पाकिस्तान से भेजे गए 24 बमों से एक गाजीपुर में मिला विस्फोटक..
देश-विदेश : दिल्ली पुलिस की जांच में पता चला है कि शुक्रवार को गाजीपुर फूल बाजार से बरामद किए गए IED 24 बमों की खेप का हिस्सा था, जिसे सीमा पार से या तो जमीन के जरिए या समुद्री मार्ग से पाकिस्तानी डीप स्टेट द्वारा स्थानीय आतंकवादियों को भेजा गया था। हाल ही में जम्मू-कश्मीर और पंजाब से बरामद की गईं डिवाइसेज को भी उसी खेप का हिस्सा माना जा रहा है। यह भी माना जा रहा है कि कुछ उपकरणों की तस्करी गुजरात और उत्तर प्रदेश में की गई हो सकती है।
दिल्ली पुलिस के टॉप जांचकर्ताओं के मुताबिक, गाजीपुर डिवाइस एक टिफिन बम था जिसमें तीन किलोग्राम आरडीएक्स कोर चार्ज के रूप में और अमोनियम नाइट्रेट सेकेंडरी चार्ज के तौर पर था। डिवाइस को स्टील के टिफिन में कीलों और बॉल बेयरिंग के साथ पैक किया गया था और इसे दूर से ही उड़ाया जा सकता था।
भारत में मौजूद स्लीपर मॉड्यूल के लिए सीमा पार से तस्करी..
एचटी को पता चला है कि इन आईईडी को भारत में मौजूदा स्लीपर मॉड्यूल के साथ-साथ कुछ आपराधिक गिरोहों के लिए सीमा पार से तस्करी कर लाया गया था। सितंबर 2021 में दिल्ली पुलिस ने मुंबई, लखनऊ, इलाहाबाद और दिल्ली में गिरफ्तारियों के साथ आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया, जिसे इस IED रिकवरी से जोड़ा गया है।
IED खेप पिछले स्वतंत्रता दिवस के आसपास भारत आई..
जांचकर्ताओं का मानना है कि आईईडी की खेप पिछले स्वतंत्रता दिवस के आसपास भारत आई थी। जबकि दिल्ली पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां खेप से अन्य आईईडी बरामद करने की कोशिश कर रही हैं। एचटी को पता चला है कि इनमें से कई आईईडी को समुद्री मार्ग से गुजरात और जमीनी रास्ते से यूपी भेजा गया है।
राष्ट्रव्यापी अलर्ट जारी किया गया..
एक सीनियर सुरक्षा अधिकारी ने बताया, “ऐसा मालूम होता है कि भारत में कट्टरपंथी तत्वों को सीमा पार से पूर्व-निर्धारित लक्ष्यों पर डिवाइस लगाने या काम करने के लिए स्थानीय आपराधिक तत्वों का इस्तेमाल करने का काम सौंपा जा रहा है। इसे देखते हुए एक राष्ट्रव्यापी अलर्ट जारी किया गया है ताकि आतंकी हमला टल जाए।”
कल हैं मकर संक्रान्ति पर्व, जानिए मकर संक्रान्ति के दिन क्यों बांटे जाते हैं गुड़-तिल..
देश -विदेश : सूर्यदेव के मकर राशि में प्रवेश को मकर संक्रान्ति कहा जाता है। इस शुभ दिन को देश के अनेक हिस्सों में एक नई शुरुआत के रूप में देखा जाता है। स्कन्द पुराण के अनुसार,मकर संक्रान्ति के दिन यज्ञ में दिए गए द्रव्य को ग्रहण करने के लिए देवता पृथ्वी पर आते हैं। इसीलिए इसे देवताओं का समय, दिव्यता का समय माना जाता है।
त्योहारों के बारे में हमेशा कुछ ऐसा होता है, जो खूबसूरत ही होता है। वास्तव में, भारतीय त्योहारों में कहीं न कहीं गहरा संदेश और अनुष्ठानों में अनोखापन होता है। हर पर्व-त्योहार और अनुष्ठान उन दिव्य गुणों की पहचान है, जो हमारे अंदर भी निहित होते हैं।
दिवाली जैसे हमारे अंदर प्रचुर मात्रा में उपलब्ध प्रकाश से हमारा पुनर्मिलन करवाती है, उसी तरह मकर संक्रान्ति हमारी दिव्य विरासत से हमें रूबरू करवाती है, जो हमारे चारों ओर बिखरी है और इसे सभी के साथ साझा करने के मानवीय दायित्व का भी आभास करवाती है।
मकर संक्रान्ति प्रारंभ होती है, हमारी पहली फसल के लेने और उसे सब में बांटने से। कठिन मेहनत और उसके बाद उसके फल को प्राप्त कर उसे आपस में बांटने के लिए उत्सव मनाया जाता है। गांवों में, पहली गन्ने की फसल, पहली चावल की खेप दिव्यता को समर्पित करते हैं और आपस में भी बांटते हैं। तभी किसान अपनी पूरी फसल अपने लिए प्रयोग में लाता है।
संक्रान्ति का मूल भाव ही बांटने की संस्कृति का होता है और यह सिर्फ फसल तक ही सीमित नहीं होता है। त्योहार हमें यह भी याद दिलाते हैं कि इस दिव्य विरासत को हम उन लोगों में भी बांटें, जो अपेक्षाकृत कम भाग्यशाली हैं, जो त्योहार नहीं मना पा रहे हों।
संक्रान्ति के साथ एक और परम्परा जुड़ी हुई है कि इस दिन गुड़-तिल बांटे जाते हैं। इसके पीछे भी बहुत बड़ा संदेश है। तिल जहां हमारे अस्तित्व की सहजता को दर्शाता है, वहीं गुड़ दुनिया की सारी मिठास को। इस प्रतीकात्मक तथ्य के पीछे उद्देश्य ही यह है कि सबके पास यह आशीर्वाद हो कि वे सहज, सामान्य, अहंकार रहित हों और हमेशा मीठा ही बोलें।तिल की तरह हैं। हमारा इस ब्रह्मांड में होने का महत्व क्या है? जीवन क्या है? हमारा जीवन छोटे से तिल के समान है, एक कण! देखा जाए तो कुछ नहीं।
तिल बाहर से काला होता है और अंदर से सफेद। यह दर्शाता है कि हमें अपना अंदर उजला यानि शुद्ध रखना है। यदि आप तिल को थोड़ा-सा रगड़ें, तो वह बाहर भी सफेद हो जाता है, अर्थ यही है कि हम जब हमारे बाहरी आवरण उतार देते हैं, तो पाते हैं कि हम अंदर से उतने ही पवित्र हैं।
हमें यह याद रखना चाहिए कि हम सहज, सामान्य और मीठे हैं, ठीक उसी तरह जैसे तिल और गुड़ हैं। जब भी कोई खुद को बहुत बड़ा मानने लगता है, तो उसका पतन प्रारम्भ हो जाता है। यह एक प्रयोगवादी सत्य है। हम अपने आसपास कई लोगों को देखते हैं। जैसे ही हमारे अंदर अकड़ आती है कि मैं कुछ हूं, वैसे ही पतन की शुरुआत हो जाती है। मैं शक्तिशाली हूं और हमारी शक्तियां भी क्षीण होने लगती हैं। इसको जानना ही हमें पतन से रोक देता है और यह सिर्फ अध्यात्म की ही देन है।
वर्ष भर में 12 संक्रान्तियां होती हैं, जिसमें से मकर संक्रान्ति को सबसे महत्त्वपूर्ण माना गया है। जब सूर्य मकर राशि में आते हैं और जाड़े के मौसम की विदाई की प्रक्रिया आरम्भ हो जाती है। जाड़े की तीव्रता के बाद सूर्य की रश्मियां सुखकारी होती हैं। यह वह समय है, जब हम बीज बोते हैं और उस बीजारोपण के साथनई फसल की भूमिका रखते हैं।
मकर संक्रान्ति का महत्त्व होता है कि सूर्यदेव उत्तरायण हो जाते हैं, वह उत्तर की ओर होने लगते हैं। इसे उत्तरायण पुण्य काल कहा जाता है, जो देवताओं का समय है, दिव्यता का समय है। यह सही है कि पूरा साल ही वैसे तो दिव्य है, लेकिन इस समय को थोड़ा और अधिक दिव्य माना जाता है। इसके बाद ही सारे त्योहार प्रारम्भ होते हैं।
साल में दो दिन होते हैं, जब कोई भी अपनी आध्यात्मिक यात्रा की प्रगति का मूल्यांकन कर सकता है। एक है मकर संक्रान्ति और दूसरा गुरु पूर्णिमा। यह दोनों आपस में भी लगभग आधे-आधे साल के अंतर में ही आते हैं। इस मौके को तुरंत भुनाइये और अपने नवीन संकल्प इस दिन से प्रारंभ करिए।
जब आप इस अध्यात्म के रास्ते पर आ जाते हैं, तब आपके लिए कोई वर्ष, कोई दिन या कोई पल ऐसा नहीं होता है कि वह दिव्य न हो। मकर संक्रान्ति पर उस दिव्यता से सम्पर्क को महसूस करें और दृढ़ता के साथ आगे बढे।
इस एक्टर ने साइना नेहवाल पर किया बेहूदा कमेंट..
देश-विदेश: एक्टर सिद्धार्थ साइना नेहवाल पर बेहूदा कमेंट कर विवादों में घिर गए हैं। जिसके बाद से सोशल मीडिया पर उनकी चौतरफा आलोचना की जा रही है। इतना ही नहीं लोगों ने उन्हें फ्लॉप एक्टर तक कह दिया है। लोगों का कहना हैं कि सिद्धार्थ शायद भूल गए कि साइना नेहवाल 2012 ओलिंपिक में कांस्य पदक विजेता, 2015 वर्ल्ड चैम्पियनशिप में रजत और 2017 में कांस्य पदक विजेता रह चुकी हैं। ये सभी मैडल उन्होंने देश के लिए कमाए हैं।
आपको बता दे कि साइना नेहवाल ने प्रधानमंत्री की सुरक्षा में हुई चूक पर ट्वीट करते हुए लिखा था- कोई भी राष्ट्र अपने आप को सुरक्षित होने का दावा नहीं कर सकता यदि उसके अपने प्रधानमंत्री की सुरक्षा से समझौता किया जाता है। मैं सबसे कड़े शब्दों में, अराजकतावादियों द्वारा पीएम मोदी पर कायरतापूर्ण हमले की निंदा करती हूं। इस पर बॉलीवुड और साउथ फिल्मों के एक्टर एक्टर सिद्धार्थ ने बेहूदा कमेंट किया।
जिसके बाद से एक्टर सिद्धार्थ अपने इस आपत्तिजनक कमेंट के बाद जमकर ट्रोल हो रहे हैं। एक यूजर ने लिखा- किसी के लिए ऐसी भाषा विशेष रूप से उसके लिए जिसने देश को गौरवान्वित किया है। क्या यह सब पैसे कमाने के लिए हैं? अभिनेता के तौर पर तुम्हारा पतन तो पहले ही हो चुका है, अब इंसानियत भी खो दी है क्या? एक ने लिखा- एक महिला के सम्मान को ठेस पहुंचाने के आरोप में इसे गिरफ्तार किया जाना चाहिए।
आपको बता दें कि सिद्धार्थ ने साउथ की फिल्मों के साथ ही बॉलीवुड की फिल्मों में भी काम किया है। सिद्धार्थ हिट फिल्म ‘रंग दे बसंती’ में नजर आए थे। उनकी फिल्म ‘चश्मे बद्दूर’ को भी लोगों ने काफी पसंद किया था। सिद्धार्थ हमेशा से सोशल मीडिया पर कई मुद्दों पर राय रखते हैं।
देश में तेजी से बढ़ रही है कोरोना के नए मामलों की संख्या..
देश-विदेश: कोरोना वायरस के नए और अधिक संक्रामक वैरिएंट ओमिक्रॉन के सामने आने के साथ देश में संक्रमण के मामलों में एक बार फिर खतरनाक तेजी देखी जा रही है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार पिछले 24 घंटों में कोरोना के 90,928 नए मामले दर्ज किए गए। इसके अलावा देश में ओमिक्रॉन वैरिएंट से संक्रमण के मामलों की संख्या भी 2620 हो गई है। इनमें से 995 मरीज ठीक हो चुके हैं।
महामारी की दूसरी लहर की तरह ही इस बार भी इस वायरस से महाराष्ट्र और दिल्ली सबसे ज्यादा प्रभावित होते दिख रहे हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार महाराष्ट्र में ओमिक्रॉन से संक्रमण के 797 मामले सामने आए हैं वहीं दिल्ली में इनकी संख्या 465 है। राजस्थान में 236, केरल में 234, कर्नाटक में 226, गुजरात में 204 और तमिलनाडु में ओमिक्रॉन संक्रमण के 121 मामलों की पुष्टि हुई है।
महाराष्ट्र में पिछले 24 घंटों में कोरोना संक्रमण के 26,538 नए मामले दर्ज किए गए। इसके अलावा महाराष्ट्र एसोसिएशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स का कहना हैं कि प्रदेश में अब तक कुल 260 रेजिडेंट डॉक्टर कोरोना संक्रमित हो चुके हैं। स्थितियों को देखते हुए राज्य सरकार मे कुछ प्रतिबंध लागू किए हैं लेकिन सरकार पूर्ण लॉकडाउन लगाने के पक्ष में नहीं है। मुंबई में भी संक्रमण की रफ्तार तेजी से बढ़ रही है।
कोविड-19 को लेकर स्वास्थ्य मंत्रालय की तैयारियां..
केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण देश में कोरोना की मौजूदा स्थिति पर चुनाव आयोग के अधिकारियों को जानकारी देने के लिए चुनाव आयोग के कार्यालय पहुंचे। इसके अलावा, केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला देश में कोरोना के बढ़ते मामलों पर आज शाम समीक्षा बैठक करेंगे। उधर, केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री भारती प्रवीण पवार भी कोरोना वायरस से संक्रमित हो गई हैं। उन्होंने खुद ट्वीट करके इसकी जानकारी दी है।
बुल्ली बाई एप की मास्टरमाइंड के लिए जावेद अख्तर ने कहा कुछ ऐसा..
देश-विदेश: बुल्ली बाई एप विवाद के सिलसिले में मुंबई पुलिस द्वारा एक 18 वर्षीय युवती को गिरफ्तार कर लिया गया है। गिरफ्तारी के कुछ समय बाद ही दिग्गत गीतकार जावेद अख्तर ने सोशल मीडिया के जरिए अपनी राय व्यक्त की है। उन्होंने लोगों से युवती को माफ करने का आग्रह किया है।
जावेद अख्तर ने किया यह ट्वीट..
जावेद अख्तर ने बुधवार को अपने ट्विटर हैंडल पर नेटिज़न्स से दया दिखाने और लड़की को माफ़ करने के लिए कहा। उन्होंने ट्वीट कर लिखा, “अगर “बुली बाई” वास्तव में एक 18 वर्षीय लड़की द्वारा सोचा और बनाया गया था, जिसने हाल ही में अपने माता-पिता को कैंसर और कोरोना से खो दिया है, तो मुझे लगता है कि महिलाएं को उससे मिलना चाहिए और बड़ों की तरह उसे समझाना चाहिए हैं कि जो भी उसने किया गलत किया। उसे दया दिखाओ और उसे माफ कर दो।
प्रधानमंत्री ने साधी चुप्पी..
उस समय उसकी इंजीनियरिंग करने की योजना थी। उसका परिवार लगभग 13,000 रुपये प्रति माह कमाता है, और उसकी दो बहनें हैं। वात्सल्य योजना के हिस्से के रूप में, जो कि COVID-19 अनाथों के लिए उत्तराखंड सरकार की एक योजना है, उन्हें 3,000 रुपये मिलते हैं। उसके पिता एक निर्माण कंपनी में काम करते थे जो परिवार को हर महीने 10,000 रुपये का भुगतान करती थी। इससे पहले जावेद अख्तर ने अपने परदादा फजल-ए-हक खैराबादी के सम्मान पर सवाल उठाने वाले सोशल मीडिया यूजर्स की खिंचाई की थी। अख्तर ने सोमवार को चल रहे ‘बुली बाई’ विवाद के खिलाफ अपनी बात रखी। अख्तर ने अपने ट्वीट में कहा कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित सभी की चुप्पी से हैरान हैं। उन्होंने लिखा सौ महिलाओं की ऑनलाइन नीलामी होती है, तथाकथित धर्म संसद हैं, जो सेना को पुलिस और लोगों को लगभग 200 एमएलएन भारतीयों के नरसंहार के लिए जाने की सलाह देते हैं।
नेटिज़न्स ने किया ट्रोल
वही अख्तरका कहना हैं कि मैं खासकर प्रधानमंत्री की चुप्पी से हर किसी की चुप्पी से हैरान हूं। हालांकि, कई नेटिज़न्स अख्तर के ट्वीट से खुश नहीं थे। नेटिज़न्स ने बातचीत के दौरान उन्हें ट्रोल किया और यहां तक कि उनके पूर्वजों के ऊपर निशाना साधा। एक प्रतिक्रिया के रूप में, अख्तर ने मंगलवार को ट्वीट किया, “जिस क्षण मैंने महिलाओं की ऑनलाइन नीलामी के खिलाफ आवाज उठाई, जो गोडसे का महिमामंडन कर रहे थे और सेना पुलिस को नरसंहार का उपदेश दे रहे थे, कुछ बड़े लोग मेरे महान दादा, एक स्वतंत्रता सेनानी को गाली देने लगे थे, जिनकी मृत्यु हो गई। अब आप ऐसे बेवकूफों को क्या कहते हैं।
भारत बॉयोटेक की नैसल वैक्सीन बूस्टर डोज के रूप में दी जाएगी..
देश-विदेश: कोरोना महामारी की तीसरी लहर व ओमिक्रॉन के बढ़ते असर के बीच इनसे निपटने के इंतजाम भी तेज हो रहे हैं। ड्रग कंट्रोलर जनरल आफ इंडिया (DCGI) की विशेषज्ञ समिति (SEC) ने भारत बॉयोटेक की इंट्रा नैसल (नाक के जरिए दी जाने वाली) वैक्सीन के तीसरे चरण के परीक्षण को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है।
भारत बॉयोटेक अब अपनी इस नई कोरोना रोधी वैक्सीन का तीसरे चरण का अध्ययन व बूस्टर खुराक का परीक्षण करेगी। इससे संबंधित नतीजे पेश करने के बाद वैक्सीन को मंजूरी दी जाएगी। तीसरे चरण के परीक्षण के बाद इस नैसल वैक्सीन को कोरोना के बूस्टर डोज के तौर पर आपात इस्तेमाल की इजाजत मिल सकती है।
आज हैं सावित्रीबाई फुले की जयंती..
देश-विदेश: आज देश की पहली महिला शिक्षिका सावित्रीबाई फुले की जयंती मनाई जा रही हैं। महाराष्ट्र के पुणे में एक दलित परिवार में जन्मीं सावित्रीबाई के पिता का नाम खण्डोजी नेवसे और माता का नाम लक्ष्मीबाई था। उनका जन्म 03 जनवरी 1831 को महाराष्ट्र के सतारा जिले में स्थित नायगांव नामक छोटे से गांव में हुआ था। वह भारत के पहले बालिका विद्यालय की पहली प्रिंसिपल और पहले किसान स्कूल की संस्थापिका थीं।
आपको बता दे कि 1840 में मात्र 9 साल की उम्र में सावित्रीबाई का विवाह 13 साल के ज्योतिराव फुले के साथ हुआ। उस समय वो पूरी तरह अनपढ़ थीं और पति मात्र तीसरी कक्षा तक ही पढ़े थे। पढ़ाई करने का जो सपना सावित्रीबाई ने देखा था विवाह के बाद भी उन्होंने उस पर रोक नहीं लगने दी। इनका संघर्ष कितना कठिन था, इसे इनके जीवन के एक किस्से से समझा जा सकता है।
एक दिन वो कमरे में अंग्रेजी की किताब के पन्ने पलट रही थीं, इस पर इनके पिता खण्डोजी की नजर पड़ी। यह देखते वो भड़क उठे और हाथों से किताब को छीनकर घर के बाहर फेंक दिया। उनका कहना था कि शिक्षा पर केवल उच्च जाति के पुरुषों का ही हक है। दलित और महिलाओं के लिए शिक्षा ग्रहण करना पाप है। यही वो पल था जब सावित्रीबाई ने प्रण लिया कि वो एक न एक दिन जरूर पढ़ना सीखेंगी। उनकी मेहनत रंग लाई। उन्होंने सिर्फ पढ़ना ही नहीं सीखा बल्कि न जाने कितनी लड़कियों को शिक्षित करके उनका भविष्य संवारा, लेकिन यह सफर भी उनके लिए आसान नहीं रहा।
1848 में की देश का सबसे पहले बालिका स्कूल की स्थापना..
बता दे कि वर्ष 1848 में महाराष्ट्र के पुणे में देश का सबसे पहले बालिका स्कूल की स्थापना सावित्रीबाई फुले ने की थी। सावित्रीबाई फुले इस स्कूल में केवल पढ़ाती ही नहीं थी बल्कि लड़कियां स्कूलों को ना छोड़े इसके लिए वह मदद भी प्रदान करती थी। सावित्रीबाई फुले को प्रथम शिक्षिका होने का श्रेय भी जाता है।
10 मार्च1897 को इस दुनिया को कहा अलविदा.
महाराष्ट्र में प्लेग फैल जाने के उपरांत उन्होंने पुणे में अपने पुत्र के साथ मिलकर 1897 में एक अस्पताल खोला जिससे प्लेग पीड़ितों का इलाज किया जा सके। हालांकि मरीजों की सेवा करते हुए वह स्वयं प्लेग से पीड़ित हो गई और 10 मार्च1897 को इस दुनिया को सदा के लिए अलविदा कह दिया।
एनसीबी से हटाए गए समीर वानखेड़े, डीआरआई विभाग में फिर से मिली जिम्मेदारी..
देश-विदेश: एनसीबी अधिकारी समीर वानखेड़े को एक बहुत बड़ा झटका लगा है। आपको बता दे कि विभाग में बने रहने के लिए उन्हें आगे एक्सटेंशन नहीं मिला है यानी कि अब एनसीबी से उनकी विदाई हो गई है। बता दे कि वानखेड़े का एनसीबी में 4 महीने का एक्सटेंशन 31 दिसंबर 2021 को पूरा हो चुका है।
समीर वानखेड़े आईआरएस अधिकारी हैं जो मुंबई के ड्रग्स केसों की जांच के चलते चर्चा में आए थे। इससे भी अधिक सुर्खियों में वे तब आए थे जब उन्होंने बॉलीवुड सुपरस्टार शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान को गिरफ्तार किया था। इससे पहले कयास लगाया जा रहा था कि केंद्र सरकार उन्हें फिर से एक्सटेंशन दे सकती है लेकिन ऐसा नहीं हो सका।
एक बार फिर से उन्हें राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) विभाग में भेज दिया गया है। आपको बता दें कि समीर वानखेड़े इसी विभाग में थे। डीआरआई विभाग से ही उन्हें मुंबई एनसीबी में लाकर जोनल डायरेक्टर बनाया गया था। अब उन्हें फिर से डीआरआई में भेज दिया गया है।
कौन हैं समीर वानखेड़े..
समीर वानखेड़े 2008 बैच के राजस्व सेवा अधिकारी हैं और महाराष्ट्र के रहने वाले हैं। सेवा ज्वाइन करने के बाद उन्हें सबसे पहली मुंबई के छत्रपति शिवाजी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर डिप्टी कस्टम कमिश्नर की जिम्मेदारी दी गई। यहां उन्होंने जबरदस्त काम किया जिसकी वजह से उन्हें बाद में आंध्र प्रदेश और फिर दिल्ली भी भेजा गया। बताया जाता है कि वे ड्रग्स से जुड़े मामलों को पकड़ने में माहिर हैं।
दिल्ली के बाद एक बार फिर उन्हें मुंबई में बड़ी जिम्मेदारी देकर भेजी गई। यहां उन्हें एनसीबी का जोनल डायरेक्टर बनाया गया। कार्यभार संभालते ही उन्होंने सुशांत सिंह राजपूत की मौत मामले में ड्रग्स केस की जांच शुरू की थी। इस दौरान अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती और उनके भाई से कड़ी पूछताछ की गई थी। समीर वानखेड़े के नेतृत्व में ही पिछले दो सालों के भीतर करीब 17 हजार करोड़ रुपये के नशे और ड्रग्स रैकेट का पर्दाफाश किया गया।
नाइट कर्फ्यू के बाद दिन के खतरे पर कब तक होगा फैसला?
देश-विदेश: देश में कोरोना महामारी फिर से पैर पसार रही है, ओमिक्रोन के बढ़ते मामलों ने राज्यों को नाइट कर्फ़्यू लगाने पर मजबूर कर दिया है, जिसके मद्देनज़र तमाम पाबंदिया भी लगा दी गई हैं, लेकिन सवाल यह है कि रैलियों में इकट्ठा होती भीड़ में क्या कोरोना नहीं पनप सकता? कोरोना के नए वैरियंट की रफ्तार ने प्रशासन की नींद उड़ा दी है, जिसको देखते हुए लगभग सभी राज्य सरकारों ने अपने अपने राज्यों में रात 11 बजे से सुबह 5 बजे तक कर्फ़्यू लगाने का फ़ैसला लिया है।
भारत में ओमिक्रॉन वेरिएंट के मामले तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। देश में ओमिक्रॉन के केस मिलने का रिकॉर्ड टूट गया है। दिल्ली से लेकर देहरादून तक, हरियाणा से लेकर कर्नाटक तक, सिर्फ एक जैसी बात। एक जैसा सवाल। दिल्ली में कोरोना के मामलों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई और पिछले 24 घंटों में 496 संक्रमित मिले। दिल्ली में साढ़े 6 महीने बाद सबसे ज्यादा नए केस
और 1 दिन में कोरोना के नए केस में 50% बढ़ोतरी हो गई। वही मुंबई में कोरोना के नए मामलों में बड़ा उछाल दर्ज आया है।
ये सारे सवाल इसलिए हैं क्योंकि दिन के वक्त अभी ज्यादा पाबंदी नहीं है। रैली में नेताओं के भाषण सुनने लोग आते हैं तो क्या कोरोना वहां नहीं है। बाजार में सुबह शाम पैर रखने की जगह नहीं। क्या तब कोरोना संक्रमण का खतरा नहीं। जबकि सबसे ज्यादा भीड़ तो नेताओं की रैलियों में देखने को मिल रही हैं। क्या तब कोरोना का खतरा नहीं हैं। बावजूद इसके भी अभी तक दिन के खतरे पर कोई बड़ा फैसला नहीं हुआ।
कोरोना के केस बढ़ते हैं तो सरकार के पास सबसे पहला और सरल ऑप्शन नाइट कर्फ्यू का होता है। इसलिए रात की पाबंदी शुरू हो जाती है। मध्य प्रदेश, हरियाणा, गुजरात, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान, कर्नाटक, ओडिशा, तमिलनाडु, जम्मू-कश्मीर ये वो राज्य हैं जहां फिलहाल नाइट कर्फ्यू लगा है। आने वाले वक्त में ये लिस्ट और लंबी हो सकती हैं।
आपको बता दे कि नाइट कर्फ्यू में रात 8 बजे, 10 बजे या 11 बजे से सुबह 5 या 6 बजे तक लोगों के बाहर जाने पर पाबंदी होती है। जिसका कारण ये है कि बेवजह भीड़ इकट्टी ना हो। सरकारों को लगता है कि इससे कोरोना केसेस की संख्या में कमी आ सकती है।लेकिन जब इससे हालात काबू नहीं हो पाते तो फिर लॉकडाउन लगाना पड़ता हैं। हालांकि इस बार भी यही पैटर्न फॉलो हो रहा है, लेकिन दिन में भीड़ दिखाई दे रही है।
रैली में लोग जुट रहे हैं तो इस पर भी कुछ लोग अपनी अलग-अलग राय दे रहे हैं। कुछ का मानना है कि सरकार सिचुएशन के हिसाब से फैसला कर रही है। कहने को तो केंद्र सरकार और राज्य सरकारें कोरोना को लेकर गंभीर दिख रही हैं, लेकिन चुनावीं रैलियों में दिख रहा लोगों का हुजूम सभी नियमों पर सरकारी गंभीरता की धज्जियां उड़ा रहा है, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली हों या फिर अन्य नेताओ की रैली सभी रैलियों में जनता बिना मास्क लगाए दिख ही जाती हैं,
अमेरिका विशेषज्ञों की चेतावनी- फिर दिख सकते हैं पुराने वाले हालात, सावधान रहें लोग..
देश-विदेश: कई देशों में ओमिक्रॉन का प्रसार तेजी से हो रहा है। ब्रिटेन और अमेरिका जैसे देशों में ओमिक्रॉन ने कहर बरपाना शुरू कर दिया है। जिससे लोगों में दहशत का माहौल है। इस बीच अमेरिकी विशेषज्ञों ने चेतावनी देते हुए कहा है कि डेल्टा वैरिएंट ने भी अमेरिका में तबाही मचाई थी और ओमिक्रॉन भी इसी रास्ते में है, यह वैरिएंट भी कई बड़े देशों के लिए खतरा बनता जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना हैं कि ओमिक्रॉन वैरिएंट इसलिए भी चिंताजनक है क्योंकि इससे संक्रमण फैलने की रफ्तार अन्य वैरिएंट से कई गुना ज्यादा है। यही एकमात्र कारण है जो इसे ज्यादा खतरनाक बनाता है।
लोग अभी पुराने हालात से संभल नहीं पाए हैं: विशेषज्ञ..
ओमिक्रॉन से लड़ने के लिए बूस्टर शॉट्स की वकालत करते हुए, एक कार्डियोलॉजिस्ट और स्क्रिप्स रिसर्च ट्रांसलेशनल इंस्टीट्यूट के संस्थापक, डॉ एरिक टोपोल का कहना हैं कि अमेरिकी नागरिक अभी भी पुराने हालात से संभल नहीं पाए हैं, और अगर इसी बीच ओमिक्रॉन तेजी से फैलने लगा तो ये बहुत बड़ी तबाही मचा सकता है। जिससे कई लोगों की जिंदगी खत्म हो जाएगी।
डॉ एरिक टोपोल का कहना हैं कि पूरी तरह से टीकाकरण का मतलब दो के बजाय तीन शॉट होना चाहिए। लोगों को बूस्टर डोज की बहुत जरूरत है। इसको जल्द से जल्द अमल में लाना चाहिए। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के शीर्ष चिकित्सा सलाहकार डॉ एंथनी फाउसी का कहना है कि ओमिक्रॉन की गंभीरता पर बहुत अधिक डरने की जरूरत नहीं है लेकिन सावधान रहने की जरूरत है। उन्होंने दक्षिण अफ्रीका का हवाला देते हुए कहा कि फिलहाल यहां अस्पताल में भर्ती होने का अनुपात डेल्टा की तुलना में कम है। यह व्यापक पिछले संक्रमणों से अंतर्निहित प्रतिरक्षा के कारण हो सकता है।
