रूस से तेल आयात पर भारत-अमेरिका के रिश्तों में बढ़ी तनातनी
नई दिल्ली। कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि भारत के रूस से तेल आयात का मुद्दा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार उठा रहे हैं, जिससे मोदी सरकार की विदेश नीति पर सवाल खड़े हो रहे हैं। पार्टी ने दावा किया कि ट्रंप ने पिछले पांच दिनों में तीन बार इस विषय को सार्वजनिक रूप से उठाया है, जबकि भारत का विदेश मंत्रालय इस तरह की किसी बातचीत से इनकार कर चुका है।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा, “पिछले पांच दिनों में राष्ट्रपति ट्रंप तीन बार भारत के रूस से तेल आयात के मुद्दे पर बोल चुके हैं। और यह तो तय है कि बुडापेस्ट में पुतिन से मुलाकात से पहले वे इसे बार-बार दोहराएंगे।”
ट्रंप बोले—मोदी ने रूस से तेल न खरीदने का दिया आश्वासन, भारत ने किया खंडन
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने हाल ही में दावा किया कि उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बातचीत हुई है, जिसमें भारत ने रूस से तेल आयात बंद करने का आश्वासन दिया है। हालांकि, भारत के विदेश मंत्रालय ने ऐसी किसी बातचीत की पुष्टि करने से इनकार कर दिया। इसके जवाब में ट्रंप ने मंत्रालय के खंडन को “गलत” बताते हुए अपनी बात पर अड़े रहे।
ट्रंप की फिर चेतावनी—भारत नहीं मानेगा तो देना होगा भारी शुल्क
सोमवार को एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने चेतावनी दी कि यदि भारत रूस से तेल खरीदना बंद नहीं करता, तो उसे भारी आयात शुल्क का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि भारत को समझना होगा कि वह किस पक्ष में खड़ा है।
उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री मोदी उनके “अच्छे दोस्त” हैं और उन्होंने भरोसा दिलाया है कि भारत रूसी तेल नहीं खरीदेगा—हालांकि भारतीय पक्ष ने इस दावे को सिरे से नकार दिया।
रूस को आर्थिक मदद देने का आरोप
अमेरिका का आरोप है कि भारत रूस से कच्चा तेल खरीदकर राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को यूक्रेन युद्ध जारी रखने में अप्रत्यक्ष वित्तीय सहायता दे रहा है। इस बीच, ट्रंप प्रशासन ने भारत से आने वाले उत्पादों पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगा दिया है, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक तनाव बढ़ गया है।
अब कुल मिलाकर अमेरिका ने भारतीय वस्तुओं पर लगभग 50 प्रतिशत तक शुल्क बढ़ा दिया है।
कांग्रेस ने पूछा—विदेश नीति पर कौन सच बोल रहा है?
कांग्रेस ने केंद्र सरकार से सवाल किया कि आखिर प्रधानमंत्री मोदी और विदेश मंत्रालय की बातों में से किसे सच माना जाए। पार्टी ने कहा कि यदि ट्रंप के बयान सही हैं, तो भारत की विदेश नीति और संवाद की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठते हैं।
सबसे ज्यादा आनंद विहार में AQI 387 तक पहुंचा
नई दिल्ली। दिवाली का त्यौहार आते-आते दिल्ली में वायु प्रदूषण लोगों के लिए परेशानी का सबब बन गया है। शनिवार सुबह राजधानी के कई इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 300 के पार पहुंच गया, जिससे स्वास्थ्य संबंधी चेतावनी जारी की गई।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार, सुबह 11 बजे तक आनंद विहार में सबसे खराब AQI 387 दर्ज किया गया, जो ‘बहुत खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं, बवाना में AQI 312, आईटीओ में 274, चांदनी चौक में 261 और आईजीआई हवाई अड्डा (T3) पर 206 रिकॉर्ड किया गया।
विशेषज्ञों की चेतावनी
गाजियाबाद के पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. शरद जोशी ने चेताया कि बढ़ती प्रदूषण स्तर से विशेष रूप से COPD, अस्थमा या तपेदिक जैसी श्वसन संबंधी समस्याओं वाले लोग प्रभावित हो सकते हैं। इसके परिणामस्वरूप खांसी, बुखार, सांस फूलना और सीने में दर्द जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। उन्होंने सभी को सलाह दी कि बाहर जाते समय एन-95 या डबल सर्जिकल मास्क का उपयोग करें।
AQI रीडिंग के मानक
CPCB के अनुसार, AQI को छह श्रेणियों में बांटा गया है:
अच्छा: 0-50
संतोषजनक: 51-100
मध्यम प्रदूषित: 101-200
खराब: 201-300
बहुत खराब: 301-400
गंभीर: 401-500
विशेषज्ञों ने कहा कि यदि वायु प्रदूषण इसी तरह बढ़ता रहा, तो स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है और लोगों को अनावश्यक बाहरी गतिविधियों से बचने की सलाह दी गई है।
पटना। बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने बुधवार को अपनी दूसरी सूची जारी कर दी है। इस सूची में 12 प्रत्याशियों के नाम शामिल हैं। सूची में सबसे पहला नाम गायिका मैथिली ठाकुर का है, जिन्हें अलीनगर विधानसभा सीट से टिकट दिया गया है, जबकि आखिरी नाम पूर्व आईपीएस अधिकारी आनंद मिश्रा का है, जिन्हें बक्सर सीट से उम्मीदवार बनाया गया है।
बीजेपी ने इस बार चर्चित चेहरों पर दांव लगाया है। आनंद मिश्रा कुछ माह पहले ही जनसुराज पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे। वहीं मैथिली ठाकुर को भी हाल ही में 14 अक्टूबर को भाजपा की सदस्यता दिलाई गई थी। इसके बाद से ही उनके प्रत्याशी बनने की अटकलें तेज थीं।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, भाजपा नेतृत्व ने इस सूची को अंतिम रूप भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल, संगठन प्रभारी विनोद तावडे और केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय की मौजूदगी में दिया।
इससे पहले भाजपा ने 14 अक्टूबर को पहली सूची जारी की थी, जिसमें 71 प्रत्याशियों के नाम शामिल थे। उस सूची में 9 महिला उम्मीदवारों को टिकट मिला था।
सुप्रीम कोर्ट ने पटाखे फोड़ने का समय सुबह 6-7 और रात को 8-10 बजे तक सीमित किया
नई दिल्ली। दिवाली से पहले सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में ग्रीन पटाखों को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने साफ कर दिया है कि अब सिर्फ नेशनल एन्वायरनमेंटल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (NEERI) से प्रमाणित ग्रीन पटाखों की बिक्री और उपयोग की अनुमति दी जाएगी। कोर्ट ने इस अनुमति की समयसीमा 18 से 21 अक्टूबर तक तय की है, यानी सिर्फ चार दिनों तक ग्रीन पटाखे जलाए जा सकेंगे।
मुख्य न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि “हमें ऐसा संतुलित रास्ता अपनाना होगा जिससे न पर्यावरण को नुकसान पहुंचे और न ही त्योहार की भावना आहत हो।” अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि 21 अक्टूबर के बाद किसी भी प्रकार के पटाखों की बिक्री या उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। नियमों के उल्लंघन पर निर्माताओं और विक्रेताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए हैं।
तय हुआ समय और शर्तें
ग्रीन पटाखे सिर्फ दो समय स्लॉट में फोड़े जा सकेंगे — सुबह 6 से 7 बजे तक और रात 8 से 10 बजे तक। कोर्ट ने कहा कि बाहरी राज्यों से पटाखे लाने या फोड़ने की अनुमति नहीं होगी। अगर कोई नकली या गैर-प्रमाणित पटाखे बेचता या जलाता पाया गया, तो उसका लाइसेंस तुरंत निलंबित किया जाएगा।
निगरानी और गश्त के निर्देश
अदालत ने पुलिस को गश्ती दल गठित करने के आदेश दिए हैं जो नियमित तौर पर ग्रीन पटाखों की दुकानों की जांच करेंगे। केवल उन्हीं उत्पादों की बिक्री की जाएगी जिन पर क्यूआर कोड लगा होगा और जिनकी जानकारी वेबसाइट पर अपलोड की जाएगी, ताकि खरीदार उनकी प्रमाणिकता की जांच कर सकें। बिक्री केवल अधिकृत कंपनियों द्वारा तय स्थानों से ही की जा सकेगी।
14-16 अक्तूबर तक नई दिल्ली में यूएनटीसीसी सम्मेलन, 32 देशों के वरिष्ठ सैन्य अधिकारी करेंगे भागीदारी
नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र सैन्य योगदान देने वाले देशों (यूएनटीसीसी) के प्रमुखों के सम्मेलन का मंगलवार को उद्घाटन करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत के लिए शांति स्थापना कभी विकल्प नहीं, बल्कि आस्था का विषय रही है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि भारत हमेशा से अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए संयुक्त राष्ट्र के मिशनों में सक्रिय रहा है।
शांति स्थापना सिर्फ सैन्य मिशन नहीं
रक्षा मंत्री ने कहा, “शांति स्थापना केवल सैन्य मिशन नहीं है, बल्कि यह मानवता के प्रति साझा जिम्मेदारी है। युद्ध और अभाव से त्रस्त लोग ब्लू हेल्मेट्स को देख कर यह महसूस करते हैं कि दुनिया ने उन्हें नहीं छोड़ा।”
अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन चिंता का विषय
इस अवसर पर उन्होंने कुछ देशों द्वारा अंतरराष्ट्रीय नियमों के उल्लंघन और उन्हें कमजोर करने के प्रयासों पर चिंता जताई। राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत पुरानी अंतरराष्ट्रीय संरचनाओं में सुधार और नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।
भारतीय योगदान की मिसाल
रक्षा मंत्री ने बताया कि पिछले दशकों में लगभग 2,90,000 भारतीय कर्मियों ने 50 से अधिक संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में सेवा दी है। उन्होंने कहा, “कांगो, कोरिया, दक्षिण सूडान और लेबनान में हमारे सैनिक, पुलिस और चिकित्सा पेशेवर अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ कंधे से कंधा मिलाकर कमजोर लोगों की रक्षा और समाज के पुनर्निर्माण में लगे हैं।”
उन्होंने शहीद भारतीय शांति सैनिकों को भी याद किया, जिनमें से 180 से अधिक कर्मियों ने अपने प्राणों की आहुति दी।
सम्मेलन 14-16 अक्तूबर तक
यह सम्मेलन 14 से 16 अक्तूबर तक चलेगा, जिसमें 32 देशों के वरिष्ठ सैन्य अधिकारी हिस्सा लेंगे। इससे पहले थल सेना प्रमुख ने भी सम्मेलन को संबोधित किया और भारत को शांति स्थापना में सबसे बड़े योगदानकर्ताओं में से एक बताया।
पूर्व जज अजय रस्तोगी करेंगे निगरानी
नई दिल्ली। तमिलनाडु के करूर में अभिनेता-राजनेता विजय की रैली के दौरान हुई भगदड़ के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने इस पूरे घटनाक्रम की जांच सीबीआई से कराने का आदेश दिया है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश अजय रस्तोगी को इस जांच की निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
यह आदेश तमिलागा वेट्री कजगम (टीवीके) की उस याचिका पर आया है, जिसमें पार्टी ने स्वतंत्र जांच की मांग की थी। टीवीके का कहना था कि राज्य पुलिस की विशेष जांच दल (एसआईटी) पर जनता का भरोसा नहीं है और यह घटना पूर्व नियोजित साजिश का हिस्सा भी हो सकती है।
टीवीके की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला
टीवीके सचिव आधव अर्जुना ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा था कि भगदड़ की जांच किसी पूर्व न्यायाधीश की निगरानी में सीबीआई को सौंपी जाए। पहले मद्रास हाई कोर्ट ने एसआईटी गठित की थी, लेकिन टीवीके ने उस पर सवाल उठाए। अब सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई जांच को मंजूरी देते हुए रिटायर्ड जस्टिस अजय रस्तोगी को मॉनिटरिंग कमेटी का प्रमुख नियुक्त किया है।
एफआईआर में टीवीके नेताओं पर गंभीर धाराएं
घटना के बाद करूर पुलिस ने टीवीके के कई पदाधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। इनमें जिला सचिव माधियाझगन, जनरल सेक्रेटरी बसी आनंद और ज्वाइंट जनरल सेक्रेटरी सीटीआर निर्मल कुमार शामिल हैं। उन पर हत्या, हत्या के प्रयास और अन्य की जान जोखिम में डालने जैसे गंभीर आरोप लगे हैं।
पुलिस का कहना है कि रैली में कोई खुफिया चूक नहीं थी। लेकिन विजय के देरी से पहुंचने और लंबे इंतजार के कारण भीड़ में असंतोष बढ़ गया था, जिससे भगदड़ की स्थिति बनी।
रैली में अव्यवस्था के आरोप
अधिकारियों के मुताबिक आयोजकों को निर्देश दिया गया था कि विजय की बस को निर्धारित स्थान से 50 मीटर पहले रोका जाए, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। करीब 10 मिनट तक बस में ही रुकने से भीड़ बेकाबू हो गई और अफरातफरी मच गई।
पुलिस ने यह भी आरोप लगाया कि टीवीके ने अनुमति की शर्तों का पालन नहीं किया। पार्टी को 10,000 लोगों की भीड़ की मंजूरी दी गई थी, जबकि मौके पर 25,000 से अधिक लोग पहुंचे। पर्याप्त पानी, सुरक्षा और व्यवस्था न होने से हालात बिगड़ गए।
ममता बनर्जी ने निजी मेडिकल कॉलेज प्रशासन पर उठाए सवाल
कोलकाता। पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर में मेडिकल छात्रा के साथ हुए सामूहिक दुष्कर्म मामले ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है। इस जघन्य वारदात पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि यह घटना बेहद दुखद और शर्मनाक है, सरकार किसी भी दोषी को बख्शेगी नहीं। ममता ने बताया कि तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि बाकी की तलाश में पुलिस जुटी हुई है।
मुख्यमंत्री ने इस दौरान निजी मेडिकल कॉलेज प्रशासन पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कॉलेजों को अपने कैंपस और आस-पास सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता करनी चाहिए ताकि छात्र-छात्राओं की सुरक्षा खतरे में न पड़े। उन्होंने कहा, “लड़की निजी कॉलेज की छात्रा थी, इसलिए यह कॉलेज की भी जिम्मेदारी बनती है कि देर रात छात्राएं कहां और किस स्थिति में हैं। घटना की हर कोण से जांच की जा रही है, सच्चाई सामने आएगी और सख्त कार्रवाई होगी।”
वहीं विपक्ष द्वारा सरकार पर की जा रही आलोचना पर ममता ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि “महिलाओं के खिलाफ अपराध किसी एक राज्य का नहीं बल्कि पूरे देश की चिंता का विषय है। ओडिशा, बिहार या यूपी में ऐसी घटनाएं होती हैं तो वे भी उतनी ही निंदनीय हैं जितनी बंगाल में। हमारी सरकार हर मामले को गंभीरता से लेती है।”
इस बीच, पीड़िता का इलाज अस्पताल में जारी है और उसकी हालत स्थिर बताई जा रही है। छात्रा ने पुलिस को अपना बयान दर्ज करा दिया है। घटना उस वक्त हुई जब वह रात में अपने एक मित्र के साथ कॉलेज कैंपस के बाहर भोजन करने गई थी। कैंपस गेट के पास कुछ युवकों ने उसे सुनसान इलाके में खींच लिया और सामूहिक दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया।
पीड़िता के पिता ने बेटी की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने कहा, “मेरी बेटी अभी बिस्तर से उठ नहीं पा रही है। मुख्यमंत्री और पुलिस प्रशासन मदद कर रहे हैं, लेकिन मैं चाहता हूं कि उसे ओडिशा वापस ले जाने की अनुमति मिले क्योंकि यहां उसकी सुरक्षा को खतरा है।”
केरल में कांग्रेस सांसद शफी परमबिल पर विरोध प्रदर्शन के दौरान हमला, शशि थरूर ने हमले की कड़ी निंदा की
तिरुवनंतपुरम। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने केरल के वडाकरा में अपने सहयोगी कांग्रेस सांसद शफी परमबिल पर विरोध प्रदर्शन के दौरान हुए हमले की कड़ी निंदा की है। थरूर ने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों पर हमला बताते हुए कहा कि विपक्षी सांसदों को बिना डर और कानूनी परेशानियों के विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार होना चाहिए।
थरूर ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि, “सांसद शफी परमबिल पर पुलिस का हमला पूरी तरह अस्वीकार्य है। लोकतंत्र में सांसदों को बिना डर के अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियों का निर्वहन करने की अनुमति होनी चाहिए। ऐसी कार्रवाई लोकतांत्रिक अधिकारों और कानूनी सुरक्षा का उल्लंघन है।”
उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस मामले को संसद की विशेषाधिकार समिति के सामने उठाएगी। थरूर ने यह भी बताया कि भारत में सांसद कानून से ऊपर नहीं हैं, लेकिन उन्हें कुछ संवैधानिक सुरक्षा मिलती है, ताकि वे लोकतांत्रिक जिम्मेदारियों को सुरक्षित तरीके से निभा सकें।
केरल के पेरमबरा में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ और सीपीएम के नेतृत्व वाले एलडीएफ के कार्यकर्ताओं के बीच हाल ही में हिंसक झड़पें हुई हैं। इसी दौरान हुए विरोध प्रदर्शन में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच भिड़ंत हुई, जिसमें सांसद शफी परमबिल घायल हो गए और उनकी नाक की हड्डी टूट गई। उन्हें तत्काल सर्जरी करानी पड़ी। पुलिस ने इस मामले में दोनों पक्षों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।
अजय राय ने मायावती को कहा “बीजेपी की बी टीम”
लखनऊ। उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती पर तीखे आरोप लगाते हुए कहा कि वह बीजेपी की मदद कर विपक्षी वोटों को तोड़ रही हैं। राय ने मायावती को कांशीराम की विचारधारा को बेचने, दलितों और मुसलमानों के मुद्दों पर चुप रहने और अपनी हालिया रैली के जरिए राजनीतिक लाभ उठाने का आरोप लगाया है।
अजय राय ने मायावती पर बीजेपी की “बी टीम” होने का गंभीर आरोप लगाया है। राय के अनुसार, लखनऊ में मायावती की रैली बीजेपी द्वारा फंडेड और प्रायोजित थी, जिसमें सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग कर भीड़ जुटाई गई। कांशीराम की पुण्यतिथि पर राय ने कहा कि मायावती ने दलितों और वंचितों के लिए कांशीराम के संघर्ष और उनकी विरासत को नष्ट कर दिया। राय ने रायबरेली, बरेली और बहराइच में दलित और मुस्लिम समुदाय के खिलाफ हुई घटनाओं पर मायावती की चुप्पी को भी गंभीर मुद्दा बताया।
इसके अलावा, राय ने दावा किया कि मायावती की सक्रियता का उद्देश्य केवल उत्तर प्रदेश नहीं, बल्कि बिहार विधानसभा चुनाव में दलित वोट बैंक को बांटकर “इंडिया” गठबंधन को कमजोर करना है।
जयराम रमेश बोले – गाजा में नरसंहार करने वाले नेतन्याहू की प्रशंसा नैतिक रूप से निंदनीय
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की वेस्ट एशिया शांति पहल की सराहना और इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की तारीफ करने पर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी ने इसे “नैतिक रूप से गलत” और “भारत की पारंपरिक विदेश नीति के विपरीत” बताया है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने गुरुवार को कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने गाजा को लेकर हुए हालिया समझौते का स्वागत करते हुए ट्रंप और नेतन्याहू दोनों की प्रशंसा की, जो चौंकाने वाला कदम है। उन्होंने कहा कि नेतन्याहू की बिना शर्त तारीफ करना शर्मनाक है, क्योंकि वे गाजा में चल रही हिंसा के लिए जिम्मेदार हैं।
रमेश ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार फलस्तीन के स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र के भविष्य को लेकर पूरी तरह मौन है। उन्होंने याद दिलाया कि भारत ने 1988 में ही फलस्तीन को मान्यता दी थी और अब 150 से अधिक देश उस रुख का समर्थन कर रहे हैं।
दरअसल, विवाद तब शुरू हुआ जब प्रधानमंत्री मोदी ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की शांति योजना के पहले चरण का स्वागत करते हुए लिखा कि यह इस्राइली प्रधानमंत्री नेतन्याहू के मजबूत नेतृत्व का प्रतीक है। पीएम ने उम्मीद जताई थी कि बंधकों की रिहाई और गाजा को मिल रही मानवीय सहायता से क्षेत्र में स्थायी शांति की राह खुलेगी।
इस समझौते को इस्राइल और हमास के बीच अब तक की सबसे बड़ी कूटनीतिक प्रगति माना जा रहा है, जिसके तहत संघर्षविराम और बंदियों की रिहाई पर सहमति बनी है।
