देहरादून। प्रान्तीय रक्षक एवं विकास दल (पीआरडी) स्वयंसेवकों के लिए वर्दी भत्ते में वृद्धि की गयी है। अब वर्दी भत्ते के लिए हर 2 साल में ₹1500 के बजाय ₹2500 दिए जाएंगे। सर्दी और गर्मी के अलग-अलग यूनिफॉर्म सेट भी तय कर दिए गए हैं। कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार पीआरडी स्वयंसेवकों के हित के लिए लगातार काम कर रही है। वर्दी भत्ते में यह वृद्धि उनके समर्पण और सेवा को सम्मान देने का प्रयास है।
उन्होंने कहा कि चार धाम यात्रा समेत विभिन्न अवसरों पर पीआरडी स्वयंसेवकों ने शानदार काम किया है। कैबिनेट मंत्री ने कहा कि विषम भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए पिछले दिनों उन्होंने पीआरडी जवानों के वर्दी भत्ते को बढ़ाने के निर्देश दिए थे। यह वर्दी भत्ता 42 दिवसीय आधारभूत प्रशिक्षण के बाद तथा प्रत्येक दो वर्ष बाद दिया जाएगा, जिसमें सामान्य वर्दी के विभिन्न आइटम और गर्म वर्दी के लिए अंगोरा कमीज-पैंट, ऊनी जर्सी और फर वाली जैकेट शामिल हैं।
यह सुविधा सिर्फ शांति-सुरक्षा कार्यों में तैनात स्वयंसेवकों को जिला युवा कल्याण एवं पीआरडी अधिकारियों की संस्तुति पर मिलेगी।
10 किमी क्षेत्र में पक्षियों व वन्यजीवों की गतिविधियों को रोकने के निर्देश, डंपिंग यार्ड के तत्काल निस्तारण पर जोर
देहरादून। जिलाधिकारी सविन बंसल की अध्यक्षता में शुक्रवार को ऋषिपर्णा सभागार में जौलीग्रांट एयरपोर्ट की एयरफील्ड पर्यावरण प्रबंधन समिति की बैठक आयोजित हुई। बैठक में एयरपोर्ट के 10 किलोमीटर के संचालन क्षेत्र में पक्षियों और वन्यजीवों की गतिविधियों को नियंत्रित करने तथा पर्यावरण संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत चर्चा की गई। डीएम ने एयरपोर्ट सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए सभी संबंधित विभागों को त्वरित और प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए।
बैठक में डोईवाला नगर पालिका को विशेष रूप से निर्देशित किया गया कि एयरपोर्ट के निकट केशवपुरी स्थित डंपिंग यार्ड में कूड़ा निस्तारण की प्रक्रिया तेज की जाए। जिलाधिकारी ने टेंडर प्रक्रिया तुरंत पूर्ण करने, ट्रामेल और पोकलैंड मशीनें खरीदने, डंपिंग यार्ड को टिन शेड से कवर करने और मैनपावर व मशीनें बढ़ाकर तेजी से कूड़े के निस्तारण के आदेश दिए। उन्होंने कहा कि एयरपोर्ट क्षेत्र में एकत्रित कचरे का भी नियमित निस्तारण आवश्यक है, ताकि बर्ड हिट और वन्यजीवों की गतिविधियों को रोका जा सके।
डीएम बंसल ने निर्देशित किया कि एयरपोर्ट से 10 किमी की परिधि में स्थित सभी दुकानों, होटलों और रेस्टोरेंट्स की पड़ताल कर उनकी कूड़ा निस्तारण व्यवस्था को नियमानुसार सुनिश्चित कराया जाए। इसके साथ ही केशवपुरी डंपिंग साइट के विस्थापन की आवश्यकता पर भी चर्चा की गई। उन्होंने एसडीएम डोईवाला को एक सप्ताह के भीतर डंपिंग यार्ड के लिए नई सरकारी भूमि चिन्हित करने और वर्तमान भूमि की श्रेणी स्पष्ट करने के निर्देश दिए।
एयरपोर्ट अधिकारियों ने बैठक में बताया कि आसपास कचरे की डंपिंग, मांस की दुकानों और निर्धारित ऊंचाई से अधिक पेड़ या इमारतें होने पर बर्ड स्ट्राइक की आशंका बढ़ जाती है। इसके अलावा एयरपोर्ट परिसर के अंदर और बाहर नाली की क्षमता में अंतर और सफाई की समस्या भी जोखिम पैदा कर रही है। इस पर जिलाधिकारी ने सिंचाई विभाग को तुरंत कार्यवाही शुरू करने को कहा।
बैठक में अपर जिलाधिकारी के.के. मिश्रा, एसडीएम अपर्णा ढौड़ियाल, विमानपत्तन निदेशक बी.सी.एच. नेगी, उप महाप्रबंधक अमित जिंदल, अनिल कुमार मस्ताना, प्रबंधक शुभम वत्स, नगर पालिका अधिशासी अधिकारी एल.एल. शाह, निरीक्षण अधिकारी सचिन सिंह रावत, कुलदीप खत्री सहित कई अधिकारी उपस्थित रहे।
पहली बार गंगा किनारे हुई बैठक में प्रमुख स्नान तिथियों की हुई घोषणा
हरिद्वार। 2027 के कुंभ के भव्य आयोजन के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को हरिद्वार में गंगा किनारे सभी 13 अखाड़ों के आचार्यों एवं संतगणों के साथ बैठक की। कुंभ के भव्य आयोजन के लिए पहली बार गंगा तट पर बैठक का आयोजन किया गया। बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने 2027 कुंभ स्नान की महत्वपूर्ण तिथियों की घोषणा भी की। उन्होंने 14 जनवरी 2027 को मकर संक्रांति, 06 फरवरी 2027 को मौनी अमावस्या, 11 फरवरी 2027 को वसंत पंचमी, 20 फरवरी 2027 को माघ पूर्णिमा, 06 मार्च 2027 को महाशिवरात्रि (अमृत स्नान), 08 मार्च 2027 को फाल्गुन अमावस्या (अमृत स्नान), 07 अप्रैल 2027 को नव संवत्सर (नव वर्ष), 14 अप्रैल 2027 को मेष संक्रांति (अमृत स्नान), 15 अप्रैल 2027 को श्रीराम नवमी तथा 20 अप्रैल 2027 को चैत्र पूर्णिमा के स्नान की तिथियों की घोषणा की।
मुख्यमंत्री ने कुंभ के सफल आयोजन के लिए अखाड़ों के आचार्यों से सुझाव एवं मार्गदर्शन लिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि कुंभ से जुड़े सभी निर्णयों में संतगणों की परम्पराओं, आवश्यकताओं एवं सुविधाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह उनका सौभाग्य है कि कुंभ के सुव्यवस्थित और भव्य आयोजन के लिए उन्हें संतगणों का आशीर्वाद और मार्गदर्शन प्राप्त हो रहा है। उन्होंने कहा कि संतों की प्रेरणा, सुझाव और आशीर्वाद के बिना इस महायोजना की पूर्णता की कल्पना भी संभव नहीं है। हमारा प्रयास है कि सभी के अमूल्य सुझावों से कुंभ 2027 की तैयारियों को और अधिक व्यापक, सुव्यवस्थित और संत समाज की अपेक्षाओं के अनुरूप बनाया जा सके।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आप सभी जानते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देवभूमि उत्तराखंड को विश्व की आध्यात्मिक राजधानी के रूप में स्थापित करने का आह्वान किया है। इसी संकल्प को आगे बढ़ाते हुए राज्य सरकार कुंभ 2027 को भव्य, दिव्य और ऐतिहासिक बनाने के लिए पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2021 में आयोजित कुंभ कोरोना महामारी के प्रकोप के कारण केवल अल्प अवधि के लिए आयोजित किया गया था और शाही स्नान भी प्रतीकात्मक रूप से ही संपन्न हुआ था, लेकिन वर्ष 2027 में होने वाला हरिद्वार कुंभ कई दृष्टियों से ऐतिहासिक और विशेष महत्व का होगा। इस बार आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या 2010 और 2021 के कुंभ की तुलना में कई गुना अधिक होने की संभावना है। राज्य सरकार ने हरिद्वार कुंभ 2027 को दिव्य, भव्य और सुरक्षित बनाने के लिए अभी से व्यापक स्तर पर तैयारियाँ प्रारंभ कर दी हैं। श्रद्धालुओं और साधु-संतों की सुरक्षा के लिए राज्य और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों के साथ पूर्ण समन्वय स्थापित किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिस, एनडीआरएफ, पीएसी, स्वास्थ्य विभाग और फायर विभाग सहित सभी संबंधित विभाग सुरक्षा के हर पहलू को ध्यान में रखते हुए सभी संभव उपाय सुनिश्चित करेंगे। कुंभ के दौरान पूर्व में घटित दुर्घटनाओं को ध्यान में रखते हुए भीड़ नियंत्रण, यातायात प्रबंधन और आकस्मिक आपात स्थिति की तैयारी पहले से ही प्रारंभ कर दी गई है। पूर्व में आयोजित कुंभ मेलों को सफलतापूर्वक संपन्न कराने वाले अधिकारियों का भी पूर्ण सहयोग लिया जाएगा, ताकि हर प्रक्रिया सुचारू और व्यवस्थित रूप से संचालित हो सके। कुंभ के दौरान नगर और घाट क्षेत्रों की स्वच्छता के लिए विशेष टीमों का गठन कर कचरा प्रबंधन, जल निकासी और पर्यावरण संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
अखाड़ों के आचार्य एवं संतगणों द्वारा संस्कृति के संरक्षण के लिए प्रदेश में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा उठाए गए कदमों की सराहना की गई। उन्होंने कहा कि भव्य एवं दिव्य कुंभ के आयोजन के लिए संत समाज द्वारा राज्य सरकार को पूर्ण सहयोग दिया जाएगा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने ने अखाड़ों के आचार्यों एवं संतगणों के साथ भोजन भी किया।
इस दौरान महंत रविन्द्र पुरी महाराज- पंचायती निरंजनी अखाड़ा, महंत कौशल गिरी महाराज- पंचायती आनंद अखाड़ा, महंत हरिगिरी महाराज- पंचदशनाम जूना भैरव अखाड़ा, डॉ. साधनानन्द महाराज- पंचअग्नि अखाड़ा, महंत सत्यगिरि महाराज- पंचदशनाम आवाहन अखाड़ा, महंत सत्यम गिरी महाराज- पंचायती अटल अखाड़ा, महंत मुरली दास महाराज- पंच निर्वाणी अनी अखाड़ा, महंत वैष्णव दास महाराज- पंच दिगम्बर अनी अखाड़ा, महंत राजेन्द्र दास महाराज- पंच निर्मोही अनी अखाड़ा, महंत दुर्गादास महाराज- पंचायती बड़ा उदासीन अखाड़ा, महंत भगतराम दास महाराज- पंचायती नया उदासीन अखाड़ा, महंत जसविंदर महाराज- पंचायती निर्मल अखाड़ा, सांसद राज्यसभा कल्पना सैनी, विधायक हरिद्वार मदन कौशिक, विधायक रानीपुर आदेश चौहान, विधायक रुड़की प्रदीप बत्रा, महापौर नगर निगम हरिद्वार श्रीमती किरन जैसल, महापौर नगर निगम रुड़की श्रीमती अनीता देवी अग्रवाल, प्रदेश उपाध्यक्ष भाजपा/पूर्व मंत्री स्वामी यतीश्वरानन्द, आयुक्त गढ़वाल मंडल विनय शंकर पाण्डेय, आईजी गढ़वाल राजीव स्वरूप, मेलाधिकारी सोनिका, जिलाधिकारी हरिद्वार मयूर दीक्षित, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रमेंद्र सिंह डोभाल, मुख्य विकास अधिकारी ललित नारायण मिश्रा मौजूद थे।
पेयजल, सड़क, सुरक्षात्मक कार्य और भवनों से जुड़े प्रस्ताव एक सप्ताह में तैयार करने के आदेश
देहरादून। कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने शुक्रवार को अपने कैंप कार्यालय में मसूरी विधानसभा क्षेत्र में चल रहे विकास कार्यों और क्षेत्र में आपदा के पुनर्निर्माण कार्यों की समीक्षा की। बैठक में लोक निर्माण विभाग, पीएमजीएसवाई, जल संस्थान, पेयजल निगम, सिंचाई विभाग, लघु सिंचाई तथा जिला प्रशासन के अधिकारी मौजूद रहे।
बैठक के दौरान मंत्री गणेश जोशी ने सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए आपदा प्रभावित क्षेत्रों में पुनर्निर्माण कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पेयजल, सीवर लाइन, सड़क मार्ग, सुरक्षात्मक कार्य, आंतरिक मार्ग, विद्यालय, पंचायत भवन आदि से संबंधित प्रस्तावों को आपदा मद में तैयार कर शीघ्र स्वीकृति हेतु भेजा जाए, ताकि प्रभावित क्षेत्रों में जल्द से जल्द पुनर्निर्माण कार्य शुरू किए जा सकें।
कैबिनेट मंत्री ने लोक निर्माण विभाग व पीएमजीएसवाई के अधिकारियों को विशेष रूप से निर्देशित किया कि सेरकी सिल्ला, भैंसवाड़ गांव, छमरौली, घंतूकासेरा, क्यारा, सिमयारी, सरखेत, भैंकलीखाला, क्यारा–धनोल्टी मार्ग, फुलेत, सरोना, कार्लीगाड़, लोहारीगढ़ सहित अन्य प्रभावित क्षेत्रों में सड़क निर्माण एवं मरम्मत संबंधी सभी इस्टीमेट और शासन से जुड़े कार्य एक सप्ताह के भीतर पूर्ण किए जाएं। उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्धारित समयसीमा में कार्यों को धरातल पर उतारना विभागों की जिम्मेदारी है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मंत्री जोशी ने सम्बंधित सभी विभागों के अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि पुनर्निर्माण कार्यों को तेज़ी से आगे बढ़ाया जाए।
इस अवसर पर जिला पंचायत सदस्य वीर सिंह चौहान, पीडब्ल्यूडी अधिशासी अभियंता राजेश कुमार, अधिशासी अभियंता पीएमजीएसवाई आर. एस.गुसाई, सहायक अभियंता सिंचाई एस.सी तिवारी, सहायक अभियंता जल संस्थान विवेक कुमार, अपर सहायक अभियंता लघु सिंचाई संदीप कुमार सहित अन्य अधिकारीगण एवं जनप्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।
अधिवेशन का मुख्य विषय “विकसित भारत @ 2047 में जनसंपर्क की भूमिका” किया गया निर्धारित
देहरादून। पब्लिक रिलेशंस सोसाइटी ऑफ इंडिया (PRSI) के डेलीगेशन ने राज्यसभा सांसद डॉ. नरेश बंसल के नेतृत्व में आज मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से शिष्टाचार भेंट की। आगामी 13, 14 एवं 15 दिसंबर को देहरादून में आयोजित होने जा रहे राष्ट्रीय जनसंपर्क अधिवेशन के लिए मुख्यमंत्री को औपचारिक आमंत्रण दिया गया। इस अवसर पर प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को अधिवेशन का ब्रोशर भेंट करते हुए संस्था की गतिविधियों एवं उद्देश्यों की विस्तृत जानकारी दी।
प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि इस वर्ष अधिवेशन का मुख्य विषय “विकसित भारत @ 2047 में जनसंपर्क की भूमिका” निर्धारित किया गया है। सम्मेलन में देशभर के विभिन्न राज्यों से 300 से अधिक प्रतिनिधि भाग लेंगे। उत्तराखंड के रजत जयंती वर्ष को ध्यान में रखते हुए अधिवेशन में राज्य की विकास यात्रा, उपलब्धियों तथा भविष्य की संभावनाओं पर विशेष सत्र भी आयोजित किए जाएंगे।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून में राष्ट्रीय अधिवेशन आयोजित होने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा निर्धारित विकसित भारत @ 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने में जनसंपर्क की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के पर्यटन, संस्कृति एवं स्थानीय उत्पादों की प्रभावी ब्रांडिंग की दिशा में जनसंपर्क माध्यम अहम योगदान दे सकते हैं। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया के सकारात्मक उपयोग, जनता से सतत संवाद, फेक न्यूज़ की रोकथाम तथा मीडिया-जनसंपर्क क्षेत्र में एआई के बढ़ते प्रभाव पर भी मंथन की आवश्यकता पर जोर दिया।
इस अवसर पर पीआरएसआई देहरादून चैप्टर के अध्यक्ष रवि बिजारनिया, सचिव अनिल सती, कोषाध्यक्ष सुरेश भट्ट, संयोजक सिद्धार्थ बंसल, सदस्य वैभव गोयल, अनिल वर्मा, अजय डबराल, संजय भार्गव और प्रियांक वशिष्ठ भी उपस्थित रहे।
विवाह समारोह से लौटते समय हुआ हादसा
मसूरी के सेंट जॉर्ज स्कूल में योग शिक्षक के रूप में थे कार्यरत
देहरादून। थत्यूड़–मसूरी–देहरादून मोटर मार्ग पर सटागाड़ के पास देर रात एक दर्दनाक सड़क दुर्घटना हो गई, जिसमें एक कार गहरी खाई में गिरने से चालक की मौत हो गई। मृतक की पहचान थत्यूड़ क्षेत्र के अलमस गांव निवासी अमित पवार के रूप में हुई है। देर रात हुई इस दुर्घटना के समय अमित पवार, जो अलमस गांव के रहने वाले थे, ओडारसू गांव से एक विवाह समारोह में शामिल होकर वापस घर लौट रहे थे। घटना स्थल उनके गांव से लगभग चार किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, जहां अचानक वाहन अनियंत्रित होकर नीचे खाई में जा गिरा।
सुबह जब स्थानीय लोग मॉर्निंग वॉक पर निकले तो सड़क किनारे क्षतिग्रस्त वाहन और नीचे खाई में पड़े शव को देखकर घटना की जानकारी मिली। तुरंत ही इसकी सूचना थाना थत्यूड़ पुलिस को दी गई। सूचना पर पुलिस टीम मौके पर पहुंची और 108 एंबुलेंस सेवा की मदद से घायल अवस्था में पड़े अमित को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र थत्यूड़ ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
थानाध्यक्ष महावीर रावत ने बताया कि घटना की सूचना परिजनों को दे दी गई है और आगे की प्रक्रिया के तहत शव को पोस्टमॉर्टम के लिए सिविल अस्पताल मसूरी भेजा जाएगा। अमित पवार सेंट जॉर्ज स्कूल मसूरी में योग शिक्षक के रूप में कार्यरत थे और परिवार में अकेले कमाने वाले सदस्य थे। हादसे की खबर मिलते ही गांव और परिवार में शोक की लहर दौड़ गई। माता–पिता अपने इकलौते बेटे की आकस्मिक मौत से गहरे सदमे में हैं।
ऊपरी यमुना नदी बोर्ड की 9वीं रिव्यू कमेटी की बैठक, राज्यों के बीच जल बंटवारे पर हुई गहन चर्चा
देहरादून/नोएडा। ऊपरी यमुना नदी बोर्ड की 9वीं रिव्यू कमेटी की बैठक में प्रदेश के सिंचाई मंत्री सतपाल महाराज ने राज्य में सिंचाई की कमी से पर्वतीय इलाकों में उगने वाली नकदी फसल फल, सब्जी आदि की उत्पादकता में कमी से पलायन का जिक्र करते हुए उत्तराखंड राज्य को उसकी मांग के अनुसार यमुना जल आवंटित किए जाने का अनुरोध किया।
नोएडा, गौतम बुद्ध नगर स्थित ऊपरी यमुना नदी बोर्ड भवन में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल की अध्यक्षता में भारत सरकार, जल शक्ति मंत्रालय, जल संसाधन गंगा संरक्षण विभाग, ऊपरी यमुना नदी बोर्ड द्वारा आयोजित रिव्यू कमेटी की नवीं बैठक में यमुना नदी से संबंधित विभिन्न विषयों पर चर्चा की गई, जिनमें जलस्तर, प्रदूषण और जल-बंटवारे के मुद्दे शामिल रहे।
बैठक में प्रदेश के सिंचाई मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि ऊपरी यमुना बेसिन राज्यों उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली इन पांचों राज्यों के मध्य जल बंटवारे को लेकर 12 मई 1994 को एक समझौता हुआ और यमुना बेसिन राज्यों के बीच यमुना जल प्रवाह में से उत्तर प्रदेश को कुल 4.032 बी.सी. एम. जल आवंटित किया गया था। वर्ष 2000 में उत्तराखंड अलग राज्य बनने के बाद ऊपरी यमुना नदी बोर्ड समिति का छठ सदस्य बना। लेकिन उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के बीच यमुना जल बंटवारे को लेकर समझौता न हो पाने की स्थिति में केंद्र के हस्तक्षेप के बाद उत्तराखंड राज्य को उसकी मांग से लगभग 32% कम यमुना जल आवंटित किया गया।
महाराज ने बैठक के दौरान राज्य का पक्ष रखते हुए कहा कि ऊपरी यमुना नदी बोर्ड की 8वीं रिव्यू कमेटी की 21 फरवरी 2024 की बैठक में उत्तराखंड राज्य को तत्कालीन उत्तर प्रदेश के 4.032 बी.सी.एम. यमुना जल के हिस्से में से 0.311बी.सी.एम.यमुना जल आवंटित हुआ था जो कि मांग से 32 प्रतिशत कम था। यमुना जल आवंटन को लेकर सहमति इस शर्त के साथ दी गई थी कि 2025 के बाद समझौता ज्ञापन 12 मई 1994 की समीक्षा की जाएगी।
महाराज ने कहा कि उत्तराखंड राज्य को लखवाड़ एवं किशाऊ बहुउद्देश्य परियोजनाओं से निर्मित होने वाले जलाशयों के दुष्परिणाम का भी सामना करना पड़ेगा राज्य में सिंचाई सुविधा बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं। इसलिए समझौता ज्ञापन 12 मई 1994 की समीक्षा करते हुए उत्तराखंड राज्य को यमुना जल की उपलब्धता के अनुपात में जल आवंटित किया जाये।
महाराज ने दिल्ली में यमुना जल को दूषित होने से बचाने के लिए हरियाणा से यमुना नदी में अमोनिया और अन्य प्रदूषकों के निर्वहन को रोकने के लिए फैक्ट्रियों के पानी का पहले ट्रीटमेंट किया जाने का सुझाव देते हुए कहा कि इसके लिए, फैक्ट्रियों को अमोनिया-विशिष्ट उपचार प्रौद्योगिकियों में निवेश करना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके अपशिष्ट का यमुना में छोड़े जाने से पहले ठीक से उपचार किया जाए।
ऊपरी यमुना नदी बोर्ड, रिव्यू कमेटी की नवीं बैठक में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल, उत्तर प्रदेश के जल शक्ति मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह, दिल्ली के सिंचाई मंत्री प्रवेश वर्मा, हरियाणा की सिंचाई मंत्री श्रीमति श्रुति चौधरी और राजस्थान के सिंचाई मंत्री सुरेश सिंह रावत मौजूद रहे।
श्रेयस तलपड़े और आलोक नाथ पर भी शिकंजा
देहरादून। जनता से करोड़ों रुपये हड़पने वाली लोनी अर्बन मल्टी क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट कोऑपरेटिव सोसायटी (एलयूसीसी) के खिलाफ अब कार्रवाई की बड़ी शुरुआत हो गई है। हाईकोर्ट के आदेशों के बाद सीबीआई ने सोसायटी और उसके 46 सहयोगियों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कर ली है। एफआईआर में कंपनी के ब्रांड एंबेसडर अभिनेता श्रेयस तलपड़े और अभिनेता आलोक नाथ के नाम भी शामिल किए गए हैं।
इससे पहले राज्य पुलिस इस घोटाले में 18 मामले दर्ज कर चुकी थी, जिनमें से 10 मामलों में चार्जशीट विशेष बड्स एक्ट कोर्ट में दाखिल हो चुकी है। हाईकोर्ट द्वारा सीबीआई जांच के आदेश दिए जाने के बाद केंद्रीय एजेंसी ने कोटद्वार कोतवाली में दर्ज पहली प्राथमिकी को आधार बनाते हुए यह बड़ा कदम उठाया है।
2019 में शुरू हुआ था जाल, लोगों की बचत पर ‘उच्च मुनाफे’ का लालच
एलयूसीसी ने वर्ष 2019 में उत्तराखंड में कई जिलों में तेजी से शाखाएँ खोलते हुए आम लोगों को कम समय में अधिक रिटर्न का प्रलोभन दिया। कंपनी ने छोटी-छोटी बचत से लेकर भारी निवेश तक सब कुछ एजेंटों के माध्यम से इकट्ठा किया। करोड़ों रुपये जुटाने के बाद अचानक कंपनी के दफ्तर बंद हो गए, जिससे निवेशकों में हड़कंप मच गया। कंपनी से जुड़े कई एजेंट भी खुद को अनजान बताते मिले।
पहली शिकायत कोटद्वार निवासी तृप्ति नेगी की ओर से एक जून को दर्ज कराई गई थी। इसके बाद पूरे प्रदेश से लगातार शिकायतें सामने आईं और पुलिस ने कुल 18 एफआईआर दर्ज कीं। मामले की जांच सीबीसीआईडी को भी सौंपी गई थी।
महिलाओं का बड़ा विरोध, सीएम आवास कूच तक—अब सीबीआई करेगी पूरी जांच
इस घोटाले ने प्रदेशभर में खासकर महिलाओं को भारी नुकसान पहुंचाया। कई जिलों में प्रदर्शन हुए और देहरादून में प्रभावित महिलाओं ने मुख्यमंत्री आवास तक कूच किया। पुलिस और सीबीसीआईडी कुल 10 मामलों में चार्जशीट दाखिल कर चुकी है, लेकिन हाईकोर्ट के निर्देश के बाद सीबीआई अब इस पूरे घोटाले की गहन जांच करेगी।
सीबीआई ने दर्ज की गई एफआईआर में अन्य सभी मामलों के तथ्यों और नामजद आरोपियों को भी शामिल किया है।
राज्य में थीं 35 शाखाएँ, विदेशों में निवेश का भी लालच दिया गया
एलयूसीसी ने उत्तराखंड में कुल 35 शाखाएँ संचालित की थीं। निवेशकों को देश-विदेश में सोना, तेल, रिफाइनरी सहित कई क्षेत्रों में भारी मुनाफे का दावा कर पैसे जमा कराए गए। कई मामलों में निवेश की अवधि पूरी होने के बाद भी लोगों को पैसा वापस नहीं मिला। पहले भी पुलिस इस घोटाले में कई गिरफ्तारियाँ कर चुकी है।
चार सांसदों ने अमित शाह से की थी मुलाकात, सीबीआई जांच को मिली थी मंजूरी
घोटाले की गंभीरता को देखते हुए उत्तराखंड के चार सांसद—त्रिवेंद्र सिंह रावत, अनिल बलूनी, अजय भट्ट और माला राज्यलक्ष्मी शाह—ने 24 जुलाई को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मिलकर कार्रवाई की मांग की थी। इससे पहले ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी इस मामले में सीबीआई जांच की अनुमति दे चुके थे।
मुख्यमंत्री ने खिलाड़ी को शानदार प्रदर्शन पर बधाई देते हुए उज्ज्वल भविष्य की कामना की
देहरादून। वर्ल्ड बॉक्सिंग कप 2025 में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए रजत पदक जीतने वाले उत्तराखंड के प्रतिभाशाली बॉक्सर पवन बर्त्वाल ने मुख्यमंत्री आवास पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से शिष्टाचार भेंट की। मुख्यमंत्री ने पवन को अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन के लिए बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि राज्य सरकार खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के लिए लगातार प्रयासरत है।

उन्होंने बताया कि खेलों को बढ़ावा देना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। इसी उद्देश्य से प्रतिभावान खिलाड़ियों को हर संभव सहयोग उपलब्ध कराया जा रहा है। साथ ही राज्य में खेल इंफ्रास्ट्रक्चर को सुदृढ़ बनाने के लिए भी निरंतर कार्य किए जा रहे हैं।
सीएम ने आशा व्यक्त की कि पवन बर्त्वाल जैसे युवा खिलाड़ी आने वाले समय में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राज्य का नाम और अधिक रोशन करेंगे।
2026 के शैक्षणिक सत्र से कक्षाएं शुरू करने का लक्ष्य
कैबिनेट मंत्री ने विभाग की योजनाओं की समीक्षा की
देहरादून। प्रदेश की स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी शुरू करने की राह में लगातार बाधा बन रही फॉरेस्ट लैंड का मामला आखिर सुलझ गया है। वन विभाग से जमीन दिए जाने की सैद्धांतिक सहमति बनने के बाद अब 2026 के सत्र से यूनिवर्सिटी शुरू होने का रास्ता साफ हो गया है। खेल मंत्री रेखा आर्या ने विभाग की समीक्षा बैठक के बाद यह जानकारी दी।
विधानसभा भवन स्थित कार्यालय में आयोजित बैठक के बाद कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने बताया कि दो-तीन बार इस मामले की फाइल वन विभाग से लौटा दी गई थी। लेकिन अब दोनों पक्षों में सैद्धांतिक सहमति बन गई है। उन्होंने अधिकारियों को विश्वविद्यालय के पद सृजित कराने की प्रक्रिया को तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए।
कैबिनेट मंत्री ने बताया कि चंपावत में महिला स्पोर्ट्स कॉलेज का शिलान्यास राज्य स्थापना के रजत जयंती समारोह में प्रधानमंत्री ने किया था। इस बैठक में इस कॉलेज में भी अगले साल से कक्षाएं शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।
कैबिनेट मंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री उदीयमान खिलाड़ी उन्नयन योजना और मुख्यमंत्री खिलाड़ी प्रोत्साहन योजना के तहत अक्टूबर तक का पूरा पैसा लाभार्थियों को दिया जा चुका है । आगे के लिए बजट की डिमांड करने के निर्देश उन्होंने अधिकारियों को दे दिए हैं।
इसके अलावा पदक विजेताओं को आउट ऑफ टर्न जॉब देने के लिए खेल विभाग अब यह प्रस्ताव शासन को भेजेगा कि सारे अधिसंख्य पद खेल विभाग में ही सृजित किए जाएं। खेल मंत्री ने कहा कि दूसरे विभागों में आउट ऑफ टर्न जॉब देने के पुराने खराब अनुभव को देखते हुए विभाग अपने यहां ही अधिसंख्य पद चाहता है।
बैठक में खेल मंत्री ने इस पर नाराजगी जताई कि खेल विभाग के लिए आबकारी से ₹1 प्रति बोतल सेस का धन अब तक विभाग को क्यों नहीं मिल पाया है। उन्होंने अधिकारियों से इसमें तुरंत कदम उठाने के लिए कहा।
बैठक में विशेष प्रमुख खेल सचिव अमित सिन्हा, खेल निदेशक आशीष चौहान, अपर निदेशक अजय अग्रवाल, महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कॉलेज के प्राचार्य राजेश मंमगाई आदि मौजूद रहे।
