नागरिकता मुद्दे पर ममता बनर्जी ने कहा– पीढ़ियों से देश के नागरिक हैं मतुआ लोग
कोलकाता। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गुरुवार को केंद्र सरकार पर मतुआ समुदाय को लेकर राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि नागरिकता के मुद्दे पर केंद्र की नीतियों से मतुआ समुदाय के लोगों में असमंजस और असुरक्षा की स्थिति पैदा हो रही है। मतुआ समुदाय की आध्यात्मिक नेता बिनापानी देवी ‘बरोमा’ की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि वर्षों से देश में रह रहे लोगों की नागरिकता पर सवाल खड़ा करना उचित नहीं है।
कई पीढ़ियों से देश के नागरिक हैं मतुआ समुदाय के लोग
ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि मतुआ समुदाय के लोग कई पीढ़ियों से भारत में रह रहे हैं और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लेते आए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि नागरिकता के नाम पर उन्हें अनिश्चितता और भ्रम की स्थिति में डालने की कोशिश की जा रही है। बनर्जी ने कहा कि मतदाता सूची से नाम हटाने जैसी प्रक्रियाओं के जरिए समुदाय को परेशान किया जा रहा है।
अधिकारों से समझौता नहीं करेगी राज्य सरकार
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार मतुआ समुदाय के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार से समुदाय के अधिकारों को कमजोर करने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी। राज्य सरकार ऐसे हर कदम का विरोध करेगी जो बंगाल के लोगों के हितों के खिलाफ होगा।
बरोमा से रहा विशेष जुड़ाव
ममता बनर्जी ने कहा कि बिनापानी देवी के साथ उनका व्यक्तिगत और आध्यात्मिक संबंध रहा है और उन्हें उनका मातृस्नेह प्राप्त हुआ था। उन्होंने बरोमा के सामाजिक योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने जीवनभर समानता और भाईचारे के मूल्यों को आगे बढ़ाने का काम किया।
समुदाय के विकास के लिए कई पहल
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने मतुआ समुदाय के कल्याण के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं। इनमें मतुआ विकास बोर्ड की स्थापना और उत्तर 24 परगना के ठाकुरनगर में हरिचंद-गुरुचंद विश्वविद्यालय की स्थापना जैसे कदम शामिल हैं। उन्होंने कहा कि सरकार आगे भी समुदाय के सामाजिक और शैक्षिक विकास के लिए काम करती रहेगी।
गृह मंत्री अमित शाह ने राज्य सरकार की नीतियों पर उठाये सवाल
पश्चिम बंगाल। गृह मंत्री अमित शाह ने पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल को तेज करते हुए दक्षिण 24 परगना में आयोजित एक जनसभा में विपक्ष पर तीखा हमला बोला। अपने संबोधन में उन्होंने राज्य सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए विकास और कानून-व्यवस्था के मुद्दों को प्रमुखता से सामने रखा।
गृह मंत्री ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार पर तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया और कहा कि इससे राज्य की प्रगति प्रभावित हुई है। उन्होंने दावा किया कि पश्चिम बंगाल आर्थिक दबाव में है और भारी कर्ज के बोझ से जूझ रहा है। साथ ही उन्होंने मदरसों को दी जा रही आर्थिक सहायता को लेकर भी सवाल उठाए।
सभा के दौरान अमित शाह ने अन्य राज्यों की राजनीति पर भी टिप्पणी करते हुए परिवारवाद के मुद्दे को उठाया। उन्होंने विभिन्न विपक्षी दलों पर आरोप लगाया कि वे क्षेत्रीय राजनीति को परिवार तक सीमित कर रहे हैं, जिससे लोकतांत्रिक मूल्यों को नुकसान पहुंच रहा है।
भाजपा की रणनीति पर बोलते हुए शाह ने कहा कि पार्टी की “परिवर्तन यात्रा” का उद्देश्य राज्य में राजनीतिक बदलाव लाना और विकास को गति देना है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर राज्य में भाजपा की सरकार बनती है तो भ्रष्टाचार पर रोक लगाई जाएगी और प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार में पारदर्शिता की कमी है और सत्ता का केंद्रीकरण बढ़ रहा है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि राज्य की सुरक्षा और सीमाई इलाकों में घुसपैठ एक गंभीर चुनौती बनी हुई है, जिस पर सख्त कदम उठाने की जरूरत है।
अमित शाह ने आश्वासन दिया कि भाजपा सत्ता में आने पर सीमा सुरक्षा को सुदृढ़ करेगी और नागरिकों के हितों की रक्षा को प्राथमिकता देगी। इसके अलावा उन्होंने सरकारी कर्मचारियों के लिए सातवें वेतन आयोग के अनुरूप वेतन व्यवस्था लागू करने का भी वादा किया।
जयराम रमेश ने कहा- ट्रंप का यह रुख पाकिस्तान को अप्रत्यक्ष समर्थन देने जैसा है, जो क्षेत्रीय सुरक्षा के लिहाज से चिंताजनक
नई दिल्ली। अमेरिका की राजनीति से जुड़े हालिया बयान ने भारत की सियासत में नया विवाद खड़ा कर दिया है। डोनाल्ड ट्रंप द्वारा पाकिस्तान की तारीफ और अफगानिस्तान से जुड़े मुद्दों पर उसके समर्थन की बात कहे जाने के बाद, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री पर कड़ा हमला बोला है।
कांग्रेस ने इस पूरे घटनाक्रम को भारत की विदेश नीति के लिए झटका बताते हुए कहा कि इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की कूटनीतिक स्थिति पर सवाल खड़े होते हैं। कांग्रेस के संचार प्रभारी जयराम रमेश ने बयान जारी कर कहा कि ट्रंप का यह रुख पाकिस्तान को अप्रत्यक्ष समर्थन देने जैसा है, जो क्षेत्रीय सुरक्षा के लिहाज से चिंताजनक है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार की कूटनीति अपेक्षित परिणाम देने में असफल रही है। उनके अनुसार, आर्थिक समझौतों में भारत को अपेक्षित लाभ नहीं मिला, जबकि अमेरिका को अधिक फायदे मिले हैं। साथ ही, हाल के व्यापारिक फैसलों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि भारत पर अतिरिक्त शुल्क लगाए जाना भी इसी असंतुलन को दर्शाता है।
रणनीतिक मोर्चे पर भी कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं। पार्टी का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की स्थिति को मजबूत करने के बजाय, कुछ बयानों और घटनाओं ने भारत-पाकिस्तान को एक ही नजरिये से देखने की धारणा को बढ़ावा दिया है।
यह विवाद उस समय और गहरा गया जब ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से पाकिस्तान के साथ अपने अच्छे संबंधों का जिक्र किया और वहां के नेतृत्व की सराहना की। इस बयान के बाद भारत में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है और केंद्र सरकार की विदेश नीति को लेकर बहस एक बार फिर चर्चा में आ गई है।
कमांडेंट जितेंद्र मोहन शिलस्वाल को लगातार दूसरे वर्ष मिला प्रतिष्ठित अवॉर्ड
गुवाहाटी। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के 87वें स्थापना दिवस के गौरवशाली अवसर पर, कमांडेंट जितेंद्र मोहन शिलस्वाल और उनकी 18वीं बटालियन को एक बार फिर जम्मू-कश्मीर सेक्टर की ‘सर्वश्रेष्ठ बटालियन ट्रॉफी’ से नवाजा गया है। उत्तराखंड की माटी के लाल, कमांडेंट शिलस्वाल द्वारा लगातार दूसरे वर्ष यह प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त करना उनके उत्कृष्ट रणनीतिक नेतृत्व का प्रमाण है। गुवाहाटी के सरुसजाई स्टेडियम में आयोजित भव्य परेड के दौरान मुख्य अतिथि, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने स्वयं यह ट्रॉफी प्रदान की।
सीआरपीएफ की विविध शक्तियों का भव्य प्रदर्शन
स्थापना दिवस परेड के दौरान सीआरपीएफ की अदम्य शक्ति और तकनीकी कौशल का शानदार प्रदर्शन किया गया।कोबरा कमांडो का हैरतअंगेज प्रदर्शन: कोबरा (CoBRA) यूनिट के कमांडो ने हेलीकॉप्टर से उतरने (स्लिदरिंग) और दुश्मन के ठिकानों को नष्ट करने का जीवंत प्रदर्शन किया।
नारी शक्ति का परचम: महिला बाइकर्स दस्ते के साहसी करतबों और महिला मार्चिंग टुकड़ी ने स्टेडियम में मौजूद दर्शकों का दिल जीत लिया।
आधुनिक हथियारों का प्रदर्शन: परेड में ड्रोन तकनीक, माइन-प्रोटेक्टेड वाहन और बल द्वारा उपयोग किए जाने वाले आधुनिक हथियारों की प्रदर्शनी भी लगाई गई।
कार्यक्रम की मुख्य विशेषताएं:
• नक्सलवाद का अंत: अपने संबोधन में गृह मंत्री अमित शाह ने 31 मार्च, 2026 तक देश को नक्सलवाद से पूरी तरह मुक्त करने का संकल्प दोहराया और इसमें 18वीं बटालियन जैसी इकाइयों के योगदान को सराहा।
जम्मू-कश्मीर में शांति: गृह मंत्री ने कहा कि 18वीं बटालियन जैसे वीर दस्तों की मुस्तैदी के कारण ही कश्मीर में अब पत्थरबाजी बीते दौर की बात हो गई है और विकास का नया अध्याय शुरू हुआ है।
• उत्तराखंड का गौरव: कमांडेंट शिलस्वाल की इस ऐतिहासिक जीत ने देवभूमि की सैन्य परंपरा को एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित किया है।
माफी से काम नहीं चलेगा- सुप्रीम कोर्ट की एनसीईआरटी को कड़ी चेतावनी
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने कक्षा 8 की एक पाठ्यपुस्तक में ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ से जुड़े विवादित अंश को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए एनसीईआरटी को सख्त निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि न्यायपालिका की गरिमा से समझौता किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा और जब तक संतोषजनक जवाब नहीं मिलता, मामले की निगरानी जारी रहेगी।
सुनवाई के दौरान अदालत ने संबंधित किताब के वितरण पर तत्काल रोक लगाने के साथ-साथ उसकी सभी प्रतियों को वापस लेने और डिजिटल संस्करण हटाने के आदेश दिए। पीठ ने कहा कि यह केवल एक शैक्षणिक त्रुटि नहीं, बल्कि गंभीर विषय है, जिसकी गहन जांच जरूरी है। अदालत ने शिक्षा विभाग और एनसीईआरटी के अधिकारियों को नोटिस जारी कर पूछा है कि इस चूक के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल माफी मांग लेना पर्याप्त नहीं है। शीर्ष न्यायालय ने कहा कि प्रथम दृष्टया यह मामला आपराधिक अवमानना के दायरे में आता है और इससे न्यायपालिका की विश्वसनीयता पर असर पड़ सकता है। इसलिए पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच की जाएगी।
इस बीच, केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बिना शर्त माफी जताई, जबकि एनसीईआरटी ने भी विवादित अंश हटाने और संशोधित पाठ्यपुस्तक जारी करने की बात कही है। संस्था ने अपनी ओर से इसे अनजाने में हुई गलती बताते हुए खेद प्रकट किया है।
मामले की अगली सुनवाई 11 मार्च को होगी। अदालत ने दोहराया कि किसी भी संस्था या व्यक्ति को न्यायपालिका की छवि धूमिल करने की अनुमति नहीं दी जा सकती और इस तरह के मामलों में सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
घूसखोर पंडित विवाद पर सुनवाई, शीर्षक बदलने के बाद मामला खत्म
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम टिप्पणी करते हुए स्पष्ट किया कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर किसी भी समुदाय का अपमान या उसे बदनाम करना स्वीकार्य नहीं है। अदालत ने कहा कि भाषण, मीम, कार्टून या किसी भी प्रकार की दृश्य कला के जरिए किसी वर्ग को नीचा दिखाना संविधान की भावना के खिलाफ है।
यह टिप्पणी घूसखोर पंडत फिल्म के शीर्षक को लेकर दायर याचिका की सुनवाई के दौरान सामने आई। न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां ने अपने अलग मत में कहा कि विशेष रूप से संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों को अधिक जिम्मेदारी के साथ व्यवहार करना चाहिए और धर्म, जाति, भाषा या क्षेत्र के आधार पर किसी समुदाय को निशाना बनाना संविधान का उल्लंघन है।
इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति भुइयां और न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना की पीठ ने की। निर्माताओं द्वारा फिल्म का शीर्षक बदलने के बाद अदालत ने मामले का निस्तारण कर दिया। हालांकि औपचारिक आदेश की आवश्यकता नहीं थी, फिर भी अदालत ने स्पष्ट किया कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की सीमाएं भी तय हैं और बंधुता का सिद्धांत सर्वोपरि है।
इस दौरान अदालत ने हाल के विवादों का भी अप्रत्यक्ष रूप से उल्लेख किया, जिनमें हिमंत बिस्वा सरमा से जुड़ा मामला भी शामिल है। शीर्ष अदालत पहले ही इस संबंध में दायर याचिकाओं पर सुनवाई से इनकार करते हुए पक्षकारों को उच्च न्यायालय जाने की सलाह दे चुकी है।
अदालत ने दो टूक कहा कि किसी भी माध्यम से किसी समुदाय को अपमानित करना असंवैधानिक है और यह सिद्धांत खास तौर पर उन लोगों पर लागू होता है जो सार्वजनिक पदों पर रहते हुए संविधान की रक्षा की शपथ लेते हैं।
खराब मौसम बना हादसे की वजह? उड़ान के कुछ देर बाद टूटा संपर्क
रांची। रांची से दिल्ली जा रही एक एयर एंबुलेंस की उड़ान एक बड़े हादसे में बदल गई। झारखंड के चतरा जिले के सिमरिया क्षेत्र में विमान के क्रैश होने से उसमें सवार सभी सात लोगों की मौत हो गई। यह हादसा न सिर्फ एक परिवार के सपनों को तोड़ गया, बल्कि पूरे इलाके को गहरे शोक में डुबो गया। जानकारी के मुताबिक, एयर एंबुलेंस ने शाम करीब 7 बजे रांची से उड़ान भरी थी और उसे रात तक दिल्ली पहुंचना था। लेकिन उड़ान के कुछ ही समय बाद विमान का संपर्क एयर ट्रैफिक कंट्रोल से टूट गया। बाद में पता चला कि विमान सिमरिया के जंगलों में दुर्घटनाग्रस्त हो गया।
विमान में एक गंभीर रूप से घायल मरीज संजय कुमार को बेहतर इलाज के लिए दिल्ली ले जाया जा रहा था। कुछ दिन पहले आग की घटना में वह बुरी तरह झुलस गए थे और उनकी हालत नाजुक बनी हुई थी। परिवार ने बड़ी मुश्किलों के बीच एयर एंबुलेंस की व्यवस्था की थी, ताकि उन्हें बेहतर चिकित्सा मिल सके।
इस उड़ान में मरीज के साथ उनकी पत्नी और अन्य परिजन भी मौजूद थे। इसके अलावा मेडिकल टीम और पायलट दल भी सवार था। लेकिन किसे पता था कि यह जीवन बचाने की कोशिश एक दर्दनाक अंत में बदल जाएगी।
बताया जा रहा है कि खराब मौसम के चलते पायलट ने रास्ता बदलने की अनुमति भी मांगी थी। कुछ समय तक संपर्क बना रहा, लेकिन अचानक विमान रडार से गायब हो गया। इसके बाद कोई संपर्क स्थापित नहीं हो सका और थोड़ी देर बाद दुर्घटना की खबर सामने आई।
इस हादसे में मरीज, उनके परिजन, डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ और दोनों पायलटों समेत कुल सात लोगों की मौत हो गई। यह घटना एक बार फिर आपातकालीन सेवाओं की चुनौतियों और हवाई सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
स्थानीय प्रशासन और राहत टीमों ने मौके पर पहुंचकर बचाव कार्य शुरू किया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल है और प्रशासन हादसे के कारणों की जांच में जुट गया है।
भारतीय युवा कांग्रेस के प्रदर्शन पर बवाल, भाजपा ने कांग्रेस पर बोला तीखा हमला
नई दिल्ली। नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में चल रहे एआई शिखर सम्मेलन के दौरान उस समय विवाद खड़ा हो गया, जब भारतीय युवा कांग्रेस के कुछ कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। इस घटना के बाद सियासी माहौल गरमा गया है और भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है।
भाजपा सांसद संबित पात्रा ने आरोप लगाया कि यह प्रदर्शन अचानक नहीं, बल्कि पूरी योजना के तहत किया गया था। उनका कहना है कि इसमें शामिल लोग पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी थे, जिन्होंने पहले से रजिस्ट्रेशन कर कार्यक्रम स्थल में प्रवेश लिया और बाद में विरोध प्रदर्शन किया। पात्रा ने दावा किया कि इस पूरी घटना की रणनीति शीर्ष स्तर पर तैयार की गई थी।
भाजपा ने इस घटना को देश की छवि से जोड़ते हुए कांग्रेस नेतृत्व पर भी निशाना साधा। पार्टी ने राहुल गांधी पर आरोप लगाते हुए कहा कि ऐसे कदम अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाते हैं। भाजपा के अनुसार, जब देश वैश्विक स्तर पर तकनीकी नेतृत्व को प्रदर्शित कर रहा है, तब इस तरह के विरोध से गलत संदेश जाता है।
वहीं, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी इस घटना पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि जिस समय दुनिया भारत की तकनीकी प्रगति को देख रही थी, उस समय इस तरह का व्यवहार दुर्भाग्यपूर्ण है। उनके अनुसार, राजनीतिक विरोध लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन राष्ट्रीय छवि को प्रभावित करने वाले कदम उचित नहीं हैं।
पूरे मामले ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। एक ओर भाजपा इसे देश की छवि से जुड़ा मुद्दा बता रही है, तो वहीं विपक्ष की ओर से इस पर प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है। अब देखना होगा कि यह विवाद आने वाले समय में किस दिशा में आगे बढ़ता है।
3 घंटे में हटाना होगा आपत्तिजनक कंटेंट
नई दिल्ली। देश में तेजी से बढ़ते आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल के बीच केंद्र सरकार ने डिजिटल कंटेंट को लेकर नए और कड़े नियम लागू कर दिए हैं। 10 फरवरी 2026 को जारी अधिसूचना के बाद ये नियम अब 20 फरवरी से प्रभावी हो गए हैं। भारत सरकार के इस फैसले के तहत अब एआई से तैयार किसी भी फोटो, वीडियो या ऑडियो पर स्पष्ट लेबल लगाना अनिवार्य होगा, ताकि लोगों को असली और नकली कंटेंट में फर्क समझने में आसानी हो।
इन नए नियमों के मुताबिक, एआई जनरेटेड कंटेंट पर “AI Generated” जैसे स्पष्ट निशान दिखाना जरूरी होगा। इसके अलावा हर फाइल के मेटाडेटा में उसकी पूरी जानकारी दर्ज रहेगी—जैसे कंटेंट कब बना, किस टूल से तैयार हुआ और पहली बार कहां अपलोड किया गया। इसे एक तरह का “डिजिटल डीएनए” माना जा रहा है, जिससे जांच एजेंसियों को जरूरत पड़ने पर कंटेंट के स्रोत तक पहुंचने में मदद मिलेगी।
सरकार ने यह भी साफ किया है कि एआई कंटेंट से जुड़े लेबल या तकनीकी जानकारी के साथ छेड़छाड़ करना अब गैर-कानूनी होगा। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को ऐसी तकनीक अपनानी होगी जिससे किसी भी तरह की छेड़छाड़ को रोका जा सके या संदिग्ध कंटेंट स्वतः हटाया जा सके। इसके साथ ही यूजर्स को कंटेंट अपलोड करते समय यह बताना भी जरूरी होगा कि वह एआई से तैयार किया गया है या नहीं।
नए नियमों में सोशल मीडिया कंपनियों की जिम्मेदारी भी बढ़ा दी गई है। अब किसी भी आपत्तिजनक या गैर-कानूनी कंटेंट की शिकायत मिलने पर प्लेटफॉर्म्स को सिर्फ 3 घंटे के भीतर उसे हटाना होगा, जबकि पहले इसके लिए 36 घंटे का समय दिया जाता था। इस बदलाव से डिजिटल स्पेस में जवाबदेही और सख्ती दोनों बढ़ेंगी।
एक दिन पहले आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी डिजिटल कंटेंट पर ‘ऑथेंटिसिटी लेबल’ की जरूरत पर जोर दिया था। उन्होंने कहा था कि जैसे खाद्य उत्पादों पर जानकारी दी जाती है, वैसे ही डिजिटल सामग्री पर भी उसकी प्रकृति स्पष्ट होनी चाहिए, ताकि लोग भ्रमित न हों।
सरकार ने खास तौर पर डीपफेक और आपत्तिजनक सामग्री पर सख्त रुख अपनाया है। अगर एआई का इस्तेमाल किसी व्यक्ति की पहचान की नकल करने, फर्जी वीडियो बनाने, बच्चों से जुड़ी आपत्तिजनक सामग्री फैलाने या धोखाधड़ी के लिए किया जाता है, तो इसे गंभीर अपराध माना जाएगा और कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय का कहना है कि इन नियमों का मकसद एक सुरक्षित, भरोसेमंद और जवाबदेह इंटरनेट व्यवस्था तैयार करना है, जिससे एआई के दुरुपयोग पर लगाम लगाई जा सके और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर पारदर्शिता बढ़े।
‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026’
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ में वैश्विक समुदाय को संदेश देते हुए कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का दौर मानवता के लिए एक बड़ा अवसर बन सकता है, बशर्ते इसे सही सोच और जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ाया जाए।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में एआई के तेजी से बदलते परिदृश्य को मानव विकास के नए अध्याय से जोड़ते हुए कहा कि तकनीक का वास्तविक प्रभाव तभी दिखेगा जब इसे सही दिशा और उद्देश्य के साथ अपनाया जाए। उन्होंने भारत की सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख करते हुए गौतम बुद्ध की शिक्षाओं को याद किया और कहा कि सही निर्णय हमेशा सही समझ से निकलते हैं, यही सिद्धांत एआई के विकास में भी लागू होना चाहिए।
उन्होंने जोर देकर कहा कि एआई के लिए एक संतुलित और नैतिक रोडमैप तैयार करना जरूरी है, जिसमें मानव केंद्र में रहे। प्रधानमंत्री ने एक ऐसे एआई इकोसिस्टम की आवश्यकता बताई, जो संवेदनशील, समावेशी और जिम्मेदार हो, ताकि तकनीक का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचे।
कोविड-19 महामारी का जिक्र करते हुए उन्होंने वैश्विक सहयोग की ताकत को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि महामारी के दौरान वैक्सीन विकास से लेकर आपूर्ति श्रृंखला को बनाए रखने तक, दुनिया ने मिलकर असंभव को संभव बनाया। इसी तरह एआई के क्षेत्र में भी अंतरराष्ट्रीय साझेदारी बेहद अहम होगी।
इस वैश्विक मंच पर इमैनुएल मैक्रों और एंटोनियो गुटेरेस सहित कई प्रमुख वैश्विक नेता और उद्योग जगत की हस्तियां मौजूद रहीं। यह पहली बार है जब ‘ग्लोबल साउथ’ के किसी देश में इतने बड़े स्तर पर एआई समिट आयोजित किया गया।
प्रधानमंत्री ने अंत में कहा कि भारत का मूल मंत्र ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ है, और एआई का उपयोग भी इसी भावना के अनुरूप होना चाहिए, ताकि इसका लाभ पूरी मानवता को मिल सके।
