16 जनवरी को आएंगे नतीजे, महाराष्ट्र की राजनीति की दिशा होगी तय
मुंबई। महाराष्ट्र में लंबे इंतजार के बाद नगर निकाय चुनावों की तस्वीर साफ हो गई है। बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) समेत राज्य के 29 नगर निगमों में तीन साल की देरी से चुनाव कराए जा रहे हैं। राज्य निर्वाचन आयोग ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं और राजनीतिक दलों ने भी उम्मीदवारों की घोषणा के साथ चुनावी रणनीति को अंतिम रूप दे दिया है। अब प्रदेश की सियासत की दिशा तय करने वाले इस अहम चुनाव पर सबकी नजरें टिकी हैं।
एक चरण में होगा मतदान
महाराष्ट्र में बीएमसी सहित 29 नगर निगमों के लिए 15 जनवरी 2026 को एक ही चरण में मतदान कराया जाएगा। मतदाताओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने मतदान दिवस पर सार्वजनिक अवकाश घोषित किया है। ग्रेटर मुंबई क्षेत्र में सभी मतदान केंद्रों पर सुबह 7:30 बजे से शाम 5:30 बजे तक वोट डाले जाएंगे। चुनाव परिणाम 16 जनवरी को घोषित किए जाएंगे।
नामांकन से लेकर अंतिम सूची तक पूरी प्रक्रिया संपन्न
नगर निकाय चुनावों के लिए नामांकन प्रक्रिया 23 दिसंबर 2025 से शुरू हुई थी, जो 30 दिसंबर तक चली। उम्मीदवारों को 2 जनवरी 2026 तक नाम वापस लेने का मौका दिया गया। इसके बाद 3 जनवरी को चुनाव मैदान में उतरे प्रत्याशियों की अंतिम सूची जारी की गई। अब सभी दल पूरी ताकत के साथ प्रचार में जुटे हुए हैं।
बीएमसी में 1.03 करोड़ से अधिक मतदाता
देश के सबसे बड़े नगर निगम बीएमसी के 227 वार्डों में 1.03 करोड़ से ज्यादा मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। महाराष्ट्र के कुल 29 नगर निगमों में बीएमसी का राजनीतिक और प्रशासनिक महत्व सबसे अधिक माना जाता है, इसलिए यहां का चुनाव राज्य की राजनीति के लिए बेहद अहम है।
गठबंधनों के बीच कड़ा मुकाबला
बीएमसी चुनाव में सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन पूरी मजबूती के साथ मैदान में है। इस गठबंधन में भाजपा और शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) शामिल हैं। भाजपा 137 सीटों पर जबकि शिवसेना 90 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। वहीं, गठबंधन की सहयोगी एनसीपी ने अकेले चुनाव लड़ने का फैसला करते हुए 94 सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं।
दूसरी ओर कांग्रेस भी मजबूती से चुनावी मैदान में है। कांग्रेस ने 143 सीटों पर प्रत्याशी उतारे हैं और उसे वंचित बहुजन अघाड़ी का समर्थन प्राप्त है, जिसने 42 सीटों पर उम्मीदवार खड़े किए हैं। कांग्रेस की सहयोगी राष्ट्रीय समाज पक्ष भी छह सीटों पर चुनाव लड़ रही है।
तीसरे मोर्चे की भी ताकत आजमाइश
तीसरे गठबंधन में शिवसेना (उद्धव ठाकरे), एनसीपी (शरद पवार) और मनसे (राज ठाकरे) शामिल हैं। इस गठबंधन में शिवसेना (उद्धव गुट) 150 से अधिक सीटों पर चुनाव लड़ रही है, जबकि एनसीपी 11 सीटों पर मैदान में है। मनसे शेष सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारकर अपनी राजनीतिक ताकत दिखाने की कोशिश कर रही है।
कुल मिलाकर, बीएमसी और अन्य नगर निगमों के ये चुनाव न केवल शहरी शासन की दिशा तय करेंगे, बल्कि महाराष्ट्र की भविष्य की राजनीति पर भी गहरा असर डालने वाले साबित होंगे।
अंकिता भंडारी केस से उन्नाव तक, राहुल गांधी ने उठाए न्याय के सवाल
नई दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्र की मोदी सरकार और भाजपा शासित राज्यों पर एक बार फिर तीखा हमला बोला है। सोशल मीडिया मंच एक्स पर जारी एक विस्तृत पोस्ट में उन्होंने ‘डबल इंजन सरकार’ की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए भ्रष्टाचार, सत्ता के दुरुपयोग और जनहित की अनदेखी के आरोप लगाए।
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने कहा कि भाजपा की डबल इंजन सरकारों ने देश के विभिन्न हिस्सों में आम लोगों की जिंदगी मुश्किल में डाल दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि गरीब, मजदूर और मध्यमवर्ग की समस्याओं को नजरअंदाज कर ‘विकास’ के नाम पर केवल वसूली और सत्ता का दुरुपयोग किया जा रहा है। राहुल गांधी के अनुसार, भाजपा की राजनीति में ऊपर से नीचे तक अहंकार और भ्रष्टाचार गहराई से समाया हुआ है।
उत्तराखंड से यूपी तक उठाए सवाल
राहुल गांधी ने उत्तराखंड की अंकिता भंडारी हत्या का जिक्र करते हुए कहा कि यह मामला पूरे देश को झकझोर देने वाला है, लेकिन आज भी यह सवाल बना हुआ है कि सत्ता का संरक्षण किसे बचा रहा है और कानून सबके लिए समान कब होगा। इसके साथ ही उन्होंने उत्तर प्रदेश के उन्नाव कांड का हवाला देते हुए कहा कि सत्ता के प्रभाव में अपराधियों को बचाने की कोशिशें होती रही हैं और पीड़ितों को न्याय के लिए लंबा संघर्ष करना पड़ा।
पानी, पर्यावरण और बुनियादी सुविधाओं पर निशाना
राहुल गांधी ने इंदौर समेत कई राज्यों में दूषित पानी से हो रही मौतों और बीमारियों का मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि गुजरात, हरियाणा और दिल्ली जैसे राज्यों में भी काले और जहरीले पानी की शिकायतें सामने आ रही हैं, जिससे आम जनता का स्वास्थ्य खतरे में है। इसके अलावा राजस्थान की अरावली पर्वतमाला का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों का अंधाधुंध दोहन किया जा रहा है, जहां नियमों को ताक पर रखकर पहाड़ और जंगल काटे जा रहे हैं।
भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप
कांग्रेस नेता ने सरकारी अस्पतालों, स्कूलों और बुनियादी ढांचे की स्थिति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि बच्चों की मौतें, सरकारी अस्पतालों में अव्यवस्था, स्कूलों की गिरती इमारतें, पुल और सड़क हादसे महज लापरवाही नहीं बल्कि भ्रष्टाचार का नतीजा हैं। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि ऐसी घटनाओं के बाद सरकार की प्रतिक्रिया केवल औपचारिकताओं तक सीमित रह जाती है।
अपने बयान के अंत में राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को घेरते हुए कहा कि भाजपा का ‘डबल इंजन’ आम जनता के लिए नहीं बल्कि चुनिंदा लोगों के फायदे के लिए चल रहा है और यह सरकार विकास नहीं, बल्कि तबाही की रफ्तार बन चुकी है।
राज ठाकरे का बीजेपी पर बड़ा हमला, मुंबई को लेकर जताई साजिश की आशंका
मुंबई। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे ने भारतीय जनता पार्टी पर कड़ा हमला बोलते हुए केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मुंबई को महाराष्ट्र से अलग करने की सोच रखने वाली ताकतें आज सत्ता में हैं और यदि नगर निकायों पर भी उनका नियंत्रण हो गया, तो मराठी मानूस के अधिकार और अस्तित्व को गंभीर खतरा पैदा हो जाएगा।
राज ठाकरे और शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे का संयुक्त साक्षात्कार का पहला भाग गुरुवार को शिवसेना के मुखपत्र ‘सामना’ में प्रकाशित हुआ। साक्षात्कार में राज ठाकरे ने कहा कि दोनों चचेरे भाई किसी राजनीतिक मजबूरी के कारण नहीं, बल्कि महाराष्ट्र और मराठी अस्मिता की रक्षा के उद्देश्य से एक मंच पर आए हैं।
नगर निकायों पर नियंत्रण को बताया अहम
साक्षात्कार में राज ठाकरे ने कहा कि राज्य के बाहर से आने वाले लोग अब केवल रोजगार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे अपने अलग राजनीतिक और निर्वाचन क्षेत्र भी बना रहे हैं। उन्होंने इसे मुंबई को महाराष्ट्र से अलग करने की पुरानी सोच से जोड़ते हुए कहा कि यह घाव आज भी भरा नहीं है। उन्होंने दावा किया कि मौजूदा हालात संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन के दौर जैसे बनते जा रहे हैं।
राज ठाकरे ने स्पष्ट कहा कि यदि भाजपा नगर निगमों पर नियंत्रण कर लेती है, तो मराठी मानूस के पास अपने हक की लड़ाई लड़ने के लिए बहुत कम विकल्प बचेंगे। उन्होंने मुंबई, पुणे, ठाणे, नासिक, मीरा-भायंदर, कल्याण-डोंबिवली और छत्रपति संभाजीनगर जैसे प्रमुख शहरों के नगर निकायों पर नियंत्रण को जरूरी बताया।
राज्य सरकार पर उद्धव ठाकरे का हमला
उद्धव ठाकरे ने राज्य सरकार की विकास नीति पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा विकास की बात तो करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर यह “बिना योजना का विकास” है, जो प्रगति के बजाय नुकसान पहुंचा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार को खुद यह स्पष्ट नहीं है कि वह क्या चाहती है और सत्ता में बैठे लोग मुंबई और मराठी जनता से कटे हुए हैं।
मादक पदार्थों के मुद्दे पर भी सवाल
राज ठाकरे ने राज्य में बढ़ते मादक पदार्थों के खतरे को लेकर भी सरकार को घेरा। उन्होंने दावा किया कि नशीली दवाओं के खिलाफ कार्रवाई कमजोर पड़ गई है और तस्करी पर प्रभावी नियंत्रण नहीं रह गया है। साथ ही उन्होंने राजनीति में धन के बढ़ते प्रभाव और नशे के प्रसार के बीच संबंध की जांच की जरूरत पर जोर दिया।
जयराम रमेश बोले—भारत-पाक तनाव पर चीन की मध्यस्थता का दावा चिंताजनक
नई दिल्ली। भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव कम कराने को लेकर चीन द्वारा किए गए मध्यस्थता के दावे पर सियासी घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस ने इन बयानों को गंभीर और चिंताजनक बताते हुए केंद्र सरकार से इस पर स्पष्ट जवाब देने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि ऐसे संवेदनशील मुद्दे पर चुप्पी देश की सुरक्षा से जुड़े सवाल खड़े करती है।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस मामले में स्थिति साफ करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि चीन जैसे देश, जो खुले तौर पर पाकिस्तान का समर्थन करता रहा है, उसके द्वारा भारत-पाक संबंधों में मध्यस्थता का दावा करना राष्ट्रीय हितों के खिलाफ है और इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता।
सरकार की चुप्पी पर कांग्रेस का सवाल
जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर जारी बयान में कहा कि इससे पहले अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी यह दावा कर चुके हैं कि उन्होंने मई 2025 में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को रोकने में भूमिका निभाई थी। कांग्रेस का आरोप है कि प्रधानमंत्री ने अब तक इन दावों पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी। अब चीन के विदेश मंत्री द्वारा इसी तरह का बयान सामने आने से स्थिति और गंभीर हो गई है।
कांग्रेस नेता ने यह भी याद दिलाया कि चार जुलाई 2025 को भारतीय सेना के उप प्रमुख राहुल सिंह ने स्पष्ट रूप से कहा था कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भारत को चीन की ओर से रणनीतिक चुनौती का सामना करना पड़ा था। ऐसे में चीन द्वारा मध्यस्थता का दावा कई सवाल खड़े करता है।
ऑपरेशन सिंदूर और चीन की भूमिका पर उठे सवाल
कांग्रेस ने कहा कि चीन की पाकिस्तान के प्रति झुकी हुई नीति जगजाहिर है। ऐसे में भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव कम कराने में उसकी भूमिका का दावा न सिर्फ विरोधाभासी है, बल्कि यह देशवासियों को दिए गए भरोसे के भी खिलाफ है। पार्टी ने आरोप लगाया कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दे को हल्के में लेने जैसा है।
जयराम रमेश ने भारत-चीन संबंधों का जिक्र करते हुए कहा कि 2020 में चीन को लेकर दिए गए बयानों से भारत की कूटनीतिक स्थिति कमजोर हुई है। उन्होंने कहा कि आज भारत का व्यापार घाटा बढ़ा हुआ है और कई क्षेत्रों में चीन पर निर्भरता बनी हुई है। ऐसे हालात में यह जानना जरूरी है कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को रोकने में चीन की कथित भूमिका क्या थी।
क्या है चीन का दावा
गौरतलब है कि चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने हाल ही में कहा था कि भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव कम करना चीन की इस साल की कूटनीतिक सफलताओं में शामिल है। इस बयान के बाद भारतीय राजनीति में तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
भारत का आधिकारिक रुख
भारत सरकार लगातार यह स्पष्ट करती रही है कि मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच उत्पन्न हालात दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों के बीच सीधी बातचीत से सुलझाए गए थे। नई दिल्ली का स्पष्ट मत है कि भारत-पाकिस्तान से जुड़े मामलों में किसी भी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता स्वीकार्य नहीं है।
बंगाल चुनाव से पहले गरमाई सियासत , अमित शाह ने टीएमसी पर साधा निशाना
कोलकाता। पश्चिम बंगाल में प्रस्तावित विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक माहौल तेजी से गरमाता जा रहा है। राज्य में सभी प्रमुख दल रणनीति बनाने में जुटे हैं, वहीं आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी तेज हो गया है। इसी क्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कोलकाता में आयोजित प्रेस वार्ता में राज्य की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर तीखा हमला बोला। शाह ने घुसपैठ, भ्रष्टाचार, प्रशासनिक विफलता और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों को लेकर राज्य सरकार को कटघरे में खड़ा किया।
घुसपैठ चुनाव का सबसे बड़ा मुद्दा बनेगा— अमित शाह
अमित शाह ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी राजनीतिक फायदे के लिए बांग्लादेश से हो रही अवैध घुसपैठ को नजरअंदाज कर रही हैं। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा सीमा पर बाड़ लगाने के लिए जमीन उपलब्ध नहीं कराई जा रही, जिसके कारण घुसपैठ पर प्रभावी रोक नहीं लग पा रही है। शाह ने स्पष्ट किया कि वर्ष 2026 का विधानसभा चुनाव घुसपैठ रोकने और सीमा सुरक्षा जैसे मुद्दों पर लड़ा जाएगा।
टीएमसी शासन में भय और भ्रष्टाचार का माहौल— शाह
गृह मंत्री ने दावा किया कि पिछले 15 वर्षों में टीएमसी शासन के दौरान पश्चिम बंगाल में भ्रष्टाचार, डर और प्रशासनिक अराजकता बढ़ी है। उन्होंने कहा कि आम नागरिक खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं और विकास कार्य ठप पड़े हैं। शाह ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की जनकल्याणकारी योजनाएं राज्य में ‘टोल सिंडिकेट’ और भ्रष्ट तंत्र की भेंट चढ़ रही हैं, जिससे गरीब और जरूरतमंद वर्ग को लाभ नहीं मिल पा रहा।
सीमा पर बाड़बंदी में अड़चन का आरोप
अमित शाह ने कहा कि भारत-बांग्लादेश सीमा पर सुरक्षा बाड़ लगाने के लिए केंद्र सरकार पूरी तरह तैयार है, लेकिन राज्य सरकार जमीन उपलब्ध नहीं करा रही। उन्होंने सवाल उठाया कि जब त्रिपुरा, असम, राजस्थान, पंजाब, जम्मू-कश्मीर और गुजरात में घुसपैठ पर काफी हद तक नियंत्रण हो चुका है, तो केवल पश्चिम बंगाल में यह समस्या क्यों बनी हुई है।
शाह ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार की जानकारी में ही अवैध घुसपैठ हो रही है और इसका उद्देश्य जनसंख्या संतुलन बदलकर वोट बैंक को मजबूत करना है। उन्होंने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय बताया।
ममता बनर्जी को लिखे सात पत्र— शाह
एक सवाल के जवाब में गृह मंत्री ने बताया कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को सात पत्र लिखे हैं, लेकिन अब तक जमीन देने को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। उन्होंने कहा कि गृह सचिव समेत केंद्रीय अधिकारियों की कई बैठकों के बावजूद समाधान नहीं निकला। शाह ने यह भी आरोप लगाया कि राज्य सरकार घुसपैठियों के फर्जी दस्तावेज तैयार करा रही है, जिससे समस्या और गंभीर होती जा रही है।
2026 में भाजपा सरकार बनने का दावा
अमित शाह ने दावा किया कि 2026 के विधानसभा चुनाव में भाजपा पश्चिम बंगाल में दो-तिहाई बहुमत के साथ सरकार बनाएगी। उन्होंने भाजपा के बढ़ते जनाधार का हवाला देते हुए कहा कि पार्टी ने पिछले एक दशक में राज्य में लगातार मजबूती हासिल की है। उन्होंने विभिन्न चुनावों के आंकड़े गिनाते हुए कहा कि भाजपा का वोट शेयर और सीटें लगातार बढ़ी हैं, जबकि कांग्रेस और वाम दल हाशिये पर चले गए हैं।
संस्कृति और विकास को नई दिशा देने का वादा
शाह ने कहा कि भाजपा की सरकार बनने के बाद पश्चिम बंगाल की सांस्कृतिक विरासत को संजोने और विकास को नई गति देने का काम किया जाएगा। उन्होंने कहा कि बंगाल भाजपा के लिए ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि पार्टी के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का इस धरती से गहरा नाता रहा है।
गृह मंत्री ने भरोसा दिलाया कि भाजपा सरकार गरीबों के कल्याण, कानून-व्यवस्था सुधार और घुसपैठ पर सख्त नियंत्रण को प्राथमिकता देगी। उन्होंने कहा कि भाजपा बंगाल में बदलाव, सुरक्षा और विकास का नया अध्याय लिखना चाहती है।
अरावली विवाद पर भूपेंद्र यादव का पलटवार, कांग्रेस के आरोप किए खारिज
नई दिल्ली। अरावली पर्वतमाला को लेकर चल रहे सियासी विवाद के बीच केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने कांग्रेस के आरोपों पर तीखा पलटवार किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पहाड़ियों की परिभाषा में बदलाव से अरावली का कोई हिस्सा संरक्षण से बाहर नहीं होगा और कांग्रेस द्वारा फैलाया जा रहा भ्रम तथ्यों से परे है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे पर इसलिए असहज है क्योंकि केंद्र सरकार ने गुजरात से लेकर दिल्ली तक पूरी अरावली पर्वतमाला में खनन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी वैज्ञानिक या आधिकारिक अध्ययन में यह साबित नहीं होता कि नई परिभाषा से अरावली के 90 प्रतिशत हिस्से को नुकसान पहुंचेगा।
दरअसल, कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया था कि पर्वतीय श्रृंखलाओं की परिभाषा में बदलाव से अरावली क्षेत्र का बड़ा हिस्सा संरक्षण के दायरे से बाहर चला जाएगा, जिससे खनन और अन्य गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए भूपेंद्र यादव ने कहा कि भारतीय वन सर्वेक्षण (FSI) के किसी भी अध्ययन में ऐसे दावों की पुष्टि नहीं होती है।
भूपेंद्र यादव ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि अगर विपक्ष पर्यावरण संरक्षण को लेकर वास्तव में गंभीर होता, तो उसे यह भी बताना चाहिए कि अरावली क्षेत्र को सबसे ज्यादा नुकसान किसके शासनकाल में हुआ। उन्होंने कांग्रेस नेताओं से सवाल किया कि वे अपने ही दल के वरिष्ठ नेताओं से अरावली के क्षरण को लेकर जवाब क्यों नहीं मांगते।
केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि सरकार अरावली पर्वतमाला को संरक्षित और पुनर्जीवित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती सरकारों के दौरान इस क्षेत्र में अवैध खनन और अंधाधुंध गतिविधियों से भारी नुकसान हुआ, जिसकी भरपाई अब की जा रही है।
गौरतलब है कि हाल ही में पहाड़ियों की नई परिभाषा तय की गई है, जिसके अनुसार किसी क्षेत्र को पहाड़ी तब माना जाएगा जब उसकी ऊंचाई आसपास के भूभाग से कम से कम 100 मीटर अधिक हो। वहीं, अरावली पर्वतमाला को दो या उससे अधिक ऐसी पहाड़ियों के समूह के रूप में परिभाषित किया गया है, जो 500 मीटर के दायरे में स्थित हों। विवाद बढ़ने के बाद केंद्र सरकार ने राज्यों को निर्देश जारी करते हुए अरावली क्षेत्र में नए खनन पट्टों पर पूरी तरह रोक लगाने का आदेश दिया है।
पीएम मोदी के असम दौरे पर सियासी घमासान, कांग्रेस ने उठाए सवाल
गुवाहाटी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया असम दौरे के बाद सियासी बयानबाज़ी तेज हो गई है। असम कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई ने प्रधानमंत्री के भाषणों पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि उनके संबोधनों में कांग्रेस पर हमलों के साथ-साथ इतिहास की घटनाओं को अपने दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया गया। गोगोई ने कहा कि यह तरीका न सिर्फ विवाद को जन्म देता है, बल्कि असम की भावनाओं को भी आहत करता है।
भाषणों की विषयवस्तु पर उठाए सवाल
कांग्रेस नेता का कहना है कि प्रधानमंत्री ने अपने भाषणों में आज़ादी से पहले असम को लेकर हुई घटनाओं का उल्लेख करते हुए कांग्रेस की भूमिका पर आरोप लगाए, जो ऐतिहासिक तथ्यों को एकतरफा ढंग से पेश करने जैसा है। गोगोई ने कहा कि इतिहास को राजनीतिक बहस का हथियार नहीं बनाया जाना चाहिए।
जुबीन गर्ग को लेकर जताई नाराज़गी
गोगोई ने असम के लोकप्रिय गायक जुबीन गर्ग का जिक्र करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने उनके निधन पर सार्वजनिक रूप से संवेदना व्यक्त नहीं की। उन्होंने कहा कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने न सिर्फ श्रद्धांजलि दी, बल्कि परिवार से मुलाकात कर न्याय की मांग भी उठाई। कांग्रेस के अनुसार, इससे असम के लोगों की भावनाओं की अनदेखी का संदेश गया।
संवेदना से अधिक आयोजनों पर जोर का आरोप
कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री का दौरा अधिकतर औपचारिक आयोजनों और बड़े मंचीय कार्यक्रमों तक सीमित रहा। उनका कहना है कि आम लोगों के दुख-दर्द और भावनाओं को पर्याप्त स्थान नहीं मिला, जिससे जनता में निराशा देखने को मिली।
मणिपुर का उदाहरण भी सामने रखा
गोगोई ने मणिपुर की स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां के लोगों ने भी पहले ऐसे ही अनुभव साझा किए थे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने हिंसा प्रभावित इलाकों का दौरा कर पीड़ितों से सीधे मुलाकात की, जबकि केंद्र सरकार की ओर से अपेक्षित संवेदनशीलता नहीं दिखी।
पूर्वोत्तर के सम्मान की बात
कांग्रेस नेता ने कहा कि पूर्वोत्तर भारत केवल राजनीतिक नारे का विषय नहीं, बल्कि उसकी अपनी संस्कृति, परंपराएं और संघर्ष हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि जो भी दल या नेता इन मूल्यों का सम्मान करेगा, उसे ही जनता का समर्थन मिलेगा। प्रधानमंत्री का असम दौरा बीते सप्ताहांत हुआ था, जिसके बाद से यह सियासी बहस जारी है।
केंद्र सरकार की नीतियां अल्पसंख्यकों में असुरक्षा की भावना पैदा कर रही- एमके स्टालिन
तिरुनेलवेली। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला है। तिरुनेलवेली में एक क्रिसमस कार्यक्रम के अवसर पर मुख्यमंत्री ने भाजपा पर संविधान की मूल भावना के खिलाफ काम करने का आरोप लगाया और कहा कि पार्टी देश की विविधता और धर्मनिरपेक्ष मूल्यों को कमजोर करना चाहती है।
मुख्यमंत्री स्टालिन ने कहा कि भारत की पहचान उसकी बहुलता और सांस्कृतिक विविधता से है, लेकिन कुछ ताकतें इसे खत्म करने की दिशा में काम कर रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा को संविधान में निहित ‘धर्मनिरपेक्ष’ शब्द से आपत्ति है और वह इसे हटाने की मंशा रखती है। स्टालिन ने कहा कि तमिलनाडु की जनता ऐसी राजनीति को स्वीकार नहीं करेगी।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने 19वीं सदी की ईसाई मिशनरी साराह टकर के योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने दक्षिणी तमिलनाडु में महिलाओं की शिक्षा के क्षेत्र में ऐतिहासिक भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि साराह टकर कॉलेज जैसे संस्थानों ने हजारों महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का अवसर दिया और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का काम किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि डीएमके सरकार सभी समुदायों के साथ समान व्यवहार में विश्वास रखती है और अल्पसंख्यकों के कल्याण को प्राथमिकता देती है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार द्वारा अल्पसंख्यक समुदायों के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। ईसाई समुदाय के लिए किए गए विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए उन्होंने चर्चों के निर्माण और उनके पुनर्निर्माण जैसे प्रयासों की जानकारी भी दी।
स्टालिन ने कहा कि डीएमके सरकार का विकास मॉडल समानता और सामाजिक न्याय के सिद्धांतों पर आधारित है, जिसमें हर व्यक्ति की बुनियादी जरूरतों का ध्यान रखा जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की नीतियां अल्पसंख्यकों में असुरक्षा की भावना पैदा कर रही हैं।
मुख्यमंत्री ने चेतावनी देते हुए कहा कि कुछ राजनीतिक दल देश को एकरूपता की ओर ले जाना चाहते हैं, जहां एक भाषा, एक धर्म और एक विचारधारा को थोपने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु में इस तरह के प्रयासों को कभी सफल नहीं होने दिया जाएगा और डीएमके संविधान, धर्मनिरपेक्षता और सामाजिक सद्भाव की रक्षा के लिए पूरी मजबूती से खड़ी रहेगी।
बीजेपी का गंभीर आरोप—भारत की छवि बिगाड़ने के लिए कांग्रेस ले रही विदेशी ताकतों का सहारा
नई दिल्ली। भाजपा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कांग्रेस पर विदेश से संचालित सोशल मीडिया अकाउंट्स के जरिए भारत की छवि धूमिल करने का गंभीर आरोप लगाया। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि 2014 से अब तक कांग्रेस और उससे जुड़े कुछ प्रमुख नेता देश के प्रधानमंत्री और भारतीय लोकतंत्र को निशाना बनाने के लिए लगातार विदेशी मंचों और बाहरी प्रभावों का सहारा ले रहे हैं।
पात्रा के अनुसार, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X में हाल ही में आए लोकेशन फीचर से कई कांग्रेस नेताओं के अकाउंट विदेशों से संचालित होते दिखे हैं। उन्होंने दावा किया कि पवन खेड़ा का अकाउंट अमेरिका, महाराष्ट्र कांग्रेस का आयरलैंड और हिमाचल कांग्रेस का अकाउंट थाईलैंड से जुड़ा हुआ दिखाई देता है। पात्रा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस विदेशों से नैरेटिव सेट करके भारत की राजनीतिक छवि को नुकसान पहुँचाने का प्रयास कर रही है।
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि कांग्रेस नेता विदेश जाकर केवल बयानबाज़ी ही नहीं करते, बल्कि विदेशों में बैठी टीमों के जरिए भारत के खिलाफ माहौल तैयार करने की रणनीति भी बनाई जाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि “वोट चोरी”, “ऑपरेशन सिंदूर” और प्रधानमंत्री व सेना को कमजोर दिखाने जैसी कथित ऑनलाइन कैंपेन विदेशी लोकेशन से संचालित हुए, जिनमें पाकिस्तान, बांग्लादेश, पश्चिम एशिया और यूरोप में बैठे लोग शामिल बताए गए।
पात्रा ने कहा कि संघ, सरकार और प्रधानमंत्री को बदनाम करने का अभियान भी विदेश से चलाया गया और कांग्रेस इससे पीछे नहीं हट रही है, चाहे इसके लिए उसे किसी भी विदेशी ताकत का सहारा क्यों न लेना पड़े।
बाबरी मस्जिद की नींव रखने के दावे पर भाजपा ने लगाया तुष्टिकरण का आरोप
कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति एक बार फिर गर्मा गई है। टीएमसी के एक विधायक द्वारा मुर्शिदाबाद के बेलडांगा में 6 दिसंबर को बाबरी मस्जिद की नींव रखने का दावा सामने आने के बाद प्रदेश में सियासी टकराव तेज हो गया है। विधायक की घोषणा के बाद भाजपा ने तीखी आपत्ति जताते हुए इसे तुष्टिकरण की राजनीति करार दिया है।
टीएमसी के भरतपुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक हुमायूं कबीर ने कहा है कि 6 दिसंबर को बाबरी मस्जिद के पुनर्निर्माण की आधारशिला रखी जाएगी, जिसमें बड़ी संख्या में लोग और कई प्रमुख शख्सियतें शामिल होंगी। उन्होंने दावा किया कि मस्जिद का निर्माण लगभग तीन वर्षों में पूरा होगा। कबीर के इस बयान ने बंगाल की राजनीतिक सरगर्मी बढ़ा दी है।
भाजपा ने तत्काल इस ऐलान पर कड़ा विरोध जताया। भाजपा सांसद ज्योतिर्मय सिंह महतो ने कहा कि बाबर एक विदेशी हमलावर था और उसके नाम पर किसी भी प्रकार का निर्माण स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने यहां तक कहा कि यदि मस्जिद निर्माण की कोशिश हुई तो भाजपा उस स्थान पर राम मंदिर की स्थापना की मांग करेगी।
भाजपा नेताओं ने टीएमसी पर वोट बैंक की राजनीति करने का आरोप लगाया। पार्टी प्रवक्ता अग्निमित्रा पॉल का कहना है कि किसी भी धार्मिक स्थल के निर्माण पर उन्हें आपत्ति नहीं, लेकिन टीएमसी इसे राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है। वहीं भाजपा नेता राहुल सिन्हा ने कहा कि मस्जिद या मंदिर का निर्माण उचित स्थान पर होना चाहिए और इसका राजनीतिकरण कर समुदाय विशेष को गुमराह नहीं किया जाना चाहिए।
कांग्रेस ने भी इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी। कांग्रेस नेता अजय कुमार लल्लू ने कहा कि उनकी पार्टी हमेशा रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और समानता के मुद्दों पर राजनीति करती है और चुनाव भी इन्हीं मुद्दों पर लड़े जाने चाहिए। कांग्रेस सांसद उदित राज ने कहा कि मंदिर की नींव रखी जा सकती है तो मस्जिद की रखे जाने में कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए, और इस विषय को बेवजह विवाद का रूप दिया जा रहा है।
इधर, 6 दिसंबर को टीएमसी द्वारा कोलकाता में एक बड़ी रैली आयोजित करने की तैयारी है, जिसे ‘समहति दिवस’ नाम दिया गया है। यह रैली आमतौर पर पार्टी का अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ आयोजित करता है, लेकिन इस बार इसकी जिम्मेदारी छात्र और युवा विंग को सौंपी गई है। संभावना है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी इसमें संबोधित करेंगे।
राज्य में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं और इस बीच एसआईआर (Special Summary Revision) को लेकर पहले से ही तनाव बढ़ा हुआ है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण को धांधली बताया और चेतावनी दी कि वैध मतदाताओं के नाम हटे तो इसके गंभीर राजनीतिक परिणाम होंगे। ऐसे में बाबरी मस्जिद मुद्दा भी आगामी चुनावी माहौल पर बड़ा प्रभाव डाल सकता है।
