकारी सेवाओं को अधिक सक्षम बनाया जाएगा।
दूरस्थ पहाड़ी क्षेत्रों, बुजुर्गों और कमजोर समुदायों तक एआई की मदद से तेजी से सेवाएं पहुंचेंगी।
पर्यटन, स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, जलवायु और शहरी विकास जैसे क्षेत्रों में एआई तकनीक को प्राथमिकता मिलेगी।
इंडिया एआई, हिमालयी राज्यों, निजी कंपनियों और शोध संस्थानों के साथ मिलकर संयुक्त समाधान विकसित किए जाएंगे।
युवाओं को एआई स्किलिंग, रोजगार और स्टार्टअप के अधिक अवसर देकर राज्य में ही करियर निर्माण को बढ़ावा मिलेगा।
एआई सिस्टम पूरी तरह पारदर्शी, सुरक्षित और जवाबदेह होगा ताकि आम जनता का भरोसा कायम रहे।
हर विभाग के लिए एआई पायलट प्रोजेक्ट चलाने हेतु एक लीन एआई मिशन और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किया जाएगा।
2030 और 2047—दो बड़े लक्ष्य
2030 तक इंटरनेट पहुंच 78% से बढ़ाकर 100% और 2047 तक 130% करने का लक्ष्य।
स्मार्टफोन उपयोग 65% से बढ़ाकर 90% और डिजिटल साक्षरता 40% से बढ़ाकर 80% की जाएगी।
सभी ग्राम पंचायतों तक भारतनेट पहुंचाए जाने के साथ पहाड़ों में पीपीपी मॉडल से नेटवर्क का विस्तार होगा।
2030 तक कंप्यूट क्षमता 775 TFLOPS से बढ़ाकर 2047 तक 7500 TFLOPS और डेटा सेंटर क्षमता 5 से बढ़ाकर 45 MW की जाएगी।
गढ़वाली, कुमाऊंनी और हिमालयी पारिस्थितिकी से जुड़े स्थानीय डेटा सेट तैयार किए जाएंगे।
2030 तक तीन और 2047 तक सात एआई इनोवेशन सेंटर; 15 से बढ़ाकर 30 एआई इंक्यूबेशन सेंटर स्थापित किए जाएंगे।
देहरादून और रुड़की में एआई लैब तथा IIT रुड़की में स्टार्टअप इंक्यूबेशन सेंटर की स्थापना की जाएगी।
आपदा और जलवायु प्रबंधन में एआई का बड़ा असर
एआई की मदद से भूस्खलन, फ्लैश फ्लड और ग्लेशियल लेक फटने जैसी घटनाओं की पहले से पहचान संभव होगी।
सैटेलाइट व ड्रोन से मिले डेटा का एआई तुरंत विश्लेषण कर राहत और बचाव कार्य तेज करेगा।
बाढ़ और भूकंप जैसे परिदृश्यों के वर्चुअल सिमुलेशन से अधिकारी बेहतर तैयारी कर सकेंगे।
पुलों, सड़कों और बांधों की एआई सेंसर से लगातार निगरानी कर समय रहते खराबी का पता लगेगा।
आपदा के दौरान एआई चैटबॉट बहुभाषीय अपडेट और जानकारी उपलब्ध कराएगा।
ग्लेशियर और मौसम में हो रहे बदलाव का एआई विश्लेषण करने से भविष्य की नीतियां अधिक प्रभावी बनेंगी।
वन्यजीव गतिविधियों की निगरानी कर मानव–वन्यजीव संघर्ष कम करने में भी एआई मददगार साबित होगा।
नहर निर्माण, बैराज मरम्मत और जल उपलब्धता पर दोनों राज्यों के बीच हुई अहम चर्चा
लखनऊ/देहरादून। उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से शिष्टाचार भेंट की। बैठक के दौरान दोनों राज्यों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में विशेष रूप से इकबालपुर नहर के निर्माण, बनबसा बैराज की वृहद मरम्मत, तथा हरिद्वार की दो नहरों के उत्तराखंड को हस्तांतरण जैसे विषयों पर गंभीर विमर्श किया गया। सतपाल महाराज ने इन परियोजनाओं के महत्व और इनके समयबद्ध क्रियान्वयन पर जोर दिया।
इसके अलावा, मुजफ्फरनगर जिले के पवित्र तीर्थ स्थल शुक्रताल में सोलानी और बाणगंगा नदी में पर्याप्त जल उपलब्धता सुनिश्चित करने के मुद्दे पर भी दोनों नेताओं ने विस्तृत विचार-विमर्श किया। उन्होंने कहा कि धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व वाले इस क्षेत्र के लिए जल की निरंतर उपलब्धता अत्यंत आवश्यक है।
ग्रामीण बोले—कई महीनों से भालू की गतिविधियों से परेशान हैं लोग
टिहरी। भिलंगना ब्लॉक के मगरौं–पौखाल क्षेत्र में एक दर्दनाक घटना सामने आई, जहां गूंज संस्था के कर्मचारी पर भालू ने अचानक हमला कर दिया। हमले की दहशत में कर्मचारी की हालत बिगड़ गई और रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया। घटना से क्षेत्र में दहशत फैल गई है।
जानकारी के अनुसार, गूंज संस्था से जुड़े कर्मचारी राकेश गिरी देर शाम स्वाड़ी और चाह गडोलिया क्षेत्र में सफाई किट वितरण से लौट रहे थे। करीब आठ बजे मगरौं–पौखाल मार्ग पर अचानक भालू ने उन पर झपट्टा मार दिया, जिससे वह बाइक से गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गए। पीछे आ रहे लोगों ने शोर मचाकर भालू को भगाया, लेकिन हमले का डर राकेश गिरी की हालत पर भारी पड़ गया और उन्हें घबराहट के कारण हार्ट अटैक आ गया।
स्थानीय लोगों की मदद से उन्हें तुरंत श्रीनगर बेस अस्पताल ले जाया गया, जहां गंभीर स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें ऋषिकेश एम्स के लिए रेफर किया। लेकिन कीर्तिनगर पहुँचने से पहले ही उनकी मौत हो गई।
ग्राम खाल–पाली के प्रधान वीरेन्द्र सिंह नेगी सहित ग्रामीणों ने बताया कि क्षेत्र में लंबे समय से भालू की गतिविधियां बढ़ी हुई हैं, जिससे लोग दहशत में जी रहे हैं। उनका कहना है कि गडोलिया, स्वाड़ी, पौखाल, खाल, पाली और कोटी में भालू कई महीनों से घूम रहा है, जिसकी शिकायत डीएफओ तक भी की गई है। ग्रामीणों ने वन विभाग से भालू को पकड़ने और संवेदनशील इलाकों में पिंजरे लगाने की मांग की है।
उधर, पौखाल वन रेंज अधिकारी हर्षराम उनियाल का कहना है कि घटना की जानकारी मिलने के बाद इलाके में गश्त बढ़ा दी गई है, हालांकि विभाग को भालू हमले की कोई आधिकारिक सूचना प्राप्त नहीं हुई है। उन्होंने बताया कि मौके पर भालू के पंजों के निशान भी नहीं मिले हैं।
उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने राष्ट्रीय जम्बूरी के मौके पर किया सम्मानित
लखनऊ/देहरादून। भारत स्काउट्ड एंड गाइड्स की 19वीं राष्ट्रीय जम्बूरी के अवसर पर सूबे के कैबिनेट मंत्री डॉ. धन सिंह रावत को ‘सिल्वर एलीफेंट अवार्ड’ से सम्मानित किया गया। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने डॉ. रावत को यह सम्मान प्रदान किया। इस अवसर पर डॉ. रावत ने कहा कि स्काउटिंग युवाओं में अनुशासन, एकता और देशभक्ति का भाव विकसित करने का बड़ा मंच है, जिसका विस्तार प्रदेश के स्कूलों व कॉलेजों में निरंतर किया जा रहा है।
19वीं राष्ट्रीय जम्बूरी के अवसर पर उत्तर प्रदेश राजभवन में आयोजित एक भव्य समारोह में राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने भारत स्काउट्स एंड गाइड्स के सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मान ‘सिल्वर एलीफेंट अवार्ड’ से कैबिनेट मंत्री व डॉ. धन सिंह रावत को सम्मानित किया। इस अवसर राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने डॉ. रावत द्वारा उत्तराखंड में स्काउट-गाइड आंदोलन को मजबूत करने, इसे व्यापक स्तर पर लागू करने तथा युवाओं में सकारात्मक व राष्ट्रनिर्माण की सोच विकसित करने हेतु किये गये प्रयासों की सराहना की और उन्हें शुभकामनाएं भी प्रेषित की।
सिल्वर एलीफेंट अवार्ड से सम्मानित होने पर डॉ. रावत ने कहा कि यह क्षण उनके लिए अत्यंत प्रेरणादायी है। उन्होंने कहा कि स्काउटिंग युवाओं में अनुशासन, एकता, सेवा-भाव और देशभक्ति की भावना को विकसित करने का सशक्त मंच है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के स्कूलों एवं कॉलेजों में स्काउट-गाइड गतिविधियों के विस्तार और उसे अधिक प्रभावी बनाने के लिए सरकार निरंतर कार्य कर रही है।
डॉ. रावत ने भारत स्काउट्स एंड गाइड्स संगठन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह संस्था देशभर में स्काउट-गाइड गतिविधियों के माध्यम से युवाओं के शारीरिक, बौद्धिक, आध्यात्मिक और सामाजिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है साथ ही विश्वव्यापी भाईचारे की भावना को भी सशक्त बना रही है। उन्होंने कहा कि यह सम्मान उन्हें भविष्य में और अधिक समर्पण के साथ जनसेवा व युवा सशक्तिकरण के कार्यों में जुटने की प्रेरणा प्रदान करेगा।
स्थानीय लोगों से लिया विकास कार्यों का फीडबैक
नैनीताल। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नैनीताल में प्रातःकालीन भ्रमण के दौरान स्थानीय नागरिकों, दुकानदारों और युवाओं से मुलाकात कर उनके सुझाव और विचार सुने। इस दौरान उन्होंने प्रदेश सरकार की ओर से संचालित विभिन्न विकास परियोजनाओं एवं जनकल्याणकारी योजनाओं पर जनता का फीडबैक भी लिया।
लोगों के उत्साह और संतुष्टि ने क्षेत्र में हो रहे सकारात्मक बदलाव की झलक दिखाई।

मुख्यमंत्री धामी ने नैना देवी मंदिर परिसर में चल रहे सौंदर्यीकरण कार्यों का निरीक्षण किया। साथ ही अधिकारियों को डीएसए मैदान के सुधार कार्य, वलिया नाला एवं ठंडी सड़क क्षेत्र में भूस्खलन सुरक्षा कार्यों को तेज गति से पूरा करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार जनभागीदारी को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए पारदर्शी शासन और समग्र विकास के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है।
खड़खड़ी श्मशान घाट पर उमड़ा जनसैलाब, दिग्गज नेताओं ने दी अंतिम श्रद्धांजलि
हरिद्वार। उत्तराखंड राज्य आंदोलन के प्रमुख नेताओं में शामिल और पूर्व कैबिनेट मंत्री दिवाकर भट्ट का बुधवार को पूर्ण राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। हरिद्वार के खड़खड़ी श्मशान घाट पर हजारों की संख्या में लोग अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे, जहां जनसैलाब उमड़ पड़ा।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की ओर से जिलाधिकारी मयूर दीक्षित और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रमेंद्र सिंह डोभाल ने दिवाकर भट्ट के पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इसके बाद गार्ड ऑफ ऑनर और अंतिम सलामी के बीच दोपहर 2 बजे दाह संस्कार संपन्न हुआ।
पुत्र ललित भट्ट ने दी मुखाग्नि, शवयात्रा में उमड़ी भारी भीड़
दिवाकर भट्ट की अंतिम यात्रा उनके आवास से शुरू हुई, जिसमें हजारों लोग शामिल हुए। विभिन्न सामाजिक संगठनों, राजनीतिक दलों और आंदोलनकारियों ने शोक व्यक्त करते हुए दिवंगत नेता के योगदान को याद किया। श्मशान घाट पर उनके पुत्र ललित भट्ट ने विधिवत रूप से मुखाग्नि दी।
कई दिग्गज नेता रहे मौजूद, हरिद्वार में शोक की लहर
अंतिम यात्रा में पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, विभिन्न विधायकों, जनप्रतिनिधियों और कई संगठनों के पदाधिकारियों ने भाग लिया। उनके निधन से हरिद्वार सहित पूरे प्रदेश में शोक की लहर है।
प्रभावित परिवारों की मुआवजा राशि बढ़ने पर मुख्यमंत्री का किया आभार व्यक्त
पौड़ी। प्रदेश के पंचायती राज मंत्री सतपाल महाराज ने कहा है कि राज्य के पर्वतीय जनपदों में जंगली जानवरों के बढ़ते हमलों और उनसे आम जन की सुरक्षा के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जा रही है। पंचायत विभाग के अधिकारियों को अनटाइड फंड से रिहायशी इलाकों में ऐसे स्थानों की झाड़ियों को काटवाने के निर्देश दिए गए हैं जहां जंगली जानवरों के छिपे होने की आशंका रहती है। उन्होंने जंगली जानवरों के हमलों में मारे जाने वाले लोगों को 10 लाख की मुआवजा राशि दिये जाने और घायलों के उपचार का पूरा खर्च सरकार द्वारा वहन किये जाने के निर्णय पर प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का आभार व्यक्त किया है।
महाराज ने कहा कि पर्वतीय जनपदों में जंगली जानवरों के बढ़ते हमलों को देखते हुए आमजन एवं ग्रामीणों की सुरक्षा के मध्येनजर पकड़े गए जंगली जानवरों को प्राणी उद्यानों और वनतारा में रखने की व्यवस्था बनाने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। इसके लिए बड़ी-बड़ी संस्थाओं एवं कंपनियों से उनके रखरखाव एवं खान-पान की व्यवस्था पर होने वाले खर्च को वाहन करने का उनसे अनुरोध किया जा रहा है। क्योंकि एक बाघ को पड़कर यदि किसी भी प्राणी उद्यान में रखा जाता है तो उसके खान-पान एवं रखरखाव पर 20 से 25 लाख रुपए के लगभग वार्षिक खर्च आता है। इसलिए इस तरह की पहल करना आवश्यक है। ताकि आम लोगों के साथ-साथ वन्य जीवों की भी सुरक्षा हो सके।
वार्षिक रिपोर्टों से लेकर महिलाओं की नाइट शिफ्ट अनुमति तक महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मिली मंजूरी
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में बुधवार को सचिवालय में राज्य मंत्रिमंडल की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई। बैठक में कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, सौरभ बहुगुणा सहित सभी मंत्री उपस्थित रहे, जबकि कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज और धन सिंह रावत वर्चुअल माध्यम से जुड़े।
बैठक की शुरुआत राज्य निर्माण आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले वरिष्ठ आंदोलनकारी और पूर्व कैबिनेट मंत्री दिवाकर भट्ट के निधन पर दो मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करने से हुई। मंत्रिमंडल ने दिवाकर भट्ट के राज्य निर्माण और राज्य के विकास में योगदान को भी याद किया। कैबिनेट बैठक में कई अहम फैसले किये गए।
कैबिनेट के प्रमुख निर्णय
1. उत्तराखंड जैव विविधता बोर्ड की वार्षिक रिपोर्ट विधानसभा में पेश होगी
पर्यावरण संरक्षण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के प्रस्ताव पर 2024-25 की वार्षिक रिपोर्ट को आगामी विधानसभा सत्र में पटल पर रखने की स्वीकृति प्रदान की गई।
2. अभियोजन विभाग में 46 नए पद सृजित
अभियोजन विभाग के पुनर्गठन के तहत देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंहनगर और नैनीताल में सहायक अभियोजन अधिकारी के 46 अतिरिक्त पद सृजित करने को मंजूरी दी गई, ताकि अदालतों में प्रभावी पैरवी सुनिश्चित की जा सके।
3. यूजेवीएन लिमिटेड की 2022-23 की रिपोर्ट विधानसभा में पेश होगी
ऊर्जा विभाग के प्रस्ताव के तहत उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड की वित्तीय वर्ष 2022-23 की वार्षिक वित्तीय रिपोर्ट को विधानसभा में प्रस्तुत करने को स्वीकृति मिली।
4. मानचित्र स्वीकृति की अनिवार्यता पर पुनः परीक्षण का निर्णय
आवास विभाग के प्रस्ताव—प्राधिकरण क्षेत्र में मानचित्र स्वीकृति की अनिवार्यता—को मंत्रिमंडल ने पुनः परीक्षण हेतु वापस भेजा।
5. महिलाओं को रात्रि पाली में कार्य की अनुमति
राज्य की दुकानों और प्रतिष्ठानों में महिला कर्मकारों को रात्रि 9 बजे से सुबह 6 बजे तक सुरक्षा प्रावधानों के साथ रात्रि पाली में कार्य की अनुमति दी गई।
महिला कर्मकारों की लिखित सहमति अनिवार्य
आर्थिक सशक्तिकरण और लैंगिक समानता को बढ़ावा
कार्यस्थलों पर अधिक अवसर उपलब्ध होंगे
6. दुकान एवं स्थापना अधिनियम में संशोधन को मंजूरी
उत्तराखंड दुकान एवं स्थापन (रोजगार विनियमन और सेवा-शर्त) अधिनियम में संशोधन अध्यादेश 2025 पर कैबिनेट की मुहर।
संशोधनों से:
छोटे प्रतिष्ठानों पर अतिरिक्त बोझ नहीं बढ़ेगा
बड़े प्रतिष्ठानों पर कर्मकारों को सभी कानूनी लाभ
निवेश को बढ़ावा, कार्य समय में लचीलापन
अधिक रोजगार अवसर और आर्थिक गतिविधि में वृद्धि
7. देहरादून मेट्रो नियो परियोजना पर केंद्र के सुझावों से कैबिनेट अवगत
देहरादून शहर में प्रस्तावित मेट्रो नियो परियोजना पर केंद्र सरकार के सुझावों को कैबिनेट के समक्ष प्रस्तुत किया गया। इस पर आगे मार्गदर्शन लिया जाएगा।
8. वन्यजीव हमलों में मृतकों के आश्रितों को 10 लाख रुपये मुआवजा
मानव वन्यजीव संघर्ष राहत वितरण नियमावली 2025 में संशोधन को मंजूरी।
पहले मुआवजा ₹6 लाख
अब बढ़ाकर ₹10 लाख किया गया
यह संशोधन टाइगर कंज़र्वेशन फ़ाउंडेशन के निर्णय और मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुरूप है।
