साउथ फिल्म इंडस्ट्री की चर्चित जोड़ी में शामिल अभिनेत्रीं Sobhita Dhulipala और अभिनेता Naga Chaitanya एक बार फिर सुर्खियों में हैं। आज अभिनेता के 39वें जन्मदिन पर सोभिता ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर दोनों की एक खूबसूरत और दिल छू लेने वाली तस्वीर साझा की, जिसे देखकर उनके फैंस खुशी से झूम उठे।
पोस्ट की गई तस्वीर में दोनों बेहद सहज और खुश नजर आ रहे हैं, जबकि नागा चैतन्य का देखभाल भरा अंदाज़ तस्वीर को और खास बना रहा है। फोटो में नागा, सोभिता के स्वेटर की जिप लगाते हुए उन्हें ठंड से बचाने की कोशिश करते दिखाई देते हैं—यह छोटा सा पल उनके बीच की गर्मजोशी और गहरे संबंध को बखूबी बयां करता है।
सोभिता ने तस्वीर के साथ प्यार भरा कैप्शन भी लिखा—“जन्मदिन मुबारक हो, मेरे प्रिय @chayakkineni।” पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए नागा चैतन्य ने लाल दिल वाला इमोजी बनाकर अपना स्नेह जताया।
नई दिल्ली- भारतीय धावक अमर सिंह देवंदा ने बैंकॉक में आयोजित एशिया ओशिनिया 100 किमी अल्ट्रा रनिंग चैम्पियनशिप में देश का नाम रोशन करते हुए स्वर्ण पदक पर कब्जा कर लिया। उन्होंने 100 किमी की कठिन दौड़ को 6 घंटे 59 मिनट 37 सेकंड में पूरा कर नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड दर्ज किया। यह प्रतिष्ठित चैम्पियनशिप इंटरनेशनल एसोसिएशन ऑफ अल्ट्रारनर्स के तत्वावधान में संपन्न हुई।
रविवार को भारतीय एथलेटिक्स महासंघ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर जानकारी दी कि अमर सिंह देवंदा का यह प्रदर्शन भारतीय अल्ट्रा रनिंग इतिहास में एक मील का पत्थर है। महासंघ ने लिखा कि देवंदा की रिकॉर्डतोड़ दौड़ ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की उपस्थिति को और मजबूत किया है।
इस प्रतियोगिता में भारत से कुल 11 एथलीटों की टीम उतरी थी, जिसमें सौरव कुमार रंजन, गीनो एंटनी, वेलु पेरुमल, योगेश सनप, जयद्रथ, आरती झंवर, रणजी सिंह, सिंधु उमेश, नामग्याल ल्हामो और तेनजिन डोल्मा शामिल थे।
सोमेश्वर। कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने सोमेश्वर विधानसभा के ताकुला मंडल अंतर्गत झिझाड़, किरडा और नाईढौल गांवों में आयोजित जन मिलन कार्यक्रमों में ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं और उनके समाधान के लिए कई घोषणाएं कीं।
झिझाड़ गांव में उन्होंने शिल्पकार बस्ती में पेयजल योजना के लिए विधायक निधि से तीन लाख रुपये तथा मां भगवती मंदिर के सौंदर्यीकरण के लिए दो लाख रुपये देने की घोषणा की। ग्रामीणों द्वारा मुख्य मार्ग से गांव तक लिंक रोड न होने की समस्या उठाए जाने पर मंत्री ने कहा कि यदि गांव के लोग निजी भूमि का अनापत्ति प्रमाण पत्र उपलब्ध कराएं तो सड़क स्वीकृति के लिए शासन स्तर पर गंभीरता से प्रयास किया जाएगा।
किरडा गांव में रेखा आर्या ने दोनों हरज्यू मंदिरों के सौंदर्यीकरण के लिए दो-दो लाख रुपये देने की घोषणा की। साथ ही कार्यक्रम में आई एक विधवा महिला की मदद के लिए उसकी विधवा पेंशन शुरू कराने और समाज कल्याण विभाग से आर्थिक सहायता दिलाने की प्रक्रिया आरंभ करने के निर्देश दिए।
नाईढौल गांव में आयोजित जन मिलन कार्यक्रम में मंत्री ने ग्रामीणों की मांग पर हरज्यू मंदिर के सौंदर्यीकरण हेतु विधायक निधि से दो लाख रुपये स्वीकृत किए। गांव में बनाए गए खेल मैदान में सुविधाओं के अभाव पर उन्होंने कहा कि भूमि स्थानांतरण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद खेल विभाग उसे उच्चस्तरीय सुविधाओं से युक्त मैदान के रूप में विकसित करेगा।
रेखा आर्या ने कहा कि प्रदेश सरकार विकास के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है और आम जनता की समस्याओं का समाधान सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
कार्यक्रमों में मंडल अध्यक्ष जगदीश डंगवाल, मंडल महामंत्री भूधर सिंह भाकुनी, वीरेंद्र सिंह, जिला पंचायत सदस्य प्रतिनिधि राहुल कुमार, जिला मीडिया प्रभारी प्रदीप नगरकोटी, ग्राम प्रधान झिझाड़ मदन सिंह बिष्ट, ग्राम प्रधान किरडा बालम सिंह, पूर्व प्रधान बहादुर सिंह बिष्ट, जयपाल सिंह, निर्मल नयाल, आशीष ठाकुर, आनंद भोज, पूरन सिंह बिष्ट, संजय आर्य, गिरीश, रमेश आर्य, तारा नगरकोटी, जगदीश गुसाई, भरत सिंह, नंदन सिंह नयाल, प्रकाश राम, रघुवर सिंह और देवेंद्र भंडारी सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
कर्मचारी हमारे परिवार के सदस्य, सरकार एवं संगठन उनके हितों के लिए प्रतिबद्ध : भट्ट
मुलाकात में भाजपा प्रदेशाध्यक्ष ने सीएम से शीघ्र वार्ता का दिया भरोसा
देहरादून । उपनल कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर भाजपा प्रदेशाध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट से मुलाकात की है। जिसमें भट्ट ने विश्वास दिलाया कि सरकार और पार्टी कर्मचारी हितों को लेकर पूर्णतया कटिबद्ध है, लिहाजा शीघ्र ही सभी समस्याओं का समाधान कर लिया जाएगा।
उत्तराखंड उपनल संविदा कर्मचारी संघ पदाधिकारियों के प्रतिनिधिमंडल के साथ हुई यह मुलाकात यमुना कॉलोनी स्थित प्रदेश अध्यक्ष के आवास पर हुई है। इस दौरान उपनल प्रतिनिधियों ने अपनी मांगों और उसके समाधान के बिंदुओं की विस्तार से भट्ट के साथ चर्चा की। प्रदेशाध्यक्ष ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से उनके मुद्दों को लेकर वार्ता करने का भरोसा दिया। साथ उन्होंने सुझाव देते हुए कहा, सभी मुद्दों का समाधान संवाद से ही संभव है, इसलिए सरकार और उपनल संविदा कर्मचारी संघ दोनों को वार्ता की प्रक्रिया लगातार आगे बढ़नी चाहिए। सभी हमारे ही परिवार के सदस्य हैं, लिहाजा पार्टी उनके हितों को लेकर पूरी तरह सजग है। उनकी मांगों और सुझावों को संगठन की तरफ से सरकार के समक्ष रखा जाएगा। पार्टी कर्मियों के हितों को प्राथमिकता देने वाले सकारत्मक समाधान हेतु हर संभव प्रयास करेगी। अभी तक की बातचीत और मुख्यमंत्री की गंभीरता बताती है कि बहुत शीघ्र आप सबकी समस्या का पूर्णतया समाधान हो जायेगा।
बायोमेट्रिक केवाईसी के अभाव में राशन वितरण न रोकने के निर्देश
ई केवाईसी के 30 नवंबर तक है समय सीमा
देहरादून। अंगूठे के निशान स्कैन ना होने या फिर आंखों का रेटिना स्कैन ना होने के कारण अगर आपकी ई केवाईसी अभी तक नहीं हो पाई है तब भी चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है । आपका राशन मिलता रहेगा। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री रेखा आर्या के निर्देश पर विभाग ने शनिवार को इससे संबंधित आदेश सभी जिला पूर्ति अधिकारियों को दिया है।
प्रदेश के सभी जनपदों में राशन कार्ड धारकों की ई केवाईसी करने का काम चल रहा है। इसके लिए केंद्र सरकार ने 30 नवंबर को अंतिम तारीख घोषित किया है, लेकिन प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों में अभी बड़ी संख्या में ई केवाईसी नहीं हो पाई है।
कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने बताया कि जन मिलन के कार्यक्रमों में उन्हें कई बार इसकी शिकायत मिली कि अंगूठा स्कैन ना होने के कारण या रेटिना स्कैन ना होने के कारण या फिर घर के मुखिया के रोजगार के चलते बाहर होने के कारण उनकी ई केवाईसी अभी तक नहीं हो पाई है। कुछ अत्यंत बुजुर्ग और असाध्याय रोगों से पीड़ित लोगों की भी केवाईसी नहीं हो पाई है। ऐसे राशन कार्ड धारकों को यह चिंता थी कि नवंबर के बाद उन्हें राशन मिल पाएगा या नहीं।
कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने विभागीय अधिकारियों को इन कारणों के चलते ई केवाईसी न हो पाने पर राशन वितरण व्यवस्था में शिथिलता बरतने के निर्देश दिए थे। इसके बाद खाद्य आयुक्त की ओर से सभी जिला पूर्ति अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि ऐसे मामलों में राशन वितरण नहीं रोका जाएगा। ऐसे परिवारों की ई केवाईसी करने के लिए उन्हें अतिरिक्त समय दिया जाएगा।
इसके साथ ही राशन विक्रेताओं के बकाया लाभांश का भुगतान 3 दिन के भीतर करने के निर्देश जारी किए गए हैं।
आईआईटी रुड़की के उप निदेशक प्रो. यू. पी. सिंह ने स्वास्थ्य निगरानी मंच का उद्घाटन किया
रुड़की। अमेरिका स्थित स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी स्टार्टअप आरोग्यटेक ने अपने प्रमुख स्वास्थ्य निगरानी मंच-जिसमें प्राण सहायता उपकरण और सहयोगी सॉफ्टवेयर अनुप्रयोग प्राण कम्पेनियन और प्राण गाइड शामिल हैं-को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की को दान करने की घोषणा की है। यह पहल डिजिटल स्वास्थ्य और चिकित्सा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अनुसंधान, नवाचार और छात्रों की भागीदारी को सशक्त बनाने का प्रयास करती है।
यह दान हर्षा एच और हासू पी शाह फैमिली फाउंडेशन द्वारा समर्थित है। प्रसिद्ध परोपकारी और उद्यमी हसू पी. शाह, हर्षा हॉस्पिटैलिटी ग्रुप के संस्थापक, जो प्रौद्योगिकी-संचालित सामाजिक प्रभाव के लिए एक मजबूत अधिवक्ता रहे हैं। शाह ने कहा, “हालांकि मेरा करियर आतिथ्य उद्योग में रहा है, लेकिन प्रौद्योगिकी, नवाचार और सामाजिक प्रभाव के लिए मेरे जुनून ने हमेशा मेरी यात्रा का मार्गदर्शन किया है। “आरोग्यटेक डॉक्टरों और इंजीनियरों की एक युवा और प्रतिभाशाली टीम को एक साथ लाता है जो दुनिया की कुछ सबसे अधिक दबाव वाली स्वास्थ्य चुनौतियों को हल करने के लिए उत्साहपूर्वक काम कर रहे हैं। मुझे उनके दृष्टिकोण में निवेश करने और उनके मिशन का समर्थन करने पर गर्व है।
आरोग्यटेक के सह-संस्थापक और मुख्य उत्पाद और प्रौद्योगिकी अधिकारी, अजय विक्रम सिंह, जो 1999 की कक्षा में आईआईटी रुड़की के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के पूर्व छात्र थे, ने अपने अल्मा मेटर को वापस देने की पहल का नेतृत्व किया। उन्होंने कहा, “आईआईटी रुड़की ने एक इंजीनियर और नवप्रवर्तक के रूप में मेरी नींव को आकार दिया। यह योगदान स्वास्थ्य सेवा नवोन्मेषकों की अगली पीढ़ी को पोषित करने की दिशा में एक छोटा कदम है जो वास्तविक दुनिया की चिकित्सा जरूरतों के साथ उन्नत तकनीक को पूरा कर सकते हैं।
प्राण प्लेटफॉर्म हर घर में उन्नत कल्याण और नैदानिक क्षमताओं को लाने के लिए आरोग्यटेक के मिशन का प्रतीक है। यह एक निर्बाध डिजिटल और हार्डवेयर पारिस्थितिकी तंत्र के माध्यम से बुद्धिमान निगरानी, व्यक्तिगत मार्गदर्शन और दूरस्थ नैदानिक सहयोग को एकीकृत करता है। एक व्यापक स्वास्थ्य और कल्याण मंच के रूप में परिकल्पित, इस प्रणाली को रक्त शर्करा जैसे महत्वपूर्ण मापदंडों की गैर-आक्रामक निगरानी को सक्षम करने, कैंसर की शीघ्र जांच की सुविधा प्रदान करने और सामुदायिक स्तर के जीनोमिक परीक्षण का मार्ग प्रशस्त करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रो. के के पंत ने कहा, “आईआईटी रुड़की, आरोग्यटेक, एवी सिंह और हर्षा एच और हासू पी शाह फैमिली फाउंडेशन के इस योगदान को बहुत महत्व देता है। इस तरह के सहयोग स्वास्थ्य सेवा प्रौद्योगिकी और डेटा-संचालित चिकित्सा जैसे उभरते अंतःविषय क्षेत्रों में अनुसंधान और नवाचार को आगे बढ़ाने के हमारे मिशन को बढ़ाते हैं।
आईआईटी रुड़की के उप निदेशक प्रो. यू. पी. सिंह ने स्वास्थ्य निगरानी मंच का उद्घाटन किया और कहा, “यह एक उल्लेखनीय योगदान है जो वास्तव में हमारे संस्थान के कद को बढ़ाता है। इस तरह की पहल आईआईटी रुड़की को आगे बढ़ने और नवाचार और उत्कृष्टता में अग्रणी के रूप में अपनी स्थिति को मजबूत करने में मदद करती है।
“हम संस्थान के मिशन को आगे बढ़ाने में अपने पूर्व छात्रों और शुभचिंतकों की निरंतर भागीदारी की गहराई से सराहना करते हैं। इस तरह के योगदान एक बेहतर, स्वस्थ भविष्य को आकार देने में आईआईटीआर समुदाय की शक्ति को उजागर करते हैं, “प्रो. आर. डी. गर्ग, डीन ऑफ रिसोर्सेज एंड एलुमनी अफेयर्स, आईआईटीआर ने कहा।
इस तरह की पहल हमारी स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए एक मूल्यवान अतिरिक्त होगी, जो उन्नत नैदानिक और निगरानी क्षमताओं को सक्षम बनाएगी। यह नैदानिक अनुसंधान, कृत्रिम बुद्धिमत्ता अनुप्रयोग और प्रौद्योगिकी एकीकरण के लिए एक उत्कृष्ट संसाधन के रूप में भी काम करेगा “, प्रो. अंकिक कुमार गिरि, अध्यक्ष, अस्पताल सलाहकार समिति, आईआईटीआर ने सराहना की।
यह दान एक साझा दृष्टिकोण को रेखांकित करता है-जहां शिक्षाविदों, प्रौद्योगिकी और परोपकार का तालमेल दुनिया भर के समुदायों के लिए सुलभ स्वास्थ्य सेवा नवाचार में तेजी ला सकता है।
प्रशासन को गति, पारदर्शिता और जन-केंद्रित कार्यशैली अपनाने पर मुख्यमंत्री का जोर
“यह नौकरी नहीं, समाज सेवा का संकल्प है”— IAS अधिकारियों को सीएम धामी का संदेश
देहरादून। मुख्यमंत्री आवास में उत्तराखंड के भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों की एक अनौपचारिक बैठक आयोजित की गई। बैठक में राज्य के मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन सहित सभी वरिष्ठ एवं युवा IAS अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों का स्वागत करते हुए कहा कि यह किसी औपचारिक संबोधन का अवसर नहीं है, बल्कि उनकी प्रशासन के लिए संवेदनशील और आत्मीय भावनाओं को साझा करने का अवसर है।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड ने अपनी 25 वर्ष की यात्रा में अनेक चुनौतियों का सामना किया है और इन उपलब्धियों के पीछे राज्य के प्रशासनिक तंत्र की कड़ी मेहनत, निष्ठा और दूरदर्शिता का महत्वपूर्ण योगदान है। मुख्यमंत्री ने कहा कि—
“आप सभी ने कठिन परिस्थितियों में भी उत्कृष्ट नेतृत्व क्षमता और संवेदनशील प्रशासन का परिचय दिया है। इसके लिए मैं आप सभी को हृदय से साधुवाद देता हूँ।”
ये समय रुकने का नहीं, आगे बढ़ने का है—मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह समय अधिक गति, अधिक दृढ़ता और अधिक संकल्प के साथ काम करने का है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शब्द—
“ये दशक उत्तराखंड का दशक है”
का उल्लेख करते हुए कहा कि इस संकल्प को साकार करना उत्तराखंड के प्रशासन का दायित्व है।
उन्होंने कहा कि आने वाले पाँच वर्ष उत्तराखंड के लिए निर्णायक होंगे और हमें राज्य को ऐसे मोड़ पर लेकर जाना है, जहाँ हर नागरिक यह महसूस करे कि राज्य निर्णायक और सकारात्मक परिवर्तन से गुजर रहा है।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि—प्रशासन को तेजी और पारदर्शिता के साथ काम करना होगा। हर योजना और निर्णय लक्ष्य-आधारित और जन-केंद्रित होना चाहिए। व्यवस्था ऐसी बने कि फाइलों का निस्तारण समयबद्ध हो। योजनाओं का प्रभाव जमीनी स्तर पर तुरंत दिखाई दे |हर प्रक्रिया में जवाबदेही स्पष्ट हो।
ये केवल नौकरी नहीं, समाज सेवा का दायित्व है”—मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को उनकी मूल भावना का स्मरण कराते हुए कहा कि उन्होंने यह सेवा धन, पद या सुरक्षा के लिए नहीं चुनी होगी, बल्कि राष्ट्र एवं समाज के लिए कुछ करने की भावना से चुनी होगी।
उन्होंने कहा कि: “आपके निर्णय सीधे लाखों लोगों को प्रभावित करते हैं। इसलिए संवेदनशीलता, दूरदृष्टि और तथ्यपरक सोच अत्यंत आवश्यक है।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि कभी-कभी जनता की शिकायतें प्रशासन की छवि को आहत करती हैं। लालफीताशाही, शिकायत न सुने जाने और फाइलों में अनावश्यक देरी जैसी बातें व्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव डालती हैं। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को जनता के विश्वास को सर्वोपरि रखना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रशासनिक इतिहास में सूर्यप्रताप सिंह, टी. एन. शेषन, नृपेंद्र मिश्र जैसे अनेक अधिकारी ऐसे रहे हैं जिन्होंने अपनी ईमानदारी, संकल्प और जनसेवा के माध्यम से समाज में स्थायी छाप छोड़ी।
मुख्यमंत्री ने कहा—“पद की प्रतिष्ठा आपके कार्यकाल तक है, लेकिन आपके कार्यों का सम्मान आजीवन रहता है।” उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वे अपने पद को केवल नौकरी नहीं, बल्कि समाज सेवा का पवित्र अवसर समझें।
उदासीनता की कोई जगह नहीं”—मुख्यमंत्री का स्पष्ट संदेश
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज के ‘नए भारत’ में उदासीन कार्यशैली बर्दाश्त नहीं की जाती। उन्होंने निर्देश दिए कि—कोई भी कार्य अनावश्यक रूप से लंबित न रखा जाए।निर्णय तेजी और सूझबूझ से लिए जाएं। सभी योजनाओं का लाभ पात्र व्यक्तियों तक पारदर्शिता और समयबद्धता से पहुँचे। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को अपने क्षेत्रों में मासिक समीक्षा, निरंतर मॉनिटरिंग, और साइट निरीक्षण को सुनिश्चित करना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार “विकल्प रहित संकल्प” के मंत्र के साथ उत्तराखंड को देश के अग्रणी राज्यों में शामिल करने के लिए कार्यरत है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि IAS अधिकारी अपनी निष्ठा, मेहनत और संकल्प के साथ इस लक्ष्य को प्राप्त करने में अग्रणी भूमिका निभाते रहेंगे।
कार्यक्रम में मुख्य सचिव ने वर्तमान में चल रहे प्रशासनिक अधिकारी सम्मेलन (AOC) के अनुभव साझा किए।
कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी बोले – यह केवल वितरण नहीं सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम
देहरादून। कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने देहरादून के राष्ट्रीय दृष्टि दिव्यांगजन सशक्तिकरण संस्थान परिसर में एलिम्को के माध्यम से आयोजित दिव्यांगजनों को मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल (इलेक्ट्रिक) वितरण कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रतिभाग किया। कार्यक्रम में पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (पीएफसी) की सीएसआर निधि से 169 दिव्यांगजनों को निशुल्क इलेक्ट्रिकमोटराइज्ड ट्राईसाइकिलें वितरित की गईं।
कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने इस सराहनीय पहल के लिए पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन लिमिटेड के अधिकारियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि संस्था द्वारा अपने निगमित सामाजिक दायित्व के अंतर्गत लगभग 1 करोड़ रुपए की धनराशि इस उद्देश्य के लिए उपलब्ध कराई गई है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का आभार जताते हुए कहा कि विकलांग से दिव्यांग जैसे सम्मान जनक नाम प्रधानमंत्री मोदी ने दिया। उन्होंने कहा प्रधानमंत्री के नेतृत्व में दिव्यांगजनों एवं वरिष्ठ नागरिकों के उत्थान हेतु निरंतर नई योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिनका लक्ष्य उनके जीवन को अधिक सुलभ, सम्मानजनक और आत्मनिर्भर बनाना है।
मंत्री जोशी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास के मंत्र को साकार करते हुए केंद्र सरकार समाज के अंतिम पंक्ति के वर्गों के सामाजिक, सांस्कृतिक एवं आर्थिक सशक्तिकरण के लिए अनेक केन्द्रीकृत योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन कर रही है। उन्होंने कहा कि देशभर में दिव्यांगजनों के लिए एक केन्द्रीयकृत डेटा बेस बनाने हेतु विशिष्ट दिव्यांगता पहचान पत्र परियोजना लागू की गई है, जो अब देश के सभी 785 जिलों में संचालित हो रही है।
उन्होंने कहा कि देशभर में प्रधानमंत्री दिव्याशा केंद्रों की स्थापना की जा रही है। उत्तराखण्ड में देहरादून, ऋषिकेश और हल्द्वानी में ऐसे तीन केंद्र पहले ही स्थापित हो चुके हैं। इसके अतिरिक्त भारतीय सांकेतिक भाषा को बढ़ावा देने के लिए दिल्ली में एक समर्पित संस्थान स्थापित किया गया है। उन्होंने कहा कि आईएसएल डिक्शनरी में 10,000 शब्द शामिल थे और अब इसमें 2,500 नए शब्द जोड़कर इसे 10 भाषाओं में विकसित किया जा रहा है, जिससे बधिरजनों को विशेष लाभ मिल रहा है।
दिव्यांगजनों को ट्राईसाइकिल वितरित करते हुए मंत्री जोशी ने कहा कि यह केवल एक वितरण कार्यक्रम नहीं, बल्कि दिव्यांगजनों के आत्मसम्मान, आत्मनिर्भरता और सशक्तिकरण की दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम है। मोटराइज्ड ट्राईसाइकिलें उनकी गतिशीलता बढ़ाने के साथ-साथ जीवन में नए अवसरों के द्वार खोलेंगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए लगातार प्रयासरत है कि दिव्यांगजन शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका, परिवहन और सामाजिक सुरक्षा जैसी सभी सुविधाओं से बराबरी के साथ लाभान्वित हों।
कार्यक्रम में महाप्रबंधक पीएफसी दुर्गेश रंगेरा, जिला समाज कल्याण अधिकारी दीपांकर घिल्डियाल, वरिष्ठ प्रबंधक एलिम्को हरीश कुमार, एनआईवीएच आदर्श स्कूल के प्रधानाचार्य अमित शर्मा, अनिल सिंह सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
खिताब की दहलीज पर लक्ष्य सेन, अब तानाका या लिन से होगा रोमांचक फाइनल मुकाबला
नई दिल्ली। भारत के उभरते बैडमिंटन स्टार लक्ष्य सेन ने ऑस्ट्रेलियन ओपन सुपर 500 में दमदार प्रदर्शन करते हुए पुरुष एकल के फाइनल में कदम रख दिया है। शनिवार को हुए रोमांचक सेमीफाइनल में लक्ष्य ने दुनिया के छठे नंबर के खिलाड़ी और टूर्नामेंट के दूसरे वरीय चौ तिएन-चेन को कड़े मुकाबले में 17-21, 24-22, 21-16 से मात देकर अपनी प्रतिभा और मानसिक मजबूती का शानदार परिचय दिया। करीब 86 मिनट तक चले इस मुकाबले में भारतीय खिलाड़ी का जुझारूपन साफ झलकता रहा।
पहला गेम: शुरुआती दबदबा चेन के नाम
मुकाबले की शुरुआत लक्ष्य के लिए उम्मीद के अनुरूप नहीं रही। धीमी शुरुआत का फायदा उठाते हुए चेन ने आक्रामक खेल दिखाया और 11-6 की मजबूत बढ़त बना ली। लक्ष्य ने कुछ बेहतरीन शॉट लगाकर वापसी की कोशिश की, लेकिन unforced errors ने उन्हें नुकसान पहुंचाया और पहला गेम 17-21 से उनके हाथ से निकल गया।
दूसरा गेम: संघर्ष, रणनीति और शानदार वापसी
दूसरे गेम में लक्ष्य ने अपनी लय वापस पाई। दोनों खिलाड़ियों के बीच लंबी रैलियाँ और तेज़ तर्रार नेट गेम देखने को मिला। स्कोर कई बार बराबरी पर पहुंचा, लेकिन निर्णायक क्षणों में लक्ष्य के दमदार स्मैश और संयमित खेल ने उन्हें 24-22 से गेम जीतने में मदद की। यह जीत मैच को पूरी तरह नई दिशा में ले गई।
तीसरा गेम: गति, फिटनेस और जीत की चमक
निर्णायक गेम में लक्ष्य ने तेज़-तर्रार शुरुआत की और 6-1 की बढ़त हासिल कर चेन पर दबाव बना दिया। अनुभवी ताइपे खिलाड़ी तीसरे गेम में थके हुए नजर आए, जबकि लक्ष्य हर शॉट पर पूरा नियंत्रण रखते हुए खेलते दिखे। शानदार नेट ड्रॉप्स और सटीक स्मैश की बदौलत उन्होंने अंतिम गेम 21-16 और मैच अपने नाम किया।
फाइनल में महत्वपूर्ण चुनौती
अब खिताबी मुकाबले में लक्ष्य सेन का सामना या तो जापान के युशी तानाका से होगा या चीनी ताइपे के पाँचवीं वरीयता वाले लिन चुने-यी से। इस सीजन लक्ष्य अभी तक कोई खिताब नहीं जीत पाए हैं, ऐसे में यह फाइनल उनके लिए खिताबी सूखे को खत्म करने का बड़ा मौका है।
उत्तराखंड राज्य के राजनीतिक, प्रशासनिक एवं क्रमिक विकास की संपूर्ण और प्रामाणिक दस्तावेज़ी यात्रा को प्रस्तुत करती है यह पुस्तक
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास में वरिष्ठ पत्रकार एवं प्रतिष्ठित लेखक जय सिंह रावत द्वारा लिखित पुस्तक “उत्तराखंड राज्य का नवीन राजनीतिक इतिहास” का विमोचन किया। यह पुस्तक उत्तराखंड राज्य के राजनीतिक, प्रशासनिक एवं क्रमिक विकास की संपूर्ण और प्रामाणिक दस्तावेज़ी यात्रा को प्रस्तुत करती है।
कार्यक्रम के शुभारंभ में मुख्यमंत्री ने उपस्थित महानुभावों, लेखकों, पत्रकारों तथा जनप्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए लेखक जय सिंह रावत को इस महत्वपूर्ण कार्य के लिए हार्दिक बधाई दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि वरिष्ठ पत्रकार जय सिंह रावत ने राज्य के गठन के बाद की 25 वर्षों की राजनीतिक यात्रा को जिस सुसंगतता और प्रमाणिकता के साथ संकलित किया है, वह अत्यंत सराहनीय है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड के इतिहास, संस्कृति और लोक परंपराओं पर कई पुस्तकें उपलब्ध हैं, लेकिन राज्य स्थापना के बाद की ढाई दशक की घटनाओं को तथ्यों, दस्तावेजों और विश्लेषण के आधार पर संग्रहित करना एक चुनौतीपूर्ण कार्य है, जिसे लेखक ने उत्कृष्टता के साथ प्रस्तुत किया है। उन्होंने बताया कि पांच भागों में विभाजित यह पुस्तक शोधार्थियों, विद्यार्थियों और प्रशासनिक सेवाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए विशेष रूप से उपयोगी सिद्ध होगी।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि राज्य बनने के बाद उत्तराखंड ने एक लंबा राजनीतिक अस्थिरता का दौर भी देखा, जिसका प्रभाव विकास की गति पर पड़ा। रावत ने इस संपूर्ण कालखंड का प्रामाणिक प्रस्तुतिकरण करते हुए दुर्लभ दस्तावेज़ों और प्रेस कतरनों की मदद से एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक संकलन तैयार किया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि “इतिहास लिखना एक गंभीर दायित्व है, जिसमें तथ्य, दृष्टि और ईमानदारी का होना आवश्यक है। रावत ने पत्रकारिता की निष्ठा और निर्भीकता के साथ इस कालखंड को सहेजने का कार्य किया है।”
पुस्तक अध्ययन पर बल देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आज के इंटरनेट युग में जानकारी तत्काल उपलब्ध हो जाती है, लेकिन किताबों का महत्व कभी कम नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि पुस्तकें हमारे विचारों को गहराई देती हैं और ज्ञान को स्थायी रूप से संजोती हैं।
मुख्यमंत्री ने सभी से अपील की कि—
“ किसी भी कार्यक्रम में ‘बुके नहीं, बुक दीजिए’। इससे जहां पुस्तकों के प्रति रुचि बढ़ेगी, वहीं लेखकों को भी प्रेरणा मिलेगी।”*
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस तेज़ी से बदलते दौर में तकनीक का उपयोग आवश्यक है, लेकिन इसके साथ ही अपनी गढ़वाली, कुमाऊँनी, जौनसारी सहित सभी क्षेत्रीय भाषाओं और बोलियों को सुरक्षित रखना हम सभी का सामूहिक दायित्व है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विद्यार्थियों को अपनी मातृभाषा में भाषा कंटेंट, साहित्य, और लोकपरंपरा से जुड़े कार्यों को बढ़ावा देना चाहिए। सरकार भी इस दिशा में गंभीरता से प्रयास कर रही है तथा नई पीढ़ी के कंटेंट क्रिएटर के लिए इस दिशा में प्रतियोगिताएं आयोजित कर रही है | उन्होंने कहा कि राज्य स्तर पर स्थानीय भाषाओं में लेखन, गीत-संग्रह, शोध और डिजिटल कंटेंट तैयार करने वाले विद्यार्थियों को प्रोत्साहन और सम्मान दिए जाने की दिशा में सरकार सतत प्रयासरत है।
उन्होंने कहा कि “ भाषा, संस्कृति और रीति–रिवाज़ केवल अभिव्यक्ति के माध्यम नहीं, बल्कि हमारी पहचान और विरासत की नींव हैं। इसलिए आवश्यक है कि हम अपनी बोली-भाषाओं का संरक्षण करें और आने वाली पीढ़ियों में इनके प्रति गर्व की भावना विकसित करें।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज की नई पीढ़ी को यह बताना बहुत ज़रूरी है कि हमारे पूर्वजों ने कितनी कठिनाइयों और संघर्षों के बीच अपनी परंपराओं, सामाजिक मूल्यों और भाषा को बचाए रखा। उन्होंने कहा कि जब बच्चे अपनी जड़ों को समझते हैं, तो उनमें आत्मविश्वास और सांस्कृतिक चेतना मजबूत होती है।
पुस्तक पढ़ने की आदत पर बल देते हुए मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि “AI कितनी भी उन्नत क्यों न हो जाए, पुस्तकों को रिप्लेस करने का कोई अवसर नहीं है। पुस्तकें केवल ज्ञान का स्रोत नहीं, बल्कि सोचने, समझने और सीखने की एक गहरी प्रक्रिया हैं।”
मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से अपील की कि वे अपने घरों, विद्यालयों और समुदायों में स्थानीय भाषाओं के उपयोग को बढ़ावा दें तथा साहित्य और लोक संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का प्रयास करें। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार भाषा संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए अनेक नई पहलें प्रारंभ कर रही है और आगे भी इस दिशा में प्रभावी कदम उठाए जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार स्थानीय बोली-भाषाओं, साहित्य और पारंपरिक बोलियों के डिजिटलाइजेशन पर विशेष ध्यान दे रही है, ताकि गढ़वाली, कुमाऊँनी, जौनसारी सहित सभी क्षेत्रीय भाषाओं का सांस्कृतिक खजाना सुरक्षित रहे और नई पीढ़ी आसानी से इन तक पहुँच सके। उन्होंने कहा कि डिजिटल माध्यमों पर सामग्री उपलब्ध होने से हमारी मातृभाषाएँ न केवल संरक्षित होंगी, बल्कि आधुनिक समय के अनुरूप और अधिक सशक्त रूप में आगे बढ़ेंगी।
कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री एवं महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, विधायक बृज भूषण गैरोला, पत्रकार, साहित्यकार एवं अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे।
