हरिद्वार स्थित ब्रह्मऋषि दूधाधारी बर्फानी अंतरराष्ट्रीय चिकित्सा एवं अनुसंधान संस्थान ने उसके द्वारा विकसित होम्योपैथी दवा को कोरोना वायरस से लड़ने में कारगर होने का दावा किया है। संस्थान ने होम्योपैथी पर आधारित इस शोध प्रस्ताव का सोमवार को दिल्ली में प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री डॉ जितेंद्र सिंह के समक्ष प्रस्तुतीकरण दिया। केंद्रीय मंत्री ने शोध के दावों के मूल्यांकन और पुष्टिकरण के लिए इसे आयुष मंत्रालय को भेज दिया है।
इस अवसर पर केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. सिंह ने कहा कि कोविड-19 से बचाव और इलाज को लेकर दुनिया भर में अनेक शोध एवं अध्ययन हो रहे हैं, जो शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली और प्राकृतिक प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाकर बीमारी से लड़ने में अहम भूमिका अदा कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि कोविड-19 के दौर में भारत की सभी चिकित्सा पद्धतियों आयुर्वेदिक, होम्योपैथिक, यूनानी, योग व नेचुरोपैथी के प्रति लोगों का विश्वास बढ़ा है।
डॉ जितेंद्र सिंह ने दोहराया कि नरेन्द्र मोदी ने जब से प्रधानमंत्री के रूप में देश की सत्ता संभाली है, उनका प्रयास रहा है कि चिकित्सा प्रबंधन में स्वदेशी तंत्र को अधिक से अधिक महत्व दिया जाए। अपने इन प्रयासों के चलते वे चिकित्सा जगत में स्वदेशी को केंद्र में लाने में सफल रहे हैं। मोदी के प्रयासों का परिणाम है कि संयुक्त राष्ट्र संघ ने सर्वसम्मति से अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का प्रस्ताव पास किया और आज वर्चुअल माध्यम से योग दुनिया के प्रत्येक घर तक पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि स्वदेशी व्यवस्था को महत्वपूर्ण मानते हुए ही चिकित्सा प्रबंधन के वैकल्पिक तंत्र को विकसित करने के उद्देश्य से भारत सरकार ने आयुष मंत्रालय का गठन किया है। इसका श्रेय भी प्रधानमंत्री मोदी को जाता है।
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने रविवार देर रात दिल्ली दंगे के दौरान साजिश के आरोप में जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के पूर्व छात्र उमर खालिद को गिरफ्तार कर लिया है। उमर खालिद की गिरफ्तारी गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (Unlawful Activities Prevention Act, UAPA) के तहत की गई है।
इस वर्ष फरवरी माह में संशोधित नागरिकता कानून (CAA) के विरोधियों और समर्थकों के बीच हिंसा के बाद उत्तर पूर्वी दिल्ली में सांप्रदायिक दंगे भड़क गए थे। इन दंगों में कम से कम 53 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 200 के करीब घायल हुए थे। स्पेशल सेल दिल्ली हिंसा की साजिश की जांच कर रही है। स्पेशल सेल पहले भी उमर खालिद से पूछताछ कर चुकी है। उमर खालिद पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत दौरे से पहले भड़काऊ भाषण देने का भी आरोप है। आरोप है कि उमर खालिद ने ट्रम्प के भ्रमण के दौरान दंगे फैलाने के लिए उकसाने वाले भाषण दिए, ताकि अमेरिकी राष्ट्रपति के सामने भारत की छवि ख़राब हो। उमर खालिद ने पहली बार तब सुर्खियां बटोरीं थीं, जब जेएनयू में संसद हमले के दोषी अफजल गुरु की फांसी के खिलाफ एक कार्यक्रम हुआ।
उधर, उमर खालिद की गिरफ्तारी की खबर फैलते ही ‘टुकड़े- टुकड़े’ गैंग सक्रिय हो गया और उन्होंने खालिद की गिरफ्तारी पर विरोध जताया है। जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती, वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण, स्वराज अभियान के योगेंद्र यादव व अभिनेता प्रकाश राज ने ट्वीट कर गिरफ्तारी का विरोध किया है। JNU की छात्र नेता रहीं शेहला रशीद, इस्लामिक संस्था पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के महासचिव अनीष अहमद, हर्ष मंदर आदि तमाम लोगों ने उमर खालिद की गिरफ्तारी पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।
प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में शनिवार को 3 आईएएस अधिकारियों को नियुक्ति दी गई है। इनमें उत्तराखंड कैडर के मंगेश घिल्डियाल भी शामिल हैं।
मध्य प्रदेश कैडर के आईएएस अधिकारी रघुराज राजेंद्रन को प्रधानमंत्री कार्यालय में निदेशक के पद पर तैनात किया गया है।
आंध्र प्रदेश कैडर की आम्रपाली काता को पीएमओ में उप सचिव के रूप में नियुक्ति मिली है।
उत्तराखंड कैडर के मंगेश घिल्डियाल प्रधानमंत्री कार्यालय में अवर सचिव के रूप में कार्यभार संभालेंगे। मंगेश वर्तमान में टिहरी गढ़वाल के जिलाधिकारी के रूप में कार्यरत हैं।
देश में कोरोना प्रभावितों के मामले बढ़ने के साथ- साथ रोगियों के ठीक होने की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। देश में पिछले 24 घंटों के दौरान 96,551 नए मामले सामने आये, तो वहीं 70,880 रोगी ठीक हुए हैं। महाराष्ट्र में ही एक दिन में 14,000 से अधिक रोगी ठीक हुए हैं, जबकि आंध्र प्रदेश में एक दिन में 10,000 से अधिक रोगी ठीक हुए हैं। शुक्रवार तक कुल सक्रिय मामलों की संख्या 9,43,480 हो गई है, जबकि कुल संक्रमित लोगों की संख्या 45,62,414 तक पहुँच गई है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने शुक्रवार दोपहर को यह आंकड़े जारी किये हैं।
इससे ठीक हुए रोगियों की संख्या 35,42,663 हो गई है और रिकवरी दर 77.65 प्रतिशत पर पहुंच गई है। 60 प्रतिशत ठीक हुए नए रोगी पांच राज्यों अर्थात महाराष्ट्र, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश से हैं।

पिछले 24 घंटों में 96,551 नए मामले सामने आए हैं। इसमें से अकेले महाराष्ट्र से 23,000 से अधिक और आंध्र प्रदेश से 10,000 से अधिक मामले सामने आए हैं। नए मामलों में लगभग 57 प्रतिशत मामले केवल पांच राज्यों से सामने आए हैं। ये वही राज्य हैं, जो नए ठीक हुए रोगियों के मामलों में भी 60 प्रतिशत योगदान दे रहे हैं।
शुक्रवार तक देश में सक्रिय मामलों की कुल संख्या 9,43,480 हो गई है। महाराष्ट्र का इस तालिका में पहला स्थान है, जहां 2,60,000 से अधिक मामले सामने आए हैं। इसके बाद कर्नाटक में 1,00,000 से अधिक सक्रिय मामले सामने आए हैं।
कुल सक्रिय मामलों में से लगभग 74 प्रतिशत सबसे अधिक प्रभावित राज्यों महाराष्ट्र, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश से सामने आए हैं। इन राज्यों का कुल सक्रिय मामलों में 48 प्रतिशत से अधिक योगदान है।

पिछले 24 घंटों में 1209 मौत दर्ज हुई हैं। महाराष्ट्र में 495 लोगों की जान गई है, जबकि कर्नाटक में 129 और उत्तर प्रदेश में 94 लोगों ने जान गंवाई है। इस प्रकार अब तक कुल 76,271 लोग कोरोना के शिकार बने हैं। शुक्रवार तक कुल संक्रमित लोगों की संख्या 45,62,414 तक पहुँच गई है। इनमें से ठीक होने अथवा अस्पताल से छुट्टी दी गई मरीजों की संख्या 35,42,663 है।
ऑक्सीजन की आवाजाही पर किसी प्रकार का प्रतिबंध न लगाने के निर्देश
इधर, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस बात पर जोर दिया कि अस्पताल में भर्ती हर रोगी को ऑक्सीजन उपलब्ध कराना प्रत्येक राज्य की जिम्मेदारी है। मंत्रालय के अनुसार उसकी जानकारी में आया है कि कुछ राज्य विभिन्न अधिनियमों के प्रावधानों का इस्तेमाल करके ऑक्सीजन की अंतरराज्यीय मुक्त आवाजाही को रोकने की कोशिश कर रहे हैं। इसके अलावा, वे अपने राज्य में स्थित विनिर्माताओं अथवा आपूर्तिकर्ताओं को ऑक्सीजन की आपूर्ति केवल राज्यों के अस्पतालों के लिए ही करने के लिए भी मजबूर कर रहे हैं।
इस बात को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य मंत्रालय ने दोहराया है कि कोविड के गंभीर रोगियों के इलाज के लिए अस्पतालों में ऑक्सीजन का महत्वपूर्ण स्थान है। राज्यों व केन्द्र शासित प्रदेशों को लिखे पत्र में केन्द्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने इस बात पर जोर दिया है कि मेडिकल ऑक्सीजन की पर्याप्त और बाधारहित आपूर्ति कोविड-19 के मध्यम और गंभीर मामलों के इलाज के लिए एक महत्वपूर्ण जरूरत है। स्वास्थ्य सचिव ने सभी राज्यों व केन्द्र शासित प्रदेशों से यह सुनिश्चित करने का अनुरोध किया कि राज्यों के बीच मेडिकल ऑक्सीजन की आवाजाही पर कोई प्रतिबंध लागू न किया जाए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अस्पताल में भर्ती हर रोगी को ऑक्सीजन उपलब्ध कराना प्रत्येक राज्य की जिम्मेदारी है।
केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि मोदी सरकार द्वारा धारा-370 हटाए जाने से जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के विकास में बाधक बने तमाम कानून भी खत्म हो गए और इस क्षेत्र के विकास की रफ्तार पर लगा “स्पीड ब्रेकर” ध्वस्त हो गया है। नकवी ने दावा किया कि केंद्र सरकार की विभिन्न आर्थिक, शैक्षणिक विकास योजनाओं व कार्यक्रमों का लाभ जम्मू-कश्मीर, लेह-कारगिल के लोगों को मिलना शुरू हो गया है।
लेह के दो दिवसीय दौरे पर पहुंचे नकवी ने लेह, साबू-थांग, शुकोट शमा, शुकोट गोंगमा, फ्यांग आदि का दौरा कर विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों से भेंट एवं प्रशासनिक अधिकारियों के साथ विकास योजनाओं की समीक्षा की। इस दौरान उनके साथ स्थानीय सांसद जामियांग शेरिंग नामग्याल भी उपस्थित थे।
नकवी ने कहा कि 2019 में धारा-370 हटाए जाने के बाद से जम्मू-कश्मीर और लेह-कारगिल में विकास की “राजनैतिक एवं कानूनी अड़चने” खत्म हुई है और विकास का चौमुखी समावेशी माहौल बना है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर, लेह-कारगिल में प्रशासनिक, भूमि, आरक्षण आदि सुधार हुए हैं। केंद्र सरकार के 890 कानून लागू हो गए हैं। राज्य के 164 कानून खत्म किये गए हैं। 138 कानूनों में सुधार किया गया है। सरकारी नौकरियों में आरक्षण व्यवस्था में सुधार कर अधिक से अधिक जरूरतमंदों को लाभ पहुँचाया गया है।

75 हजार से ज्यादा युवाओं को रोजगारपरक कौशल विकास की ट्रेनिंग मुहैया कराई गई है। 50 नए कॉलेज स्थापित किये जा रहे हैं। वर्तमान में जो कॉलेज हैं उनमे 1 वर्ष में 25 हजार नयी सीटें बढ़ाई गयी हैं। लाखों छात्र-छात्राओं को विभिन्न स्कॉलरशिप्स दी गई हैं। लद्दाख में 1 नए मेडिकल कॉलेज व 1 इंजीनियरिंग कॉलेज की स्थापना की जा रही है। लेह में नेशनल स्किल ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट की स्थापना की जा रही है। हजारों रिक्त पड़ी सरकारी नौकरियों को भरने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। 35 हजार से ज्यादा स्कूल टीचर्स को नियमित कर दिया गया है। 500 करोड़ रूपए से ज्यादा कंस्ट्रक्शन मजदूरों, पिट्ठूवाला, रेहड़ी वालों, महिलाओं को आर्थिक गतिविधियों के लिए दिए गए हैं। जम्मू, कश्मीर, लद्दाख को “इन्वेस्टमेंट हब” बनाने की दिशा में कदम उठाए गए हैं। ग्लोबल इन्वेस्टमेंट सम्मिट से 14 हजार करोड़ रूपए का निवेश आया है।
नकवी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर, लद्दाख के सभी निवासियों को स्वास्थ्य बीमा मुहैया कराया गया है। आयुष्मान भारत का लाभ 30 लाख से ज्यादा लोगों को दिया गया है। कोरोना काल में 17 विशेष अस्पताल, 60 हजार नए बेड की व्यवस्था की गई है। कोरोना के चलते देश-विदेश में फंसे जम्मू, कश्मीर, लद्दाख के 2 लाख 50 हजार से ज्यादा लोगों को वापस उनके घर पहुंचाया गया। उन्होंने कहा कि केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने जम्मू-कश्मीर और लेह-लद्दाख में बड़े पैमाने पर विकास कार्यों की रुपरेखा बनाई है।
सरकारी विज्ञापनों की विषयवस्तु के विनियमन के लिए उच्चतम न्यायालय द्वारा अधिकार प्राप्त समिति (Committee on Content Regulation in Government Advertising, CCRGA) की बैठक में समिति के निर्देशों का पालन न किये जाने को गंभीर मानते हुए कठोर कार्रवाई करने पर विचार किया गया। पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ओम प्रकाश रावत की अध्यक्षता वाली समिति की बैठक में दो अन्य सदस्य एशियन फेडरेशन ऑफ एडवरटाइजिंग एसोसिएशन के रमेश नारायण और प्रसार भारती बोर्ड के अंशकालिक सदस्य अशोक कुमार टंडन उपस्थित थे।
बैठक में कहा गया कि उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुसार, केंद्र की भांति राज्यों के लिए भी सरकारी विज्ञापनों की विषयवस्तु की निगरानी के लिए तीन सदस्यीय समितियों का गठन अनिवार्य किया गया है। मगर कई राज्यों ने अपने यहाँ इस समिति का गठन नहीं किया है। विभिन राज्यों द्वारा समिति का गठन न किये जाने के तथ्य को CCRGA ने गंभीरता से लिया है।
बैठक में CCRGA का ध्यान इस ओर भी आकर्षित किया गया कि जिन राज्यों में समितियां कार्य कर रही हैं, वहां उनके पास शिकायतें आ रही हैं। मगर कई मामलों में सम्बंधित पक्षों द्वारा समितियों की ओर से भेजे गए नोटिसों का जवाब नहीं दिया जा रहा है। ऐसे मामलों में CCRGA ने कोविड महामारी की मौजूदा स्थिति को देखते हुए संबंधित पक्षों को अपना जवाब भेजने के लिए कुछ और समय देने का फैसला लिया है।
बैठक में कहा गया कि नोटिस के जवाब में अनुचित देरी की स्थिति में यदि आवश्यक हो तो समिति विज्ञापन जारी करने वाली सरकारी एजेंसी के संबंधित अधिकारी को पेश होने के लिए भी कह सकती है। चेतावनी दी गई कि CCRGA के आदेशों का पालन न करने की स्थिति में, समिति अपनी शक्तियों का इस्तेमाल कर संबंधित राज्य सरकारों की नोडल एजेंसियों पर भविष्य में विज्ञापन जारी करने पर रोक लगाने के लिए बाध्य होगी।
क्या है CCRGA ?
उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के क्रम में भारत सरकार ने 6 अप्रैल, 2016 को सरकारी विज्ञापन एजेंसियों की ओर से सभी मीडिया प्लेटफार्मों पर जारी विज्ञापनों की विषय वस्तु पर निगरानी रखने के लिए “पूरी तरह से तटस्थत और निष्पक्ष” सोच रखने वाले तथा अपने क्षेत्र में उत्कृटता हासिल कर चुके व्यक्तियों की तीन सदस्यीय समिति का गठन किया था। इसी अनुरूप राज्य स्तर पर वहां की सरकारों द्वारा समिति गठित की जानी है।
उच्चतम न्यायालय के निर्देश थे कि सरकारी विज्ञापनों की सामग्री सरकार के संवैधानिक और कानूनी दायित्वों के साथ-साथ नागरिक अधिकारों के नजरिए से भी प्रासंगिक होनी चाहिए। विज्ञापनों की सामग्री को एक उद्देश्यपूर्ण, निष्पक्ष और सुलभ तरीके से प्रस्तुत किया जाना चाहिए और इस तरह से डिजाइन किया जाना चाहिए ताकि वह अभियान के उद्देश्यों को पूरा करती हो। विज्ञापन सामग्री उद्देश्यपूर्ण होनी चाहिए और किसी भी प्रकार से सत्ता पक्ष के राजनीतिक हितों को बढ़ावा देने वाली नहीं होनी चाहिए। विज्ञापन अभियानों को न्यायसंगत, कुशल और प्रभावी तरीके से चलाया जाना चाहिए तथा सभी सरकारी विज्ञापन कानूनी नियमों के अनुरूप होने चाहिए और इनके लिए वित्तीय नियमों और प्रक्रियाओं का पालन करना चाहिए।
CCRGA को उच्चतम न्यायालय के दिशा-निर्देशों के उल्लंघन के संबंध में मिली जन शिकायतों को निबटाने तथा इस बारे में आवश्यकतानुसार सुझाव देने का अधिकार दिया गया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले सप्ताह 17 सितम्बर को 70 वर्ष के हो जायेंगे। उनके जन्मदिन को लेकर भारतीय जनता पार्टी देशभर में पूरे सप्ताह कार्यक्रम आयोजित करेगी। इसे सेवा सप्ताह नाम दिया गया है। इस दौरान पार्टी कार्यकर्त्ता विभिन्न प्रकार के सेवा कार्य चला कर प्रधानमंत्री मोदी के स्वस्थ व दीर्घायु जीवन की कामना करेंगे।
भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व द्वारा इस सम्बन्ध में सभी राज्य इकाइयों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं। सेवा सप्ताह के तहत विभिन्न आयोजन 14 सितम्बर से शुरू होकर 20 सितम्बर तक चलेंगे। सेवा सप्ताह के तहत भाजपा कार्यकर्त्ता दिव्यांगों को विभिन्न प्रकार के कृत्रिम अंगों व उपकरणों और गरीबों को चश्मों का वितरण करेंगे। विभिन्न स्थानों पर गरीब बस्तियों व चिकित्सालयों में फलों का वितरण, रक्तदान शिविर आयोजित किये जाएंगे। प्रत्येक बूथ पर वृक्षारोपण कर पर्यावरण सरंक्षण का संकल्प लिया जाएगा। सभी जिला मुख्यालयों में सार्वजानिक स्थानों पर स्वच्छता कार्यक्रम चलाये जाएंगे।
इसके साथ ही विभिन्न स्तरों पर प्रधानमंत्री मोदी के व्यक्तित्व व कृतित्व पर वेबिनारों का आयोजन होगा, जिनमें समाज के प्रबुद्ध नागरिकों व बुद्धिजीवियों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। भाजपा की सोशल मीडिया टीम इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी के कार्यों व व्यक्तित्व पर स्लाइड की प्रदर्शनी बना कर सोशल मीडिया में प्रचारित – प्रसारित करेगी।
केंद्र सरकार ने विभिन्न प्रकार के मानसिक रोगियों की सहायता के लिए सातों दिन, चौबीसों घंटे (24×7) की एक टोल-फ्री मानसिक स्वास्थ्य पुनर्वास हेल्पलाइन (1800-599-0019) शुरू की है। ‘किरण’ नाम से शुरू गई यह हेल्पलाइन मानसिक रूप से बीमार व्यक्तियों को राहत और मदद उपलब्ध कराएगी। केंद्र सरकार ने विशेष रूप से कोविड-19 महामारी के कारण बढ़ती हुई मानसिक बीमारी की घटनाओं को ध्यान में रखते हुए इसे शुरू किया है।
यह हेल्पलाइन तनाव, चिंता, अवसाद, डर के झटके, नशीले पदार्थों का सेवन, आत्महत्या, महामारी से प्रेरित मनोवैज्ञानिक मुद्दों, व्यग्रता, जुनूनी बाध्यकारी विकार (ओसीडी), पैनिक अटैक समायोजन विकार, पोस्ट-ट्रोमेटिक (अभिघातजन्य) तनाव विकार आदि से संबंधित मानसिक स्वास्थ्य मुद्दों के समाधान के लिए कार्य करेगी। देश के किसी भी हिस्से से किसी भी मोबाइल या किसी लैंड लाइन से टोल फ्री नंबर 1800-599-0019 डॉयल कर मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ, क्लिनिकल मनोवैज्ञानिक अथवा मनोचिकित्सक अपनी सलाह और सुझाव देंगे। मरीजों की जानकारी गोपनीय रखी जाएगी।
यह हेल्पलाइन में 13 भाषाओं – हिंदी, असमिया, तमिल, मराठी, ओडिया, तेलुगु, मलयालम, गुजराती, पंजाबी, कन्नड़, बंगाली, उर्दू और अंग्रेजी में काम करेगी। हेल्पलाइन का उद्देश्य जल्द जांच, प्राथमिक चिकित्सा, मनोवैज्ञानिक सहायता, संकट प्रबंधन, मानसिक भलाई, विचलित व्यवहारों की रोकथाम, मनोवैज्ञानिक संकट प्रबंधन और मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों को रेफरल संबंधी मदद करना है।
केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा शुरू की गई इस हेल्पलाइन का सोमवार को विभागीय मंत्री थावरचंद गहलोत ने वर्चुअल मोड वेबकास्ट के माध्यम से की शुरूआत की। गहलोत ने इस हेल्पलाइन के बारे में पोस्टर, ब्रोशर और संसाधन पुस्तिका भी जारी की। दिव्यांगताग्रस्त व्यक्तियों के सशक्तिकरण विभाग की सचिव शकुंतला डी. गामलिन व संयुक्त सचिव प्रबोध सेठ भी इस अवसर पर उपस्थित थे।
इस अवसर पर गहलोत ने कहा कि किरन हेल्पलाइन जल्दी जांच, प्राथमिक चिकित्सा, मनोवैज्ञानिक सहायता, संकट प्रबंधन, मानसिक भलाई, सकारात्मक व्यवहार को बढ़ावा देने, मनोवैज्ञानिक संकट प्रबंधन आदि के उद्देश्य से मानसिक स्वास्थ्य पुनर्वास सेवाएं उपलब्ध कराएगी। यह पूरे देश में व्यक्तियों, परिवारों, गैर सरकारी संगठनों, मूल संघों, व्यावसायिक संघों, पुनर्वास संस्थानों, अस्पतालों और किसी भी जरूरतमंद व्यक्ति को 13 भाषाओं में पहले चरण की सलाह, परामर्श और संदर्भ उपलब्ध कराने वाली जीवन रेखा के रूप में काम करेगी। उन्होंने उम्मीद जाहिर की कि यह हेल्पलाइन बीमारी से ग्रस्त व्यक्तियों के परिवार के सदस्यों के लिए भी बहुत लाभकारी सिद्ध होगी।
चर्चित फिल्म निर्देशक, अभिनेता व पटकथा लेखक करण राजदान अपनी आने वाली फिल्म ‘हिंदुत्व’ और एक डॉक्यूमेंट्री ‘शिवतंत्र’ की शूटिंग उत्तराखंड में करना चाहते हैं। राजदान ने इस सम्बन्ध में आज प्रदेश के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से उनके आवास पर भेंट की।
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र से भेंट के दौरान राजदान ने कहा कि वे उत्तराखण्ड में ‘हिन्दुत्व’ फिल्म की शूटिंग करना चाहते हैं। इस फिल्म की 90 प्रतिशत शूटिंग वे उत्तराखण्ड में करेंगे। फिल्म की शूटिंग अगले वर्ष जनवरी-फरवरी में शुरू होगी। इसके अलावा उन्होंने उत्तराखण्ड में एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘शिवतंत्र’ की शूटिंग करने की इच्छा भी जताई। करण राजदान ने परदे के आगे और पीछे दोनों तरह की भूमिकाओं का निर्वाह किया है और चर्चाओं में रहे हैं। उन्होंने कई हिट टीवी सीरियलों की कहानियां भी लिखी हैं।

फिल्म निर्देशक करण राजदान द्वारा उत्तराखण्ड में फिल्म की शूटिंग की इच्छा पर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र ने उन्हें अपनी सहमति प्रदान की। मुख्यमंत्री ने डॉक्यूमेंट्री ‘शिवतंत्र’ को लेकर करण राजदान को सुझाव दिया कि इसकी शूटिंग पंच केदारों में किसी भी स्थान पर की जा सकती है। उल्लेखनीय है, कि गढ़वाल के हिमालयी क्षेत्र में स्थित श्री केदारनाथ, मद्महेश्वर, तुंगनाथ, रुद्रनाथ व कल्पेश्वर मंदिरों की पंच केदारों के रूप में मान्यता है। ये सभी भगवान शिव के मंदिर हैं।
भेंट के दौरान मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने करण राजदान को बताया कि उत्तराखण्ड में फिल्म शूटिंग के लिए एक सरल फिल्म नीति बनाई गई है। अब एक दिन में भी फिल्म शूटिंग की ऑनलाईन अनुमति दी जा रही है। उन्होंने कहा कि देवभूमि उत्तराखण्ड का नैसर्गिक सौन्दर्य एवं प्राकृतिक वातावारण फिल्म की शूटिंग के लिए अनुकूल है। इसलिए फिलमकारों का रूझान उत्तराखण्ड के प्रति बढ़ा है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के अपर सचिव डॉ. नीरज खैरवाल तथा उत्तराखण्ड फिल्म विकास परिषद के नोडल अधिकारी के.एस.चौहान भी उपस्थित थे।
देश में कोविड महामारी नौवें महीने में प्रवेश कर गया है। इस दौरान कई राज्यों ने महामारी से लड़ने के लिए इसके अनुकूल नए उपाय भी शुरू किए हैं। इस क्रम में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा उठाये गए कदम भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय को भी भा गए हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने विज्ञप्ति जारी कर यूपी सरकार के प्रयासों की जानकारी दी है और इसे कोविड-19 को लेकर ‘बेहतरीन उपाय’ बताया है।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार यूपी सरकार ने कोविड के पॉजिटिव मामलों की बढ़ती संख्या से निपटने के लिए विगत 18 जुलाई को प्रदेश के सभी जिलों में एकीकृत कोविड नियंत्रण एवं कमान केंद्र (ICCCC) की स्थापना की। इसके अलावा राज्य मुख्यालय पर भी सभी संबंधित विभागों के प्रतिनिधित्व के साथ ICCCC स्थापित किया गया। इन केंद्रों का कार्य मुख्य रूप से गैर फार्मास्युटिकल हस्तक्षेपों (non-pharmaceutical interventions) के लिए संबंधित विभागों के बीच प्रभावी समन्वय सुनिश्चित करने का है। इन केंद्रों पर कोविड-19 रोगियों को जल्द ही इलाज के लिए उचित स्तर के डेटिकेटेड कोविड सुविधा केंद्रों तक पहुंचाने की सहूलियत मिलती है। ये केंद्र क्षेत्रीय इकाइयों के साथ मिलकर रोग-संबंधी लक्षण वाले मरीजों और उनके संपर्क में आए लोगों का शीघ्र परीक्षण, प्रयोगशाला की स्थिति की जानकारी, अस्पताल में भर्ती की स्थिति में परिवहन सुविधा और घर में पृथकवास में रहकर इलाज करा रहे मरीजों की नियमित निगरानी सुनिश्चित करते हैं।
उत्तर प्रदेश सरकार ने ने एक एकीकृत राज्य कोविड पोर्टल http://upcovid19tracks.in भी विकसित किया है जो कोविड रोगियों की निगरानी, परीक्षण और उपचार से संबंधित सभी सूचनाएं एकत्रित करता है। सरकार द्वारा जिला स्तर पर डेटा और डेटा प्रबंधन की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए नियमित प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। यह पोर्टल कोविड-19 को लेकर विभिन्न तथ्यों के विश्लेषण में सहायक साबित हो रहा है। पोर्टल पर प्राप्त डिजिटल डेटा की उपलब्धता से त्वरित निर्णय लेने और तथ्यों का सूक्ष्म विश्लेषण संभव हुआ है। इस पोर्टल ने भारत सरकार के पोर्टल के साथ पारस्परिकता के माध्यम से भी फायदा उठाया है।
