गैरकानूनी संगठन का सदस्य होना भी माना जाएगा अपराध..
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला..
देश-विदेश: सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसला दिया है। इस फैसले के अनुसार, गैरकानूनी संगठन का सदस्य होना भी अपराध माना जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि गैरकानूनी संगठन का सदस्य होना ही UAPA के तहत कार्रवाई का आधार बन सकता है। खास बात ये है कि सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को दिए फैसले में साल 2011 का दिया अपना ही फैसला पलट दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने अरूप भुयन बनाम असम सरकार, इंदिरा दास बनाम असम सरकार और केरल सरकार बनाम रनीफ मामलों में दिए अपने फैसले में कहा था कि गैरकानूनी संगठन का सदस्य होना ही गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल होने का आधार नहीं हो सकता, जब तक कि वह किसी हिंसा की घटना में शामिल ना हो।
कोर्ट ने की ये टिप्पणी..
आपको बता दे कि जस्टिस एमआर शाह, जस्टिस सीटी रविकुमार और जस्टिस संजय करोल की पीठ ने अपने फैसले में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1967 की धारा 10(ए)(1) को भी सही ठहराया है, जो गैरकानूनी संगठन की सदस्यता को भी अपराध घोषित करती है।
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि 2011 का फैसला जमानत याचिका पर दिया गया था, जहां कानून के प्रावधानों की संवैधानिकता पर सवाल नहीं उठाया गया था। साथ ही गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम और आतंकवाद और विघटनकारी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम की संवैधानिकता को भी सही ठहराया गया था।
बता दें कि साल 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने यह पाया कि 2011 के मामलों पर बड़ी बेंच द्वारा सुनवाई की जानी चाहिए। अब ताजा फैसला उसी संदर्भ के कारण आया है। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि 2011 के फैसले अमेरिकी बिल ऑफ राइट्स के आधार पर दिए गए थे लेकिन इससे आतंकवाद से संबंधित मामलों से निपटने में परेशानी हो रही है। सरकार ने तर्क दिया कि न्यायालय आतंकवाद विरोधी कानून के प्रावधानों को, उसकी दलील सुने बिना कम नहीं आंक सकता।
जल जीवन मिशन के लिए प्रदेश को मिले 403 करोड़..
उत्तराखंड: प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में हर घर नल से जल की जल जीवन मिशन योजना के लिए जल शक्ति मंत्रालय ने राज्य को 403 करोड़ की तीसरी किश्त जारी कर दी है। इससे मिशन के कार्यों में तेजी आएगी। जल जीवन मिशन के तहत प्रदेश में 14 लाख 94 हजार 375 घरों में नल से जल पहुंचाने की योजना है। इसके तहत अभी तक 9 लाख 95 हजार 477 घरों में नल से जल पहुंचाया जा चुका है। बाकी घरों के लिए भी तेजी से काम चल रहा है। जल जीवन मिशन के तहत 17 हजार से अधिक छोटी-बड़ी परियोजनाएं बनाई गई हैं, जिनके लिए जल शक्ति मंत्रालय अभी तक दो किश्तों के रूप में करीब 800 करोड़ रुपये पहले ही जारी कर चुका है।
बुधवार को मंत्रालय ने 403 करोड़ 12 लाख 62 हजार रुपये की तीसरी किश्त भी जारी कर दी। इससे मिशन कार्यों में तेजी आएगी। पेयजल निगम के एमडी उदयराज सिंह का कहना हैं कि तीसरी किश्त से इस वित्तीय वर्ष के साथ ही आगामी वित्तीय वर्ष में भी कार्य होंगे। उनका कहना हैं कि इससे कार्यों में तेजी आएगी।
जितना काम होगा, उतना पैसा मिलेगा..
जल जीवन मिशन के तहत वैसे तो राज्य में करीब 72 प्रतिशत घरों तक हर घर नल से जल पहुंचाया जा चुका है लेकिन रफ्तार अपेक्षाकृत कम है। केंद्र सरकार का स्पष्ट कहना है कि जितना काम होगा, उसी हिसाब से पैसा जारी होगा। जानकारी के अनुसार अगर काम और तेजी से होता तो चौथी किश्त भी मार्च में ही जारी हो सकती थी।
बार्सिलोना फिल्म फेस्टिवल के फाइनल में पहुंची शॉर्ट फिल्म ‘गूलर का फूल’..
देश-विदेश: पत्रकार से निर्माता बने धीरज भटनागर के निर्देशन में बनी शॉर्ट फिल्म ‘गूलर का फूल’ को ‘अराउंड इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल’ (एआरएफएफ) के बार्सीलोना फिल्म अवॉर्ड्स के फाइनल में पहुंच गयी है। यह एक अवधी फिल्म है जो कि बिन मां के छोटे बच्चे के मनोविज्ञान पर आधारित है। इस फिल्म को देश के साथ ही अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर खूब सराहना मिल रही है। हालांकि एआरएफएफ के फाइनल विजेताओं की घोषणा 26 मार्च को होगी।
क्या है कहानी..
‘गूलर का फूल’ चिंटू नाम के एक युवक की कहानी है जो यह मानता है कि अगर उसे ‘गूलर का फूल’ मिल जाता है, तो इस दुनिया को अलविदा कह चुकी उसकी मां उसके पास लौट आएगी’। धीरज भटनागर के मित्र सुधीर मिश्रा द्वारा लिखी इस लघु फिल्म को महोत्सव की शॉर्ट फिल्म श्रेणी में नामांकित किया गया है। एआरएफएफ का आयोजन बार्सीलोना, पेरिस, एम्स्टर्डम और बर्लिन में किया जाता है। यह लखनऊ और जयपुर के स्थानीय कलाकारों की फिल्म है।
स्टारकास्ट..
अवधी फिल्म गूलर का फूल की कहानी सुधीर मिश्रा ने लिखी है। स्टारकास्ट की बात करें तो फिल्म में मृदुला भारद्वाज, संदीप यादव, सप्तक भटनागर, विनीता मिश्रा, रवि भट, करिश्मा सक्सेना, दिव्यवासिनी यादव, गोपाल जालान और सुधीर मिश्र ने अभिनय किया है। इसमें गायिका मोनिका साईं हैं और फिल्म को नेही व समीर अग्रवाल ने प्रोड्यूस किया है। यह फिल्म जल्द ही ओटीटी प्लेटफार्म पर रिलीज होगी।
तीन धामों में श्रद्धालुओं की संख्या पर पाबंदी न लगाने पर विचार कर रही सरकार..
उत्तराखंड: चारधाम यात्रा से जुड़े व्यापारियों और तीर्थयात्रियों के मुखर विरोध के कारण राज्य सरकार श्रद्धालुओं की संख्या को सीमित करने के प्रस्ताव को स्थगित कर सकता है। तीर्थयात्रियों को बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री में श्रद्धालुओं की संख्या पर पाबंदी न लगाने पर विचार शुरू हो गया है। यह बात सीएम पुष्कर सिंह धामी ने कही है। उनका कहना हैं कि केदारनाथ में प्रवेश करने वाले तीर्थयात्रियों की संख्या का कोटा तय हो सकता है। बाकी धामों के बारे में सरकार विचार कर रही है।
पर्यटन विभाग ने चारधाम यात्रा में बद्रीनाथ , केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री की धारण क्षमता के आधार पर दर्शन के लिए तीर्थयात्रियों का दैनिक कोटा निर्धारित करने की योजना बनाई है। चारधाम यात्रा में शामिल तीर्थ पुजारियों, होटल व्यवसायियों, ढाबा मालिकों और टैक्सी चालकों ने श्रद्धालुओं का कोटा निर्धारित करने के प्रस्ताव का विरोध किया। इस पर सरकार ने प्रस्ताव पर निर्णय लिया। साथ ही अधिकारियों को हितधारकों के साथ बैठक करने के निर्देश दिए थे।
अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी की अध्यक्षता में सभी हित धारकों के साथ बैठक की जा चुकी है, जिसमें चारधाम तीर्थ पुरोहित महापंचायत, होटल व्यवसायी और टैक्सी आपरेटरों ने श्रद्धालुओं की संख्या सीमित करने का पुरजोर समर्थन किया था। 22 अप्रैल से चारधाम यात्रा शुरू होनी है। हितधारकों के विरोध को देखते हुए सरकार केदारनाथ को छोड़ गंगोत्री, यमुनोत्री व बद्रीनाथ में श्रद्धालुओं के कोटे को समाप्त कर सकती है।
केदारनाथ धाम में तय हो सकता है कोटा
आपको बता दे कि केदारनाथ धाम में पुनर्निर्माण कार्य चल रहा है। पीएमओ से सीधे केदारनाथ धाम की निगरानी की जा रही है। केदारनाथ धाम के लिए लगभग 18 किमी. की पैदल चढ़ाई है। साथ ही केदारपुरी में श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए पर्याप्त होटल व धर्मशाला नहीं है। केदारनाथ धाम की विकट भौगोलिक परिस्थिति को देखते हुए सरकार केदारनाथ धाम के लिए श्रद्धालुओं का कोटा तय कर सकती है।
सुदूर इलाके में भी काम करेगा रेस्क्यू मोबाइल सिस्टम, कंपनी ने किए ये दावा..
उत्तराखंड: किसी भी आपदा की स्थिति में जब सारी संचार व्यवस्थाएं ध्वस्त हो जाएं, तब ‘रेस्क्यू मोबाइल सिस्टम’ कारगर सिद्ध हो सकता है। से इजाद करने वाली कंपनी का दावा है कि यह सिस्टम हिमालय के सुदूर इलाके में भी काम करेगा। इस तकनीक की सहायता से न केवल आपदा प्रबंधन पर काम करने वाली टीम की सहायता की जाएगी, बल्कि आपदा प्रभावित व्यक्तियों को खोज कर उन्हें समय रहते रेस्क्यू कर अस्पताल या सुरक्षित ठिकाने पर पहुंचाया जा सकेगा।
मसूरी रोड स्थित एक होटल में उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूएसडीएमए) की ओर से आयोजित अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला में हरियाणा गुड़गांव की एक कंपनी विहान नेटवर्क लिमिटेड (वीएनएल) की ओर से इस यंत्र का प्रस्तुतीकरण दिया गया है। लगभग 50 लाख रुपये की लागत से तैयार किया गया यह प्रोटेबल सिस्टम 20 मिनट में कहीं भी ले जाकर इंस्टाल किया जा सकता है।
कंपनी के प्रबंधक राहुल दूबे और टेक्निकल मैनेजर फुलविंदर सिंह का कहना हैं कि यह सिस्टम अपनी तरह का एक मोबाइल नेटवर्क तैयार करता है, जो 500 मीटर से 10 किमी के दायरे में काम करता है। आपदाग्रस्त क्षेत्र में इस सिस्टम को इंस्टाल करने के साथ ही यह मौके पर मौजूद आपदा प्रबंधन तंत्र को एक नेटवर्क के जरिए आपस में जोड़ देता है। इस नेटवर्क से सभी लोग आपस में बातचीत करने के साथ ही वीडियो कॉलिंग और एसएमएस के जरिए भी बात कर सकते हैं। जहां यह सिस्टम इंस्टाल किया जाता है, सेटअप पर लगा कैमरा वहां कि 360 डिग्री का लाइव वीडियो भी जिला मुख्यालय के अलावा नेटवर्क से जुड़े मोबाइल पर भेजता है।
ऐसे काम करता है सिस्टम
उत्तराखंड में वर्ष 2013 में आई केदारनाथ आपदा के दृश्य लोगों के जेहन मेें आज भी ताजा हैं। जलप्रलय ने केदारघाटी को पूरी तरह तहस-नहस कर दिया था और सारे संपर्क टूट गए थे। ऐसे में यदि ‘रेस्क्यू मोबाइल सिस्टम’ होता तो सबसे पहले सभी रेस्क्यू टीमें एक नेटवर्क के जरिए आपस में जुड़ जातीं। केदारनाथ की लाइव तस्वीरें सेटेलाइट के माध्यम से जिला मुख्यालय पर दिखाई देती। जो लोग मलबे में दब गए थे या आसपास के जंगलों में भटक गए थे, यदि उनके पास मोबाइल होता तो सिग्नल नहीं होने की स्थिति में भी उन्हें ढूंढ़ा जा सकता था।
मलबे में दबे लोगों को ऐसे ढूंढता है सिस्टम..
यदि कोई बिल्डिंग गिर जाए, भूस्खलन में बहुत सारे लोग दब जाएं, तब यह सिस्टम उस एरिया के सभी मोबाइल को डिटेक्ट कर लेता है। इसके बाद सभी मोबाइल में एक मैसेज भेजता है, जिसमें तीन ऑप्शन होते हैं। पहले ऑप्शन में मलबे में दबा व्यक्ति एक नंबर दबाता है, जिसका मतलब होता है मैं ठीक हूं। दो नंबर दबाने का मतलब है मदद चाहिए और यदि कोई रिस्पांस नहीं मिले तो समझो व्यक्ति या तो बेहोश है या मर चुका है।
ये खिलाड़ी होंगे द्रोणाचार्य, खेल रत्न सहित इस अवॉर्ड से सम्मानित..
उत्तराखंड: प्रदेश के खिलाड़ी देश-दुनिया में अपनी प्रतिभा के दम पर प्रदेश का नाम रोशन कर रहे है। इन खिलाड़ियों की हौसला अफ्जाई के लिए प्रदेश सरकार इन्हें सम्मानित करने जा रही है। बताया जा रहा है कि सीएम धामी खेल विभाग की ओर से 24 मार्च को परेड ग्राउंड में आयोजित कार्यक्रम में करीब 74 से अधिक खिलाड़ियों और 15 प्रशिक्षकों को सम्मानित करेंगे और नगद पुरस्कार भी दिया जाएगा। इसकी लिस्ट तैयार कर ली गई है।
आपको बता दे कि अनुसार राज्य में कोविड एवं अन्य वजहों से पिछले चार वर्षों से खिलाड़ियों और खेल प्रशिक्षकों को पुरस्कृत नहीं किया जा सका था, लेकिन अब पुरस्कारों की घोषणा के बाद इन्हें पुरस्कृत किया जाएगा। राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन करने वाले प्रदेश के होनहार खिलाड़ियों को पुरस्कृत किया जाएगा। इस संबंध में खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों की सूची भी जारी कर दी गई है। लिस्ट में मानसी नेगी, परमजीत बिष्ट सहित कई खिलाड़ियों के नाम शामिल है।
बताया जा रहा है कि द्रोणाचार्य अवाॅर्ड के लिए विभाग को आठ और खेल रत्न पुरस्कार के लिए 11 आवेदन मिले, जबकि लाइफ टाइम अचीवमेंट अवाॅर्ड के लिए छह आवेदन मिले हैं। हल्द्वानी निवासी ममता जोशी पाठक, अर्जुन सिंह महर, जानकी कार्की और ज्योती जोशी और बागेश्वर के कमलेश तिवारी को 24 मार्च को मुख्यमंत्री द्वारा सम्मानित किया जाएगा साथ ही नगद पुरस्कार भी दिया जाएगा। कार्यक्रम का आयोजन देहरादून स्थित परेड ग्राउंड में किया जाएगा।
चैत्र नवरात्रि के पहले दिन तय हुई गंगोत्री धाम कपाट खुलने की तिथि..
उत्तराखंड: चैत्र नवरात्रि के पहले दिन आज बुधवार को गंगोत्री धाम के कपाट खुलने की तिथि तय हुई। श्रद्धालुओं के लिए 22 अप्रैल को गंगोत्री धाम के कपाट खोल दिए जाएंगे। 21 तारीख को मां गंगा की भोग मूर्ति गंगोत्री के लिए प्रस्थान करेगी। बता दे कि इस बार चारधाम यात्रा की शुरुआत 22 अप्रैल से होगी। देश-दुनिया से आने वाले तीर्थयात्रियों की यात्रा को सुगम बनाने के लिए सरकार तैयारियों में जुटी है। सरकार को उम्मीद है कि चारधाम यात्रा में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या एक नया रिकॉर्ड बनाएगी।
आपको बता दें कि अब श्रद्धालु घर बैठे गंगोत्री धाम की आरती देख सकेंगे। इसके लिए पर्यटन विभाग प्रसाद योजना के तहत मंदिर में उच्च स्तर के कैमरे लगाने जा रहा है जिससे चार धाम यात्रा के दौरान हर दिन उत्तराखंड पर्यटन विभाग की वेबसाइट पर आरती का सीधा प्रसारण होगा। केंद्र सरकार की प्रसाद योजना के तहत चारों धामों में सौंदर्यीकरण सहित कई अन्य विकास कार्य किए जा रहे हैं। इसी योजना के तहत चारों धामों में पर्यटन विभाग उच्च स्तर के कैमरे भी लगाने जा रहा है जिससे धामों में होने वाली आरती व अन्य धार्मिक अनुष्ठान श्रद्धालु घर बैठे देख सकें।
पर्यटन विभाग की ओर से उत्तरकाशी जिले में पहले चरण में यह कार्य गंगोत्री धाम में किया जाएगा। इसके लिए पर्यटन विभाग ने प्रसाद योजना की कार्यदायी संस्था ब्रिडकुल को कैमरे लगाने के कार्य का इस्टीमेट भेजने को कहा है। कैमरे लगाए जाने के बाद गंगोत्री धाम परिसर में होने वाले धार्मिक अनुष्ठान व आरती का सीधा प्रसारण उत्तराखंड पर्यटन विभाग की वेबसाइट पर होगा। यहां से श्रद्धालु गंगोत्री धाम की आरती देख सकेंगे।
उत्तराखंड में जल्द लागू हो सकती है ये नई नियमावली..
कैदियों को मिलेगी ये सुविधा..
उत्तराखंड: प्रदेश में जेल के वर्षों पुराने कानून के स्थान पर नया मॉडल जेल मैन्युअल (नियमावली) लागू होने वाला है। बताया जा रहा है कि प्रदेश में जल्द ही नई जेल नियमावली को लागू किया जाएगा। इसके लिए अगली कैबिनेट बैठक में ये प्रस्ताव लाया जा सकता है। कैबिनेट से पास होने पर जेल की काया बदली हुई नजर आएगी। जेलों में कैदियों के स्वास्थ्य व रहने की सुविधाओं और रोजगार को देखते हुए नई नियमावली बनाई गई है।
आपको बता दे कि देश भर की जेलों में कैदियों की समस्याओं को देखते हुए वर्ष 2016 में माडल जेल मैन्युअल बनाया गया था। केंद्र के मैन्युअल में कैदियों की सुविधाओं पर विशेष फोकस है। यह भी बताया गया है कि एक बैरक में अधिकतम कितने कैदी रहेंगे और इन्हेंं क्या सुविधा दी जाएगी।
इसमें कैदियों की पढ़ाई के साथ ही स्वरोजगारपरक शिक्षा पर भी जोर दिया गया है। इसके बाद सभी राज्यों से इसी को आधार बनाते हुए अपने स्तर पर मैन्युअल बनाने को कहा गया। उत्तराखंड में भी इसकी तैयारी शुरू की गई थी।
बताया जा रहा है कि उत्तराखंड में जेलों के लिए नई नियमावली का इंतजार काफी लंबा हो चला है। हालांकि विशेष सचिव गृह ने ये बात कही है कि अगली कैबिनेट में ये प्रस्ताव कैबिनेट में लाया जा सकता है। बताया जा रहा है कि उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में भी एक नई जेल करीब-करीब तैयार हो चुकी है और संभावना है कि अगले 6 महीने के भीतर इसमें भी कैदियों को रखने की स्थिति बना दी जाएगी।
सांस्कृतिक कला मंच ने किया फूलदेई महोत्सव का आयोजन..
रुद्रप्रयाग। सांस्कृतिक कला मंच तिलवाड़ा की ओर से बाल पर्व फूलदेई महोत्सव को भव्य रूप से मनाया गया। प्रातःकाल नगर पंचायत तिलवाड़ा क्षेत्र में फुलारी बच्चों ने झांकी निकाली, जिसमें नगर क्षेत्र की दस टीमों ने प्रतिभाग किया। फूलदेई की इस प्रभात फेरी झांकी में टीमों ने शिक्षिका और साहित्यकार व मंच की संयोजक विमला राणा की गढ़वाली कविता बसंत ऐगे पुगड़ियों मा फुलार एग्ये को गाकर पथ चलन को मधुरिम बना दिया।
विमला राणा की इस कविता को स्वर देने में शान्ति पंवार, कश्मीरा, हिमानी और संगीता नेगी ने सहयोग दिया। कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि मुख्य शिक्षा अधिकारी जनपद रुद्रप्रयाग विनोद प्रसाद सिमल्टी ने अपना संबोधन गढ़वाली भाषा में करते हुए इस पर्व के मनाने के उद्देश्यों और लाभों पर बात करते हुए नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति से परिचित कराने के लिए जन-जन और बच्चों को बताने पर जोर दिया।
प्रधानाचार्य राइंका तिलकनगर डीएस राणा ने कहा कि आज के दौर में इस प्रकार के कार्यक्रमों की परम आवश्यकता है। नगर पंचायत अध्यक्ष संजू जगवाण ने फुलारी पर्व पर चर्चा करते हुए कहा कि इस सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण और संवर्धन करने की जिम्मेदारी हम सबकी है। कार्यक्रम में शशिकांत सेमवाल और वीरेंद्र सिंह बिष्ट ने भी अपने विचार रखे।
फुलारी कार्यक्रम के सफल क्रियान्वयन में तिलवाड़ा के युवा व्यापारी और सामाजिक कार्यकर्ता अंशुल जगवाण और हैप्पी असवाल का विशेष सहयोग रहा। सह संयोजक संगीता गौड़ ने कार्यक्रम के बारे में जानकारी के साथ सभी अतिथियों व बच्चों का आभार व्यक्त कर बच्चों को शुभकामनाएं दी।
केदारनाथ यात्रा के दौरान कुंड से गुप्तकाशी के बीच लगता है घंटो का जाम..
डीएम मयूर दीक्षित ने अधिकारियों के साथ किया हाईवे का निरीक्षण..
रुद्रप्रयाग। केदारघाटी और केदारनाथ यात्रा की लाइफलाइन कहे जाने वाले रुद्रप्रयाग-गौरीकुंड राष्ट्रीय राजमार्ग पर चारधाम यात्रा के दौरान जाम की स्थिति से तीर्थयात्री बेहद ही परेशान रहते हैं। ऐसे में यात्रा मार्ग के कुंड से गुप्तकाशी के जिन स्थानों में जाम की स्थिति बनी रहती है, उन स्थानों का जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने अधिकारियों के साथ स्थलीय निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने अधिशासी अभियंता राष्ट्रीय राजमार्ग राजबीर सिंह चैहान एवं संबंधित ठेकेदार को निर्देश दिए कि यात्रा मार्ग के सेमी से गुप्तकाशी तक जिन स्थानों पर रोड़ संकरा है और जाम की स्थिति बनी रहती है। ऐसे स्थानों को यात्रा शुरू होने से पूर्व दुरूस्त किया जाए। उन्होंने सेमी के पास चल रहे रोड कटिंग के कार्यों को तीव्र गति से करने के निर्देश दिए, जिसके लिए उन्होंने श्रमिकों की संख्या बढ़ाने को कहा।
उन्होंने यह भी कहा कि जिन स्थानों पर भू-धंसाव की स्थिति हो रही है, उन पर तत्परता से पुश्ता लगाया जाए तथा पानी की निकासी के लिए नाली निर्माण कार्य भी किया जाए। डीएम ने रोड कटिंग के कार्य को तत्परता से करने को कहा। साथ ही साफ तौर पर निर्देश दिए कि किसी की सूरत में यात्रा के दौरान जाम की स्थिति पैदा न हो और ट्रैफिक निरंतर संचालित होता रहे।
