पहाड़ी से गिरे विशाल पत्थर के कारण हुआ दर्दनाक हादसा
चंबा। हिमाचल प्रदेश के भंजराड़ू-शहवा-भड़कवास मार्ग पर एक भीषण सड़क हादसे में छह लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। बताया जा रहा है कि सफेद रंग की स्विफ्ट कार पर अचानक पहाड़ी से एक विशाल पत्थर गिरा, जिससे वाहन अनियंत्रित होकर साउआ पधरी के समीप करीब 500 मीटर गहरी खाई में जा गिरा।
हादसे में जान गंवाने वालों में एक ही परिवार के चार सदस्य—राजेश कुमार (40), उनकी पत्नी हंसो (36), बेटी आरती (17) और बेटा दीपक (15)—शामिल हैं। इनके साथ रिश्तेदार राकेश कुमार (44) और चालक हेम पाल (37) की भी मौत हो गई। सभी मृतक चंबा जिले के अलग-अलग गांवों के निवासी थे।
स्थानीय ग्रामीणों ने चीख-पुकार सुनते ही पुलिस और अग्निशमन विभाग को सूचना दी। राहत टीमों और ग्रामीणों ने मिलकर कठिन प्रयासों के बाद शवों को गहरी खाई से निकालकर सड़क तक पहुंचाया। पुलिस अधीक्षक अभिषेक यादव के अनुसार, सभी शवों का पोस्टमार्टम सिविल अस्पताल तीसा में किया जाएगा और बाद में परिजनों को सौंप दिया जाएगा।
जानकारी के अनुसार, मृतक राजेश कुमार जेबीटी अध्यापक थे और वर्तमान में प्राथमिक विद्यालय बुलवास में तैनात थे।
राहुल गांधी ने सीसीटीवी-वेबकास्टिंग फुटेज सिर्फ 45 दिन रखने के नियम पर उठाए सवाल
नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने एक बार फिर चुनाव आयोग को कटघरे में खड़ा किया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर साझा एक वीडियो के जरिए उन्होंने आरोप लगाया कि वोट चोरी सिर्फ चुनावी गड़बड़ी नहीं, बल्कि संविधान और लोकतंत्र के साथ किया गया गंभीर विश्वासघात है। राहुल ने लिखा, “देश के गुनहगार सुन लें—वक्त बदलेगा, सजा जरूर मिलेगी।”
राहुल गांधी ने दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में प्रेस वार्ता कर कहा कि चुनाव आयोग और भाजपा के बीच मिलीभगत से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को तीसरी बार सत्ता मिली। उन्होंने दावा किया कि मोदी महज 25 सीटों के अंतर से प्रधानमंत्री बने और आयोग ने कर्नाटक के महादेवपुर विधानसभा क्षेत्र में मतगणना से जुड़े आंकड़े उपलब्ध कराने से इनकार किया।
कांग्रेस नेता ने यह भी आरोप लगाया कि आयोग चुनावी प्रक्रिया के सीसीटीवी व वेबकास्टिंग फुटेज को केवल 45 दिनों तक सुरक्षित रखने का नियम बनाकर सबूत मिटाने की कोशिश कर रहा है, जबकि इसी अवधि में अदालत में चुनाव परिणाम को चुनौती दी जा सकती है।
चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया
कर्नाटक विधानसभा क्षेत्र में मतदाता सूची में हेरफेर के आरोप पर राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने राहुल गांधी को शपथ पत्र के साथ सबूत पेश करने को कहा है। इसी तरह महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव-2024 से जुड़े मतदाता धोखाधड़ी के मामले में भी उनसे शपथ पत्र और प्रमाण मांगे गए हैं।
भाजपा का पलटवार
केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने राहुल गांधी के आरोपों को गंभीरता से लेने से इनकार करते हुए कहा कि कांग्रेस ने कानूनी प्रक्रिया का सहारा क्यों नहीं लिया? उन्होंने सवाल उठाया कि पार्टी ने न तो आपत्ति दर्ज कराई और न ही कोई चुनाव याचिका दायर की, फिर अब आयोग पर चुनिंदा हमला क्यों किया जा रहा है?
रूस से तेल खरीद जारी रखने पर ट्रंप सरकार ने भारतीय वस्तुओं पर 25% अतिरिक्त शुल्क लगाया
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा – मोदी सरकार अमेरिका से व्यापार समझौता करने में रही नाकाम
नई दिल्ली। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत से आयातित वस्तुओं पर 25% अतिरिक्त शुल्क लगाने के फैसले ने दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों में तनाव बढ़ा दिया है। यह कदम भारत द्वारा रूस से कच्चा तेल खरीद जारी रखने को लेकर अमेरिका की नाराजगी के रूप में सामने आया है। नए शुल्क के लागू होने के बाद अब भारत से अमेरिका को निर्यात होने वाले उत्पादों पर कुल 50% टैरिफ लगना शुरू हो गया है। यह आदेश 7 अगस्त से प्रभावी हो चुका है।
इस घटनाक्रम के बाद देश की राजनीति भी गरमा गई है। कांग्रेस अध्यक्ष व राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार को कठघरे में खड़ा करते हुए मोदी सरकार की विदेश नीति को “कमजोर और दिशाहीन” करार दिया है।
“विदेश नीति की विफलता है यह टैक्स फैसला” — खरगे का मोदी सरकार पर हमला
खरगे ने कहा कि अमेरिका का यह रुख ऐसे वक्त में सामने आया है जब भारत की कूटनीतिक स्थिति स्पष्ट नहीं है और सरकार दबाव में नजर आ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिका से व्यापार समझौता करने में नाकाम रहे हैं और अब भारत को आर्थिक मोर्चे पर बड़ा झटका झेलना पड़ रहा है।
मोदी की चुप्पी पर कांग्रेस का सवाल
खरगे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए पूछा कि प्रधानमंत्री मोदी इस गंभीर मसले पर अब तक चुप क्यों हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि इस बार सरकार अपनी विफलता का ठीकरा 70 साल पुरानी कांग्रेस सरकारों पर नहीं फोड़ सकती। उन्होंने यह भी दावा किया कि केंद्र सरकार बीते छह महीने से अमेरिका के साथ व्यापारिक समझौते पर कोई ठोस प्रगति नहीं कर पाई।
ट्रंप की चेतावनी और पुरानी बयानबाज़ी का जिक्र
खरगे ने ट्रंप के पूर्व बयानों को याद दिलाते हुए कहा कि 2024 में उन्होंने BRICS को ‘मृत गठबंधन’ बताया था और 100% टैरिफ की धमकी भी दी थी। अब जब उन्होंने 25% अतिरिक्त शुल्क लगाने का आदेश जारी कर दिया है, तब भी मोदी सरकार पूरी तरह चुप्पी साधे बैठी है।
भारतीय उद्योगों पर पड़ेगा भारी आर्थिक असर
कांग्रेस अध्यक्ष ने इस फैसले के आर्थिक प्रभावों पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि वर्ष 2024 में भारत ने अमेरिका को करीब ₹7.51 लाख करोड़ का निर्यात किया था। 50% टैरिफ के चलते देश पर ₹3.75 लाख करोड़ का अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है। इस फैसले का सबसे ज्यादा असर कृषि, एमएसएमई, डेयरी, इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, रत्न और आभूषण, फार्मा, पेट्रोलियम और कपड़ा उद्योग पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
क्या छिन रहा है मताधिकार? संसद में एसआईआर को लेकर घमासान तेज
नई दिल्ली। बिहार में मतदाता सूची की विशेष गहन समीक्षा (एसआईआर) को लेकर विपक्ष ने केंद्र सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने आरोप लगाया कि सरकार इस अहम प्रक्रिया पर संसद में चर्चा से बच रही है, जिससे लोकतंत्र की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने बुधवार को संसद में विपक्षी दलों की ओर से विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर चर्चा की मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची से जुड़ी यह प्रक्रिया बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे नागरिकों के मतदान के अधिकार सीधे प्रभावित हो सकते हैं।
खरगे ने चेतावनी दी कि यदि सरकार इस मुद्दे पर चर्चा से इनकार करती है, तो इसे लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक जिम्मेदारियों का अनादर माना जाएगा। उनके अनुसार, “हर भारतीय नागरिक के मताधिकार की रक्षा के लिए एसआईआर पर विस्तृत और पारदर्शी चर्चा बेहद जरूरी है।”
क्या है विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर)?
एसआईआर यानी विशेष गहन पुनरीक्षण चुनाव आयोग द्वारा की जाने वाली एक प्रक्रिया है, जिसमें मतदाता सूची की गहन जांच की जाती है। इस प्रक्रिया के तहत अपात्र नामों को हटाया जाता है, दोहराव को दूर किया जाता है, और नए योग्य मतदाताओं को जोड़ा जाता है। इसका उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक और पारदर्शी बनाना है।
विपक्ष की आपत्तियां
विपक्षी दलों का आरोप है कि बिहार में इस प्रक्रिया को पारदर्शिता के साथ नहीं किया जा रहा है। उनका मानना है कि इससे हजारों योग्य मतदाताओं के नाम सूची से हट सकते हैं, जिससे उनके मताधिकार पर असर पड़ेगा। इसी चिंता को लेकर विपक्ष इस विषय पर संसद में खुली बहस की मांग कर रहा है।
सरकार की चुप्पी पर उठे सवाल
खरगे ने यह भी सवाल उठाया कि केंद्र सरकार इस विषय पर चुप्पी साधे हुए है, जो संदेह को जन्म देता है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार वाकई लोकतांत्रिक सिद्धांतों में विश्वास रखती है, तो उसे विपक्ष की मांग पर विचार कर इस मुद्दे पर संसद में स्पष्ट और जवाबदेह चर्चा करनी चाहिए।
राहत और बचाव में जुटा प्रशासन
अब तक 3628 लोगों को किया गया रेस्क्यू
भोपाल। मध्य प्रदेश में पिछले एक महीने से लगातार हो रही मूसलधार बारिश और बाढ़ ने जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस आपदा में अब तक कुल 252 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें 132 की मौत नदी-नालों में डूबने से, 60 की आकाशीय बिजली की चपेट में आने से, 47 की मूसलधार बारिश के कारण, और 13 की मौत मकान, दीवार या पेड़ गिरने से हुई है।
राज्य के कई हिस्सों में जलभराव और भूस्खलन जैसी गंभीर समस्याएं सामने आई हैं। 432 रेस्क्यू ऑपरेशनों के जरिए अब तक 3628 नागरिकों और 94 मवेशियों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। राहत कार्यों के तहत स्थापित 53 राहत शिविरों में 3065 लोग शरण लिए हुए हैं, जिन्हें भोजन, दवाइयां और आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है।
अब तक 28.49 करोड़ रुपये की राहत राशि वितरित की जा चुकी है, जबकि कुल 3600 करोड़ रुपये की सहायता योजना बनाई गई है। बाढ़ से 128 मकान पूरी तरह ध्वस्त हो चुके हैं और 2333 मकान आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं। 254 ग्रामीण सड़कें भी क्षतिग्रस्त हुई हैं, जिससे गांवों का संपर्क टूट गया है।
राज्य में इस वर्ष अब तक 711.3 मिमी बारिश दर्ज की गई है, जो सामान्य से 59 प्रतिशत अधिक है। 40 जिलों में सामान्य से अधिक वर्षा के कारण बाढ़ की स्थिति बनी हुई है। मौसम विभाग ने छतरपुर और टीकमगढ़ के लिए अति भारी बारिश और वज्रपात का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इसके अलावा शिवपुरी, ग्वालियर, दतिया, भिंड, मुरैना सहित 40 से अधिक जिलों में वज्रपात और भारी वर्षा की संभावना जताई गई है।
आपदा की गंभीरता को देखते हुए एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर और धार सहित संवेदनशील इलाकों में तैनात की गई हैं। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बाढ़ प्रभावित इलाकों का जायजा लेते हुए कहा, “सेना और राहत दलों ने शिवपुरी में करीब 400 और गुना में 350 लोगों की जान बचाई है। प्रशासन पूरी मुस्तैदी से राहत कार्यों में जुटा है।”
सर गंगा राम अस्पताल में ली अंतिम सांस, जून से चल रहा था इलाज
झारखंड। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री, झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक और आदिवासी समाज के मजबूत स्तंभ शिबू सोरेन का आज निधन हो गया। वे 81 वर्ष के थे। लंबे समय से बीमार चल रहे शिबू सोरेन का इलाज दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल में चल रहा था। उनके निधन की जानकारी उनके पुत्र और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोशल मीडिया पर साझा की। उन्होंने लिखा, “आदरणीय दिशोम गुरुजी हम सभी को छोड़कर चले गए। आज मैं शून्य हो गया हूं।”
लंबे समय से चल रहा था इलाज
शिबू सोरेन को जून के अंतिम सप्ताह में किडनी संबंधी समस्याओं के चलते अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वे पिछले कई हफ्तों से गंभीर रूप से अस्वस्थ थे। दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल में इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली।
एक युग का अंत: साधारण जीवन से शिखर तक
साधारण किसान परिवार से राजनीति की ऊंचाइयों तक पहुंचे शिबू सोरेन का जीवन संघर्षों और उपलब्धियों की मिसाल रहा। तीन बार झारखंड के मुख्यमंत्री रहने वाले ‘गुरुजी’ ने झारखंड को एक अलग राज्य का दर्जा दिलाने की लड़ाई में ऐतिहासिक भूमिका निभाई। वे जीवनभर आदिवासी अधिकारों, गरीबों और वंचितों की आवाज बने रहे।
प्रधानमंत्री ने जताया शोक
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शिबू सोरेन के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए उन्हें ज़मीन से जुड़ा जननेता बताया। उन्होंने लिखा, “शिबू सोरेन जी का सार्वजनिक जीवन जनसेवा और आदिवासी समुदाय के सशक्तिकरण के लिए समर्पित था। उनके निधन से अत्यंत दुःख हुआ। मैंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से बात कर संवेदना व्यक्त की।”
राजनीतिक और सामाजिक चेतना के अग्रदूत
शिबू सोरेन को झारखंड में ‘गुरुजी’ के नाम से जाना जाता था। उन्होंने झारखंड मुक्ति मोर्चा के बैनर तले आदिवासी समाज को एकजुट किया और सामाजिक जागरूकता की लहर पैदा की। उनके नेतृत्व में झारखंड ने अपनी राजनीतिक पहचान को मजबूत किया। उनके निधन से न केवल झारखंड बल्कि पूरे देश की राजनीति में एक युग का समापन हो गया।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश पुलिस के दूरसंचार विभाग में चयनित 1494 अभ्यर्थियों को रविवार को राजधानी लखनऊ में आयोजित समारोह के दौरान नियुक्ति पत्र प्रदान किए गए। इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान के भव्य सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वयं उपस्थित होकर नवचयनित अभ्यर्थियों को शुभकामनाएँ दीं।
कार्यक्रम की शुरुआत में डीजीपी राजीव कृष्णा ने मुख्यमंत्री को प्रतीक चिह्न भेंट कर स्वागत किया। कार्यक्रम में वित्त मंत्री सुरेश खन्ना समेत कई कैबिनेट सदस्य और वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि प्रदेश सरकार बिना रुके, बिना थके और बिना डिगे हुए, सुरक्षा व्यवस्था के सुदृढ़ीकरण के लिए लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि अब तक 60,244 सिपाहियों की भर्ती पूरी हो चुकी है और आगे 30,000 नए पदों पर भर्ती प्रक्रिया जारी है। पुलिस प्रशिक्षण की व्यवस्था को भी राज्य ने काफी मजबूत किया है, जिससे अब सभी सिपाही राज्य के स्वयं के प्रशिक्षण केंद्रों में ही ट्रेनिंग प्राप्त कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री योगी ने यह भी बताया कि पुलिस विभाग को बेहतर आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं और उन जिलों में भी पुलिस लाइनें स्थापित की गई हैं, जहां पहले कोई व्यवस्था नहीं थी। उन्होंने कहा कि वर्षों से लंबित पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली को भी लागू किया गया है, जो अब सात जिलों में प्रभावी रूप से काम कर रही है।
सीएम ने कहा, “आज यूपी पुलिस न केवल राज्य में बल्कि पूरे देश में एक आदर्श बन चुकी है। बेहतर कानून व्यवस्था, समय पर कार्रवाई और आमजन के प्रति संवेदनशील रवैया इसकी पहचान बन गया है। महाकुंभ जैसे आयोजन यूपी पुलिस की सजगता और सेवा भावना के कारण ही सफल हो पाए।”
उन्होंने यह भी ऐलान किया कि यूपी पुलिस में 20 प्रतिशत भर्ती अब अग्निवीरों से की जाएगी, जो विभिन्न तकनीकी और प्रशासनिक क्षेत्रों में अपनी दक्षता के अनुसार सेवाएं देंगे।
कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने नियुक्ति पाने वाले सभी अभ्यर्थियों को ईमानदारी और निष्ठा से कार्य करने की नसीहत दी। उन्होंने कहा, “आपकी पूरी भर्ती प्रक्रिया पारदर्शिता के साथ हुई है, बिना किसी लेन-देन के। सरकार को आपसे भी उसी पारदर्शिता और ईमानदारी की अपेक्षा है।”
जनसभा को संबोधित करते हुए बोले प्रधानमंत्री मोदी- ‘मेक इन इंडिया’ को घर-घर पहुंचाने की जरूरत
वाराणसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से स्वदेशी अपनाने और ‘वोकल फॉर लोकल’ मंत्र को जीवन में उतारने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत की आर्थिक मजबूती के लिए हमें घरेलू उत्पादों को प्राथमिकता देनी होगी।
वाराणसी के सेवापुरी के बनौली गांव में शनिवार को एक जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए हर नागरिक को ‘स्वदेशी संकल्प’ लेना चाहिए। उन्होंने अपील की कि लोग उन्हीं वस्तुओं को खरीदें जो भारत में बनी हों, जिनमें भारत के लोगों का श्रम और कौशल जुड़ा हो।
प्रधानमंत्री ने कहा, “अब समय आ गया है कि हम ‘मेक इन इंडिया’ को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं। जो भी सामान घर में आए, वह स्वदेशी हो। दुकानदार भी यह संकल्प लें कि वे सिर्फ स्वदेशी उत्पाद ही बेचें। त्योहारों और खास अवसरों पर हम भारत में बनी चीजें ही खरीदें।”
उन्होंने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता का माहौल है और हर देश अपने हितों की रक्षा कर रहा है। ऐसे में भारत को भी सजग रहना होगा और आर्थिक स्वावलंबन को प्राथमिकता देनी होगी। उन्होंने किसानों, लघु उद्योगों और स्वरोजगार को सरकार की प्राथमिकता बताया।
पीएम मोदी ने यह भी कहा कि भारत को तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने का अवसर मिला है और इसे साकार करने के लिए नागरिकों को भी अपनी भूमिका निभानी होगी। उन्होंने महात्मा गांधी का उल्लेख करते हुए कहा कि स्वदेशी को अपनाना उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के बाद चुनाव आयोग ने जारी किया शेड्यूल, 7 अगस्त से होगी प्रक्रिया शुरू
नई दिल्ली। भारत के अगले उपराष्ट्रपति के चुनाव की तारीख तय हो गई है। चुनाव आयोग ने शुक्रवार को घोषणा की कि उपराष्ट्रपति पद के लिए मतदान 9 सितंबर को होगा और इसी दिन नतीजे भी घोषित कर दिए जाएंगे। 7 अगस्त को चुनाव की अधिसूचना जारी होगी और नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख 21 अगस्त रखी गई है। वर्तमान में यह पद जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के बाद खाली पड़ा है।
जगदीप धनखड़ ने 21 जुलाई को स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया था, जबकि उनके कार्यकाल का अभी दो साल से भी अधिक समय बाकी था। उन्होंने अपने त्यागपत्र में लिखा कि चिकित्सकीय सलाह को ध्यान में रखते हुए वे तत्काल प्रभाव से उपराष्ट्रपति पद छोड़ रहे हैं। उनके इस्तीफे के दो दिन बाद ही निर्वाचन आयोग ने चुनावी प्रक्रिया शुरू कर दी थी।
भारत के संविधान के अनुच्छेद 66(1) के अनुसार, उपराष्ट्रपति का चुनाव लोकसभा और राज्यसभा के निर्वाचित तथा राज्यसभा के मनोनीत सदस्यों द्वारा किया जाता है। मतदान गुप्त होता है और यह एकल संक्रमणीय मत प्रणाली के आधार पर संपन्न होता है। निर्वाचन आयोग इस चुनाव के लिए अद्यतन मतदाता सूची तैयार करता है, जिसमें सभी पात्र सांसदों को वर्णमाला क्रम में सूचीबद्ध किया गया है।
इस बार नए उपराष्ट्रपति को पूरा पांच साल का कार्यकाल मिलेगा, न कि पूर्ववर्ती का शेष कार्यकाल।
राजनीतिक समीकरण की स्थिति:
दोनों सदनों की कुल प्रभावी सदस्य संख्या 782 है और उपराष्ट्रपति बनने के लिए किसी भी उम्मीदवार को 391 मतों की आवश्यकता होगी। इस चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) को स्पष्ट बढ़त नजर आ रही है। लोकसभा में राजग को 542 में से 293 सदस्यों का समर्थन प्राप्त है, जबकि राज्यसभा में 129 सदस्यों का समर्थन है। यदि सभी समर्थक सदस्य मतदान करते हैं, तो कुल 422 वोट राजग के पक्ष में हो सकते हैं।
राज्यसभा की पांच सीटें वर्तमान में रिक्त हैं — जिनमें से चार जम्मू-कश्मीर से और एक पंजाब से है, जो आम आदमी पार्टी के नेता संजीव अरोड़ा के इस्तीफे के बाद खाली हुई।
मुख्यमंत्री स्टालिन से मुलाकात के बाद लिया गया अहम फैसला
चेन्नई। तमिलनाडु में 2026 में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले राज्य की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। पूर्व मुख्यमंत्री ओ. पन्नीरसेल्वम (ओपीएस) के नेतृत्व वाली एआईएडीएमके कैडर राइट्स रिट्रीवल कमेटी ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन से संबंध समाप्त करने का ऐलान कर दिया है। यह निर्णय मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन से मुलाकात के कुछ घंटे बाद सामने आया, जिससे सियासी हलचल और बढ़ गई है।
इस फैसले की घोषणा समिति के वरिष्ठ नेता और सलाहकार पनरुट्टी एस. रामचंद्रन ने गुरुवार को एक प्रेस वार्ता में की, जिसमें स्वयं ओपीएस भी उपस्थित थे। समिति ने स्पष्ट किया कि अब से वे एनडीए का हिस्सा नहीं रहेंगे। साथ ही यह भी बताया गया कि ओ. पन्नीरसेल्वम राज्यभर में दौरा करेंगे और राजनीतिक स्थिति का आकलन कर आगामी गठबंधनों पर निर्णय लेंगे।
गठबंधन टूटने के पीछे कारण:
सूत्रों के अनुसार, ओपीएस की नाराजगी की वजह हालिया घटनाक्रम है, जहां उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने के लिए पत्र लिखा था, लेकिन मुलाकात नहीं हो सकी। इसको लेकर उनकी निराशा बढ़ी और उन्होंने केंद्र सरकार पर ‘समग्र शिक्षा अभियान’ (SSA) के फंड वितरण में देरी को लेकर सोशल मीडिया पर आलोचना भी की थी। माना जा रहा है कि यह घटनाएं ही एनडीए से अलग होने का मुख्य कारण बनीं।
नए गठबंधन के संकेत:
ओपीएस ने अभिनेता विजय की पार्टी तमिलागा वेत्त्री कझगम (TVK) के साथ गठबंधन की संभावना को पूरी तरह नकारा नहीं है। उन्होंने कहा, “अभी चुनाव में समय है, वक्त आने पर स्थिति स्पष्ट होगी।” बता दें कि ओपीएस पहले एआईएडीएमके के शीर्ष नेता थे, लेकिन आंतरिक मतभेदों के चलते उन्होंने अपनी स्वतंत्र धारा बना ली थी।
राजनीतिक मायने:
एनडीए से अलग होने के फैसले ने तमिलनाडु की राजनीति में संभावित नए समीकरणों की नींव रख दी है। यह घटनाक्रम 2026 विधानसभा चुनावों से पहले राज्य की सियासी दिशा को नया मोड़ दे सकता है।
