सीएम धामी ने संभाली चारधाम यात्रा की कमान , यात्रा व्यवस्थाओं का रुख करने पहुंचे उत्तरकाशी..
उत्तराखंड: चारधाम यात्रा में बढ़ती अव्यवस्थाओं के बाद सूबे के मुखिया ने खुद मोर्चा संभाल लिया है। शुक्रवार को सचिवालय में चारधाम यात्रा को लेकर हुई समीक्षा बैठक के बाद सीएम धामी खुद उत्तरकाशी के बड़कोट पहुंच गए हैं। बड़कोट में सीएम यमुनोत्री धाम यात्रा की व्यवस्थाओं का निरीक्षण करेंगे। सीएम पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को उच्चाधिकारियों के साथ चारधाम यात्रा की व्यवस्थाओं को लेकर समीक्षा बैठक की। बैठक में देहरादून, उत्तरकाशी, पौड़ी गढ़वाल, टिहरी गढ़वाल और उत्तरकाशी जिलों के प्रशासनिक अधिकारियों के साथ-साथ शासन के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल रहे। बैठक के बाद सीएम धामी उत्तरकाशी के बड़कोट पहुंचे। बता दें बड़कोट में सीएम धामी यमुनोत्री धाम यात्रा की व्यवस्थाओं का जायजा लेंगे। सीएम धामी के साथ उत्तरकाशी के जिलाधिकारी डॉ मेहरबान सिंह बिष्ट और गढ़वाल कमिश्नर विनय शंकर पांडेय भी मौजूद हैं।
केदारनाथ यात्रा के लिए लाइन व्यवस्था लागू, उमड़ रही भीड़ के चलते लिया फैसला..
उत्तराखंड: केदारनाथ धाम की यात्रा को सुव्यवस्थित करने के लिए पुलिस और प्रशासन ने सोनप्रयाग से लाइन व्यवस्था को लागू किया है। बता दें कि श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए ये फैसला लिया गया है। केदारनाथ धाम में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए सोनप्रयाग से लाइन व्यवस्था को लागू किया गया है। जिसमें श्रद्धालु गौरीकुंड से शटल पार्किंग का उपयोग कर सकें। यात्रा को व्यवस्थित करने के लिए ये फैसला लिया गया है। सोनप्रयाग शटल पार्किंग जाने के लिए पुलिस यात्रियों को अपनी लाइन में लगने के लिए अनाउंसमेंट करने के साथ ही लाइन लगवा रही थी। इस बीच कुछ यात्री लाइन में न लगते हुए सीधे आगे बढ़ने लगे। तभी ड्यूटी पर नियुक्त पुलिसकर्मी ने यात्रियों को रोकने का प्रयास किया। इस दौरान श्रद्धालु पुलिसकर्मियों के साथ अभद्रता और मारपीट पर उतारू हो गए। किसी तरह श्रद्धालुओं को वहां मौजूद अन्य पुलिसकर्मियों ने शांत करवाया।
उत्तराखंड में धधक रहे जंगल को देख भड़क गया सुप्रीम कोर्ट, दिया यह आदेश..
उत्तराखंड: प्रदेश के जंगलों में लगी आग पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई कर केंद्र और राज्य सरकार को फटकार लगायी है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा है कि उसने ज़रूरत के अनुसार फंड राज्य सरकार को क्यों नहीं दिया। बता दें उत्तराखंड के जंगलों में धड़क रही आग का मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक जा पहुंचा है। बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई कर केंद्र और राज्य सरकार को फटकार लगाई है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा है कि उसने जरूरत के मुताबिक फंड राज्य सरकार को क्यों नहीं दिया। इसके साथ ही राज्य सरकार की तरफ से फंड का सही इस्तेमाल न किए जाने पर भी कोर्ट ने सवाल उठाया है।
सुप्रीम कोर्ट ने इस बात की भी आलोचना की कि वन विभाग के अधिकारियों को भी चुनाव ड्यूटी में लगाया गया। कोर्ट ने उत्तराखंड की मुख्य सचिव राधा रतूड़ी से शुक्रवार को व्यक्तिगत रूप से पेश होकर जवाब देने के लिए कहा है। बता दें सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले हुई सुनवाई में धामी सरकार को कहा था कि बारिश या क्लाउड सीडिंग के भरोसे नहीं बैठा जा सकता। आग की रोकथाम के लिए जल्द से जल्द कोई अन्य कदम उठाने की जरुरत है।
जंगल से सूखी पत्तियां इकट्ठी कर बेच रहे ग्रामीण, 50 रुपये में खरीद रही उत्तराखंड सरकार..
उत्तराखंड: सीएम पुष्कर सिंह धामी की पहल रंग लाती नजर आ रही है। सीएम की पहल के बाद उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में ग्रामीण पिरूल एकत्र कर रहे हैं। आपको बता दें कि धामी सरकार 50 रूपये किलो की दर से पिरूल खरीद रही है। जंगलों की आग को देखते हुए सीएम धामी ने ग्रामीणों को पिरूल खरीदने के निर्देश दिये थे। उत्तराखंड के जंगलों में बढ़ती आग की घटनाओं को देखते हुए सीएम धामी ने पिरूल एकत्रित करने की अपील की थी। जिसके बाद अब पहाड़ों में ग्रामीण लोग पिरूल एकत्रित करते नजर आ रहे हैं।
क्या है ‘पिरूल लाओ-पैसे पाओ’ मिशन ?
‘पिरूल लाओ-पैसे पाओ’ मिशन के तहत ग्रामीणों को जंगलों से पिरूल इकट्ठा कर के लाना होगा। जिसके उन्हें रूपए मिलेंगे। सीएम धामी का कहना हैं कि इस मिशन के तहत जंगल की आग को कम करने के उद्देश्य से पिरूल कलेक्शन सेंटर पर 50 रूपए किलो की दर से पिरूल खरीदे जाएंगे। बता दें कि इस मिशन का संचालन पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड द्वारा किया जाएगा। इसके लिए 50 करोड़ का कार्पस फंड पृथक रूप से रखा जाएगा। आप भी जंगलों में आग लगने के सबसे बड़े कारण पिरूल से पैसे कमा सकते हैं। हालांकि पहाड़ों पर पिरूल को पहले से ही इकट्ठा किया जाता है। लेकिन ये पिरूल गौशाला में इस्तेमाल के लिए उपयोग में लाया जाता है। लेकिन अब इस से आप पैसे कमा सकते हैं। ‘पिरूल लाओ-पैसे पाओ’ मिशन के तहत आपको पिरूल को इकट्ठा कर पिरूल कलेक्शन सेंटर तक ले जाना है। इसके आपको प्रति किलो 50 रूपए मिलेंगे।
आपको बता दें कि प्रदेश में साल 2018 में पिरूल नीति लागू की जा चुकी है। पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत के कार्यकाल में प्रोजेक्ट पिरूल शुरू किया गया था। इस योजना के तहत पिरूल से बिजली बनाई गई थी। बता दें कि कुछ समय के लिए पिरूल से बिजली का उत्पादन भी हुआ था। लेकिन फिर ये योजना ठीक से चल नहीं पाई। एक बार फिर सीएम धामी के कार्यकाल में इस योजना को शुरू किया गया है।
बद्रीनाथ धाम में VIP कल्चर को लेकर धरने पर बैठे पंडित-पुरोहित और व्यापारी, SDM ने VIP व्यवस्था खत्म करने की घोषणा की..
उत्तराखंड: देवभूमि उत्तराखंड में चारधाम यात्रा का आगाज हो गया है। रविवार को बद्रीनाथ धाम के कपाट खोले गए। चारधाम यात्रा शुरू होते ही धामों में व्यवस्थाओं और यात्रियों की सुविधाओं को लेकर स्थानीय तीर्थ पुरोहितों और स्थानीय लोगों का विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया था। जिसके बाद बद्रीनाथ धाम में वीआईपी व्यवस्था खत्म हो गई है। उप जिलाधिकारी जोशीमठ ने धरनास्थल पर आकर इसकी सार्वजनिक घोषणा की है। बद्रीनाथ मंदिर समिति द्वारा विगत वर्ष शुरू की गई वीआईपी दर्शन की व्यवस्था को समाप्त कर दिया गया है। उप जिलाधिकारी जोशीमठ द्वारा धरना स्थल पर आकर घोषणा सार्वजनिक की गई है। बता दें सोमवार सुबह से तीर्थ पुरोहितों के साथ पंडा समाज और स्थानीय लोग वीआईपी कल्चर ख़त्म करने की मांग को लेकर धरने पर बैठे हुए थे।
स्थानीय लोगों का कहना था कि बामणी गांव जाने वाले पैदल रास्ते पर वीआईपी दर्शन के लिए एक कार्यालय बनाया गया है। जिससे वहां पर गांव की तरफ जाने वाले लोगों के मार्ग को बंद कर दिया गया है। गांव के लोगों को इस रास्ते से गुजरने नहीं दिया जा रहा है। प्रशासन की लापरवाही की वजह से आम जनता को परेशानी उठानी पड़ रही है।
कपाट खुलते ही बद्रीनाथ धाम में तीर्थ पुरोहितों का विरोध प्रदर्शन..
उत्तराखंड: देवभूमि उत्तराखंड में चार धाम यात्रा का आगाज हो गया है। रविवार को बद्रीनाथ धाम के कपाट खोले गए। कपाट खोलने के दूसरे दिन ही तीर्थ पुरोहितों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। चार धाम यात्रा शुरू होते ही धामों में व्यवस्थाओं और यात्रियों की सुविधाओं को लेकर स्थानीय तीर्थ पुरोहितों और स्थानीय लोगों का विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया हैl पंडा पुरोहितों ने बैकडोर एंट्री को लेकर भी कड़ा विरोध जताया है। साथ ही तीर्थ पुरोहितों की बेरोकटोक मंदिर परिसर में आने जाने की सुविधा देने की मांग की है। पंडा समाज और तीर्थ पुरोहितों ने इसके विरोध में मंदिर परिसर के पास ही बैठकर सांकेतिक धरना दिया। इतना ही नहीं पंडा समाज से आमरण अनशन की चेतावनी दी है। पुरोहितों का कहना है कि मंदिर में वीआईपी कल्चर को खत्म करना होगा साथ ही पुरोहितों के हक हूककों को मंदिर समिति को छीनने नहीं दिया जाएगा। आपको बता दें 12 मई को हल्की बारिश के बीच बद्रीनाथ धाम के कपाट खोले गए। कपाट खुलने के पहले दिन ही हजारों श्रद्धालुओं ने बद्रीनाथ में अखण्ड ज्योति एवं भगवान बद्रीनाथ के दर्शन किए। बता दें कपाटोद्घाटन के अवसर पर बद्रीनाथ मंदिर को 15 कुंतल फूलों से सजाया गया था।
घोषित हुआ सीबीएसई बोर्ड 12वीं का रिजल्ट, लड़कियों ने मारी बाजी..
उत्तराखंड: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड सीबीएसई कक्षा 12वीं का रिजल्ट घोषित हो गया है। सीबीएसई बोर्ड 12वीं के परिणाम ऑफिशियल वेबसाइट http://cbse.gov.in , http://cbse.nic.in , http://results.cbse.nic.in पर चेक कर सकते हैं। इस साल CBSE 12th 2024 Result में 87.98 फीसदी बच्चे पास हुए हैं।
ऐसे करें रिजल्ट चेक..
वेबसाइट पर विजिट करने के बाद होम पेज पर उपलब्ध कराये जाने वाले लिंक पर क्लिक करें।
इसके बाद नए पेज पर अपना रोल नंबर भरकर सबमिट करना होगा।
इसके बाद स्टूडेंट्स अपना सीबीएसई 12वीं रिजल्ट और स्कोर कार्ड स्क्रीन पर देख पाएंगे।
इसका प्रिंट लेने के बाद सॉफ्ट कॉपी भी सेव कर लें।
लड़कियों का पास प्रतिशत रहा ज्यादा..
सीबीएसई बोर्ड में इस बार लड़कियों का पास प्रतिशत अधिक रहा। बता दें 12वीं में लड़कियों का पास प्रतिशत 91.52 फीसदी रहा। जबकि लड़कों का पास प्रतिशत 85.12 फीसदी रहा।
आज भी बिगड़ा रहेगा मौसम, आंधी-तूफान के साथ ओलावृष्टि का ऑरेंज अलर्ट..
उत्तराखंड: प्रदेश में बीते दो दिनों से मौसम का मिजाज बदला हुआ है। जहां एक ओर पहाड़ों पर बारिश और बर्फबारी हो रही है तो वहीं मैदानी क्षेत्रों में बादल छाए हुए हैं। बीते दो दिनों से तापमान में कमी आने से गर्मी में थोड़ी राहत मिली है। आज भी प्रदेशभर में मौसम बदला रहेगा। मौसम विभाग की ओर से जारी पूर्वानुमान के अनुसार पर्वतीय क्षेत्रों में बारिश होने के आसार हैं। इसके साथ ही आज प्रदेश के ज्यादातर इलाकों में गर्जन के साथ आकाशीय बिजली चमकने के साथ ही ओलावृष्टि हो सकती है।
मौसम विभाग ने आज हरिद्वार, पौड़ी, नैनीताल, चंपावत, देहरादून और ऊधम सिंह नगर जिले में 60-70 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी-तूफान आ सकता है। इसके साथ ही प्रदेश के अन्य जिलों में भी ओलावृष्टि होने के साथ ही आंधी के आशंका है। बता दें कि शुक्रवार को प्रदेश के ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी हुई। शुक्रवार को भी प्रदेश में मौसम का मिजाज बिगड़ा ही रहा। जहां एक ओर बद्रीनाथ और यमुनोत्री धाम में बारिश हुई तो वहीं दूसरी ओर ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी हुई। हेमकुंड साहिब, रुद्रनाथ, नीती घाटी के साथ ही अन्य ऊंची चोटियों पर शुक्रवार शाम बर्फबारी हुई। जिससे तापमान में कमी आ गई है।
इतिहास में पहली बार कपाट खुलने पर केदारनाथ धाम में पहुंचे इतने श्रद्धालु..
उत्तराखंड: अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर शुक्रवार सुबह 7:20 बजे केदारनाथ धाम के कपाट खुल गए हैं। शुक्रवार को ही गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट भी खुल गए। श्री बद्रीनाथ धाम के कपाट 12 मई को खुलेंगे। केदारनाथ धाम में पहले दिन दर्शन के लिए रिकॉर्ड संख्या में 29,030 श्रद्धालु पहुंचे। आपको बता दे कि पिछले साल कपाट खुलने के दिए 21,000 श्रद्धालुओं ने बाबा केदार के दर्शन किए थे, जो रिकॉर्ड था, इस बार ये रिकॉर्ड टूट गया। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि चारधााम यात्रा के लिए श्रद्धालुओं में कितना उत्साह है।
केदारनाथ मंदिर के कपाट खुलने के बाद दक्षिण की वीर शैव लिंगायत विधि से बाबा केदार की पूजा की गई। मंदिर की गद्दी पर कर्नाटक मूल के रावल आसानी हुए। जिसके बाद पूजा अर्चना कर कपाट खोले गए। मान्यता है कि बाबा केदार छह महीने समाधि में रहते हैं। कपाट बंद होते समय सवा क्विंटल भभूति चढ़ाई जाती है। कपाट खुलने के साथ बाबा समाधि से जागते हैं।
मंत्रोचारण के साथ तृतीय केदार श्री तुंगनाथ जी के खुले कपाट..
उत्तराखंड: पंचकेदारों में प्रतिष्ठित तृतीय केदार श्री तुंगनाथ जी के कपाट मंत्रोचारण के साथ पूजा- अर्चना पश्चात विधि-विधान से खुल गये हैं। इस अवसर पर श्री तुंगनाथ मंदिर को भब्य रूप् से फूलों से सजाया गया था। कपाट खुलते समय ढ़ाई हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने दर्शन किये। तुंगनाथ में इस दौरान मौसम सर्द रहा। श्री तुंगनाथ जी की उत्सव डोली 7 मई को श्री मर्केटेश्वर मंदिर से भूतनाथ मंदिर प्रवास हेतु आ गयी थी। 9 मई को चोपता प्रवास कर आज 10 मई को प्रात चोपता से श्री तुंगनाथ मंदिर परिसर पहुंची तथा द्वार पूजा पश्चात विधि-विधान से आज दिन 12 बजे श्री तुंगनाथ मंदिर के कपाट खुल गये।
कपाट खुलने के पश्चात भगवान श्री तुंगनाथ के स्वयंभू शिवलिंग को समाधि रूप् से जगाकर श्रृगार रूप् दिया गया उसके बाद श्रद्धालुओं ने दर्शन किये।
श्री तुंगवाथ जी के शीतकालीन गद्दी स्थल श्री मार्कंडेय मंदिर मक्कूमठ में इस दौरान मठापति रामप्रसाद मैठाणी,प्रबंधक बलबीर नेगी,पुजारी प्रकाश मैठाणी,विनोद मैठाणी सहित मंदिर समिति के अधिकारी कर्मचारी एवं स्थानीय हक- हकूकधारी मौजूद थे।
