दोनों आरोपियों के पैर में लगी गोली
आरोपियों के पास से दो देशी तमंचे और एक स्कूटी बरामद
देहरादून। राजधानी देहरादून में हाल ही में हुए हत्याकांड के खुलासे के तहत पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने मुख्य शूटर और उसके एक सहयोगी को अलग-अलग स्थानों पर हुई मुठभेड़ों के बाद गिरफ्तार कर लिया है। दोनों आरोपियों के पैर में गोली लगी है और उन्हें उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
हत्याकांड के बाद एसएसपी देहरादून के निर्देश पर जिलेभर में सघन चेकिंग अभियान चलाया गया। शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक नाकेबंदी कर संदिग्धों की तलाश की जा रही थी। इसी अभियान के दौरान तड़के सुबह रायपुर थाना क्षेत्र के लाडपुर जंगल में पुलिस टीम ने एक संदिग्ध को घेर लिया। खुद को घिरा देख बदमाश ने पुलिस पर फायरिंग कर दी, जिस पर पुलिस ने जवाबी कार्रवाई करते हुए उसे मुठभेड़ के बाद दबोच लिया। इस दौरान बदमाश के पैर में गोली लगी, जिसके बाद उसे कोरोनेशन अस्पताल में भर्ती कराया गया।
इसी क्रम में लालतप्पर पुलिस चौकी क्षेत्र में चेकिंग के दौरान एक स्कूटी सवार बदमाश पुलिस को देखकर भागने लगा। पीछा करने पर वह एक खंडर फैक्ट्री में घुस गया और वहां से पुलिस टीम पर फायरिंग की। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने उसे भी मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया। इस आरोपी के दाहिने पैर में गोली लगी है।
पुलिस ने दोनों आरोपियों के पास से दो देशी तमंचे और एक स्कूटी बरामद की है। प्रारंभिक पूछताछ में दोनों ने तिब्बती मार्केट के सामने हुए हत्याकांड को अंजाम देने की बात स्वीकार की है। पुलिस आरोपियों से गहन पूछताछ कर घटना से जुड़े अन्य पहलुओं और संभावित सहयोगियों की जानकारी जुटा रही है।
मुख्यमंत्री ने प्रदेश की कानून-व्यवस्था की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शासकीय आवास पर आयोजित प्रदेश की कानून-व्यवस्था की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में अधिकारियों को अपराध नियंत्रण को लेकर सख्त निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में घटित होने वाले सभी प्रकार के अपराधों पर तत्काल मुकदमा दर्ज किया जाए और अपराधियों के विरुद्ध कठोर एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि कानून हाथ में लेने वालों, असामाजिक तत्वों तथा प्रदेश की शांति भंग करने का प्रयास करने वालों के खिलाफ किसी भी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। ऐसे तत्वों पर कठोरतम कार्रवाई की जाएगी, ताकि समाज में कानून का भय बना रहे।
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने आदतन एवं संगठित अपराध में संलिप्त अपराधियों पर कड़ी निगरानी रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ऐसे अपराधियों की पहचान कर उनके खिलाफ विधिक प्रावधानों के तहत प्रभावी कार्रवाई की जाए।
इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने थानों और चौकियों की कार्यप्रणाली को और अधिक सुदृढ़ करने, संवेदनशील क्षेत्रों में गश्त बढ़ाने तथा निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि जनसुरक्षा सर्वोपरि है और त्वरित कार्रवाई के परिणाम धरातल पर स्पष्ट रूप से दिखाई देने चाहिए।
मुख्यमंत्री ने दोहराया कि प्रदेश में शांति, सुरक्षा और सुशासन राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसके लिए प्रशासन को पूरी तत्परता से कार्य करना होगा।
उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी की आम जनता से अपील, अवैध कॉलोनियों में निवेश से बचें, भूखंड खरीदने से पूर्व उसकी विधिक स्थिति की अवश्य करें जांच
देहरादून- नियोजित विकास की दिशा में प्रतिबद्ध मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) द्वारा अवैध प्लॉटिंग एवं अनधिकृत निर्माणों के विरुद्ध व्यापक और निरंतर अभियान संचालित किया जा रहा है। प्राधिकरण क्षेत्र में सुनियोजित शहरी विकास, आधारभूत संरचनाओं की सुरक्षा तथा आमजन के हितों की रक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए विभिन्न स्थानों पर ध्वस्तीकरण एवं सीलिंग की प्रभावी कार्रवाई की गई। यह कार्रवाई उत्तराखंड शहरी एवं ग्राम नियोजन तथा विकास अधिनियम के प्रावधानों तथा पूर्व में जारी नोटिसों के अनुपालन में की गई।
रामपुर शंकरपुर, सेलाकुई में लगभग 10 बीघा अवैध प्लॉटिंग ध्वस्त
प्राधिकरण को प्राप्त शिकायतों एवं क्षेत्रीय निरीक्षण के उपरांत यह पाया गया कि जावेद, डेविड एवं अन्य व्यक्तियों द्वारा रामपुर शंकरपुर, सेलाकुई, देहरादून में लगभग 10 बीघा भूमि पर बिना मानचित्र स्वीकृति एवं विधिक अनुमति के अवैध रूप से प्लॉटिंग की जा रही थी। संबंधित व्यक्तियों को नियमानुसार पूर्व में नोटिस जारी कर कार्य तत्काल बंद करने के निर्देश दिए गए थे। निर्देशों की अवहेलना किए जाने पर प्राधिकरण की प्रवर्तन टीम द्वारा मौके पर पहुंचकर अवैध रूप से विकसित की गई सड़कों, प्लॉटों के सीमांकन, मिट्टी समतलीकरण एवं अन्य संरचनात्मक गतिविधियों का ध्वस्तीकरण किया गया। कार्रवाई के दौरान सहायक अभियंता श्री शशांक सक्सेना, अवर अभियंता श्री सिद्धार्थ सेमवाल, सुपरवाइजर एवं पुलिस बल मौके पर उपस्थित रहे। संपूर्ण कार्रवाई विधिसम्मत एवं शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराई गई।
ढकरानी, हरबर्टपुर में 10–15 बीघा अवैध प्लॉटिंग पर सख्त कदम
इसी क्रम में पांवटा रोड स्थित ढकरानी हॉस्पिटल के पीछे, हरबर्टपुर, देहरादून क्षेत्र में अतुल विकास एवं त्यागी द्वारा लगभग 10 से 15 बीघा भूमि पर अनधिकृत प्लॉटिंग किए जाने की सूचना प्राप्त हुई। स्थलीय निरीक्षण में अवैध विकास की पुष्टि होने पर संबंधित पक्षों को विधिक नोटिस निर्गत किए गए थे। नोटिस के बावजूद अवैध गतिविधियां जारी रहने पर प्राधिकरण की संयुक्त टीम द्वारा मौके पर पहुंचकर अवैध मार्ग निर्माण, प्लॉटों के चिन्हांकन एवं अन्य विकास कार्यों को ध्वस्त किया गया। कार्रवाई के दौरान प्राधिकरण के अधिकारीगण, तकनीकी कार्मिक एवं पर्याप्त पुलिस बल तैनात रहा, जिससे कार्रवाई सुव्यवस्थित एवं प्रभावी रूप से संपन्न की जा सकी।
सेवला कला में अवैध निर्माण पर सीलिंग
चन्द्र परिसर, सेवला कला, देहरादून में नितिन चौहान द्वारा बिना स्वीकृत मानचित्र के निर्माण कार्य किए जाने की पुष्टि होने पर संयुक्त सचिव श्री गौरव चटवाल के आदेशों के अनुपालन में उक्त भवन पर सीलिंग की कार्रवाई की गई। इस दौरान सहायक अभियंता श्री विजय सिंह रावत, अवर अभियंता श्री अभिजीत सिंह थलवाल, सुपरवाइजर तथा पुलिस बल मौके पर उपस्थित रहे। नियमानुसार सीलिंग की कार्यवाही पूर्ण करते हुए परिसर को अग्रिम आदेशों तक बंद कर दिया गया है।
उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी का बयान
उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा कि मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण सुनियोजित एवं संतुलित विकास के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अवैध प्लॉटिंग और अनधिकृत निर्माण न केवल शहरी व्यवस्था को प्रभावित करते हैं, बल्कि आमजन की गाढ़ी कमाई को भी जोखिम में डालते हैं। प्राधिकरण द्वारा ऐसे मामलों में किसी भी प्रकार की शिथिलता नहीं बरती जाएगी। उन्होंने कहा कि बिना स्वीकृत मानचित्र एवं वैधानिक अनुमति के किए जा रहे निर्माणों पर कठोर कार्रवाई की जाएगी और आवश्यकता पड़ने पर ध्वस्तीकरण एवं सीलिंग की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। उन्होंने आम नागरिकों से अपील की कि भूखंड खरीदने से पूर्व उसकी विधिक स्थिति की जांच अवश्य करें तथा अवैध कॉलोनियों में निवेश से बचें। नियोजित विकास ही सुरक्षित भविष्य की गारंटी है।
सचिव मोहन सिंह बर्निया का बयान
सचिव मोहन सिंह बर्निया ने बताया कि प्रवर्तन अभियान निरंतर जारी रहेगा। सभी क्षेत्रीय अभियंताओं को नियमित निरीक्षण एवं त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि अवैध गतिविधियों में संलिप्त व्यक्तियों के विरुद्ध अधिनियम के अंतर्गत विधिक कार्रवाई की जाएगी तथा कार्रवाई का व्यय भी संबंधित पक्षों से वसूला जाएगा।
प्राधिकरण की अपील
मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण आमजन को पुनः सूचित करता है कि बिना मानचित्र स्वीकृति एवं विधिक अनुमति के किसी भी प्रकार की प्लॉटिंग अथवा निर्माण पूर्णतः अवैध है। नागरिकों से अपेक्षा है कि किसी भी संपत्ति क्रय-विक्रय से पूर्व उसकी स्वीकृति एवं वैधानिक स्थिति की पुष्टि अवश्य करें।प्राधिकरण क्षेत्र में सुनियोजित, सुरक्षित एवं पारदर्शी विकास सुनिश्चित करने हेतु यह अभियान आगे भी निरंतर जारी रहेगा।
उत्तराखंड रेल परियोजनाओं को लेकर सीएम धामी के निर्देश
देहरादून। राज्य में प्रस्तावित रेल परियोजनाओं में टनल के साथ बनने वाले एस्केप टनल को समानांतर सड़कों ( पैरेलल रोड्स) के रूप में विकसित किया जा सके, इसकी व्यवस्था बनाई जाए। ऋषिकेश कर्णप्रयाग रेल लाइन परियोजना में बनी एस्केप टनल का भविष्य में किस प्रकार इस्तेमाल किया जा सकता है, इसपर भी कार्य योजना तैयार जाए साथ ही कर्णप्रयाग से बागेश्वर तक रेल लाइन के विस्तार की संभावना पर भी कार्य किया जाए।
यह निर्देश मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को सचिवालय में राज्य में निर्माणाधीन एवं प्रस्तावित रेल परियोजनाओं की समीक्षा बैठक के दौरान दिए।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को टनकपुर – बागेश्वर रेल लाइन परियोजना पर भी तेजी से कार्य करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा उक्त परियोजना के अंतर्गत विभिन्न वैकल्पिक मार्गों पर भी विचार किया जाए। उन्होंने कहा परियोजना के निर्माण कार्य से अधिकांश क्षेत्र एवं जनता लाभान्वित हो सके इसके लिए अल्मोड़ा एवं सोमेश्वर क्षेत्र को भी जोड़ने की संभावनाओं पर कार्य किया जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा केंद्र सरकार से टनकपुर बागेश्वर रेल लाइन परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना घोषित किए जाने का आग्रह किया जाए, जिससे इसके निर्माण कार्य को गति मिल सकेगी।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ऋषिकेश कर्णप्रयाग परियोजना के अंतर्गत प्रस्तावित रेलवे स्टेशनों के लिए इंटीग्रेटेड प्लान बनाया जाए। जिससे इन रेलवे स्टेशनों के आसपास स्थानीय लोगों के लिए बाजार विकसित हो सके। उन्होंने कहा सभी निर्माणाधीन रेलवे स्टेशनों में स्वयं सहायता समूहों, राज्य की स्थानीय उत्पादों की बिक्री के लिए भी विशेष व्यवस्था की जाए।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रस्तावित रेलवे स्टेशन के आसपास के क्षेत्र में अभी से लोगों को स्वरोजगार के लिए प्रेरित किया जाए उन्हें होमस्टे एवं अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं के बारे में जन जागरूकता पर ध्यान दिया जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि निर्माणाधीन रेलवे स्टेशनों के आसपास स्थित विभिन्न गांव, कस्बों, धार्मिक स्थलों एवं अन्य पर्यटन स्थलों के विकास के लिए भी रोड मैप तैयार किया जाए। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित रेलवे स्टेशनों के आसपास के स्थानों का समुचित पुनरविकासर किया जाए। ताकि रेल परियोजनाओं के निर्माण कार्य पूरा होने के बाद भविष्य में बड़ी संख्या में उत्तराखंड आने वाले लोगों के आवागम को सुविधाजनक बनाया जाए।
बैठक में बताया गया कि ऋषिकेश करणप्रयाग रेल लाइन परियोजना के अंतर्गत 72.5 प्रतिशत कार्य पूरा हो गया है साथ ही टनल निर्माण का 95.30% कार्य पूरा हो गया है। इस परियोजना के अंतर्गत कुछ कल 28 टनलों का निर्माण किया है जिनमें से 16 मुख्य टनल एवं 12 एस्केप टनल हैं। इसके अतिरिक्त विभिन्न प्रस्तावित रेलवे स्टेशनों का निर्माण अलग-अलग थीम के आधार पर किया जा रहा है। जिसमें शिवपुरी स्टेशन को नीलकंठ महादेव, ब्यासी को महर्षि वेदव्यास, देवप्रयाग को समुद्र मंथन, जनासु को उत्तराखंड कल्चर, मलेथा को वीर माधो सिंह भंडारी, श्रीनगर को मां राज राजेश्वरी देवी, धारी देवी को मां धारी देवी, तिलनी को केदारनाथ, घोलतीर को पांच महादेव, गौचर को बाल गोविंद कृष्ण एवं कर्णप्रयाग को बद्रीनाथ मंदिर,राधा कृष्ण थीम पर आधारित निर्माण किया जा रहा है।
टनकपुर बागेश्वर रेल लाइन परियोजना के बारे में बताया गया कि परियोजना के अंतर्गत रेलवे द्वारा तीन सर्वेक्षण विकल्प प्रस्तावित किए गए हैं। साथ ही अन्य वैकल्पिक मार्गो एवं अल्मोड़ा और सोमेश्वर क्षेत्र को भी इस रेल मार्ग से जोड़ने की योजना पर भी कार्य किया जा रहा है।
बैठक में मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, प्रमुख सचिव आर.के सुधांशु, आर. मीनाक्षी सुंदरम, सचिव ब्रजेश कुमार संत, पंकज पांडे, मुख्य परियोजना प्रबंधक हिमांशु बडोनी, विजय, ओम प्रकाश, सुमन सिंह, कल्याण सिंह भंडारी, सनत कुमार सिंह एवं वर्चुअल माध्यम से रेलवे के अधिकारी मौजूद रहे।
देहरादून। राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में कानून व्यवस्था, स्वास्थ्य सेवाओं, श्रमिक कल्याण और स्वरोजगार योजनाओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।
कैबिनेट के निर्णय
1.राज्य मंत्रिमंडल के निर्णय के बाद उत्तराखंड में ड्रग फ्री मुहिम और तेज होगी। अभी तक एंटी नारकोटिक्स टॉस्क फोर्स में पुलिस फोर्स से प्रतिनियुक्ति पर कार्मिक लिए जा रहे थे। टॉस्क फोर्स का गठन 2022 में किया गया था। अब इस फोर्स के लिए अलग से ढांचा खड़ा करने की शुरूआत हुई है। इस क्रम में राज्य मुख्यालय में पहली बार 22 पदों का सृजन किया गया है। एक पुलिस उपाधीक्षक, दो ड्रग निरीक्षक, एक निरीक्षक, दो उपनिरीक्षक, चार मुख्य आरक्षी और आठ आरक्षी, दो आरक्षी चालक समेत कुल 22 पद सृजित किए जाएंगे।
2.राज्य मंत्रिमंडल ने वन विभाग में कार्यरत दैनिक श्रमिकों को न्यूनतम वेतनमान दिए जाने का निर्णय लिया है। इस संबंध में मंत्रिमंडलीय उप-समिति ने सरकार को संस्तुति दी थी। इस आधार पर सरकार ने 589 दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को न्यूनतम 18 हजार रूपये वेतन देने का निर्णय लिया है। वन विभाग/वन विकास निगम में कार्यरत दैनिक श्रमिकों की कुल संख्या 893 है, जिसमें से 304 श्रमिकों को पूर्व से ही न्यूनतम वेतनमान का लाभ प्राप्त हो रहा है।
3.राज्य मंत्रिमंडल ने कर्मचारी राज्य बीमा योजना (ईएसआई) के अंतर्गत चिकित्सा सेवा संवर्ग के चिकित्सा अधिकारियों और उच्चतर पदों की सेवा-शर्तों के निर्धारण के संबंध में भी महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। इस क्रम में उत्तराखण्ड कर्मचारी राज्य बीमा योजना, श्रम चिकित्सा सेवा नियमावली, 2026” को प्रख्यापित किया गया है, जिसके तहत कुल 94 पद होगें। इनमें 76 चिकित्सा अधिकारी, 11 सहायक निदेशक, छह संयुक्त निदेशक और एक अपर निदेशक का पद शामिल है। इससे पहले, ईएसआई के ढांचे में एक सीएमओ और 13 चिकित्सा अधिकारी के पद शामिल थे।
4.मुख्यमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना की कार्यान्वयन अवधि वित्तीय वर्ष 2025-26 तक विस्तारित किए जाने के संबंध में भी राज्य मंत्रिमंडल ने निर्णय लिया है। खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा केंद्र प्रायोजित योजना प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना की कार्यान्वयन अवधि को एक वर्ष के लिए 31 मार्च 2026 (वित्तीय वर्ष 2025-26) तक बढ़ाया गया है। इस क्रम में राज्य सेक्टर के अंतर्गत संचालित “मुख्यमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना की कार्यान्वयन अवधि को भी वित्तीय वर्ष 2025-26 (दिनांक 31 मार्च 2026) तक विस्तारित करने का निर्णय लिया गया है। साथ ही यह भी निर्णय लिया गया है कि भविष्य में यदि भारत सरकार के स्तर पर इस योजना की अवधि विस्तारित होती है, तो राज्य में भी इसे विस्तारित माना जाएगा।
5.राज्य मंत्रिमंडल ने उत्तराखंड कारागार और सुधारात्मक सेवाएं (संशोधन) अधिनियम, 2026 के प्रारूपण के संबंध में भी निर्णय लिया है। माननीय सर्वाेच्च न्यायालय के आदेशों में यह निर्देशित किया गया है कि कारागार नियमावलियों/मॉडल प्रिजन मैनुअल में प्रयुक्त “आदतन अपराधी (Habitual offenders)” शब्द की परिभाषा संबंधित राज्य विधानमंडलों द्वारा अधिनियमित कानूनों के अनुरूप होनी चाहिए। संशोधन विधेयक को आगामी सत्र में माननीय उत्तराखंड विधान सभा के समक्ष पुनः स्थापित किए जाने की राज्य मंत्रिमंडल ने अनुमोदन प्रदान कर दिया है।
6.कोविड-19 वैश्विक महामारी के दौरान उद्योगों को राहत प्रदान किए जाने के उद्देश्य से बोनस संदाय (उत्तराखण्ड संशोधन) विधेयक, 2020 के अंतर्गत यह प्रावधान किया गया था कि नियोजक के पास आवंटनीय अधिशेष (Allocable Surplus) उपलब्ध होने की स्थिति में ही कर्मचारियों को न्यूनतम बोनस का भुगतान किया जाएगा। उक्त विधेयक में किए गए प्रावधानों के संबंध में श्रम एवं रोजगार मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा असहमति व्यक्त की गई। साथ ही वर्तमान में कोविड-19 महामारी जैसी परिस्थितियाँ विद्यमान न होने तथा गृह मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा प्रस्तावित विधेयक को राष्ट्रपति की अनुमति के बिना विधायी एवं संसदीय कार्य विभाग, उत्तराखण्ड शासन को उपलब्ध कराए जाने के कारण विधेयक को आगे बढ़ाया जाना संभव नहीं हो पाया। उपरोक्त तथ्यों के दृष्टिगत बोनस संदाय (उत्तराखण्ड संशोधन) विधेयक, 2020 को यथास्थिति विधान सभा से वापस लिए जाने का निर्णय राज्य सरकार द्वारा लिया गया है।
सरस मेला और फूड फेस्टिवल 2026 की तैयारियों को लेकर मंत्री गणेश जोशी ने की समीक्षा बैठक
देहरादून। ग्राम्य विकास मंत्री गणेश जोशी ने कैंप कार्यालय में ग्राम्य विकास विभाग के अधिकारियों के साथ आगामी सरस मेला एवं फूड फेस्टिवल 2026 की तैयारियों को लेकर समीक्षा बैठक की। बैठक के दौरान ग्राम्य विकास मंत्री गणेश जोशी ने निर्देश दिए कि जनपद उधम सिंह नगर में 14 से 23 फरवरी तक आयोजित होने वाले 10 दिवसीय सरस मेला तथा जनपद चम्पावत में 18 से 24 फरवरी तक प्रस्तावित सात दिवसीय फूड फेस्टिवल की सभी आवश्यक तैयारियां समयबद्ध रूप से पूर्ण की जाएं, ताकि कार्यक्रमों का सफल आयोजन सुनिश्चित हो सके।
इस अवसर पर मंत्री गणेश जोशी ने ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ ब्रांड की प्रगति की भी जानकारी ली। विभागीय अधिकारियों ने अवगत कराया कि पहाड़ की महिलाओं द्वारा तैयार उत्तराखण्डी उत्पादों के इस ब्रांड ने लॉन्चिंग के मात्र दो वर्षों के भीतर साढ़े तीन करोड़ रुपये से अधिक की बिक्री कर उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की है। उन्होंने बताया कि आगामी समय में हाउस ऑफ हिमालयाज के उत्पाद विदेशों में भी बिक्री के लिए उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे स्थानीय महिलाओं को रोजगार के नए अवसर प्राप्त होंगे।
ग्राम्य विकास मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि राज्य सरकार ग्रामीण आजीविका, महिला सशक्तिकरण एवं स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। इस अवसर पर अपर सचिव ग्राम्य विकास झरना कमठान सहित अन्य अधिकारीगण उपस्थित रहे।
वारदात को अंजाम देने के बाद फरार हुए आरोपी
देहरादून। शहर के तिब्बती मार्केट क्षेत्र में दिनदहाड़े गोलीकांड की सनसनीखेज वारदात सामने आई। अज्ञात बदमाशों ने एक युवक को गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया। प्रारंभिक जांच में घटना के पीछे आपसी रंजिश की आशंका जताई जा रही है। सूचना मिलते ही पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे और पूरे इलाके को घेरकर जांच शुरू कर दी गई।
पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक हमलावर दोपहिया वाहन से मौके पर पहुंचे थे और वारदात को अंजाम देने के बाद फरार हो गए। मृतक की पहचान अर्जुन सिंह (40) के रूप में हुई है, जो अमरदीप गैस एजेंसी के संचालक बताए जा रहे हैं। बताया गया है कि अर्जुन परेड ग्राउंड में टेनिस खेलने आए थे और इसी दौरान जब वह अपनी कार में बैठे थे, तभी अचानक आए हमलावरों ने उन पर गोली चला दी, जो सीधे सीने में लगी।
पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी में रखवा दिया है। एसपी सिटी प्रमोद कुमार ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जांच की जा रही है। आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है तथा पुलिस की कई टीमें जांच में जुटी हुई हैं।
गौरतलब है कि देहरादून जिले में दो सप्ताह के भीतर यह चौथी हत्या है। इससे पहले 29 जनवरी को विकासनगर क्षेत्र में एक छात्रा की हत्या हुई थी। 31 जनवरी को ऋषिकेश में एक महिला प्रीति रावत की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। जबकि 2 फरवरी को देहरादून के मच्छी बाजार में गुंजन नामक युवती की चापड़ से हत्या कर दी गई थी। इन घटनाओं ने राजधानी में कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
विभागीय आपदा प्रबंधन योजना बनाने की डेडलाइन तय, 28 फरवरी तक का दिया समय
देहरादून। सेंदाई फ्रेमवर्क (2015-2030) के लक्ष्यों की समयबद्ध प्राप्ति सुनिश्चित करने के लिए सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने राज्य के सभी रेखीय विभागों को अपने-अपने विभागीय आपदा प्रबंधन प्लान को 28 फरवरी तक अनिवार्य रूप से अंतिम रूप देने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि आपदा प्रबंधन योजनाएं केवल औपचारिक दस्तावेज न रहकर विभागीय कार्यप्रणाली का अभिन्न हिस्सा बननी चाहिए, ताकि आपदा के समय त्वरित, समन्वित और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन योजना में सेंडई फ्रेमवर्क के अंतर्गत आपदा जोखिम न्यूनीकरण, तैयारी, प्रतिक्रिया और पुनर्बहाली से जुड़े लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए सभी विभागों को अपने-अपने दायित्वों को स्पष्ट रूप से परिभाषित करना होगा। योजनाओं में यह स्पष्ट रूप से अंकित होना चाहिए कि आपदा से पहले, आपदा के दौरान और आपदा के बाद विभाग की भूमिका क्या होगी तथा किस अधिकारी और इकाई द्वारा कौन-सा कार्य किया जाएगा।
राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र में आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान सचिव सुमन ने निर्देश दिए कि प्लान में विभागीय अधिकारियों, कर्मचारियों एवं आम जनमानस के क्षमता विकास को विशेष प्राथमिकता दी जाए। इसके लिए प्रत्येक विभाग वार्षिक प्रशिक्षण कैलेंडर तैयार करे, जिसमें यह स्पष्ट रूप से दर्शाया जाए कि किस माह में कौन-सा प्रशिक्षण, अभ्यास या जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इस वार्षिक कैलेंडर को विभागीय आपदा प्रबंधन प्लान का अनिवार्य भाग बनाया जाए, ताकि तैयारी एक सतत प्रक्रिया के रूप में चलती रहे।
उन्होंने सभी विभागों को अपने-अपने विभाग में उपलब्ध मानव संसाधनों, मशीनरी, उपकरणों एवं तकनीकी संसाधनों की विस्तृत सूची तैयार कर इन संसाधनों की जीआईएस आधारित मैपिंग करने तथा इसे प्लान में शामिल करने के निर्देश दिए ताकि आपदा के समय संसाधनों की त्वरित पहचान और उपयोग संभव हो सके। साथ ही भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए नए एवं अत्याधुनिक उपकरणों की खरीद की योजना को भी विभागीय प्लान में सम्मिलित करने के निर्देश दिए गए।
समीक्षा के दौरान विभागों द्वारा आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई के लिए योजना, संकट के समय निर्णय एवं समन्वय की प्रक्रिया, सूचना एवं संचार की योजना, राहत एवं बचाव कार्यों की तैयारी, आपदा के बाद पुनर्बहाली एवं पुनर्निर्माण की व्यवस्था, प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली, भविष्य में होने वाले नुकसान को कम करने के उपाय, स्थानीय समुदाय की सहभागिता तथा नुकसान के आकलन और जोखिम मूल्यांकन से संबंधित व्यवस्थाओं के बारे जानकारी दी गई। सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने बताया कि विभागीय आपदा प्रबंधन प्लान विभाग को आपदा के समय स्पष्ट दिशा, तय जिम्मेदारी और पूर्व-निर्धारित कार्यप्रणाली उपलब्ध कराने में उपयोगी सिद्ध होगा।
उन्होंने बताया कि विभागीय आपदा प्रबंधन योजना के माध्यम से विभागीय संसाधनों का बेहतर उपयोग, अंतर-विभागीय समन्वय, त्वरित निर्णय प्रक्रिया तथा प्रभावी राहत एवं पुनर्वास सुनिश्चित किया जा सकता है। साथ ही यह योजना विकास कार्यों में आपदा जोखिम न्यूनीकरण को मुख्यधारा में लाने और बिल्ड बैक बेटर की अवधारणा को लागू करने में भी सहायक होगी। बैठक में स्वास्थ्य एवं शिक्षा विभाग के अधिकारियों द्वारा स्कूल आपदा प्रबंधन प्लान तथा हॉस्पिटल आपदा प्रबंधन प्लान के संबंध में भी जानकारी दी गई।
बैठक में यूएसडीएमए के वित्त नियंत्रक अभिषेक कुमार आनंद, संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी मो0 ओबैदुल्लाह अंसारी, डाॅ पीडी माथुर, डाॅ. बिमलेश जोशी, यूजेवीएनएल के ईई मनोज रावत, शहरी विकास के सहायक निदेशक विनोद कुमार, डिप्टी डायरेक्टर सोनिका पंत, पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक डाॅ. सुनील कुमार अवस्थी, डाॅ अशोक कुमार, शिक्षा विभाग से रचना रावत, विमल असवाल, राजेश लाम्बा, नवीन सिंघल, एसई पिटकुल बीएस पांगती के साथ ही विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
विभागों को माॅक ड्रिल कराने के निर्देश
सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने निर्देश दिए कि सभी विभाग नियमित रूप से आपदा के दौरान अपने-अपने विभाग से संबंधित कार्यों को लेकर मॉक अभ्यास आयोजित करें, जिससे आपदा के समय विभागीय मानव संसाधन, उपकरणों, संचार व्यवस्था एवं समन्वय क्षमता का वास्तविक परीक्षण हो सके। मॉक अभ्यास के दौरान सामने आने वाली कमियों को दूर किया जाए ताकि आपदा की स्थिति में प्रभावी रूप से राहत एवं बचाव कार्य संचालित किए जा सकें।
आपदा प्रबंधन प्लान में ये रहेंगे शामिल
* राज्य एवं विभाग से संबंधित आपदा जोखिम एवं संवेदनशीलता विश्लेषण
* रोकथाम एवं न्यूनीकरण के उपाय
* तैयारी एवं प्रतिक्रिया योजना
* उपलब्ध मानव, मशीनरी एवं तकनीकी संसाधनों का विवरण
* इमरजेंसी एक्शन प्लान एवं एसओपी
* अर्ली वार्निंग एवं सूचना प्रसारण व्यवस्था
* राहत, पुनर्वास, रिकवरी एवं रिकंस्ट्रक्शन योजना
* डैमेज एंड लॉस असेसमेंट की प्रक्रिया
* क्षमता विकास एवं वार्षिक प्रशिक्षण कैलेंडर
* बिल्ड बैक बेटर एवं विकास योजनाओं में आपदा जोखिम न्यूनीकरण का समावेशन
हरिद्वार–रुड़की महायोजना- 2041 के प्रारूप पर समीक्षा, शहरी विकास को मिलेगी नई दिशा
देहरादून। उत्तराखंड में नियोजित, संतुलित एवं सतत शहरी विकास को गति देने के उद्देश्य से आवास विभाग द्वारा लगातार ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। इसी क्रम में भारत सरकार द्वारा वित्त पोषित अमृत 1.0 योजना के अंतर्गत प्रस्तावित हरिद्वार एवं रुड़की महायोजना–2041 के प्रारूप पर नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग की समीक्षा बैठक आयोजित की गई।
भविष्य के शहरों का रोडमैप
बैठक में हरिद्वार एवं रुड़की क्षेत्र के दीर्घकालिक विकास को दृष्टिगत रखते हुए महायोजना के विभिन्न प्रावधानों पर विस्तृत चर्चा की गई। इसमें भूमि उपयोग, आवासीय एवं औद्योगिक क्षेत्रों का संतुलित विकास, यातायात प्रबंधन, आधारभूत सुविधाओं का विस्तार, पर्यावरण संरक्षण तथा सार्वजनिक सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं को प्राथमिकता दी गई। शशि मोहन श्रीवास्तव, चीफ टॉउन एंड कन्ट्री प्लॉनर ने इस योजना की बावत सभी महत्वपूर्ण जानकारी सचिव आवास डॉ आर राजेश कुमार से साझा की। शशि मोहन श्रीवास्तव द्वारा महायोजना के प्रारूप की विस्तृत प्रस्तुति देते हुए अब तक की गई कार्यवाही और आगामी चरणों की जानकारी दी गई।
सार्वजनिक सहभागिता को मिला विशेष महत्व
उल्लेखनीय है कि हरिद्वार एवं रुड़की महायोजना–2041 के प्रारूप पर सार्वजनिक सुनवाई की प्रक्रिया सफलतापूर्वक संपन्न की जा चुकी है। इस प्रक्रिया के अंतर्गत हरिद्वार महायोजना के लिए लगभग 350 तथा रुड़की महायोजना के लिए लगभग 550 सुझाव एवं आपत्तियां प्राप्त हुई हैं। बैठक के दौरान इन सभी आपत्तियों एवं सुझावों पर बिंदुवार चर्चा करते हुए उनके निस्तारण की प्रक्रिया को अंतिम रूप देने पर मंथन किया गया। आवास सचिव डॉ आर राजेश कुमार ने स्पष्ट निर्देश दिए कि जनता से प्राप्त प्रत्येक सुझाव का गंभीरता, पारदर्शिता एवं नियमानुसार परीक्षण किया जाए, ताकि महायोजना जनअपेक्षाओं के अनुरूप और व्यावहारिक बन सके।
नियोजित विकास से सशक्त होगा हरिद्वार–रुड़की क्षेत्र
आवास सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने बैठक के दौरान कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार उत्तराखंड के शहरों को आधुनिक, सुव्यवस्थित और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप विकसित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। हरिद्वार एवं रुड़की महायोजना–2041 का उद्देश्य केवल भौतिक विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें पर्यावरण संरक्षण, बेहतर यातायात व्यवस्था, सुदृढ़ आधारभूत ढांचा और नागरिकों को उच्च जीवन स्तर प्रदान करना भी शामिल है। सार्वजनिक सुनवाई के माध्यम से प्राप्त सुझावों एवं आपत्तियों को गंभीरता से लिया गया है, ताकि महायोजना वास्तविक जरूरतों को प्रतिबिंबित कर सके। अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूर्ण करते हुए महायोजना को शीघ्र अंतिम रूप दिया जाए, जिससे क्षेत्र के नियोजित एवं सतत विकास को नई गति मिल सके।
शीघ्र अनुमोदन की दिशा में कार्रवाई
बैठक के अंत में आवास सचिव द्वारा नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि महायोजना–2041 को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में समयबद्धता सुनिश्चित की जाए, ताकि इसे शीघ्र शासन स्तर पर अनुमोदन हेतु प्रस्तुत किया जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि महायोजना का प्रभावी क्रियान्वयन आने वाले वर्षों में हरिद्वार एवं रुड़की को आधुनिक शहरी केंद्र के रूप में विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
बैठक में नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग के मुख्य नगर एवं ग्राम नियोजक सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
सोशल मीडिया की चकाचौंध में खो रही नई पीढ़ी और बिखर रहे संस्कार, महिला आयोग की अध्यक्ष ने माता-पिता को किया आगाह
स्क्रीन की चमक से रिश्ते नहीं चमकते- कुसुम कंडवाल
सोशल मीडिया पर अनजान लोगों से संपर्क बढ़ा रहा साइबर अपराध और अनैतिक रिश्तों का जाल- कुसुम कंडवाल
देहरादून। आधुनिकता की दौड़ में सोशल मीडिया का बढ़ता प्रभाव अब समाज के लिए एक गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। उत्तराखंड राज्य महिला आयोग ने सोशल मीडिया के माध्यम से समाज में बढ़ते दुष्प्रभावों और बिखरते पारिवारिक ताने-बाने पर गहरी चिंता व्यक्त की है।
राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी और बच्चे सोशल मीडिया की चकाचौंध में अपनी वास्तविक राह से भटक रहे हैं। आयोग ने इस समस्या की मुख्य जड़ ‘पारिवारिक समन्वय की कमी’ को माना है। उत्तराखंड राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने समाज में सोशल मीडिया के बढ़ते घातक प्रभावों और उससे उपजी गंभीर समस्याओं पर संज्ञान लिया है।
उन्होंने अनुभव के आधार पर विश्लेषण के साथ भयावह पहलू पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सोशल मीडिया पर अनजान लोगों के संपर्क में आने से महिलाएं और बेटियां लगातार साइबर अपराध और अनैतिक रिश्तों के जाल में फंस रही हैं। ‘डिजिटल फ्रेंडशिप’ के नाम पर बन रहे ये अवैध रिश्ते न केवल वैवाहिक जीवन को तबाह कर रहे हैं, बल्कि मासूम जिंदगियों को भी गलत रास्ते पर ले जा रहे हैं।
आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज की युवा पीढ़ी और बच्चे सोशल मीडिया की आभासी दुनिया में इस कदर फंस गए हैं कि उनका अपने परिवार, अपनी संस्कृति और संस्कारों से नाता पूरी तरह टूटता जा रहा है। घर के बुजुर्गों और माता-पिता के साथ बच्चों का रिश्ता अब नाममात्र का रह गया है क्योंकि बच्चे मोबाइल की चकाचौंध में अपनी एक अलग ही काल्पनिक दुनिया बना लेते हैं और उसे ही अपना सब कुछ मान बैठते हैं।
उन्होंने कहा कि संस्कारों से यही कटाव बेटियों और महिलाओं के भटकने की मुख्य कड़ी बन रहा है। सोशल मीडिया के मायाजाल में फंसकर लड़कियां धीरे-धीरे परिवार से भावनात्मक रूप से कट जाती हैं और इस दलदल में धंसती चली जाती हैं। विशेष रूप से जो लड़कियां घर से बाहर पढ़ाई या नौकरी के लिए दूसरे शहरों में रह रही हैं, वे अक्सर अनजान लोगों के संपर्क में आकर बिना सोचे-समझे ‘लिव-इन’ जैसे रिश्तों में बंध रही हैं। आयोग ने चेतावनी दी है कि ऐसे रिश्तों के परिणाम प्रायः दुखद और असफल होते हैं, जो न केवल एक जीवन को बर्बाद करते हैं बल्कि पूरे परिवार को मानसिक और सामाजिक पीड़ा देते हैं।
विकट स्थिति को देखते हुए कुसुम कंडवाल ने बतौर राज्य महिला आयोग अध्यक्ष अभिभावकों के लिए एक विशेष अपील की है कि माता-पिता अपने बच्चों से नियमित संवाद करें और उनके साथ दोस्ताना व्यवहार रखते हुए उनके दिनभर की गतिविधियों की जानकारी लें। यह अत्यंत आवश्यक है कि समय-समय पर बच्चों के रहन-सहन, उनकी संगत और उनकी बदलती आदतों को बारीकी से परखा जाए। माता-पिता की सक्रिय निगरानी और बच्चों के साथ उनका मजबूत भावनात्मक रिश्ता ही उन्हें इस डिजिटल दलदल से बाहर निकाल सकता है और समाज को पतन की ओर जाने से रोक सकता है।
उन्होंने महिलाओं और बेटियों को कहा कि ”स्क्रीन की चमक से रिश्ते नहीं चमकते, रिश्तों की चमक अपनों के साथ समय बिताने और संवाद से आती है। तकनीक का उपयोग स्वयं की उन्नति के लिए, अपनी संस्कृति और संस्कारों को समझने के लिए करें।”
उन्होंने कहा कि राज्य महिला आयोग इस मामले पर संज्ञान लेते हुए हर प्रकार से हमारी भावी पीढ़ी सहित उनके अभिभावकों एवं परिजनों को भी जागरूक करने का प्रयास करेगा। उन्होंने कहा महिलाओं एवं बेटियों की सुरक्षा के सरकार एव आयोग पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है, परंतु परिवार के लोगों को भी इसमें अपनी अहम भूमिका निभानी होगी। सोशल मीडिया के माध्यम से समाज की मुख्य धारा से जुड़ने के साथ साथ हमें अपने परिवार में समन्वय बनाकर संस्कृति के नैतिक मूल्यों और संस्कारों को सीखना एवं समझना होगा।
