मुख्यमंत्री ने कहा- उत्तराखंड सरकार का लक्ष्य युवाओं को रोजगार मांगने वाला नहीं, बल्कि रोजगार देने वाला बनाना है
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को राज्य के युवाओं और स्वरोजगार को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत 3,848 लाभार्थियों के खातों में 33.22 करोड़ रुपये की सहायता राशि सीधे ऑनलाइन ट्रांसफर की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड सरकार का लक्ष्य युवाओं को रोजगार मांगने वाला नहीं, बल्कि रोजगार देने वाला बनाना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह योजना राज्य में पलायन रोकने और गांवों में आर्थिक गतिविधियों को मजबूत करने में प्रभावी साबित हो रही है। विशेष रूप से कोविड-19 के बाद लौटे प्रवासी, युवा उद्यमी, कारीगर, हस्तशिल्प से जुड़े लोग और शिक्षित बेरोजगार इस योजना से लाभान्वित हो रहे हैं। स्वरोजगार को बढ़ावा देकर राज्य सरकार रिवर्स माइग्रेशन को प्रोत्साहित कर रही है।

मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि योजना के तहत उत्तराखंड के स्थायी निवासियों को विनिर्माण, सेवा और व्यापार क्षेत्रों में बैंक ऋण की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। विनिर्माण इकाइयों के लिए 25 लाख रुपये तक और सेवा व व्यापार इकाइयों के लिए 10 लाख रुपये तक की परियोजनाओं को मंजूरी दी जा रही है। इसके साथ ही परियोजना लागत का 15 से 25 प्रतिशत तक अनुदान सरकार द्वारा दिया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि योजना के अंतर्गत अब तक 35 हजार से अधिक लोग लाभ उठा चुके हैं, जबकि कुल 1,389 करोड़ रुपये से ज्यादा का ऋण वितरित किया जा चुका है। इससे प्रदेश में करीब 65 हजार नए रोजगार के अवसर सृजित हुए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि ये आंकड़े साबित करते हैं कि योजना केवल घोषणा तक सीमित नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू हो रही है।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सब्सिडी की राशि सीधे लाभार्थियों के खातों में ऑनलाइन ट्रांसफर की जा रही है, जिससे पारदर्शिता बनी है और भ्रष्टाचार की संभावना खत्म हुई है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना आत्मनिर्भर उत्तराखंड की दिशा में एक मजबूत आधार है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत के विजन को आगे बढ़ाते हुए डबल इंजन सरकार राज्य के हर जिले, हर गांव और हर युवा तक रोजगार पहुंचाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।
नौणी–सोलन विश्वविद्यालय में मिलेगा आधुनिक सेब और कीवी उत्पादन का प्रशिक्षण
देहरादून। प्रदेश के कृषि मंत्री गणेश जोशी ने अपने कैंप कार्यालय से जिला योजना के अंतर्गत जनपद देहरादून के 28 कृषकों के दल और दो उद्यान कार्मिकों को 05 दिवसीय सेब एवं कीवी उत्पादन प्रशिक्षण हेतु डॉ. वाईएस परमार कृषि एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी–सोलन (हिमाचल प्रदेश) के लिए हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
इस अवसर पर कृषि मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि प्रदेश में सेब और कीवी जैसी उच्च मूल्य वाली फसलों की अपार संभावनाएं हैं। ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों से कृषकों को आधुनिक तकनीक, उन्नत किस्मों, पौध संरक्षण एवं विपणन की जानकारी प्राप्त होगी, जिससे उनकी आय में वृद्धि होगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार कृषकों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है।
गौरतलब है कि इसी क्रम में जनपद देहरादून में पूर्व में 56 कृषकों को संरक्षित खेती (पाली हाउस) के प्रशिक्षण हेतु पंतनगर विश्वविद्यालय भेजा जा चुका है। मंत्री ने विश्वास जताया कि प्रशिक्षण प्राप्त कर लौटने के बाद कृषक अपने अनुभवों का लाभ अन्य किसानों को भी देंगे, जिससे जनपद एवं प्रदेश में बागवानी को नई दिशा मिलेगी।
सरकार के फैसले को हाईकोर्ट में झटका
देहरादून। उत्तराखंड में शराब के दाम बढ़ाने के राज्य सरकार के फैसले को बड़ा झटका लगा है। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने सरकार द्वारा जारी मूल्य वृद्धि के आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी है। इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति रवीन्द्र मैठाणी और न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की खंडपीठ में हुई, जहां अदालत ने प्रथम दृष्टया याचिकाकर्ता के तर्कों को सुनते हुए अंतरिम राहत प्रदान की।
यह मामला शराब निर्माता कंपनी मैसर्स इंडियन ग्लाइकोल्स लिमिटेड की ओर से दायर याचिका के बाद न्यायालय के समक्ष आया। याचिका में कंपनी ने राज्य सरकार के 28 नवंबर को जारी उस नोटिफिकेशन को चुनौती दी, जिसके जरिए प्रदेश में शराब के दामों में वृद्धि की गई थी। याचिकाकर्ता का कहना था कि आबकारी वर्ष के बीच में शराब की कीमतों में बढ़ोतरी नियमों के विपरीत है।
कंपनी ने दलील दी कि आबकारी नीति से जुड़े नियमों में संशोधन केवल नोटिफिकेशन के माध्यम से नहीं किया जा सकता। इसके लिए निर्धारित विधिक प्रक्रिया अपनाना आवश्यक है, जिसमें नियमावली में औपचारिक संशोधन शामिल होता है। याचिका में यह भी कहा गया कि बिना प्रक्रिया पूरी किए कीमतों में वृद्धि करना व्यापारिक अधिकारों का उल्लंघन है।
वहीं, राज्य सरकार की ओर से अदालत में यह तर्क रखा गया कि सरकार को जनहित और राजस्व कारणों से शराब के दामों में संशोधन करने का अधिकार है। सरकार ने अपने फैसले को नीतिगत निर्णय बताते हुए उसे वैध ठहराने का प्रयास किया।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद उच्च न्यायालय ने सरकार के 28 नवंबर के नोटिफिकेशन पर रोक लगाते हुए अगली सुनवाई तक दाम बढ़ोतरी को लागू न करने के निर्देश दिए हैं। अदालत के इस आदेश से फिलहाल प्रदेश में शराब के पुराने दाम ही प्रभावी रहेंगे।
मनसा देवी मंदिर के पास रेलवे फाटक के समीप हुआ हादसा
ऋषिकेश। ऋषिकेश में देर रात एक भीषण सड़क हादसे में चार लोगों की जान चली गई। मनसा देवी मंदिर के पास रेलवे फाटक के समीप तेज रफ्तार कार सड़क किनारे खड़े ट्रक से टकराकर उसके नीचे जा घुसी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि कार पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई और उसमें सवार सभी लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। सूचना मिलते ही पुलिस और राहत दल मौके पर पहुंचे और कड़ी मशक्कत के बाद शवों को बाहर निकाला गया।
पुलिस के अनुसार यह हादसा रात करीब 10:30 बजे हुआ, जब एक कार हरिद्वार से ऋषिकेश की ओर आ रही थी। बताया जा रहा है कि कार तेज गति में थी और रास्ते में कई वाहनों को ओवरटेक कर रही थी। इसी दौरान अचानक वाहन चालक ने नियंत्रण खो दिया और कार सड़क किनारे खड़े ट्रक से टकरा गई। टक्कर के बाद कार ट्रक के नीचे फंस गई, जिससे भीतर बैठे लोगों को बाहर निकालने में काफी समय लगा।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हादसे से ठीक पहले चालक ने किसी जानवर को बचाने के प्रयास में कार को मोड़ा, जिससे वाहन असंतुलित हो गया। सूचना पर पुलिस ने मौके पर पहुंचकर ट्रक और कार को अलग करने के लिए क्रेन की मदद ली। वाहन को काटकर शवों को बाहर निकाला गया।
कोतवाली प्रभारी केसी भट्ट ने बताया कि कार के नंबर के आधार पर वाहन स्वामी की पहचान सोनू कुमार निवासी चंद्रेश्वर मार्ग, ऋषिकेश के रूप में की गई है। उनसे संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन फोन रिसीव नहीं हो सका। प्रारंभिक जांच में दो मृतकों की पहचान धीरज जायसवाल (30) निवासी चंद्रेश्वर नगर, ऋषिकेश और हरिओम (22) निवासी गुमानीवाला, ऋषिकेश के रूप में हुई है। शेष दो मृतकों की पहचान की जा रही थी।
पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजते हुए दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक तौर पर अत्यधिक गति और लापरवाही को हादसे का मुख्य कारण माना जा रहा है।
शहरी विकास, स्मार्ट सिटी और पर्यावरणीय प्रबंधन की व्यावहारिक समझ के लिए 14 से 26 दिसंबर तक देश के प्रमुख शहरों का दौरा
देहरादून। एटीआई नैनीताल द्वारा आवास अनुभाग में नवनियुक्त कनिष्ठ अभियंताओं को व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। विभागीय कार्यों में गुणवत्ता, नवाचार और आधुनिक तकनीकों के समावेश के उद्देश्य से कनिष्ठ अभियंताओं के लिए 14 दिसंबर से 26 दिसंबर 2025 तक एक व्यापक राष्ट्रीय अध्ययन भ्रमण (स्टडी टूर) का आयोजन किया गया है। यह अध्ययन भ्रमण देश के प्रमुख शहरी केंद्रों देहरादून, शिमला, चंडीगढ़, नोएडा एवं दिल्ली में आयोजित किया जा रहा है। इस अध्ययन भ्रमण का मुख्य उद्देश्य अभियंताओं को शहरी नियोजन, आवासीय विकास, स्मार्ट सिटी परियोजनाओं, अपशिष्ट प्रबंधन, सीवेज ट्रीटमेंट, ढलान स्थिरता, पार्किंग समाधान, सार्वजनिक स्थलों के प्रबंधन तथा सतत विकास मॉडल से व्यावहारिक रूप से अवगत कराना है।
अभियंताओं का सहस्रधारा क्षेत्र में विकसित सिटी फॉरेस्ट पार्क का भ्रमण
अध्ययन भ्रमण की शुरुआत देहरादून से हुई। अध्ययन भ्रमण के प्रथम चरण में अभियंताओं को मसूरी–देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) द्वारा सहस्रधारा क्षेत्र में विकसित सिटी फॉरेस्ट पार्क का भ्रमण कराया गया। इस दौरान अभियंताओं ने पार्क की योजना, लैंडस्केप डिज़ाइन, हरित विकास मॉडल, पर्यावरण संरक्षण से जुड़े उपायों तथा नागरिक सुविधाओं के प्रबंधन का विस्तार से अध्ययन किया। भ्रमण के दौरान अभियंताओं ने पार्क में भ्रमण हेतु आए विभिन्न विद्यालयों के छात्र–छात्राओं, शिक्षकों एवं उनके परिजनों से संवाद स्थापित कर सिटी फॉरेस्ट को लेकर उनकी प्रतिक्रिया और अनुभव भी जाने। आम नागरिकों से प्राप्त फीडबैक के माध्यम से अभियंताओं को यह समझने का अवसर मिला कि किस प्रकार सार्वजनिक हरित स्थलों को नागरिकों की आवश्यकताओं और पर्यावरणीय संतुलन के अनुरूप विकसित किया जा सकता है। यह अनुभव अभियंताओं के लिए अत्यंत उपयोगी एवं सीखप्रद रहा।
इसके साथ ही अभियंता देहरादून के अन्य क्षेत्रों का भ्रमण कर इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC), आईटीडीए, स्मार्ट सिटी परियोजनाओं, शहरी निगरानी प्रणाली, सार्वजनिक पार्कों की लैंडस्केपिंग, मटेरियल रिकवरी सेंटर एवं विरासत स्थलों के पुनर्विकास कार्यों का अध्ययन करेंगे। इसके पश्चात अभियंताओं का दल शिमला पहुंचेगा। शिमला में हिमाचल प्रदेश हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी (HIMUDA) द्वारा संचालित पहाड़ी क्षेत्रों की आवासीय योजनाओं, ढलान आधारित निर्माण तकनीक, शहरी गतिशीलता, संरचित पार्किंग, हेरिटेज पब्लिक स्पेस तथा शहरी प्रशासन से जुड़े नवाचारों का प्रत्यक्ष अवलोकन किया जाएगा।
अगले चरण में अध्ययन भ्रमण चंडीगढ़ में आयोजित होगा, जहां अभियंता पिंक मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी, आरडीएफ प्लांट, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, कंस्ट्रक्शन एंड डिमोलिशन वेस्ट प्लांट, कैपिटल कॉम्प्लेक्स, रॉक गार्डन, सुखना लेक एवं सिटीवाइड डेटा इंटीग्रेशन से जुड़े आईसीसीसी का अध्ययन करेंगे। अध्ययन भ्रमण के अंतिम चरण में अभियंता नोएडा और दिल्ली में आधुनिक कार्यालय भवनों, वेटलैंड आधारित अपशिष्ट प्रबंधन, निजी आवासीय परियोजनाओं, बड़े सार्वजनिक स्थलों, रोबोटिक पार्किंग प्रणाली तथा अक्षरधाम मंदिर जैसे उच्च जन-आवागमन वाले स्थलों के प्रबंधन मॉडल को समझेंगे। अध्ययन भ्रमण का समापन 26 दिसंबर 2025 को होगा। विभाग का विश्वास है कि यह पहल भविष्य में उत्तराखंड को एक सुव्यवस्थित, स्मार्ट और पर्यावरण-संतुलित राज्य के रूप में विकसित करने में सहायक सिद्ध होगी।
उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी का बयान
अध्ययन भ्रमण के संबंध में उपाध्यक्ष मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण { एमडीडीए } बंशीधर तिवारी ने कहा कि आज के समय में शहरी विकास केवल भवन निर्माण तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह स्मार्ट तकनीक, पर्यावरणीय संतुलन और नागरिक सुविधाओं के समन्वय का विषय बन चुका है। इस अध्ययन भ्रमण के माध्यम से हमारे कनिष्ठ अभियंता देश के अग्रणी शहरों में अपनाए जा रहे आधुनिक मॉडल को प्रत्यक्ष रूप से समझेंगे, जिससे उत्तराखंड में योजनाओं के क्रियान्वयन की गुणवत्ता और प्रभावशीलता में उल्लेखनीय सुधार आएगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य है कि उत्तराखंड में टिकाऊ, सुरक्षित और नागरिक-केंद्रित शहरी विकास को बढ़ावा दिया जाए और इस दिशा में अभियंताओं का प्रशिक्षण अत्यंत महत्वपूर्ण है।
सचिव मोहन सिंह बर्निया का बयान
वहीं सचिव मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण { एमडीडीए } मोहन सिंह बर्निया ने कहा कि यह अध्ययन भ्रमण कनिष्ठ अभियंताओं की तकनीकी क्षमता, योजना निर्माण कौशल और नवाचार को सशक्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। विभिन्न राज्यों की श्रेष्ठ प्रथाओं को समझकर अभियंता उन्हें उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप लागू कर सकेंगे। उन्होंने बताया कि इस भ्रमण से अभियंताओं को अपशिष्ट प्रबंधन, सीवेज ट्रीटमेंट, स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर, पहाड़ी क्षेत्रों में सुरक्षित निर्माण एवं आधुनिक पार्किंग समाधान जैसे विषयों पर व्यावहारिक अनुभव प्राप्त होगा, जिसका सीधा लाभ राज्य की आवासीय एवं शहरी परियोजनाओं को मिलेगा।
देहरादून। सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी से आज उनके कैंप कार्यालय में उपनल कर्मचारी महासंघ के पदाधिकारियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात की।
प्रतिनिधिमंडल ने सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी को अवगत कराया कि राज्य सरकार के अधीन विभाग/संस्था में 12 वर्ष या उससे अधिक की निरंतर सेवा पूर्ण करने वाले उपनल कार्मिकों को न्यूनतम वेतनमान एवं महंगाई भत्ता, समान कार्य-समान वेतन और नो-वर्क नो-पे प्रकरण का शीघ्र जियो जारी करने की मांग की।
मंत्री गणेश जोशी ने प्रतिनिधि मंडल को सकारात्मक आश्वासन देते हुए शीघ्र कार्यवाही का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार उपनल कर्मियों के हितों को लेकर संवेदनशील है और उनके कल्याण हेतु हरसंभव प्रयास कर रही है।
इस अवसर पर उपनल कर्मचारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष विनोद गोदियाल, महामंत्री विनय प्रसाद सहित अन्य पदाधिकारीगण उपस्थित रहे।
नितिन नवीन के नवनियुक्त होने पर डॉ. नरेश बंसल ने हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दीं
देहरादून/नई दिल्ली। भाजपा राष्ट्रीय सहकोषाध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद डॉ. नरेश बंसल ने मंगलवार को भाजपा के राष्ट्रीय कार्यालय में नव नियुक्त भाजपा राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नवीन से शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान डॉ. बंसल ने उन्हें नई जिम्मेदारी के लिए हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दीं।
भेंट के अवसर पर डॉ. नरेश बंसल ने नितिन नवीन को मिठाई खिलाकर सम्मानित किया और उनके उज्ज्वल कार्यकाल की कामना की। दोनों नेताओं के बीच इस दौरान विभिन्न समसामयिक और संगठनात्मक विषयों पर भी चर्चा हुई।
डॉ. बंसल ने विश्वास जताया कि नितिन नवीन के नेतृत्व में पार्टी संगठन को नई दिशा और मजबूती मिलेगी।
1971 युद्ध के वीरों को नमन: गांधी पार्क में विजय दिवस समारोह में शामिल हुए मुख्यमंत्री धामी
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को विजय दिवस के अवसर पर गांधी पार्क, देहरादून में आयोजित श्रद्धांजलि एवं सम्मान समारोह कार्यक्रम में प्रतिभाग करते हुए शहीद स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित कर वीर बलिदानियों को श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर उन्होंने 1971 के युद्ध के सैनिकों और शहीदों के परिजनों को सम्मानित भी किया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि सैनिक कल्याण निदेशालय और जिला सैनिक कल्याण कार्यालय (डीडीहाट, हरबर्टपुर, पिथौरागढ़ एवं हरिद्वार) इन सभी पाँच कार्यालयों में सरकारी वाहन दिए जाएंगे।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विजय दिवस की शुभकामनाएं देते हुए सभी वीर बलिदानियों को समस्त प्रदेशवासियों की ओर से श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे वीर जवानों ने अदम्य साहस और सर्वोच्च बलिदान से 1971 के युद्ध में राष्ट्र की अखंडता और स्वाभिमान की रक्षा की। आज भारतीय सेना के शौर्य, त्याग और अटूट राष्ट्रनिष्ठा की गौरवगाथा को स्मरण करने का दिन है, जो हमारे इतिहास के पन्नों पर स्वर्णाक्षरों में अंकित है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 1971 में पाकिस्तान के लगभग 93 हजार सैनिकों ने हमारी सेना के समक्ष आत्मसमर्पण किया। उन्होंने कहा कि इस युद्ध में वीरभूमि उत्तराखंड के 248 बहादुर सपूतों ने भी अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। हमारे प्रदेश के 74 सैनिकों को अपने अदम्य साहस और शौर्य के लिए विभिन्न वीरता पदकों से सम्मानित भी किया गया था। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के लगभग प्रत्येक परिवार का कोई न कोई सदस्य सेना में है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जवानों का मनोबल बढ़ाने के साथ ही सेना को अत्याधुनिक तकनीक और हथियारों से सुसज्जित किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत रक्षा सामग्री का निर्यात करने वाले शीर्ष देशों की सूची में शामिल हो गया है। ऑपरेशन सिंधु के माध्यम से भारत ने यह सिद्ध कर दिया कि हमारे सैनिकों के साथ-साथ हमारे स्वदेशी हथियार भी किसी से कम नहीं हैं। इस अभियान में भारत में निर्मित आकाश मिसाइल, डिफेंस सिस्टम और ब्रह्मोस मिसाइल जैसे स्वदेशी हथियारों ने पूरे विश्व में भारत का डंका बजा दिया। आज दुश्मन की एक-एक गोली का जवाब गोलों से दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह नया भारत है, जो दुश्मनों की हर नापाक हरकत का करारा जवाब देता है और उन्हें उनके ठिकानों में ही नेस्तनाबूद कर देता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में वीर जवानों के हित में भी कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए जा रहे हैं। वन रैंक वन पेंशन योजना हो, नेशनल वॉर मेमोरियल का निर्माण, रक्षा बजट में वृद्धि कर सैनिकों की सभी आवश्यकताओं की पूर्ति करना हो, या बॉर्डर पर इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत बनाना—ऐसे अनेक कार्य किए गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में प्रदेश सरकार भी सैनिकों और उनके परिवारों के कल्याण के लिए संकल्पित होकर कार्य कर रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने शहीदों के आश्रितों को मिलने वाली अनुग्रह राशि को 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 50 लाख रुपये किया है। सेना में परमवीर चक्र से लेकर मेंशन इन डिस्पैच तक सभी वीरता पुरस्कारों से अलंकृत सैनिकों को दी जाने वाली एकमुश्त तथा वार्षिकी राशि में भी अभूतपूर्व वृद्धि की गई है। परमवीर चक्र से अलंकृत सैनिक को मिलने वाली राशि को 50 लाख रुपये से बढ़ाकर 1.50 करोड़ रुपये किया गया है। अशोक चक्र की राशि 30 लाख रुपये से बढ़ाकर 50 लाख रुपये, महावीर चक्र और कीर्ति चक्र की राशि 20 लाख से बढ़ाकर 35 लाख रुपये तथा वीर चक्र और शौर्य चक्र की एकमुश्त राशि 15 लाख रुपये से बढ़ाकर 25 लाख रुपये कर दी गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बलिदानियों के परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी में समायोजित करने का निर्णय लिया गया है। वहीं, सरकारी नौकरी के लिए आवेदन करने की अवधि भी 2 वर्ष से बढ़ाकर 5 वर्ष कर दी गई है। प्रदेश में बलिदानियों के आश्रितों को नौकरी पूर्व प्रशिक्षण तथा पुत्री विवाह अनुदान जैसी योजनाएँ भी संचालित की जा रही हैं। राज्य में वीरता पुरस्कार प्राप्त सैनिकों और पूर्व सैनिकों हेतु सरकारी बसों में यात्रा की निःशुल्क व्यवस्था के साथ-साथ सेवारत व पूर्व सैनिकों के लिए 25 लाख रुपये तक की संपत्ति की खरीद पर स्टाम्प ड्यूटी में 25 प्रतिशत की छूट भी प्रदान की जा रही है। देहरादून के गुनियाल गाँव में ‘‘भव्य सैन्य धाम’’ का निर्माण भी किया जा रहा है।
सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि 1971 के युद्ध के दौरान करीब 4 हज़ार सैनिक शहीद हुए थे, जिनमें उत्तराखंड राज्य के 248 शहीद सैनिक शामिल थे। करीब 9 हज़ार सैनिक घायल हुए थे। उत्तराखंड के 74 सैनिकों को वीरता पुरस्कार प्रदान किए गए, जो हमारे राज्य के लिए गौरव की बात है। सैनिकों का सम्मान हर देशवासी का कर्तव्य है। केंद्र और राज्य सरकार मिलकर सैनिकों के कल्याण के लिए कार्य कर रही हैं। मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में शहीद सैनिकों के परिजनों को मिलने वाली सम्मान राशि को बढ़ाकर ₹50 लाख किया गया है। सैनिकों की हर समस्या का समाधान किया जा रहा है।
इस अवसर पर विधायक खजान दास, विधायक श्रीमती सविता कपूर, सचिव सैनिक कल्याण दीपेन्द्र चौधरी, मेजर जनरल (से.नि.) सम्मी सबरवाल तथा पूर्व सैनिक और वीरांगनाएँ उपस्थित थीं।
राज्यपाल गुरमीत सिंह बोले—1971 की विजय भारत के सैन्य इतिहास का स्वर्णिम अध्याय
देहरादून। विजय दिवस 2025 के अवसर पर लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से.नि.), उत्तराखंड के राज्यपाल, मेजर जनरल एम.पी.एस. गिल, जनरल ऑफिसर कमांडिंग, उत्तराखंड सब एरिया, मेजर जनरल रोहन आनंद, एडीजी, एनसीसी उत्तराखंड निदेशालय, ग्रुप कैप्टन ऋषभ शर्मा, रियर एडमिरल पीयूष पौसी, जॉइन्ट चीफ हाइड्रोग्राफर, एनएचओ देहरादून और वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि दी। समारोह में देहरादून स्टेशन के सेवारत अधिकारी, जेसीओ और अन्य रैंक के अधिकारी भी उपस्थित थे, जिन्होंने देश के सम्मान के लिए वीर सैनिकों का अनुकरण करने का संकल्प लिया।
इस अवसर पर राज्यपाल ने उपस्थित सेवारत एवं पूर्व सैनिकों से भेंट कर उनसे संवाद किया तथा राष्ट्र की रक्षा उनके अमूल्य योगदान की सराहना की।
इस अवसर पर राज्यपाल ने 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध की ऐतिहासिक, रणनीतिक एवं निर्णायक सैन्य विजय को स्मरण करते हुए कहा कि यह युद्ध भारत के सैन्य इतिहास में स्वर्णिम अध्याय है। भारतीय सशस्त्र बलों ने अद्वितीय शौर्य, साहस और कुशल रणनीति का परिचय देते हुए न केवल दुश्मन के 93 हजार सैनिकों को आत्मसमर्पण के लिए विवश किया, बल्कि पाकिस्तान के विभाजन के साथ एक नए राष्ट्र बांग्लादेश के निर्माण का मार्ग भी प्रशस्त किया।
राज्यपाल ने कहा कि हमारे सशस्त्र बलों की उत्कृष्ट रणनीति, कठोर प्रशिक्षण, सटीक योजना, अनुशासन, समर्पण और राष्ट्र के प्रति अटूट प्रतिबद्धता हम सभी के लिए प्रेरणा और मार्गदर्शक है। उन्होंने कहा कि 54 वर्ष पूर्व इस युद्ध में शहीद हुए एवं घायल हुए जवानों के परिवारों की देखभाल करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। विजय दिवस पर हमें यह संकल्प लेना चाहिए कि हम सदैव उनके परिवारों के सम्मान, सुरक्षा और कल्याण के लिए तत्पर रहेंगे।
उन्होंने कहा कि आज भारत आधुनिकीकरण, तकनीकी नवाचार, भविष्य के युद्ध कौशल और सैन्य क्षमताओं के क्षेत्र में एक व्यापक परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। यह परिवर्तन हमारे सशस्त्र बलों की शक्ति और राष्ट्र की सुरक्षा को और अधिक सुदृढ़ करेगा।
राज्यपाल ने कहा कि विजय दिवस केवल अतीत की विजय को स्मरण करने का दिन नहीं, बल्कि यह आत्ममंथन और संकल्प का अवसर भी है। उन्होंने कहा कि हमें भविष्य की चुनौतियों तथा आंतरिक एवं बाह्य सुरक्षा आवश्यकताओं के प्रति स्वयं को निरंतर सुदृढ़ और सजग बनाए रखना होगा।
1971 के युद्ध में पाकिस्तान पर भारतीय सशस्त्र बलों की ऐतिहासिक जीत को मनाने करने के लिए तथा कर्तव्य की पंक्ति में सर्वोच्च बलिदान देने वाले बहादुर जवानों को श्रद्धांजलि देने के लिए हर साल विजय दिवस मनाया जाता है। दिसंबर 1971 के 16वें दिन, तत्कालीन थल सेना अध्यक्ष जनरल एस एफ एच जे मानेकशों के शक्तिशाली नेतृत्व में भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तानी सेना को करारी शिकस्त दी और बांग्लादेश के रूप में नए देश के गठन के लिए पूर्वी पाकिस्तान की मुक्ति का मार्ग प्रशस्त किया। राष्ट्र अपने सैनिकों के दृढ़ संकल्प और अद्वितीय साहस को प्रणाम करता है जिन्होंने 1971 के युद्ध में इस
अभूतपूर्व जीत को हासिल करने के लिए अपने जीवन का बलिदान दिया।
महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या ने डीबीटी किया 2 महीने का पैसा
देहरादून। मंगलवार को महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या ने मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना के तहत लाभार्थियों को 3 करोड़ 9 लाख रुपए से ज्यादा की धनराशि जारी की। कैंप कार्यालय पर धनराशि लाभार्थियों की खातों में डीबीटी करने के बाद कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने बताया कि इस योजना में प्रदेश सरकार 2020 से ही कोरोना महामारी के समय अभिभावकों को खो देने वाले बेसहारा बच्चों को प्रति माह ₹3000 की सहायता राशि देती है। इस योजना के तहत सितंबर 25 तक का धन पहले ही जारी कर दिया गया था।

कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने बताया कि अक्टूबर में 5177 लाभार्थियों को कुल 1 करोड़ 55 लाख 31 हजार रुपए जारी किए गए हैं। जबकि नवंबर महीने के लिए कुल 5147 लाभार्थियों के 1 करोड़ 54 लाख 41 हजार रुपए की धनराशि जारी की गई है।
इस योजना के तहत लाभार्थी के 21 वर्ष के हो जाने या बालिका लाभार्थियों के विवाह या लाभार्थी के सेवायोजित हो जाने के बाद वह योजना से बाहर हो जाते हैं।
इस अवसर पर विभागीय निदेशक बंसी लाल राणा, भाजपा नेता इंदर रावत, सीपीओ अंजना गुप्ता और डिप्टी सीपीओ राजीव नयन आदि उपस्थित रहे।
