क्या छिन रहा है मताधिकार? संसद में एसआईआर को लेकर घमासान तेज
नई दिल्ली। बिहार में मतदाता सूची की विशेष गहन समीक्षा (एसआईआर) को लेकर विपक्ष ने केंद्र सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने आरोप लगाया कि सरकार इस अहम प्रक्रिया पर संसद में चर्चा से बच रही है, जिससे लोकतंत्र की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने बुधवार को संसद में विपक्षी दलों की ओर से विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर चर्चा की मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची से जुड़ी यह प्रक्रिया बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे नागरिकों के मतदान के अधिकार सीधे प्रभावित हो सकते हैं।
खरगे ने चेतावनी दी कि यदि सरकार इस मुद्दे पर चर्चा से इनकार करती है, तो इसे लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक जिम्मेदारियों का अनादर माना जाएगा। उनके अनुसार, “हर भारतीय नागरिक के मताधिकार की रक्षा के लिए एसआईआर पर विस्तृत और पारदर्शी चर्चा बेहद जरूरी है।”
क्या है विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर)?
एसआईआर यानी विशेष गहन पुनरीक्षण चुनाव आयोग द्वारा की जाने वाली एक प्रक्रिया है, जिसमें मतदाता सूची की गहन जांच की जाती है। इस प्रक्रिया के तहत अपात्र नामों को हटाया जाता है, दोहराव को दूर किया जाता है, और नए योग्य मतदाताओं को जोड़ा जाता है। इसका उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक और पारदर्शी बनाना है।
विपक्ष की आपत्तियां
विपक्षी दलों का आरोप है कि बिहार में इस प्रक्रिया को पारदर्शिता के साथ नहीं किया जा रहा है। उनका मानना है कि इससे हजारों योग्य मतदाताओं के नाम सूची से हट सकते हैं, जिससे उनके मताधिकार पर असर पड़ेगा। इसी चिंता को लेकर विपक्ष इस विषय पर संसद में खुली बहस की मांग कर रहा है।
सरकार की चुप्पी पर उठे सवाल
खरगे ने यह भी सवाल उठाया कि केंद्र सरकार इस विषय पर चुप्पी साधे हुए है, जो संदेह को जन्म देता है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार वाकई लोकतांत्रिक सिद्धांतों में विश्वास रखती है, तो उसे विपक्ष की मांग पर विचार कर इस मुद्दे पर संसद में स्पष्ट और जवाबदेह चर्चा करनी चाहिए।
राहत और बचाव में जुटा प्रशासन
अब तक 3628 लोगों को किया गया रेस्क्यू
भोपाल। मध्य प्रदेश में पिछले एक महीने से लगातार हो रही मूसलधार बारिश और बाढ़ ने जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस आपदा में अब तक कुल 252 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें 132 की मौत नदी-नालों में डूबने से, 60 की आकाशीय बिजली की चपेट में आने से, 47 की मूसलधार बारिश के कारण, और 13 की मौत मकान, दीवार या पेड़ गिरने से हुई है।
राज्य के कई हिस्सों में जलभराव और भूस्खलन जैसी गंभीर समस्याएं सामने आई हैं। 432 रेस्क्यू ऑपरेशनों के जरिए अब तक 3628 नागरिकों और 94 मवेशियों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। राहत कार्यों के तहत स्थापित 53 राहत शिविरों में 3065 लोग शरण लिए हुए हैं, जिन्हें भोजन, दवाइयां और आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है।
अब तक 28.49 करोड़ रुपये की राहत राशि वितरित की जा चुकी है, जबकि कुल 3600 करोड़ रुपये की सहायता योजना बनाई गई है। बाढ़ से 128 मकान पूरी तरह ध्वस्त हो चुके हैं और 2333 मकान आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं। 254 ग्रामीण सड़कें भी क्षतिग्रस्त हुई हैं, जिससे गांवों का संपर्क टूट गया है।
राज्य में इस वर्ष अब तक 711.3 मिमी बारिश दर्ज की गई है, जो सामान्य से 59 प्रतिशत अधिक है। 40 जिलों में सामान्य से अधिक वर्षा के कारण बाढ़ की स्थिति बनी हुई है। मौसम विभाग ने छतरपुर और टीकमगढ़ के लिए अति भारी बारिश और वज्रपात का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इसके अलावा शिवपुरी, ग्वालियर, दतिया, भिंड, मुरैना सहित 40 से अधिक जिलों में वज्रपात और भारी वर्षा की संभावना जताई गई है।
आपदा की गंभीरता को देखते हुए एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर और धार सहित संवेदनशील इलाकों में तैनात की गई हैं। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बाढ़ प्रभावित इलाकों का जायजा लेते हुए कहा, “सेना और राहत दलों ने शिवपुरी में करीब 400 और गुना में 350 लोगों की जान बचाई है। प्रशासन पूरी मुस्तैदी से राहत कार्यों में जुटा है।”
सर गंगा राम अस्पताल में ली अंतिम सांस, जून से चल रहा था इलाज
झारखंड। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री, झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक और आदिवासी समाज के मजबूत स्तंभ शिबू सोरेन का आज निधन हो गया। वे 81 वर्ष के थे। लंबे समय से बीमार चल रहे शिबू सोरेन का इलाज दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल में चल रहा था। उनके निधन की जानकारी उनके पुत्र और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोशल मीडिया पर साझा की। उन्होंने लिखा, “आदरणीय दिशोम गुरुजी हम सभी को छोड़कर चले गए। आज मैं शून्य हो गया हूं।”
लंबे समय से चल रहा था इलाज
शिबू सोरेन को जून के अंतिम सप्ताह में किडनी संबंधी समस्याओं के चलते अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वे पिछले कई हफ्तों से गंभीर रूप से अस्वस्थ थे। दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल में इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली।
एक युग का अंत: साधारण जीवन से शिखर तक
साधारण किसान परिवार से राजनीति की ऊंचाइयों तक पहुंचे शिबू सोरेन का जीवन संघर्षों और उपलब्धियों की मिसाल रहा। तीन बार झारखंड के मुख्यमंत्री रहने वाले ‘गुरुजी’ ने झारखंड को एक अलग राज्य का दर्जा दिलाने की लड़ाई में ऐतिहासिक भूमिका निभाई। वे जीवनभर आदिवासी अधिकारों, गरीबों और वंचितों की आवाज बने रहे।
प्रधानमंत्री ने जताया शोक
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शिबू सोरेन के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए उन्हें ज़मीन से जुड़ा जननेता बताया। उन्होंने लिखा, “शिबू सोरेन जी का सार्वजनिक जीवन जनसेवा और आदिवासी समुदाय के सशक्तिकरण के लिए समर्पित था। उनके निधन से अत्यंत दुःख हुआ। मैंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से बात कर संवेदना व्यक्त की।”
राजनीतिक और सामाजिक चेतना के अग्रदूत
शिबू सोरेन को झारखंड में ‘गुरुजी’ के नाम से जाना जाता था। उन्होंने झारखंड मुक्ति मोर्चा के बैनर तले आदिवासी समाज को एकजुट किया और सामाजिक जागरूकता की लहर पैदा की। उनके नेतृत्व में झारखंड ने अपनी राजनीतिक पहचान को मजबूत किया। उनके निधन से न केवल झारखंड बल्कि पूरे देश की राजनीति में एक युग का समापन हो गया।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश पुलिस के दूरसंचार विभाग में चयनित 1494 अभ्यर्थियों को रविवार को राजधानी लखनऊ में आयोजित समारोह के दौरान नियुक्ति पत्र प्रदान किए गए। इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान के भव्य सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वयं उपस्थित होकर नवचयनित अभ्यर्थियों को शुभकामनाएँ दीं।
कार्यक्रम की शुरुआत में डीजीपी राजीव कृष्णा ने मुख्यमंत्री को प्रतीक चिह्न भेंट कर स्वागत किया। कार्यक्रम में वित्त मंत्री सुरेश खन्ना समेत कई कैबिनेट सदस्य और वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि प्रदेश सरकार बिना रुके, बिना थके और बिना डिगे हुए, सुरक्षा व्यवस्था के सुदृढ़ीकरण के लिए लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि अब तक 60,244 सिपाहियों की भर्ती पूरी हो चुकी है और आगे 30,000 नए पदों पर भर्ती प्रक्रिया जारी है। पुलिस प्रशिक्षण की व्यवस्था को भी राज्य ने काफी मजबूत किया है, जिससे अब सभी सिपाही राज्य के स्वयं के प्रशिक्षण केंद्रों में ही ट्रेनिंग प्राप्त कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री योगी ने यह भी बताया कि पुलिस विभाग को बेहतर आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं और उन जिलों में भी पुलिस लाइनें स्थापित की गई हैं, जहां पहले कोई व्यवस्था नहीं थी। उन्होंने कहा कि वर्षों से लंबित पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली को भी लागू किया गया है, जो अब सात जिलों में प्रभावी रूप से काम कर रही है।
सीएम ने कहा, “आज यूपी पुलिस न केवल राज्य में बल्कि पूरे देश में एक आदर्श बन चुकी है। बेहतर कानून व्यवस्था, समय पर कार्रवाई और आमजन के प्रति संवेदनशील रवैया इसकी पहचान बन गया है। महाकुंभ जैसे आयोजन यूपी पुलिस की सजगता और सेवा भावना के कारण ही सफल हो पाए।”
उन्होंने यह भी ऐलान किया कि यूपी पुलिस में 20 प्रतिशत भर्ती अब अग्निवीरों से की जाएगी, जो विभिन्न तकनीकी और प्रशासनिक क्षेत्रों में अपनी दक्षता के अनुसार सेवाएं देंगे।
कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने नियुक्ति पाने वाले सभी अभ्यर्थियों को ईमानदारी और निष्ठा से कार्य करने की नसीहत दी। उन्होंने कहा, “आपकी पूरी भर्ती प्रक्रिया पारदर्शिता के साथ हुई है, बिना किसी लेन-देन के। सरकार को आपसे भी उसी पारदर्शिता और ईमानदारी की अपेक्षा है।”
जनसभा को संबोधित करते हुए बोले प्रधानमंत्री मोदी- ‘मेक इन इंडिया’ को घर-घर पहुंचाने की जरूरत
वाराणसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से स्वदेशी अपनाने और ‘वोकल फॉर लोकल’ मंत्र को जीवन में उतारने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत की आर्थिक मजबूती के लिए हमें घरेलू उत्पादों को प्राथमिकता देनी होगी।
वाराणसी के सेवापुरी के बनौली गांव में शनिवार को एक जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए हर नागरिक को ‘स्वदेशी संकल्प’ लेना चाहिए। उन्होंने अपील की कि लोग उन्हीं वस्तुओं को खरीदें जो भारत में बनी हों, जिनमें भारत के लोगों का श्रम और कौशल जुड़ा हो।
प्रधानमंत्री ने कहा, “अब समय आ गया है कि हम ‘मेक इन इंडिया’ को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं। जो भी सामान घर में आए, वह स्वदेशी हो। दुकानदार भी यह संकल्प लें कि वे सिर्फ स्वदेशी उत्पाद ही बेचें। त्योहारों और खास अवसरों पर हम भारत में बनी चीजें ही खरीदें।”
उन्होंने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता का माहौल है और हर देश अपने हितों की रक्षा कर रहा है। ऐसे में भारत को भी सजग रहना होगा और आर्थिक स्वावलंबन को प्राथमिकता देनी होगी। उन्होंने किसानों, लघु उद्योगों और स्वरोजगार को सरकार की प्राथमिकता बताया।
पीएम मोदी ने यह भी कहा कि भारत को तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने का अवसर मिला है और इसे साकार करने के लिए नागरिकों को भी अपनी भूमिका निभानी होगी। उन्होंने महात्मा गांधी का उल्लेख करते हुए कहा कि स्वदेशी को अपनाना उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के बाद चुनाव आयोग ने जारी किया शेड्यूल, 7 अगस्त से होगी प्रक्रिया शुरू
नई दिल्ली। भारत के अगले उपराष्ट्रपति के चुनाव की तारीख तय हो गई है। चुनाव आयोग ने शुक्रवार को घोषणा की कि उपराष्ट्रपति पद के लिए मतदान 9 सितंबर को होगा और इसी दिन नतीजे भी घोषित कर दिए जाएंगे। 7 अगस्त को चुनाव की अधिसूचना जारी होगी और नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख 21 अगस्त रखी गई है। वर्तमान में यह पद जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के बाद खाली पड़ा है।
जगदीप धनखड़ ने 21 जुलाई को स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया था, जबकि उनके कार्यकाल का अभी दो साल से भी अधिक समय बाकी था। उन्होंने अपने त्यागपत्र में लिखा कि चिकित्सकीय सलाह को ध्यान में रखते हुए वे तत्काल प्रभाव से उपराष्ट्रपति पद छोड़ रहे हैं। उनके इस्तीफे के दो दिन बाद ही निर्वाचन आयोग ने चुनावी प्रक्रिया शुरू कर दी थी।
भारत के संविधान के अनुच्छेद 66(1) के अनुसार, उपराष्ट्रपति का चुनाव लोकसभा और राज्यसभा के निर्वाचित तथा राज्यसभा के मनोनीत सदस्यों द्वारा किया जाता है। मतदान गुप्त होता है और यह एकल संक्रमणीय मत प्रणाली के आधार पर संपन्न होता है। निर्वाचन आयोग इस चुनाव के लिए अद्यतन मतदाता सूची तैयार करता है, जिसमें सभी पात्र सांसदों को वर्णमाला क्रम में सूचीबद्ध किया गया है।
इस बार नए उपराष्ट्रपति को पूरा पांच साल का कार्यकाल मिलेगा, न कि पूर्ववर्ती का शेष कार्यकाल।
राजनीतिक समीकरण की स्थिति:
दोनों सदनों की कुल प्रभावी सदस्य संख्या 782 है और उपराष्ट्रपति बनने के लिए किसी भी उम्मीदवार को 391 मतों की आवश्यकता होगी। इस चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) को स्पष्ट बढ़त नजर आ रही है। लोकसभा में राजग को 542 में से 293 सदस्यों का समर्थन प्राप्त है, जबकि राज्यसभा में 129 सदस्यों का समर्थन है। यदि सभी समर्थक सदस्य मतदान करते हैं, तो कुल 422 वोट राजग के पक्ष में हो सकते हैं।
राज्यसभा की पांच सीटें वर्तमान में रिक्त हैं — जिनमें से चार जम्मू-कश्मीर से और एक पंजाब से है, जो आम आदमी पार्टी के नेता संजीव अरोड़ा के इस्तीफे के बाद खाली हुई।
मुख्यमंत्री स्टालिन से मुलाकात के बाद लिया गया अहम फैसला
चेन्नई। तमिलनाडु में 2026 में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले राज्य की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। पूर्व मुख्यमंत्री ओ. पन्नीरसेल्वम (ओपीएस) के नेतृत्व वाली एआईएडीएमके कैडर राइट्स रिट्रीवल कमेटी ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन से संबंध समाप्त करने का ऐलान कर दिया है। यह निर्णय मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन से मुलाकात के कुछ घंटे बाद सामने आया, जिससे सियासी हलचल और बढ़ गई है।
इस फैसले की घोषणा समिति के वरिष्ठ नेता और सलाहकार पनरुट्टी एस. रामचंद्रन ने गुरुवार को एक प्रेस वार्ता में की, जिसमें स्वयं ओपीएस भी उपस्थित थे। समिति ने स्पष्ट किया कि अब से वे एनडीए का हिस्सा नहीं रहेंगे। साथ ही यह भी बताया गया कि ओ. पन्नीरसेल्वम राज्यभर में दौरा करेंगे और राजनीतिक स्थिति का आकलन कर आगामी गठबंधनों पर निर्णय लेंगे।
गठबंधन टूटने के पीछे कारण:
सूत्रों के अनुसार, ओपीएस की नाराजगी की वजह हालिया घटनाक्रम है, जहां उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने के लिए पत्र लिखा था, लेकिन मुलाकात नहीं हो सकी। इसको लेकर उनकी निराशा बढ़ी और उन्होंने केंद्र सरकार पर ‘समग्र शिक्षा अभियान’ (SSA) के फंड वितरण में देरी को लेकर सोशल मीडिया पर आलोचना भी की थी। माना जा रहा है कि यह घटनाएं ही एनडीए से अलग होने का मुख्य कारण बनीं।
नए गठबंधन के संकेत:
ओपीएस ने अभिनेता विजय की पार्टी तमिलागा वेत्त्री कझगम (TVK) के साथ गठबंधन की संभावना को पूरी तरह नकारा नहीं है। उन्होंने कहा, “अभी चुनाव में समय है, वक्त आने पर स्थिति स्पष्ट होगी।” बता दें कि ओपीएस पहले एआईएडीएमके के शीर्ष नेता थे, लेकिन आंतरिक मतभेदों के चलते उन्होंने अपनी स्वतंत्र धारा बना ली थी।
राजनीतिक मायने:
एनडीए से अलग होने के फैसले ने तमिलनाडु की राजनीति में संभावित नए समीकरणों की नींव रख दी है। यह घटनाक्रम 2026 विधानसभा चुनावों से पहले राज्य की सियासी दिशा को नया मोड़ दे सकता है।
भूस्खलन और बाढ़ से मंडी, चंबा और कुल्लू में हालात सबसे गंभीर
मानसून में अब तक 170 लोगों की मौत, कई लोग घायल और लापता
शिमला। हिमाचल प्रदेश में लगातार हो रही भारी बारिश ने जनजीवन को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। राज्य के कई जिलों में भूस्खलन, अचानक बाढ़ और जलभराव की घटनाओं ने संकट की स्थिति पैदा कर दी है। गुरुवार सुबह तक प्रदेश में एक राष्ट्रीय राजमार्ग समेत 302 सड़कें आवाजाही के लिए बंद रहीं। वहीं, 436 बिजली ट्रांसफॉर्मर और 254 जलापूर्ति योजनाएं ठप पड़ी हैं। आपदा से सर्वाधिक प्रभावित मंडी जिले में ही 193 सड़कें अवरुद्ध हैं, जबकि कुल्लू और चंबा जिले में बिजली आपूर्ति सबसे अधिक प्रभावित हुई है।
धर्मशाला समेत कई इलाकों में भारी बारिश, येलो अलर्ट जारी
बीती रात धर्मशाला में 54.4 मिमी, मुरारी देवी में 52.4 मिमी, और कोठी में 49.1 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई। मौसम विभाग शिमला ने राज्य के अधिकांश क्षेत्रों में 6 अगस्त तक बारिश जारी रहने की संभावना जताई है और कुछ इलाकों के लिए भारी बारिश का येलो अलर्ट भी जारी किया गया है। शिमला सहित कई क्षेत्रों में मौसम खराब बना हुआ है।
भूस्खलन के बीच युवक ने कंधे पर उठाकर पार की बाइक
चंबा जिले के चुराह उपमंडल में नकरोड़-चांजू सड़क पर भूस्खलन के कारण एक युवक अपनी बाइक सहित फंस गया। काफी इंतजार के बाद युवक ने हिम्मत दिखाई और चट्टानों के बीच से बाइक को कंधों पर उठाकर दूसरी ओर पहुंचाया। यह दृश्य वहां मौजूद लोगों के लिए किसी फिल्मी दृश्य से कम नहीं था।
सलूणी में भूस्खलन से गरीब महिला का मकान ढहा
चंबा जिले की सलूणी तहसील के टिक्कर गांव में भूस्खलन से शिवो देवी नामक महिला का नया मकान पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया। यह मकान उन्हें सरकार की योजना के तहत मिला था, लेकिन भारी बारिश के चलते उनका आशियाना मलबे में तब्दील हो गया। परिवार की आर्थिक स्थिति अत्यंत कमजोर बताई जा रही है।
मानसून का भारी कहर: 1,687 घर-दुकानों को नुकसान, 170 की मौत
इस मानसून सीजन में अब तक प्रदेश में 170 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 278 घायल हुए हैं और 36 अब भी लापता हैं। 76 लोगों की सड़क दुर्घटनाओं में जान गई है। बारिश जनित घटनाओं से 1,687 कच्चे-पक्के मकान और दुकानें क्षतिग्रस्त हुई हैं। 1,226 गोशालाएं और 1,404 पालतू पशु भी प्रभावित हुए हैं। अब तक अनुमानित आर्थिक नुकसान 1,599 करोड़ रुपये से अधिक पहुंच चुका है।
जयशंकर बोले- ऑपरेशन सिंदूर के दौरान नहीं हुई ट्रंप-मोदी की बातचीत
नई दिल्ली। राज्यसभा में बुधवार को “ऑपरेशन सिंदूर” को लेकर सरकार की ओर से विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने विस्तृत बयान दिया। इस दौरान उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के संघर्ष विराम को लेकर किए गए दावों को पूरी तरह नकारते हुए कहा कि 22 अप्रैल से 16 जून 2025 तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ट्रंप के बीच कोई बातचीत नहीं हुई।
जयशंकर ने विपक्षी दलों को स्पष्ट शब्दों में जवाब देते हुए कहा, “मैं साफ-साफ कहना चाहता हूं कि इन दो महीनों के बीच प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच एक बार भी संवाद नहीं हुआ। संघर्ष विराम के संदर्भ में जो भी प्रयास हुए, वे पाकिस्तान की ओर से डीजीएमओ के माध्यम से हुए।”
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत की नीति रही है कि किसी भी मुद्दे का समाधान सिर्फ द्विपक्षीय बातचीत से ही होगा, किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता स्वीकार नहीं की जाएगी।
मध्यस्थता से इनकार, पाकिस्तान को चेतावनी
विदेश मंत्री ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान कई देशों ने भारत से हालात के बारे में जानकारी मांगी, लेकिन भारत ने स्पष्ट कर दिया कि संघर्ष विराम तभी होगा जब पाकिस्तान खुद पहल करेगा और वह भी सैन्य चैनलों के ज़रिए। जयशंकर ने दोहराया, “हम पाकिस्तानी हमले का मुँहतोड़ जवाब दे रहे हैं और जब तक ज़रूरत होगी, देते रहेंगे।”
सिंधु जल समझौते और कांग्रेस पर हमला
संसद में अपने संबोधन में जयशंकर ने कांग्रेस पार्टी को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने सिंधु जल समझौते को भारत के हितों के खिलाफ बताते हुए कहा कि यह समझौता एकतरफा था, जिसमें भारत ने अपनी प्रमुख नदियों का जल पाकिस्तान को बिना किसी ठोस रणनीति के दे दिया। उन्होंने कहा, “दुनिया में ऐसा कोई उदाहरण नहीं है जहां कोई देश अपने जल संसाधनों को इस तरह पड़ोसी देश को सौंप देता हो। यह तत्कालीन कांग्रेस सरकार की बड़ी चूक थी।”
संक्षेप में, डॉ. जयशंकर ने संसद में स्पष्ट किया कि भारत किसी भी बाहरी दबाव में नहीं झुकेगा और राष्ट्रीय हितों से समझौता नहीं करेगा, चाहे वह संघर्ष विराम हो या जल नीति।
लोकसभा से राज्यसभा तक नेहरू को लेकर विपक्ष और सरकार आमने-सामने
नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर हुई चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह द्वारा पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का उल्लेख किए जाने पर कांग्रेस ने कड़ी आपत्ति जताई है। कांग्रेस ने इसे सरकार की विफलताओं से ध्यान भटकाने की कोशिश करार दिया और दोनों नेताओं पर तीखा हमला बोला।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह जवाहरलाल नेहरू का नाम लेकर हर बहस को भटकाने की कोशिश करते हैं। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि दोनों नेता नेहरू के प्रति ‘ऑब्सेसिव-कंपल्सिव डिसऑर्डर (ओसीडी)’ से ग्रस्त हैं।
रमेश ने कहा, “लोकसभा में हुई चर्चा में एक बार फिर यह साफ हो गया कि सरकार के पास अपनी विफलताओं का कोई जवाब नहीं है। वे बार-बार नेहरू का नाम लेकर जनता को गुमराह करना चाहते हैं, क्योंकि उनकी नीतियों और कामकाज पर उठ रहे सवालों का सामना करने की उनकी मंशा नहीं है।”
उन्होंने कहा कि सार्थक बहस से बचने के लिए भाजपा के शीर्ष नेता इतिहास की गलत व्याख्या करते हैं और विपक्ष को बदनाम करने में जुट जाते हैं। उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह पर भी निशाना साधते हुए कहा कि वह खुद को इतिहासकार समझते हैं, लेकिन उनका उद्देश्य सिर्फ भ्रम फैलाना है।
प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के बयान:
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में अपने भाषण के दौरान कहा कि नेहरू सरकार ने अक्साई चीन का 38,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र गंवा दिया। उन्होंने सिंधु जल संधि पर हस्ताक्षर करके भी रणनीतिक गलती की थी। पीएम ने सवाल किया कि पीओके (पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर) आज तक क्यों नहीं वापस लिया गया और इसका जिम्मेदार कौन है?
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि देश का विभाजन और पीओके की मौजूदा स्थिति नेहरू सरकार की नीतियों का परिणाम हैं। उन्होंने कहा, “1948 में जब भारतीय सेना कश्मीर में निर्णायक स्थिति में थी, तब नेहरू ने बिना किसी सलाह के युद्धविराम की घोषणा कर दी। सरदार पटेल इसके खिलाफ थे, लेकिन उनकी बात नहीं मानी गई।”
