तेज रफ्तार और बस चालक की लापरवाही बनी दुर्घटना की वजह
मथुरा। मथुरा में यमुना एक्सप्रेस-वे पर शनिवार तड़के एक भीषण सड़क हादसा हो गया। तेज रफ्तार कंटेनर ने सड़क किनारे खड़े यात्रियों को कुचल दिया। हादसे में छह लोगों की मौत हो गई, जबकि एक यात्री गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना के बाद एक्सप्रेस-वे पर अफरा-तफरी मच गई और कुछ समय के लिए यातायात भी बाधित रहा।
यह दर्दनाक हादसा सुरीर थाना क्षेत्र के अंतर्गत माइल स्टोन 88 के पास तड़के करीब 2:45 बजे हुआ। दिल्ली से कानपुर जा रही एक निजी बस के कुछ यात्री लघुशंका के लिए बस से नीचे उतरे थे। आरोप है कि चालक ने एक्सप्रेस-वे के निर्धारित ग्रीन जोन में बस रोकने के बजाय सड़क किनारे ही वाहन खड़ा कर दिया। इसी दौरान पीछे से आ रहा एक तेज रफ्तार कंटेनर बस से टकराया और अनियंत्रित होकर नीचे खड़े यात्रियों को रौंदता चला गया।
मौके पर ही छह की मौत, एक घायल
हादसे में छह यात्रियों की घटनास्थल पर ही मौत हो गई, जबकि एक यात्री गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसे तत्काल नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। मृतकों में औरैया, बस्ती, कन्नौज, दिल्ली और फिरोजाबाद जिलों के निवासी शामिल हैं। हादसे की सूचना मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया।
पुलिस और प्रशासन मौके पर
घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस, एक्सप्रेस-वे सुरक्षा टीम और एंबुलेंस मौके पर पहुंची। शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया और क्षतिग्रस्त वाहनों को हटाकर यातायात बहाल कराया गया। पुलिस ने कंटेनर चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर उसकी तलाश शुरू कर दी है।
लापरवाही ने छीनी छह जिंदगियां
प्रारंभिक जांच में हादसे की बड़ी वजह बस चालक की लापरवाही मानी जा रही है। एक्सप्रेस-वे पर यात्रियों को केवल निर्धारित ग्रीन जोन में ही उतारने के नियम हैं, लेकिन इनका पालन न किए जाने से यह हादसा हुआ। तेज रफ्तार और नियमों की अनदेखी ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मुख्यमंत्री ने लिया संज्ञान
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मथुरा में हुए इस भीषण सड़क हादसे पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना जताते हुए अधिकारियों को राहत एवं बचाव कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही घायलों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने और घटना की विस्तृत जांच कराने के आदेश दिए गए हैं।
निजी स्कूलों को चेतावनी- नियम न मानने पर रद्द हो सकती है मान्यता
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को देशभर के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अहम निर्देश जारी करते हुए कहा कि सरकारी और निजी स्कूलों में पढ़ने वाली छात्राओं को मुफ्त बायोडिग्रेडेबल सैनेटरी पैड उपलब्ध कराए जाएं। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि मासिक धर्म से जुड़ा स्वास्थ्य और स्वच्छता, संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के मौलिक अधिकार का अभिन्न हिस्सा है।
छात्राओं की बुनियादी सुविधाओं पर सख्त रुख
अदालत ने कहा कि स्कूलों में शौचालय और मासिक धर्म स्वच्छता की सुविधाएं सुनिश्चित करना सरकारों की जिम्मेदारी है। यदि राज्य सरकारें और संबंधित प्राधिकरण इस दिशा में विफल रहते हैं, तो उन्हें इसके लिए जवाबदेह ठहराया जाएगा। न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति आर महादेवन की पीठ ने यह निर्देश कक्षा 6 से 12 तक की छात्राओं के लिए जारी किया है, जिसमें केंद्र सरकार की मासिक धर्म स्वच्छता नीति को पूरे देश में लागू करने पर जोर दिया गया है।
निजी स्कूलों को सख्त चेतावनी
सुप्रीम कोर्ट ने निजी स्कूलों को चेताते हुए कहा कि यदि वे छात्राओं और छात्रों के लिए अलग-अलग शौचालयों की व्यवस्था नहीं करते और छात्राओं को मुफ्त सैनेटरी पैड उपलब्ध कराने में असफल रहते हैं, तो उनकी मान्यता रद्द की जा सकती है। अदालत ने दो टूक कहा कि मासिक धर्म स्वास्थ्य केवल सुविधा नहीं, बल्कि एक मौलिक अधिकार है और इसमें किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
शौचालय व्यवस्था पर भी निर्देश
शीर्ष अदालत ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को यह भी सुनिश्चित करने को कहा है कि स्कूलों में लड़कियों और लड़कों के लिए अलग-अलग शौचालय हों। इसके साथ ही दिव्यांग छात्रों के अनुकूल शौचालयों की उपलब्धता को भी अनिवार्य बताया गया है।
जनहित याचिका पर आया फैसला
गौरतलब है कि यह फैसला जया ठाकुर द्वारा दायर जनहित याचिका पर आया है, जिसमें कक्षा 6 से 12 तक की किशोर छात्राओं के लिए सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में केंद्र सरकार की ‘स्कूल जाने वाली लड़कियों के लिए मासिक धर्म स्वच्छता नीति’ को पूरे देश में लागू करने की मांग की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में 10 दिसंबर 2024 को फैसला सुरक्षित रखा था।
गणतंत्र दिवस परेड 2026 में महाराष्ट्र की झांकी बनी नंबर-1
तीनों सेनाओं में सर्वश्रेष्ठ मार्चिंग दस्ता का पुरस्कार भारतीय नौसेना को मिला
नई दिल्ली। गणतंत्र दिवस परेड 2026 में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मार्चिंग दस्तों और झांकियों के विजेताओं की आधिकारिक घोषणा कर दी गई है। तीनों सेनाओं, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ), राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों तथा केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों की भागीदारी वाली इस परेड के प्रदर्शन का मूल्यांकन जजों के तीन अलग-अलग पैनलों द्वारा किया गया।
जजों के आकलन के आधार पर तीनों सेनाओं में सर्वश्रेष्ठ मार्चिंग दस्ता का पुरस्कार भारतीय नौसेना को दिया गया, जबकि सीएपीएफ/अन्य सहायक बलों में सर्वश्रेष्ठ मार्चिंग दस्ता का सम्मान दिल्ली पुलिस को मिला।
राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की झांकियों में शीर्ष तीन स्थान इस प्रकार रहे—
पहला स्थान महाराष्ट्र को ‘गणेशोत्सव: आत्मनिर्भरता का प्रतीक’ थीम पर आधारित झांकी के लिए मिला।
दूसरे स्थान पर जम्मू और कश्मीर की झांकी रही, जिसमें राज्य के हस्तशिल्प और लोक नृत्यों की झलक दिखाई गई।
तीसरे स्थान पर केरल की झांकी रही, जिसने ‘वॉटर मेट्रो और शत-प्रतिशत डिजिटल साक्षरता’ के माध्यम से आत्मनिर्भर भारत के लिए आत्मनिर्भर केरल का संदेश दिया।

केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों की श्रेणी में संस्कृति मंत्रालय की झांकी ‘वंदे मातरम — एक राष्ट्र की आत्मा की पुकार’ को सर्वश्रेष्ठ घोषित किया गया।
इसके अलावा, विशेष पुरस्कार भी प्रदान किए गए। इनमें केंद्रीय लोक निर्माण विभाग को ‘वंदे मातरम — 150 वर्षों का उत्सव’ के लिए सम्मानित किया गया, वहीं ‘वंदे मातरम: भारत की शाश्वत गूँज’ नृत्य समूह को भी विशेष पुरस्कार से नवाजा गया।
उधर, माईगॉव पोर्टल पर नागरिकों द्वारा किए गए ऑनलाइन मतदान के आधार पर पॉपुलर चॉइस श्रेणी के नतीजे भी घोषित किए गए। इस श्रेणी में तीनों सेनाओं में सर्वश्रेष्ठ मार्चिंग दस्ता का खिताब असम रेजिमेंट को मिला, जबकि सीएपीएफ/अन्य सहायक बलों में सीआरपीएफ को सबसे अधिक समर्थन प्राप्त हुआ।
पॉपुलर चॉइस के तहत राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की शीर्ष तीन झांकियां—
गुजरात (स्वदेशी का मंत्र – आत्मनिर्भरता – स्वतंत्रता: वंदे मातरम),
उत्तर प्रदेश (बुंदेलखंड की संस्कृति) और
राजस्थान (रेगिस्तान का सुनहरा स्पर्श: बीकानेर की स्वर्ण कला – उस्ता कला) रहीं।
वहीं, केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों में पॉपुलर चॉइस के तहत स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग की झांकी को ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020: भारतीय स्कूली शिक्षा को विकसित भारत की राह पर अग्रसर करना’ विषय पर सर्वश्रेष्ठ चुना गया।
पीएम मोदी ने जताया दुख
मुंबई। महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री अजित पवार का एक निजी विमान बारामती (पुणे, महाराष्ट्र) में लैंडिंग के दौरान हादसे का शिकार हो गया । दुर्घटना में अजित पवार की मौत हो गयी।
आज सुबह मुंबई से बारामती जा रहा उनका चार्टर्ड प्लेन लैंडिंग के दौरान रनवे से फिसल गया और आग लग गयी। विमान में डिप्टी सीएम अजित पवार सहित कुल 5-6 लोग थे। कोई भी बच नहीं पाया।
पीएम मोदी ने जताया दुख
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निधन पर शोक व्यक्त किया। उन्होंने ट्वीट किया, ‘अजित पवार जी लोगों के नेता थे, जिनका जमीनी स्तर पर मजबूत जुड़ाव था। उनका असमय निधन बहुत चौंकाने वाला और दुखद है। उनके परिवार और अनगिनत प्रशंसकों के प्रति संवेदनाएं। ओम शांति।’
13 फरवरी तक चलेगा बजट सत्र का पहला चरण
नई दिल्ली- संसद के आगामी बजट सत्र से पहले राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। इसी क्रम में मंगलवार को संसद भवन में सर्वदलीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें सरकार और विपक्ष के प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक का उद्देश्य बजट सत्र के दौरान संसद की कार्यवाही को सुचारु रूप से चलाने पर सहमति बनाना रहा। इस अहम बैठक की अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने की, जबकि संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू भी इसमें मौजूद रहे। विपक्ष की ओर से कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने बैठक में हिस्सा लिया।
बजट सत्र का पहला चरण बुधवार से आरंभ होगा। सत्र की औपचारिक शुरुआत राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण से होगी, जिसमें वे संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को संबोधित करेंगी। इसके बाद सरकार एक फरवरी को आम बजट पेश करेगी।
सत्र का यह प्रारंभिक चरण 13 फरवरी तक चलेगा। इस दौरान राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा होगी और उसे पारित किया जाएगा। साथ ही बजट को लेकर भी व्यापक विमर्श किया जाएगा। इसके बाद कुछ दिनों का अवकाश रहेगा।
दूसरे चरण की कार्यवाही 9 मार्च से दोबारा शुरू होगी, जो दो अप्रैल तक चलेगी। इस अवधि में बजट से जुड़े विधेयकों और अन्य महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर चर्चा और निर्णय किए जाएंगे।
गणतंत्र दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने किया सम्मानित
नई दिल्ली। गणतंत्र दिवस के अवसर पर भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को उनकी असाधारण उपलब्धियों के लिए अशोक चक्र से सम्मानित किया गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राजधानी के कर्तव्य पथ पर आयोजित भव्य समारोह में उन्हें यह सम्मान प्रदान किया। यह सम्मान भारत की अंतरिक्ष क्षमताओं को वैश्विक मंच पर नई पहचान दिलाने वाले उनके ऐतिहासिक योगदान के लिए दिया गया।
अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पहुंचने वाले पहले भारतीय बने शुभांशु शुक्ला
ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने जून 2025 में एक्सिओम मिशन-4 (Axiom-4) के तहत अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) तक सफल यात्रा कर इतिहास रच दिया। वह ISS पर कदम रखने वाले पहले भारतीय बने, जबकि अंतरिक्ष यात्रा करने वाले वह दूसरे भारतीय हैं। इससे पूर्व वर्ष 1984 में राकेश शर्मा ने सोवियत संघ के सोयूज मिशन के माध्यम से अंतरिक्ष की यात्रा की थी। शुभांशु शुक्ला ने इस मिशन के दौरान 18 दिनों तक अंतरिक्ष में रहकर कई महत्वपूर्ण वैज्ञानिक प्रयोगों में भाग लिया।
वायुसेना से अंतरिक्ष तक का प्रेरणादायक सफर
एक कुशल और अनुभवी फाइटर पायलट के रूप में ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला के पास 2,000 घंटे से अधिक का उड़ान अनुभव है। उन्होंने सुखोई-30 एमकेआई, मिग-21, मिग-29, जगुआर, हॉक, डोर्नियर और एएन-32 जैसे अत्याधुनिक विमानों का संचालन किया है। एक्सिओम-4 मिशन में उन्होंने पायलट की अहम भूमिका निभाई और अंतरिक्ष में किए गए वैज्ञानिक प्रयोगों को अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों से सराहना मिली।
भारत की बढ़ती अंतरिक्ष शक्ति का प्रतीक
अमेरिका की निजी अंतरिक्ष कंपनी एक्सिओम स्पेस द्वारा संचालित इस मिशन में नासा, यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) और इसरो की साझेदारी रही। लखनऊ निवासी शुभांशु शुक्ला को वर्ष 2006 में भारतीय वायुसेना की फाइटर स्ट्रीम में कमीशन मिला था। उनका यह सम्मान और उपलब्धि भारत की मानव अंतरिक्ष उड़ान क्षमताओं, तकनीकी दक्षता और वैश्विक अंतरिक्ष मंच पर सशक्त उपस्थिति का प्रतीक मानी जा रही है।
प्रधानमंत्री मोदी ने तिरुवनंतपुरम में किया भव्य रोड शो
प्रधानमंत्री ने पीएम स्वनिधि क्रेडिट कार्ड योजना का किया शुभारंभ
तिरुवनंतपुरम। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम में भव्य रोड शो किया। थंपानूर ओवरब्रिज से पुथरिकंडम मैदान तक निकाले गए इस रोड शो के दौरान प्रधानमंत्री का जगह-जगह जोरदार स्वागत किया गया। इस अवसर पर उन्होंने कई विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया, साथ ही विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों को सहायता प्रदान की।
प्रधानमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान पीएम स्वनिधि क्रेडिट कार्ड योजना का शुभारंभ किया और एक लाख से अधिक रेहड़ी-पटरी व लघु व्यवसाय से जुड़े लाभार्थियों को ऋण वितरित किए। उन्होंने इन योजनाओं को शहरी गरीबों और छोटे कारोबारियों के लिए आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम बताया।
विकसित भारत के निर्माण में शहरों की अहम भूमिका
सभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए देश एकजुट होकर आगे बढ़ रहा है और इस यात्रा में शहरों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि पिछले 11 वर्षों में केंद्र सरकार ने शहरी आधारभूत ढांचे पर व्यापक निवेश किया है, जिससे आम नागरिकों को बेहतर सुविधाएं मिल रही हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार ने शहरी गरीबों के कल्याण के लिए अनेक योजनाएं लागू की हैं। पीएम आवास योजना के तहत देशभर में चार करोड़ से अधिक पक्के घर बनाए गए हैं, जिनमें से एक करोड़ से अधिक घर शहरी गरीबों को मिले हैं। उन्होंने बताया कि केरल में भी सवा लाख से अधिक शहरी गरीब परिवारों को पक्का आवास उपलब्ध कराया गया है।
गरीब और मध्यम वर्ग के लिए कल्याणकारी योजनाएं
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के माध्यम से गरीब परिवारों के बिजली खर्च में राहत दी जा रही है। आयुष्मान भारत योजना के तहत पात्र परिवारों को पांच लाख रुपये तक का मुफ्त स्वास्थ्य उपचार मिल रहा है। महिलाओं के स्वास्थ्य और पोषण को ध्यान में रखते हुए मातृ वंदना योजना लागू की गई है।
उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने 12 लाख रुपये तक की वार्षिक आय को कर मुक्त कर मध्यम वर्ग और नौकरीपेशा लोगों को बड़ी राहत दी है, जिसका लाभ केरल के लोगों को भी मिला है।
बैंकिंग से जुड़ रहे गरीब, सरकार बनी गारंटर
प्रधानमंत्री ने कहा कि बीते 11 वर्षों में करोड़ों लोगों को बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ा गया है। अब एससी, एसटी, ओबीसी, महिलाएं और मछुआरे भी आसानी से बैंक ऋण प्राप्त कर पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिनके पास गारंटर नहीं है, उनके लिए सरकार स्वयं गारंटर बन रही है।
रेहड़ी-पटरी वालों को मिला क्रेडिट कार्ड
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पीएम स्वनिधि योजना के जरिए रेहड़ी-पटरी वालों को पहली बार बैंकिंग सुविधा का लाभ मिला है। अब सरकार ने एक कदम आगे बढ़ाते हुए उन्हें क्रेडिट कार्ड उपलब्ध कराए हैं। उन्होंने बताया कि केरल में 10 हजार और तिरुवनंतपुरम में 600 रेहड़ी-पटरी वालों को पीएम स्वनिधि क्रेडिट कार्ड दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि यह बदलाव सामाजिक और आर्थिक समावेशन की दिशा में ऐतिहासिक कदम है।
कई जवान घायल, 3 की हालत गंभीर
डोडा (जम्मू-कश्मीर)। जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया है। भद्रवाह–चंबा मार्ग पर खन्नी टॉप के समीप सेना का वाहन गहरी खाई में गिर गया, जिसमे दस जवानों की मौत हो गई, जबकि कई घायल हो गए।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, बुलेटप्रूफ सैन्य वाहन एक नजदीकी पोस्ट की ओर जा रहा था। वाहन में लगभग 17 जवान सवार थे। पहाड़ी और संकरी सड़क पर चलते समय चालक का वाहन से संतुलन बिगड़ गया, जिसके बाद वाहन नीचे खाई में जा गिरा।
हादसे की सूचना मिलते ही सेना और स्थानीय पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और संयुक्त रूप से राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया गया। कड़ी मशक्कत के बाद खाई से दस जवानों के शव निकाले गए, जबकि घायल जवानों को बाहर निकालकर तत्काल चिकित्सा सहायता दी गई।
घायलों में से तीन जवानों की हालत गंभीर बताई जा रही है, जिन्हें बेहतर इलाज के लिए एयरलिफ्ट कर उधमपुर स्थित सैन्य अस्पताल भेजा गया है। शेष घायलों का उपचार नजदीकी सैन्य चिकित्सा केंद्रों में जारी है। हादसे के कारणों की जांच की जा रही है।
विस्फोट में 5 मजदूर गंभीर घायल
बलौदाबाजार (छत्तीसगढ़)। छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार-भाटापारा जिले में गुरुवार को एक औद्योगिक दुर्घटना ने पूरे क्षेत्र को दहला दिया। ग्राम बकुलाही स्थित एक इस्पात संयंत्र में क्लिनिकल फर्नेस के दौरान जोरदार विस्फोट हो गया जिसमे छह मजदूरों की मौत हो गई, जबकि पांच अन्य गंभीर रूप से झुलस गए। हादसे के बाद संयंत्र परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
फर्नेस ब्लास्ट से मची अफरा-तफरी
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, क्लिनिकल फर्नेस के संचालन के दौरान अचानक तेज धमाका हुआ, जिससे आसपास काम कर रहे मजदूर इसकी चपेट में आ गए। विस्फोट की आवाज दूर तक सुनाई दी, वहीं आग और धुएं के कारण कर्मचारियों में दहशत फैल गई। घायल मजदूरों को तत्काल भाटापारा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां से उनकी गंभीर हालत को देखते हुए प्राथमिक उपचार के बाद बिलासपुर रेफर कर दिया गया।
प्रशासन और पुलिस मौके पर
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया। बलौदाबाजार कलेक्टर दीपक सोनी और पुलिस अधीक्षक भावना गुप्ता ने घटनास्थल का निरीक्षण कर हादसे की पुष्टि की। अधिकारियों के अनुसार इस दुर्घटना में छह मजदूरों की जान गई है, जबकि पांच घायल मजदूरों का इलाज जारी है।
जांच के आदेश, सुरक्षा मानकों पर उठे सवाल
प्रशासन ने हादसे के कारणों की जांच के निर्देश दिए हैं। प्रारंभिक तौर पर फर्नेस में तकनीकी खराबी या सुरक्षा मानकों की अनदेखी की आशंका जताई जा रही है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
घायल मजदूरों के नाम
हादसे में घायल हुए मजदूरों की पहचान इस प्रकार की गई है—
मोटाज अंसारी (26), सराफत अंसारी (32), साबिर अंसारी (37) — सभी बढ़ई, एमएस
कल्पू भुइया (51) और रामू भुइया (34) — हेल्पर
प्रशासन ने मृतकों के परिजनों को हरसंभव सहायता का भरोसा दिलाया है।
वैवाहिक विवादों में AI से बने फर्जी सबूतों पर सुप्रीम कोर्ट ने जताई कड़ी चिंता
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने वैवाहिक विवादों में फर्जी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के जरिए तैयार किए जा रहे साक्ष्यों पर कड़ी चिंता जताई है। शीर्ष अदालत ने कहा है कि दांपत्य संबंधों में तनाव बढ़ते ही कई मामलों में एक-दूसरे को नुकसान पहुंचाने की सोच हावी हो जाती है, जिसके चलते झूठे आरोप लगाए जाते हैं और तकनीक का सहारा लेकर नकली सबूत तक गढ़े जा रहे हैं। अदालत ने इसे न्यायिक प्रक्रिया के लिए गंभीर चुनौती बताया है।
AI के दुरुपयोग से बढ़ रही न्यायिक मुश्किलें
न्यायमूर्ति राजेश बिंदल और न्यायमूर्ति मनमोहन की पीठ ने एक वैवाहिक विवाद का निपटारा करते हुए यह टिप्पणी की। पीठ ने कहा कि आधुनिक तकनीक, विशेषकर AI, ने झूठे साक्ष्य तैयार करना बेहद आसान बना दिया है, जिससे अदालतों के सामने सच्चाई तक पहुंचना कठिन होता जा रहा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस तरह के कृत्य न केवल कानून का दुरुपयोग हैं, बल्कि न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता को भी नुकसान पहुंचाते हैं।
हर विवाद में पुलिस का सहारा लेने पर सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने वैवाहिक मामलों में छोटी-छोटी बातों पर पुलिस में शिकायत दर्ज कराने की प्रवृत्ति पर भी नाराजगी जताई। अदालत ने कहा कि कई बार विवाद होते ही यह सोच बना ली जाती है कि दूसरे पक्ष को किसी भी हाल में सबक सिखाना है। इसके चलते कानूनी लड़ाइयों की शुरुआत हो जाती है, जो समय के साथ और अधिक जटिल रूप ले लेती हैं।
मध्यस्थता और काउंसलिंग पर दिया जोर
पीठ ने सुझाव दिया कि वैवाहिक विवादों में सबसे पहले मध्यस्थता और सुलह के प्रयास किए जाने चाहिए। अदालत ने कहा कि वकीलों के मार्गदर्शन में गंभीरता से मध्यस्थता की कोशिश होनी चाहिए और जहां आवश्यक हो, वहां काउंसलिंग को भी प्राथमिकता दी जानी चाहिए। अदालत का मानना है कि इससे कई मामलों में रिश्तों को टूटने से बचाया जा सकता है।
गिरफ्तारी से बिगड़ते हैं हालात
सुप्रीम कोर्ट ने चेतावनी दी कि साधारण वैवाहिक विवादों में गिरफ्तारी जैसी कार्रवाई कई बार हालात को और खराब कर देती है। अदालत ने कहा कि चाहे गिरफ्तारी एक दिन के लिए ही क्यों न हो, वह अक्सर सुलह और पुनर्मिलन की संभावनाओं को समाप्त कर देती है। इसलिए पुलिस कार्रवाई से पहले विवाद सुलझाने के अन्य विकल्पों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।
लंबे समय से टूटे रिश्ते का मामला
इस फैसले में अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि संबंधित दंपति का विवाह 13 वर्षों से अधिक समय से पूरी तरह टूट चुका था। दोनों ने शादी के बाद केवल 65 दिन साथ बिताए थे, जबकि इसके बाद एक दशक से ज्यादा समय तक विभिन्न अदालतों में 40 से अधिक मुकदमे चलते रहे। इन मामलों में तलाक, भरण-पोषण, घरेलू हिंसा, दहेज उत्पीड़न से जुड़े आपराधिक केस और अन्य कानूनी कार्यवाहियां शामिल थीं। इन परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने विवाह को अपरिवर्तनीय रूप से टूट चुका मानते हुए उसे भंग कर दिया।
