धामी सरकार का तोहफा, सड़क मार्ग से जुड़ेंगे 3177 गांव..
उत्तराखंड: प्रदेश में संपर्क मार्ग विहीन 3,177 गांवों को मुख्यमंत्री ग्राम संपर्क योजना के तहत मोटर मार्गों से जोड़ा जाएगा। ग्रामीण निर्माण विभाग के प्रस्ताव पर धामी कैबिनेट ने इसे मंजूरी प्रदान की है। इन गांवों के मुख्य मार्गों से जुड़ जाने से हजारों की आबादी को लाभ होगा। इतना ही नहीं योजना के तहत मोटर मार्गों के अलावा पैदल पुलिया, मोटरपुल, अश्वमार्ग, झूला पुल आदि का निर्माण भी किया जाएगा। मुख्यमंत्री ग्राम संपर्क योजना में राज्य के ऐसे गांवों, तोक को शामिल किया गया है, जिनकी आबादी 250 या उससे कम है।
आबादी कम होने की वजह से यह गांव प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना या लोक निर्माण विभाग की कार्ययोजना के मानकों को पूरा नहीं करते हैं, इसलिए इन गांवों में आज तक सड़क नहीं बन पाई है। वर्तमान में प्रदेश के लगभग 2,035 गांव मुख्य मोटर मार्गों से नहीं जुड़ पाए हैं। इसके साथ ही 1,142 गांव ऐसे हैं, जो कच्ची सड़कों से जुड़े हैं। इस तरह से कुल 3,177 बसावटों को मुख्य मार्गों से जोड़ने के लिए नई योजना में शामिल किया गया है। योजना सीमांत के गांवों को सबसे अधिक लाभ होगा। इन गांवों में पर्यटन की सुविधाएं बढ़ेंगी और लोगों की आजीविका में वृद्धि होगी। इसके अलावा ग्रामीण अपनी नगदी फसलों को आसानी से बाजार तक पहुंचा सकेंगे। आपदा की स्थिति में राहत एवं बचाव कार्याें में भी तेजी आएगी।
निजी भूमि पर बना सकेंगे हेलीपैड और हेलीपोर्ट..
उत्तराखंड: प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों में हवाई सेवाओं के विस्तार करने के लिए अब निजी भूमि पर भी हेलीपैड और हेलीपोर्ट बना सकेंगे। इसके लिए भू-स्वामी जमीन को 15 साल के लिए उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (यूकाडा) को लीज पर दे सकता है या स्वयं भी हेलीपैड और हेलीपोर्ट बना सकता है। जमीन पर लीज पर देने पर भू-स्वामी को 100 रुपये प्रति वर्गमीटर के हिसाब से किराया और हेलीपैड व हेलीपोर्ट संचालन व प्रबंधन से प्राप्त होने वाले राजस्व का 50 प्रतिशत भुगतान किया जाएगा, जबकि स्वयं बनाने पर कुल पूंजी निवेश का 50 प्रतिशत सब्सिडी दी जाएगी। प्रदेश में एयर कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए सरकार ने पहली उत्तराखंड हेलीपैड व हेलीपोर्ट नीति को मंजूरी दी है।
इससे पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ ही आपातकालीन चिकित्सा और आपदा के दौरान बचाव व राहत कार्यों में आसानी होगी। प्रदेशभर में कई ऐसे स्थान हैं, जहां पर हेलीपैड या हेलीपोर्ट विकसित किया जा सकता है, लेकिन यहां पर सरकारी जमीन उपलब्ध नहीं है। इसके लिए सरकार ने निजी भूमि पर हेलीपैड व हेलीपोर्ट बनाने की नीति को मंंजूरी दी है।
प्रति वर्ष 100 रुपये प्रति वर्गमीटर के हिसाब से किराया..
नीति में हेलीपैड व हेलीपोर्ट के लिए जमीन देने के लिए भू-स्वामी को दो विकल्प दिए गए हैं। पहला भूस्वामी जमीन को 15 साल के लिए यूकाडा को लीज पर दे सकता है, जिसमें यूकाडा डीजीसीए नियमों के तहत हेलीपैड को विकसित करेगा। इसके लिए बदले भू-स्वामी को प्रति वर्ष 100 रुपये प्रति वर्गमीटर के हिसाब से किराया दिया जाएगा।
इसके साथ ही संचालन एवं प्रबंधन से प्राप्त होने वाले राजस्व का 50 प्रतिशत भुगतान किया जाएगा। दूसरा विकल्प भू-स्वामी स्वयं भी हेलीपैड व हेलीपोर्ट को विकसित कर सकता है। इसके लिए डीजीसीए से लाइसेंस लेकर हेलीपैड का इस्तेमाल करने वालों से शुल्क लेगा। सरकार की ओर से कुल पूंजीगत व्यय पर 50 प्रतिशत सब्सिडी दी जाएगी। नीति में हेलीपैड के लिए कम से 1,000 वर्गमीटर और हेलीपोर्ट के लिए 4,000 वर्गमीटर जमीन अनिवार्य है। हेलीपैड बनाने के लिए 10 से 20 लाख रुपये तक खर्च और हेलीपोर्ट निर्माण में दो से तीन करोड़ रुपये खर्च का अनुमान है। यदि भूस्वामी स्वयं हेलीपैड व हेलीपोर्ट बनाता है तो इस पर सरकार सब्सिडी देगी, जिसका भुगतान दो किस्तों में किया जाएगा।
तेलंगाना में वायुसेना का ट्रेनर एयरक्राफ्ट दुर्घटनाग्रस्त, दो पायलटों की मौत..
देश-विदेश: तेलंगाना में भारतीय वायुसेना के एक ट्रेनर एयरक्राफ्ट के दुर्घटनाग्रस्त होने की खबर सामने आई है। घटना तेलंगाना के मेदक जिले की है। हादसे के समय विमान में एक ट्रेनर पायलट और एक ट्रेनी पायलट मौजूद थे। हादसे में दोनों पायलटों की मौत हो गई है। बताया जा रहा है कि तेलंगाना के डिंडीगुल स्थित एयर फोर्स एकेडमी से सुबह के समय ट्रेनर विमान ने उड़ान भरी थी। जिसके बाद सुबह 8.55 बजे यह विमान हादसे का शिकार हो गया। हादसे का शिकार हुआ विमान Pilatus PC Mk II एयरक्राप्ट था। वायुसेना ने मीडिया रिपोर्ट में जानकारी दी कि ट्रेनर विमान रुटीन उड़ान पर था। हादसे में दोनों पायलेट गंभीर रुप से घायल हो गए थे, जिसके चलते उनकी मौत हो गई। हादसे में किसी आम नागरिक या संपत्ति को नुकसान नहीं हुआ है। वायुसेना ने हादसे की जांच के आदेश दिए हैं। आपको बता दें कि इससे पहले जनवरी में भी भारतीय वायुसेना के दो विमान दुर्घटना का शिकार हुए थे। मध्य प्रदेश के मुरैना में हुए इस हादसे में भारतीय वायुसेना के दो लड़ाकू विमान क्रैश हो गए थे, जिसमें एक पायलट की मौत हो गई थी। ये विमान भी रुटीन ऑपरेशनल फ्लाइंग ट्रेनिंग मिशन पर थे।
उपनल से भर्ती के नाम पर जमकर मनमानी..
उत्तराखंड: प्रदेश में उपनल से भर्तियों के नाम पर विभागों ने जमकर मनमानी की है। सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत सामने आई जानकारी चौंकाने वाली है। जो पद उपनल के दायरे में नहीं आते, उन पर भी उपनल से भर्ती करके 50 हजार रुपये तक वेतन दिया जा रहा है। उत्तराखंड विद्युत संविदा कर्मचारी संगठन (इंटक) के प्रदेश अध्यक्ष विनोद कवि को आरटीआई में मिली जानकारी के अनुसार उपनल के नाम पर चल रही मनमानी स्पष्ट हो रही है। वैज्ञानिक से लेकर लाइनमैन, जेई तक के पदों पर भारी भरकम वेतन पर कर्मचारी व अधिकारी रखे गए हैं जबकि उपनल के पदों में ये पद शामिल ही नहीं हैं।
विभागों ने अपने स्तर से पद बनाकर भर्तियां कर दी..
कोटेश्वर हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट टिहरी में एसएसओ व लाइनमैन, सिडकुल मुख्यालय देहरादून में स्टेना, जेई, असिस्टेंट आर्किटेक्ट, एई, विधि असिस्टेंट जैसे पदों पर 15 हजार से 46 हजार वेतन तक लोग रखे गए हैं। देहरादून स्मार्ट सिटी लिमिटेड में जेई के पदों पर 34 हजार से ऊपर वेतन पर उपनल के माध्यम से रखे गए हैं। स्टेट बायोटेक डिपार्टमेंट में टेक्निकल ऑफिसर, कंप्यूटर ऑपरेटर, साइंटिफिक असिस्टेंट, अकाउंटेंट, साइंटिस्ट-बी जैसे पदों पर 49607 रुपये वेतन तक पर लोग रखे गए हैं। उत्तराखंड तकनीकी विवि में भी सिस्टम मैनेजर, असिस्टेंट अकाउंटेंट, पीए, प्रवर सहायक के पदों पर 24333 रुपये वेतन तक कर्मचारी रखे गए हैं। यूजेवीएनएल मुख्यालय में भी चपरासी, श्रमिक जैसे पदों पर 37 हजार तक वेतन पर भर्तियां की गई हैं। ये सभी वे पद हैं, जो कि उपनल के दायरे में ही नहीं आते। विभागों ने अपने स्तर से पद बनाकर भर्तियां कर दी हैं।
उपनल से भर्तियों के नियम मनमर्जी से बदले..
विनोद कवि का कहना है कि विभागों ने अपने हिसाब से उपनल भर्ती के नियम बदल दिए हैं। उनका कहना हैं कि निदेशालय सैनिक कल्याण, उत्तराखंड स्टेट सीड एंड प्रॉडक्शन सर्टिफिकेशन एजेंसी जैसे विभागों ने तो उपनल कर्मचारियों को विभागीय संविदा पर ले लिया है लेकिन कई विभाग वेतन भी पूरा नहीं दे रहे हैं। ऊर्जा निगमों में उपनलकर्मियों का जोखिमभरा काम होने के चलते बोर्ड ने प्रस्ताव पास करके शासन को भेजा था लेकिन शासन ने महंगाई भत्ते का आदेश रोका हुआ है। इससे कर्मचारी हतोत्साहित हो रहे हैं।
पीएम मोदी की प्रेरणा से राज्य सरकार सर्वांगीण विकास की दिशा में ले रही महत्वपूर्ण निर्णय- सीएम धामी..
उत्तराखंड: सीएम श्री पुष्कर सिंह धामी ने हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्व विद्यालय, श्रीनगर के स्थापना दिवस और स्वर्ण जयंती कार्यक्रम में वर्चुअल प्रतिभाग करते हुए विश्वविद्यालय के स्वर्ण जयंती समारोह की सभी को शुभाकामना दी। उन्होंने हिमालय पुत्र स्वर्गीय हेमवती नन्दन बहुगुणा का स्मरण करते हुए कहा कि यह विश्वविद्यालय उनकी विकासवादी सोच का परिणाम है। विश्वविद्यालय पिछले पांच दशकों से स्व. बहुगुणा जी के विकास के सपने को साकार करने हेतु प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि पचास वर्षों से विश्वविद्यालय अपने दायित्वों का बखूबी निर्वहन कर रहा है, इसी का परिणाम है कि 2009 में इसे केंद्रीय विश्वविद्यालय के रूप में मान्यता मिली।
सीएम धामी का कहना हैं कि यह विश्वविद्यालय शिक्षा एवं शोध के क्षेत्र में नित नए आयाम स्थापित कर रहा है। विश्वविद्यालय द्वारा अर्जित किए गए विभिन्न रिकॉर्ड विश्वविद्यालय के कुशल नेतृत्व और विश्वविद्यालय के शैक्षणिक, गैर शैक्षणिक कर्मचारियों के अथक परिश्रम का प्रतिफल है। विश्वविद्यालय के शिक्षक प्रशिक्षण के माध्यम से लोगों को कृषि, मोटे अनाज के उत्पादन, पर्यावरण, आर्थिकी, संस्कृति, स्थानीय भाषा, के क्षेत्र में कुशल एवं जागरूक भी बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के शैक्षणिक प्रयास कुछ मामलों में अत्यंत विशेष हैं। लगभग 13 हजार फुट की ऊँचाई पर स्थित तुंगनाथ में यह विश्वविद्यालय अपने अथक प्रयासों से एक शोध विस्तारण केन्द्र को संचालित कर रहा है, जिसके अन्तर्गत उच्च हिमालयी दुर्लभ प्रजाति के अनेक औषधीय तथा सगंध पादपों पर शोध किया जाता है। यह कार्य शोध, आयुर्वेद एवं चिकित्सा के साथ ही यहां की आर्थिकी के विकास में भी अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।
हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय ने अपने विशिष्ट प्रयासों से जनसामान्य के लिए इस क्षेत्र की धरोहरों को संग्रहित, संरक्षित एवं प्रदर्शित करने के उद्देश्य से एक पुरातात्त्विक संग्रहालय की स्थापना भी की है, यह अत्यंत सराहनीय कार्य है। आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में संपूर्ण विश्व न केवल हमारी शक्ति और ज्ञान परंपरा से परिचित हो रहा है बल्कि प्रत्येक क्षेत्र में हमारा अनुसरण करने को भी तत्पर है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के ’‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत‘’ के स्वप्न को साकार करने हेतु उत्तराखंड में डबल इंजन की सरकार निरंतर कार्य कर रही है। देहरादून में सांइस सिटी का निर्माण, हल्द्वानी में देश के पहले एस्ट्रो पार्क का निर्माण, अल्मोड़ा में सांइस सेंटर का निर्माण इसके कुछ विशिष्ट उदाहरण हैं। प्रधानमंत्री की प्रेरणा से राज्य सरकार भी प्रदेश के सर्वांगीण विकास की दिशा में अनेक महत्वपूर्ण निर्णय ले रही है।
लोकसभा चुनाव से पहले कैबिनेट विस्तार की संभावना..
उत्तराखंड: लोकसभा चुनाव से पहले उत्तराखंड मंत्रिमंडल में खाली चल रहे चार मंत्रियों के पद भरे जा सकते हैं। ऑपरेशन सिलक्यारा की चुनौती से निपटने के बाद सियासी हलकों में इसकी चर्चा तेज हो गई है। सिर्फ मंत्री पद ही नहीं कुछ और भाजपा नेताओं को इसी महीने दायित्व दिए जाने की संभावना है। सीएम पुष्कर सिंह धामी शुक्रवार को नई दिल्ली पहुंचे। उनके इस दौरे को भी इन दोनों संभावनाओं से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि सीएम निवेशक सम्मेलन का न्योता देने के लिए नई दिल्ली गए हैं। पार्टी सूत्रों का कहना है कि इस दौरान वह कैबिनेट विस्तार समेत कुछ और दायित्व बांटे जाने पर चर्चा कर सकते हैं। सीएम राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, राष्ट्रीय महामंत्री संगठन बीएल संतोष, प्रदेश प्रभारी दुष्यंत गौतम समेत कई अन्य केंद्रीय नेताओं से मार्गदर्शन प्राप्त कर सकते हैं।
उधर, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने पूछे जाने पर कैबिनेट विस्तार और दायित्व आवंटन की संभावना से इंकार नहीं किया है। हालांकि उनका कहना है कि इन दोनों फैसलों को लेने का विशेषाधिकार मुख्यमंत्री को है। इन दोनों मुद्दों पर हाल ही में चर्चा हुई है। सूत्रों के अनुसार पार्टी की भी इच्छा है कि लोकसभा चुनाव में जाने से पहले प्रदेश मंत्रिमंडल में खाली पदों को भर दिया जाए। इसकी एक वजह सरकार में एक मंत्री को कुमाऊं की एक लोस सीट से चुनाव में प्रत्याशी बनाए जाने की संभावना से भी जोड़कर देखा जा रहा है।
अब तक दायित्व की दो सूचियां हो चुकीं हैं जारी..
सीएम पुष्कर सिंह धामी प्रदेश सरकार में विभिन्न बोर्डों, निगमों और आयोगों में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष व सदस्यों के खाली पदों पर पार्टी कई नेताओं की ताजपोशी कर चुके है। अब तक दायित्वों की दो सूचियां जारी हो चुकी हैं। प्रदेश अध्यक्ष भी पूर्व में दायित्व की चार सूचियां जारी होने के संकेत दे चुके हैं। सिलक्यारा टनल संकट से उबरने के बाद अब दायित्व मिलने की राह देख रहे भाजपा नेताओं की निगाहें सीएम पुष्कर सिंह धामी पर लगी हैं। अभी भी प्रदेश सकार के निगमों, बोर्डों और कुछ आयोगों में अध्यक्षों, उपाध्यक्षों व सदस्यों के पद खाली हैं। इन खाली पदों पर कई पार्टी नेताओं की नजरें हैं। इसके लिए वे अपनी-अपनी पहुंच के हिसाब से सीएम से लेकर मंत्रियों, सांसदों के चक्कर लगा रहे हैं।
10वीं-12वीं परीक्षाओं में अब नहीं मिलेगी डिस्टिंक्शन व डिवीजन..
देश-विदेश: सीबीएसई बोर्ड ने 10th और 12th के छात्र-छात्राओं के लिए बड़ा ऐलान किया है। बोर्ड ने 10वीं-12वीं की परीक्षाओं की डेटशीट रिलीज करने से पहले एक बड़ा नोटिस जारी किया है। बताया जा रहा है कि जिससे अब 2024 में कक्षा 10 और कक्षा 12 की परीक्षा में बैठने वाले छात्रों को कोई समग्र डिवीजन, डिस्टिंक्शन या एग्रीगेट नहीं देगा। इसके साथ ही बोर्ड अंकों के प्रतिशत की भी गणना नहीं करेगा।
जानकरी के अनुसार केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) इस संबंध में बोर्ड की तरफ से हाल में नोटिस जारी की गई है। नोटिस में बोर्ड ने कहा है कि सीबीएसई परीक्षा नियंत्रक संयम भारद्वाज ने पीटीआई को इस संबंध में जानकारी दी है, जिसके अनुसार सीबीएसई अब कक्षा 10, 12 की बोर्ड परीक्षाओं में कोई डिवीजन, डिस्टिंक्शन नहीं देगा। बोर्ड को विभिन्न लोगों से बोर्ड की परीक्षाओं में छात्रों के प्रतिशत की गणना के लिए मानदंड बताने के अनुरोध प्राप्त हो रहे हैं।
अधिसूचना में कहा गया है, “इस संबंध में सूचित किया जाता है कि परीक्षा के अध्याय 7 की उपधारा 40.1 (iii) उपनियम यह निर्धारित करते हैं कि:- कोई समग्र डिवीजन/डिस्टिंक्शन/एग्रीगेट नहीं दिया जाएगा। इसके अलावा, यदि किसी उम्मीदवार ने 5 से अधिक विषयों की पेशकश की है, तो सर्वोत्तम 5 विषयों को निर्धारित करने का निर्णय प्रवेश देने वाली संस्था या नियोक्ता द्वारा लिया जा सकता है। यदि उच्च शिक्षा या रोजगार के लिए अंकों का प्रतिशत आवश्यक है तो गणना, यदि कोई हो, प्रवेश संस्थान या नियोक्ता द्वारा की जा सकती है। इससे पहले, सीबीएसई ने अस्वस्थ प्रतिस्पर्धा से बचने के लिए मेरिट सूची जारी करने की प्रथा को भी खत्म कर दिया था।
आपको बता दें कि बोर्ड भारत और विदेश में सभी सीबीएसई-संबद्ध स्कूलों के लिए 1 जनवरी 2024 से 2023-24 शैक्षणिक सत्र के लिए कक्षा 10 और कक्षा 12 की व्यावहारिक परीक्षा आयोजित करेगा। वहीं, सीबीएसई सिद्धांत परीक्षा 15 फरवरी, 2024 से शुरू होगी। माना जा रहा है कि बोर्ड की तरफ से जल्द डेटशीट जारी की जाएगी।हालांकि, अभी बोर्ड की तरफ से डेटशीट जारी करने को लेकर निर्धारित तारीख नहीं बताई गई है। लेकिन उम्मीद जताई जा रही है कि बोर्ड की तरफ से डेटशीट इस सप्ताह जारी कर दिया जाएगा।
बताया जा रहा है कि डेटशीट जारी करने के बाद बोर्ड की तरफ से एडमिट कार्ड जारी किया जाएगा। एडमिट कार्ड जारी होने के बाद छात्र अपने स्कूलों से प्राप्त कर सकेंगे। वहीं, एडमिट कार्ड में किसी तरह की गलती होने पर सुधरवा भी सकेंगे। हालांकि, माना जा रहा है कि बोर्ड एग्जाम 1 महीने पहले यानि कि 10 जनवरी तक एडमिट कार्ड जारी कर देगा। छात्रों को सलाह है कि वेबसाइट पर नजर बनाएं रखें, ताकि कोई महत्वपूर्ण सूचना न छूटने पाए।
रैटहोल माइनर्स सहित बचावकर्मियों को एक महीने का वेतन देंगे कांग्रेस विधायक..
उत्तराखंड: सिलक्यारा सुरंग हादसे के बाद बचाव कर्मियों की पूरे देश ही नहीं दुनिया में प्रशंसा हो रही है। इस काम में लगे श्रमिकों, रैटहोल माइनर्स सहित बचाव में लगे सभी महत्वपूर्ण तकनीकी कार्मिकों को कांग्रेस पार्टी भी सम्मानित करेगी। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने बचाव कर्मियों को सभी कांग्रेस विधायकों का एक माह का वेतन पारितोषिक के रूप में देने की घोषणा की है।
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने कहा कि सिलक्यारा की सुरंग से 41 मजदूरों को सुरक्षित निकालना देश के श्रमिकों की कार्यकुशलता और देशवासियों की जान बचाने के लिए अपनी जान को जोखिम में डालने के जज्बे से संभव हुआ है। उन्होंने कहा कि इन 16 रातों और 17 दिनों में देश और प्रदेश की आपदा प्रबंधन की परीक्षा हो रही थी। उन्होंने कहा कि हर देशवासी प्रार्थना कर रहा था कि किसी तरह सुरंग में फंसे कार्मिक सुरक्षित बाहर आ जाएं।
उन्होंने कहा कि सिलक्यारा हादसे से यह भी पता चल गया है कि सरकार और आपदा प्रबंधन कर रहे प्रतिष्ठित संगठनों के पांच प्लान, भारी मशीनरी और करोड़ों रुपयों से जो काम नहीं हो पाया, उस मिशन में अंतिम सफलता रैट होल माइनर्स, अन्य अनाम श्रमिक और साधारण तकनीकी कार्मिकों के कारण मिली है। इन सभी ने अपनी जान को जोखिम में डालकर अपने साथी मजदूरों की जान बचाई है। यशपाल आर्य का कहना हैं कि सरकार की ओर से रैटहोल माइनर्स को दिया गया 50-50 हजार का पारितोषिक बहुत कम है। सरकार को इसे बढ़ाने के साथ इन कर्मवीर रैट होल माइनर्स के लिए अन्य सुविधाओं की घोषणाएं भी करनी चाहिए।
मातृ शक्ति के सहयोग से होगा राष्ट्र का संपूर्ण विकास- सीएम धामी..
उत्तराखंड: हल्द्वानी स्थित एमबी इंटर कालेज में गुरुवार को ईजा- बैंणी महोत्सव का आयोजन किया गया। जिसमें नैनीताल समेत अन्य जिलों से करीब 40 स्वयं सहायता समूहों ने पहाड़ी उत्पादों के स्टाल लगाए। महोत्सव में मुख्य अतिथि सीएम पुष्कर सिंह धामी ने नैनीताल जिले के लिए 713 करोड़ की 66 योजनाओं का लोकार्पण और 193 योजनाओं का शिलान्यास किया।
ईजा बैंणी महोत्सव को लेकर आर्मी गेट से लेकर एमबीइंटर कॉलेज चौराहे तक पारंपरिक लोक वाद्य यंत्र छोलिया और सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने दर्शकों को अपनी ओर आकर्षित किया। बता दें कि कुछ समय पूर्व ही उत्तराखंड का छोलिया गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज हुआ है। राज्य की समृद्ध लोक सांस्कृतिक विरासत को देखकर आगंतुक भी झूम उठे। सुबह 09 बजे से कार्यक्रम की समाप्ति तक अपने प्रदर्शन से दर्शकों को बांधे रखने के साथ ही उत्तराखंड की विरासत को भावी पीढ़ी तक पहुंचाया। तिकोनिया चौराहे से दुर्ग सिटी सेंटर चौराहे तक दोनों तरफ हजारों की संख्या में लोगों ने सीरम का अभिवादन किया इस दौरान स्कूली बच्चे वह महिलाओं ने सीरम का स्वागत किया।सीएम ने मातृशक्ति पर पुष्पवर्षा कर नमन किया, और आशीर्वाद प्राप्त किया ।
महोत्सव में पहुंचे सीएम धामी का महिलाओं ने दुर्गा सिटी सेंटर में फूल मालाओं के साथ कलश यात्रा कर जोरदार स्वागत किया। इसके बाद कार्यक्रम स्थल में पहुंचे सीएम धामी ने सर्वप्रथम 713 करोड़ की विभिन्न योजनाओं का लोकार्पणों शिलान्यास किया हुआ प्रदेश के अन्य जनपदों के विकास योजनाओं का भी शिलान्यास व लोकार्पण वर्चुअल माध्यम से किया। इसके बाद कार्यक्रम स्थल में महिला समूहों द्वारा लगाए गए विभिन्न स्टालों का निरीक्षण कर महिला समूहों का उत्साहवर्धन किया। जहां महिलाएं सीएम धामी का स्वागत कर रहीं थी। वहीं सीएम धामी ने भी महोत्सव में पहुंची महिलाओं का पुष्प वर्षा कर आभार व्यक्त किया।
सीएम धामी ने कन्या पूजन और दीप प्रज्जवलित कार्यक्रम का शुभारंभ किया। महोत्सव में पहुंचे मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि राज्य के विकास के लिए महिलाओं को योगदान बहुत जरुरी है। कहा कि मातृ शक्ति के सहयोग से राष्ट्र का संपूर्ण विकास होगा। इस दौरान उन्होंने व्यवसाय के क्षेत्र में स्टार्ट अप कर रही महिलाओं से बात कर महिला समूहों का उत्साहवर्धन किया। साथ ही जन कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से उत्कृष्ट महिला उद्यमी महिलाओं को सम्मानित किया। जिसमें लीला मटियाली, कमला नेगी, कृति, मिनाक्षी खाती, श्रद्धा कांडपाल, हेमा परगांई, कमला नेगी, पूजा रावत, कमला अरोड़ा, गुंजन, निर्मला देवी, कोमल अधिकारी, मनोरमा, खष्टी राघव को सम्मानित किया।
ईजा बैंणी महोत्सव में पहुंचे सीएम पुष्कर सिंह धामी ने जिले के लिए कई महत्त्वपूर्ण घोषणाएं की। जिसमें मुख्य रूप से जम्मू कश्मीर राजौरी में शहीद संजय बिष्ट की याद में रातीघाट स्थित इंटर कालेज को शहीद संजय बिष्ट इंटर कालेज के साथ हली मोटर मार्ग को शहीद संजय बिष्ट के नाम से जानने की घोषणा की। साथ ही राजकीय इंटर कालेज कालाढूंगी में सड़क का विस्तार, हल्द्वानी गौवंश संरक्षण के लिए जल्द ही गौशाला निर्माण, शीशमहल स्थित फिल्टर प्लांट का क्षमता विकास, रानीबाग पुल का निर्माण करने की बात कही।
हल्द्वानी हरित कोयला परियोजना..
नगर निगम हल्द्वानी-काठगोदाम एवं एनटीपीसी विद्युत व्यापार निगम लिमिटेड (एनवीवीएन) के मध्य एमओयू किया गया। अनुमानित परियोजना लागत ₹ 230 Cr है जिसे एनटीपीसी विद्युत व्यापार निगम लिमिटेड एनवीवीएन), एनटीपीसी लिमिटेड द्वारा ही वहन किया जाना है। यह उत्तराखंड की प्रथम सुविधा है जो नगरीय ठोस अपशिष्ट को हरित चारकोल में बदलेगी। गौला रौखड़ (गौला बायपास रोड), हल्दवानी में प्लांट प्रस्तवित है।
भारत सरकार के द्वारा अत्मनिर्भर भारत अभियान का समर्थन करने के लिए हल्द्वानी में एक “वेस्ट टू चारकोल” सुविधा स्थापित की जाएगी। जिसमें नगर निगम द्वारा एकत्रित किया गया 500 टन प्रति दिन (टीपीडी) नगरीय ठोस अपशिष्ट (एम.एस.डब्ल्यू.) को चारकोल में प्रसंस्कृत किया जायेगा। यह सुविधा पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक पर आधारित होगी और भारत सरकार के अत्मनिर्भर भारत अभियान का समर्थन करेगी।
यह परियोजना हल्द्वानी के लिए महत्वपूर्ण अप्रत्यक्ष लाभ प्रदान करेगी, जो कूड़े से मुक्त शहरों के रूप में होगा, जो भारत सरकार के स्वच्छ भारत मिशन के उद्देश्यों को प्राप्त करने में मदद करेगा। इस परियोजना से कार्बन उत्सर्जन में 1.5 लाख टन कार्बन डाई ऑक्साइड में कमी की उम्मीद है। पहाड़ का मोटा अनाज यानी श्री अन्न द्वारा निर्मित स्वादिष्ट व्यंजनों का स्टालों से प्रदर्शन किया गया। महोत्सव में पहुंचे लोगों ने झंगोरे की खीर, मंडवे की पूरी, पिंडालु, दाल के पकोड़े, गहथ के दुबके आदि का स्वाद लिया। राज्य के उत्पाद अपने स्वाद के साथ ही पौष्टिकता से भरपूर है। जहां कंडाली का सेवन एनीमिया में फलदायक है वही मंडवे में दूध से अधिक कैल्शियम पाया जाता है।
महोत्सव में लाइव कला का प्रदर्शन कर रहे कुम्हार के साथ घड़ा बनाने में हाथ बढ़ाकर सीएम ने कारीगरों का मनोबल और मान बढ़ाया। वहीं वोकल फॉर लोकल उत्पादों का प्रोत्साहित भी किया। उन्होंने कहा कि लोकल उत्पाद पहाड़ की पहचान के साथ ही राज्य की आर्थिकी में भी सहायक है। विदेशों में उत्तराखंड के हथकरघा और हस्तकला की मांग बढ़ती जा रही है। हमें राज्य की कलाओं को संरक्षण और संवर्धन के साथ ही बेहतर ब्रांडिंग और मार्केटिंग पर भी कार्य रहे है जिससे कलाकारों को उनके उत्पादों की विदेशों के साथ ही देश में भी उचित दाम मिल सके। महोत्सव में उत्तराखंड के GI tagged उत्पादों, हर जनपद के दो उत्पाद ODTP , एपण उत्पादों सहित लगभग 40 स्टालों की प्रदर्शनी लगाई गई और उनकी अच्छी खासी बिक्री भी हुई।
नंदा गौरा योजना की तिथि बढ़ी
महोत्सव में पहुंची महिला सशक्तिकरण एवम् बाल विकास मंत्री और नैनीताल प्रभारी रेखा आर्या ने महिला समूहों और महिला हित के लिए केंद्र और राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं को बताया। साथ ही उन्होंने कहा कि प्रदेश की महिलाएं छोटे छोटे उद्योग और पहाड़ी उत्पादों के माध्यम से आत्मनिर्भर बन रही है। जो कि राज्य के लिए गर्व की बात ही। उन्होंने कहा कि नंदा गौरा योजना की आवेदन तिथि 20 दिसंबर बढ़ा दी गई। इच्छुक प्रतिभागी 20 दिसंबर तक आवेदन कर सकती हैं।जिलाधिकारी वंदना ने मातृशक्ति को संबोधित करते हुए कहा आज के समय में महिलाओं को उद्योग से जुड़ने के लिए संसाधन बहुत हैं। साथ ही सरकार भी महिलाओं को सशक्त बनाने के हर संभव कार्य कर रही है। समाज में कन्या भ्रूण हत्या जैसी बुराईयों और कुरुतियों को हटाने के लिए हम सबको आगे आना होना।
निकाय चुनाव को लेकर शासन ने जारी किया आदेश..
उत्तराखंड: प्रदेश में निकाय चुनाव को लेकर शासन ने चुनाव तारीख और सभी के कार्यकाल पूरे होने के बाद राज्य की तमाम जिला पंचायत, नगर पालिका और नगर निगम का कार्यकाल समाप्त होने के बाद जिला अधिकारी को प्रशासक नियुक्त किया है। जिसके आदेश जारी कर दिए गए है। बता दे कि शहरी विकास निदेशालय के अनुसार साल 2018 में निर्वाचित 84 नगर निकाय का कार्यकाल 1 दिसंबर 2023 को पूरा हो रहा है। जिसके बाद अब उत्तराखंड में आठ नगर निगमों समेत 97 नगर निकाय शनिवार से प्रशासकों के हवाले हो जाएंगे। नगर निकायों का कार्यकाल खत्म होने के दृष्टिगत शासन ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिए हैं। जिलाधिकारियों को प्रशासक का जिम्मा सौंपा गया है। अब एक दिसंबर के बाद तमाम जगहों के नगर पालिका अध्यक्ष नगर पंचायत और नगर निगम के मेयर ने निवर्तमान कहलाएंगे।
बताया जा रहा है कि शहरी विकास मंत्रालय ने परिसीमन राज्य निर्वाचन आयोग को भेजा था। जिसमें क्षेत्र बढ़ाने की वजह से वोटरों की सूची भी तैयार करने की बात कही गई थी। इन्हीं सब मामलों को देखते हुए चुनाव को आगे कराए जाने का आग्रह भी किया गया था। दो निकायों नगर निगम रुड़की व नगर पालिका परिषद बाजपुर के चुनाव बाद में होने के कारण उनका कार्यकाल अगले वर्ष खत्म होना है। इसके साथ ही बद्रीनाथ, केदारनाथ व गंगोत्री नगर पंचायतों में चुनाव नहीं होते।
1 दिसंबर से अगले 6 महीने या फिर नए बोर्ड का गठन होने तक सभी जगह पर प्रशासन नियुक्त किया जाएं, क्योंकि सभी का कार्यकाल 1 दिसंबर को पूरा हो रहा है। नगर निगम और नगर पालिका अधिनियम के अनुसार कार्यकाल खत्म होने से 15 दिन पहले अथवा बाद में निकायों के चुनाव कराए जाने चाहिए। निदेशालय ने उप नगर पालिका अधिनियम 1916 और उप नगर निगम अधिनियम 1959 के तहत नगर निकायों में प्रशासक तैनात करने की सिफारिश की थी, जिसे आज मान लिया गया है।
