देहरादून। नंदा गौरा योजना के लिए अब 20 दिसंबर तक आवेदन किया जा सकता है। कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या के निर्देशों के क्रम में विभाग ने आवेदन की अंतिम तारीख बढ़ाने का फैसला किया है। कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने बताया कि पहले इस योजना के लिए आवेदन की अंतिम तारीख 30 नवंबर तय की गई थी। कन्या जन्म के आधार पर योजना का लाभ लेने और 12वीं उत्तीर्ण करने के बाद इस योजना के तहत सहायता प्राप्त करने के लिए अभी तक 30000 से ज्यादा आवेदन प्राप्त हो चुके हैं।

कैबिनेट मंत्री ने बताया कि जन मिलन कार्यक्रमों के दौरान प्रदेश में कई जगह लोगों ने बताया कि पात्र होने की बावजूद में विभिन्न वजहों से अभी तक इस योजना के लिए आवेदन नहीं कर पाए हैं। ऐसे लोगों को अवसर देने के लिए योजना के आवेदन की तारीख को 20 दिसंबर तक बढ़ाने का फैसला किया गया है।
कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने बताया कि प्राप्त आवेदनों में 21 दिसंबर से 31 दिसंबर तक सुधार का अवसर दिया जाएगा लेकिन इसके बाद यह तारीख आगे नहीं बढ़ाई जाएगी। इसलिए सभी अभ्यर्थियों को समय सीमा के अंदर आवेदन करना होगा।
जनसुविधाओं से जुड़े प्रोजेक्टों की प्रगति का किया सत्यापन, गुणवत्ता–समयबद्धता व आधुनिक जनसुविधाओं पर विशेष जोर
देहरादून। मसूरी–देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) द्वारा संचालित विकास कार्यों में पारदर्शिता, गुणवत्ता और समयबद्धता सुनिश्चित करने के लिए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी लगातार निरीक्षण कर रहे हैं। इसी क्रम में आज उन्होंने डोईवाला, ऋषिकेश और आसपास के क्षेत्रों में चल रहे विभिन्न निर्माण कार्यों का औचक निरीक्षण किया। उपाध्यक्ष द्वारा किए गए इस निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य था प्राधिकरण की ओर से सम्पन्न हो रहे कार्यों की गुणवत्ता की समीक्षा, उपयोग की जा रही सामग्री का परीक्षण और जनसुविधाओं से जुड़े प्रोजेक्टों की प्रगति का सत्यापन।
डोईवाला पार्क : पहाड़ी संस्कृति और सौंदर्य विकास पर विशेष ध्यान
उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने डोईवाला में एमडीडीए द्वारा विकसित किए जा रहे आधुनिक पार्क का निरीक्षण किया, जहां पहाड़ी शैली में बनाए गए म्यूरल्स, सेल्फी प्वाइंट, घास पेंटिंग और देवी–देवताओं के चित्रों की गुणवत्ता की समीक्षा की गई। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी कलात्मक निर्माण उच्च मानकों के अनुरूप हों और स्थानीय सांस्कृतिक परंपरा का समुचित प्रतिनिधित्व करें। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि पार्क में किए जा रहे सभी कार्यों की नियमित निगराणी की जाए और आवश्यक सुधार कार्य तुरंत प्रभाव से आरंभ किए जाएं, ताकि स्थानीय नागरिकों और आने वाले पर्यटकों को आकर्षक एवं स्वच्छ वातावरण उपलब्ध हो सके। इसके साथ ही, उपाध्यक्ष ने नगर पालिका द्वारा निर्मित मोक्ष धाम का भी निरीक्षण किया और वहां प्राधिकरण स्तर से होने वाले कार्यों की भूमिगत संरचना, सौंदर्यीकरण और उपयोगी सुविधाओं की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि मोक्ष धाम एक संवेदनशील स्थान है, जहां सुविधाओं का उन्नयन सबसे उच्च स्तर की गुणवत्ता के साथ होना चाहिए।
ऋषिकेश में निर्माणाधीन मल्टीलेवल पार्किंग
उपाध्यक्ष तिवारी ने ऋषिकेश में निर्माणाधीन मल्टीलेवल पार्किंग व कार्यालय भवन का भी निरीक्षण किया। यह परियोजना स्थानीय निवासियों और प्रतिदिन बड़े पैमाने पर आने वाले पर्यटकों के लिए पार्किंग संकट को दूर करने में अत्यंत महत्वपूर्ण है। निरीक्षण के दौरान उन्होंने निर्माण सामग्री, संरचना की मजबूती, साइट प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था की बारीकी से जांच की। उन्होंने अधिकारियों, अभियंताओं और कार्यदायी संस्था को निर्देश दिए कि कार्य समयबद्ध पूरा किया जाए निर्माण में उच्च गुणवत्ता की सामग्री का उपयोग सुनिश्चित हो स्थल पर सुरक्षा मानकों का पूरी तत्परता से पालन किया जाए कार्य की प्रत्येक चरण की नियमित मॉनिटरिंग की जाए उन्होंने यह भी कहा कि यह परियोजना ऋषिकेश की यातायात व्यवस्था को नया आयाम देगी और आने वाले वर्षों में पर्यटन को और सुचारू बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
ऋषिकेश कैम्प कार्यालय का निरीक्षण
निरीक्षण कार्यक्रम के दौरान उपाध्यक्ष ने ऋषिकेश कैम्प कार्यालय का भी अवलोकन किया। यहां उन्होंने कार्यालय व्यवस्था, दस्तावेज प्रबंधन, परियोजनाओं की प्रगति रिपोर्ट और जनसुविधाओं से जुड़ी शिकायतों के निस्तारण की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जनसुनवाई एवं फील्ड विज़िट की गति बढ़ाई जाए और सभी निर्माण कार्यों की रिपोर्टिंग नियमित रूप से प्राधिकरण मुख्यालय को भेजी जाए।
निरीक्षण के दौरान उपस्थित अधिकारी एवं कर्मचारी
निरीक्षण के दौरान अधिशासी अभियंता सुनील कुमार, अवर अभियंता, सहायक अभियंता शशांक सक्सेना, अवर अभियंता सुनील उप्रेती, प्रा० उद्यान अधीक्षक भानुप्रिया, उसमान अली, तथा कार्यदायी संस्था के अनेक कर्मचारी उपस्थित रहे। उपाध्यक्ष तिवारी ने सभी को स्पष्ट निर्देश दिए कि एमडीडीए की सभी परियोजनाओं में गुणवत्ता और नागरिक सुविधा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्राधिकरण का लक्ष्य है जनहित में गुणवत्तापूर्ण विकास कार्यों को समय पर पूरा करना। एमडीडीए द्वारा किए जा रहे निरीक्षणों और निर्देशों का उद्देश्य है कि विकास कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या देरी की गुंजाइश न रहे। प्राधिकरण निरंतर इस दिशा में प्रयासरत है कि देहरादून, डोईवाला और ऋषिकेश क्षेत्र में सार्वजनिक सुविधाओं का विस्तार उच्च मानकों के अनुरूप किया जाए और नागरिकों को बेहतर शहरी अवसंरचना उपलब्ध हो।
विद्यालय में नाबालिग छात्रा से छेड़छाड़ पर महिला आयोग की सख्ती—स्कूल प्रबंधन और आरोपी शिक्षक को तलब करने के निर्देश
छात्राओं ने बताया—अभद्र हरकतें, गलत तरीके से छूने और फेल करने की धमकी देता था शिक्षक
देहरादून। जनपद देहरादून के सहसपुर क्षेत्र के एक निजी स्कूल में नवीं व दसवीं कक्षा की छात्राओं द्वारा अपने शिक्षक पर लगाए गए छेड़छाड़ व अनुचित व्यवहार के आरोपों ने पूरे शिक्षा जगत को हिला दिया है। छात्राओं ने बताया कि शिक्षक लंबे समय से गलत नीयत से छूने, अभद्र हरकतें करने और विरोध करने पर परीक्षा में फेल करने की धमकी देता रहा।
पीड़ित छात्राओं का कहना है कि मामले की शिकायत स्कूल प्रबंधन को दी गई, लेकिन कार्रवाई करने के बजाय उन्हें ही डराकर चुप रहने का दबाव बनाया गया। पीड़िताओं के अनुसार, कई अन्य छात्राएं भी पहले ऐसी हरकतों का शिकार हुई हैं, लेकिन डर और शर्म के कारण सामने नहीं आ सकीं। आरोप है कि पूरा स्कूल स्टाफ आरोपी शिक्षक का बचाव कर रहा है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तराखंड राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने तत्काल संज्ञान लिया है। उन्होंने जनपद देहरादून के मुख्य शिक्षा अधिकारी को निर्देश दिए हैं कि पूरे प्रकरण की गहन जांच की जाये साथ ही जब तक मामला स्पष्ट नही हो जाता उक्त शिक्षक को निलंबित रखा जाए।
साथ ही, पुलिस प्रशासन को भी गंभीरता से जांच कर कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश जारी किए गए हैं। महिला आयोग ने स्कूल प्रबंधन, विशेषकर स्कूल के प्रबंधक व समिति को आरोपी शिक्षक के बचाव से जुड़े आरोपों पर तलब करने को कहा है।
अध्यक्ष कुसुम कण्डवाल ने कहा कि इस घटना ने संस्थान में छात्राओं की सुरक्षा पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं और किशोरियों व महिलाओं की सुरक्षा के मामले में आयोग बिल्कुल भी लापरवाही बर्दाश्त नही करेगा। मामले में गंभीर जांच के साथ आरोपी के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
पार्किंग, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था से लेकर भीड़ प्रबंधन तक सभी विभागों को समयबद्ध कार्य पूरा करने के आदेश
पौड़ी। जिलाधिकारी स्वाति एस भदौरिया ने जिला कार्यालय में 06 दिसम्बर को आयोजित होने वाले बूंखाल मेले की तैयारी की बैठक ली। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को मेला स्थल पर सभी व्यवस्थाएं समय पर पूरा करने के निर्देश दिये हैं।
सोमवार को आयोजित बैठक में जिलाधिकारी ने लोनिवि के अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि सभी चेकपोस्ट का समयबद्ध निर्माण करना सुनिश्चित करें। उन्होंने सड़कों में लिए गए पैचवर्क की भी जानकारी ली। उन्होंने कहा कि वाहनों को खड़े करने के लिए पार्किंग व्यवस्था हो, इसका विशेष ध्यान दें, जिससे जाम से निजात मिल सके। उन्होंने आरटीओ को साइनेज लगाने के भी निर्देश दिए। उन्होंने पेयजल विभाग को मेला स्थल पर पेयजल की व्यवस्था व उरेड़ा विभाग को लाइट लगाने के निर्देश दिये।
जिलाधिकारी ने पुलिस विभाग को बूंखाल मेले के आयोजन के दौरान पुलिस कंट्रोल रूम स्थापित करने व आयोजन स्थल पर लाउडस्पीकर की व्यवस्था करने के निर्देश दिये। उन्होंने भीड़ प्रबंधन व यातायात व्यवस्था बेहतर तरीके संचालित करने के निर्देश दिए। उन्होंने मेला स्थल पर मेडिकल कैम्प लगाए जाने तथा एंबुलेंस की उपलब्धता के लिए मुख्य चिकित्साधिकारी को आवश्यक निर्देश दिये।
जिलाधिकारी ने डोलियों का पंजीकरण तथा दुकानदारों का सत्यापन करने के निर्देश दिए। उन्होंने जिला आबकारी अधिकारी को अवैध मदिरा की बिक्री के संबंध में सख़्त कदम उठाते हुए छापेमारी करने के भी निर्देश दिए। सर्दी के मौसम को देखते हुए जिलाधिकारी ने चौकियों पर तथा जहां आवश्यक हो, ऐसे स्थानों पर अलाव जलाने के निर्देश भी दिए। साथ ही उन्होंने अग्निशमन व्यवस्था और बायो टायलेट भी स्थापित करने के निर्देश दिए। साथ ही जिला पंचायत को स्वच्छता और झाड़ी कटान के लिए भी निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि मेले में भारी संख्या में श्रद्धालु आते हैं, जिसके लिए उन्होंने सभी व्यवस्थाएं सुचारु रखने के निर्देश दिए। साथ ही उन्होंने कहा कि सभी विभाग नोडल अधिकारी की सूची बनाकर संयुक्त मजिस्ट्रेट से समन्वय करें तथा मेला आयोजन को लेकर सभी व्यवस्थाएं समय पर पूरा करें, जिससे श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की समस्याओं का सामना नहीं करना पड़े।
बैठक में अपर जिलाधिकारी अनिल गर्ब्याल, संयुक्त मजिस्ट्रेट दीक्षिता जोशी, अधीक्षण अभियंता जल संस्थान प्रवीण सैनी, अधिशासी अभियंता लोनिवि शिवम् मित्तल, एआरटीओ एन के ओझा, एसडीओ वन आएशा बिष्ट, अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत भावना रावत सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
देहरादून। प्रदेश के कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने गोवा के राज्यपाल पुसापति अशोक गजपति राजू का देवभूमि उत्तराखंड आगमन पर स्वागत किया।
इस मौके पर कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने गोवा के राज्यपाल पुसापति अशोक गजपति राजू को उत्तराखंड में पर्यटन विभाग द्वारा संचालित योजनाओं से अवगत कराते हुए गोवा और उत्तराखंड के बीच पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने पर भी विस्तृत चर्चा की।

उन्होंने उन्हें बताया कि ग्रीष्मकालीन चारधाम यात्रा के पश्चात सरकार ने 24 अक्टूबर 2025 से शीतकालीन यात्रा का श्री गणेश कर दिया है। चारों धामों के कपाट बंद होने के पश्चात परंपरागत रूप से चार धाम के शीतकालीन पूजा स्थलों पर श्रद्धालुओं के लिए पूजा अर्चना और दर्शनों के लिए सरकार ने विशेष प्रबंध किए हैं।
देहरादून। आम जन की सुरक्षा सुनिश्चित करने और संदिग्ध गतिविधियों पर नियंत्रण को लेकर देहरादून पुलिस ने व्यापक स्तर पर आकस्मिक चेकिंग अभियान चलाया। एसएसपी देहरादून के निर्देश पर जिले के सभी शहरी और ग्रामीण थाना क्षेत्रों में पुलिस टीमों ने अलग-अलग स्थानों पर सघन जांच की।
पुलिस की टीमें तड़के सुबह से ही धार्मिक स्थलों, भीड़-भाड़ वाले क्षेत्रों, महत्वपूर्ण स्थानों, सीमावर्ती चेक पोस्टों और आंतरिक मार्गों पर सक्रिय रहीं। अभियान के दौरान संदिग्ध वाहनों और व्यक्तियों की पहचान के लिए विशेष सतर्कता बरती गई।

अभियान में पुलिस ने 1782 वाहनों की जांच की, जबकि 3374 व्यक्तियों से पूछताछ कर उनका सत्यापन किया। इस दौरान यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले चालकों के खिलाफ आवश्यक कानूनी कार्रवाई भी की गई।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह अभियान आगे भी जारी रहेगा, ताकि जिले में सुरक्षा व्यवस्था और अधिक मजबूत की जा सके तथा किसी भी प्रकार की आपराधिक या संदिग्ध गतिविधि को रोकने के लिए प्रभावी निगरानी बनाए रखी जा सके।
राज्य ने राष्ट्रीय खेलों में 103 पदकों के साथ पाया 7वां स्थान
नई टिहरी। टिहरी झील में आयोजित “इंटरनेशनल प्रेसिडेंट कप-2025” एवं “चतुर्थ टिहरी वाटर स्पोर्ट्स कप-2025” के भव्य समापन समारोह में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पहुँचे। कार्यक्रम स्थल पर पहुँचकर मुख्यमंत्री ने भारत सहित विभिन्न देशों से आए खिलाड़ियों से संवाद किया और उनके उत्साह एवं उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना की। उन्होंने कहा कि 22 देशों के 300 से अधिक खिलाड़ियों की भागीदारी इस आयोजन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक महत्वपूर्ण बनाती है तथा टिहरी झील को वैश्विक साहसिक खेल मानचित्र पर स्थापित करती है।
समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने सभी प्रतिभागियों, आयोजकों और खेल प्रेमियों का स्वागत किया तथा आयोजन को सफल बनाने के लिए टीएचडीसी, एशियन कायकिंग एंड कैनोइंग एसोसिएशन, उत्तराखंड ओलंपिक एसोसिएशन सहित सभी सहयोगी संस्थाओं का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि टिहरी झील अब केवल ऊर्जा उत्पादन या जल प्रबंधन का केंद्र नहीं है, बल्कि पर्यटन, साहसिक खेलों और स्थानीय लोगों की आजीविका का मुख्य आधार बन चुकी है।
उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य है कि ऐसे आयोजन निरंतर होते रहें, जिससे साहसिक खेलों और पर्यटन गतिविधियों को लगातार बढ़ावा मिले।
मुख्यमंत्री ने कहा कि खेल युवा पीढ़ी के शारीरिक-मानसिक विकास के साथ-साथ अनुशासन, टीमवर्क और संघर्षशीलता जैसे जीवन मूल्यों को भी मजबूत बनाते हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ‘खेलो इंडिया’ और ‘फिट इंडिया’ अभियानों के माध्यम से देश की खेल संस्कृति को मजबूत करने के प्रयासों का उल्लेख किया तथा बताया कि भारत ने हाल के वर्षों में अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में ऐतिहासिक उपलब्धियाँ हासिल की हैं। उन्होंने कहा कि 2023 में चीन में हुए एशियाई खेलों में भारत ने रिकॉर्ड 107 पदक जीतकर नया इतिहास बनाया है और 2030 में अहमदाबाद कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी करेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में आयोजित 38वें राष्ट्रीय खेलों की सफलता ने राज्य को “देवभूमि” के साथ-साथ “खेलभूमि” के रूप में भी स्थापित किया है। उन्होंने गर्व व्यक्त किया कि उत्तराखंड ने पहली बार राष्ट्रीय खेलों में 103 पदक जीतकर 7वाँ स्थान प्राप्त किया। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार विश्वस्तरीय खेल अवसंरचना विकसित कर रही है और देहरादून के स्पोर्ट्स स्टेडियम में तैयार आइस रिंक में अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता आयोजित होना इसका प्रमाण है।
उन्होंने बताया कि राज्य में शीघ्र ही “स्पोर्ट्स लेगेसी प्लान” लागू किया जाएगा, जिसके अंतर्गत आठ प्रमुख शहरों में 23 खेल अकादमियाँ स्थापित की जाएँगी। इनमें हर वर्ष 920 अंतरराष्ट्रीय स्तर के एथलीट और 1000 अन्य खिलाड़ियों को उच्च स्तरीय प्रशिक्षण दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि हल्द्वानी में राज्य का पहला खेल विश्वविद्यालय और लोहाघाट में महिला स्पोर्ट्स कॉलेज स्थापित किए जा रहे हैं।
नई खेल नीति के तहत अंतरराष्ट्रीय-राष्ट्रीय पदक विजेताओं को सरकारी नौकरी, स्पोर्ट्स कॉलेजों में निःशुल्क शिक्षा-प्रशिक्षण, खिलाड़ी प्रोत्साहन योजना, उदीयमान खिलाड़ी योजना, खेल-किट योजना, खेल छात्रवृत्ति, ‘उत्तराखंड खेल रत्न’ एवं ‘हिमालय खेल रत्न’ पुरस्कार जैसी सुविधाएँ प्रदान की जा रही हैं। इसके साथ ही खेल-कोटा को पुनः लागू करते हुए सरकारी सेवाओं में खिलाड़ियों के लिए 4 प्रतिशत आरक्षण बहाल किया गया है।
समापन समारोह में मुख्यमंत्री ने विजयी खिलाड़ियों को सम्मानित किया और कहा कि खेल में हार-जीत से अधिक महत्वपूर्ण खेल-भावना है। उन्होंने कहा कि सभी खिलाड़ियों ने उत्कृष्ट खेल-भावना का परिचय दिया है तथा राज्य सरकार युवाओं को उनके खेल-सपनों को पूरा करने के लिए हर संभव सहयोग प्रदान करती रहेगी। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि उत्तराखंड और देश के खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम और अधिक ऊँचा करेंगे।
कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल, विधायक किशोर उपाध्याय, जिलाधिकारी समेत जिला प्रशासन के अधिकारी, टीएचडीसी के सीएमडी सीपन गर्ग, देश-विदेश से आए खिलाड़ी और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।
जिलाधिकारी सविन बंसल का सख्त एक्शन: देहरादून के सभी स्कूल–कॉलेजों में अनिवार्य ड्रग टेस्टिंग के आदेश
देहरादून। शहर में पिछले तीन दिनों से चल रहा अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का राष्ट्रीय सम्मेलन रविवार को समापन की ओर पहुँचा। अंतिम सत्र में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जहाँ परिषद के पदाधिकारियों ने उन्हें प्रतीक चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। सम्मेलन में कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों और युवा नेतृत्व से जुड़े विषयों पर मंथन हुआ।
सम्मेलन के दौरान प्रतिष्ठित ‘प्रोफेसर यशवंतराव केलकर युवा पुरस्कार’ की घोषणा भी की गई। मुख्यमंत्री धामी ने इस वर्ष का सम्मान गोरखपुर के युवा श्रीकृष्णा पांडेय को प्रदान किया। पुरस्कार वितरण के समय एबीवीपी के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने बताया कि यह सम्मान 1991 से प्रख्यात शिक्षाविद् और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के शिल्पकार माने जाने वाले प्रो. केलकर की स्मृति में दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि प्रो. केलकर ने अभाविप को राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार और मजबूत पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया था। यह पुरस्कार अभाविप और विद्यार्थी निधि न्यास की संयुक्त पहल है, जिसका उद्देश्य शिक्षा और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने वाले युवाओं को प्रोत्साहित करना है।
पुरस्कार का उद्देश्य और महत्व
इस सम्मान का मुख्य लक्ष्य ऐसे युवा भारतीयों को सामने लाना है, जो सामाजिक उद्यम, शिक्षा, पर्यावरण, विज्ञान और समाजहित से जुड़े क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दे रहे हैं।
पुरस्कार के तहत विजेता को 1 लाख रुपये की राशि, प्रमाण-पत्र और स्मृति-चिह्न प्रदान किया जाता है।
सम्मेलन के समापन के साथ ही एबीवीपी ने विभिन्न अकादमिक, सामाजिक और राष्ट्रीय मुद्दों पर आगे की कार्ययोजना की रूपरेखा भी साझा की। संगठन ने कहा कि आने वाले समय में छात्र शक्ति देश के विकास में और अधिक बड़ी भूमिका निभाएगी।
देहरादून। ग्राफिक एरा यूनिवर्सिटी में जारी अंतरराष्ट्रीय आपदा प्रबंधन सम्मेलन के दौरान हिमालयी क्षेत्रों में तेजी से बदल रहे ग्लेशियरों को लेकर वैज्ञानिकों ने गंभीर चेतावनी दी है। विशेषज्ञों के अनुसार जलवायु परिवर्तन ने उत्तराखंड, सिक्किम समेत पूरे हिमालय में आइसटोपी और ग्लेशियर झीलों के आकार में तीव्र बढ़ोतरी दर्ज की है, जो अगले वर्षों में विनाशकारी आपदाओं का कारण बन सकती है।
सम्मेलन में वाडिया इंस्टीट्यूट के ग्लेशियर विशेषज्ञ डॉ. राकेश भांबरी ने अपने नवीन अध्ययन प्रस्तुत किए। उन्होंने बताया कि सिक्किम में 23 ग्लेशियरों का करीब 5.4% हिस्सा सिकुड़ चुका है, जबकि ग्लेशियर झीलों का क्षेत्रफल लगभग 48% बढ़ गया है। निरंतर पिघलाव के चलते बड़े पैमाने पर मलबा जमा हो रहा है, जो बरसात के दौरान अचानक बहाव से गंभीर संकट खड़ा कर रहा है।
उत्तराखंड के मेरु बमक पर किए गए अध्ययन में भी तेजी से बर्फ पिघलने और आइसटोपी बनने से उत्पन्न खतरे उजागर हुए। यह वही स्थिति है, जिसने अतीत में केदारनाथ जैसी त्रासदियों को जन्म दिया था।
दूसरी ओर, वाडिया इंस्टीट्यूट की वैज्ञानिक डॉ. स्वप्नमिता विदेश्वरम ने धराली क्षेत्र में हुई आपदा पर अपनी रिपोर्ट रखी। उन्होंने बताया कि क्षेत्र का ऊपरी हिस्सा ‘क्रोनिक लैंडस्लाइड ज़ोन’ में आता है, जहां कई सक्रिय चैनल मौजूद थे। खेरागाड़ क्षेत्र में दो ग्लेशियर कैचमेंट होने से जोखिम और बढ़ गया।
उन्होंने कहा कि ऊंचाई पर मौजूद छोटे–छोटे आइस कोर तब बेहद खतरनाक बन जाते हैं, जब अचानक मोरेन मास का धंसाव होता है। यही कारण था कि 4700 मीटर की ऊंचाई पर मामूली दिखने वाली बर्फ से भी बड़े पैमाने पर मलबा बहकर नीचे आया।
क्या हैं आइसटोपी ग्लेशियर?
विशेषज्ञों के अनुसार यह ऐसे ग्लेशियर होते हैं जिनकी सतह पर मोटी मलबे की परत जमा रहती है और भीतर ठोस बर्फ का कोर छिपा रहता है।
ऊपर जमा मिट्टी-बजरी सूर्य की गर्मी को रोकती है, इसलिए इनका पिघलना सामान्य ग्लेशियरों से अलग होता है।
पिघलने पर सतह असमान दिखाई देती है, छोटे तालाब बन जाते हैं और आइस कोर्ड माउंड्स (आइसटोपी) विकसित हो जाते हैं।
हिमालय में ऐसे ग्लेशियर तेजी से बदल रहे हैं और जलवायु परिवर्तन के संवेदनशील संकेतक माने जाते हैं।
वैज्ञानिकों ने बताए प्रमुख खतरे और सुधार के सुझाव
सटीक भू-मानचित्रण का अभाव: हिमनदियों और अस्थिर ढलानों का अद्यतन मैपिंग नहीं है। 1:10,000 स्केल पर नए जियो-मैप तैयार करने की आवश्यकता है।
ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मौसम डेटा सीमित: तापमान, वर्षा और नदियों के बहाव का वास्तविक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं। ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन और रिवर सेंसर लगाने की जरूरत।
आपदा प्रक्रिया की अधूरी समझ: जलवायु परिवर्तन, ग्लेशियर टूटना, ढलानों का धंसना और मलबे के नदी में जाने तक पूरी श्रृंखला का वैज्ञानिक अध्ययन अभी भी अपूर्ण है।
वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि छोटे ग्लेशियरों और आइसटोपी की निगरानी तुरंत शुरू नहीं की गई, तो आने वाले वर्षों में हिमालयी राज्यों में आपदाओं की तीव्रता और बढ़ सकती है।
