धर्मध्वज फहरते ही राम नगरी में गूंजे ‘जय श्रीराम’ के नारे
अयोध्या। अयोध्या राम मंदिर में एतिहासिक क्षण सामने आया, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बटन दबाते ही धर्मध्वज धीरे-धीरे मंदिर के मुख्य शिखर पर आरोहित हो गया। जैसे-जैसे केसरिया ध्वज ऊपर उठता गया, पूरा वातावरण ‘जय श्री राम’ के नारों से गूंज उठा। इस दौरान प्रधानमंत्री भावुक नजर आए और मंदिर परिसर में मौजूद साधु-संत भी अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख सके। समारोह में देश-विदेश से आए लगभग आठ हजार श्रद्धालु उपस्थित रहे।
शुभ मुहूर्त में धर्मध्वज फहराया, वैदिक मंत्रोच्चार से गूंजा परिसर
निर्धारित शुभ मुहूर्त में मंदिर शिखर पर ध्वजारोहण से पहले वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विस्तृत पूजा-अर्चना और यज्ञ सम्पन्न हुआ। यज्ञकुंडों से उठती आहुतियों की सुगंध और नगाड़ों की गूंज ने पूरे समारोह को भव्यता प्रदान की। ध्वज के लहराते ही श्रद्धालुओं में उत्साह की लहर दौड़ गई और परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा। प्रधानमंत्री ने इस ऐतिहासिक ध्वजारोहण को सनातन परंपरा की अखंडता और सांस्कृतिक स्वाभिमान का संदेश बताया।
पीएम मोदी बोले—“सदियों पुराने घाव भरने शुरू हुए, रामलला का सपना साकार”
ध्वजारोहण के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने विशाल जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि आज करोड़ों देशवासियों का सपना पूरा हुआ है। उन्होंने कहा कि “हम ऐसा समाज बनाएं, जहां कोई गरीब न हो, कोई पीड़ित न हो।” प्रधानमंत्री ने राम मंदिर निर्माण से जुड़े हर कारीगर, दानवीर, योजनाकार और श्रमिक का अभिनंदन किया।
उन्होंने कहा कि अयोध्या की धरती वह पवित्र स्थान है, जहां से प्रभु श्रीराम ने अपने जीवन का आदर्श पथ शुरू किया था।
प्रधानमंत्री ने बताया कि मंदिर परिसर में सप्त मंदिर, निषादराज का मंदिर, जटायु जी और गिलहरी की मूर्तियाँ भी स्थापित हैं, जो छोटे-से-छोटे प्रयास की महत्ता का संदेश देती हैं।
मोहन भागवत का भावुक संबोधन—“जिन्होंने प्राण दिए, उनकी आत्मा आज तृप्त होगी”
समारोह में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि यह दिन उन सभी बलिदानियों को समर्पित है, जिन्होंने राम मंदिर आंदोलन में अपना जीवन न्योछावर किया। उन्होंने कहा कि आज राम राज्य का वह ध्वज फिर अयोध्या में फहरा रहा है, जो कभी रघुकुल की सत्ता और मर्यादा का प्रतीक था। भागवत ने बताया कि ध्वज पर अंकित कोविदार वृक्ष रघुकुल की सत्ता और त्याग का चिह्न है—जो स्वयं धूप में खड़े रहकर दूसरों को छाया देता है।
उन्होंने कहा कि मंदिर बिल्कुल उसी स्वप्न जैसा बना है, बल्कि उससे भी अधिक भव्य स्वरूप में स्थापित हुआ है।
सीएम योगी बोले—“न बदली आस्था, न रुकी यात्रा; रामलला आए और मंदिर भी वहीं बना”
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि मंदिर शिखर पर फहराता केसरिया ध्वज नए भारत, नई ऊर्जा और नई आस्था का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि 500 वर्षों में समय बदला, सत्ता बदली, नेतृत्व बदला, लेकिन देश की आस्था कभी नहीं डिगी।
सीएम ने कहा—
“जब आंदोलन की कमान आरएसएस के हाथ में आई, तो एक ही संकल्प गूंजा था— रामलला हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे। आज वह संकल्प भव्य स्वरूप में साकार हो चुका है।”
रामलला के दर्शन के बाद पीएम करेंगे ध्वजारोहण, सात हजार अतिथि बनेंगे साक्षी
अयोध्या। अयोध्या एक बार फिर ऐतिहासिक आध्यात्मिक उत्सव का केंद्र बनने जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज राम मंदिर के शिखर पर स्वर्णमय भगवा ध्वज फहराकर मंदिर निर्माण की पूर्णता का औपचारिक संदेश देंगे। निर्धारित शुभ मुहूर्त 11:58 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक रहेगा, जो भगवान श्रीराम के जन्म नक्षत्र अभिजीत के विशेष योग से मेल खाता है। पूरे शहर में आध्यात्मिक माहौल, सुरक्षा व्यवस्था और सांस्कृतिक रंगों का अनोखा संगम देखने को मिल रहा है।
ध्वजारोहण समारोह के लिए 21 नवंबर से चल रहे हैं वैदिक अनुष्ठान। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रामलला के गर्भगृह और राम दरबार में दर्शन–पूजन कर अपने आधिकारिक कार्यक्रम की शुरुआत करेंगे। इसके बाद वह सप्तऋषि मंदिर और माता अन्नपूर्णा मंदिर में प्रार्थना कर मुख्य ध्वजारोहण समारोह में शामिल होंगे।
चार से पांच मिनट तक चलने वाले ध्वजारोहण अनुष्ठान में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच प्रधानमंत्री इलेक्ट्रॉनिक तंत्र से ध्वज फहराएंगे। समारोह में लगभग सात हजार आमंत्रित उपस्थित रहेंगे, जिनमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, विभिन्न धर्माचार्य, सामाजिक वर्गों के प्रतिनिधि, किन्नर समुदाय, दलित समाज और व्यापार जगत के प्रमुख लोग शामिल होंगे।
इस अवसर पर श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने भव्य मंगल–स्वस्ति गान की विशेष प्रस्तुति तैयार की है। देशभर के विख्यात कलाकार श्रीरामचरितमानस के चयनित प्रसंगों और विविध संत–परंपराओं के मंगलमय काव्यों का सामूहिक गायन करेंगे, जिससे पूरा परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर होगा।
राम मंदिर में प्रवेश और ध्वजारोहण कार्यक्रम
राम मंदिर के निर्माण प्रभारी गोपाल राव के अनुसार, प्रधानमंत्री और संघ प्रमुख सुबह 10 बजे मंदिर परिसर पहुंचेंगे। यहां वह क्रमशः सप्तऋषि मंदिर, शेषावतार मंदिर, अन्नपूर्णा मंदिर, रामलला और राम दरबार के दर्शन करेंगे। दर्शन और परिसर भ्रमण के बाद वह ध्वजारोहण समारोह में शामिल होंगे, जो शुभ मुहूर्त—11:58 बजे से 1 बजे—के बीच सम्पन्न होगा। समारोह के बाद प्रधानमंत्री का सार्वजनिक संबोधन भी प्रस्तावित है। दोपहर 1:30 बजे वह पुनः एयरपोर्ट के लिए रवाना होंगे।
स्वर्णमय ध्वज दंड बना आकर्षण
ध्वजारोहण के लिए तैयार किए गए 161 फीट ऊंचे ध्वज दंड पर लगभग 21 किलो सोना मढ़ा गया है, जिसे मुंबई से आए कारीगरों ने तैयार किया है। यह वही स्थल है, जहाँ 5 अगस्त 2020 को भूमि पूजन हुआ था। नाभि दंड की कुल ऊंचाई भूमि तल से 211 फीट है, जिसमें ऊपर का हिस्सा स्वर्ण पत्र से सजाया गया है। मंदिर के पश्चिमी हिस्से से इस ध्वज दंड का स्वर्णमय स्वरूप स्पष्ट दिख रहा है।
चिकित्सा प्रबंधन पूरी तरह तैयार
प्रधानमंत्री और आरएसएस प्रमुख के काफिलों के साथ तीन–तीन एंबुलेंस और विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम तैनात की गई है। श्रीराम अस्पताल में 40 बेड का विशेष वार्ड, जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज में 60 बेड आरक्षित किए गए हैं। मेडिकल कॉलेज में बनाए गए सेफ हाउस में विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम चौबीसों घंटे उपलब्ध है।
लंबे समय से बीमार चल रहे थे धर्मेंद्र
मुंबई। बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता और करोड़ों दिलों की धड़कन धर्मेंद्र अब इस दुनिया में नहीं रहे। सोमवार, 24 नवंबर को 89 वर्ष की आयु में मुंबई के जुहू स्थित आवास पर उन्होंने अंतिम सांस ली। लंबे समय से स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से जूझ रहे धर्मेंद्र को कुछ सप्ताह पहले सांस लेने में दिक्कत के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों की सलाह पर उन्हें 12 नवंबर को ब्रीच कैंडी अस्पताल से घर लाया गया, जहां परिवार की देखरेख में उनका उपचार जारी रहा। आज उनके निधन की खबर ने परिवार समेत उनके सभी फैन्स को बड़ा सदमा दे दिया है।
धर्मेंद्र का जाना हिंदी सिनेमा के एक स्वर्णिम अध्याय के अंत जैसा है। संयोग यह भी रहा कि जिस दिन उनका निधन हुआ, उसी दिन उनकी आगामी फिल्म ‘इक्कीस’ का मोशन पोस्टर जारी किया गया। करीब एक महीने से वह गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से लड़ रहे थे, लेकिन उम्र और बीमारी के आगे उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति भी टिक न सकी।
पांच दशक से अधिक लंबे फिल्मी करियर में धर्मेंद्र ने 300 से ज्यादा फिल्मों में काम किया और हर चरित्र में अपनी सादगी, ऊर्जा और सच्चाई को जिया। ‘शोले’ के वीरू से लेकर ‘चुपके चुपके’ के प्रोफेसर परिमल तक—उन्होंने हर भूमिका को दिल से निभाया और दर्शकों की यादों में हमेशा के लिए दर्ज हो गए।
मिट्टी की खुशबू से जुड़े, सरल स्वभाव वाले धर्मेंद्र सिर्फ पर्दे के हीरो नहीं थे, बल्कि असल जिंदगी में भी उतने ही भावुक और इंसानियत से भरे हुए व्यक्ति थे। पद्म भूषण से सम्मानित यह महान कलाकार जल्द ही अपनी अंतिम फिल्म ‘इक्कीस’ में नजर आएंगे, जो 25 दिसंबर को रिलीज होने वाली है।
धर्मेंद्र की विदाई ने भारतीय सिनेमा को अपूरणीय क्षति पहुंचाई है—एक ऐसा सितारा बुझ गया है जिसकी चमक हमेशा दिलों में मौजूद रहेगी।
9 फरवरी 2027 तक रहेगी जस्टिस सूर्यकांत की कार्यकाल अवधि
नई दिल्ली। हरियाणा के हिसार जिले के पेटवाड़ गांव में साधारण पारिवारिक पृष्ठभूमि से उठकर अपने सपनों को मुकाम तक पहुंचाने वाले जस्टिस सूर्यकांत ने भारत के 53वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली। राष्ट्रपति भवन में आयोजित इस औपचारिक समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें पद की शपथ दिलाई। शपथ ग्रहण कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल सहित कई वरिष्ठ गणमान्य मौजूद रहे। नए CJI की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा 30 अक्टूबर 2025 को अनुमोदित की गई थी, जिसके बाद आज वे आधिकारिक रूप से पदभार ग्रहण कर चुके हैं। उनका कार्यकाल 9 फरवरी 2027 तक रहेगा।
संविधान के अनुच्छेद 124(2) के तहत, सेवानिवृत्ति से पूर्व CJI बी.आर. गवई ने सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठतम न्यायाधीश के रूप में जस्टिस सूर्यकांत के नाम की अनुशंसा की थी। लंबे समय से चली आ रही परंपरा के अनुसार, वरिष्ठता के आधार पर उन्हें अगला मुख्य न्यायाधीश चुना गया। पूर्व CJI बी.आर. गवई 65 वर्ष की आयु पूर्ण करने के कारण पद से सेवानिवृत्त हुए। विदाई से पूर्व उन्होंने औपचारिक रूप से नए CJI को उत्तराधिकारी घोषित किया, जिससे न्यायपालिका में नेतृत्व का सुचारु हस्तांतरण सुनिश्चित हुआ।
साधारण परिवार से शुरू हुआ सफर
10 फरवरी 1962 को हिसार के पेटवाड़ गांव में जन्मे सूर्यकांत के पिता मदनगोपाल शास्त्री संस्कृत शिक्षक थे और माता शशि देवी गृहिणी। पांच भाई-बहनों में सबसे छोटे सूर्यकांत ने सीमित परिस्थितियों में शिक्षा पाई। पिता चाहते थे कि वे एलएलएम करें, लेकिन उन्होंने एलएलबी के बाद ही पेशेवर जीवन शुरू करने का फैसला लिया। उनके भाई-बहनों में से अधिकांश शिक्षण और चिकित्सा सेवा से जुड़े रहे।
कानूनी करियर की शुरुआत और विकास
सूर्यकांत ने 1984 में महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक से कानून की डिग्री ली। 1984 में हिसार जिला अदालत से वकालत की शुरुआत करने के बाद वे 1985 में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में प्रैक्टिस करने चंडीगढ़ चले गए। न्यायाधीश रहते हुए उन्होंने 2011 में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से कानून में स्नातकोत्तर भी पूरा किया।
सिर्फ 38 वर्ष की उम्र में, 7 जुलाई 2000 को वे हरियाणा के सबसे युवा महाधिवक्ता बने। 2004 में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के जज बने और 14 वर्ष तक वहां सेवाएं देने के बाद 2018 में हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश नियुक्त हुए। 2019 में वे सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश बने।
महत्वपूर्ण फैसलों में निभाई अहम भूमिका
अपने न्यायिक कार्यकाल में जस्टिस सूर्यकांत कई बड़े मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं, जिनमें शामिल हैं—
बिहार में 65 लाख मतदाताओं के नाम हटाए जाने पर चुनाव आयोग से ब्योरा सार्वजनिक कराने का निर्देश।
अनुच्छेद 370 हटाने के केंद्र के फैसले को सही ठहराने वाली संविधान पीठ का हिस्सा।
वन रैंक वन पेंशन (OROP) को संवैधानिक वैधता प्रदान करने और सशस्त्र बलों में महिलाओं के लिए समान अवसर का समर्थन।
असम से जुड़े नागरिकता विवाद पर धारा 6A की वैधता को मंजूरी देने वाली पीठ में सहभागिता।
दिल्ली आबकारी नीति मामले में अरविंद केजरीवाल को जमानत देने वाली पीठ के सदस्य, हालांकि गिरफ्तारी को उचित माना।
परिवार और निजी जीवन
1980 में उनकी शादी सविता शर्मा से हुई, जो शिक्षिका रहीं और बाद में कॉलेज की प्रिंसिपल बनीं। उनकी दोनों बेटियां कानून में मास्टर्स कर रही हैं और पिता के मार्ग पर आगे बढ़ रही हैं।
कविता, पर्यावरण और पत्रकारिता से लगाव
न्यायमूर्ति सूर्यकांत अपनी कानूनी पहचान के साथ ही संवेदनशील कवि भी हैं। कॉलेज के दिनों में उनकी कविता ‘मेंढ पर मिट्टी चढ़ा दो’ काफी चर्चित रही। वे पर्यावरण संरक्षण के लिए सक्रिय रहते हैं—गांव के एक पुराने तालाब के पुनर्जीवन के लिए उन्होंने निजी धन से योगदान दिया और आसपास पौधरोपण भी कराया।
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त्रकारिता में विशेष रुचि रखते हुए वे मामलों की गहराई तक जांच करने को महत्व देते हैं और इसी जुनून के चलते उन्होंने 1988 में ‘Administrative Geography of India’ पुस्तक भी लिखी।
विवादों में भी आया नाम
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में कार्यरत रहते हुए उन पर कुछ गंभीर आरोप लगे—2012 में एक रियल एस्टेट एजेंट ने आर्थिक लेन-देन का आरोप लगाया और 2017 में एक कैदी ने जमानत के लिए रिश्वत लेने की शिकायत की। हालांकि, इनमें से कोई भी आरोप सिद्ध नहीं हो सका।
नई दिल्ली- जमीयत उलेमा ए हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी के हालिया बयान ने राष्ट्रीय राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। बयान सामने आते ही विभिन्न राजनीतिक दलों ने अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएँ देनी शुरू कर दीं। कांग्रेस की ओर से नेता Udit Raj ने मदनी के रुख का समर्थन किया, जबकि भाजपा Janata Party ने इसे आड़े हाथों लेते हुए तीखी आपत्ति जताई।
कांग्रेस नेता उदित राज ने आरोप लगाया कि देश में सिर्फ मुसलमान ही नहीं, बल्कि दलित और अन्य पिछड़ा वर्ग भी नियुक्तियों में उपेक्षा का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ‘सबका साथ, सबका विकास’ की बात तो करती है, लेकिन व्यवहार में सिर्फ चुनिंदा समुदायों को प्राथमिकता दी जा रही है। उदित राज के अनुसार, केंद्र सरकार के अंतर्गत आने वाली 48 विश्वविद्यालयों में एक भी मुस्लिम, दलित या ओबीसी समुदाय का वाइस-चांसलर नहीं है और देश के 159 प्रतिष्ठित संस्थानों में भी इन वर्गों का प्रतिनिधित्व नदारद है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विभिन्न संस्थानों में वही लोग नियुक्त किए जा रहे हैं जो संघ और भाजपा की विचारधारा से मेल खाते हैं। अल फलाह यूनिवर्सिटी के संदर्भ में उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति पर आतंकवादी गतिविधियों का संदेह है, तो उस पर कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन पूरे विश्वविद्यालय को कठघरे में खड़ा करना उचित नहीं है। वहीं हाल ही में हुई ‘लैटरल एंट्री’ आईएएस नियुक्तियों को लेकर भी उदित राज ने कहा कि इनमें एक भी उम्मीदवार दलित, आदिवासी या पिछड़े वर्ग से नहीं था, जिससे स्पष्ट है कि सरकार इन समुदायों को मुख्यधारा से दूर रख रही है।
बाबरी मस्जिद की नींव रखने के दावे पर भाजपा ने लगाया तुष्टिकरण का आरोप
कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति एक बार फिर गर्मा गई है। टीएमसी के एक विधायक द्वारा मुर्शिदाबाद के बेलडांगा में 6 दिसंबर को बाबरी मस्जिद की नींव रखने का दावा सामने आने के बाद प्रदेश में सियासी टकराव तेज हो गया है। विधायक की घोषणा के बाद भाजपा ने तीखी आपत्ति जताते हुए इसे तुष्टिकरण की राजनीति करार दिया है।
टीएमसी के भरतपुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक हुमायूं कबीर ने कहा है कि 6 दिसंबर को बाबरी मस्जिद के पुनर्निर्माण की आधारशिला रखी जाएगी, जिसमें बड़ी संख्या में लोग और कई प्रमुख शख्सियतें शामिल होंगी। उन्होंने दावा किया कि मस्जिद का निर्माण लगभग तीन वर्षों में पूरा होगा। कबीर के इस बयान ने बंगाल की राजनीतिक सरगर्मी बढ़ा दी है।
भाजपा ने तत्काल इस ऐलान पर कड़ा विरोध जताया। भाजपा सांसद ज्योतिर्मय सिंह महतो ने कहा कि बाबर एक विदेशी हमलावर था और उसके नाम पर किसी भी प्रकार का निर्माण स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने यहां तक कहा कि यदि मस्जिद निर्माण की कोशिश हुई तो भाजपा उस स्थान पर राम मंदिर की स्थापना की मांग करेगी।
भाजपा नेताओं ने टीएमसी पर वोट बैंक की राजनीति करने का आरोप लगाया। पार्टी प्रवक्ता अग्निमित्रा पॉल का कहना है कि किसी भी धार्मिक स्थल के निर्माण पर उन्हें आपत्ति नहीं, लेकिन टीएमसी इसे राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है। वहीं भाजपा नेता राहुल सिन्हा ने कहा कि मस्जिद या मंदिर का निर्माण उचित स्थान पर होना चाहिए और इसका राजनीतिकरण कर समुदाय विशेष को गुमराह नहीं किया जाना चाहिए।
कांग्रेस ने भी इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी। कांग्रेस नेता अजय कुमार लल्लू ने कहा कि उनकी पार्टी हमेशा रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और समानता के मुद्दों पर राजनीति करती है और चुनाव भी इन्हीं मुद्दों पर लड़े जाने चाहिए। कांग्रेस सांसद उदित राज ने कहा कि मंदिर की नींव रखी जा सकती है तो मस्जिद की रखे जाने में कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए, और इस विषय को बेवजह विवाद का रूप दिया जा रहा है।
इधर, 6 दिसंबर को टीएमसी द्वारा कोलकाता में एक बड़ी रैली आयोजित करने की तैयारी है, जिसे ‘समहति दिवस’ नाम दिया गया है। यह रैली आमतौर पर पार्टी का अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ आयोजित करता है, लेकिन इस बार इसकी जिम्मेदारी छात्र और युवा विंग को सौंपी गई है। संभावना है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी इसमें संबोधित करेंगे।
राज्य में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं और इस बीच एसआईआर (Special Summary Revision) को लेकर पहले से ही तनाव बढ़ा हुआ है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण को धांधली बताया और चेतावनी दी कि वैध मतदाताओं के नाम हटे तो इसके गंभीर राजनीतिक परिणाम होंगे। ऐसे में बाबरी मस्जिद मुद्दा भी आगामी चुनावी माहौल पर बड़ा प्रभाव डाल सकता है।
शपथ समारोह में प्रधानमंत्री मोदी समेत कई दिग्गज नेता रहे मौजूद
पटना। बिहार की सत्ता में एक बार फिर अनुभवी नेतृत्व की वापसी हुई है। 2025 के विधानसभा चुनाव में NDA की जीत के साथ नीतीश कुमार ने रिकॉर्ड बनाते हुए दसवीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। लंबे राजनीतिक अनुभव, संतुलित नेतृत्व और प्रशासनिक सुधारों के कारण वे देश के सबसे स्थायी और प्रभावशाली मुख्यमंत्रियों की श्रेणी में शामिल हो गए हैं। पटना के गांधी मैदान में हुए भव्य समारोह में 26 नवनियुक्त मंत्रियों ने भी शपथ ली। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत केंद्र व राज्यों के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।
एनडीए की हालिया जीत के बाद आयोजित इस कार्यक्रम ने बिहार की नई राजनीतिक तस्वीर को साफ कर दिया है। 243 सीटों वाली विधानसभा में NDA गठबंधन ने 202 सीटें हासिल की हैं, जिनमें भाजपा को 89, जदयू को 85, लोजपा (रामविलास) को 19, हम (सेक्युलर) को 5 और रालोमो को 4 सीटें मिलीं।
शपथ ग्रहण समारोह में केंद्रीय मंत्रियों के साथ-साथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव, ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी समेत कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों की मौजूदगी ने कार्यक्रम को और खास बनाया। माना जा रहा है कि यह शपथ ग्रहण बिहार की भविष्य की शासन-व्यवस्था और राजनीतिक दिशा को नए आयाम देगा।
नीतीश कुमार का राजनीतिक सफर साधारण पृष्ठभूमि से शुरू होकर राज्य के पुनर्निर्माण के प्रतीक तक पहुँचा है। पटना जिले के बख्तियारपुर में 1951 में जन्मे नीतीश ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद 70 के दशक में जयप्रकाश नारायण के आंदोलन से जुड़कर सक्रिय राजनीति में कदम रखा। इसी दौर ने उनके भीतर सामाजिक न्याय और प्रशासनिक सुधारों के लिए ठोस दृष्टि विकसित की।
1985 में पहली बार लोकसभा पहुँचे नीतीश कुमार ने राष्ट्रीय राजनीति में भी महत्वपूर्ण उपस्थिति दर्ज कराई। रेल मंत्री, कृषि मंत्री और सड़क परिवहन मंत्री जैसे अहम मंत्रालय उनके कार्यकाल में पारदर्शिता और आधारभूत सुधारों के लिए जाने जाते हैं। रेल मंत्रालय में उनके प्रयासों ने यात्री सुविधाओं को नई दिशा दी, जिसकी खूब सराहना हुई।
हालाँकि, उनका असल प्रभाव बिहार की सत्ता में दिखाई देता है। 2005 में पहली बार मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने कानून-व्यवस्था, सड़क नेटवर्क, बिजली आपूर्ति और शिक्षा व्यवस्था में उल्लेखनीय सुधार शुरू किए। इनके परिणामों ने बिहार की छवि को काफी हद तक सकारात्मक दिशा में बदला।
महिला सशक्तिकरण को उनकी नीतियों ने विशेष पहचान दिलाई—चाहे पंचायतों में 50% आरक्षण हो या कन्या उत्थान जैसी योजनाएँ। ग्रामीण विकास के लिए “सात निश्चय” कार्यक्रम ने कई बुनियादी सुविधाओं तक पहुँच आसान की। शराबबंदी जैसे निर्णयों ने उन्हें सामाजिक सुधारक की छवि भी दी, भले ही यह फैसला विवादों में रहा हो।
सबसे विशेष बात यह है कि गठबंधन राजनीति में उनकी समझ और संतुलन बनाने की क्षमता ने उन्हें वर्षों तक सत्ता में बनाए रखा। बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच भी वे हमेशा प्रशासन के केंद्र में रहे, जो उनकी रणनीति और जनस्वीकार्यता को दर्शाता है।
दसवीं बार मुख्यमंत्री बनकर नीतीश कुमार ने स्पष्ट कर दिया है कि वे सिर्फ एक नेता नहीं, बल्कि बिहार की आधुनिक राजनीति के प्रमुख नायक हैं, जिनके फैसले आने वाले समय में भी राज्य की दिशा तय करेंगे।
वायु प्रदूषण चरम पर, कई इलाकों में AQI 400 के पार
नई दिल्ली। दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण का संकट एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। आज सुबह क्षेत्र के कई हिस्सों में स्मॉग की घनी परत इस कदर छाई रही कि दृश्यता कम हो गई और हवा की गुणवत्ता ‘गंभीर’ श्रेणी में पहुंच गई। राजधानी दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद और गुरुग्राम में AQI लगातार 400 का आंकड़ा पार कर रहा है, जिससे लोगों में चिंता बढ़ गई है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के मुताबिक, सुबह दिल्ली के आनंद विहार, अशोक विहार, बवाना और बुराड़ी जैसे इलाकों में एक्यूआई 400 से ऊपर दर्ज किया गया, जो हवा की बेहद खराब स्थिति को दर्शाता है। आनंद विहार का एक्यूआई 416 तो वहीं जहांगीरपुरी में यह 451 तक पहुंच गया। ITO और द्वारका जैसे इलाकों में भी स्थिति बेहद खराब रही और AQI 400 के करीब बना रहा।
इंडिया गेट क्षेत्र में सुबह जहरीले स्मॉग की घनी परत साफ दिखाई दी। यहां का AQI 400 रिकॉर्ड किया गया, जो ‘बहुत खराब’ श्रेणी में आता है। कई लोग मास्क पहनकर ही बाहर निकलते दिखे। एक स्थानीय महिला ने बताया कि प्रदूषण के कारण सांस लेना तक मुश्किल हो गया है और एहतियात के तौर पर घर से निकलने से परहेज करना पड़ रहा है।
दिल्ली के मोती बाग, पंजाबी बाग और धौला कुआं में हवा की गुणवत्ता ‘गंभीर’ स्थिति में दर्ज की गई। मोती बाग का AQI 439 और पंजाबी बाग का 439 रहा, जबकि धौला कुआं में AQI 423 दर्ज किया गया।
दिल्ली से सटे गाजियाबाद में भी हालात चिंताजनक हैं। लोनी में AQI 448 तक पहुंच गया, जबकि संजय नगर, वसुंधरा और इंदिरापुरम में 370 से 420 के बीच दर्ज किया गया। नोएडा में सेक्टर 125, सेक्टर 1 और सेक्टर 116 में AQI 400 से ऊपर पहुंच गया, जहां सबसे अधिक 436 तक रिकॉर्ड किया गया।
गुरुग्राम में भी वायु गुणवत्ता खराब स्थिति में है। एनआईएसई ग्वाल पहाड़ी में AQI 365, सेक्टर 51 में 337 और विकास सदन में 266 तक पहुंच गया। टेरी ग्राम अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में रहा, जहां AQI 238 दर्ज किया गया।
फरीदाबाद में स्थिति दिल्ली की तुलना में थोड़ी बेहतर दिखाई दी, लेकिन कई स्थानों पर हवा की गुणवत्ता ‘खराब’ से ‘बहुत खराब’ श्रेणी में रही। सेक्टर 30 में AQI 213, न्यू इंडस्ट्रियल टाउन में 297 और सेक्टर 11 में 264 दर्ज किया गया।
दिल्ली-एनसीआर के व्यापक क्षेत्र में बढ़ते प्रदूषण से लोगों की परेशानी बढ़ रही है, और विशेषज्ञों ने सांस संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है।
अदालत ने माना—अपराध से अर्जित है 415 करोड़ की राशि, जांच में सहयोग जरूरी
नई दिल्ली। दिल्ली की एक विशेष अदालत ने अल-फलाह समूह के चेयरमैन और विश्वविद्यालय के संस्थापक जावद अहमद सिद्दीकी को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में 13 दिन की ईडी हिरासत में भेजने का निर्णय लिया है। मध्यरात्रि के बाद जज के चैंबर में हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने माना कि आरोप अत्यंत गंभीर हैं और जांच को आगे बढ़ाने के लिए अभियुक्त की कस्टडी आवश्यक है।
रात 11 बजे जज के आवास पर हुई कार्रवाई
साकेत अदालत की अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश शीतल चौधरी प्रधान के घर पर देर रात पेश किए गए जावद सिद्दीकी को अदालत ने विस्तृत सुनवाई के बाद ईडी को सौंप दिया। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि सिद्दीकी पर फर्जी मान्यता दिखाकर विश्वविद्यालय चलाने, अवैध धन हस्तांतरण और बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी के गंभीर आरोप हैं, जिनकी गहराई से जांच जरूरी है।
ईडी ने पीएमएलए धारा 19 के तहत की गिरफ्तारी
प्रवर्तन निदेशालय ने सिद्दीकी को 18 नवंबर की रात मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत गिरफ्तार किया था। एजेंसी ने अदालत को बताया कि जांच शुरुआती दौर में है और आरोपियों से पूछताछ कर उन लोगों की पहचान करनी है, जो धन के प्रवाह, फर्जी कागजात और वित्तीय अनियमितताओं में शामिल रहे।
ईडी का कहना है कि यदि हिरासत न मिली तो सबूत नष्ट होने और गवाहों पर दबाव बनाने की आशंका बढ़ सकती है।
415 करोड़ रुपये की संदिग्ध कमाई पर नजर
एजेंसी द्वारा कोर्ट में पेश वित्तीय आकलन के अनुसार, वर्ष 2018-19 से 2024-25 के बीच अल-फलाह संस्थान ने फीस और अन्य शैक्षणिक मदों से लगभग 415.10 करोड़ रुपये की आय प्राप्त की। ईडी का आरोप है कि यह पूरी कमाई गलत तरीके से प्राप्त की गई थी, क्योंकि इस दौरान विश्वविद्यालय की मान्यता और वैधानिक स्थिति को सार्वजनिक रूप से भ्रामक तरीके से प्रस्तुत किया गया था।
कोर्ट ने माना—धनराशि अपराध से अर्जित
अदालत ने आदेश में स्पष्ट किया कि उपलब्ध साक्ष्यों से यह संकेत मिलता है कि धन, धोखाधड़ी व जालसाजी जैसी गतिविधियों का प्रत्यक्ष परिणाम है और यह पीएमएलए के तहत दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है। इसी आधार पर ईडी की मांग स्वीकार करते हुए सिद्दीकी को 13 दिन की हिरासत में भेजा गया।
लाल किला कार बम धमाका मामले से जुड़े तार
जांच एजेंसियों के अनुसार, फरीदाबाद स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी लंबे समय से संदिग्ध वित्तीय और नेटवर्क गतिविधियों के कारण निगरानी में थी। लाल किला कार बम धमाके के मुख्य आरोपियों में से एक, डॉक्टर उमर नबी, इसी विश्वविद्यालय के अस्पताल से जुड़ा रहा है। इसके अलावा सफेदपोश आतंकी नेटवर्क में पकड़े गए कई व्यक्तियों के भी संस्थान से संबंध पाए गए।
दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा की दो FIR के आधार पर शुरू हुई मनी लॉन्ड्रिंग जांच में विश्वविद्यालय के करीब 25 ठिकानों पर छापेमारी की गई, जिसके बाद सिद्दीकी की गिरफ्तारी की गई।
बम धमकी के बाद दिल्ली की अदालतों में कार्यवाही ठप, परिसर पूरी तरह खाली कराए गए
नई दिल्ली। दिल्ली की कई जिला अदालतों में मंगलवार को आए बम धमकी भरे ई-मेल ने पूरे न्यायिक तंत्र में हड़कंप मचा दिया। संदेश मिलते ही अदालत परिसरों को एहतियातन खाली करवा दिया गया और सुरक्षा बलों ने तुरंत मोर्चा संभालते हुए तलाशी अभियान शुरू कर दिया। अचानक बढ़ाई गई सुरक्षा ने पूरे शहर में चिंता का माहौल बना दिया।
अदालतों में अचानक हाई अलर्ट
बम धमकी मिलने के बाद साकेत, द्वारका, पटियाला हाउस और रोहिणी स्थित अदालतों को पूरी तरह से खाली कर दिया गया। जजों, अधिवक्ताओं, न्यायिक कर्मचारियों और वहां मौजूद आम लोगों को तत्काल परिसर से बाहर निकलने को कहा गया। बम निरोधक दस्ता और पुलिस टीमें सभी कमरों, पार्किंग और खुले स्थानों में विस्तृत जांच करती रहीं। पटियाला हाउस कोर्ट में अतिरिक्त सुरक्षा तैनात की गई, जहां विशेषज्ञ टीमें लगातार तलाशी लेती रहीं।
साकेत कोर्ट में कार्यवाही अस्थायी रूप से रोकी गई
साकेत कोर्ट बार एसोसिएशन की ओर से जारी सूचना में कहा गया कि सुरक्षा संबंधी सतर्कता के कारण कुछ समय के लिए सभी न्यायालयीन कार्य बंद कर दिए गए थे। अधिवक्ताओं से अपील की गई कि वे शांति बनाए रखें और बेवजह भीड़ न लगाएं। सुरक्षा जांच पूरी होते ही बाद में कार्यवाही बहाल किए जाने की संभावना जताई गई।
अतीत में भी मिल चुकी हैं धमकियाँ
दिल्ली की अदालतों को पहले भी ऐसे ई-मेल के जरिए डराने की कोशिशें हो चुकी हैं। कुछ महीने पहले दिल्ली हाईकोर्ट को भी बम की झूठी सूचना दी गई थी, जिसके चलते कार्यवाही रोकनी पड़ी थी और सभी को बाहर निकलना पड़ा था। लगातार मिल रही धमकियों ने अदालत परिसरों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगाए हैं।
NIA के केस से पहले बढ़ाई गई सतर्कता
पटियाला हाउस और रोहिणी कोर्ट में तलाशी अभियान इसलिए भी तेज किया गया, क्योंकि राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के आरोपी जसीर बिलाल उर्फ दानिश की पेशी से पहले सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही थी। डॉग स्क्वायड और बम निरोधक टीम ने पूरी इमारत की तसदीक की।
सीआरपीएफ के दो स्कूलों को भी मिली धमकी
इसी दौरान सुबह करीब 9 बजे दिल्ली के प्रशांत विहार और द्वारका में स्थित दो सीआरपीएफ स्कूलों को भी बम से उड़ाने की धमकी वाला ई-मेल मिला। तत्काल पुलिस, अग्निशमन दल और सुरक्षा बल मौके पर पहुँचे। स्कूलों को खाली कराकर व्यापक तलाशी की गई, लेकिन जांच में कोई संदिग्ध वस्तु नहीं मिली। अधिकारियों ने इसे ‘होक्स’, यानी झूठी धमकी घोषित किया।
भ्रम फैलाने की कोशिशें बढ़ीं, सुरक्षा और कड़ी की गई
लगातार मिल रही फर्जी धमकियों ने पुलिस की सतर्कता और भी बढ़ा दी है। अधिकारियों का कहना है कि भले ही अधिकतर धमकियाँ झूठी निकलती हैं, लेकिन सार्वजनिक स्थानों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।
