ट्रंप के बयान पर भड़के रामाफोसा, कहा– दक्षिण अफ्रीका को G20 से बाहर करना दुर्भाग्यपूर्ण
केपटाउन। दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है, जिसमें उन्होंने कहा था कि वर्ष 2026 में मियामी में होने वाले जी20 शिखर सम्मेलन के लिए दक्षिण अफ्रीका को आमंत्रित नहीं किया जाएगा। राष्ट्रपति रामाफोसा ने इस बयान को निराधार और दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि ट्रंप प्रशासन लगातार गलत सूचनाओं के आधार पर दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ दंडात्मक कदम उठाता रहा है।
रामाफोसा ने स्पष्ट किया कि इस वर्ष दक्षिण अफ्रीका की अध्यक्षता में आयोजित जी20 शिखर सम्मेलन को वैश्विक स्तर पर अत्यंत सफल माना गया और इससे बहुपक्षवाद की प्रासंगिकता और मजबूती को पुनः स्थापित किया गया। उन्होंने कहा कि दक्षिण अफ्रीका जी20 का “पूर्ण, सक्रिय और रचनात्मक सदस्य” है और आगे भी रहेगा। साथ ही उन्होंने सदस्य देशों से आग्रह किया कि जी20 की प्रक्रिया सर्वसम्मति, सहयोग और समान भागीदारी की भावना के साथ आगे बढ़ती रहनी चाहिए।
दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि उनका देश एक स्वायत्त संवैधानिक लोकतंत्र है और किसी भी अन्य देश द्वारा किए गए अपमानजनक टिप्पणी या दबाव को स्वीकार नहीं करेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि दक्षिण अफ्रीका हमेशा सभी देशों की संप्रभुता का सम्मान करता है और किसी भी राष्ट्र का अपमान नहीं करता।
राष्ट्रपति रामाफोसा के अनुसार, चूंकि अमेरिका इस वर्ष के जी20 सम्मेलन में उपस्थित नहीं था, इसलिए संबंधित प्रक्रियाओं से जुड़े दायित्व जोहान्सबर्ग में दक्षिण अफ्रीका के अंतरराष्ट्रीय संबंध विभाग के मुख्यालय में तैनात अमेरिकी दूतावास के एक अधिकारी को सौंपे गए। उन्होंने कहा कि जी20 के संस्थापक सदस्यों में से एक होने के नाते दक्षिण अफ्रीका हमेशा साझेदारी, सहमति और सहयोग की भावना को प्राथमिकता देता है। इसी क्रम में यह उम्मीद की गई थी कि अमेरिकी प्रशासन दक्षिण अफ्रीका की अध्यक्षता के दौरान सभी बैठकों में भाग लेगा, लेकिन उसने स्वेच्छा से शिखर सम्मेलन में शामिल न होने का निर्णय लिया।
नहर निर्माण, बैराज मरम्मत और जल उपलब्धता पर दोनों राज्यों के बीच हुई अहम चर्चा
लखनऊ/देहरादून। उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से शिष्टाचार भेंट की। बैठक के दौरान दोनों राज्यों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में विशेष रूप से इकबालपुर नहर के निर्माण, बनबसा बैराज की वृहद मरम्मत, तथा हरिद्वार की दो नहरों के उत्तराखंड को हस्तांतरण जैसे विषयों पर गंभीर विमर्श किया गया। सतपाल महाराज ने इन परियोजनाओं के महत्व और इनके समयबद्ध क्रियान्वयन पर जोर दिया।
इसके अलावा, मुजफ्फरनगर जिले के पवित्र तीर्थ स्थल शुक्रताल में सोलानी और बाणगंगा नदी में पर्याप्त जल उपलब्धता सुनिश्चित करने के मुद्दे पर भी दोनों नेताओं ने विस्तृत विचार-विमर्श किया। उन्होंने कहा कि धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व वाले इस क्षेत्र के लिए जल की निरंतर उपलब्धता अत्यंत आवश्यक है।
ग्रामीण बोले—कई महीनों से भालू की गतिविधियों से परेशान हैं लोग
टिहरी। भिलंगना ब्लॉक के मगरौं–पौखाल क्षेत्र में एक दर्दनाक घटना सामने आई, जहां गूंज संस्था के कर्मचारी पर भालू ने अचानक हमला कर दिया। हमले की दहशत में कर्मचारी की हालत बिगड़ गई और रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया। घटना से क्षेत्र में दहशत फैल गई है।
जानकारी के अनुसार, गूंज संस्था से जुड़े कर्मचारी राकेश गिरी देर शाम स्वाड़ी और चाह गडोलिया क्षेत्र में सफाई किट वितरण से लौट रहे थे। करीब आठ बजे मगरौं–पौखाल मार्ग पर अचानक भालू ने उन पर झपट्टा मार दिया, जिससे वह बाइक से गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गए। पीछे आ रहे लोगों ने शोर मचाकर भालू को भगाया, लेकिन हमले का डर राकेश गिरी की हालत पर भारी पड़ गया और उन्हें घबराहट के कारण हार्ट अटैक आ गया।
स्थानीय लोगों की मदद से उन्हें तुरंत श्रीनगर बेस अस्पताल ले जाया गया, जहां गंभीर स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें ऋषिकेश एम्स के लिए रेफर किया। लेकिन कीर्तिनगर पहुँचने से पहले ही उनकी मौत हो गई।
ग्राम खाल–पाली के प्रधान वीरेन्द्र सिंह नेगी सहित ग्रामीणों ने बताया कि क्षेत्र में लंबे समय से भालू की गतिविधियां बढ़ी हुई हैं, जिससे लोग दहशत में जी रहे हैं। उनका कहना है कि गडोलिया, स्वाड़ी, पौखाल, खाल, पाली और कोटी में भालू कई महीनों से घूम रहा है, जिसकी शिकायत डीएफओ तक भी की गई है। ग्रामीणों ने वन विभाग से भालू को पकड़ने और संवेदनशील इलाकों में पिंजरे लगाने की मांग की है।
उधर, पौखाल वन रेंज अधिकारी हर्षराम उनियाल का कहना है कि घटना की जानकारी मिलने के बाद इलाके में गश्त बढ़ा दी गई है, हालांकि विभाग को भालू हमले की कोई आधिकारिक सूचना प्राप्त नहीं हुई है। उन्होंने बताया कि मौके पर भालू के पंजों के निशान भी नहीं मिले हैं।
उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने राष्ट्रीय जम्बूरी के मौके पर किया सम्मानित
लखनऊ/देहरादून। भारत स्काउट्ड एंड गाइड्स की 19वीं राष्ट्रीय जम्बूरी के अवसर पर सूबे के कैबिनेट मंत्री डॉ. धन सिंह रावत को ‘सिल्वर एलीफेंट अवार्ड’ से सम्मानित किया गया। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने डॉ. रावत को यह सम्मान प्रदान किया। इस अवसर पर डॉ. रावत ने कहा कि स्काउटिंग युवाओं में अनुशासन, एकता और देशभक्ति का भाव विकसित करने का बड़ा मंच है, जिसका विस्तार प्रदेश के स्कूलों व कॉलेजों में निरंतर किया जा रहा है।
19वीं राष्ट्रीय जम्बूरी के अवसर पर उत्तर प्रदेश राजभवन में आयोजित एक भव्य समारोह में राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने भारत स्काउट्स एंड गाइड्स के सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मान ‘सिल्वर एलीफेंट अवार्ड’ से कैबिनेट मंत्री व डॉ. धन सिंह रावत को सम्मानित किया। इस अवसर राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने डॉ. रावत द्वारा उत्तराखंड में स्काउट-गाइड आंदोलन को मजबूत करने, इसे व्यापक स्तर पर लागू करने तथा युवाओं में सकारात्मक व राष्ट्रनिर्माण की सोच विकसित करने हेतु किये गये प्रयासों की सराहना की और उन्हें शुभकामनाएं भी प्रेषित की।
सिल्वर एलीफेंट अवार्ड से सम्मानित होने पर डॉ. रावत ने कहा कि यह क्षण उनके लिए अत्यंत प्रेरणादायी है। उन्होंने कहा कि स्काउटिंग युवाओं में अनुशासन, एकता, सेवा-भाव और देशभक्ति की भावना को विकसित करने का सशक्त मंच है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के स्कूलों एवं कॉलेजों में स्काउट-गाइड गतिविधियों के विस्तार और उसे अधिक प्रभावी बनाने के लिए सरकार निरंतर कार्य कर रही है।
डॉ. रावत ने भारत स्काउट्स एंड गाइड्स संगठन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह संस्था देशभर में स्काउट-गाइड गतिविधियों के माध्यम से युवाओं के शारीरिक, बौद्धिक, आध्यात्मिक और सामाजिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है साथ ही विश्वव्यापी भाईचारे की भावना को भी सशक्त बना रही है। उन्होंने कहा कि यह सम्मान उन्हें भविष्य में और अधिक समर्पण के साथ जनसेवा व युवा सशक्तिकरण के कार्यों में जुटने की प्रेरणा प्रदान करेगा।
स्थानीय लोगों से लिया विकास कार्यों का फीडबैक
नैनीताल। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नैनीताल में प्रातःकालीन भ्रमण के दौरान स्थानीय नागरिकों, दुकानदारों और युवाओं से मुलाकात कर उनके सुझाव और विचार सुने। इस दौरान उन्होंने प्रदेश सरकार की ओर से संचालित विभिन्न विकास परियोजनाओं एवं जनकल्याणकारी योजनाओं पर जनता का फीडबैक भी लिया।
लोगों के उत्साह और संतुष्टि ने क्षेत्र में हो रहे सकारात्मक बदलाव की झलक दिखाई।

मुख्यमंत्री धामी ने नैना देवी मंदिर परिसर में चल रहे सौंदर्यीकरण कार्यों का निरीक्षण किया। साथ ही अधिकारियों को डीएसए मैदान के सुधार कार्य, वलिया नाला एवं ठंडी सड़क क्षेत्र में भूस्खलन सुरक्षा कार्यों को तेज गति से पूरा करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार जनभागीदारी को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए पारदर्शी शासन और समग्र विकास के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है।
खड़खड़ी श्मशान घाट पर उमड़ा जनसैलाब, दिग्गज नेताओं ने दी अंतिम श्रद्धांजलि
हरिद्वार। उत्तराखंड राज्य आंदोलन के प्रमुख नेताओं में शामिल और पूर्व कैबिनेट मंत्री दिवाकर भट्ट का बुधवार को पूर्ण राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। हरिद्वार के खड़खड़ी श्मशान घाट पर हजारों की संख्या में लोग अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे, जहां जनसैलाब उमड़ पड़ा।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की ओर से जिलाधिकारी मयूर दीक्षित और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रमेंद्र सिंह डोभाल ने दिवाकर भट्ट के पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इसके बाद गार्ड ऑफ ऑनर और अंतिम सलामी के बीच दोपहर 2 बजे दाह संस्कार संपन्न हुआ।
पुत्र ललित भट्ट ने दी मुखाग्नि, शवयात्रा में उमड़ी भारी भीड़
दिवाकर भट्ट की अंतिम यात्रा उनके आवास से शुरू हुई, जिसमें हजारों लोग शामिल हुए। विभिन्न सामाजिक संगठनों, राजनीतिक दलों और आंदोलनकारियों ने शोक व्यक्त करते हुए दिवंगत नेता के योगदान को याद किया। श्मशान घाट पर उनके पुत्र ललित भट्ट ने विधिवत रूप से मुखाग्नि दी।
कई दिग्गज नेता रहे मौजूद, हरिद्वार में शोक की लहर
अंतिम यात्रा में पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, विभिन्न विधायकों, जनप्रतिनिधियों और कई संगठनों के पदाधिकारियों ने भाग लिया। उनके निधन से हरिद्वार सहित पूरे प्रदेश में शोक की लहर है।
प्रभावित परिवारों की मुआवजा राशि बढ़ने पर मुख्यमंत्री का किया आभार व्यक्त
पौड़ी। प्रदेश के पंचायती राज मंत्री सतपाल महाराज ने कहा है कि राज्य के पर्वतीय जनपदों में जंगली जानवरों के बढ़ते हमलों और उनसे आम जन की सुरक्षा के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जा रही है। पंचायत विभाग के अधिकारियों को अनटाइड फंड से रिहायशी इलाकों में ऐसे स्थानों की झाड़ियों को काटवाने के निर्देश दिए गए हैं जहां जंगली जानवरों के छिपे होने की आशंका रहती है। उन्होंने जंगली जानवरों के हमलों में मारे जाने वाले लोगों को 10 लाख की मुआवजा राशि दिये जाने और घायलों के उपचार का पूरा खर्च सरकार द्वारा वहन किये जाने के निर्णय पर प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का आभार व्यक्त किया है।
महाराज ने कहा कि पर्वतीय जनपदों में जंगली जानवरों के बढ़ते हमलों को देखते हुए आमजन एवं ग्रामीणों की सुरक्षा के मध्येनजर पकड़े गए जंगली जानवरों को प्राणी उद्यानों और वनतारा में रखने की व्यवस्था बनाने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। इसके लिए बड़ी-बड़ी संस्थाओं एवं कंपनियों से उनके रखरखाव एवं खान-पान की व्यवस्था पर होने वाले खर्च को वाहन करने का उनसे अनुरोध किया जा रहा है। क्योंकि एक बाघ को पड़कर यदि किसी भी प्राणी उद्यान में रखा जाता है तो उसके खान-पान एवं रखरखाव पर 20 से 25 लाख रुपए के लगभग वार्षिक खर्च आता है। इसलिए इस तरह की पहल करना आवश्यक है। ताकि आम लोगों के साथ-साथ वन्य जीवों की भी सुरक्षा हो सके।
सर्दियों की शुरुआत के साथ ही हवा में ठंडक और नमी बढ़ जाती है, जो कई मौसमी बीमारियों का खतरा बढ़ाने लगती है। खासतौर पर बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह मौसम चुनौतीपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इस दौरान वायरस और बैक्टीरिया अधिक सक्रिय हो जाते हैं। इन्हीं संक्रमणों में सबसे खतरनाक है—निमोनिया, जो हर साल बड़ी संख्या में लोगों को प्रभावित करता है और गंभीर मामलों में जान के लिए भी खतरा बन जाता है।
निमोनिया: सर्दियों में तेजी से फैलने वाला संक्रमण
निमोनिया फेफड़ों में होने वाला गंभीर इंफेक्शन है, जो वायरस, बैक्टीरिया या फंगस के कारण विकसित हो सकता है। इसके लक्षणों में लगातार खांसी, तेज बुखार, सांस फूलना, थकान और छाती में दर्द शामिल हैं। कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों, बुजुर्गों और छोटे बच्चों में इसके गंभीर होने का जोखिम और अधिक रहता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, दुनिया में हर साल लाखों बच्चों की मौत निमोनिया से होती है। ठंड के मौसम में यह आंकड़ा और बढ़ जाता है, इसलिए इस समय बच्चों व बुजुर्गों की अतिरिक्त देखभाल जरूरी है।
ठंड क्यों बढ़ा देती है निमोनिया का खतरा?
एक्सपर्ट बताते हैं कि सर्दियों में बच्चे घरों के अंदर अधिक समय बिताते हैं, जिससे संक्रमित व्यक्तियों के संपर्क में आने का जोखिम बढ़ जाता है। साथ ही—
सूरज की कम रोशनी के कारण विटामिन D की कमी
प्रदूषण और धुएं का बढ़ा संपर्क
ठंड में शरीर की प्रतिरक्षा का कमजोर होना
दूषित पानी और अस्वच्छ भोजन
ये सभी कारक बच्चों और बुजुर्गों में निमोनिया संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ा देते हैं।
विशेषज्ञों की राय
श्वसन रोग विशेषज्ञ डॉ. एन.आर. चौहान बताते हैं कि ठंड सीधे तौर पर निमोनिया का कारण नहीं बनती, लेकिन यह ऐसे वातावरण को जन्म देती है जिसमें संक्रमण तेजी से फैलता है। हवा का सूखापन फेफड़ों में जलन पैदा करता है, जिससे संक्रमण आसानी से पकड़ लेता है।
वे बताते हैं कि डायबिटीज, अस्थमा, सीओपीडी और कमजोर फेफड़ों वाले लोगों में गंभीर निमोनिया होने की आशंका ज्यादा रहती है। छोटे बच्चों और बुजुर्गों में तो यह जोखिम और भी बढ़ जाता है।
निमोनिया से बचाव कैसे करें?
1. वैक्सीन जरूर लगवाएं
न्यूमोकोकल और इन्फ्लूएंजा वैक्सीन निमोनिया से बचाव के सबसे प्रभावी उपाय हैं। डॉक्टर की सलाह के अनुसार बच्चों को समय पर सभी टीके लगवाना उनकी सुरक्षा की मजबूत ढाल मानी जाती है।
2. बच्चों को ठंड से बचाना बेहद जरूरी
बच्चे को गर्म कपड़े पहनाएं
साफ-सफाई बनाए रखें
खिलौनों की नियमित सफाई करें
बीमार लोगों से दूरी रखें
बार-बार हाथ धोने की आदत डालें
3. स्वच्छता और मास्क का प्रयोग
डॉक्टरों के अनुसार, निमोनिया से बचाव के लिए स्वच्छता बहुत महत्वपूर्ण है। हाथ धोना, मास्क पहनना और फ्लू जैसे लक्षण वाले लोगों से दूर रहना संक्रमण के खतरे को काफी हद तक रोकता है।
4. मां का दूध और पौष्टिक आहार
अध्ययनों से पता चलता है कि मां का दूध शिशुओं की प्रतिरक्षा को मजबूत रखता है। बड़े बच्चों को विटामिन C, विटामिन D और जिंक से भरपूर चीजें खिलाना चाहिए, जिससे फेफड़े मजबूत रहते हैं।
कब लें डॉक्टर की सलाह?
अगर किसी व्यक्ति को—
बलगम वाली खांसी कई दिनों तक बनी रहे
तेज बुखार उतर न रहा हो
सांस लेने में परेशानी हो
सीने में दर्द हो
तो तत्काल डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। समय पर इलाज न मिलने पर निमोनिया गंभीर रूप ले सकता है।
(साभार)
वार्षिक रिपोर्टों से लेकर महिलाओं की नाइट शिफ्ट अनुमति तक महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मिली मंजूरी
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में बुधवार को सचिवालय में राज्य मंत्रिमंडल की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई। बैठक में कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, सौरभ बहुगुणा सहित सभी मंत्री उपस्थित रहे, जबकि कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज और धन सिंह रावत वर्चुअल माध्यम से जुड़े।
बैठक की शुरुआत राज्य निर्माण आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले वरिष्ठ आंदोलनकारी और पूर्व कैबिनेट मंत्री दिवाकर भट्ट के निधन पर दो मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करने से हुई। मंत्रिमंडल ने दिवाकर भट्ट के राज्य निर्माण और राज्य के विकास में योगदान को भी याद किया। कैबिनेट बैठक में कई अहम फैसले किये गए।
कैबिनेट के प्रमुख निर्णय
1. उत्तराखंड जैव विविधता बोर्ड की वार्षिक रिपोर्ट विधानसभा में पेश होगी
पर्यावरण संरक्षण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के प्रस्ताव पर 2024-25 की वार्षिक रिपोर्ट को आगामी विधानसभा सत्र में पटल पर रखने की स्वीकृति प्रदान की गई।
2. अभियोजन विभाग में 46 नए पद सृजित
अभियोजन विभाग के पुनर्गठन के तहत देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंहनगर और नैनीताल में सहायक अभियोजन अधिकारी के 46 अतिरिक्त पद सृजित करने को मंजूरी दी गई, ताकि अदालतों में प्रभावी पैरवी सुनिश्चित की जा सके।
3. यूजेवीएन लिमिटेड की 2022-23 की रिपोर्ट विधानसभा में पेश होगी
ऊर्जा विभाग के प्रस्ताव के तहत उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड की वित्तीय वर्ष 2022-23 की वार्षिक वित्तीय रिपोर्ट को विधानसभा में प्रस्तुत करने को स्वीकृति मिली।
4. मानचित्र स्वीकृति की अनिवार्यता पर पुनः परीक्षण का निर्णय
आवास विभाग के प्रस्ताव—प्राधिकरण क्षेत्र में मानचित्र स्वीकृति की अनिवार्यता—को मंत्रिमंडल ने पुनः परीक्षण हेतु वापस भेजा।
5. महिलाओं को रात्रि पाली में कार्य की अनुमति
राज्य की दुकानों और प्रतिष्ठानों में महिला कर्मकारों को रात्रि 9 बजे से सुबह 6 बजे तक सुरक्षा प्रावधानों के साथ रात्रि पाली में कार्य की अनुमति दी गई।
महिला कर्मकारों की लिखित सहमति अनिवार्य
आर्थिक सशक्तिकरण और लैंगिक समानता को बढ़ावा
कार्यस्थलों पर अधिक अवसर उपलब्ध होंगे
6. दुकान एवं स्थापना अधिनियम में संशोधन को मंजूरी
उत्तराखंड दुकान एवं स्थापन (रोजगार विनियमन और सेवा-शर्त) अधिनियम में संशोधन अध्यादेश 2025 पर कैबिनेट की मुहर।
संशोधनों से:
छोटे प्रतिष्ठानों पर अतिरिक्त बोझ नहीं बढ़ेगा
बड़े प्रतिष्ठानों पर कर्मकारों को सभी कानूनी लाभ
निवेश को बढ़ावा, कार्य समय में लचीलापन
अधिक रोजगार अवसर और आर्थिक गतिविधि में वृद्धि
7. देहरादून मेट्रो नियो परियोजना पर केंद्र के सुझावों से कैबिनेट अवगत
देहरादून शहर में प्रस्तावित मेट्रो नियो परियोजना पर केंद्र सरकार के सुझावों को कैबिनेट के समक्ष प्रस्तुत किया गया। इस पर आगे मार्गदर्शन लिया जाएगा।
8. वन्यजीव हमलों में मृतकों के आश्रितों को 10 लाख रुपये मुआवजा
मानव वन्यजीव संघर्ष राहत वितरण नियमावली 2025 में संशोधन को मंजूरी।
पहले मुआवजा ₹6 लाख
अब बढ़ाकर ₹10 लाख किया गया
यह संशोधन टाइगर कंज़र्वेशन फ़ाउंडेशन के निर्णय और मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुरूप है।
गुवाहाटी में 408 रन से हार; टीम इंडिया को मिली घरेलू टेस्ट इतिहास की सबसे बड़ी शिकस्त
नई दिल्ली। भारत को घरेलू मैदान पर एक बार फिर कड़वा अनुभव मिला है। दक्षिण अफ्रीका ने दो मैचों की टेस्ट सीरीज में टीम इंडिया को पूरी तरह पछाड़ते हुए 2-0 से क्लीन स्वीप कर दिया। कोलकाता में 30 रन की हार के बाद गुवाहाटी टेस्ट में मिली 408 रन की करारी शिकस्त ने भारतीय टीम के प्रदर्शन पर बड़े प्रश्न खड़े कर दिए। यह हार घरेलू टेस्ट इतिहास में भारत की सबसे बड़ी हार साबित हुई। वहीं दक्षिण अफ्रीका ने 25 साल बाद भारतीय जमीन पर टेस्ट सीरीज जीतकर नया इतिहास रच दिया।
दक्षिण अफ्रीका ने 2000 के बाद पहली बार भारत में टेस्ट सीरीज जीती है और दूसरी बार टीम इंडिया को क्लीन स्वीप कर बड़ी उपलब्धि दर्ज की है। इससे पहले भी वर्ष 2000 में दक्षिण अफ्रीका ने भारत को अपने ही घर में 2-0 से मात दी थी। अब 2025 में यह उपलब्धि दोहराकर दक्षिण अफ्रीका भारत को अपनी ही धरती पर दो बार टेस्ट सीरीज में सूपड़ा साफ करने वाली पहली टीम बन गई है।
भारत अपने घर में अब तक तीन बार क्लीन स्वीप झेल चुका है—दो बार दक्षिण अफ्रीका और एक बार न्यूजीलैंड के खिलाफ।
भारत–दक्षिण अफ्रीका के बीच टेस्ट इतिहास
टेस्ट मुकाबलों में दोनों टीमों की प्रतिद्वंद्विता 1992-93 से शुरू होती है। अब तक खेले गए 17 द्विपक्षीय टेस्ट सीरीज में से भारत केवल 4 बार ही विजेता बन पाया है, जबकि दक्षिण अफ्रीका ने 9 सीरीज अपने नाम की हैं। 4 सीरीज ड्रॉ पर समाप्त हुईं। यह आंकड़ा स्पष्ट करता है कि टेस्ट क्रिकेट में दक्षिण अफ्रीका का दबदबा लगातार बना हुआ है।
घरेलू मैदान पर भारत का घटता वर्चस्व
दक्षिण अफ्रीकी परिस्थितियों में जहां भारत हमेशा संघर्ष करता रहा है, वहीं घरेलू मैदान पर टीम इंडिया का प्रदर्शन अब तक मजबूत माना जाता था। इस हार से पहले भारत अपने घर पर दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ लगातार चार टेस्ट सीरीज जीत चुका था।
हालांकि इस बार मिली करारी हार ने साफ कर दिया है कि भारतीय टीम का घरेलू वर्चस्व भी अब कमजोर पड़ रहा है।
भारत ने घरेलू धरती पर दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ कुल 8 टेस्ट सीरीज खेली हैं—जिनमें से 4 भारत ने जीतीं, 2 दक्षिण अफ्रीका के नाम रहीं और 2 ड्रॉ रहीं। वहीं दक्षिण अफ्रीका में आयोजित 9 सीरीज में भारत एक भी नहीं जीत पाया। 7 सीरीज प्रोटियाज ने जीतीं और 2 ड्रॉ रहीं।
भारत की पिछली जीत कब आई थी?
भारतीय टीम ने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 1996, 2004, 2015 और 2019 में टेस्ट सीरीज जीती थीं। ऐसे में भारत की दक्षिण अफ्रीका पर आखिरी सीरीज जीत को अब छह साल से ज्यादा समय हो गया है। दूसरी ओर, दक्षिण अफ्रीका को भारतीय जमीन पर सीरीज जीतने का यह केवल दूसरा मौका मिला है—पहला 2000 में, और अब 2025 में।
