लेख

किसान आंदोलन की आड़ में भारत विरोधी अंतरराष्ट्रीय षड्यंत्र


सुखदेव वशिष्ठ
वरिष्ठ पत्रकार

किसान आंदोलन को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत को घेरने और देश के बढ़ते यश को कम करने के लिए बनाई गई रणनीति का खुलासा हो गया। दरअसल, बुधवार को स्वीडन की क्लाइमेट चेंज एक्टिविस्ट ग्रेटा थनबर्ग ने एक टूलकिट (गूगल फॉर्म) को ट्वीट किया था। जिसमें किसान आंदोलन को लेकर मोदी सरकार को घेरने और भारत को बदनाम करने को रची गई साजिश की जानकारी थी। ग्रेटा ने बवाल बढ़ता देख इस ट्वीट को तुरंत डिलीट भी कर दिया। हालांकि, बाद में उन्होंने दूसरा ट्वीट कर नए टूलकिट को शेयर किया। जिसमें कुछ संस्थानों, व पत्रकारों के नाम गायब थे। किसान आंदोलन के समर्थन में पॉप स्टार रिहाना का ट्वीट वायरल होने के बाद से ही आंदोलन को लेकर सोशल मीडिया पर सक्रियता बढ़ गई थी, जो ग्रेटा के ट्वीट के बाद और बढ़ी।

विदेश मंत्रालय ने इसे लेकर एक बयान जारी किया। जिसमें स्पष्ट कहा कि ऐसे मामलों पर कॉमेंट करने से पहले मुद्दे को अच्छी तरह से समझ लिया जाए। सनसनी के लालच में सोशल मीडिया चल रहे हैशटैग्स और कॉमेंट्स, खासकर जिन्हें सेलिब्रिटी कर रहे हैं, ना तो वे सही हैं और न ही जिम्मेदारी भरे हैं।

विदेश मंत्रालय की तरफ से दिये गए बयान के बाद बॉलीवुड के सुपरस्टार अक्षय कुमार और अजय देवगन सहित बॉलीवुड व देश की नामचीन हस्तियों, खिलाड़ियों ने कृषि बिल पर सरकार के पक्ष का समर्थन किया. और सोशल मीडिया पर इंडिया टुगेदर और इंडिया अगेंस्ट प्रोपेगेंडा हैशटैग ट्रेड करने लगे.

दिल्ली पुलिस ने कहा कि एक खास सोशल मीडिया अकाउंट से एक डॉक्यूमेंट/’टूल किट अपलोड किया गया था। यह टूल किट खालिस्तान से जुड़े एक संगठन ‘पोएटिक जस्टिस’ का है।’ स्पेशल कमिश्नर के अनुसार, ‘एक सोशल मीडिया हैंडल से अपलोड किए गए टूल किट में किसान आंदोलन के नाम पर डिजिटल स्ट्राइक की बात कही गई है। 26 जनवरी को फिजिकल ऐक्शन, ट्वीट स्टॉर्म की बात कही गई है। 26 जनवरी और उसके आसपास के हिंसा को देखें तो इससे पता चलता है कि पूरे प्लान तरीके से इसी के अनुसार सब कुछ किया गया है। यह दिल्ली पुलिस के लिए चिंता की बात है। ‘

इस टूलकिट या टेररकिट के लिंक पर क्लिक करके अंदर जाने पर किसान आंदोलन से जुड़ी कई सामग्री मिलती है। साथ में पेज नंबर तीन पर वेबसाइट का लिंक www.askindiawhy मिलता है। इस वेबसाइट के आखिरी पेज पर एक लिंक मिलता है ‘पोएटिक जस्टिस फाउंडडेशन’। संस्था के इंस्टाग्राम पेज से पता चलता है कि यह संस्था पॉप सिंगर रिहाना और ग्रेटा थनबर्ग को फंड करती है।

बता दें कि फाउंडेशन को चलाने वाले एम ओ धालीवाल और सिक्ख फॉर जस्टिस के मुख्य संरक्षक गुरपतवंत सिंह पन्नु का सिक्ख फॉर जस्टिस एक खालिस्तानी संगठन है और भारत में इस पर प्रतिबंध है। साथ ही इस पन्नु को भी यूएपीए के तहत आतंकी घोषित किया गया है।

खालिस्तान के विफल प्रयोग को कुछ लोग अभी भी उनके निजी हितों के कारण ढो रहे हैं, जबकि पंजाब का युवा इस सबसे दूर वैश्वीकरण के दौर में पूरे विश्व से अपनी प्रतिभा के बल पर सबसे आगे चलना चाहता है। भारत एक परिपक्व लोकतांत्रिक देश है, भारत की समझदार जनता ने पूर्ण बहुमत से राष्ट्र को आगे लेकर जाने के लिए कुशल नेतृत्व को अपनी बागडोर सौंपी है। भारत कैसा हो, भारत को कैसा चलाया जाना है, भारत का विकास किस प्रकार किया जाए, इसके जिम्मेदारी भारतीय समाज की है। विदेशों से हस्तक्षेप करने वाले लोग अपने देश की रंगभेदी, नस्लभेदी नीतियों के बारे में विषय रखें तो अच्छा रहेगा. क्लाइमेट चेंज के बारे में बात करने वाले भारत के कृषि और उसका पर्यावरण पर प्रभाव इस विषय का भी अध्ययन करें तो अच्छा रहेगा।

किसान आंदोलन की आड़ में छिपी विदेशी ताकतों के प्रयोग का सावधानीपूर्ण सामना करना होगा। सरकार द्वारा असली किसानों के प्रति धैर्य और स्नेह के भाव से आंदोलन को गलत दिशा में ले जाने वाली विदेशी ताकतों के चेहरे बेनकाब होते जा रहे हैं। (विसंकें)

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