भारत को रजत पदक से करना पड़ा संतोष
नई दिल्ली। सुल्तान अजलन शाह कप हॉकी टूर्नामेंट के फाइनल मुकाबले में बेल्जियम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत को 1-0 से पराजित कर अपना पहला खिताब अपने नाम कर लिया। बेहद कड़े और रोमांच से भरे इस मुकाबले में निर्णायक गोल 34वें मिनट में थिब्यू स्टॉकब्रोक्स ने दागा, जिसके बाद भारतीय टीम बराबरी का गोल नहीं ढूंढ सकी और रजत पदक से संतोष करना पड़ा।
टूर्नामेंट में दूसरी बार हिस्सा ले रही बेल्जियम टीम ने लगातार आक्रामक हॉकी खेलते हुए भारत को कई मौकों पर दबाव में रखा। वहीं भारतीय टीम, जिसने सेमीफाइनल में कनाडा पर 14-3 की बड़ी जीत दर्ज की थी, फाइनल में अपने तीनों पेनल्टी कॉर्नर को गोल में नहीं बदल पाई। पूरे टूर्नामेंट में पेनल्टी कॉर्नर पर प्रभावी दिखे जुगराज सिंह, अमित रोहिदास और संजय बेल्जियम की सुदृढ़ रक्षा पंक्ति के सामने फाइनल में लय नहीं पकड़ सके।
लीग चरण में भी भारत को बेल्जियम से 2-3 की हार मिली थी और फाइनल में मिली हार टूर्नामेंट की उनकी दूसरी शिकस्त रही। मनप्रीत सिंह और हार्दिक सिंह जैसे वरिष्ठ खिलाड़ियों की गैरमौजूदगी में युवा खिलाड़ियों पर बड़ी जिम्मेदारी थी, जिन्होंने अच्छा संघर्ष दिखाया लेकिन निर्णायक क्षणों में गोल नहीं कर पाए।
फाइनल की शुरुआत से ही बेल्जियम की टीम ने गेंद पर नियंत्रण बनाकर खेल की गति तय की। उनके तेज आक्रमणों ने भारतीय डिफेंस को शुरुआती मिनटों में सतर्क रहने पर मजबूर किया और भारतीय गोलकीपर को कई महत्वपूर्ण बचाव करने पड़े। भारत ने पहले क्वार्टर के बाद वापसी की कोशिश की, लेकिन बेल्जियम ने मिडफील्ड में बढ़त बनाए रखी और भारत को संयोजित आक्रमण नहीं करने दिया।
हाफ टाइम तक दोनों टीमें गोल रहित रहीं, लेकिन दूसरे हाफ में बेल्जियम का संयम और रणनीति काम आई। तीसरे क्वार्टर की शुरुआत में स्टॉकब्रोक्स का गोल मैच का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। अंतिम क्वार्टर में भारत ने बराबरी की तलाश में लगातार दबाव बनाया, कई अच्छे मूव तैयार किए, लेकिन बेल्जियम की दीवार जैसे डिफेंस को भेद नहीं सके।
इस जीत के साथ बेल्जियम ने पहली बार सुल्तान अजलन शाह कप अपने नाम किया, जबकि भारत को उपविजेता रहकर टूर्नामेंट खत्म करना पड़ा।
देहरादून। आम जन की सुरक्षा सुनिश्चित करने और संदिग्ध गतिविधियों पर नियंत्रण को लेकर देहरादून पुलिस ने व्यापक स्तर पर आकस्मिक चेकिंग अभियान चलाया। एसएसपी देहरादून के निर्देश पर जिले के सभी शहरी और ग्रामीण थाना क्षेत्रों में पुलिस टीमों ने अलग-अलग स्थानों पर सघन जांच की।
पुलिस की टीमें तड़के सुबह से ही धार्मिक स्थलों, भीड़-भाड़ वाले क्षेत्रों, महत्वपूर्ण स्थानों, सीमावर्ती चेक पोस्टों और आंतरिक मार्गों पर सक्रिय रहीं। अभियान के दौरान संदिग्ध वाहनों और व्यक्तियों की पहचान के लिए विशेष सतर्कता बरती गई।

अभियान में पुलिस ने 1782 वाहनों की जांच की, जबकि 3374 व्यक्तियों से पूछताछ कर उनका सत्यापन किया। इस दौरान यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले चालकों के खिलाफ आवश्यक कानूनी कार्रवाई भी की गई।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह अभियान आगे भी जारी रहेगा, ताकि जिले में सुरक्षा व्यवस्था और अधिक मजबूत की जा सके तथा किसी भी प्रकार की आपराधिक या संदिग्ध गतिविधि को रोकने के लिए प्रभावी निगरानी बनाए रखी जा सके।
राज्य ने राष्ट्रीय खेलों में 103 पदकों के साथ पाया 7वां स्थान
नई टिहरी। टिहरी झील में आयोजित “इंटरनेशनल प्रेसिडेंट कप-2025” एवं “चतुर्थ टिहरी वाटर स्पोर्ट्स कप-2025” के भव्य समापन समारोह में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पहुँचे। कार्यक्रम स्थल पर पहुँचकर मुख्यमंत्री ने भारत सहित विभिन्न देशों से आए खिलाड़ियों से संवाद किया और उनके उत्साह एवं उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना की। उन्होंने कहा कि 22 देशों के 300 से अधिक खिलाड़ियों की भागीदारी इस आयोजन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक महत्वपूर्ण बनाती है तथा टिहरी झील को वैश्विक साहसिक खेल मानचित्र पर स्थापित करती है।
समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने सभी प्रतिभागियों, आयोजकों और खेल प्रेमियों का स्वागत किया तथा आयोजन को सफल बनाने के लिए टीएचडीसी, एशियन कायकिंग एंड कैनोइंग एसोसिएशन, उत्तराखंड ओलंपिक एसोसिएशन सहित सभी सहयोगी संस्थाओं का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि टिहरी झील अब केवल ऊर्जा उत्पादन या जल प्रबंधन का केंद्र नहीं है, बल्कि पर्यटन, साहसिक खेलों और स्थानीय लोगों की आजीविका का मुख्य आधार बन चुकी है।
उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य है कि ऐसे आयोजन निरंतर होते रहें, जिससे साहसिक खेलों और पर्यटन गतिविधियों को लगातार बढ़ावा मिले।
मुख्यमंत्री ने कहा कि खेल युवा पीढ़ी के शारीरिक-मानसिक विकास के साथ-साथ अनुशासन, टीमवर्क और संघर्षशीलता जैसे जीवन मूल्यों को भी मजबूत बनाते हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ‘खेलो इंडिया’ और ‘फिट इंडिया’ अभियानों के माध्यम से देश की खेल संस्कृति को मजबूत करने के प्रयासों का उल्लेख किया तथा बताया कि भारत ने हाल के वर्षों में अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में ऐतिहासिक उपलब्धियाँ हासिल की हैं। उन्होंने कहा कि 2023 में चीन में हुए एशियाई खेलों में भारत ने रिकॉर्ड 107 पदक जीतकर नया इतिहास बनाया है और 2030 में अहमदाबाद कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी करेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में आयोजित 38वें राष्ट्रीय खेलों की सफलता ने राज्य को “देवभूमि” के साथ-साथ “खेलभूमि” के रूप में भी स्थापित किया है। उन्होंने गर्व व्यक्त किया कि उत्तराखंड ने पहली बार राष्ट्रीय खेलों में 103 पदक जीतकर 7वाँ स्थान प्राप्त किया। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार विश्वस्तरीय खेल अवसंरचना विकसित कर रही है और देहरादून के स्पोर्ट्स स्टेडियम में तैयार आइस रिंक में अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता आयोजित होना इसका प्रमाण है।
उन्होंने बताया कि राज्य में शीघ्र ही “स्पोर्ट्स लेगेसी प्लान” लागू किया जाएगा, जिसके अंतर्गत आठ प्रमुख शहरों में 23 खेल अकादमियाँ स्थापित की जाएँगी। इनमें हर वर्ष 920 अंतरराष्ट्रीय स्तर के एथलीट और 1000 अन्य खिलाड़ियों को उच्च स्तरीय प्रशिक्षण दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि हल्द्वानी में राज्य का पहला खेल विश्वविद्यालय और लोहाघाट में महिला स्पोर्ट्स कॉलेज स्थापित किए जा रहे हैं।
नई खेल नीति के तहत अंतरराष्ट्रीय-राष्ट्रीय पदक विजेताओं को सरकारी नौकरी, स्पोर्ट्स कॉलेजों में निःशुल्क शिक्षा-प्रशिक्षण, खिलाड़ी प्रोत्साहन योजना, उदीयमान खिलाड़ी योजना, खेल-किट योजना, खेल छात्रवृत्ति, ‘उत्तराखंड खेल रत्न’ एवं ‘हिमालय खेल रत्न’ पुरस्कार जैसी सुविधाएँ प्रदान की जा रही हैं। इसके साथ ही खेल-कोटा को पुनः लागू करते हुए सरकारी सेवाओं में खिलाड़ियों के लिए 4 प्रतिशत आरक्षण बहाल किया गया है।
समापन समारोह में मुख्यमंत्री ने विजयी खिलाड़ियों को सम्मानित किया और कहा कि खेल में हार-जीत से अधिक महत्वपूर्ण खेल-भावना है। उन्होंने कहा कि सभी खिलाड़ियों ने उत्कृष्ट खेल-भावना का परिचय दिया है तथा राज्य सरकार युवाओं को उनके खेल-सपनों को पूरा करने के लिए हर संभव सहयोग प्रदान करती रहेगी। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि उत्तराखंड और देश के खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम और अधिक ऊँचा करेंगे।
कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल, विधायक किशोर उपाध्याय, जिलाधिकारी समेत जिला प्रशासन के अधिकारी, टीएचडीसी के सीएमडी सीपन गर्ग, देश-विदेश से आए खिलाड़ी और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।
जिलाधिकारी सविन बंसल का सख्त एक्शन: देहरादून के सभी स्कूल–कॉलेजों में अनिवार्य ड्रग टेस्टिंग के आदेश
देहरादून। शहर में पिछले तीन दिनों से चल रहा अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का राष्ट्रीय सम्मेलन रविवार को समापन की ओर पहुँचा। अंतिम सत्र में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जहाँ परिषद के पदाधिकारियों ने उन्हें प्रतीक चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। सम्मेलन में कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों और युवा नेतृत्व से जुड़े विषयों पर मंथन हुआ।
सम्मेलन के दौरान प्रतिष्ठित ‘प्रोफेसर यशवंतराव केलकर युवा पुरस्कार’ की घोषणा भी की गई। मुख्यमंत्री धामी ने इस वर्ष का सम्मान गोरखपुर के युवा श्रीकृष्णा पांडेय को प्रदान किया। पुरस्कार वितरण के समय एबीवीपी के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने बताया कि यह सम्मान 1991 से प्रख्यात शिक्षाविद् और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के शिल्पकार माने जाने वाले प्रो. केलकर की स्मृति में दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि प्रो. केलकर ने अभाविप को राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार और मजबूत पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया था। यह पुरस्कार अभाविप और विद्यार्थी निधि न्यास की संयुक्त पहल है, जिसका उद्देश्य शिक्षा और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने वाले युवाओं को प्रोत्साहित करना है।
पुरस्कार का उद्देश्य और महत्व
इस सम्मान का मुख्य लक्ष्य ऐसे युवा भारतीयों को सामने लाना है, जो सामाजिक उद्यम, शिक्षा, पर्यावरण, विज्ञान और समाजहित से जुड़े क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दे रहे हैं।
पुरस्कार के तहत विजेता को 1 लाख रुपये की राशि, प्रमाण-पत्र और स्मृति-चिह्न प्रदान किया जाता है।
सम्मेलन के समापन के साथ ही एबीवीपी ने विभिन्न अकादमिक, सामाजिक और राष्ट्रीय मुद्दों पर आगे की कार्ययोजना की रूपरेखा भी साझा की। संगठन ने कहा कि आने वाले समय में छात्र शक्ति देश के विकास में और अधिक बड़ी भूमिका निभाएगी।
देहरादून। ग्राफिक एरा यूनिवर्सिटी में जारी अंतरराष्ट्रीय आपदा प्रबंधन सम्मेलन के दौरान हिमालयी क्षेत्रों में तेजी से बदल रहे ग्लेशियरों को लेकर वैज्ञानिकों ने गंभीर चेतावनी दी है। विशेषज्ञों के अनुसार जलवायु परिवर्तन ने उत्तराखंड, सिक्किम समेत पूरे हिमालय में आइसटोपी और ग्लेशियर झीलों के आकार में तीव्र बढ़ोतरी दर्ज की है, जो अगले वर्षों में विनाशकारी आपदाओं का कारण बन सकती है।
सम्मेलन में वाडिया इंस्टीट्यूट के ग्लेशियर विशेषज्ञ डॉ. राकेश भांबरी ने अपने नवीन अध्ययन प्रस्तुत किए। उन्होंने बताया कि सिक्किम में 23 ग्लेशियरों का करीब 5.4% हिस्सा सिकुड़ चुका है, जबकि ग्लेशियर झीलों का क्षेत्रफल लगभग 48% बढ़ गया है। निरंतर पिघलाव के चलते बड़े पैमाने पर मलबा जमा हो रहा है, जो बरसात के दौरान अचानक बहाव से गंभीर संकट खड़ा कर रहा है।
उत्तराखंड के मेरु बमक पर किए गए अध्ययन में भी तेजी से बर्फ पिघलने और आइसटोपी बनने से उत्पन्न खतरे उजागर हुए। यह वही स्थिति है, जिसने अतीत में केदारनाथ जैसी त्रासदियों को जन्म दिया था।
दूसरी ओर, वाडिया इंस्टीट्यूट की वैज्ञानिक डॉ. स्वप्नमिता विदेश्वरम ने धराली क्षेत्र में हुई आपदा पर अपनी रिपोर्ट रखी। उन्होंने बताया कि क्षेत्र का ऊपरी हिस्सा ‘क्रोनिक लैंडस्लाइड ज़ोन’ में आता है, जहां कई सक्रिय चैनल मौजूद थे। खेरागाड़ क्षेत्र में दो ग्लेशियर कैचमेंट होने से जोखिम और बढ़ गया।
उन्होंने कहा कि ऊंचाई पर मौजूद छोटे–छोटे आइस कोर तब बेहद खतरनाक बन जाते हैं, जब अचानक मोरेन मास का धंसाव होता है। यही कारण था कि 4700 मीटर की ऊंचाई पर मामूली दिखने वाली बर्फ से भी बड़े पैमाने पर मलबा बहकर नीचे आया।
क्या हैं आइसटोपी ग्लेशियर?
विशेषज्ञों के अनुसार यह ऐसे ग्लेशियर होते हैं जिनकी सतह पर मोटी मलबे की परत जमा रहती है और भीतर ठोस बर्फ का कोर छिपा रहता है।
ऊपर जमा मिट्टी-बजरी सूर्य की गर्मी को रोकती है, इसलिए इनका पिघलना सामान्य ग्लेशियरों से अलग होता है।
पिघलने पर सतह असमान दिखाई देती है, छोटे तालाब बन जाते हैं और आइस कोर्ड माउंड्स (आइसटोपी) विकसित हो जाते हैं।
हिमालय में ऐसे ग्लेशियर तेजी से बदल रहे हैं और जलवायु परिवर्तन के संवेदनशील संकेतक माने जाते हैं।
वैज्ञानिकों ने बताए प्रमुख खतरे और सुधार के सुझाव
सटीक भू-मानचित्रण का अभाव: हिमनदियों और अस्थिर ढलानों का अद्यतन मैपिंग नहीं है। 1:10,000 स्केल पर नए जियो-मैप तैयार करने की आवश्यकता है।
ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मौसम डेटा सीमित: तापमान, वर्षा और नदियों के बहाव का वास्तविक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं। ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन और रिवर सेंसर लगाने की जरूरत।
आपदा प्रक्रिया की अधूरी समझ: जलवायु परिवर्तन, ग्लेशियर टूटना, ढलानों का धंसना और मलबे के नदी में जाने तक पूरी श्रृंखला का वैज्ञानिक अध्ययन अभी भी अपूर्ण है।
वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि छोटे ग्लेशियरों और आइसटोपी की निगरानी तुरंत शुरू नहीं की गई, तो आने वाले वर्षों में हिमालयी राज्यों में आपदाओं की तीव्रता और बढ़ सकती है।
देहरादून। कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने आज कैंप कार्यालय पर मसूरी विधानसभा क्षेत्र के बूथ संख्या 82 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 128वें संस्करण को केंद्रीय राज्य मंत्री अजय टम्टा, पार्टी कार्यकर्ताओं और स्थानीय जनता के साथ सुना।
कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने देश में बढ़ती एंड्यूरेंस स्पोर्ट्स की लोकप्रियता, रिकॉर्ड खाद्यान्न उत्पादन, खेल जगत में भारत की उपलब्धियों और अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की प्रगति पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने देश में बढ़ते शहद उत्पादन और विंटर टूरिज्म की संभावनाओं का भी उल्लेख किया। विंटर टूरिज्म के संदर्भ में प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से उत्तराखंड का उदाहरण देते हुए कहा कि राज्य में विंटर टूरिज्म तेजी से लोगों को आकर्षित कर रहा है और कई स्थलों की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में आयोजित आदि कैलाश में राज्य की पहली हाई एल्टीट्यूड मैराथन रन की भी सराहना की और इसे उत्तराखंड की सामर्थ्य और संभावनाओं का प्रतीक बताया।
इस अवसर पर केंद्रीय राज्य मंत्री अजय टम्टा ने कहा कि ‘मन की बात’ कार्यक्रम सदैव ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायी होता है। उन्होंने सभी नागरिकों से इस कार्यक्रम को नियमित रूप से सुनने की अपील भी की।
कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी द्वारा उत्तराखंड के एंड्यूरेंस स्पोर्ट्स और हाई एल्टीट्यूड मैराथन का उल्लेख राज्य के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि देश में शहद उत्पादन तेजी से बढ़ रहा है और राज्य सरकार भी किसानों को शहद उत्पादन के लिए प्रोत्साहित करते हुए विभिन्न योजनाओं के माध्यम से उन्हें लाभान्वित कर रही है।
मंत्री गणेश जोशी ने ‘मन की बात’ कार्यक्रम को प्रधानमंत्री मोदी का देशवासियों से आत्मीय संवाद बताते हुए कहा कि यह कार्यक्रम समाज के विभिन्न क्षेत्रों में हो रहे उत्कृष्ट कार्यों को सामने लाने वाला और देश को जोड़ने वाला प्रभावशाली मंच बन चुका है। उन्होंने लोगों से कार्यक्रम को नियमित रूप से सुनने की अपील करते हुए कहा कि इससे समाज हित में कार्य करने की प्रेरणा और ऊर्जा प्राप्त होती है।
इस अवसर पर मंडल अध्यक्ष प्रदीप रावत, पूनम नौटियाल, पार्षद मोहन बहुगुणा, सत्येंद्र नाथ, आनंद गुसाईं, हेमंत गुसाईं, राजेश शर्मा, हेमंत जोशी, कंचन ठाकुर, रमेश प्रधान सहित कई लोग उपस्थित रहे।
तेज़ रफ्तार जीवनशैली और देर रात तक जागने की आदतों के कारण आज अधिकांश लोग नींद की गड़बड़ी से जूझ रहे हैं। अनियमित दिनचर्या की वजह से शरीर की प्राकृतिक सर्केडियन क्लॉक असंतुलित हो जाती है, जिसका असर नींद के साथ-साथ ऊर्जा स्तर, पाचन तंत्र और इम्यून सिस्टम पर भी पड़ता है। विशेषज्ञों का कहना है कि केवल सोने की दवाई लेने से समस्या स्थायी रूप से दूर नहीं होती, बल्कि नींद से जुड़ी रूटीन में छोटे-छोटे बदलाव ही इसका असली समाधान हैं।
नींद से जुड़ी सबसे महत्वपूर्ण बात है — हर दिन एक निश्चित समय पर बिस्तर पर जाना और उठना। लगातार एक ही टाइम-टेबल का पालन करने से दिमाग को पता चलता है कि नींद का हार्मोन कब रिलीज़ करना है। इससे कुछ ही दिनों में नींद स्वतः समय पर आने लगती है और शरीर अपनी नैचुरल रिदम में लौट आता है।
रात को सोने से पहले मोबाइल, लैपटॉप और टीवी जैसी स्क्रीन से दूरी बनाना भी बेहद ज़रूरी है। इनसे निकलने वाली ब्लू लाइट दिमाग को जागृत रखती है और नींद का संकेत देने वाले हार्मोन को कम कर देती है। बातचीत, हल्का संगीत या किताब पढ़ना सोने से पहले शांत माहौल बनाने के अच्छे विकल्प हैं।
तनाव भी नींद खराब होने की प्रमुख वजहों में से एक है। सोने से पहले कुछ मिनट का मेडिटेशन या गहरी सांसों का अभ्यास दिमाग को आराम देता है। बेडरूम का वातावरण जितना शांत, अंधेरा और आरामदायक होगा, नींद उतनी गहरी और निरंतर मिलेगी। थोड़ा ठंडा तापमान भी बेहतर नींद को बढ़ावा देता है।
सुबह उठते ही सूर्य की रोशनी लेना बेहद फायदेमंद माना जाता है। प्राकृतिक प्रकाश मेलाटोनिन के उत्पादन को रोककर शरीर को दिन शुरू करने का संदेश देता है। वहीं, दोपहर के बाद चाय-कॉफी जैसे कैफीन वाले पेय पदार्थों से दूरी नींद की गुणवत्ता को और बेहतर बनाती है, क्योंकि कैफीन शरीर में कई घंटों तक सक्रिय रहता है और रात को सोने की क्षमता को कम कर देता है।
अपने रूटीन में ये साधारण बदलाव जोड़कर आप अपनी स्लीप साइकिल को दोबारा संतुलित कर सकते हैं और प्रतिदिन अधिक तरोताज़ा महसूस कर सकते हैं।
अमेरिका में फिर फैली दहशत: कैलिफोर्निया में बच्चे की बर्थडे पार्टी बनी गोलीबारी का मैदान, चार की मौत
वॉशिंगटन- अमेरिका के कैलिफोर्निया राज्य में एक बार फिर सामूहिक गोलीबारी की दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। स्टॉकटन शहर में एक निजी बैंक्वेट हॉल में चल रही बच्चे की जन्मदिन पार्टी अचानक गोलियों की तड़तड़ाहट से दहल उठी। घटना में चार लोगों की जान गई, जबकि 10 लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। मरने वालों में दो मासूम बच्चे भी शामिल हैं।
स्थानीय प्रशासन के अनुसार, यह हमला लक्षित गोलीबारी जैसा प्रतीत होता है। सैन जाओकिन काउंटी शेरिफ ऑफिस ने सोशल मीडिया पर बताया कि शुरुआती जांच में स्पष्ट हुआ है कि हमलावरों ने खास लोगों को निशाना बनाकर हमला किया। पुलिस टीम हॉल के अंदर से बरामद किए गए सबूतों की जांच कर रही है और घटना की वजह तलाश रही है।
गोलीबारी लुसिले एवेन्यू के 1900 ब्लॉक में स्थित बैंक्वेट हॉल में हुई। घायलों को पास के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। स्टॉकटन के डिप्टी मेयर जेसन ली ने घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए बताया कि “एक खुशहाल समारोह को हिंसा ने तबाही में बदल दिया। प्रशासन पीड़ित परिवारों के संपर्क में है।”
घटना के बाद पुलिस ने इलाके की सड़कों को सील कर दिया है और आसपास के क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ा दी गई है।
हालिया महीनों में बढ़ी गोलीबारी की घटनाएँ
अमेरिका में बीते कुछ महीनों से लगातार हिंसक घटनाएँ सामने आ रही हैं। पिछले महीने मिसिसिपी डेल्टा क्षेत्र में हुई दो अलग-अलग गोलीबारी में छह लोगों की मौत और 12 लोग घायल हुए थे। इनमें से एक हमला हाई स्कूल फुटबॉल गेम के बाद हुआ, जबकि दूसरा हमला होमकमिंग वीकेंड के दौरान स्कूल परिसर में हुआ था।
नई दिल्ली- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के नवीनतम संस्करण में देश के विभिन्न क्षेत्रों में हो रही प्रगति, खेल उपलब्धियों, सांस्कृतिक आयोजनों और उभरती जीवनशैली प्रवृत्तियों पर विस्तार से चर्चा की। पीएम ने कहा कि भारत में इन दिनों एंड्युरेंस स्पोर्ट्स का चलन तेज़ी से बढ़ रहा है और युवा बड़ी संख्या में ऐसी प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले रहे हैं, जिनमें शारीरिक व मानसिक क्षमता की बड़ी परीक्षा होती है।
उन्होंने बताया कि देशभर में हर महीने 1500 से अधिक एंड्यूरेंस ईवेंट आयोजित हो रहे हैं। इसी प्रवृत्ति का उदाहरण देते हुए उन्होंने ‘आयरनमैन’ जैसे कठिन मुकाबले का ज़िक्र किया, जिसमें तैराकी, साइकलिंग और मैराथन—तीनों को एक ही दिन पूरा करना होता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि युवाओं की ऐसी चुनौतियों में बढ़ती भागीदारी भारतीय फिटनेस संस्कृति को नई दिशा दे रही है।
खेलों में भारत का शानदार प्रदर्शन—कई विश्वस्तरीय उपलब्धियाँ
पीएम मोदी ने कहा कि बीते महीने खेलों के लिहाज़ से भारत के लिए बेहद सफल रहा।
महिला टीम के वर्ल्ड कप जीतने,
बधिर ओलंपिक में 20 पदक हासिल करने,
महिला कबड्डी टीम के विश्व कप चैंपियन बनने,
और बॉक्सिंग में 20 पदक जीतने
जैसी सफलताओं ने पूरे देश को गौरवान्वित किया है। उन्होंने विशेष रूप से ब्लाइंड महिला टीम का उल्लेख किया, जिसने बिना कोई मैच गंवाए वर्ल्ड कप अपने नाम किया। प्रधानमंत्री ने इन जीतों को देश के जज़्बे, समर्पण और टीमवर्क का प्रतीक बताया।
उन्होंने राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी भारत को मिलने की घोषणा को भी एक बड़ी उपलब्धि बताया।
वोकल फॉर लोकल की फिर अपील—G20 नेताओं को दिए स्थानीय कारीगरों के उपहार
प्रधानमंत्री ने कहा कि वोकल फॉर लोकल केवल एक अभियान नहीं, बल्कि देश की आर्थिक और सांस्कृतिक आत्मनिर्भरता की नई ताकत बन रहा है।
उन्होंने बताया कि जी20 सम्मेलन के दौरान उन्होंने अन्य देशों के नेताओं को भारतीय कारीगरों द्वारा बनाए गए उपहार भेंट किए, जैसे—
जापान की प्रधानमंत्री को भगवान बुद्ध की चांदी की प्रतिमा,
इटली की प्रधानमंत्री को करीमनगर की पारंपरिक कला।
उन्होंने कहा कि त्योहारों की खरीदारी में देशवासियों ने भारतीय उत्पादों को प्राथमिकता देकर इस अभियान को और मजबूत बनाया है। पीएम ने आगामी त्योहारों में भी स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने की अपील की।
भूटान यात्रा और बुद्ध अवशेषों की वैश्विक प्रशंसा
हाल ही में भूटान यात्रा का अनुभव साझा करते हुए पीएम मोदी ने बताया कि वहां उन्हें भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेष भेजे जाने के लिए भारत की ओर से किए गए प्रयासों की सराहना सुनने को मिली। उन्होंने कहा कि कई अन्य देशों ने भी इसी प्रकार आभार व्यक्त किया है।
भारत में विंटर टूरिज्म की बढ़ती लोकप्रियता
प्रधानमंत्री ने कहा कि सर्दियों के मौसम में भारत के पर्वतीय क्षेत्रों में पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। विशेष रूप से उत्तराखंड को उन्होंने विंटर टूरिज्म का उभरता केंद्र बताया।
उन्होंने जानकारी दी कि—
हाल ही में आदि कैलाश क्षेत्र में पहली हाई एल्टीट्यूड मैराथन का आयोजन हुआ,
60 किमी की यह चुनौती भरी रन सुबह 5 बजे, कड़ाके की ठंड में आयोजित की गई,
और अब जहां पहले दो हजार पर्यटक आते थे, वही संख्या अब 30 हजार तक पहुंच चुकी है।
काशी तमिल संगमम की शुरुआत और राष्ट्रीय एकता पर जोर
पीएम मोदी ने बताया कि 2 दिसंबर से काशी तमिल संगमम का नया संस्करण शुरू हो रहा है, जो भारत की भाषाई और सांस्कृतिक विविधता को जोड़ने का एक महत्वपूर्ण मंच है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ की भावना और मजबूत होती है।
सुरक्षा, नौसेना दिवस और नए नौसैनिक जहाज
प्रधानमंत्री ने भारतीय नौसेना की प्रगति पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने आईएनएस माहे के लॉन्च को राष्ट्र की आत्मनिर्भरता के प्रयासों में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। 4 दिसंबर को होने वाले नौसेना दिवस पर जवानों के साहस और सेवा को नमन किया।
कुरुक्षेत्र में गीता महोत्सव और अंतरराष्ट्रीय भागीदारी
हरियाणा के कुरुक्षेत्र में आयोजित अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव का ज़िक्र करते हुए पीएम ने कहा कि इस आयोजन में यूरोप और मध्य एशिया सहित कई देशों की सक्रिय भागीदारी रही। इस वर्ष पहली बार सऊदी अरब में भी गीता की प्रस्तुति की गई।
इतिहास, संस्कृति और विज्ञान—तीनों में भारत की पहचान मज़बूत
पीएम ने जामनगर के महाराजा द्वारा द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान यहूदी बच्चों को शरण देने के ऐतिहासिक प्रसंग का उल्लेख किया और कहा कि भारत की संस्कृति हमेशा से करुणा और मानवता को सर्वोपरि मानती है।
उन्होंने चंद्रयान मिशनों में वैज्ञानिकों के समर्पण को याद करते हुए कहा कि चंद्रयान-2 की असफलता के अगले ही दिन वैज्ञानिकों ने चंद्रयान-3 की सफलता की कहानी लिखनी शुरू कर दी थी।
कृषि, स्पेस और शहद उत्पादन में नई उपलब्धियाँ
प्रधानमंत्री ने कहा कि—
सुंदरबनी के सुलाई शहद को जीआई टैग मिलने के बाद इसकी पहचान राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ी है,
भारत का शहद उत्पादन अब 1.5 लाख मीट्रिक टन पार कर चुका है,
और इससे किसानों की आमदनी में बड़ा फायदा हुआ है।
इसके अलावा,
स्काईरूट के ‘इनफिनिटी कैंपस’ से भारत के निजी स्पेस सेक्टर को नई गति मिली है,
और देश ने इस वर्ष 3.57 करोड़ टन खाद्यान्न उत्पादन कर नया रिकॉर्ड बनाया है।
संविधान दिवस और राष्ट्रीय आयोजनों पर भी चर्चा
पीएम मोदी ने कहा कि नवंबर का महीना देश को कई प्रेरणाएं देता है—चाहे संविधान दिवस पर आयोजित कार्यक्रम हों, वंदे भारत की नई पहलें हों या अयोध्या में राम मंदिर परिसर में धर्मध्वजा का आरोहण।
उन्होंने बताया कि ‘मन की बात’ अब 22 भारतीय भाषाओं, 29 बोलियों और 11 विदेशी भाषाओं में प्रसारित होती है।
