डीजीपी ने परखीं केदारनाथ धाम यात्रा व्यवस्थाएं..
उत्तराखंड: केदारनाथ धाम में रुक-रुककर हो रही बारिश और बर्फबारी को देखते हुए रोके गए यात्रियों को प्रशासन ने आज रवाना करना शुरू कर दिया। सुबह आठ बजे तक सोनप्रयाग से 5887 तीर्थयात्रियों को धाम के लिए रवाना किया गया। आपको बता दें कि सोमवार को करीब नौ हजार यात्रियों को जगह-जगह रोक दिया गया था।
केदारनाथ धाम में मौसम के अधिक खराब होने पर तिलवाड़ा से फाटा तक करीब ढाई हजार, सीतापुर से सोनप्रयाग तक करीब छह हजार और गौरीकुंड में लगभग 500 यात्रियों को रोका गया था। वही यमुनोत्री धाम सहित यमुना घाटी में सुबह से ही बारिश हो जारी है। लेकिन मौसम की बेरुखी पर तीर्थयात्रियों की आस्था भारी पड़ रही है। बारिश के बीच पांच किमी की चढ़ाई चढ़ कर यात्री यमुनोत्री धाम पहुंच रहे हैं।
पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार ने केदारनाथ यात्रा को लेकर फाटा, सोनप्रयाग और गौरीकुंड का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने ऑपरेशन मर्यादा के तहत नशा के कारोबार पर नकेल कसने के निर्देश दिए। उन्होंने यात्रा मार्ग से लगे थाना, चौकी के प्रभारियों को अपने-अपने क्षेत्र में नियमित चेकिंग करने को कहा। पुलिस महानिदेशक ने गौरीकुंड में यात्रियों से बातचीत करते हुए व्यवस्थाओं का फीडबैक भी लिया। उन्होंने पुलिस बल को बाबा केदार के दर्शनों के लिए आने वाले श्रद्धालुओं से सौम्य व्यवहार करने के निर्देश भी दिए।
उत्तराखंड के छोटे से गांव की चांदनी बनी भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट..
उत्तराखंड: प्रदेश में बेटियां अपनी मेहनत और लगन से लगातार प्रदेश का नाम रोशन कर रही है। इसी कड़ी में प्रदेश के सिमांत जिले पिथौरागढ़ की चांदनी कुंवर का नाम भी जुड़ गया है। पिथौरागढ़ के छोटे से गांव की चांदनी भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बन गई है। उनकी इस उपलब्धि से प्रदेश में जहां खुशी की लहर है वहीं उन्हें बधाई देने वालों का तांता लग गया है। बता दे कि पिथौरागढ़ जिले के भड़कटिया गांव निवासी चांदनी कुंवर भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बनी है। पिथौरागढ़ के मानस एकेडमी से प्रारंभिक शिक्षा हासिल की। वह बचपन से ही मेधावी छात्रा रहीं थी और इंटर में स्कूल भी टॉप किया था।
बताया जा रहा है कि वह भारतीय सैन्य अकादमी चेन्नई से प्रशिक्षण प्राप्त कर पास आउट हुई। इसके बाद वह भारतीय सेना का हिस्सा बन गई है। विगत साल सीडीएस की प्रवेश परीक्षा में भी चांदनी ने ऑल इंडिया लेवल पर पांचवीं रैंक हासिल कर उत्तराखंड का नाम रोशन किया था। इसके बाद वह प्रशिक्षण लेने के लिए चेन्नई रवाना हो गई थी। बता दें कि पास आउट परेड के बाद चांदनी के पिता ने बेटी के कंधों पर सितारे सजाकर उन्हें उसे सेना को समर्पित किया है। चांदनी ने आर्मी सर्विस कॉपर्स में कमीशन प्राप्त किया है। उनकी पहली पोस्टिंग जम्मू कश्मीर के लेह में हुई है। उनकी सफलता पर उनके परिवार में खुशी का माहौल है। वहीं हर कोई उन्हें बधाई दे रहा है।
केदारनाथ धाम में रात 11 से सुबह पांच बजे तक हो रही पूजाएं..
उत्तराखंड: केदारनाथ में रात 11 से सुबह पांच बजे तक भक्तों की बुकिंग की गई पूजाएं हो रही हैं। कपाट खुलने के बाद अभी भीड़ के चलते सिर्फ षोडषोपचार अभिषेक पूजा हो रही है। साथ ही सुबह पांच बजे से धर्म दर्शन शुरू हो रहे हैं जो अपराह्न तीन बजे तक हो रहे हैं। इसके बाद शाम पांच बजे से सांयकालीन आरती तक श्रृंगार दर्शन कराए जा रहे हैं। बता दे कि बीकेटीसी द्वारा पूजाओं को संपादित करने का समय रात 11 से सुबह पांच बजे तक निर्धारित किया गया है।
मंदिर समिति के अनुसार, कपाट खुलने के बाद प्रतिदिन 20 ऑनलाइन बुकिंग पूजाएं संपादित हो रही है। इसके साथ ही औसतन 102 पूजाएं ऑफलाइन की जा रही हैं। मंदिर समिति के पूजा प्रभारी प्रदीप सेमवाल का कहना हैं कि 25 अप्रैल को ऑफलाइन बुकिंग की 40 व ऑनलाइन बुकिंग की 20 पूजाएं संपादित की गईं जबकि 27 अप्रैल को ऑफलाइन 61 व 29 को 117 पूजाएं संपादित की गई हैं। साथ ही प्रतिदिन 20 ऑनलाइन पूजाएं हो रही हैं।
दान के लिए क्यूआर कोड बोर्ड लगाने पर बीकेटीसी ने पुलिस को दी तहरीर
केदारनाथ और बद्रीनाथ मंदिर में कई स्थानों पर दान के लिए क्यूआर कोड के बोर्ड लगाने के मामले में बीकेटीसी ने पुलिस को तहरीर दी है। समिति का कहना है कि मंदिरों में दान के लिए क्यूआर कोड के बोर्ड बीकेटीसी की ओर से नहीं लगाए गए थे। बद्रीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष अजेंद्र अजय का कहना हैं कि दोनों धामों में कपाट खुलने के दिन ये बोर्ड लगाए गए थे।
मामला बीकेटीसी के अधिकारियों के संज्ञान में आने पर उसी दिन बोर्ड उतार दिए गए थे। बीकेटीसी अधिकारियों ने पहले अपने स्तर से इस मामले की छानबीन की। इसके बाद रविवार को केदारनाथ मंदिर अधिकारी ने केदारनाथ पुलिस चौकी और बद्रीनाथ में प्रभारी अधिकारी की ओर से कोतवाली में तहरीर दी गई है। मंदिर समिति के अध्यक्ष अजेंद्र अजय का कहना हैं कि बीकेटीसी की ओर से वर्तमान में अपने कामकाज में पेटीएम का प्रयोग नहीं किया जाता है।
उत्तराखंड में नर्सिंग अधिकारी के 1564 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू..
चिकित्सा स्वास्थ्य विभाग को शीघ्र मिलेगा नर्सिंग स्टॉफ..
उत्तराखंड: आखिरकार लम्बे इंतजार के बाद सूबे के चिकित्सा स्वास्थ्य विभाग को बड़ी संख्या में नर्सिंग अधिकारी मिलने जा रहे हैं। प्रदेश के चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत की एक और पहल रंग लाई है। डा. रावत के अथक प्रयासों के उपरांत स्वास्थ्य विभाग में वर्षवार मैरिट के आधार पर 1564 नर्सिंग अधिकारियों की नियुक्ति की जायेगी। उत्तराखंड चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड ने महिला एवं पुरूष संवर्ग के नर्सिंग अधिकारियों की भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी है, शीघ्र ही अभ्यर्थियों के अभिलेखों का सत्यापन किया जायेगा। अभिलेख सत्यापन के उपरांत चयनित अभ्यर्थियों को विभाग में तैनाती दी जायेगी।
सूबे के चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के अथक प्रयासों का नतीजा है कि प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग को जल्द 1564 नर्सिंग अधिकारी मिलेंगे। विभाग की कमान सम्भालते ही डा. रावत ने ताबड़तोड़ कई फैसले लिये थे, जिसमें लम्बे समय से रिक्त चल रहे नर्सिंग स्टॉफ के पदों को भरना भी शामिल था लेकिन नर्सिंग अधिकारियों की नियमावली के अनुसार यह भर्ती प्रक्रिया लिखित परीक्षा के आधार पर की जानी थी, जिसमें बेरोजगार नर्सिंग डिग्री एवं डिप्लोमाधारी संगठन ने धांधली की आशंका जताते हुये वर्षवार मेरिट के आधार पर भर्ती की मांग की थी। जिस पर विभागीय मंत्री डा. रावत ने चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग को नर्सिंग अधिकारी की भर्ती नियमावली में संशोधन कर वर्षवार मैरिट के आधार पर भर्ती का प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिये थे। विभाग द्वारा भर्ती नियमावली का संशोधित प्रस्ताव राज्य कैबिनेट की बैठक में लाया गया।
कैबिनेट की स्वीकृति के उपरांत विभाग ने कुल 1564 पदों पर वर्षवार मेरिट के आधार भर्ती का अधियाचन उत्तराखंड चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड को सौंपा। चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड द्वारा माह जनवरी 2023 में 1564 पदों के सापेक्ष भर्ती हेतु अभ्यर्थियों से आवेदन पत्र मांगे गये। जिस पर लगभग 10 हजार अभ्यर्थियों आवेदन किया। चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड के परीक्षा नियंत्रक प्रो. विजय जुयाल ने बताया कि नर्सिंग अधिकारी के कुल 1564 पदों में से महिला संवर्ग डिप्लोमाधारक के 847 पद, महिला संवर्ग डिग्रीधारक के 405 पद, पुरूष संवर्ग डिप्लोमाधार के 212 पद तथा पुरूष संवर्ग डिग्रीधारक के 100 पद हैं।
जिन पर वर्षवार मैरिट के आधार पर भर्ती हेतु प्रत्येक पद के सापेक्ष दो अभ्यर्थियों को अभिलेख सत्यापन के लिये बुलाया जायेगा। इसके बाद चयनित अभ्यर्थियों की अंतिम सूची जारी कर दी जायेगी। उन्होंने बताया कि चयन प्रक्रिया सम्पन्न होने के उपरांत चयनित अभ्यर्थियों की अंतिम सूची महानिदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य को सौंप दी जायेगी जहां से चयनित अभ्यर्थियों को रिक्त पदों के सापेक्ष तैनाती नियुक्ति प्राधिकारी द्वारा दी जायेगी।
डा. धन सिंह रावत का कहना हैं कि, नर्सिंग अधिकारियों के 1564 रिक्त पदों पर नई तैनाती के उपरांत स्वास्थ्य विभाग में काफी हद तक नर्सिंग स्टॉफ की कमी दूर हो जायेगी, जिससे प्रदेशभर के राजकीय चिकित्सालयों में आने वाले मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी।
उत्तराखंड में माध्यमिक स्तर पर 559 विद्यालयों को क्लस्टर विद्यालयों के रूप में विकसित किया जाएगा..
उत्तराखंड: मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. संधु ने शुक्रवार को सचिवालय में शिक्षा विभाग के साथ क्लस्टर विद्यालय के सम्बन्ध में बैठक ली। मुख्य सचिव ने कहा कि प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षा के अंतर्गत संचालित क्लस्टर विद्यालय शिक्षण अधिगम को गुणवत्तापरक एवं रूचिकर बनाने के उद्देश्य से पठन-पाठन से सम्बन्धित मूलभूत सुविधायें विकसित कर उत्कृष्ट शिक्षा केन्द्र के रूप में विकसित किए जाएंगे।
मुख्य सचिव का कहना हैं कि इन क्लस्टर विद्यालयों में समुचित मात्रा में शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक स्कूल के लिए आने वाले समय में अधिकतम छात्र संख्या के अनुरूप मास्टर प्लान तैयार किया जाए। क्लस्टर स्कूल में समुचित अध्यापक, कक्षाकक्ष, पुस्तकालय, कम्प्यूटर लैब और अन्य प्रयोगशालाओं आदि की पूर्ण व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
उन्होंने कहा कि क्लस्टर विद्यालयों में छात्रों के लिए आवागमन की सुविधा उपलब्ध कराए जाने हेतु जिलाधिकारी की अध्यक्षता में समिति का गठन कर उन्हें छात्रों को आवागमन का किराया किस रूप में देना है इसके लिए भी अधिकृत किया जाए। इस समिति में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में परिवहन विभाग, लोक निर्माण विभाग, जिला शिक्षा अधिकारी, पुलिस अधीक्षक आदि सम्बन्धित सभी विभागों का प्रतिनिधित्व रखा जाए।
ऐसे स्कूल, जो अत्यधिक दूर हैं और बच्चे इतने दूर आना जाना नहीं कर सकते, के लिए आवासीय स्कूलों की व्यवस्था की जाए। उन्होंने कहा कि आवासीय स्कूलों को पर्वतीय जनपदों के छोटे शहरों में खोला जा सकता है। ऐसे में उन आवासीय विद्यालयों में शिक्षकों को अपने परिवार के साथ रहने में सुविधा होगी। उन्होंने कहा कि प्रत्येक जनपद में एक नहीं बल्कि 5 से 7 आवासीय विद्यालय होने चाहिए। वर्तमान में संचालित आवासीय विद्यालयों में हॉस्टल की सुविधा को और बढ़ाया जाए। मुख्य सचिव ने कहा कि बच्चों को अच्छी गुणवत्तापरक शिक्षा उपलब्ध हो इसके लिए अच्छे सुझावों को लगातार अपनाने की आवश्यकता है।
सचिव रविनाथ रमन ने कहा कि प्रदेशभर में माध्यमिक स्तर पर कुल 559 विद्यालयों को क्लस्टर विद्यालयों के रूप में विकसित किया जाएगा। इसी प्रकार प्राथमिक में 603 और पूर्व माध्यमिक में 76 विद्यालयों को चिन्हित किया गया है। सभी विद्यालयों के लिए डीपीआर तैयार की जा रही है। इस अवसर पर महानिदेशक माध्यमिक एवं प्राथमिक शिक्षा बंशीधर तिवारी, अपर सचिव शिक्षा योगेन्द्र यादव सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।
उत्तराखंड में अगले चार दिन भारी, जानें कहां होगी बारिश-बर्फबारी..
उत्तराखंड: प्रदेश में जहां गुरूवार को अचानक बदले मौसम के बाद बिजली गिरने और बारिश-बर्फबारी की खबरे सामने आई है । वहीं मौसम विभाग ने एक बार फिर अलर्ट जारी कर दिया है। प्रदेश के कई जिलों के लिए अगले चार दिन भारी बताए जा रहे है। कई जिलों के लिए यलो और ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।
मौसम विभाग ने 28 और 29 अप्रैल को यलो अलर्ट जारी किया है। बताया जा रहा है कि 28 अप्रैल को राज्य के उत्तरकाशी ,रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर तथा पिथौरागढ़ जनपदों में कहीं-कहीं अपरान्ह और शाम के समय गर्जन के साथ आकाशीय बिजली चमकने तथा ओलावृष्टि होने की संभावना है। तो वहीं 29 अप्रैल को राज्य में कहीं-कहीं गर्जन के साथ आकाशीय बिजली चमकने ओलावृष्टि होने तथा झोंकेदार हवाएं 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटा चल सकती है।
वहीं ये भी बताया जा रहा है कि प्रदेश में 30 अप्रैल और 1 मई के लिए मौसम विभाग ने ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इस दौरान राज्य के जनपदों में कहीं-कहीं गर्जन के साथ आकाशीय बिजली गिरने,ओलावृष्टि होने तथा तेज बौछार के साथ झक्कड़ 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटा से बढ़कर 70 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से हवाएं चलने का मौसम विभाग ने चेतावनी जारी की है। इसके अलावा उच्च हिमालई क्षेत्रों में हिमपात की भी संभावना जताई गई है।
भारी बर्फबारी के बीच खुले बद्रीनाथ धाम के कपाट, जयकारों के बीच नाचने लगे श्रद्धालु..
उत्तराखंड: बर्फबारी और कड़ाके की ठंड के बीच भू-बैकुंठ बद्रीनाथ धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खुल गए हैं। वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ आज गुरुवार सुबह 7 बजकर 10 मिनट पर बद्रीनाथ धाम के कपाट खोल दिए गए हैं। कपाट खुलने के इस पावन मौके पर अखंड ज्योति के दर्शन करने के लिए सैकड़ों श्रद्धालु धाम पहुंचे तो यात्रा पड़ावों पर चहल-पहल भी शुरू हो गई है।
कपाट खुलने के दौरान हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा हुई तो वहीं परिसर में सेना की मधुर धुन पर यात्री भी थिरके। बद्रीनाथ के सिंह द्वार से यात्रियों के दर्शन शुरू हो गए हैं। कपाट खुलने के दौरान धाम में करीब 20 हजार तीर्थयात्री पहुंचे। कपाटोद्घाटन के लिए टिहरी राजा के प्रतिनिधि के रूप में माधव प्रसाद नौटियाल भी धाम में मौजूद रहे।
वहीं बद्रीनाथ यात्रा को लेकर तीर्थयात्रियों में भी उत्साह और उल्लास का माहौल है। यात्रा पड़ावों पर जगह-जगह तीर्थयात्रियों का जमावड़ा लगना शुरू हो गया है। बद्रीनाथ में तीर्थयात्रियों और स्थानीय श्रद्धालुओं के करीब 400 वाहन पहुंच गए हैं। बद्रीनाथ के साथ ही धाम में स्थित प्राचीन मठ-मंदिरों को भी गेंदे के फूलों से सजाया गया है।
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माणा में ग्रामीणों की चहल-पहल शुरू..
इस बार बद्रीनाथ हाईवे पर कंचन गंगा और रड़ांग बैंड में हिमखंड पिघल गए हैं। यहां अलकनंदा के किनारे कुछ जगहों पर ही बर्फ जमी है। बद्रीनाथ धाम के आंतरिक मार्गों पर अभी भी बर्फ है, जिसे नगर पंचायत बद्रीनाथ के पर्यावरण मित्रों की ओर से साफ किया जा रहा है।
वर्ष 2013 की आपदा में बह चुके लामबगड़ बाजार में भी दुकानें खुलने लगी हैं। देश के प्रथम गांव माणा में भी ग्रामीणों की चहल-पहल होने लगी है। बुधवार को बद्रीनाथ धाम पहुंंचे अधिकांश श्रद्धालु माणा गांव पहुंचे। बद्रीनाथ में आर्मी हेलीपैड से मंदिर परिसर तक साफ-सफाई का काम भी पूरा हो गया है।
जानिए मनरेगा योजना के लिए बजट घटाने के आरोप कितने सही..
देश-विदेश: केंद्र सरकार ने 2005 में जब मनरेगा योजना की शुरुआत की थी, यह असंगठित श्रमिकों के बीच बहुत लोकप्रिय हुई थी। अपने घर के आसपास काम के अवसर पाने के कारण श्रमिकों में इसे लेकर बहुत उत्साह देखा गया। आरोप यहां तक हैं कि शहरों और पंजाब जैसे राज्यों में काम करने के लिए श्रमिकों की कमी होने लगी, क्योंकि श्रमिकों ने अपने घरों के आसपास अपेक्षाकृत कम पारिश्रमिक में भी काम करने को ज्यादा बेहतर समझा।
लेकिन समय के साथ परिस्थितियां बदल रही हैं और एक बार फिर रोजगार की तलाश में श्रमिक शहरों की ओर रुख करने लगे हैं। संभवतः यही कारण है कि मनरेगा योजना के अंतर्गत आवेदन करने वाले श्रमिकों की संख्या में तेजी से गिरावट आ रही है।
राष्ट्रीय स्तर पर मनरेगा योजना के अंतर्गत रजिस्टर्ड श्रमिकों में से केवल आधे श्रमिक ही सक्रिय रह गए हैं। कई राज्य आवंटित धनराशि का उपयोग तक नहीं कर पा रहे हैं। इसके कारण सरकार ने इसके लिए आवंटित धनराशि को कम कर दिया। आरोप है कि मनरेगा योजना के कम लोकप्रिय होने के पीछे मुख्य वजह इसके फंड का सही तरीके से अमल में न लाया भी है। श्रमिकों की शिकायत है कि 15 दिन में पारिश्रमिक मिल जाने के बाद भी उन्हें समय से पारिश्रमिक नहीं मिल रहा है।
श्रमिकों की कितनी संख्या सक्रिय..
द महात्मा गांधी नेशनल रूरल एम्प्लॉयमेंट गारंटी एक्ट 2005 की आधिकारिक वेबसाइट पर दर्ज आंकड़ों के अनुसार देश में कुल 27.74 करोड़ श्रमिकों ने इस योजना के अंतर्गत रजिस्ट्रेशन कराया है। लेकिन इस समय केवल 14.26 करोड़ श्रमिक ही सक्रिय हैं। यह कुल श्रमिकों की लगभग आधी संख्या है। राज्यों के स्तर पर भी लगभग यही अनुपात देखने को मिलता है। उत्तर प्रदेश में कुल 2.87 करोड़ रजिस्टर्ड श्रमिकों में 1.50 करोड़ सक्रिय हैं, तो पश्चिम बंगाल के 2.61 करोड़ श्रमिकों में 1.39 करोड़ श्रमिक सक्रिय हैं।
बिहार, मध्यप्रदेश और राजस्थान भी मनरेगा के अंतर्गत रजिस्ट्रेशन कराने वाले श्रमिकों के मामले में सबसे आगे हैं, लेकिन इन राज्यों में भी सक्रिय श्रमिकों की संख्या लगभग आधी ही है। चूंकि, जब श्रमिकों के पास बाजार में अन्यत्र काम उपलब्ध नहीं होता है, तब वे इसके अंतर्गत कार्य करने के लिए आवेदन करते हैं, सक्रिय श्रमिकों की संख्या घटती-बढ़ती रहती है।
श्रमिकों का प्रदर्शन
असंगठित कामगार कर्मचारी कांग्रेस (KKC) के नेशनल कोऑर्डिनेटर प्रबल प्रताप शाही का कहना हैं कि देश भर से आए हजारों मनरेगा श्रमिकों ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर 25 अप्रैल को प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार मनरेगा योजना के अंतर्गत आर्थिक सहायता कम कर रही है। श्रमिकों को केवल 25-30 दिन का औसतन काम दिया जा रहा है। उनका आरोप है कि सरकार इस योजना को धीरे-धीरे बंद करना चाहती है।
प्रबल प्रताप शाही ने कहा कि मनरेगा योजना कोरोना काल में श्रमिकों के लिए वरदान की तरह साबित हुई। शहरों से घरों को लौटे श्रमिकों ने इसके माध्यम से धन कमाया और अपना परिवार चलाने में सफलता पाई। 2020-21 की महामारी के दौरान इस योजना के लिए 1,11,500 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे। वर्ष 2021-22 के लिए 73,000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे और यह 20-21 के संशोधित अनुमान 1,11,500 करोड़ रुपये से 34.5 फीसदी कम था। अनुमान है कि इस योजना से करीब 15 करोड़ परिवार जुड़े हुए हैं। आरोप है कि फंड की भारी कटौती के कारण इन परिवारों को 100 दिन का अधिकार नहीं मिल पा रहा है। मौजूदा बजट पूरे साल में औसतन 26 दिन का ही काम दे सकता है।
मनरेगा श्रमिकों की तीन मांगें..
1- मनरेगा श्रमिकों का दैनिक पारिश्रमिक बढ़ाकर 450 रुपये प्रतिदिन किया जाए।
2- मनरेगा श्रमिकों को वर्ष भर में 100 दिन के स्थान पर 150 दिन न्यूनतम कार्य करने की अनुमति दी जाए।
3- मनरेगा योजना के अंतर्गत केंद्र द्वारा स्वीकृत धनराशि 60 हजार करोड़ रुपये से बढ़ाकर तीन लाख करोड़ किया जाए।
सहायता कम नहीं हुई- भाजपा
आर्थिक मामलों के विशेषज्ञ और भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता गोपाल कृष्ण अग्रवाल ने कहा कि सच्चाई यह है कि पिछले वर्ष के बजट अनुमान की तुलना में सरकार ने इस योजना के लिए ज्यादा धन आवंटित किया है। कोविड काल में इस योजना के लिए अतिरिक्त 34 हजार करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई थी। चूंकि, यह एक आपातकालीन सहायता थी, कोरोना काल के बाद इसे बंद कर दिया गया। लेकिन यह कहना सही नहीं है कि इस योजना के अंतर्गत आर्थिक सहायता कम की गई।
केंद्र सरकार ने मनरेगा योजना का लाभ लेने के लिए श्रमिकों के लिए बायोमेट्रिक पहचान अनिवार्य कर दिया है। श्रमिकों का पैसा सीधे उनके खातों में डालने की सुविधा दी गई है। इससे फर्जी श्रमिकों की संख्या में तेजी से कमी आई है। फर्जीवाड़ा कर श्रमिकों के नाम पर पैसा लेने वाले अनेक लोगों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की गई है और कई लोगों को जेल जाना पड़ा है। इससे भी श्रमिकों की कुल दिखने वाली संख्या में कमी आई है, जबकि इसका लाभ असली और इसके हकदार श्रमिकों को मिल रहा है।
अब काम की स्कीमें छांटेगी प्रदेश सरकार, एक तरह की स्कीमें होंगी मर्ज..
उत्तराखंड: राज्य के विकास की गति को नियोजित ढंग से गति देने के लिए प्रदेश सरकार अब अपनी उन योजनाओं को बंद करेगी, जो किसी काम की नहीं हैं या अव्यावहारिक हैं। एक ही तरह की योजनाओं को मर्ज कर उन्हें ज्यादा प्रभावी बनाया जाएगा। काम की योजनाएं छांटने का यह बीड़ा नियोजन विभाग ने उठाया है।
विभाग ने इस कार्य के लिए केंद्र सरकार के वित्त मंत्रालय की स्वायत्त संस्था राष्ट्रीय वित्त प्रबंधन संस्थान का सहयोग लिया है। अपर सचिव नियोजन रोहित मीणा के नेतृत्व में एक टीम इस कार्य को अंजाम देगी। सोमवार को सचिवालय में संस्थान के अधिकारियों के साथ बैठक में इसकी रूपरेखा तैयार की गई। इस कवायद के बाद योजनाओं की निगरानी, अनुश्रवण और उनके प्रभावी क्रियान्वयन में आसानी होगी और पात्रों को इनका अधिकतम लाभ मिल सकेगा।
विभागों में 2500 छोटी बड़ी योजनाएं..
आपको राज्य सरकार के विभागों व संस्थाओं में करीब 2500 छोटी-बड़ी योजनाएं संचालित हो रही हैं। इनमें कुछ योजनाएं एक ही तरह की हैं। मिसाल के लिए कृषि व उद्यान विभाग में बड़ा मशरूम व छोटा मशरूम की योजनाएं हैं। शहद उत्पादन की योजना उद्यान में भी है और सहकारिता विभाग में भी। इसी तरह की योजनाओं को छांटा जा रहा है।
छांटने के बाद कम हो जाएंगी स्कीमें..
ढाई हजार बड़ी-छोटी योजनाओं में से काम की योजनाएं छांटकर प्रदेश सरकार इनके लिए बजटीय प्रावधान बढ़ाने की सोच रही है। इससे योजनाओं के ज्यादा पात्रों को लाभ मिल सकेगा। इसके साथ ही केंद्र पोषित व केंद्र सरकार की फ्लैगशिप योजनाओं से मेल खाने वाली योजनाओं को चुनकर उन्हें ज्यादा बजटीय प्रावधान के जरिये और प्रभावी बनाया जाएगा।
योजनाओं की एक श्रेणी बनेगी..
योजनाओं की श्रेणी वार छंटनी होगी। मसलन सभी विभागों में ऐसी योजनाओं की सूची तैयार होगी, जो रोजगार, स्वरोजगार और आजीविका बढ़ाने में सहयोग करती हैं। उन योजनाओं काे एक जगह रखा जाएगा, जो ऋण और अनुदान वाली हैं। गरीब, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, दिव्यांग, महिला, बाल कल्याण से जुड़ी अलग-अलग विभागों में संचालित हो रही योजनाओं की भी पहचान होगी। इन योजनाओं में उनको छांटा जाएगा जिन्हें एक-दूसरे के साथ मिलाया जा सकता है।
हर विभाग में बनेंगे नोडल अधिकारी..
नियोजन विभाग के सहयोग से राष्ट्रीय वित्त प्रबंधन संस्थान के विशेषज्ञ सभी योजनाओं की समीक्षा करेंगे। हर विभाग से योजनाओं के संबंध में जानकारी के लिए एक नोडल अधिकारी बनाया जाएगा। नोडल अधिकारी अपने विभाग से संबंधित योजनाओं की सूचनाएं एकत्रित करेंगे और उन्हें उपलब्ध कराएंगे।
विभागों में सैकड़ों की संख्या में छोटी-बड़ी योजनाएं हैं। पिछले कुछ वर्षों में नई योजनाएं बनीं हैं और जो पहले से बनी योजनाओं जैसी ही हैं। कुछ योजनाएं अब अप्रासंगिक और अव्यावहारिक हो गई हैं। इनकी समीक्षा की जा रही है। अपर सचिव रोहित मीणा के नेतृत्व में यह काम हो रहा है। इससे योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में मदद मिलेगी। इसके साथ ही ज्यादा से ज्यादा पात्र लोगों को इनका फायदा मिलेगा।
27 अप्रैल को खुलेंगे बद्रीनाथ धाम के कपाट..
उत्तराखंड: बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने की प्रक्रियाओं के तहत आज मंगलवार को जोशीमठ नृसिंह मंदिर से बद्रीनाथ के रावल ईश्वर प्रसाद नंबूदरी, आदि गुरू शंकराचार्य की गद्दी और गाडू घड़ा तेल कलश यात्रा के साथ योगबद्री मंदिर पांडुकेश्वर के लिए रवाना हुए। बुधवार को पांडुकेश्वर से कुबेर जी और उद्घव जी की उत्सव डोली रावल, और शंकराचार्य की गद्दी बद्रीनाथ धाम के लिए रवाना होगी। जिसके बाद 27 अप्रैल को प्रात: 7 बजकर 10 मिनट पर विधि-विधान से भगवान बद्रीनाथ जी के कपाट खोल दिए जाएंगे।
