भारत-जापान आर्थिक फोरम- पीएम मोदी ने साझा की 2030 और 2047 की ऊर्जा योजनाएं
टोक्यो। भारत-जापान आर्थिक फोरम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जापानी भाषा में संबोधन शुरू करकर दोनों देशों के बीच मजबूत साझेदारी का संदेश दिया। पीएम मोदी ने कहा कि जापान टेक्नोलॉजी का पावरहाउस है, वहीं भारत टैलेंट का पावरहाउस है। उन्होंने दोनों देशों की साझेदारी और विकास की अपार संभावनाओं पर जोर दिया।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि उनकी जापान यात्रा की शुरुआत बिजनेस जगत के दिग्गजों के साथ हो रही है और भारत की विकास यात्रा में जापान हमेशा एक अहम भागीदार रहा है। उन्होंने बताया कि मेट्रो, मैन्युफैक्चरिंग, सेमीकंडक्टर से लेकर स्टार्टअप्स तक हर क्षेत्र में भारत-जापान सहयोग का भरोसा मजबूत रहा है। जापानी कंपनियों ने भारत में अब तक 40 बिलियन डॉलर से अधिक का निवेश किया है, जिनमें पिछले दो वर्षों में 30 बिलियन डॉलर का प्राइवेट निवेश शामिल है।
पीएम मोदी ने भारत में पिछले 11 वर्षों के दौरान हुए आर्थिक और राजनीतिक सुधारों का हवाला देते हुए कहा कि भारत विश्व की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बन चुका है और बहुत जल्द तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में है। उन्होंने बताया कि व्यापार और निवेश को आसान बनाने के लिए कई सुधार किए गए हैं, जिनमें ‘सिंगल डिजिटल विंडो’ अप्रूवल और निजी क्षेत्र के लिए संवेदनशील क्षेत्रों का खुलापन शामिल है।
उन्होंने कहा कि ऑटो, बैट्री, रोबोटिक्स, सेमीकंडक्टर, शिप-बिल्डिंग और परमाणु ऊर्जा में भारत-जापान साझेदारी को और मजबूत किया जा सकता है। पीएम मोदी ने वैश्विक दक्षिण और अफ्रीका के विकास में सहयोग की भी अपील की।
प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि भारत ने AI, सेमीकंडक्टर, क्वांटम कम्प्यूटिंग, बायोटेक और अंतरिक्ष में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। जापान की तकनीक और भारत के टैलेंट मिलकर इस सदी की तकनीकी क्रांति को आगे बढ़ा सकते हैं। उन्होंने बताया कि भारत 2030 तक 500 गीगावाट रिन्यूएबल एनर्जी और 2047 तक 100 गीगावाट न्यूक्लियर पावर का लक्ष्य हासिल करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
बीरगंज अस्पतालों में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही, स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सावधानी बरतने की दी चेतावनी
बीरगंज। नेपाल के बीरगंज जिले में हैजा के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। पिछले हफ्ते से जिले में दर्ज किए गए मामलों में तीन लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 300 से अधिक लोग अस्पतालों में इलाज करा रहे हैं। बीरगंज जिला सीमावर्ती और लंबे समय से सूखे की समस्या से जूझ रहा है, जिसे हैजा फैलने का मुख्य कारण माना जा रहा है।
मानसून में बढ़ती हैं बीमारियां
नारायणी अस्पताल के डॉक्टर उदय नारायण सिंह के अनुसार, बीते शुक्रवार से हैजा के मरीजों की संख्या में अचानक इजाफा हुआ है। अधिकांश मरीज डायरिया की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंचे हैं, जिनमें कई कोलेरा संक्रमण से प्रभावित पाए गए हैं। नारायणी अस्पताल में विशेष वार्ड केवल हैजा के मरीजों के लिए बनाए गए हैं। नेपाल में मानसून के दौरान पानी और भोजन से फैलने वाली बीमारियों में हैजा सबसे गंभीर है। हर साल हजारों लोग इससे प्रभावित होते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) भी हैजा को एक वैश्विक स्वास्थ्य संकट मानता है।
हैजा की गंभीरता
हैजा एक तीव्र संक्रमणकारी बीमारी है, जो उल्टी और दस्त के कारण शरीर में गंभीर जल की कमी पैदा कर सकती है। अगर तुरंत इलाज न मिले, तो मरीज की स्थिति घातक हो सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, बीरगंज में फैली यह बीमारी 2009 में नेपाल के जाजरकोट जिले में हुई हैजा जैसी ही गंभीर स्थिति की याद दिलाती है, जब कई लोगों की मौत हुई थी।
गाजा में भूख और कुपोषण का संकट बढ़ा, पांच लाख लोग प्रभावित
गाजा। गाजा में स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है, जहां इस्राइल के हालिया हमलों में बड़ी संख्या में नागरिकों की जानें चली गई हैं। शनिवार को हुए हमलों में कम से कम 33 फलस्तीनियों की मौत हुई, जिनमें महिलाएं, बच्चे और रोजमर्रा की जिंदगी के लिए संघर्ष कर रहे लोग शामिल थे। गाजा स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, अब तक इस संघर्ष में कुल 62,622 फलस्तीनी जान गंवा चुके हैं।
विस्थापितों के तंबुओं पर हमला
नासिर अस्पताल और स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, दक्षिणी गाजा के खान यूनिस में विस्थापितों के तंबुओं को निशाना बनाया गया, जिसमें कम से कम 17 लोगों की मौत हुई। इनमें अधिकांश महिलाएं और बच्चे थे। उत्तरी गाजा के शेख रादवान फील्ड अस्पताल में भी इस्राइली गोलीबारी में कम से कम पांच सहायता चाहने वालों की मौत हुई, जो जिकिम क्रॉसिंग के पास थे।
पत्रकार भी हमलों में शिकार
फलस्तीनी पत्रकार सिंडिकेट ने पुष्टि की कि कैमरामैन खालिद अल-मधौन जिकिम क्रॉसिंग पर रिपोर्टिंग करते समय हमले में मारे गए। स्थानीय टीवी चैनलों ने भी उनकी मौत की पुष्टि की। अन्य हमलों में 11 नागरिकों की भी जान गई।
इस्राइली सेना का बयान
इस्राइली सेना ने खान यूनिस में हमले की जानकारी न होने का दावा किया और कहा कि वह अन्य घटनाओं की जांच कर रही है। सेना ने यह भी कहा कि जब लोग सैनिकों के पास आते हैं या खतरा पैदा करते हैं, तो उन्हें चेतावनी के तौर पर गोलियां चलाने की आवश्यकता पड़ती है।
भूख और अकाल का संकट
संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार, गाजा में पांच लाख लोग गहन भूख से जूझ रहे हैं। बच्चों में कुपोषण बढ़ रहा है, जिससे अब तक 281 मौतें हुई हैं। इस्राइल का कहना है कि उसने पर्याप्त मदद पहुंचाई है, लेकिन संयुक्त राष्ट्र और राहत संगठन इसे पर्याप्त नहीं मानते।
सैन्य अभियान की चेतावनी
इस्राइल के रक्षा मंत्री ने चेतावनी दी है कि गाजा के हालात जल्द ही नए सैन्य अभियान के दौरान और भयावह हो सकते हैं। वहीं, सहायता समूह लगातार चेतावनी दे रहे हैं कि प्रतिबंधित क्षेत्र में खाद्य और चिकित्सा आपूर्ति की कमी गंभीर मानव संकट पैदा कर रही है।
केरी ने कहा- ओबामा प्रशासन के समय सहयोग और सम्मान से निर्णय होते थे, अब दबाव और टकराव बढ़ा है
वाशिंगटन। पूर्व अमेरिकी अधिकारी जॉन केरी ने भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने और बिगड़ते द्विपक्षीय संबंधों को लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कड़ी आलोचना की है। केरी ने कहा कि कूटनीतिक प्रयासों के बिना अल्टीमेटम देना किसी भी देश की महानता का संकेत नहीं है और भारत-अमेरिका के रिश्तों में वर्तमान तनाव अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।
केरी ने यह भी कहा कि ट्रंप और पीएम मोदी के बीच टकराव सही नहीं है। बड़े राष्ट्र अपनी शक्ति का प्रदर्शन केवल आदेश और दबाव देकर नहीं करते, बल्कि कूटनीतिक प्रयासों और बातचीत के माध्यम से समझौते तक पहुंचते हैं। उन्होंने याद दिलाया कि ओबामा प्रशासन के दौरान सहयोग और सम्मान के आधार पर निर्णय लिए जाते थे, जबकि अब दबाव और टकराव अधिक नजर आ रहा है।
केरी ने आशा जताई कि भारत और अमेरिका मिलकर व्यापार विवाद सुलझा लेंगे। उन्होंने भारत की पेशकशों की सराहना करते हुए कहा कि यह एक सकारात्मक बदलाव है।
इससे पहले, व्हाइट हाउस के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी जॉन बोल्टन ने भी ट्रंप प्रशासन की रणनीति पर सवाल उठाया था। उन्होंने कहा कि रूस से तेल खरीदने पर भारत पर टैरिफ लगाया गया, जबकि चीन पर नहीं, जिससे भारत चीन-रूस गठबंधन की ओर जा सकता है।
अमेरिकी विदेश नीति विशेषज्ञ क्रिस्टोफर पैडिला और अर्थशास्त्री जेफरी सैक्स ने भी इस टैरिफ नीति की आलोचना की है। पैडिला ने कहा कि इससे भारत-अमेरिका संबंधों को स्थायी नुकसान पहुंच सकता है और जेफरी सैक्स ने इसे अमेरिकी विदेश नीति में सबसे गलत कदम करार दिया।
वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस-यूक्रेन युद्ध पर अपनी कूटनीतिक पहल को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि इस संघर्ष को समाप्त करने के लिए केवल युद्धविराम नहीं, बल्कि एक स्पष्ट और स्थायी शांति समझौता जरूरी है। ट्रंप ने यह टिप्पणी रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से अलास्का में मुलाकात के बाद की।
डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए जानकारी दी कि उनकी अलास्का में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ एक सकारात्मक बैठक हुई। इसके साथ ही उन्होंने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की और यूरोपीय नेताओं से भी टेलीफोन पर बातचीत की।
ट्रंप ने कहा, “सभी पक्ष इस बात पर सहमत हैं कि युद्ध को समाप्त करने का सबसे कारगर और स्थायी तरीका एक स्पष्ट शांति समझौता है। केवल युद्धविराम पर भरोसा करना खतरनाक हो सकता है, क्योंकि हालात फिर से खराब हो सकते हैं।”
ट्रंप ने यह भी पुष्टि की कि यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की सोमवार को वॉशिंगटन डीसी स्थित व्हाइट हाउस में उनसे मुलाकात करेंगे। उन्होंने कहा कि अगर यह बैठक सकारात्मक रही, तो इसके बाद वह रूस के राष्ट्रपति पुतिन के साथ अगली वार्ता का शेड्यूल भी तय करेंगे। राष्ट्रपति ट्रंप ने नाटो महासचिव समेत अन्य यूरोपीय नेताओं के साथ भी विचार-विमर्श करने की बात कही और दावा किया कि सभी इस युद्ध को खत्म करने के इच्छुक हैं।
लियाकताबाद, कोरंगी, ल्यारी समेत कई जगहों पर हुए हादसे
कराची। पाकिस्तान में 14 अगस्त को आजादी का जश्न इस बार कराची में खून और आंसुओं में बदल गया। आधी रात को शुरू हुई बेकाबू हवाई फायरिंग ने तीन लोगों की जान ले ली, जिनमें एक बुजुर्ग और आठ साल की मासूम बच्ची भी शामिल हैं।
स्थानीय मीडिया के अनुसार, शहर के अलग-अलग इलाकों में हुई अंधाधुंध फायरिंग में 60 से अधिक लोग घायल हो गए। कई की हालत गंभीर बनी हुई है। लियाकताबाद, कोरंगी, ल्यारी, केमारी, ओरंगी टाउन और बलदिया जैसे इलाकों में लोग गोलियों का शिकार बने।
अजीजाबाद ब्लॉक-8 में खेल रही आठ साल की बच्ची को अचानक लगी गोली ने उसकी जिंदगी खत्म कर दी, जबकि कोरंगी में स्टीफन नाम के व्यक्ति की रास्ते में मौत हो गई। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि जश्न मनाने के तरीके ऐसे हों, जो किसी की जान न लें।
कैलिफोर्निया के गवर्नर ने रेड स्टेट्स के नक्शे बदलने पर दी कानूनी कार्रवाई की धमकी
वॉशिंगटन। कैलिफोर्निया के गवर्नर गैविन न्यूज़ॉम ने पुनर्वितरण (रेडिस्ट्रिक्टिंग) विवाद को लेकर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर सीधा और तीखा हमला बोला है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए न्यूज़ॉम ने ट्रंप को “सेकंड-टू-लास्ट वॉर्निंग” जारी की और साफ चेताया कि कैलिफोर्निया, रेड स्टेट्स में बनाए गए गैरकानूनी निर्वाचन नक्शों को कानूनी कार्रवाई से खत्म कर देगा।
न्यूज़ॉम के प्रेस ऑफिस की ओर से किए गए पोस्ट में ट्रंप की सोशल मीडिया शैली की नकल करते हुए बड़े अक्षरों, असामान्य विराम चिह्नों और हल्के व्यंग्य का इस्तेमाल किया गया। संदेश में कहा गया— “हालिया इतिहास के सबसे कम लोकप्रिय राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, यह आपकी दूसरी और आखिरी से पहले वाली चेतावनी है। अगली चेतावनी अंतिम होगी। अभी पीछे हटें, वरना कैलिफोर्निया कानूनी जवाब देगा।”
पुनर्वितरण विवाद की पृष्ठभूमि
न्यूज़ॉम ने हाल ही में ट्रंप को एक पत्र लिखकर टेक्सास समेत कई रिपब्लिकन-शासित राज्यों में निर्वाचन सीमाएं बदलने की कोशिश तुरंत रोकने की मांग की थी। उन्होंने इस कदम को अमेरिकी लोकतंत्र पर सीधा हमला बताया और कहा कि यह 2026 के चुनाव से पहले सत्ता बचाने की “रणनीतिक चाल” है।
ट्रंप की नीतियों पर सीधा वार
गवर्नर ने ट्रंप के हालिया आपातकालीन आदेश पर भी सवाल उठाए, जिसमें वॉशिंगटन डीसी में संघीय हस्तक्षेप की अनुमति दी गई थी। उन्होंने ट्रंप के इस दावे को “पुराना झूठ” बताया कि डेमोक्रेटिक शहरों में अराजकता फैली हुई है, साथ ही जोड़ा कि अपराध दर वास्तव में GOP-शासित राज्यों में अधिक है।
2028 के राजनीतिक संकेत
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि गैविन न्यूज़ॉम खुद को 2028 के डेमोक्रेटिक राष्ट्रपति पद के संभावित उम्मीदवार के रूप में मजबूत कर रहे हैं। उनका यह बयान सिर्फ ट्रंप की नीतियों की आलोचना नहीं, बल्कि पार्टी समर्थकों को एकजुट करने का संदेश भी है। व्हाइट हाउस ने इस विवाद पर अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
अमेरिका को सैकड़ों अरब डॉलर का लाभ दिलाएगी टैरिफ नीति- ट्रंप
वाशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने कार्यकाल के दौरान व्यापारिक साझेदार देशों पर लगाए गए पारस्परिक टैरिफ (प्रतिशोधात्मक कर) का पुरजोर बचाव किया है। ट्रंप का कहना है कि इन टैरिफों से अमेरिका को न केवल आर्थिक लाभ होगा, बल्कि वह देश का भारी कर्ज भी चुका सकेगा। उन्होंने यह भी दावा किया कि यह कदम कई वर्षों पहले उठाया जाना चाहिए था।
‘कर्ज चुकाने के लिए टैरिफ से आएगा रिकॉर्ड राजस्व’
एक मीडिया बातचीत में ट्रंप ने कहा, “अमेरिका में बहुत सारा पैसा आने वाला है, इतना कभी एक साथ नहीं आया होगा। हम उस पैसे से कर्ज का भुगतान करेंगे। यह काम हमें कई साल पहले ही कर लेना चाहिए था। मैंने पहले कार्यकाल में चीन पर टैरिफ लगाए थे, लेकिन कोरोना महामारी के कारण अन्य देशों के साथ यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी।”
‘सैकड़ों अरब डॉलर की कमाई करेगा अमेरिका’
ट्रंप ने अपनी नीति को ‘निष्पक्षता आधारित’ बताया। उन्होंने कहा, “मैं किसी पर दबाव नहीं बनाना चाहता, बस निष्पक्षता चाहता हूं। हम जितना संभव हो, पारस्परिक टैरिफ लगाना चाहते हैं। इससे हमारा देश सैकड़ों अरब डॉलर की कमाई करेगा।
2 अप्रैल को की थी टैरिफ नीति की घोषणा
2 अप्रैल को ट्रंप प्रशासन ने उन देशों से आयातित वस्तुओं पर 50 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने की घोषणा की थी, जिनके साथ अमेरिका का व्यापार घाटा है। इसके अतिरिक्त लगभग सभी अन्य देशों पर 10 प्रतिशत आधारभूत कर भी लगाया गया। इस फैसले को ‘राष्ट्रीय आर्थिक आपातकाल’ करार देते हुए ट्रंप ने 1977 के कानून का हवाला दिया। आलोचनाओं के बीच उन्होंने 90 दिनों के लिए इन टैरिफों को स्थगित किया और बातचीत का रास्ता खोला, जिसके बाद कुछ देशों ने अमेरिका से व्यापार समझौते कर लिए।
SCO बैठक के दौरान सीमा तनाव के बाद पहली बार हुई सीधी बातचीत
जयशंकर बोले – मतभेदों को विवाद नहीं बनने देना चाहिए
बीजिंग– भारत और चीन के बीच लंबे समय से चले आ रहे सीमा तनाव के बीच कूटनीतिक स्तर पर एक नई सकारात्मक पहल सामने आई है। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की विदेश मंत्रियों की बैठक के अवसर पर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की। यह मुलाकात दोनों देशों के बीच हालिया सीमा तनाव में कमी के बाद पहली उच्चस्तरीय सीधी बातचीत मानी जा रही है।
जयशंकर ने शी जिनपिंग को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शुभकामनाएं प्रेषित करते हुए द्विपक्षीय संबंधों में हालिया प्रगति की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भारत-चीन संबंधों को स्थायित्व और दिशा देने में शीर्ष नेतृत्व की भूमिका महत्वपूर्ण रही है।
सीमा विवाद और आपसी भरोसे पर हुई चर्चा
विदेश मंत्री ने SCO सम्मेलन के दौरान चीन के विदेश मंत्री वांग यी के साथ भी द्विपक्षीय बैठक की। उन्होंने बताया कि बीते नौ महीनों में भारत-चीन संबंधों में ठोस सुधार हुआ है और सीमा क्षेत्रों में स्थिरता बढ़ी है। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि दोनों देश तनाव कम करने के साथ-साथ लंबित मुद्दों पर समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाएं।
जयशंकर ने स्पष्ट रूप से कहा कि मतभेदों को विवाद में नहीं बदलना चाहिए और प्रतिस्पर्धा को संघर्ष का रूप नहीं लेना चाहिए। उन्होंने दोनों देशों के बीच स्थिर और रचनात्मक संबंधों को वैश्विक हित में भी बताया।
व्यापार, पर्यटन और संपर्क बढ़ाने पर जोर
बैठक में भारत-चीन व्यापार संबंधों पर भी बात हुई, जहां जयशंकर ने चीनी विदेश मंत्री के समक्ष भारत के विनिर्माण क्षेत्र को प्रभावित करने वाले चीनी प्रतिबंधों पर चिंता जताई। उन्होंने चीन से आग्रह किया कि दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क को आसान बनाने के लिए सीधी उड़ानों को फिर से शुरू किया जाए, पर्यटन को प्रोत्साहन मिले और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ाया जाए।
आतंकवाद पर भारत का स्पष्ट रुख, कैलाश यात्रा बहाली का स्वागत
SCO मंच पर जयशंकर ने आतंकवाद के विरुद्ध भारत की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को दोहराते हुए कहा कि संगठन को चरमपंथ, अलगाववाद और आतंकवाद के विरुद्ध मिलकर काम करना चाहिए। इस दौरान उन्होंने कैलाश मानसरोवर यात्रा को पुनः प्रारंभ करने के चीन के निर्णय का स्वागत किया, जो कोविड महामारी के कारण पांच वर्षों से बंद थी।
लुत्स्क। यूक्रेन पर रूस ने बीती रात अब तक का सबसे भीषण हमला किया, जिसमें 728 ड्रोन और 13 मिसाइलें दागी गईं। यूक्रेनी वायुसेना ने इसे अब तक का सबसे बड़ा ड्रोन हमला बताया है। हमले का मुख्य निशाना पश्चिमी यूक्रेन का वोलिन क्षेत्र और राजधानी लुत्स्क रही, जहां की सीमाएं पोलैंड और बेलारूस से लगती हैं। इस हमले से पूरे इलाके में दहशत फैल गई और बिजली-संचार व्यवस्था पर गहरा असर पड़ा।
रातभर चला हमला, नागरिकों में मची अफरातफरी
यूक्रेनी वायुसेना के अनुसार, उन्होंने कुल 296 ड्रोनों और 7 मिसाइलों को मार गिराया, जबकि 415 ड्रोन रडार से गायब हो गए या फिर इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग के ज़रिए निष्क्रिय कर दिए गए। यह हमला पूरी रात चला और कई इलाकों में ब्लैकआउट की स्थिति बन गई। संचार सेवाएं भी बाधित हुईं, जिससे आम नागरिकों में दहशत फैल गई।
लुत्स्क और वोलिन पर रहा रूस का फोकस
राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने बताया कि लुत्स्क शहर को विशेष रूप से निशाना बनाया गया, जहां यूक्रेनी एयरबेस स्थित हैं। ये बेस पश्चिमी सप्लाई लाइनों के लिए बेहद अहम हैं। रूस की यह रणनीति संभवतः यूक्रेन के सप्लाई चैन को कमजोर करने की कोशिश है।
ड्रोन हमलों पर बढ़ता रूस का भरोसा
सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि रूस अब पारंपरिक मिसाइलों की बजाय ड्रोनों पर अधिक निर्भर हो रहा है। डिकॉय ड्रोन का इस्तेमाल कर यूक्रेन की एयर डिफेंस को भटकाने की कोशिश की गई, जिससे यह भी साफ है कि रूस अपनी रणनीति में बदलाव कर रहा है।
यूक्रेन की जवाबी रणनीति और मांग
यूक्रेनी अधिकारियों ने दावा किया कि वे इस हमले का मुंहतोड़ जवाब देंगे। इसके साथ ही उन्होंने पश्चिमी देशों से और अधिक एयर डिफेंस सिस्टम, विशेषकर अमेरिकी पैट्रियट सिस्टम की मांग दोहराई है। जेलेंस्की ने बताया कि देश में स्वदेशी इंटरसेप्टर ड्रोनों का उत्पादन तेज़ी से बढ़ाया जा रहा है।
वैश्विक प्रतिक्रिया और मानवाधिकार चिंता
संयुक्त राष्ट्र और यूरोपीय संघ ने रूस के इस हमले की कड़ी निंदा की है। उन्होंने रूस से आग्रह किया है कि वह नागरिक इलाकों को निशाना बनाना बंद करे और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानूनों का पालन करे। स्थानीय प्रशासन ने नागरिकों से सतर्क रहने और सुरक्षित आश्रयों में जाने की अपील की है।