पुलिस ने आरोपी नेता को लिया हिरासत में
पौड़ी। पौड़ी जनपद के तलसारी गांव में शुक्रवार सुबह एक युवक ने पैसों के लेनदेन के विवाद के चलते गोली मारकर आत्महत्या कर ली। मृतक ने आत्मघाती कदम उठाने से पहले एक वीडियो सोशल मीडिया पर जारी किया, जिसमें उसने भाजपा नेता पर गंभीर आरोप लगाए। वीडियो वायरल होने के बाद क्षेत्र में सनसनी फैल गई और पुलिस ने आरोपी नेता को गिरफ्तार कर लिया।
32 वर्षीय जितेंद्र सिंह नेगी पुत्र सतीश चंद्र ने अपने घर में खुद को गोली मार ली। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस व राजस्व विभाग की टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। शव को कब्जे में लेकर पंचनामा भर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया, जबकि फॉरेंसिक टीम ने भी मौके से साक्ष्य एकत्र किए।
एसएसपी पौड़ी लोकेश्वर सिंह ने बताया कि प्रारंभिक जांच में आत्महत्या की वजह स्पष्ट नहीं हो सकी है। लेकिन वायरल वीडियो के आधार पर भाजपा नेता हिमांशु चमोली को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।
मुख्यमंत्री धामी ने प्रधानमंत्री मोदी एवं केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर का किया आभार व्यक्त
देहरादून। केंद्र सरकार ने उत्तराखण्ड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) की ऋषिकेश गंगा कॉरिडोर परियोजना को स्वीकृति प्रदान कर दी है। इस परियोजना के तहत एचटी/एलटी विद्युत लाइनों को भूमिगत किया जाएगा और साथ ही एससीएडीए (SCADA) ऑटोमेशन प्रणाली लागू की जाएगी।
परियोजना की कुल लागत ₹547.73 करोड़ है, जिसमें समानांतर जीबीएस ₹493.05 करोड़ और पी.एम.ए. शुल्क @ 1.5% यानी ₹8.22 करोड़ (जिसमें जीबीएस ₹7.39 करोड़) शामिल है।
इस योजना से ऋषिकेश के महत्वपूर्ण क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता और सुरक्षा में सुधार होगा। साथ ही बिजली आपूर्ति की रीयल टाइम निगरानी और त्वरित सुधार संभव हो सकेगा।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस स्वीकृति पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि, “ऋषिकेश जैसे आध्यात्मिक, पर्यटन और कुंभ क्षेत्र के लिए यह परियोजना न केवल विद्युत व्यवस्था को सुदृढ़ करेगी, बल्कि शहर के सौंदर्यकरण, सुरक्षा और पर्यावरणीय संतुलन में भी अहम योगदान देगी। राज्य सरकार इस योजना को समयबद्ध तरीके से लागू करने के लिए पूरी प्रतिबद्धता से काम करेगी।”
रोजाना 10 हजार ट्रे की जगह अब केवल 4-5 हजार की ही हो रही आवक
देहरादून। उत्तर प्रदेश में बर्ड फ्लू के मामले सामने आने के बाद देहरादून में अंडों और चिकन की खपत पर असर दिखने लगा है। लोगों ने एहतियातन इनकी खरीदारी कम कर दी है, जिसके चलते अंडों का कारोबार भी आधा रह गया है। हालांकि, मांग और आपूर्ति दोनों में कमी आने की वजह से फिलहाल बाजार में कीमतों पर खास असर नहीं पड़ा है।
जानकारी के मुताबिक, दून में रोजाना आठ से दस हजार ट्रे अंडे मंगाए जाते थे, लेकिन बर्ड फ्लू की आशंका के बाद यह संख्या घटकर चार से पांच हजार ट्रे तक सिमट गई है। अंडा कारोबारी संजय चौहान के अनुसार, आवक कम होने के बावजूद दाम स्थिर बने हुए हैं। वहीं, ऑफलाइन बाजार में कीमतों में कोई बदलाव नहीं है, लेकिन ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर अंडों के दाम जरूर बढ़ गए हैं।
सरकार पर समिति को दरकिनार कर मनमाने फैसले लेने का लगाया आरोप
देहरादून। उत्तराखंड विधानसभा की कार्यमंत्रणा समिति से नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य और कांग्रेस विधायक प्रीतम सिंह ने अपने सदस्य पद से इस्तीफा दे दिया है। दोनों नेताओं ने सरकार पर समिति को दरकिनार कर एकतरफा निर्णय लेने का आरोप लगाया है।
नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने कहा कि सरकार संख्या बल के आधार पर सदन को मनमाने ढंग से संचालित कर रही है। कार्यमंत्रणा समिति के सदस्यों को विश्वास में लिए बिना फैसले लिए जा रहे हैं, जिससे समिति में बने रहने का कोई औचित्य नहीं रह जाता। इसी के चलते उन्होंने और विधायक प्रीतम सिंह ने विधानसभा अध्यक्ष को अपना इस्तीफा भेज दिया है।
बता दें कि आगामी मानसून सत्र के लिए 18 अगस्त को कार्यमंत्रणा समिति की बैठक बुलाई गई थी, जिसमें 19 अगस्त को एक दिन के लिए सदन संचालन का एजेंडा तय किया गया। बैठक में यह भी निर्णय हुआ था कि 19 अगस्त को फिर से बैठक बुलाकर आगे के सत्र की रूपरेखा तय की जाएगी। लेकिन इसके विपरीत, 20 अगस्त को सरकार ने बिना समिति की दूसरी बैठक बुलाए अपराह्न में सत्र को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया।
आर्य ने कहा, “यह निर्णय कार्यमंत्रणा समिति को पूरी तरह दरकिनार करते हुए लिया गया, जो तानाशाही रवैये का प्रतीक है। महज दो दिनों में मानसून सत्र समाप्त करना प्रदेश की जनता के साथ धोखा है।” उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार लोकतांत्रिक परंपराओं की अनदेखी कर रही है, जिससे आहत होकर उन्होंने और प्रीतम सिंह ने इस्तीफा देने का निर्णय लिया।
गौरतलब है कि यह पहला मौका नहीं है जब दोनों नेताओं ने कार्यमंत्रणा समिति से इस्तीफा दिया है। इससे पहले भी वे असहमति के चलते इस्तीफा दे चुके हैं, जिसे विधानसभा अध्यक्ष ने अस्वीकार कर दिया था।
विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “अभी तक मुझे इस बाबत कोई इस्तीफा नहीं मिला है। यदि इस्तीफा भेजा गया है, तो वह विधानसभा सचिव को प्राप्त हुआ होगा।”
अब यह देखना होगा कि विधानसभा अध्यक्ष इस बार इन इस्तीफों पर क्या रुख अपनाती हैं और विपक्ष की इस नाराज़गी का आगामी सत्रों पर क्या प्रभाव पड़ेगा।
सीएम ने स्थानीय जनता से मुलाकात कर योजनाओं पर लिया फीडबैक
गैरसैंण केवल राजधानी नहीं, पर्यटन स्थल भी- धामी
वादियों और शांत वातावरण को बताया ऊर्जा का स्रोत
गैरसैंण। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार सुबह भराड़ीसैंण (गैरसैंण) में प्रातःकालीन भ्रमण के दौरान स्थानीय प्रतिष्ठान चंद्र सिंह नेगी के यहां चाय की चुस्कियों का आनंद लिया। इस दौरान उन्होंने वहां मौजूद स्थानीय नागरिकों से मुलाकात कर उनका हालचाल जाना और सरकार की विकासपरक एवं जनकल्याणकारी योजनाओं पर फीडबैक लिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विधानसभा सत्र के समापन के बाद गैरसैंण में रुककर कुछ समय स्थानीय जनजीवन से जुड़ने का अवसर उनके लिए विशेष है। उन्होंने गैरसैंण को केवल ग्रीष्मकालीन राजधानी ही नहीं, बल्कि अपार संभावनाओं वाला पर्यटन स्थल बताया। सीएम धामी ने कहा कि गैरसैंण की मनमोहक वादियां, शुद्ध पर्वतीय हवा और शांत वातावरण यहां आने वाले हर व्यक्ति को विशेष ऊर्जा का अनुभव कराते हैं।
“महज उम्रदराज होना बहु-बेटे को बेघर करने का लाइसेंस नहीं” – डीएम
देहरादून। जिलाधिकारी न्यायालय में पेश एक मार्मिक प्रकरण ने समाज की सोच को झकझोर दिया। राजपत्रित पद से सेवानिवृत्त पिता ने अपनी बीमार बहु, अल्पवेतनभोगी बेटे और 4 वर्षीय पौती को घर से बेदखल करने के लिए भरणपोषण अधिनियम का सहारा लिया था। तथ्यों की जांच के बाद जिला मजिस्ट्रेट ने पिता द्वारा दायर वाद को खारिज करते हुए लाचार दंपति को पुनः कब्जा दिलवा दिया।
डीएम ने स्पष्ट कहा कि “महज उम्रदराज होना बहु-बच्चों को बेघर करने का लाइसेंस नहीं हो सकता।”
यह है मामला
राजपत्रित अधिकारी पद से सेवानिवृत्त पिता और उनकी पत्नी की मासिक आय लगभग 55 हजार रुपये है। इसके बावजूद उन्होंने बेटे अमन वर्मा (अल्प आय वर्ग) और उनकी पत्नी मीनाक्षी पर भरणपोषण अधिनियम के अंतर्गत वाद दायर किया। सुनवाई में पाया गया कि पिता चलने-फिरने में सक्षम हैं और पर्याप्त आय अर्जित करते हैं। इसके बावजूद वे फ्लैट हासिल करने की लालसा में बेटे-बहु को घर से बेदखल करना चाहते थे।
डीएम का निर्णय
जिला मजिस्ट्रेट ने दो ही सुनवाई में मामले की हकीकत परख ली और तुरंत असहाय दंपति को कब्जा दिलाने का आदेश दिया। साथ ही वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को निर्देशित किया कि वे प्रतिमाह दो बार निरीक्षण कर यह सुनिश्चित करें कि दोनों पक्षों के बीच शांति व्यवस्था बनी रहे और किसी प्रकार का उत्पीड़न न हो।
यह निर्णय उन सभी मामलों में नजीर बनेगा, जहाँ भरणपोषण अधिनियम का दुरुपयोग कर परिवार के असहाय सदस्यों को प्रताड़ित करने की कोशिश की जाती है। इससे आमजन में न्याय के प्रति विश्वास और मजबूत हुआ है।
देहरादून/गैरसैंण। प्रदेश के पर्यटन, लोक निर्माण, सिंचाई, पंचायतीराज, ग्रामीण निर्माण, जलागम, धर्मस्व एवं संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज ने कहा है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जन आकांक्षाओं का सम्मान करते हुए गैरसैंण में विधानसभा सत्र आयोजित करने का निर्णय लिया था। लेकिन विपक्ष ने हंगामे और सदन की कार्यवाही में बार अवरोध खड़े कर सदन की मर्यादा को तार-तार करने के साथ-साथ विपक्ष की भूमिका निभाने में भी असफल रहा है।
प्रदेश के पर्यटन, लोक निर्माण, सिंचाई, पंचायतीराज, ग्रामीण निर्माण, जलागम, धर्मस्व एवं संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि सदन में विपक्ष का जो आचरण रहा है वह घोर निंदनीय था। विपक्ष कानून व्यवस्था की स्थिति पर चर्चा चाहता था, लेकिन खुद नियम-कानून का पालन करने को तैयार नहीं था। निकाय चुनाव और हाल ही में संपन्न राज्य के 10 पंचायत निकायों के चुनावों में भाजपा को मिले जनादेश से विपक्ष निराशा और हताशा में है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सरकार ने पहाड़ के हितों एवं जन आकांक्षाओं के अनुरूप मानसून के दौरान गैरसैंण में विधानसभा सत्र आयोजित किया लेकिन विपक्ष ने प्रदेश की जनता के हितों को तिलांजलि देकर सदन को नहीं चलने दिया। सदन के अंदर और बाहर विपक्ष के अमर्यादित व्यवहार, लगातार हंगामे एवं अवरोध खड़े करने से उसने जन आकांक्षाओं का गला घोटने का काम किया है उसके इस कृत्य से असमय सत्रावसान हुआ नतीजतन प्रश्नकाल हंगामे की भेंट चढ़ गया।
उन्होंने कहा कि विपक्ष स्वयं नहीं चहाता की जनता से जुड़े कल्याणकारी मुद्दों पर सदन में चर्चा हो। वह जनता के सरोकारों को तिलांजलि देकर केवल अपना राजनैतिक हित साधना चाह रहा था। सदन के बाहर और अंदर विपक्ष ने जिस प्रकार का आचरण किया उसे प्रदेश की जनता कभी माफ नहीं करेगी।
देहरादून। उत्तराखंड विधानसभा का मानसून सत्र बुधवार को हंगामे और तीखी नोकझोंक के बीच कई अहम फैसलों का गवाह बना। विपक्षी शोर-शराबे के बावजूद सदन ने 5315 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट पास कर दिया और सभी नौ विधेयकों को मंजूरी दी। लगातार विरोध के चलते सदन की कार्यवाही कई बार बाधित हुई, मगर महत्वपूर्ण विधेयक पारित कर दिए गए।
चार दिवसीय तय सत्र महज डेढ़ दिन में ही निपटा दिया गया। इस दौरान उत्तराखंड अल्पसंख्यक विधेयक पारित हुआ, जिसके तहत सभी अल्पसंख्यक समुदायों के लिए एक प्राधिकरण का गठन किया जाएगा। इस फैसले के बाद मदरसों को मान्यता मिलने का रास्ता भी साफ हो गया।
समान नागरिक संहिता संशोधन विधेयक भी सदन से पास हुआ, जिसमें लिव-इन-रिलेशनशिप से जुड़े मामलों पर कड़े प्रावधान किए गए हैं। साथ ही सख्त धर्मांतरण कानून में संशोधन कर जबरन धर्मांतरण पर उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान जोड़ा गया है।
पारित विधेयकों की सूची
1. उत्तराखंड विनियोग (Supplementary Appropriation) विधेयक, 2025
2. उत्तराखंड–उत्तर प्रदेश श्री बदरीनाथ तथा श्री केदारनाथ मंदिर अधिनियम, 1939 (संशोधन) विधेयक, 2025
3. उत्तराखंड धर्म स्वतंत्रता एवं विधि-विरुद्ध प्रतिषेध (संशोधन) विधेयक, 2025 – जिसे आमतौर पर अंटी-रूपांतरण बिल (Anti-conversion Bill) कहा जा सकता है।
4. उत्तराखंड निजी विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2025
5. उत्तराखंड साक्षी संरक्षण निरसन विधेयक, 2025
6. उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा विधेयक, 2025 – Minority Educational Institutions Bill
7. समान नागरिक संहिता उत्तराखंड (संशोधन) विधेयक, 2025 – Uniform Civil Code (Amendment)
8. उत्तराखंड पंचायती राज (संशोधन) विधेयक, 2025
9. उत्तराखंड लोकतंत्र सेनानी सम्मान विधेयक, 2025
सत्र के दौरान कांग्रेस विधायकों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। निर्दलीय विधायक संजय डोभाल भी विपक्ष के साथ धरने में शामिल हुए। वहीं कांग्रेस विधायक सुमित हृदयेश ने सदन के भीतर कागज फाड़कर हवा में उछाल दिए, जिससे माहौल और गरमा गया।
सीएम धामी बोले— हर नागरिक जीवन में कम से कम एक पौधा अवश्य लगाएँ
गैरसैंण। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और विधानसभा अध्यक्ष श्रीमती ऋतु खंडूडी भूषण ने गैरसैंण (भराड़ीसैंण) में “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान के तहत पौधा रोपण किया।
कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज, सुबोध उनियाल, रेखा आर्या, सौरभ बहुगुणा, मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन, अपर मुख्य सचिव आर.के सुधांशु, डीजीपी दीपम सेठ और प्रमुख वन संरक्षक हॉफ समीर सिन्हा ने भी इस अवसर पर एक पेड़ माँ के नाम अभियान के तहत पौधा रोपण किया।
मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से अपील की कि हर नागरिक अपने जीवन में कम से कम एक पौधा अवश्य लगाएँ। उन्होंने कहा कि यह अभियान पर्यावरण संरक्षण, जलवायु संतुलन और आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है।
भराड़ीसैंण (गैरसैंण)। कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने आज विधानसभा मानसून सत्र के दौरान गैरसैंण (भराड़ीसैंण) परिसर में “एक पेड़ मा के नाम” अभियान के अंतर्गत पौधा रोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि यह अभियान केवल पौधा लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारी संस्कृति, मातृ शक्ति के प्रति सम्मान और भावी पीढ़ियों के लिए स्वच्छ एवं हरित वातावरण का संकल्प भी है। मंत्री जोशी ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है और वृक्षारोपण के माध्यम से जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों से निपटा जा सकता है। उन्होंने सभी से अपील की कि प्रत्येक व्यक्ति कम से कम एक पौधा अवश्य लगाकर उसकी देखभाल करें, ताकि आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ पर्यावरण मिल सके।