जौलीग्रांट एयरपोर्ट पर लैंड नहीं कर पाई जयपुर से आ रही फ्लाइट..
उत्तराखंड: घने कोहरे के कारण जयपुर से आ रही फ्लाइट जौलीग्रांट एयरपोर्ट पर लैंड नहीं कर पाई। फ्लाइट को डायवर्ट कर दिल्ली भेजा गया। एयरपोर्ट के डिप्टी जनरल मैनेजर नितिन कादियान ने बताया बृहस्पतिवार की शाम करीब 6:30 जौलीग्रांट एयरपोर्ट के आसपास घना कोहरा छा गया था। इस दौरान जयपुर से देहरादून आ रही इंडिगो की फ्लाइट लैंड नहीं कर सकी। जिसे दिल्ली डायवर्ट कर दिया गया बाद में फ्लाइट रद्द हो गई। पर्वतीय क्षेत्रों में हो रही बर्फबारी से मैदानी भागों में भी ठंड बढ़ रही है। सुबह 10 बजे तक कोहरा छाए रहने से लोगों की परेशानियां बढ़ गई। हल्की धूप निकलने के बाद ही लोग घरों से बाहर निकले।
ऋषिकेश में गुरुवार को सरकारी और गैर सरकारी कार्यालय के साथ ही घरों में दिनभर ठंड को दूर भगाने के लिए लोगों ने हीटर का सहारा लिया। गंगा घाट, तट, आंतरिक मार्गों पर लोग अलाव जलाते हुए दिखाई दिए। मुनि की रेती, तपोवन, स्वर्गाश्रम, लक्ष्मणझूला, ऋषिकेश मुख्य बाजार, त्रिवेणी घाट, आस्था पथ आदि स्थानों पर देशी, विदेशी पर्यटकों के अलावा स्थानीय लोग गर्म कपड़ों में पैक रहे। शाम को शीतलहर चलते के कारण लोग अपने घरों के अंदर कैद हो गए। बाजार की सड़कों पर कामकाजी लोग ही नजर आए। पहाड़ों में ऊंचाई वाले इलाकों में हिमपात और मैदान में कोहरा छाने से शीतलहर चल रही है।
एम्स में हो सकेगी कोरोना सैंपल की जीनोम सिक्वेंसिंग, अगले महीने तक हो जाएगा सेटअप तैयार..
उत्तराखंड: अब एम्स में भी कोरोना सैंपल की जीनोम सिक्वेंसिंग की सुविधा मिल पाएगी। जीनोम सिक्वेंसिंग मशीन मिलने के बाद एम्स में अब लैब का सेटअप तैयार किया जा रहा है। फरवरी में सेटअप पूरी तरह से बनकर तैयार हो जाएगा। हालांकि अगर जरूरत पड़ती है तो सेटअप तैयार होने से पहले भी एम्स में कोराना सैंपल की जीनोम सिक्वेंसिंग की जाएगी।
कोरोना की आशंका को देखते हुए एम्स में पिछले डेढ़ साल से जीनोम सिक्वेंसिंग लैब स्थापित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। लेकिन एम्स प्रशासन को प्रयासों में सफलता नहीं मिल पा रही थी। प्रो. मीनू सिंह ने जुलाई 2022 में एम्स निदेशक का कार्यभार संभालने के बाद जीनोम सिक्वेंसिंग मशीन की उपलब्धता के लिए नए सिरे से प्रयास किए। आखिरकार केंद्र से स्वीकृति मिलने के साथ एम्स पिछले साल दिसंबर 1.92 करोड़ रुपये की जीनोम सिक्वेंसिंग मशीन खरीदने में सफल रहा।
एम्स निदशक प्रो. मीनू सिंह ने कहा कि कोरोना के नए नए वैरिएंट सामने आ रहे हैं। ऐसे में जीनोम सिक्वेंसिंग आज सभी बड़े चिकित्सा और शोध संस्थानों की जरूरत बन गई है। उन्होंने बताया कि एम्स में आगामी फरवरी महीने में जीनोम सिक्वेंसिंग लैब का सेटअप बनकर तैयार हो जाएगा। कहा कि कोरोना सैंपल के मामले में जरूरत पड़ने पर सेटअप तैयार होने से पहले भी जांच की जा सकेगी।
क्या है जीनोम सिक्वेंसिंग
जिस तरह इंसान का शरीर डीएनए से मिलकर बनता है, वैसे ही वायरस डीएनए या आरएनए से बनता है। कोरोना वायरस आरएनए से बना है। जीनोम सीक्वेंसिंग वो तकनीक है, जिससे वायरस की अनुवांशिक जानकारी मिलती है। जीनोम सीक्वेंसिंग से वायरस की संरचना, व्यवहार, प्रसार यानी उसके पूरे बायोडाटा की जानकारी मिल जाती है। वहीं वायरस के नए वैरिएंट के बारे में भी इसी तरह की जानकारी मिलती है।
बिग बी ने लोगों को समझाया ‘अवतार 2’ के पीछे छुपा संदेश..
देश-विदेश: बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन का कैमरे के सामने बेहतरीन अदायगी करने के साथ ही किताबों और कलम से भी गहरा नाता है। बिग बी अक्सर अपने दिलों-दिमाग में चल रहे विचारों को पन्नो पर उतारना पसंद करते हैं। हालांकि, अब ऐसा करने का उनका माध्यम डिजिटल ब्लॉग होता है। लेकिन अमिताभ बच्चन को आए दिन अपने ब्लॉग के जरिए किसी न किसी मुद्दे पर अपनी राय रखते देखा जाता है। इसी क्रम में हाल ही में अमिताभ बच्चन ने अपने ब्लॉग में जेम्स कैमरून की हालिया रिलीज हुई फिल्म ‘अवतार: द वे ऑफ वॉटर’ का जिक्र किया है। इस ब्लॉग में अमिताभ ने ‘अवतार 2’ की जमकर तारीफ की है।
पूरी दुनिया में दर्शकों का भरपूर प्यार पा रही जेम्स कैमरून की ‘अवतार 2’ पर अब बॉलीवुड के महानतम कलाकार माने जाने वाले अमिताभ बच्चन ने भी अपनी राय रखी है। अमिताभ बच्चन ने पानी में गोते खाती नावी की दुनिया की अपने लेटेस्ट ब्लॉग में जमकर तारीफ की है। इसके साथ ही बिग बी ने ब्लॉग में फिल्म के पीछे छुपे जेम्स कैमरून के उद्देश्य को भी लोगों को समझाया है।
अमिताभ बच्चन लिखते हैं, ‘अवतार: द वे ऑफ वॉटर को सभी ने देखा और इसे देखने के बाद लोगों के कई अलग-अलग मत आए.. बहुत से लोगों ने महसूस किया कि यह बहुत लंबी थी और कुछ इसका अंत देखने तक का इंतजार नहीं कर पाए… लेकिन सभी लोग इसके पीछे का उद्देश्य समझने में असफल रहे। मुझे लगता है कि इसकी कहानी के पीछे एक गहरा संदेश है। कुदरत से खिलवाड़ मत करो….. क्योंकि वह कभी न कभी इसका बदला लेगी !!’
बिग बी ने आगे लिखा, ‘शेर हमेशा उस कांटे को याद रखेगा जिसे एंड्रोक्लीज ने दर्द में उसके पंजे से निकाला था .. और संकट में उसके बचाव में आया था .. ऐसे ही जल महासागरों का जंगली.. और यह तथ्य भी कि जल हमारे अस्तित्व का सबसे महत्वपूर्ण तत्व है..हम पानी में पैदा हुए थे और पानी में ही खत्म हो जाएंगे..।’
पीएम मोदी ने जल संरक्षण के लिए दिए कई मंत्र..
मनरेगा के तहत पानी पर अधिक से अधिक हो काम- पीएम मोदी..
देश-विदेश: जल विजन 2047′ विषय पर आज यानी पांच जनवरी से दो दिवसीय प्रथम अखिल भारतीय राज्य मंत्री वार्षिक सम्मेलन का आयोजन मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में किया गया है। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सम्मेलन को संबोधित किया। उनका कहना हैं कि आज भारत जल सुरक्षा में अभूतपूर्ण काम कर रहा है और अभूतपूर्ण निवेश भी कर रहा है। जल संरक्षण के लिए राज्यों के प्रयास देश के सामूहिक लक्ष्यों को प्राप्त करने में बहुत सहायक होंगे। पीएम मोदी ने कहा कि मनरेगा के तहत पानी पर अधिक से अधिक काम किया जाना चाहिए।
जन भागीदारी की सोच को जनता के मन में जगाना है: पीएम मोदी..
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कहना है कि जल संरक्षण के लिए जन भागीदारी की सोच को जनता के मन में जगाना है। हम इस दिशा में जितना ज्यादा प्रयास करेंगे उतना ही अधिक प्रभाव पैदा होगा। देश हर जिले में 75 अमृत सरोवर बना रहा है और अब तक 25,000 अमृत सरोवर बन भी चुके हैं। पीएम मोदी ने कहा कि Water vision 2047 अगले 25 वर्षों के अमृत यात्रा का महत्वपूर्ण आयाम है।
जियो मैपिंग और जियो सेंसिंग जल संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही..
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि जियो मैपिंग और जियो सेंसिंग जैसी तकनीक जल संरक्षण के कार्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। कई राज्यों ने इसमें अच्छा काम किया है और कई राज्य इस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। जल संरक्षण के लिए केंद्र ने अटल भू-जल संरक्षण योजना की शुरुआत की है। साथ ही सरकार ने इस बजट में सर्कुलर इकोनॉमी पर काफी जोर दिया है। जल संरक्षण के क्षेत्र में भी सर्कुलर इकोनॉमी की बड़ी भूमिका है। जब ट्रीटेड जल को पुन: उपयोग किया जाता है, ताजा जल को संरक्षण किया जाता है तो उससे पूरे इकोसिस्टम को बहुत लाभ होता है।
शहरीकरण की रफ्तार के मद्देनजर जल संरक्षण पर गंभीरता से सोचना होगा..
पीएम मोदी ने कहा कि हमारे देश में शहरीकरण तेजी से बढ़ रहा है और जब शहरीकरण की रफ्तार ऐसी हो तो हमें पानी के विषय में पूरी गंभीरता से सोचना चाहिए। इंडस्ट्री और खेती दो ऐसे सेक्टर्स हैं, जिसमें पानी की आवश्यकता अधिक होती है। इन दोनों सेक्टर्स को मिल कर जल संरक्षण अभियान चलाना चाहिए और लोगों को जागरूक करना चाहिए।
‘स्वच्छ भारत अभियान’ से मिला फायदा..
‘स्वच्छ भारत अभियान’ से जब लोग जुड़े तब जनता में भी चेतना और जागरूकता आई। सरकार ने संसाधान जुटाए,वाटर ट्रीटमेंट प्लांट और शौचालय जैसे अनेक कार्य किए। लेकिन अभियान की सफलता तब सुनिश्चित हुई जब जनता ने सोचा कि गंदगी नहीं फैलानी है। जनता में यही सोच जल संरक्षण के लिए भी जगानी होगी।
देहरादून में हाईटेक नियो मेट्रो के लिए यहां जमीन मुहैय्या कराएगा एमडीडीए..
उत्तराखंड: राजधानी देहरादून में सफर आसान होने वाला है। दून में अब जल्द ही नियों मेट्रो दौड़ती नजर आएगी। पहले चरण में देहरादून में मेट्रो नियो के लिए कवायद शुरू कर दी है। मेट्रो नियो प्रोजेक्ट की राह से जमीन की अड़चन दूर हो गई है। मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) आईएसबीटी के पास बाजार दर अपनी जमीन देने के लिए तैयार हो गया है। करीब 1600 करोड़ रुपये की लागत से शुरू होने वाली इस योजना के लिए देहरादून में दो कॉरिडोर बनाए जांएगे। देहरादून मेट्रो रेल प्रोजेक्ट केंद्र और राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में शामिल है।
एमडीडीए बोर्ड बैठक में जमीन का प्रस्ताव पारित होने के बाद अपर मुख्य सचिव शहरी विकास को सहमति पत्र भेज दिया गया है। बताया जा रहा है कि बोर्ड बैठक में प्रोजेक्ट की उपयोगिता को देखते हुए निर्णय लिया गया कि आईएसबीटी के पास स्थित एमडीडीए की 14645.48 वर्ग मीटर भूमि बाजार दर पर मुहैया कराई जाएगी। इसमें आईएसबीटी से राजपुर और एफआरआई से रायपुर में मेट्रो नियो चलाने की योजना है। अगले पांच साल में धरातल पर ये योजना नजर आएंगी।
दो रूटों पर दौड़ेगी नियो मेट्रो
आपको बता दे कि देहरादून में नियो मेट्रो दो रूटों पर दौड़ेगी। इसमें एफआरआई से रायपुर के बीच एफआरआई, आईएमए ब्लड बैंक, दून स्कूल, कनॉट प्लेस, घंटाघर, गांधी पार्क, सीएमआई, आराघर, नेहरू कॉलोनी, अपर बद्रीश कॉलोनी, अपर नत्थनपुर, ओएफडी, हाथीखाना, रायपुर में स्टेशन बनाएं जाएगें। जबकि आईएसबीटी से गांधी पार्क के बीच आईएसबीटी, सेवलाकला, आईटीआई, लालपुल, चमनपुरी, पथरीबाग, रेलवे स्टेशन, कोर्ट में स्टेशन होंगे। इस योजना के लिए अब केंद्रीय वित्त मंत्रालय समेत अन्य विभागों से अनुमति मिलनी बाकी है। राज्य स्तर पर अपनाई जाने वाली प्रक्रियाओं को पूरा किया जा रहा है।
ऐसे होंगे कोच, जानें खासियत
बताया जा रहा कि ये मेट्रो नियो सिस्टम रेल गाइडेड सिस्टम है। इसके कोच स्टील या एल्युमिनियम के बने होंगे। मेट्रो नियो के कोच दो तरह की लंबाई के होंगे। एक कोच 12 मीटर लंबा। इसमें अधिकतम 90 यात्री सफर कर सकेेंगे। दूसरा कोच 24 से 25 मीटर लंबा होगा। इसमें 225 यात्री सफर कर सकेंगे। कोच की चौड़ाई ढाई मीटर होगी। हर स्टेशन की लंबाई 60 मीटर तक होगी। इसमें इतना पावर बैकअप होगा कि बिजली जाने पर भी ट्रेन 20 किमी चल सकेगी। इसमें ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम होगा। टिकट का सिस्टम क्यू आर कोड या सामान्य मोबिलिटी कार्ड से होगा। इसके ट्रैक की चौड़ाई आठ मीटर होगी। जहां ट्रेन रुकेगी, वहां 1.1 मीटर का साइड प्लेटफॉर्म होगा। आईसलैंड प्लेटफॉर्म चार मीटर चौड़ाई का होगा।
पूरे प्रोजेक्ट को तैयार होने में इतना होगा खर्च..
बताया जा रहा है कि इस पूरे प्रोजेक्ट को तैयार होने में करीब 1600 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान लगाया जा रहा है इस प्रोजेक्ट के लिए सरकार लोन लेगी। जबकि एलिवेटेड मेट्रो को बनाने में प्रति किलोमीटर का खर्च 300-350 करोड़ रुपये आता है। अंडरग्राउंड में यही लागत 600-800 करोड़ रुपये तक पहुंच जाती है। जबकि मेट्रो नियो या मेट्रो लाइट के लिए 200 करोड़ तक का ही खर्च आता है। इस मेट्रो की लागत परंपरागत मेट्रो की निर्माण लागत से 40 फीसदी तक कम आती है। साथ ही इसमें स्टेशन के लिए ज्यादा बड़ी जगह की जरूरत भी नहीं पड़ती। यह सड़क के सरफेस या एलिवेटेड कॉरिडोर पर चल सकती है। क्योंकि इसमें लागत कम आएगी, इसलिए यात्रियों के लिए सफर सुविधाजनक होने के साथ ही किफायती भी होगा।
26 जनवरी को पूरा देश देखेगा जागेश्वर धाम की झलक..
उत्तराखंड: गणतंत्र दिवस के अवसर पर दिल्ली के राजपथ पर होने वाली परेड में देवभूमि उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत भी नजर आएगी। बता दे देवभूमि की झांकी को परेड में शामिल किया जा रहा है। जिसमें इस साल ‘मानसखण्ड’ की झांकी का प्रदर्शन किया जाएगा। झांकी के अग्र तथा मध्य भाग में कार्बेट नेशनल पार्क में विचरण करते हुए बारहसिंघा, घुरल, हिरन, मोर तथा उत्तराखंड में पाये जाने वाली विभिन्न पक्षियों व झांकी के पृष्ठ भाग में प्रसिद्ध जागेश्वर मन्दिर समूह तथा देवदार के वृक्षों को दिखाया जायेगा
आपको बता दे कि झांकी के साथ उत्तराखण्ड की लोक संस्कृति को प्रदर्शित करने के लिए छोलिया नृत्य का दल सम्मिलित होगा। झांकी का थीम सांग उत्तराखण्ड की लोक संस्कृति पर आधारित होगा। साथ ही उत्तराखंड की प्रसिद्ध लोक कला ‘ऐपण’ का भी झांकी के मॉडल में समावेश किया गया है। झांकी का निर्माण सूचना विभाग के संयुक्त निदेशक/नोडल अधिकारी के.एस. चौहान के दिशानिर्देशन में राष्ट्रीय रंगशाला शिविर, नई दिल्ली में शुरू हो गया है।
बताया जा रहा है कि गणतंत्र दिवस की झांकी के लिए लगभग 27 राज्यों ने अपने प्रस्ताव भारत सरकार को प्रेषित किये थे, जिसमें 16 राज्यों का ही अंतिम चयन हुआ है। झांकी के साथ उत्तराखण्ड की संस्कृति को प्रदर्शित करने के लिए उत्तराखंड का प्रसिद्ध छोलिया नृत्य का ग्रुप 13 जनवरी, 2023 को राष्ट्रीय रंगशाला शिविर, नई दिल्ली के लिए प्रस्थान करेगा। राष्ट्रीय समारोह के नोडल अधिकारी संयुक्त निदेशक, के.एस. चौहान द्वारा झांकी का डिजाइन, थ्री-डी मॉडल तथा संगीत के संदर्भ में रक्षा मंत्रालय के अधीन गठित विशेषज्ञ समिति के सम्मुख नई दिल्ली में 7 बार प्रस्तुतिकरण करने के उपरान्त उत्तराखण्ड राज्य का अंतिम चयन हुआ है। श्री केदारनाथ व बद्रीनाथ की तर्ज पर कुमाऊ के पौराणिक मंदिरों के लिए सीएम पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर मानसखण्ड मंदिर माला मिशन योजना पर काम किया जा रहा है। गणतंत्र दिवस पर कर्तव्य पथ पर मानसखण्ड पर आधारित झांकी का प्रदर्शन होगा। देश विदेश के लोग मानसखण्ड के साथ ही उत्तराखण्ड की लोक संस्कृति से भी परिचित होंगे।
उत्तराखंड में बरगद के पेड़ के नीचे डॉ. योगी ने बनाया बंकर..
उत्तराखंड: अमेरिका की लग्जरी लाइफ स्टाइल छोड़कर 40 साल से देहरादून में रहने वाले पद्मश्री डॉक्टर योगी ऐरन ने दुनिया का पहला ऐसा बंकर बनाया है, जो ऑक्सीजन से भरपूर हैं। यहां पहुंचने पर आपको स्वर्ग का एहसास होता हैं। बंकर बनाने की बात सुनकर आपको युद्ध क्षेत्र की याद जरूर आती होगी, मगर शांत वादियों में बंकर बन रहा हो तो यह किसी अचंभे से कम नहीं होगा. राजधानी देहरादून में पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित डॉ. योगी बंकर बना रहे हैं. यह ऐसा बंकर है कि अगर कभी एटम बम का हमला हो तो उसके रेडिएशन से बचा जा सकेगा. बंकर के ऊपर ढाई सौ बरगद के पेड़ लगे हैं. इतना ही नहीं बंकर के ऊपर छोटी सी नहर भी बनी है।
मेडिकल सुविधाओं से लैस
राजधानी देहरादून से तकरीबन 15 किलोमीटर की दूरी पर कुठाल गेट के पास डॉक्टर योगी का जंगल मंगल क्षेत्र है. जो तरह-तरह के पेड़ पौधों से भरा है. 250 बरगद के पेड़ के नीचे डॉ. योगी आपातकालीन की स्थिति में रहने के लिए एक बंकर बना रहे हैं. इसमें तीन अलग-अलग बड़े कमरे हैं, जिसमें 10 से 12 लोग आसानी से रह सकते हैं. बंकर की दीवारें 10 फीट है. यहां रहने के लिए बेड है, जो ऑक्सीजन मशीन समेत मेडिकल सुविधाओं से लैस है.
बंकर में अंदर बैठकर देख सकेंगे बाहर का नजारा
खास बात यह है कि बंकर से बाहर का नजारा देखने के लिए सीसीटीवी कैमरे भी लगे हैं. बाहर की रोशनी आए इसके लिए रोशनदान बनाया गया है. बड़े-बड़े पहाड़ों के बोल्डर से बंकर के अंदर दीवारें बनाई गई हैं. डॉ. योगी का कहना है कि इस बंकर को रेडिएशन से बचाया जा सकता है. अगर एटम बम का हमला होगा तो उस पर रेडिएशन से बचा जा सकेगा. बंकर के अलग-अलग प्रवेश द्वार बनाए गए हैं।
पत्थरों के बने हैं बेड
बंकर के अंदर पत्थर के बेड हैं. इन्हीं बेड पर आपातकालीन स्थिति में सोया जा सकेगा. बंकर में सुरंग की तरह एंट्री होती है. इसके साथ ही एक कमरे से दूसरे कमरे में जाने के लिए सुरंग नुमा रास्ता भी बनाया गया है. डॉक्टर योगी का कहना है कि आपातकालीन स्थिति में इसमें आसानी से छिपा जा सकेगा, क्योंकि बंकर के ऊपर हरा-भरा एक बगीचा तैयार किया जा रहा है. इसमें ढाई सौ बरगद के पेड़ लगाए गए हैं और एक नहर भी बह रही है।
पेड़-पौधों से घिरा है बंकर..
डॉक्टर योगी इसे दुनिया का पहला ऐसा बंकर बता दे रहे हैं जो इस तरह से बगीचे नुमा क्षेत्र में बन रहा है. उनका कहना है कि यह देश का पहला ऐसा बंकर है जो इस तरह से बरगद के पेड़ के नीचे बनाया गया है. दूर से देखकर कोई इस बात का एहसास नहीं कर सकता. बंकर के ऊपर सैर करने के लिए रास्ता भी बनाया गया है. नहर में मछलियां पाली गई हैं. साथ ही जंगल में पशु पक्षी सैर करते हैं।
झारखंड की निलंबित IAS अधिकारी पूजा सिंघल को सुप्रीम कोर्ट ने दी राहत..
देश-विदेश: झारखंड की निलंबित महिला आईएएस अधिकारी पूजा सिंघल को मंगलवार(तीन जनवरी) को सुप्रीम कोर्ट से एक महीने के लिए अंतरिम जमानत मिल गई है। उन्हें यह जमानत मेडिकल ग्राउंड पर मिली है। सिंघल को गिरफ्तारी के सात माह 23 दिन बाद यह अंतरिम जमानत मिली है। बता दें कि 2000 बैच की भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) की अधिकारी पूजा सिंघल को 11 मई को प्रवर्तन निदेशालय ने गिरफ्तार किया था। उनके ऊपर मनरेगा योजना में कथित अनियमितता करने का गंभीर आरोप है।
बीमार बेटी की देखभाल के लिए मिली जमानत..
उच्चतम न्यायालय ने पूजा सिंघल को अपनी बीमार बेटी की देखभाल के लिए एक महीना के लिए अंतरिम जमानत दी है। न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति अभय एस ओका की पीठ ने प्रवर्तन निदेशालय को सिंघल की मुख्य जमानत याचिका पर तीन सप्ताह में जवाब देने का भी निर्देश दिया। ईडी की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस वी राजू ने कहा कि याचिका गलत है और इसमें कोई दम नहीं है। कानून अधिकारी ने कहा कि मैं इस तरह की दलीलों का विरोध करने वाला आखिरी व्यक्ति होऊंगा।
रांची जाने पर फिलहाल रोक
शीर्ष अदालत, जिसने अब निलंबित आईएएस अधिकारी की याचिका को 6 फरवरी को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है। सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने कुछ शर्तें भी लगाई हैं, जिसमें यह भी शामिल है कि जब तक शहर में सुनवाई के लिए अदालत का मामला सूचीबद्ध नहीं हो जाता, तब तक वह रांची नहीं जाएंगी।
11 मई से हिरासत हैं पूजा सिंघल..
पूजा सिंघल 11 मई से उनसे जुड़ी संपत्तियों पर छापेमारी के बाद से हिरासत में हैं। ईडी ने राज्य के खान विभाग के पूर्व सचिव सिंघल पर मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप लगाया है और कहा है कि उनकी टीम ने दो अलग-अलग मनी लॉन्ड्रिंग जांचों के तहत कथित अवैध खनन से जुड़े 36 करोड़ रुपये से अधिक की नकदी जब्त की है।
टिहरी में आज से 13 जनवरी तक होगी सुरक्षा जवानों की भर्ती..
उत्तराखंड: बेरोजगार युवाओं के लिए टिहरी में जिला सेवायोजन कार्यालय द्वारा रोजगार मेला आयोजित किया जा रहा है। अगर आप भी नौकरी की तलाश कर रहे हैं तो आप इस भर्ती मेले के लिए आवेदन कर सकते हैं। टिहरी के समस्त विकास खण्डों में आगामी 3 जनवरी से 13 जनवरी 2023 तक सुरक्षा जवानों/सुपरवाईजर की भर्ती की जाएगी। इसके लिए अलग-अलग रोजगार मेले का आयोजन किया जाएगा।
आपको बता दे कि एससीसीआई सिक्योरिटी इण्डिया लिमिटेड कम्पनी, देहरादून द्वारा भर्ती की जानी है। जिसके लिए जनपद में अलग-अलग भर्ती मेले का आयोजन किया जाएगा। इच्छुक बेरोजगार युवक जिनकी योग्यता 10 वीं 12 वीं पास है वे 21 से 35 वर्ष आयु के हो शिवरों में प्रतिभाग कर सकते हैं। जिसके लिए पंजीकरण शुल्क रू. 350 केवल चयनित अभ्यर्थियों से लिया जाएगा। चयनित अभ्यर्थियों को एक माह का ट्रेनिंग देहरादून में दिया जाएगा। बताया जा रहा है कि भर्ती के दौरान कोविड-19 के अनुरूप सामाजिक दूरी का पालन करना अनिवार्य होगा।
इस दिन लगेगा भर्ती मेला..
बताया जा रहा है कि दिनांक 3 जनवरी को विकासखण्ड चम्बा, 4 को फकोट (नरेन्द्रनगर), 5 को भिलंगना, 6 को जाखणीधार, 7 को थौलधार, 9 को जिला सेवायोजना कार्यालय में 10 को देवप्रयाग, 11 को कीर्तिनगर तथा 13 को जौनपुर विकासखण्ड मुख्यालय में 11 बजे से आयोजित किये जायेंगे ।
रेलवे की भूमि पर बसे 50 हजार लोगों पर संकट..
उत्तराखंड: हल्द्वानी की ढोलक बस्ती, बनभूलपुरा और अन्य जगहों पर रेलवे की भूमि पर बसे लोगों को हटाने के मामले में पूर्व सीएम हरीश रावत ने सोशल मीडिया पर वर्तमान सीएम पुष्कर सिंह धामी को एक खुला पत्र लिखा। कहा कि कानूनी पहलू अपनी जगह उचित है, लेकिन मानवीय पहलू पर विचार करते समय समझौता किया जाना चाहिए। उनका कहना हैं कि वहाँ वर्षों से रह रहे निवासियों को बाहर निकालने के लिए रेलवे, प्रशासन और नगर पालिका निर्णय केवल कानूनी पक्ष नहीं है, यह मानवीय पक्ष भी है। हल्द्वानी कुमाऊं और प्रदेश की आर्थिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र है। यहां का सामाजिक सौहार्द हमेशा उच्च स्तर का रहा है।
अगर 50 हजार से अधिक लोगों को छोड़ने के लिए मजबूर किया गया तो वे कहां जाएंगे? पूरे हल्द्वानी शहर के साथ-साथ कुमाऊं क्षेत्र में भी अस्थिरता का माहौल रहेगा। सीएम को संबोधित करते हुुए कहा कि कड़कड़ाती ठंड में आपने केवल कानूनी पक्ष देखकर या कानून के गलत इंटरप्रिटेशन के आधार पर 50 हजार लोगों से उनकी छत छीनने जा रहे हैं।
उनका कहना हैं कि कुछ लोग आज भले ही चुप हों, जब स्थितियां बिगड़ेंगी तो वह लोग भी सरकार के विवेक पर अंगुली उठाएंगे। हरीश रावत का कहना हैं कि वह न्यायिक निर्णय पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते हैं, लेकिन राज्य के मुख्यमंत्री के तौर पर आप (धामी) एक अभिभावक का कर्तव्य निभा सकते हैं। उन्होंने सीएम को रेलवे से बातचीत करने, गोला नदी के किनारे-किनारे रिवरफ्रंट डेवलप कर कुछ अतिरिक्त भूमि निकालकर रेलवे की जरूरत की पूर्ति करने की सलाह दी है।
