कांग्रेस और राहुल गांधी देश को कमजोर करने वाली ताकतों के साथ खड़े हैं – केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू
रिजिजू का राहुल गांधी पर तीखा हमला, कहा- ‘खतरनाक रास्ते पर चल रहे हैं कांग्रेस नेता’
नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष और खासतौर पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के बयानों से उनकी ही पार्टी असहज हो जाती है और डरती है कि कहीं उनके बयान कांग्रेस को नुकसान न पहुंचा दें। रिजिजू ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी देश को कमजोर करने वाली ताकतों के साथ खड़े हो रहे हैं और बेहद खतरनाक रास्ते पर जा रहे हैं।
केंद्रीय मंत्री ने दावा किया कि जॉर्ज सोरोस जैसे अंतरराष्ट्रीय तत्व भारत सरकार को अस्थिर करने के लिए एक ट्रिलियन डॉलर तक खर्च करने की बात करते हैं। कनाडा, अमेरिका, ब्रिटेन और कई वामपंथी संगठनों में सक्रिय भारत विरोधी खालिस्तानी ताकतें देश के खिलाफ साजिश रच रही हैं। रिजिजू ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और राहुल गांधी इन ताकतों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं, हालांकि उन्होंने भरोसा दिलाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश पूरी तरह सुरक्षित है।
विधेयक पर चर्चा
प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्रियों और गंभीर आरोपों में घिरे मंत्रियों को हटाने से संबंधित विधेयक पर रिजिजू ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने खुद को भी किसी छूट से बाहर रखा है। उन्होंने कहा कि अगर विपक्ष वास्तव में नैतिकता को प्राथमिकता देता तो इस विधेयक का समर्थन करता।
संसद में गतिरोध पर हमला
रिजिजू ने विपक्ष पर संसद ठप करने का आरोप लगाया और कहा कि अगर सदन नहीं चलता तो इसका नुकसान विपक्ष को होगा। उन्होंने कहा, “कांग्रेस को संसदीय चर्चा में कोई रुचि नहीं है। कई सांसद शिकायत करते हैं कि हंगामे के कारण वे अपने क्षेत्रों की समस्याएं नहीं उठा पा रहे हैं।”
‘मेरा गला भी बैठ गया’
संसद में विपक्ष के शोर-शराबे को लेकर रिजिजू ने हल्के अंदाज में कहा, “मेरा गला भी बैठ गया है। विपक्ष को बार-बार चिल्लाकर काम करने की अपील करनी पड़ रही है।” उन्होंने कहा कि संसदीय लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका सवाल पूछने की होती है, लेकिन कांग्रेस इस बुनियादी जिम्मेदारी को भी निभाने में नाकाम है।
राहुल गांधी पर दोबारा निशाना
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट भी राहुल गांधी को उनकी गैर-जिम्मेदाराना टिप्पणियों पर फटकार लगा चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी के बयान न सिर्फ गलत साबित होते हैं, बल्कि उनकी पार्टी भी इससे शर्मिंदगी उठाती है। रिजिजू ने कहा, “लोकतंत्र में विपक्ष मजबूत होना चाहिए, लेकिन राहुल गांधी एक मजबूत विपक्ष तो दूर, बुनियादी कर्तव्यों को भी निभा नहीं पा रहे हैं।”
बिहार में मतदाता सूची विवाद पर सियासी तापमान बढ़ा
बिहार। बिहार में भारत निर्वाचन आयोग द्वारा चलाए जा रहे मतदाताओं के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर सियासी हंगामा बढ़ता जा रहा है। विपक्षी दल इस कदम को लेकर विरोध कर रहे हैं और आरोप लगा रहे हैं कि वोटरों के नाम हटाए जा रहे हैं। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी बिहार दौरे पर हैं और उन्होंने तेजस्वी यादव समेत अन्य विपक्षी नेताओं के साथ इस मुद्दे पर जमकर विरोध किया।
वहीं, भाजपा ने स्पष्ट किया है कि देश का नागरिक नहीं होने वाले लोगों को मतदाता सूची से हटाना उचित है। इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिहार में एक जनसभा को संबोधित करते हुए इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि एनडीए सरकार ने तय किया है कि देश का भविष्य घुसपैठियों से प्रभावित नहीं होगा और युवाओं का भविष्य सुरक्षित रहेगा।
गयाजी में लोगों को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि घुसपैठियों की बढ़ती संख्या देश के लिए चिंता का विषय है। सीमावर्ती इलाकों की डेमोग्राफी बदल रहा है। एनडीए सरकार जल्द ही डेमोग्राफी मिशन की शुरुआत करने जा रही है। कांग्रेस और राजद जैसे दल बिहार के गरीबों का हक छीनकर घुसपैठियों को देना चाहते हैं। यह सब वह वोटबैंक और तुष्टिकरण के लिए कर रहे हैं। उन्हें बिहार की कोई परवाह नहीं है। इसलिए लगातार सरकार का विरोध कर रहे हैं। लेकिन, हमलोगों को राजद और कांग्रेस की बुरी नजर से बिहार को बचाना है।
पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि हम घुसपैठियों को बिहार के युवाओं का रोजगार नहीं छीनने देंगे। जिन सुविधाओं पर भारतीयों का अधिकार है। उसपर घुसपैठियों काे डाका नहीं डालने देंगे। बहुत जल्द डेमोग्राफी सर्वे का कार्य शुरू होगा। हम हर घुसपैठी को देश से बाहर करके रहेंगे। पीएम मोदी ने पूछा कि क्या घुसपैठिए आपका रोजगार छीन लें और आपकी जमीन पर कब्जा कर लें यह मंजूर है? कांग्रेस और राजद ने बिहार के लोगों का हक छीनकर घुसपैठियों को देना चाहते हैं। एनडीए को हराने के लिए कांग्रेस-राजद कितना भी नीचे जा सकते हैं। इसलिए बिहार के लोगों को सतर्क रहने की जरुरत है। हमें बिहार को कांग्रेस-राजद की बुरी नजर से बचाकर रखना है। बिहार के लिए यह समय बेहद खास है। बिहार के लोगों के सपने पूरे हो। यहां के लोगों की उम्मीदों को नई उड़ान मिले। इसके लिए डबल इंजन की सरकार लगातार मेहनत कर रही है। आज का कार्यक्रम इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। मैं एक बार फिर इन परियोजनाओं के लिए बिहार को बहुत-बहुत बधाई देता हूं।
भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने राहुल गांधी के चुनाव आयोग पर लगाये आरोपों को बताया निराधार और भ्रामक
नई दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा चुनाव आयोग पर लगाए गए आरोपों पर भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने बुधवार को कड़ा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और उसके नेता चुनावी हार के बाद हमेशा नए बहाने ढूंढते हैं। ठाकुर ने तंज कसते हुए कहा, “कल कुछ कांग्रेस के लोग कह रहे थे कि राहुल गांधी और विपक्ष के नेताओं ने बवंडर खड़ा किया। बवंडर नहीं, ब्लंडर है। धूल चेहरे पर थी और आप आईना साफ करते रहे।”
भाजपा सांसद ने दावा किया कि राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस 90 से अधिक चुनाव हार चुकी है। “जब भी हार मिलती है, कांग्रेस कभी ईवीएम पर सवाल उठाती है, कभी मतदाताओं को दोषी ठहराती है। पहले कहा कि भाजपा के लिए ईवीएम में हेरफेर हुई, फिर कहा ईवीएम पर प्रतिबंध लगाओ, और अब दावा करते हैं कि मशीनों को रिमोट से हैक किया जा सकता है,”।
ठाकुर ने कांग्रेस पर इतिहास से उदाहरण देते हुए भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि 1952 के पहले आम चुनाव में कांग्रेस और सीपीआई ने मिलकर संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर को चुनाव में हराया था। “74,333 वोट खारिज हुए और अंबेडकर जी सिर्फ 14,561 वोट से हारे। कांग्रेस ने पहले ही चुनाव में चुनावी भ्रष्टाचार की नींव रखी थी,”।
भाजपा नेता ने कांग्रेस परिवार पर चुनाव आयोग और मतदाताओं को बदनाम करने की पुरानी परंपरा का आरोप लगाया। “इंदिरा गांधी ने मतदाताओं को मूर्ख कहा, राजीव गांधी ने बैलेट पेपर को दोष दिया, और अब राहुल गांधी कभी ईवीएम, कभी बैलेट पेपर की बात करते हैं,”।
ममता बनर्जी पर भी हमला बोलते हुए ठाकुर ने याद दिलाया कि 2005 में उन्होंने लोकसभा में दस्तावेज फेंककर आरोप लगाया था कि मतदाता सूची में अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों के नाम हैं। “अब जब हम उस गड़बड़ी को दूर कर रहे हैं, तो वह बाधाएं खड़ी कर रही हैं। सवाल यह है कि वह तब झूठ बोल रही थीं या अब?” ठाकुर ने पूछा।
संविधान पर संघ के बयान के बीच थरूर बोले– अब बदल चुका है RSS
थरूर के बयान से पार्टी के भीतर उठे सवाल
नई दिल्ली। देश में संविधान को लेकर छिड़ी राजनीतिक बहस के बीच कांग्रेस सांसद शशि थरूर के ताज़ा बयान ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चा को जन्म दे दिया है। थरूर ने कहा है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) अब पहले जैसे नहीं रहे और संभवतः वे अपनी पुरानी विचारधारा से आगे बढ़ चुके हैं। यह बयान ऐसे समय आया है जब कांग्रेस और विपक्षी दल लगातार आरएसएस-बीजेपी पर संविधान की मूल आत्मा से छेड़छाड़ के आरोप लगा रहे हैं।
सेक्युलर और सोशलिस्ट शब्दों को हटाने पर बवाल
हाल ही में आरएसएस के महासचिव दत्तात्रेय होसबाले ने संविधान की प्रस्तावना से ‘सेक्युलर’ और ‘सोशलिस्ट’ जैसे शब्दों को हटाने की पैरवी की थी। इस बयान के बाद राजनीतिक प्रतिक्रिया तेज हो गई। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर निशाना साधते हुए कहा कि आरएसएस और बीजेपी ‘संविधान नहीं, मनुस्मृति चाहते हैं’ और वे बहुजन व वंचित वर्गों से उनके अधिकार छीनना चाहते हैं।
थरूर की टिप्पणी: संतुलन या विचलन?
राहुल गांधी के तीखे बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए शशि थरूर ने मीडिया से बातचीत में कहा कि राहुल गांधी एक ऐतिहासिक तथ्य की ओर इशारा कर रहे थे। थरूर ने कहा, “संविधान निर्माण के समय गोलवलकर जैसे नेताओं ने मनुस्मृति की झलक न होने को दुर्भाग्यपूर्ण बताया था, लेकिन मेरा मानना है कि आरएसएस अब उस सोच से आगे निकल चुका है। हालांकि उनकी मौजूदा सोच क्या है, यह वही स्पष्ट कर सकते हैं।”
पार्टी के भीतर मतभेद की आहट
थरूर की टिप्पणी कांग्रेस के भीतर ही असहमति का कारण बन गई है। पार्टी सांसद सुखदेव भगत ने कहा कि जब आरएसएस खुद संविधान के मूल शब्दों को हटाने की बात कर रहा है, तब थरूर का रुख भ्रम पैदा करने वाला है। उन्होंने तंज भरे लहजे में कहा, “थरूर जी का सम्मान है, लेकिन यह बयान सियासी बहानेबाज़ी की तरह लगता है, जो मुद्दे को भटका सकता है।”
राजनीतिक रणनीति पर उठे सवाल
विश्लेषकों के अनुसार, थरूर ने जहां एक ओर ऐतिहासिक सच्चाई को स्वीकार किया, वहीं सीधे तौर पर आरएसएस-बीजेपी पर हमला करने से बचने की कोशिश की। कांग्रेस की आक्रामक रणनीति के बीच थरूर का यह ‘मध्यमार्गी रुख’ पार्टी के समन्वय और संदेश रणनीति पर सवाल खड़े करता है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि कांग्रेस नेतृत्व इस आंतरिक विरोधाभास को कैसे सुलझाता है और बीजेपी इस बयान को राजनीतिक हथियार के तौर पर कैसे भुनाती है।
उत्तराखंड विधानसभा सत्र के दूसरे दिन आज भू-कानून संशोधन सहित कई महत्वपूर्ण विधेयक सदन में प्रस्तुत किए जा सकते हैं। इसके अलावा, कुछ अन्य रिपोर्टों को भी सदन पटल पर रखने के प्रस्ताव आने की संभावना है।
बजट सत्र के दौरान बुधवार सुबह मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में कैबिनेट बैठक होगी, जिसमें भू-कानून में संशोधन सहित अन्य अहम प्रस्तावों पर चर्चा हो सकती है। राज्य सरकार भू-कानून को और सख्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है और इस सत्र में इससे जुड़ा विधेयक लाए जाने की संभावना है।
जनभावनाओं के अनुरूप फैसले का संकल्प
भू-कानून संशोधन को लेकर बनी अटकलों पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार जनभावनाओं के अनुरूप कार्य करेगी। उन्होंने कहा कि चाहे भू-कानून हो या अन्य कोई कानून या संकल्प, भाजपा सरकार जनता की अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
विपक्ष पर मुख्यमंत्री का तंज
मुख्यमंत्री धामी ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि एक ओर विपक्ष सत्र की अवधि बढ़ाने की मांग करता है, लेकिन जब सदन चलता है, तब सार्थक चर्चा से बचता है। उन्होंने कहा कि विपक्ष को सदन के समय का उत्पादक तरीके से उपयोग करना चाहिए, न कि हंगामे में बर्बाद करना चाहिए।
केदारनाथ उपचुनाव में बीजेपी के सिर सजा ताज..
उत्तराखंड: भारतीय जनता पार्टी बीजेपी ने उत्तराखंड का केदारनाथ विधानसभा सीट उपचुनाव जीत लिया हैं। उत्तराखंड के केदारनाथ विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव के नतीजों ने सभी को चौंका दिया है। हालांकि, राजनीतिक पार्टियों जहां एक ओर अपने-अपने प्रत्याशियों की जीत का दम भर रही थीं, तो वहीं नतीजे सामने आने के बाद अब राजनीतिक पार्टियां चुनाव का विश्लेषण करने पर जोर दे रही हैं। मंगलौर और बदरीनाथ विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में भाजपा को मिली हार के बाद धामी सरकार के नेतृत्व में भाजपा ने केदारनाथ उपचुनाव को भारी बहुमत से जीत लिया है। भाजपा प्रत्याशी आशा नौटियाल केदारनाथ उपचुनाव में बड़े अंतर से विजयी हुई हैं। ऐसे में भाजपा के उपचुनाव जीतने के क्या रहे हैं महत्वपूर्ण फैक्टर?
केदार घाटी में धार्मिक और मुस्लिम फैक्टर..
उत्तराखंड राज्य में धार्मिक और मुस्लिम फैक्टर का काफी असर देखा जा रहा है। हालांकि केदारनाथ विधानसभा सीट पर मुस्लिम मतदाताओं की संख्या ना के बराबर है। बावजूद इसके प्रदेश के तमाम हिस्सों में मुस्लिम फैक्टर का असर केदारनाथ विधानसभा सीट पर भी देखने को मिला है। यही वजह रही कि केदारनाथ विधानसभा सीट पर भाजपा को धार्मिक और मुस्लिम फैक्टर की वजह से काफी फायदा मिला है।
उपचुनाव से पहले धामी सरकार की तमाम बड़ी सौगातें..
केदारनाथ उपचुनाव की तिथियां का ऐलान होने से पहले ही धामी सरकार ने केदारनाथ विधानसभा क्षेत्र के लिए सौगातों का पिटारा खोल दिया था। 31 जुलाई को केदार घाटी में आई आपदा की वजह से करीब एक महीने तक केदारनाथ यात्रा प्रभावित रही थी। जिसके चलते धाम में सरकार ने स्थानीय व्यापारियों और लोगों को राहत पहुंचाने के लिए न सिर्फ पैकेज दिया, बल्कि केदारनाथ विधानसभा क्षेत्र के विकास के लिए तमाम योजनाओं को मंजूरी देते हुए वित्तीय स्वीकृति भी दी। ऐसे में भाजपा को केदारनाथ विधानसभा सीट पर मिली जीत में एक फैक्टर धामी सरकार की ओर से दी गई सौगातें और घोषणाएं भी मानी जा रही हैं।
केदारनाथ उपचुनाव में सरकार की मुस्तैदी..
केदारनाथ विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव के दौरान सरकार की काफी अधिक मुस्तादी क्षेत्र में देखने को मिली। बता दे कि मंगलौर और बद्रीनाथ विधानसभा सीट पर भाजपा को मिली करारी हार के बाद भाजपा केदारनाथ विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव को हारना नहीं चाहती थी। यही वजह थी कि भाजपा संगठन ने केदारनाथ उपचुनाव में न केवल पांच मंत्रियों को चुनाव की जिम्मेदारी दी, बल्कि तमाम नेताओं को भी धरातल पर काम करने के लिए भेजा।ताकि केदारनाथ उपचुनाव को हर हाल में बीजेपी जीत सके. कुल मिलाकर केदारनाथ विधानसभा क्षेत्र में सरकार की मुस्तैदी का असर रहा कि भाजपा ने केदारनाथ उपचुनाव को भारी बहुमत से जीत लिया है।
बता दे कि उत्तराखंड राज्य गठन के बाद इस साल जुलाई से पहले तक रूलिंग पार्टी का ही उपचुनाव को जीतने का रिकॉर्ड था। लेकिन जुलाई में हुए मंगलौर और बद्रीनाथ विधानसभा सीट उपचुनाव में रूलिंग पार्टी को हार का सामना करना पड़ा था। यही नहीं, इससे पहले भी एक दो विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव के नतीजे रूलिंग पार्टी के अपोजिट दिखाई दिए। हालांकि केदारनाथ विधानसभा क्षेत्र में रूलिंग पार्टी के चुनाव जीतने का फैक्टर देखने को मिला।दरअसल रूलिंग पार्टी के चुनाव जीतने से एक बड़ा फायदा यही होता है कि उस क्षेत्र में विकास के कार्य की गति और अधिक तेज हो जाती है।
पीएम मोदी की आस्था और विकास कार्यों पर सक्रियता..
केदारनाथ धाम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आस्था जुड़ी हुई है। यह बात केदार घाटी की जनता बखूबी जानती है. साल 2013 में केदार घाटी में आई भीषण आपदा के बाद केदार घाटी में पुनर्निर्माण के कार्यों को तेज गति से किया गया था। इसके साथ ही साल 2014 में मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद न सिर्फ केदार घाटी के लिए भारत सरकार ने कई बड़ी सौगातें दी हैं, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद समय-समय पर केदार घाटी में चल रहे विकास कार्यों का निरीक्षण भी करते रहे हैं। यही वजह रही कि उपचुनाव के दौरान भाजपा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बाबा केदार में आस्था और विकास कार्यों के प्रति सक्रियता को भी एक बड़ा मुद्दा बनाया, जिसका असर केदार घाटी में देखने को मिला।
भाजपा के ब्राह्मण कैंडिडेट का फैक्टर..
केदारनाथ उपचुनाव में भाजपा ने प्रदेश महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष आशा नौटियाल को प्रत्याशी बनाया। जिसका एक बड़ा फैक्टर यह था कि आशा नौटियाल ब्राह्मण हैं और केदारनाथ विधानसभा क्षेत्र में बड़ी तादाद में ब्राह्मण हैं। ऐसे में ब्राह्मण जाति के लोगों को टारगेट करने के लिए भाजपा का यह फार्मूला कामयाब हो गया। यही नहीं इस उपचुनाव के दौरान धार्मिक फैक्टर की वजह से ब्राह्मण जाति के लोग न सिर्फ एकजुट हो गए, बल्कि आशा नौटियाल के प्रत्याशी बनने की वजह से भी ब्राह्मण जाति के लोगों ने बढ़-चढ़कर भाजपा को अपना समर्थन दिया।
निर्दलीय प्रत्याशी त्रिभुवन ने कांग्रेस के मतदाताओं में लगाई सेंध..
केदारनाथ उपचुनाव में एक बड़ा फैक्टर ये भी रहा कि जहां एक ओर भाजपा को अपने कैडर वोटरों का वोट तो मिला ही, वहीं धार्मिक मुद्दों की वजह से भाजपा को ब्राह्मण, ठाकुर और एससी/ एसटी जाति के लोगों का वोट भी मिला है। जबकि कांग्रेस का मतदाता बंटता दिखाई दिया। इसकी मुख्य वजह निर्दलीय प्रत्याशी त्रिभुवन सिंह का चुनावी मैदान में खड़ा होना था। कांग्रेस का वोट बंटने की वजह से भाजपा को चुनाव जीतने में एक और बड़ा फायदा मिला। इसका नतीजा रहा कि भाजपा केदारनाथ उपचुनाव को जीत गई।
दिल्ली पहुंचीं मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, ‘उत्तराखंड निवास’ की तैयारियों का लिया जायजा..
उत्तराखंड: दिल्ली में छह नवंबर को नवनिर्मित उत्तराखंड निवास का शुभारंभ होने जा रहा है। इससे पहले मुख्य सचिव राधा रतूड़ी दिल्ली पहुंचीं और उन्होंने तैयारियों का जायजा लिया। उन्होंने निर्देश दिए कि सीएम के विजन के अनुरूप राज्य स्थापना दिवस का भव्य आयोजन किया जाए। यह आयोजन दिल्ली में रहने वाले उत्तराखंड मूल के अधिकारियों, कार्मिकों और प्रवासियों की भागीदारी से किया जाएगा। बैठक में सचिव ऊर्जा डॉ. आर. मीनाक्षी सुन्दरम, परियोजना प्रबंधक राकेश चन्द तिवारी, सहायक अभियन्ता प्रमोद कुमार कोठियाल और उत्तराखंड सदन के विशेष कार्याधिकारी रंजन मिश्रा सहित अन्य अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित थे। मुख्य सचिव ने सभी अधिकारियों को उनकी जिम्मेदारियों के बारे में स्पष्ट निर्देश दिए गए, ताकि आयोजन भव्य और प्रभावी हो।
पीएम मोदी के 74वें जन्मदिन पर CM धामी ने दी शुभकामनाएं..
उत्तराखंड: आज देश के पीएम नरेंद्र मोदी का 74वां जन्मदिन मनाया जा रहा हैं। पीएम मोदी अपने 74वें जन्मदिन पर जहां ओडिशा की राजदानी भुवनेश्वर के गड़कना में 26 लाख पीएम आवास घरों का उद्घाटन किया, वही सुभद्रा योजना का शुभारंभ भी किया। इधर देशभर में पीएम मोदी के जन्मदिन पर हुए ‘स्वच्छता ही सेवा-2024’ कार्यक्रम आयोजित है। देहरादून में ‘स्वच्छता ही सेवा-2024’ कार्यक्रम में उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी पहुंचे। उन्होंने लोगों को स्वच्छ भारत की शपथ दिलाई। इस मौके पर उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी ने कहा, ‘उत्तराखंड की जनता की ओर से मैं पीएम मोदी को उनके जन्मदिन पर हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं। मैं उनकी लंबी उम्र की कामना करता हूं। उनके नेतृत्व में देश ने काफी तरक्की की है और आगे भी करता रहेगा।
आपको बता दे कि नरेंद्र मोदी ने 2014 में पहली बार भारत का प्रधानमंत्री बनने पर 2 अक्टूबर 2014 को स्वच्छ भारत अभियान शुरू किया था। तब से समय-समय पर स्वच्छ भारत अभियान चलता है। इस बार 2 अक्टूबर तक ‘स्वच्छता ही सेवा-2024’ कार्यक्रम चलेगा। अभियान में स्वच्छता में जन भागीदारी, सम्पूर्ण स्वच्छता तथा सफाई मित्र सुरक्षा शिविरों का आयोजन हो रहा है। कार्यक्रम का उद्देश्य स्वभाव स्वच्छता और संस्कार में स्वच्छता है। कहा गया है कि स्वच्छता और पवित्रता देवत्व के समीप है।
कार्यक्रम के दौरान उत्तराखंड के सभी जनपदों के सभी परंपरागत और चुनौतीपूर्ण कचरा स्थलों (ब्लैक स्पॉट) को चिन्हित किया जाएगा। सामूहिक श्रमदान के माध्यम से इन स्थानों को साफ किया जाएगा। ग्राम पंचायत स्तर और विकास खंड स्तर से इसकी सूचना प्राप्त कर फोटोग्राफ्स वेबसाइट पर ऑनलाइन किए जाएंगे। ग्रामीण और शहरी स्थानीय निकायों एवं सार्वजनिक उपक्रमों, गंदे स्थलों का चुनाव करके स्वच्छता लक्षित इकाई के रूप में चयन करते हुए एक अक्टूबर 2024 तक लगातार अभियान संचालन होगा। उत्तराखंड के सीएम धामी ने स्वच्छता ही सेवा-2024 कार्यक्रम में लोगों को शपथ दिलाई। उन्होंने कहा कि स्वच्छता कार्यक्रम की सफलता के लिए जनजागरूकता एवं जनभागीदारी बहुत महत्वपूर्ण है। सभी लोग प्रशासन के साथ मिलकर ‘स्वच्छता ही सेवा-2024’ कार्यक्रम को सफल बनाएं।
रेल, बांध, आपदा और बिजली परियोजनाओं के लिए मोदी सरकार से आस,इस महीने आएगा बजट..
उत्तराखंड: अगले पांच वर्ष में राज्य की आर्थिक विकास दर को दोगुना करने के उद्देश्य से राज्य सरकार अपनी जिन ढांचागत विकास जुड़ी योजनाओं को जमीन पर उतारने की कोशिश कर रही है, उसमें वह मोदी सरकार उदार सहयोग चाहती है।यही वजह है कि केंद्र सरकार के बजट से ऐन पहले सीएम पुष्कर सिंह धामी ने पीएम, गृहमंत्री से लेकर केंद्र के सभी प्रमुख मंत्रियों के दरवाजे पर दस्तक दी ताकि राज्य की प्रस्तावित योजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए केंद्र से सहायता मिल सके।ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन परियोजना पर काम तेजी से चल रहा है।
नया प्रस्ताव केंद्र के समक्ष रखा
अब सरकार का फोकस टनकपुर-बागेश्वर और ऋषिकेश-उत्तरकाशी रेल परियोजना पर है। इसलिए सरकार इन दोनों परियोजनाओं में आवश्यक प्रावधान चाहती है। साथ ही सरकार ने देहरादून-मसूरी रेल परियोजना का एक नया प्रस्ताव केंद्र के समक्ष रखा है। सरकार राज्य की दो महत्वपूर्ण जमरानी और सौंग बांध परियोजनाओं के लिए भी केंद्र से मदद चाहती है। दोनों परियोजनाओं पर फिलहाल सरकार ने अपने संसाधनों से काम शुरू कर दिया है। लेकिन परियोजनाओं को मूर्त रूप देने के लिए केंद्र की वित्तीय सहायता जरूरी है। पीएमजीएसवाई और जल जीवन मिशन के कार्य तय समय सीमा के अनुरूप नहीं बन पाए हैं।
ऊर्जा की डिमांड लगातार बढ़ रही
सरकार चाहती है कि केंद्र इस योजना की समय-सीमा को बढ़ा दे। राज्य में औद्योगिक निवेश और आर्थिक गतिविधियों में हो रहे विस्तार के लिए ऊर्जा की डिमांड लगातार बढ़ रही है। पानी से बिजली बनाने की भरपूर क्षमता होने के बावजूद सरकार परियोजनाओं पर काम नहीं कर पा रही है। 25 हजार मेगावाट क्षमता के राज्य में केवल 4200 मेगावाट क्षमता की दोहन हो पाया है। इसलिए सरकार 4800 मेगावाट की उन 44 जल विद्युत परियोजनाओं के निर्माण पर लगी रोक को हटाने के लिए भी केंद्र से गुहार लगा रही है। सीएम धामी इस बाबत पीएम से भी हस्तक्षेप करने का अनुरोध कर चुके हैं। सरकार यह भी चाहती है कि एसडीआरएफ योजना की परिधि में हाई वोल्टेज ट्रांसमिशन लाइन व वनाग्नि को भी शामिल किया जाए। प्राकृतिक आपदा के लिहाज से संवेदनशील राज्य में सरकार चाहती है कि केंद्र सरकार चमोली, चंपावत या पिथौरागढ़ में से किसी एक जिले में क्रोनिक लैंड स्लाइड के ट्रीटमेंट के लिए राष्ट्रीय महत्व के शोध संस्थान की स्थापना करे।
आज से शुरू होगा 18वीं लोकसभा का पहला सत्र..
उत्तराखंड: 18वीं लोकसभा का पहला सत्र आज से शुरु हो गया है। इस दौरान पीएम मोदी ने अपनी बात मीडिया के सामने रखी। उन्होनें सभी सांसदों का स्वागत किया। इसी के साथ पीएम मोदी ने आपातकाल की तारीख पर बोलते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा।पीएम मोदी ने कहा कि आज हमारे संसदीय लोकतंत्र के लिए खुशी का अवसर है। आज आजादी के बाद पहली बार हम इस नई संसद में शपथ ग्रहण समारोह मना रहे हैं। अभी तक ऐसा पुरानी संसद में होता था। इस मौके पर पीएम ने सभी सांसदों का स्वागत किया और उन्हें बधाई दी।
इस दौरान पीएम मोदी ने आपातकाल को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा। उनका कहना हैं कि कल 25 जून है। 25 जून को भारत के लोकतंत्र पर लगे उस कलंक के 50 साल पूरे हो गए हैं। भारत की नई पीढ़ी कभी नहीं भूलेगी कि भारत के संविधान को पूरी तरह से नकार दिया गया था, संविधान के हर हिस्से की धज्जियां उड़ा दी गई थीं, देश को जेलखाना बना दिया गया था, लोकतंत्र को पूरी तरह दबा दिया गया था। पीएम मोदी ने कहा कि अपने संविधान, भारत के लोकतंत्र और लोकतांत्रिक परंपराओं की रक्षा करते हुए देशवासी संकल्प लेंगे कि भारत में दोबारा कोई ऐसा करने की हिम्मत न कर सके, जो 50 साल पहले किया गया था। हम एक जीवंत लोकतंत्र का संकल्प लेंगे। हम भारत के संविधान के निर्देशों के अनुसार सामान्य मानवी के सपनो को पूरा करने का संकल्प लेंगे।