6100 किलो का सैटेलाइट 16 मिनट में कक्षा में स्थापित
प्रधानमंत्री मोदी ने इसरो की सफलता पर जताया गर्व
श्रीहरिकोटा। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने इस वर्ष के अपने अंतिम मिशन के साथ अंतरिक्ष क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि दर्ज की है। इसरो ने अपने हैवी-लिफ्ट रॉकेट एलवीएम-3 के जरिए अब तक के सबसे भारी वाणिज्यिक संचार उपग्रह ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 को सफलतापूर्वक लॉन्च कर दिया है। यह मिशन पूरी तरह व्यावसायिक रहा, जिसने वैश्विक अंतरिक्ष बाजार में भारत की तकनीकी क्षमता और विश्वसनीयता को और मजबूत किया है।
यह प्रक्षेपण आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से सुबह 8:55 बजे किया गया। लगभग 16 मिनट की उड़ान के बाद 6,100 किलोग्राम वजनी यह उपग्रह पृथ्वी से करीब 520 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थित निचली कक्षा (लो अर्थ ऑर्बिट) में सफलतापूर्वक स्थापित किया गया। इस मिशन में इसरो के एलवीएम-3 रॉकेट का इस्तेमाल किया गया, जिसे इसकी भारी भार वहन क्षमता के कारण ‘बाहुबली’ भी कहा जाता है। यह एलवीएम-3 की छठी उड़ान और तीसरी वाणिज्यिक उड़ान रही।
इसरो के अनुसार यह लॉन्चिंग न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL) और अमेरिका की एएसटी स्पेसमोबाइल कंपनी के बीच हुए वाणिज्यिक समझौते का हिस्सा है। ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 अब तक भारत से लॉन्च किया गया सबसे भारी वाणिज्यिक संचार उपग्रह है, जो अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों के लिए इसरो की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।
इस ऐतिहासिक सफलता पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम युवाओं की ताकत से और अधिक आधुनिक व प्रभावी बन रहा है। एलवीएम-3 की भरोसेमंद क्षमता भविष्य के गगनयान जैसे मिशनों, वाणिज्यिक लॉन्च सेवाओं के विस्तार और वैश्विक साझेदारियों को नई मजबूती दे रही है।
विशेषज्ञों के मुताबिक यह मिशन इसलिए भी अहम है क्योंकि इससे भारत की पकड़ वैश्विक कमर्शियल स्पेस सेक्टर में और मजबूत होगी। एलवीएम-3 पहले ही चंद्रयान-2, चंद्रयान-3 और वनवेब जैसे अंतरराष्ट्रीय सैटेलाइट मिशनों को सफलतापूर्वक अंजाम दे चुका है। वनवेब मिशन के तहत इसरो ने दो चरणों में 72 उपग्रहों को कक्षा में स्थापित किया था।
ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 उपग्रह अगली पीढ़ी की संचार तकनीक का हिस्सा है। इसके सफल संचालन के बाद 4जी और 5जी स्मार्टफोन को सीधे सैटेलाइट के जरिए ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी मिल सकेगी, वह भी बिना किसी अतिरिक्त एंटीना या विशेष हार्डवेयर के। इससे पहाड़ी क्षेत्रों, समुद्रों, रेगिस्तानों और दूरदराज के इलाकों में मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध कराना आसान होगा।
इसके अलावा प्राकृतिक आपदाओं जैसे बाढ़, भूकंप, तूफान या भूस्खलन के दौरान जब जमीन पर मौजूद टेलीकॉम ढांचा प्रभावित हो जाता है, तब सैटेलाइट आधारित संचार सेवाएं अहम भूमिका निभा सकती हैं। इस मिशन के साथ इसरो ने न केवल तकनीकी क्षमता का प्रदर्शन किया है, बल्कि भविष्य की संचार क्रांति की दिशा में भी एक मजबूत कदम बढ़ाया है।
पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की उठी मांग
नई दिल्ली। बांग्लादेश में हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की हत्या की घटना को लेकर देशभर में आक्रोश देखा जा रहा है। इसी कड़ी में मंगलवार को विश्व हिंदू परिषद सहित कई हिंदू संगठनों ने नई दिल्ली स्थित बांग्लादेश उच्चायोग के बाहर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के मद्देनज़र मौके पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है, ताकि स्थिति को नियंत्रित रखा जा सके।
प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने और बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग उठाई। इस बीच प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हल्की झड़प की स्थिति भी बनी, जिसे पुलिस ने समय रहते संभाल लिया।
बताया जा रहा है कि यह मामला बांग्लादेश के मयमनसिंह जिले का है, जहां 27 वर्षीय हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की कथित तौर पर भीड़ द्वारा हत्या कर दी गई। आरोप है कि युवक पर ईशनिंदा का आरोप लगाकर पहले उसके साथ बेरहमी से मारपीट की गई और बाद में उसके शव को पेड़ से लटकाकर आग के हवाले कर दिया गया। इस घटना के सामने आने के बाद न केवल बांग्लादेश बल्कि भारत में भी तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।
हिंदू संगठनों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। प्रदर्शनकारियों ने भारत सरकार से इस मामले को कूटनीतिक स्तर पर उठाने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित कराने की मांग की है।
पीएम मोदी के असम दौरे पर सियासी घमासान, कांग्रेस ने उठाए सवाल
गुवाहाटी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया असम दौरे के बाद सियासी बयानबाज़ी तेज हो गई है। असम कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई ने प्रधानमंत्री के भाषणों पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि उनके संबोधनों में कांग्रेस पर हमलों के साथ-साथ इतिहास की घटनाओं को अपने दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया गया। गोगोई ने कहा कि यह तरीका न सिर्फ विवाद को जन्म देता है, बल्कि असम की भावनाओं को भी आहत करता है।
भाषणों की विषयवस्तु पर उठाए सवाल
कांग्रेस नेता का कहना है कि प्रधानमंत्री ने अपने भाषणों में आज़ादी से पहले असम को लेकर हुई घटनाओं का उल्लेख करते हुए कांग्रेस की भूमिका पर आरोप लगाए, जो ऐतिहासिक तथ्यों को एकतरफा ढंग से पेश करने जैसा है। गोगोई ने कहा कि इतिहास को राजनीतिक बहस का हथियार नहीं बनाया जाना चाहिए।
जुबीन गर्ग को लेकर जताई नाराज़गी
गोगोई ने असम के लोकप्रिय गायक जुबीन गर्ग का जिक्र करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने उनके निधन पर सार्वजनिक रूप से संवेदना व्यक्त नहीं की। उन्होंने कहा कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने न सिर्फ श्रद्धांजलि दी, बल्कि परिवार से मुलाकात कर न्याय की मांग भी उठाई। कांग्रेस के अनुसार, इससे असम के लोगों की भावनाओं की अनदेखी का संदेश गया।
संवेदना से अधिक आयोजनों पर जोर का आरोप
कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री का दौरा अधिकतर औपचारिक आयोजनों और बड़े मंचीय कार्यक्रमों तक सीमित रहा। उनका कहना है कि आम लोगों के दुख-दर्द और भावनाओं को पर्याप्त स्थान नहीं मिला, जिससे जनता में निराशा देखने को मिली।
मणिपुर का उदाहरण भी सामने रखा
गोगोई ने मणिपुर की स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां के लोगों ने भी पहले ऐसे ही अनुभव साझा किए थे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने हिंसा प्रभावित इलाकों का दौरा कर पीड़ितों से सीधे मुलाकात की, जबकि केंद्र सरकार की ओर से अपेक्षित संवेदनशीलता नहीं दिखी।
पूर्वोत्तर के सम्मान की बात
कांग्रेस नेता ने कहा कि पूर्वोत्तर भारत केवल राजनीतिक नारे का विषय नहीं, बल्कि उसकी अपनी संस्कृति, परंपराएं और संघर्ष हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि जो भी दल या नेता इन मूल्यों का सम्मान करेगा, उसे ही जनता का समर्थन मिलेगा। प्रधानमंत्री का असम दौरा बीते सप्ताहांत हुआ था, जिसके बाद से यह सियासी बहस जारी है।
पीएम मोदी बोले— ‘किसानों के हित में सरकार प्रतिबद्ध’
डिब्रूगढ़। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को असम दौरे के दौरान राज्य को एक अहम औद्योगिक परियोजना की सौगात दी। पीएम मोदी ने डिब्रूगढ़ जिले में प्रस्तावित उर्वरक संयंत्र की आधारशिला रखी, जिस पर लगभग 10,601 करोड़ रुपये की लागत आएगी। इस संयंत्र की वार्षिक उत्पादन क्षमता करीब 12 लाख मीट्रिक टन होगी, जिससे पूर्वोत्तर के साथ-साथ देश के किसानों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।
आधारशिला समारोह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यह परियोजना असम और पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र के औद्योगिक विकास की दिशा में बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि नामरूप और डिब्रूगढ़ क्षेत्र लंबे समय से इस तरह की परियोजना की प्रतीक्षा कर रहे थे, जो अब धरातल पर उतर रही है। इससे पहले प्रधानमंत्री ने गुवाहाटी में एयरपोर्ट के नए टर्मिनल का उद्घाटन भी किया।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह उर्वरक संयंत्र न केवल कृषि क्षेत्र को मजबूत करेगा, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगा। उन्होंने कहा कि संयंत्र के शुरू होने से उर्वरकों की उपलब्धता सुगम होगी और परिवहन लागत में कमी आएगी, जिससे किसानों को सस्ती खाद मिल सकेगी।
सभा के दौरान प्रधानमंत्री ने कहा कि केंद्र और राज्य में भाजपा सरकार के सहयोग से असम में बुनियादी ढांचे, उद्योग और कनेक्टिविटी के क्षेत्र में तेजी से काम हो रहा है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य में किसानों की भूमिका अहम है और इसी सोच के साथ सरकार कृषि क्षेत्र को प्राथमिकता दे रही है।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों के दौरान कई उर्वरक संयंत्र बंद हुए, जिससे किसानों को खाद के लिए कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार उन कमियों को दूर करने के प्रयास कर रही है और देश के विभिन्न हिस्सों में नए उर्वरक संयंत्र स्थापित किए जा रहे हैं।
किसानों के कल्याण से जुड़ी योजनाओं का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि पीएम किसान सम्मान निधि के तहत किसानों के खातों में बड़ी राशि सीधे हस्तांतरित की गई है। इसके अलावा कृषि को बढ़ावा देने के लिए नई योजनाएं भी शुरू की गई हैं, जिससे किसानों की आय और आत्मनिर्भरता बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने असम की पहचान और हितों की सुरक्षा की बात दोहराते हुए कहा कि सरकार राज्य के सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि विकास, सुरक्षा और जनकल्याण को साथ लेकर आगे बढ़ना ही सरकार की प्राथमिकता है।
केंद्र सरकार की नीतियां अल्पसंख्यकों में असुरक्षा की भावना पैदा कर रही- एमके स्टालिन
तिरुनेलवेली। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला है। तिरुनेलवेली में एक क्रिसमस कार्यक्रम के अवसर पर मुख्यमंत्री ने भाजपा पर संविधान की मूल भावना के खिलाफ काम करने का आरोप लगाया और कहा कि पार्टी देश की विविधता और धर्मनिरपेक्ष मूल्यों को कमजोर करना चाहती है।
मुख्यमंत्री स्टालिन ने कहा कि भारत की पहचान उसकी बहुलता और सांस्कृतिक विविधता से है, लेकिन कुछ ताकतें इसे खत्म करने की दिशा में काम कर रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा को संविधान में निहित ‘धर्मनिरपेक्ष’ शब्द से आपत्ति है और वह इसे हटाने की मंशा रखती है। स्टालिन ने कहा कि तमिलनाडु की जनता ऐसी राजनीति को स्वीकार नहीं करेगी।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने 19वीं सदी की ईसाई मिशनरी साराह टकर के योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने दक्षिणी तमिलनाडु में महिलाओं की शिक्षा के क्षेत्र में ऐतिहासिक भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि साराह टकर कॉलेज जैसे संस्थानों ने हजारों महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का अवसर दिया और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का काम किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि डीएमके सरकार सभी समुदायों के साथ समान व्यवहार में विश्वास रखती है और अल्पसंख्यकों के कल्याण को प्राथमिकता देती है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार द्वारा अल्पसंख्यक समुदायों के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। ईसाई समुदाय के लिए किए गए विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए उन्होंने चर्चों के निर्माण और उनके पुनर्निर्माण जैसे प्रयासों की जानकारी भी दी।
स्टालिन ने कहा कि डीएमके सरकार का विकास मॉडल समानता और सामाजिक न्याय के सिद्धांतों पर आधारित है, जिसमें हर व्यक्ति की बुनियादी जरूरतों का ध्यान रखा जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की नीतियां अल्पसंख्यकों में असुरक्षा की भावना पैदा कर रही हैं।
मुख्यमंत्री ने चेतावनी देते हुए कहा कि कुछ राजनीतिक दल देश को एकरूपता की ओर ले जाना चाहते हैं, जहां एक भाषा, एक धर्म और एक विचारधारा को थोपने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु में इस तरह के प्रयासों को कभी सफल नहीं होने दिया जाएगा और डीएमके संविधान, धर्मनिरपेक्षता और सामाजिक सद्भाव की रक्षा के लिए पूरी मजबूती से खड़ी रहेगी।
निवेशकों को राहत की उम्मीद, पीएसीएल मामले में अब तक 5,602 करोड़ की संपत्तियां जब्त
नई दिल्ली। पीएसीएल (पर्ल्स एग्रोटेक कॉरपोरेशन लिमिटेड) से जुड़े बहुचर्चित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। एजेंसी ने पंजाब के लुधियाना में हजारों करोड़ रुपये की अचल संपत्तियों को जब्त कर निवेश घोटाले पर शिकंजा और कस दिया है। यह कदम उन लाखों निवेशकों के लिए अहम माना जा रहा है, जो वर्षों से अपनी फंसी हुई रकम वापस मिलने की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
लुधियाना में 3,436 करोड़ से ज्यादा की संपत्तियां जब्त
ईडी के दिल्ली जोनल कार्यालय ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत लुधियाना जिले में पीएसीएल के नाम दर्ज 169 अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया है। जांच में सामने आया है कि इन संपत्तियों की खरीद निवेशकों से जुटाई गई रकम से की गई थी। जब्त की गई संपत्तियों का कुल बाजार मूल्य 3,436.56 करोड़ रुपये आंका गया है।
सीबीआई की एफआईआर के आधार पर आगे बढ़ी जांच
यह कार्रवाई केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर की गई है। सीबीआई ने पीएसीएल और पीजीएफ लिमिटेड के संस्थापक दिवंगत निर्मल सिंह भंगू सहित अन्य आरोपियों के खिलाफ आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी की धाराओं में मामला दर्ज किया था। आरोप है कि कंपनी ने सुनियोजित तरीके से निवेशकों को गुमराह कर उनकी धनराशि का दुरुपयोग किया।
निवेश योजनाओं की आड़ में हजारों करोड़ की ठगी
ईडी की जांच में सामने आया है कि पीएसीएल ने सामूहिक निवेश योजनाओं के नाम पर देशभर से करीब 48 हजार करोड़ रुपये जुटाए। सुरक्षित निवेश और अधिक मुनाफे का लालच देकर लाखों लोगों को योजनाओं से जोड़ा गया, लेकिन बाद में यह राशि निजी संपत्तियां खरीदने और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों में खर्च कर दी गई।
अब तक 5,602 करोड़ की संपत्तियां कुर्क
इस मामले में ईडी अब तक भारत और विदेशों में कुल 5,602 करोड़ रुपये से अधिक की चल-अचल संपत्तियों को जब्त कर चुकी है। एजेंसी ने साफ किया है कि जांच अभी जारी है और आने वाले समय में और भी संपत्तियों की पहचान कर कार्रवाई की जा सकती है। ईडी का मुख्य उद्देश्य निवेशकों की अधिकतम राशि की वसूली कर उन्हें वापस दिलाना है।
खरगे का आरोप- जांच एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है सरकार
नई दिल्ली। नेशनल हेराल्ड मामले में कांग्रेस को बड़ी कानूनी राहत मिली है। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने धनशोधन के आरोपों से जुड़ी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की याचिका पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया है। अदालत के इस फैसले के बाद कांग्रेस ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध की राजनीति करार दिया है, वहीं पार्टी नेताओं ने कहा कि कानून ने अपना काम किया है और आरोपों में कोई ठोस आधार नहीं पाया गया।
कांग्रेस ने बताया राजनीतिक उत्पीड़न का मामला
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अभिषेक सिंघवी ने अदालत के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि नेशनल हेराल्ड मामला शुरू से ही राजनीतिक बदले और उत्पीड़न की कहानी रहा है। उन्होंने कहा कि अदालत का रुख यह स्पष्ट करता है कि शोर-शराबे के बजाय कानून तथ्यों के आधार पर निर्णय करता है।
खरगे का आरोप—जांच एजेंसियों का हो रहा दुरुपयोग
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि केंद्र सरकार ईडी और सीबीआई जैसी एजेंसियों का इस्तेमाल कर विपक्षी नेताओं को बदनाम करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि गांधी परिवार को निशाना बनाने के लिए इस तरह के मामले खड़े किए गए हैं, जबकि इनमें कोई ठोस एफआईआर तक दर्ज नहीं है। खरगे ने दावा किया कि कई कांग्रेस नेताओं पर इसी तरह दबाव बनाने की कोशिश की गई है।
सोनिया और राहुल गांधी को मिली बड़ी राहत
अदालत के फैसले से कांग्रेस नेता सोनिया गांधी और राहुल गांधी को राहत मिली है। कोर्ट ने ईडी द्वारा दाखिल आरोपपत्र पर संज्ञान लेने से इनकार करते हुए कहा कि फिलहाल आरोप तय करने का आधार नहीं बनता। ईडी ने दोनों नेताओं पर एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) से जुड़ी करीब 2000 करोड़ रुपये की संपत्तियों के कथित दुरुपयोग का आरोप लगाया था।
हालांकि, अदालत ने ईडी को जांच जारी रखने की अनुमति दी है और स्पष्ट किया है कि एजेंसी आगे तथ्यों और साक्ष्यों को एकत्र कर सकती है। कोर्ट ने यह भी कहा कि ईडी का मामला किसी प्राथमिकी पर नहीं, बल्कि एक निजी शिकायत और मजिस्ट्रेट के समन आदेश पर आधारित है।
नेशनल हेराल्ड मामला क्या है?
एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) की स्थापना 1937 में पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा की गई थी। इसका उद्देश्य स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान अलग-अलग भाषाओं में समाचार पत्रों का प्रकाशन करना था। एजेएल के अंतर्गत अंग्रेजी में नेशनल हेराल्ड, हिंदी में नवजीवन और उर्दू में कौमी आवाज प्रकाशित होते थे। यह कंपनी किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि हजारों स्वतंत्रता सेनानियों की हिस्सेदारी वाली संस्था थी। समय के साथ अखबार आर्थिक संकट में आ गए और 2008 में प्रकाशन बंद करना पड़ा। इसके बाद कंपनी की संपत्तियों और कर्ज को लेकर विवाद खड़ा हुआ।
2012 में दर्ज हुआ था मामला
वर्ष 2012 में भाजपा नेता और वरिष्ठ अधिवक्ता सुब्रमण्यम स्वामी ने सोनिया गांधी, राहुल गांधी समेत कई कांग्रेस नेताओं के खिलाफ मामला दर्ज कराया। स्वामी ने आरोप लगाया कि यंग इंडिया लिमिटेड के माध्यम से एजेएल की बहुमूल्य संपत्तियों को गलत तरीके से हासिल किया गया।
स्वामी का दावा था कि एजेएल पर कांग्रेस पार्टी का करीब 90 करोड़ रुपये का कर्ज था, जिसे नाममात्र की राशि में अपने अधिकार में लिया गया। वहीं कांग्रेस का कहना है कि पूरा मामला राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित है और इसमें कोई आपराधिक तत्व नहीं है।
अदालत के ताजा फैसले के बाद यह मामला एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है, जबकि कानूनी प्रक्रिया अपने स्तर पर आगे बढ़ती रहेगी।
एनसीआर में भी हालात गंभीर, नोएडा सबसे ज्यादा प्रदूषित
नई दिल्ली। मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों और हवा की बेहद धीमी गति के चलते राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली एक बार फिर गंभीर वायु प्रदूषण की चपेट में आ गई है। रविवार को लगातार दूसरे दिन दिल्ली की वायु गुणवत्ता गंभीर स्तर पर बनी रही, जिससे यह मौजूदा सीजन का अब तक का सबसे प्रदूषित दिन रिकॉर्ड किया गया। देशभर के प्रदूषित शहरों की सूची में भी दिल्ली शीर्ष तीन में शामिल रही।
सुबह के समय घना कोहरा और स्मॉग की परत छाई रही, जिसने पूरे दिन शहर को अपनी गिरफ्त में रखा। कई इलाकों में दृश्यता इतनी कम हो गई कि सड़कों पर वाहनों की रफ्तार थम सी गई। हवाई यातायात पर भी असर पड़ा। सफदरजंग एयरपोर्ट पर सुबह दृश्यता घटकर 200 मीटर और पालम एयरपोर्ट पर 350 मीटर दर्ज की गई, जिससे उड़ानों के संचालन में दिक्कतें आईं।
सांस लेना हुआ मुश्किल
प्रदूषण के बढ़ते स्तर के बीच लोग मजबूरी में एन95 मास्क पहनकर घरों से निकलते नजर आए। आंखों में जलन, गले में खराश और सांस फूलने की शिकायतें आम रहीं। खासकर दमा और सांस से जुड़ी बीमारियों से पीड़ित लोगों की परेशानी काफी बढ़ गई। रविवार को दिल्ली का औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स 461 दर्ज किया गया, जो गंभीर श्रेणी में आता है और एक दिन पहले की तुलना में अधिक खराब रहा।
एनसीआर में भी बिगड़े हालात
दिल्ली के साथ-साथ राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के अन्य शहरों में भी प्रदूषण का स्तर चिंताजनक बना रहा। नोएडा सबसे ज्यादा प्रदूषित रहा, जहां AQI 466 रिकॉर्ड किया गया। गाजियाबाद में यह 459, ग्रेटर नोएडा में 435 और गुरुग्राम में 291 रहा। फरीदाबाद में AQI 218 दर्ज किया गया, जो खराब श्रेणी में जरूर है, लेकिन अन्य एनसीआर शहरों से अपेक्षाकृत बेहतर रहा।
मौसम बना प्रदूषण की बड़ी वजह
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार, रविवार को हवा पश्चिम दिशा से मात्र 5 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चली। वातावरण की मिश्रण गहराई कम रहने के कारण प्रदूषक ऊपर नहीं जा सके और निचले स्तर पर ही जमा होते गए। दोपहर तक पीएम10 और पीएम2.5 का स्तर सामान्य से कई गुना अधिक दर्ज किया गया।
अगले कुछ दिन और मुश्किल
प्रदूषण विशेषज्ञों का अनुमान है कि सोमवार और मंगलवार को भी वायु गुणवत्ता बेहद खराब बनी रह सकती है। ऐसे में लोगों को सांस लेने में तकलीफ, खांसी, आंखों में जलन, सिरदर्द और त्वचा से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, अगले तीन से चार दिनों तक हवा की रफ्तार में खास सुधार की संभावना नहीं है।
क्यों नहीं मिल रही राहत
स्काईमेट के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से हवा की गति कमजोर बनी हुई है। ठंड के मौसम में वाहनों का धुआं, निर्माण गतिविधियों की धूल और अन्य प्रदूषक जमीन के पास ही फंसे रहते हैं। हवा के तेज बहाव के अभाव में ये कण वातावरण में जमा होते जाते हैं, जिससे दिल्ली की हवा और अधिक जहरीली होती जा रही है।
राजधानीवासियों के लिए फिलहाल साफ हवा का इंतजार लंबा होता नजर आ रहा है।
कोरोना काल में शुरू हुआ हाई-टेक साइबर रैकेट, विदेश से हो रहा था संचालन
नई दिल्ली। साइबर फ्रॉड मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय साइबर ठगी नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए 17 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है, जिनमें चार चीनी नागरिक भी शामिल हैं। इसके साथ ही 58 कंपनियों को भी इस मामले में आरोपी बनाया गया है। आरोप है कि इस नेटवर्क ने शेल कंपनियों के जरिए एक हजार करोड़ रुपये से अधिक की ऑनलाइन ठगी को अंजाम दिया।
अंतरराष्ट्रीय साइबर रैकेट का खुलासा
CBI की जांच में सामने आया है कि यह संगठित गिरोह निवेश, लोन, नौकरी और ऑनलाइन गेमिंग के नाम पर लोगों को ठगता था। ठगों द्वारा फर्जी निवेश स्कीम, पोंजी मॉडल, मल्टी-लेवल मार्केटिंग, नकली पार्ट-टाइम जॉब ऑफर और डिजिटल गेमिंग प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर लोगों को जाल में फंसाया जाता था। इस नेटवर्क का खुलासा अक्टूबर में हुआ था, जिसके बाद जांच का दायरा लगातार बढ़ता गया।
शेल कंपनियों के जरिए पैसों की हेराफेरी
जांच एजेंसी के अनुसार, गिरोह ने 111 से अधिक शेल कंपनियां बनाईं, जिनके जरिए ठगी की रकम को अलग-अलग बैंक खातों में घुमाया गया। म्यूल खातों के माध्यम से करीब 1,000 करोड़ रुपये का लेनदेन किया गया। इनमें से एक ही खाते में कुछ ही समय में 152 करोड़ रुपये जमा होने की पुष्टि हुई है। इन कंपनियों को फर्जी निदेशकों, नकली पते और झूठे कारोबारी दस्तावेजों के आधार पर पंजीकृत कराया गया था।
डिजिटल भुगतान माध्यमों का दुरुपयोग
CBI ने बताया कि इन शेल कंपनियों का उपयोग बैंक अकाउंट और डिजिटल पेमेंट गेटवे जैसे UPI, फोन-पे और अन्य फिनटेक प्लेटफॉर्म पर अकाउंट खोलने के लिए किया गया। इसके बाद ठगी की रकम को तेजी से अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर उसके असली स्रोत को छिपाने की कोशिश की गई।
कोरोना काल में शुरू हुआ नेटवर्क
जांच में सामने आया कि इस साइबर ठगी नेटवर्क की शुरुआत वर्ष 2020 में कोरोना महामारी के दौरान हुई थी। इसे चार चीनी नागरिक—जोउ यी, हुआन लिउ, वेइजियान लिउ और गुआनहुआ—द्वारा संचालित किया जा रहा था। इनके भारतीय सहयोगियों ने अवैध रूप से लोगों के पहचान दस्तावेज हासिल कर शेल कंपनियों और म्यूल खातों का नेटवर्क खड़ा किया, ताकि ठगी से कमाए गए धन को सफेद किया जा सके।
विदेश से हो रहा था संचालन
CBI ने यह भी खुलासा किया है कि नेटवर्क का नियंत्रण अब भी विदेशी नागरिकों के हाथ में था। दो भारतीय आरोपियों से जुड़े बैंक खातों की UPI आईडी अगस्त 2025 तक विदेश से सक्रिय पाई गईं, जिससे यह साफ हुआ कि ठगी का संचालन रियल टाइम में विदेशी लोकेशन से किया जा रहा था।
हाई-टेक तरीके से दिया जाता था वारदात को अंजाम
इस रैकेट में आधुनिक तकनीक का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया गया। गूगल विज्ञापन, बल्क SMS, सिम-बॉक्स, क्लाउड सर्वर, फिनटेक प्लेटफॉर्म और सैकड़ों म्यूल खातों के जरिए पूरी ठगी की श्रृंखला को इस तरह डिजाइन किया गया था कि असली लोगों की पहचान छिपी रहे और जांच एजेंसियों तक सुराग न पहुंचे।
I4C की सूचना से शुरू हुई जांच
इस मामले की जांच भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) से मिली जानकारी के आधार पर शुरू हुई थी। शुरुआत में अलग-अलग शिकायतें सामने आईं, लेकिन विस्तृत विश्लेषण में फंड ट्रांसफर पैटर्न, डिजिटल फुटप्रिंट और पेमेंट गेटवे में समानता पाई गई, जिससे एक संगठित साजिश का खुलासा हुआ।
अक्टूबर में तीन आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद CBI ने कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश, झारखंड और हरियाणा में 27 स्थानों पर छापेमारी कर डिजिटल उपकरण और वित्तीय दस्तावेज जब्त किए, जिनकी फोरेंसिक जांच की गई।
देशभर से 5.17 लाख वक्फ संपत्तियों का पंजीकरण पूरा, 2.16 लाख को मंजूरी
नई दिल्ली। देशभर की वक्फ संपत्तियों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर एकीकृत करने के लिए बनाए गए UMEED पोर्टल पर पंजीकरण प्रक्रिया अब पूरी हो चुकी है। छह महीने के भीतर चालू किए गए इस पोर्टल पर कुल 5.17 लाख वक्फ संपत्तियां दर्ज हुई हैं, जिनमें से 2.16 लाख संपत्तियों को औपचारिक मंजूरी भी मिल चुकी है। यह जानकारी केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने नवीनतम आंकड़ों के साथ साझा की है।
केंद्र सरकार ने 6 जून 2025 को अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू द्वारा यूनिफाइड वक्फ मैनेजमेंट, एम्पावरमेंट, एफिशिएंसी और डेवलपमेंट (UMEED) पोर्टल लॉन्च किया था, जिसके तहत वक्फ संपत्तियों के डिजिटलीकरण और पारदर्शी प्रबंधन को बढ़ावा दिया जाना था। मंत्रालय के अनुसार, निर्धारित छह महीने की समयसीमा 6 दिसंबर 2025 को रात 11:59 बजे पूरी हो गई। इस अवधि में 10,869 संपत्तियां सत्यापन प्रक्रिया में खारिज कर दी गईं।
समयसीमा समाप्त होने से पहले अंतिम सप्ताह में संपत्तियों के पंजीकरण की गति तेज हो गई थी। प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए केंद्र ने कई समीक्षा बैठकें, ऑनलाइन-ऑफलाइन प्रशिक्षण सत्र और विशेष वर्कशॉप आयोजित कीं। दिल्ली में वक्फ बोर्ड और विभिन्न राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के अधिकारियों को दो दिवसीय प्रशिक्षण भी दिया गया, ताकि पोर्टल पर संपत्ति अपलोड करने की तकनीकी प्रक्रिया स्पष्ट की जा सके। साथ ही हेल्पलाइन नंबर और सपोर्ट टीम लगातार सक्रिय रही।
मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, सबसे अधिक वक्फ संपत्तियां उत्तर प्रदेश से दर्ज की गईं, जिनकी संख्या 92,830 है। इनमें 86,345 सुन्नी समुदाय और 6,485 शिया समुदाय ने पंजीकृत कराई हैं। इसके बाद महाराष्ट्र में 62,939, कर्नाटक में 58,328 और पश्चिम बंगाल में 23,086 संपत्तियों का पंजीकरण हुआ।
वहीं, पंजीकरण अवधि बढ़ाने की मांग पर मंत्री किरेन रिजिजू ने स्पष्ट किया कि समयसीमा में कोई विस्तार नहीं किया जाएगा। हालांकि, जिन आवेदकों ने प्रक्रिया शुरू कर दी थी लेकिन दस्तावेज़ अपलोड पूरे नहीं कर सके, उन्हें तीन महीने का अतिरिक्त समय दिया गया है। सरकार का कहना है कि समयसीमा बढ़ाने से पोर्टल की पारदर्शिता और उद्देश्य पर प्रभाव पड़ सकता था।
UMEED पोर्टल का लक्ष्य देशभर की वक्फ संपत्तियों को डिजिटल रिकॉर्ड में लाकर प्रबंधन, निगरानी और विकास कार्यों को अधिक प्रभावी बनाना है। सरकार का दावा है कि यह पहल वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा और उपयोगिता को एक नई संरचना प्रदान करेगी।
