लेह हिंसा के बाद हालात तनावपूर्ण, प्रशासन ने धारा 163 लगाई, पाबंदियों से आम लोग परेशान
लेह। लद्दाख में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर गंभीर आरोप लगाए। तिवारी ने कहा कि केंद्र सरकार ने वादों को पूरा करने के बजाय हालात को और खराब कर दिया है। उनका कहना है कि गिरफ्तारियां और दमनकारी कदम किसी भी समस्या का समाधान नहीं हैं, बल्कि जनता से किए गए वादों को निभाना ही असली हल है।
कांग्रेस नेता ने याद दिलाया कि केंद्र ने राज्य का दर्जा बहाल करने और जम्मू-कश्मीर की तर्ज पर लद्दाख को भी समान अधिकार देने का वादा किया था। लेकिन इन वादों को पूरा करने के बजाय सरकार ने विरोध कर रहे लोगों को दबाने का रास्ता चुना। तिवारी ने कहा कि मणिपुर के हालात सरकार दो साल से नहीं संभाल पाई और अब लद्दाख में भी स्थिति नियंत्रण से बाहर होती जा रही है।
हिंसा और पाबंदियां
24 सितंबर को लेह में भड़की हिंसा के बाद प्रशासन ने बीएनएसएस की धारा 163 लागू कर दी, जिसके तहत पांच से अधिक लोगों के जुटने पर रोक लगा दी गई है। इलाके में भारी सुरक्षा बलों की तैनाती है और बिना अनुमति जुलूस, मार्च या रैली पर प्रतिबंध लगाया गया है।
स्थानीय लोगों की मुश्किलें
प्रतिबंधों के कारण आम जनता को दूध और खाद्यान्न जैसी ज़रूरी चीजें तक नहीं मिल पा रही हैं। लोग सुरक्षा घेरे में रहते हुए मुश्किल हालात में अपने रोज़मर्रा के काम निपटाने की कोशिश कर रहे हैं।
हिंसा की घटनाएं और गिरफ्तारियां
हिंसा के दौरान भाजपा कार्यालय को आग के हवाले कर दिया गया, जिसमें चार लोगों की मौत हो गई। इसके दो दिन बाद पर्यावरणविद सोनम वांगचुक को हिंसा भड़काने के आरोप में एनएसए के तहत गिरफ्तार कर जोधपुर जेल भेज दिया गया।
वांगचुक की मांगें
सोनम वांगचुक लंबे समय से लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग कर रहे हैं। वे भूख हड़ताल पर भी थे, हालांकि हिंसा शुरू होने के बाद उन्होंने इसे खत्म कर दिया। छठी अनुसूची अभी असम, मिजोरम, त्रिपुरा और मेघालय में लागू है, जिसके तहत आदिवासी इलाकों को विशेष अधिकार प्राप्त हैं।
कांग्रेस का रुख
तिवारी ने कहा कि लद्दाख भारत की संवेदनशील सीमा पर स्थित है और यहां आंतरिक अशांति से पड़ोसी देशों को फायदा मिल सकता है। उन्होंने सरकार को आगाह किया कि दमन और गिरफ्तारियां शांति बहाल नहीं कर सकतीं। लद्दाख में समाधान केवल संवाद और भरोसे से ही निकलेगा।
एक युवक गंभीर रूप से घायल
गुरुग्राम। गुरुग्राम के झाड़सा फ्लाईओवर के पास शनिवार तड़के एक भीषण सड़क हादसा हुआ। तेज रफ्तार यूपी नंबर की काली थार SUV अनियंत्रित होकर एग्जिट 9 डिवाइडर से टकरा गई। हादसे में छह में से पांच लोग मौके पर ही जान गंवा बैठे। मृतकों में तीन युवतियां और दो युवक शामिल हैं, जबकि एक युवक गंभीर रूप से घायल हुआ है।
जानकारी के अनुसार, दुर्घटना सुबह करीब 4.30 बजे दिल्ली से जयपुर की ओर जा रही वाहन में हुई। थार में कुल छह लोग सवार थे। मृतकों में प्रतिष्ठा मिश्रा (25, रायबरेली), आदित्य प्रताप सिंह (30, आगरा), गौतम (31, सोनीपत/ग्रेटर नोएडा), लावण्या (26, आगरा) और एक अज्ञात महिला शामिल हैं। गंभीर रूप से घायल युवक कपिल शर्मा (28, बुलंदशहर) को अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
मरने वालों में प्रतिष्ठा मिश्रा और लावण्या लॉ कॉलेज की छात्रा थीं। दोनों ग्रेटर नोएडा के लॉयड लॉ कॉलेज में एलएलबी की पढ़ाई कर रही थीं। वहीं, आदित्य प्रताप सिंह और कपिल शर्मा इंजीनियर थे। पुलिस ने दुर्घटना की जांच शुरू कर दी है और वाहन की तेज गति को हादसे का मुख्य कारण बताया जा रहा है।
ग्रीन पटाखे केवल प्रमाणित निर्माताओं द्वारा बनाए जाएंगे, बिक्री पर तब तक रोक रहेगी जब तक नया आदेश नहीं आता
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने दिवाली से पहले दिल्ली-एनसीआर में सभी प्रकार के पटाखों की बिक्री पर रोक लगा दी है। हालांकि, कोर्ट ने कुछ पटाखा निर्माताओं को ग्रीन पटाखे बनाने की अनुमति दी है, लेकिन इन पटाखों की बिक्री इस क्षेत्र में तब तक नहीं हो सकेगी जब तक कोर्ट का अगला आदेश नहीं आता। ग्रीन पटाखे केवल उन्हीं निर्माताओं द्वारा बनाए जा सकेंगे जिनके पास नीरी (NEERI) या पेसो (PESO) जैसे अधिकृत संस्थानों का सर्टिफिकेट होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया है कि पटाखा निर्माता लिखित वचन दें कि वे दिल्ली-एनसीआर में कोई पटाखा नहीं बेचेंगे। अदालत का यह कदम राजधानी में दिवाली के समय बढ़ते प्रदूषण को नियंत्रित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई की अध्यक्षता वाली बेंच ने यह स्पष्ट किया कि यह आदेश पूरे देश में लागू नहीं होगा, क्योंकि केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय स्तर पर किसी प्रतिबंध का प्रस्ताव नहीं रखा है।
पिछले वर्ष राजधानी का औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 494 तक पहुंच गया था, जिससे शहर स्मॉग की चादर में घिर गया और लोगों को सांस लेने में कठिनाई हुई। सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश इस साल दिवाली से पहले प्रदूषण को कम करने के लिए अहम कदम माना जा रहा है।
वित्त मंत्री और प्रधानमंत्री के रूप में उनके योगदान को नेताओं ने किया याद
नई दिल्ली। आज देश के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की जयंती है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और कांग्रेस नेता राहुल गांधी सहित कई नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके योगदान को याद किया। डॉ. मनमोहन सिंह का जन्म 26 सितंबर 1932 को अविभाजित पंजाब के गाह (अब पाकिस्तान) में हुआ था। वे एक साधारण परिवार से उठकर देश के प्रमुख अर्थशास्त्रियों में शामिल हुए और बाद में सार्वजनिक जीवन में अपनी छाप छोड़ी।
पीएम मोदी ने किया याद
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि डॉ. मनमोहन सिंह की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि। उन्होंने उनके प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री के रूप में निभाए गए अहम योगदानों को देश की प्रगति में महत्वपूर्ण बताया।
कांग्रेस अध्यक्ष खरगे का बयान
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने डॉ. सिंह को “भारत की आर्थिक परिवर्तन का सौम्य शिल्पकार” करार दिया। उन्होंने कहा कि उनकी नीतियों ने समृद्ध मध्यवर्ग का निर्माण किया और करोड़ों परिवारों को गरीबी से बाहर निकाला। खरगे ने उनके जीवन को सार्वजनिक सेवा, ईमानदारी और सत्यनिष्ठा का उदाहरण बताया।
राहुल गांधी ने दी श्रद्धांजलि
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि डॉ. सिंह की अटूट प्रतिबद्धता, गरीबों और वंचितों के लिए उनके साहसिक निर्णय और मजबूत अर्थव्यवस्था के निर्माण में योगदान हमेशा मार्गदर्शन देगा।
राजनीतिक सफर
डॉ. मनमोहन सिंह 1991-96 में पी. वी. नरसिम्हा राव सरकार में वित्त मंत्री रहे और देश में आर्थिक उदारीकरण की शुरुआत की। इसके बाद 2004-2014 तक लगातार दो कार्यकाल तक प्रधानमंत्री रहे। उनके नेतृत्व में देश ने तेज आर्थिक विकास देखा और कई कल्याणकारी योजनाएं लागू हुईं।
जीएसटी दरों में कटौती से अब 1 लाख खर्च करने वाले परिवार को 20 हजार तक की बचत
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जीएसटी में हालिया कटौती को देश के आर्थिक सुधारों की बड़ी उपलब्धि बताते हुए कांग्रेस और विपक्ष पर लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि टूथपेस्ट से लेकर ट्रैक्टर तक, हर ज़रूरी चीज़ पर टैक्स का बोझ घटा है और आम नागरिक को सीधा फायदा मिला है।
उत्तर प्रदेश अंतर्राष्ट्रीय व्यापार शो (यूपीआईटीएस) का उद्घाटन करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि 22 सितंबर से लागू किए गए नए जीएसटी सुधार देश के विकास की दिशा में एक “संरचनात्मक बदलाव” हैं। इनसे जीएसटी पंजीकरण आसान होगा, कर विवादों में कमी आएगी और एमएसएमई को रिफंड तेजी से मिलेगा।
पीएम ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार के समय टैक्स के ज़रिए जनता से “लूट” होती थी, जबकि आज उनकी सरकार ने टैक्स कम करके महंगाई पर नियंत्रण किया है और लोगों की आय व बचत दोनों बढ़ाई हैं। मोदी ने दावा किया कि नए सुधारों से इस साल नागरिकों को करीब 2.5 लाख करोड़ रुपये की बचत होगी।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि 2014 में 1,000 रुपये की शर्ट पर 170 रुपये टैक्स लगता था, जो जीएसटी लागू होने के बाद 50 रुपये रह गया। अब संशोधित दरों से वही टैक्स केवल 35 रुपये होगा। मोदी ने बताया कि पहले 1 लाख रुपये सालाना खर्च करने वाले परिवार को 20-25 हजार रुपये टैक्स देना पड़ता था, जबकि अब यह घटकर 5-6 हजार रुपये रह गया है। ट्रैक्टर पर 70,000 रुपये की जगह अब 30,000 रुपये टैक्स देना पड़ता है, जिससे किसानों को सीधे 40,000 रुपये की बचत होती है।
इसी तरह तिपहिया वाहन पर टैक्स 55,000 रुपये से घटकर 35,000 रुपये और दोपहिया वाहनों पर 8-9 हजार रुपये तक की कमी आई है। प्रधानमंत्री ने कहा कि इन सुधारों से गरीब, नव-मध्यम वर्ग और मध्यम वर्ग सभी को राहत मिल रही है और यही “नए भारत” की असली तस्वीर है।
नाम जोड़ने या हटाने पर अब मोबाइल OTP से होगा सत्यापन
नई दिल्ली। मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया को पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए चुनाव आयोग ने ई-सत्यापन प्रणाली लागू की है। अब किसी भी मतदाता का नाम जोड़ने या हटाने पर आपत्ति दर्ज करने वाले को उसके पंजीकृत मोबाइल नंबर पर वन-टाइम पासवर्ड (OTP) भेजा जाएगा। यह सत्यापन पूरा होने के बाद ही आगे की कार्रवाई होगी।
चुनाव आयोग के एक अधिकारी के अनुसार, पहले कई बार ऐसा होता था कि आपत्ति दर्ज कराने वाला व्यक्ति किसी अन्य का नाम या मोबाइल नंबर लिख देता था। ई-सत्यापन की नई व्यवस्था इस तरह के दुरुपयोग को रोकने में मदद करेगी।
आयोग ने स्पष्ट किया कि यह कदम किसी राजनीतिक बयानबाज़ी के जवाब में नहीं उठाया गया है। उदाहरण के तौर पर, कर्नाटक के अलंद विधानसभा क्षेत्र में मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटाए जाने की शिकायतों के बाद 6,018 ऑनलाइन आवेदन (फॉर्म-7) आए थे। जांच में इनमें से केवल 24 सही पाए गए, जबकि 5,994 आवेदन गलत निकले। इसलिए सिर्फ 24 नाम ही मतदाता सूची से हटाए गए।
इस बीच, कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर दावा किया कि उनकी आपत्ति के बाद ही चुनाव आयोग को कार्रवाई करनी पड़ी। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त से सवाल किया कि अलंद मामले में कर्नाटक सीआईडी को सबूत कब सौंपे जाएंगे। राहुल गांधी ने लिखा, “हमने चोरी पकड़ी, तभी आयोग को ताला लगाने की याद आई। अब हम चोरों को भी पकड़ेंगे।”
कांग्रेस की CWC बैठक को भाजपा ने बताया चुनावी स्टंट
नई दिल्ली। बिहार में इस साल के अंत तक विधानसभा चुनाव होने हैं और राजनीतिक पार्टियों ने तैयारियों को तेज कर दिया है। इसी बीच बुधवार को कांग्रेस की पहली बार हुई कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) की बैठक ने सियासी गर्माहट बढ़ा दी है। भाजपा ने इस बैठक पर हमला बोलते हुए इसे महज चुनावी स्टंट बताया और कांग्रेस की मंशा पर सवाल उठाए।
भाजपा का आरोप:
भाजपा आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने कहा कि यह बैठक कांग्रेस की सोची-समझी चाल है, जिससे वह महागठबंधन में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है। मालवीय ने इसे तेजस्वी यादव के मुख्यमंत्री बनने के सपने का अंत बताते हुए कहा कि कांग्रेस अब राजद पर निर्भर नहीं रहना चाहती।
महागठबंधन में संदेश:
मालवीय ने कहा कि इस बैठक में वही नेता शामिल हुए हैं जिन्होंने पहले बिहार और बिहार की जनता का अपमान किया। उनका कहना है कि महागठबंधन के भीतर तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री पद का चेहरा बनाने पर अब सहमति नहीं बन रही।
कांग्रेस-राजद में बढ़ती दूरी:
भाजपा का आरोप है कि राहुल गांधी का बिहार में बढ़ता सक्रियता दिखाता है कि कांग्रेस अब खुद को एक मजबूत ताकत के रूप में पेश करना चाहती है और राजद पर निर्भर नहीं रहना चाहती। मालवीय ने कहा कि चुनाव से पहले ही दोनों दलों की राहें अलग हो सकती हैं।
भाजपा नेताओं की प्रतिक्रिया:
भाजपा सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि कांग्रेस बिहार में अपनी जमीन खो चुकी है और उसके पास न नेता हैं न कार्यकर्ता। डॉ. बूरा नरसैया गौड़ ने राहुल गांधी के ‘वोट चोरी’ वाले आरोप को सिर्फ बहाना बताया और भाजपा की जीत की उम्मीद जताई।
पटना बैठक पर रविशंकर प्रसाद का तंज:
भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद ने कहा कि कांग्रेस को बिहार की याद 85 साल बाद आई है। उनका कहना है कि यह बैठक सिर्फ राजनीतिक फायदा और आगामी चुनावों के लिए है, जनता की भलाई के लिए नहीं।
भाजपा नेतृत्व की कार्यशैली और पारदर्शिता पर उठाए सवाल
मुंबई। शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने भाजपा पर संगठनात्मक चुनावों को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। राउत ने तंज कसते हुए कहा कि जब भाजपा देश के सर्वोच्च संस्थानों—मुख्य न्यायाधीश, उपराष्ट्रपति और चुनाव आयुक्त जैसे पदों पर बदलाव करने की ताकत रखती है, तो फिर अपने ही राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव कराने से क्यों बच रही है? उन्होंने आरोप लगाया कि इस मुद्दे पर पार्टी के भीतर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी जा रही और यही भाजपा की सबसे बड़ी कमजोरी है।
राउत ने कहा कि भाजपा नेतृत्व संगठनात्मक स्तर पर चुनाव कराने में असमर्थ दिखाई देता है। उनका व्यंग्यपूर्ण हमला भाजपा की कार्यशैली और पारदर्शिता पर सीधा वार माना जा रहा है।
मुंबई नगर निगम चुनाव और ठाकरे फैक्टर
आगामी मुंबई महानगरपालिका चुनाव को लेकर राउत ने संकेत दिए कि उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के बीच बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि सीटों के बंटवारे पर बयान केवल अंतिम सहमति के बाद ही सामने आएगा। राउत का दावा है कि ठाकरे परिवार का प्रभाव महाराष्ट्र की राजनीति में आज भी अहम है और इसका असर चुनावी नतीजों में साफ दिखेगा।
मराठी अस्मिता पर जोर
राउत ने मराठी पहचान को भी चुनावी एजेंडे से जोड़ा। उन्होंने कहा कि “मराठी जनता बताएगी कि ठाकरे ब्रांड का असली अर्थ क्या है।” उनका इशारा इस ओर था कि स्थानीय अस्मिता एक बार फिर चुनाव में निर्णायक कारक साबित हो सकती है।
भाजपा पर सीधा निशाना
विशेषज्ञ मानते हैं कि राउत का यह बयान भाजपा पर दबाव बनाने और विपक्षी एकजुटता को मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा है। शिवसेना (यूबीटी) पहले से ही भाजपा पर लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करने और संस्थानों पर नियंत्रण जमाने के आरोप लगाती रही है। अब संगठनात्मक चुनाव का मुद्दा भी इस बहस में नया मोड़ लेकर आया है।
राउत के बयान से साफ है कि आने वाले दिनों में मुंबई नगर निगम चुनाव और राज्य की राजनीति में नए समीकरण देखने को मिल सकते हैं। उन्होंने कहा कि “समय आने पर तस्वीर पूरी तरह साफ हो जाएगी।” राजनीतिक गलियारों में इसे विपक्षी खेमे की नई रणनीति का संकेत माना जा रहा है।
दोनों देशों के बीच लगातार छठे महीने हवाई क्षेत्र पर रोक जारी
नई दिल्ली। भारत और पाकिस्तान के बीच एयरस्पेस को लेकर जारी खींचतान थमने का नाम नहीं ले रही है। भारत ने पाकिस्तानी विमानों और एयरलाइंस पर लगे हवाई क्षेत्र प्रतिबंध को एक महीने और आगे बढ़ा दिया है। एविएशन अथॉरिटी द्वारा जारी नए नोटिस टू एयरमेन (NOTAM) के मुताबिक, अब यह रोक 24 अक्टूबर सुबह 5:29 बजे तक लागू रहेगी।
लगातार छठे महीने यह स्थिति बनी हुई है, क्योंकि पाकिस्तान ने भी दो दिन पहले अपने हवाई क्षेत्र में भारतीय विमानों की आवाजाही पर रोक को आगे बढ़ाया था। इस तरह दोनों देशों के बीच एयरस्पेस विवाद अब आधे साल से ज्यादा लंबा खिंच चुका है।
एयरस्पेस की इस जंग की शुरुआत अप्रैल में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम आतंकी हमले के बाद हुई थी। हमले के बाद पाकिस्तान ने अचानक भारतीय विमानों के लिए अपना हवाई क्षेत्र बंद कर दिया था, जिसके जवाब में भारत ने भी पाकिस्तानी उड़ानों पर प्रतिबंध लगा दिया। तब से हर महीने नए नोटम जारी कर दोनों देश इस रोक को बढ़ाते आ रहे हैं।
ध्यान देने वाली बात यह है कि यह रोक केवल भारत और पाकिस्तान की एयरलाइंस पर लागू है। विदेशी एयरलाइंस अब भी दोनों देशों के एयरस्पेस का इस्तेमाल कर सकती हैं। हालांकि, लंबे समय तक यह पाबंदी जारी रहने से दोनों देशों की एयरलाइंस को अतिरिक्त लागत और यात्रियों को असुविधा झेलनी पड़ रही है।
पीएम मोदी ने अरुणाचल को “उगते सूरज की धरती” बताया
इटानगर। अरुणाचल प्रदेश के इटानगर में सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 5,100 करोड़ रुपये से अधिक के महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन किया। इंदिरा गांधी पार्क में आयोजित कार्यक्रम में पीएम मोदी ने शि योमी जिले में दो बड़े जलविद्युत प्रोजेक्ट्स और तवांग में एक कन्वेंशन सेंटर की आधारशिला रखी। उन्होंने कहा कि ये परियोजनाएं राज्य के विकास और ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं।
पीएम मोदी ने अपने भाषण में कहा कि केंद्र सरकार की नीतियां पूर्वोत्तर राज्यों के सर्वांगीण विकास और सशक्तिकरण के लिए हैं। उन्होंने अरुणाचल प्रदेश को “उगते सूरज की धरती” बताते हुए कहा कि राज्य के लोग शौर्य और शांति का प्रतीक हैं।
सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग ने भी कहा कि प्रधानमंत्री ने हमेशा पूर्वोत्तर को विकास की दिशा में देखा है, न कि राजनीतिक लाभ के लिए।
कार्यक्रम के दौरान पीएम मोदी ने स्थानीय व्यापारियों, उद्योगपतियों और करदाताओं के साथ जीएसटी सुधारों पर चर्चा की और स्वदेशी उत्पादों के प्रचार को बढ़ावा देने की अपील की। उन्होंने ‘गर्व से कहो ये स्वदेशी है’ अभियान के पोस्टर भी वितरित किए।
प्रमुख परियोजनाएं:
ताटो-I प्रोजेक्ट: 186 मेगावाट क्षमता, 1,750 करोड़ रुपये लागत, सालाना 802 मिलियन यूनिट बिजली उत्पादन।
हेओ प्रोजेक्ट: 240 मेगावाट क्षमता, 1,939 करोड़ रुपये लागत, सालाना 1,000 मिलियन यूनिट बिजली उत्पादन।
तवांग कन्वेंशन सेंटर: 145.37 करोड़ रुपये, 1,500 लोगों की क्षमता, पर्यटन और सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा।
स्वास्थ्य, कनेक्टिविटी और फायर सेफ्टी सहित अन्य प्रोजेक्ट्स की कुल लागत 1,290 करोड़ रुपये से अधिक।
पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में ये कदम राज्य और देश दोनों के लिए आर्थिक सशक्तिकरण का अवसर हैं।
