संभावित हमले को सुरक्षा बलों ने किया नाकाम, कोई हताहत नहीं
दुबई। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच दुबई में शुक्रवार को तेज धमाकों की आवाज से हड़कंप मच गया। शहर के मध्य क्षेत्र में हुए इन धमाकों के बाद आसमान में काले धुएं का गुबार देखा गया, जिससे इलाके में कुछ समय के लिए दहशत का माहौल बन गया। हालांकि प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रण में बताया है और किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार दुबई के केंद्रीय इलाके में शुक्रवार को अचानक दो तेज धमाकों की आवाज सुनाई दी, जिससे आसपास की कई इमारतों में कंपन महसूस किया गया। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि धमाकों के बाद आसमान में काले धुएं का घना गुबार उठता दिखाई दिया, जिसके बाद सुरक्षा एजेंसियां तुरंत सक्रिय हो गईं।
घटना के संबंध में दुबई मीडिया ऑफिस ने जानकारी देते हुए बताया कि सुरक्षा बलों ने संभावित हमले को समय रहते विफल कर दिया। कार्रवाई के दौरान हमले से जुड़ा कुछ मलबा पास की एक इमारत के बाहरी हिस्से पर गिर गया, जिससे भवन को आंशिक नुकसान पहुंचा है। अधिकारियों ने बताया कि इस घटना में किसी प्रकार की जनहानि या घायल होने की खबर नहीं है।
धमाकों के तुरंत बाद शहर की प्रमुख सड़क शेख जायद रोड पर पुलिस और आपातकालीन वाहनों के सायरन सुनाई देने लगे। सुरक्षा एजेंसियों ने एहतियातन आसपास के क्षेत्र को घेरकर जांच शुरू कर दी। यह घटना दुबई इंटरनेशनल फाइनेंशियल सेंटर के नजदीक बताई जा रही है।
गौरतलब है कि दुबई में लगातार दूसरे दिन इस तरह की घटना सामने आई है। इससे पहले गुरुवार को भी शहर के अल बदा इलाके में ड्रोन से जुड़ी एक संदिग्ध गतिविधि की खबर सामने आई थी, जिसके बाद सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट कर दिया गया था।
क्षेत्र में बढ़ते तनाव को देखते हुए प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है और शहर में सुरक्षा व्यवस्था को और कड़ा कर दिया गया है।
पश्चिम एशिया में तनाव के बीच अमेरिका ने ईरान को दी धमकी
वॉशिंगटन। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने ईरान को कड़ा संदेश दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाली वैश्विक तेल आपूर्ति को बाधित करने की कोशिश की, तो अमेरिका की प्रतिक्रिया बेहद कठोर होगी। उन्होंने कहा कि ऐसी किसी भी कार्रवाई का जवाब पहले से कहीं अधिक सख्ती के साथ दिया जाएगा।
सोशल मीडिया पर जारी अपने बयान में डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य में तेल आपूर्ति को रोकने या बाधित करने की किसी भी कोशिश को अमेरिका बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यदि ईरान ऐसा कदम उठाता है तो अमेरिका सैन्य कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा।
ट्रंप ने चेतावनी देते हुए कहा कि जरूरत पड़ने पर अमेरिका ऐसे रणनीतिक ठिकानों को निशाना बना सकता है, जिनसे ईरान की सैन्य और रणनीतिक क्षमता को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि वह उम्मीद करते हैं कि हालात इतने खराब नहीं होंगे और तनाव को टाला जा सकेगा।
वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए अहम मार्ग
Strait of Hormuz को दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्गों में गिना जाता है। खाड़ी देशों से निर्यात होने वाले बड़े हिस्से का कच्चा तेल इसी रास्ते से अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचता है। ऐसे में यदि यहां किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न होती है तो इसका असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और तेल की कीमतों पर पड़ सकता है।
कई देशों की निर्भरता
ट्रंप ने अपने बयान में कहा कि इस समुद्री मार्ग की सुरक्षा केवल अमेरिका ही नहीं बल्कि उन सभी देशों के लिए महत्वपूर्ण है जो इस रास्ते से बड़े पैमाने पर तेल आयात करते हैं। इनमें एशिया की कई बड़ी अर्थव्यवस्थाएं भी शामिल हैं, जिनकी ऊर्जा जरूरतें काफी हद तक इसी मार्ग पर निर्भर करती हैं।
ऑपरेशन ‘मिडनाइट हैमर’ का भी जिक्र
अपने बयान में ट्रंप ने अमेरिका की ओर से चलाए गए कथित अभियान ‘मिडनाइट हैमर’ का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि इस कार्रवाई से ईरान के परमाणु कार्यक्रम को बड़ा झटका लगा है और इससे क्षेत्र में संभावित बड़े खतरे को टालने में मदद मिली है।
उन्होंने कहा कि अमेरिका क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए हर जरूरी कदम उठाने को तैयार है।
मलबे में दबे लोगों की तलाश जारी
जकार्ता। इंडोनेशिया में भारी बारिश के बाद एक बड़े लैंडफिल में कचरे का विशाल ढेर अचानक ढह गया, जिससे बड़ा हादसा हो गया। इस दुर्घटना में अब तक पांच लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका जताई जा रही है। राहत और बचाव दल मौके पर लगातार अभियान चला रहे हैं।
यह हादसा इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता के पास बेकासी शहर में स्थित बंटारगेबांग वेस्ट ट्रीटमेंट फैसिलिटी में हुआ। लगातार हो रही तेज बारिश के कारण कचरे का विशाल ढेर अचानक खिसककर गिर गया और आसपास मौजूद कई लोग इसकी चपेट में आ गए।
घटना के बाद प्रशासन ने बड़े स्तर पर राहत और बचाव अभियान शुरू कर दिया है। मलबे में दबे लोगों को निकालने के लिए 300 से अधिक बचावकर्मियों को तैनात किया गया है। बचाव दल भारी मशीनों और खोजी कुत्तों की मदद से मलबा हटाकर लोगों की तलाश कर रहे हैं।
जकार्ता सर्च एंड रेस्क्यू ऑफिस की प्रमुख देसियाना कार्तिका बहारी के मुताबिक कचरे के ढेर अभी भी अस्थिर स्थिति में हैं, इसलिए बचावकर्मी बेहद सावधानी के साथ काम कर रहे हैं ताकि किसी और हादसे से बचा जा सके।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, इस हादसे में जान गंवाने वालों में दो कचरा ट्रक चालक और दो खाद्य स्टॉल संचालक शामिल हैं, जो उस समय लैंडफिल के पास मौजूद थे। वहीं चार लोग सुरक्षित बाहर निकलने में सफल रहे। पुलिस, सेना और स्वयंसेवी संगठनों की टीमें अभी भी तीन लापता लोगों की तलाश में जुटी हुई हैं। अधिकारियों का कहना है कि मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
बंटारगेबांग लैंडफिल जकार्ता का सबसे बड़ा कचरा निस्तारण स्थल है, जहां शहर का अधिकांश घरेलू कचरा डाला जाता है। लंबे समय से इसकी क्षमता से अधिक कचरा जमा होने को लेकर चेतावनी दी जाती रही है। इससे पहले भी ऐसे हादसों की घटनाएं सामने आ चुकी हैं।
सरकार ने इस समस्या से निपटने के लिए पिछले साल के अंत में इस लैंडफिल को साफ करने की योजना बनाई थी, जिसके तहत कचरे को ऊर्जा में बदलने की परियोजनाओं को बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि खुले में कचरा जमा करने की पुरानी व्यवस्था को धीरे-धीरे खत्म किया जा सके।
गिलगिट-बाल्टिस्तान के स्कार्दू में विरोध-प्रदर्शन के दौरान भड़की हिंसा, गोलीबारी में 38 लोगों की मौत
स्कार्दू में हालात तनावपूर्ण, कई इलाकों में कर्फ्यू लागू
इस्लामाबाद। पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगिट-बाल्टिस्तान क्षेत्र में हालात तनावपूर्ण हो गए हैं। क्षेत्र के प्रमुख शहर स्कार्दू में विरोध-प्रदर्शनों के दौरान हिंसा भड़क उठी, जिसमें पाकिस्तानी सेना और अर्द्धसैन्य बलों की गोलीबारी में कई लोगों की मौत की खबर है। घटनाओं के बाद आक्रोशित प्रदर्शनकारियों ने सरकारी कार्यालयों और सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया, जिसके चलते प्रशासन को कई इलाकों में कर्फ्यू लागू करना पड़ा।
जानकारी के अनुसार पहली मार्च से शुरू हुए विरोध प्रदर्शन उस समय उग्र हो गए जब प्रदर्शन कर रहे लोगों पर सुरक्षा बलों द्वारा कार्रवाई की गई। शुरुआती रिपोर्ट में 13 लोगों की मौत की बात सामने आई थी, लेकिन बाद में घायल लोगों के दम तोड़ने से मृतकों की संख्या बढ़कर 38 तक पहुंचने की जानकारी सामने आई है। बड़ी संख्या में लोग घायल भी हुए हैं।
घटनाओं से नाराज प्रदर्शनकारियों ने स्कार्दू और आसपास के क्षेत्रों में कई सरकारी और सैन्य ठिकानों पर हमला कर दिया। इस दौरान कई भवनों में तोड़फोड़ की गई और कुछ जगहों पर आगजनी भी की गई। स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए प्रशासन ने सुरक्षा बलों की अतिरिक्त तैनाती की है।
इसी बीच, ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामनेई की कथित मौत को लेकर पाकिस्तान में भी विरोध प्रदर्शन देखने को मिले। अल्पसंख्यक शिया समुदाय के लोगों ने राजधानी इस्लामाबाद सहित कई शहरों में रैलियां निकालकर अमेरिका और इस्राइल के खिलाफ नारेबाजी की।
स्थिति को देखते हुए पाकिस्तान स्थित अमेरिकी दूतावास ने अपने नागरिकों के लिए सुरक्षा परामर्श जारी किया है। दूतावास ने बलोचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों की यात्रा से बचने की सलाह दी है।
स्कार्दू में हिंसा के दौरान कई महत्वपूर्ण भवनों को नुकसान पहुंचा है। इनमें सैन्य अधिकारियों के आवास, नॉर्दर्न लाइट इन्फैंट्री से जुड़े कार्यालय, आर्मी पब्लिक स्कूल, पुलिस अधिकारियों के कार्यालय, सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क और पर्यटन विभाग के दफ्तर शामिल बताए जा रहे हैं। कुछ स्थानों पर संचार से जुड़े संस्थानों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के कार्यालयों को भी आग के हवाले कर दिया गया।
फिलहाल पूरे क्षेत्र में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है और हालात को सामान्य करने के प्रयास जारी हैं।
बराक ओबामा के बयान पर बवाल, ट्रंप ने उठाए सवाल
वाशिंगटन। एलियंस और UFO को लेकर लंबे समय से चल रही बहस एक बार फिर सुर्खियों में है। डोनाल्ड ट्रंप ने अब बड़ा कदम उठाते हुए एलियंस और अनआइडेंटिफाइड एरियल फेनोमेना (UAP) से जुड़ी सरकारी फाइलों को सार्वजनिक करने की बात कही है। इस घोषणा के बाद दुनियाभर में जिज्ञासा और चर्चाएं तेज हो गई हैं, क्योंकि लोग लंबे समय से इन रहस्यमयी घटनाओं के सच को जानना चाहते हैं।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर किए गए अपने पोस्ट में ट्रंप ने कहा कि वह पेंटागन और अन्य एजेंसियों को निर्देश देंगे कि वे UFO और एलियन से जुड़ी फाइलों की पहचान कर उन्हें सार्वजनिक करने की प्रक्रिया शुरू करें। उन्होंने इसे “लोगों की दिलचस्पी से जुड़ा अहम मुद्दा” बताते हुए पारदर्शिता की जरूरत पर जोर दिया।
इस मुद्दे ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। ट्रंप ने पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा पर आरोप लगाया कि उन्होंने एलियंस के विषय में सार्वजनिक टिप्पणी कर संवेदनशील जानकारी को उजागर किया। हालांकि, ट्रंप ने अपने आरोपों के समर्थन में कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि ओबामा की बात खुफिया जानकारी पर आधारित थी, तो यह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मामला हो सकता है।
दरअसल, एक पॉडकास्ट बातचीत के दौरान ओबामा से एलियंस के अस्तित्व को लेकर सवाल किया गया था। इस पर उन्होंने कहा था कि ब्रह्मांड की विशालता को देखते हुए अन्य ग्रहों पर जीवन की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता, लेकिन उन्होंने खुद कभी एलियंस को नहीं देखा। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनके कार्यकाल में एलियंस के पृथ्वी से संपर्क का कोई ठोस प्रमाण सामने नहीं आया।
ट्रंप की इस घोषणा और ओबामा के बयानों के बाद UFO और एलियन से जुड़े रहस्य एक बार फिर वैश्विक चर्चा का विषय बन गए हैं। अब नजर इस बात पर है कि क्या वाकई इन फाइलों के सार्वजनिक होने से दशकों पुराने रहस्यों से पर्दा उठ पाएगा या यह मुद्दा सिर्फ अटकलों तक ही सीमित रहेगा।
स्कूल गोलीकांड के बाद ब्रिटिश कोलंबिया में हाई अलर्ट
ब्रिटिश कोलंबिया, कनाडा। कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया प्रांत से एक बेहद दर्दनाक और सनसनीखेज घटना सामने आई है। टम्बलर रिज शहर में स्थित एक स्कूल में हुई गोलीबारी में हमलावर समेत कुल दस लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। घटना की पुष्टि रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (RCMP) ने की।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, संदिग्ध हमलावर घटनास्थल पर मृत अवस्था में मिला। प्रारंभिक जांच में आशंका जताई जा रही है कि हमलावर ने गोलीबारी के बाद खुद को भी गोली मार ली। हालांकि, जांच एजेंसियां इस बात की भी पड़ताल कर रही हैं कि क्या इस हमले में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका थी।
छोटे शहर में दहशत का माहौल
यह गोलीबारी टम्बलर रिज नामक कस्बे में हुई है, जिसकी आबादी करीब 2,400 है। घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत फैल गई। पुलिस ने एहतियातन लोगों से घरों में ही रहने और सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने की अपील की है। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए आसपास के इलाकों से अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।
स्कूल बंद, सुरक्षा कड़ी
पीस रिवर साउथ स्कूल डिस्ट्रिक्ट ने सुरक्षा कारणों से टम्बलर रिज सेकेंडरी स्कूल और टम्बलर रिज एलीमेंट्री स्कूल को तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया है। दोनों स्कूलों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। जानकारी के अनुसार, टम्बलर रिज सेकेंडरी स्कूल में कक्षा 7 से 12 तक करीब 175 छात्र अध्ययनरत हैं।
मेडिकल और आपात सेवाएं तैनात
घटना के बाद इलाके में बड़ी संख्या में पुलिस, एंबुलेंस और आपातकालीन चिकित्सा दलों को भेजा गया है। पीस रिवर साउथ के विधायक लैरी न्यूफेल्ड ने बताया कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है, हालांकि सुरक्षा कारणों से विस्तृत जानकारी साझा नहीं की जा सकती।
उन्होंने स्थानीय लोगों से अपील की है कि अफवाहों पर ध्यान न दें और जिनके परिजन सुरक्षित हैं, वे घर लौट जाएं ताकि जांच एजेंसियों को अपना काम करने में कोई बाधा न आए। पुलिस ने भरोसा दिलाया है कि शहर में जल्द ही हालात सामान्य किए जाएंगे।
परमाणु वार्ता के बीच ईरान का अमेरिका को दो टूक संदेश
तेहरान। ईरान और अमेरिका के बीच शुरू हुई परमाणु वार्ता के बीच ईरान ने एक बार फिर अपने रुख को स्पष्ट कर दिया है। ईरान ने साफ शब्दों में कहा है कि वह किसी भी सूरत में यूरेनियम संवर्धन का अधिकार नहीं छोड़ेगा और अमेरिकी सैन्य दबाव के आगे झुकने का सवाल ही नहीं उठता। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका की मंशा पर संदेह जताते हुए कहा कि क्षेत्र में बढ़ती सैन्य तैनाती से ईरान डरने वाला नहीं है।
एक कार्यक्रम में बोलते हुए अराघची ने कहा कि पश्चिम एशिया में अमेरिका की सैन्य मौजूदगी ईरान के फैसलों को प्रभावित नहीं कर सकती। उनका यह बयान ऐसे समय सामने आया है, जब अमेरिका ने अपने सबसे शक्तिशाली युद्धपोत यूएसएस अब्राहम लिंकन को क्षेत्र में तैनात किया है। अराघची ने कहा कि ईरान को अमेरिका पर बेहद सीमित भरोसा है और बातचीत की गंभीरता को लेकर भी सवाल बने हुए हैं।
अमेरिका की नीयत पर संदेह, चीन-रूस से भी सलाह
ईरानी विदेश मंत्री ने कहा कि यह स्पष्ट नहीं है कि अमेरिका वास्तव में समाधान चाहता है या सिर्फ दबाव की रणनीति अपना रहा है। उन्होंने बताया कि ईरान इस वार्ता को लेकर अपने रणनीतिक साझेदार चीन और रूस के साथ भी लगातार विचार-विमर्श कर रहा है।
पश्चिमी देशों और इस्राइल की ओर से ईरान पर परमाणु हथियार बनाने के आरोप लगाए जाते रहे हैं, हालांकि तेहरान ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। अराघची ने दोहराया कि ईरान किसी भी परमाणु बम की ओर नहीं बढ़ रहा है और उसकी असली ताकत स्वतंत्र निर्णय लेने की क्षमता में है।
उन्होंने कहा, “वे हमारे परमाणु बम से डरते हैं, जबकि हम परमाणु बम नहीं चाहते। हमारी असली शक्ति महाशक्तियों को ‘न’ कहने की क्षमता है।”
इस बीच, इस्राइल के विदेश मंत्री गिदोन सार ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को वैश्विक शांति के लिए खतरा बताया है। अमेरिका और इस्राइल की मांग है कि बातचीत में ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम और क्षेत्रीय सशस्त्र संगठनों को समर्थन जैसे मुद्दों को भी शामिल किया जाए, लेकिन ईरान ने इसे वार्ता के दायरे से बाहर रखने की बात कही है।
अराघची ने यूरेनियम संवर्धन पर किसी भी प्रकार के समझौते से साफ इनकार करते हुए इसे रणनीतिक नहीं, बल्कि संप्रभुता का सवाल बताया। उन्होंने कहा कि चाहे ईरान पर युद्ध ही क्यों न थोपा जाए, किसी भी देश को उसके वैध अधिकार तय करने का हक नहीं है।
इजरायल ने सैनिकों पर हमले का हवाला देकर की कार्रवाई
गाजा। गाजा पट्टी में घोषित संघर्ष विराम के बाद भी हालात सामान्य होते नजर नहीं आ रहे हैं। ताजा घटनाओं में इजरायली कार्रवाई के दौरान कम से कम 24 फलस्तीनी नागरिकों की मौत की खबर सामने आई है। मृतकों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल बताए जा रहे हैं। अस्पताल सूत्रों ने मौतों की पुष्टि की है। वहीं इस्राइल का कहना है कि यह कार्रवाई उसके सैनिकों पर हुई गोलीबारी के जवाब में की गई।
इजरायली सेना ने क्या वजह बताई?
इजरायली सेना के मुताबिक, गाजा में तैनात उसके सैनिकों पर उग्रवादियों ने फायरिंग की थी, जिसमें एक रिजर्व सैनिक गंभीर रूप से घायल हो गया। सेना का कहना है कि इसके बाद हवाई और जमीनी बलों के जरिए जवाबी कार्रवाई की गई। इस्राइल ने इसे संघर्ष विराम का उल्लंघन करार देते हुए कहा कि सैनिकों की सुरक्षा के लिए कार्रवाई करना जरूरी था।
महिलाओं और बच्चों की मौत से बढ़ी चिंता
स्थानीय अस्पताल अधिकारियों के अनुसार, मारे गए लोगों में सात महिलाएं और पांच बच्चे शामिल हैं। मृतकों में एक पांच महीने का बच्चा और मात्र दस दिन की नवजात बच्ची भी शामिल बताई गई है। गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि संघर्ष विराम लागू होने के बाद से अब तक 530 से अधिक फलस्तीनी इस्राइली हमलों में अपनी जान गंवा चुके हैं, जिससे हालात की गंभीरता साफ झलकती है।
अस्पताल प्रशासन ने जताई नाराजगी
गाजा सिटी के शिफा अस्पताल के निदेशक ने कहा कि संघर्ष विराम के बावजूद आम नागरिकों के लिए हालात युद्ध जैसे ही बने हुए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर संघर्ष विराम लागू है, तो फिर जमीन पर हिंसा क्यों जारी है। स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि लगातार हो रहे हमलों से आम लोगों में भय का माहौल है और जनजीवन पटरी पर नहीं लौट पा रहा।
गाजा के अलग-अलग इलाकों में हुए हमले
रिपोर्ट के अनुसार, उत्तरी गाजा के तुफ्फाह इलाके में एक इमारत पर की गई फायरिंग में 11 लोगों की मौत हो गई, जिनमें एक ही परिवार के कई सदस्य शामिल थे। दक्षिणी शहर खान यूनिस में एक परिवार के टेंट को निशाना बनाया गया, जिसमें तीन लोगों की जान चली गई, जिनमें एक 12 वर्षीय बच्चा भी था। वहीं गाजा सिटी के ज़ैतून इलाके में टैंक शेलिंग से पति-पत्नी समेत तीन लोगों की मौत हो गई।
अब तक का कुल आंकड़ा क्या कहता है?
गाजा स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक 71,800 से ज्यादा फलस्तीनी मारे जा चुके हैं। मंत्रालय आम नागरिकों और लड़ाकों के आंकड़े अलग-अलग जारी नहीं करता, लेकिन संयुक्त राष्ट्र और कई अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां इन आंकड़ों को विश्वसनीय मानती हैं। बढ़ती मौतों की संख्या ने संघर्ष विराम की प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
भ्रष्टाचार निरोधक आयोग की जांच के बाद आया कोर्ट का फैसला
ढाका। बांग्लादेश की राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। देश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को भ्रष्टाचार से जुड़े दो अलग-अलग मामलों में दोषी ठहराते हुए अदालत ने कुल 10 साल की जेल की सजा सुनाई है। यह फैसला ढाका की स्पेशल जज कोर्ट-चार ने सुनाया, जिसमें अदालत ने दोनों मामलों में पांच-पांच साल की सजा तय की है।
आवासीय परियोजना में जमीन आवंटन को लेकर मामला
अदालती कार्यवाही के अनुसार, ये मामले राजधानी ढाका के नजदीक पूर्बाचोल क्षेत्र में विकसित की जा रही राजुक न्यू टाउन आवासीय योजना से जुड़े हैं। आरोप है कि इस परियोजना के तहत 10-10 काठा के दो प्लॉट नियमों को ताक पर रखकर आवंटित किए गए। अभियोजन पक्ष का कहना है कि आरोपियों ने अपने पद और प्रभाव का गलत इस्तेमाल करते हुए जमीन आवंटन प्रक्रिया में अनियमितताएं कीं। यह परियोजना राजधानी विकास प्राधिकरण राजुक के अधीन आती है।
परिवार और अधिकारियों पर भी गिरी गाज
इन मामलों में शेख हसीना के साथ उनके परिवार के कई सदस्यों को भी दोषी ठहराया गया है। अदालत ने तुलिप सिद्दीकी को चार साल की जेल, रदवान मुजीब सिद्दीकी और अजमीना सिद्दीकी को सात-सात साल की सजा सुनाई है। वहीं, राजुक के सदस्य मोहम्मद खुर्शीद आलम को, जिन्होंने अदालत में आत्मसमर्पण किया था, दो साल की कैद दी गई है। सभी दोषियों पर एक-एक लाख टका का जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माना अदा न करने की स्थिति में छह महीने की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
भारत में रह रही हैं शेख हसीना
बताया जा रहा है कि शेख हसीना फिलहाल भारत में निवास कर रही हैं। अगस्त 2025 में बांग्लादेश में बड़े पैमाने पर हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद उन्होंने देश छोड़ दिया था। इससे पहले अदालत उन्हें भगोड़ा घोषित कर चुकी है।
भ्रष्टाचार निरोधक आयोग की जांच के बाद दर्ज हुए केस
इन दोनों मामलों को बांग्लादेश के भ्रष्टाचार निरोधक आयोग (एसीसी) ने दर्ज किया था। आयोग का आरोप है कि आवासीय योजना में जमीन आवंटन के दौरान सरकारी नियमों का उल्लंघन किया गया और सत्ता का दुरुपयोग हुआ।
जापान ने दक्षिण कोरिया के मिसाइल परीक्षण की कड़ी निंदा की
कोरिया। एशियाई क्षेत्र में एक बार फिर सुरक्षा हालात को लेकर चिंता बढ़ गई है। कोरियाई प्रायद्वीप पर पहले से जारी तनाव के बीच उत्तर कोरिया ने सैन्य शक्ति का प्रदर्शन करते हुए पूर्वी समुद्री क्षेत्र की ओर कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों का प्रक्षेपण किया। इस मिसाइल परीक्षण की पुष्टि दक्षिण कोरिया और जापान, दोनों देशों ने की है। यह कदम ऐसे समय पर उठाया गया है, जब उत्तर कोरिया में एक अहम राजनीतिक बैठक प्रस्तावित है और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर माहौल पहले से ही संवेदनशील बना हुआ है।
दक्षिण कोरिया की सेना के अनुसार, उत्तर कोरिया ने राजधानी प्योंगयांग के उत्तर-पूर्वी इलाके से एक के बाद एक कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं, जो लगभग 350 किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद समुद्र में जा गिरीं। वहीं, जापान के रक्षा मंत्रालय ने जानकारी दी कि दागी गई दो मिसाइलें कोरियाई प्रायद्वीप के पूर्वी तट के समीप समुद्र में गिरीं।
जापान और दक्षिण कोरिया ने जताई कड़ी आपत्ति
जापान ने उत्तर कोरिया के इस कदम की कड़ी निंदा करते हुए इसे क्षेत्रीय शांति और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया है। जापानी सरकार ने कहा कि ऐसे मिसाइल परीक्षण संयुक्त राष्ट्र प्रस्तावों का उल्लंघन हैं। वहीं, दक्षिण कोरिया की सेना ने स्पष्ट किया है कि वह उत्तर कोरिया की किसी भी उकसावे वाली कार्रवाई से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है और हालात पर कड़ी नजर रखी जा रही है।
गौरतलब है कि उत्तर कोरिया ने इसी साल जनवरी की शुरुआत में कथित हाइपरसोनिक मिसाइलों का परीक्षण किया था। इससे पहले दिसंबर महीने में उसने लंबी दूरी की रणनीतिक क्रूज मिसाइलों और एक नए एंटी-एयर मिसाइल सिस्टम के परीक्षण का भी दावा किया था। इसके अलावा, हाल ही में उत्तर कोरिया ने अपनी पहली परमाणु-संचालित पनडुब्बी के निर्माण से जुड़ी तस्वीरें भी सार्वजनिक की थीं।
2019 के बाद तेज हुई हथियारों की तैयारी
रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, वर्ष 2019 में अमेरिका और दक्षिण कोरिया के साथ बातचीत ठप होने के बाद से उत्तर कोरिया अपने परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों को लगातार मजबूत कर रहा है। माना जा रहा है कि उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन हथियारों की ताकत के जरिए अमेरिका पर दबाव बनाकर कूटनीतिक रियायतें हासिल करना चाहते हैं।
विश्लेषकों का यह भी कहना है कि हालिया मिसाइल परीक्षण सत्तारूढ़ वर्कर्स पार्टी की प्रस्तावित कांग्रेस से पहले सैन्य ताकत दिखाने की रणनीति का हिस्सा हो सकते हैं। यह कांग्रेस फरवरी में होने की संभावना है और पांच साल बाद आयोजित होने वाली यह बैठक उत्तर कोरिया की सबसे अहम राजनीतिक घटनाओं में गिनी जाती है, जिसमें देश की भावी राजनीतिक और आर्थिक दिशा तय की जाती है।
दक्षिण कोरिया पर लगाए गए जासूसी ड्रोन के आरोप
इससे पहले उत्तर कोरिया ने दक्षिण कोरिया पर सीमा के पार जासूसी ड्रोन उड़ाने का आरोप लगाया था। हालांकि, दक्षिण कोरिया ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि सरकार की ओर से ऐसे किसी ड्रोन का संचालन नहीं किया गया। साथ ही यह भी बताया गया कि मामले की जांच की जा रही है कि कहीं ये ड्रोन आम नागरिकों द्वारा तो नहीं उड़ाए गए।
विशेषज्ञों का मानना है कि ड्रोन आरोप और मिसाइल परीक्षण, दोनों ही पार्टी कांग्रेस से पहले दक्षिण कोरिया विरोधी माहौल बनाने की रणनीति का हिस्सा हो सकते हैं। आशंका जताई जा रही है कि किम जोंग उन द्वारा कोरियाई प्रायद्वीप को लेकर घोषित “दो-राज्य” नीति को पार्टी के संविधान में शामिल किया जा सकता है।
