आईआईटी की मदद से यूपीसीएल ने तैयार किया लाइव मॉनिटरिंग सिस्टम
देहरादून। उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPCL) ने बिजली प्रबंधन की पुरानी चुनौतियों को खत्म करने के लिए एक बड़ा तकनीकी नवाचार किया है। अब कंपनी को मांग के उतार-चढ़ाव के कारण हर वर्ष लगने वाले भारी-भरकम जुर्माने से राहत मिलने की उम्मीद है। यूपीसीएल ने आईआईटी विशेषज्ञों के सहयोग से ऐसा स्मार्ट सिस्टम विकसित किया है, जो वास्तविक समय में बिजली की खपत व उपलब्धता की सटीक निगरानी कर सकेगा।
लंबे समय से यूपीसीएल के लिए राज्य में आने-जाने वाली बिजली का प्रबंधन करना एक जटिल प्रक्रिया रहा है। रोजाना की मांग का अनुमान, बाजार से खरीद की योजना, नेशनल ग्रिड से मिलने वाली ऊर्जा पर निगरानी—इन सभी चरणों को परंपरागत तरीके से संभालना न केवल कठिन था, बल्कि किसी भी तरह की कमी या अधिक खपत पर भारी पेनाल्टी का खतरा भी बना रहता था। इसका सीधा असर उपभोक्ताओं तक पहुंचता था।
इसी समस्या को समाप्त करने के लिए ऊर्जा निगम ने आईआईटी के तकनीकी विशेषज्ञों के साथ मिलकर ऑटोमैटिक डिमांड रिस्पांस सिस्टम (ADRS) तैयार किया है। यह अत्याधुनिक सॉफ्टवेयर उन सभी पॉइंट्स की लाइव रीडिंग उपलब्ध कराता है, जहां से बिजली राज्य में प्रवेश करती है या बाहर जाती है। सिस्टम स्क्रीन पर ग्राफिकल रूप में रियल-टाइम डेटा दिखाता है, जिससे बिजली की उपलब्धता, मांग और प्रवाह की सटीक स्थिति तुरंत स्पष्ट हो जाती है।
यूपीसीएल के परियोजना निदेशक अजय अग्रवाल के अनुसार, इस सॉफ़्टवेयर की मदद से यदि अचानक किसी समय बिजली की मांग बढ़ जाती है तो मुख्यालय से ही तुरंत नियंत्रण किया जा सकता है। जरूरत पड़ने पर कुछ इलाकों में सप्लाई को सीमित भी किया जा सकता है, जिससे ग्रिड संतुलन बना रहे और अनावश्यक जुर्माना न लगे।
उन्होंने बताया कि इस तरह की उन्नत लाइव मॉनिटरिंग तकनीक अपनाने वाला यूपीसीएल देश का पहला विद्युत निगम बन गया है, जो स्मार्ट एनर्जी मैनेजमेंट की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
सोशल मीडिया मंथन कार्यक्रम में बोले धामी—फेक नैरेटिव की काट बनें जिम्मेदार क्रिएटर्स
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर्स और इन्फ्लुएंसर्स से अपने कंटेंट में उत्तराखंड के पर्यटन स्थलों, स्थानीय उत्पादों, सांस्कृतिक धरोहरों और सामाजिक उपलब्धियों को प्रमुखता से उजागर करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर, फेक न्यूज या नकारात्मक नैरेटिव की भी प्रभावी काट कर सकते हैं।
“सोशल मीडिया मंथन” कार्यक्रम को संबोधित करते हुए, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि आज सोशल मीडिया संचार और सूचना के आदान-प्रदान का सबसे तेज और प्रभावी माध्यम बन चुका है। दुनिया के किसी भी कोने में बैठा व्यक्ति अपने विचार और अपना दृष्टिकोण को कुछ ही क्षणों में पूरे विश्व तक पहुँचा सकता है। सोशल मीडिया ने आम नागरिक की आवाज को मंच प्रदान किया है। यही कारण है कि आज विश्व की बड़ी से बड़ी घटना से लेकर एक गांव की छोटी सी समस्या तक कुछ ही सेकंड में लाखों-करोड़ों लोगों तक पहुँच जाती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2014 में सत्ता संभालने के साथ ही सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को शासन व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया को संवाद, पारदर्शिता और नागरिकों की सक्रिय भागीदारी का ऐसा सशक्त माध्यम बनाया है, जिसने शासन व्यवस्था को न केवल जनकेंद्रित बनाया, बल्कि प्रत्येक नागरिक को नीति-निर्माण और निर्णय प्रक्रिया से भी प्रत्यक्ष रूप से जोड़ा है। उन्होंने कहा कि मोदी ने X, फेसबुक, ‘मन की बात’, माईगॉव और पीएमओ के डिजिटल इकोसिस्टम जैसे माध्यमों से भारत में ‘डिजिटल गवर्नेंस’ की एक नई मिसाल स्थापित की है। वो स्वयं भी विश्व के सबसे अधिक फॉलो किए जाने वाले राजनेताओं में शीर्ष स्थान पर हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री की प्रेरणा से प्रदेश सरकार भी “डिजिटल उत्तराखंड” निर्माण के लिए संकल्पबद्ध है। मुख्यमंत्री कार्यालय से लेकर सभी विभाग तक जनता से सीधे संवाद कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पहले शिकायत दर्ज करने के लिए कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते थे, परन्तु आज एक ट्वीट या फेसबुक संदेश से तत्काल समाधान मिल जाता है। वो स्वयं प्रतिदिन राज्य के विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर आने वाले सुझावों, शिकायतों और जनसमस्याओं की निगरानी करते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कई बार सिर्फ एक पोस्ट या लाइव के कारण किसी बच्चे का इलाज संभव हुआ है, किसी बुजुर्ग की पेंशन बहाल हुई है, किसी सड़क की मरम्मत हुई या किसी आपदा या विपत्ति में फंसे हुए लोगों को सुरक्षित बचाने में सहायता मिली है। वहीं, दूसरी तरफ सोशल मीडिया का तेजी से दुरुपयोग भी बढ़ रहा है। आज फेक न्यूज़, अफवाहों और नकारात्मक नैरेटिव्स के माध्यम से समाज में भ्रम फैलाने की प्रवृत्ति एक चुनौती बनकर उभरी है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग सोशल मीडिया की शक्ति का उपयोग वैचारिक विभाजन पैदा करने, सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने और सरकार की जनहितकारी योजनाओं को लेकर गलत धारणाएँ फैलाने के लिए भी कर रहे हैं। ऐसे समय में जिम्मेदार सोशल मीडिया वॉरियर की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हाल के दिनों में कुछ धर्म विरोधी और राष्ट्र-विरोधी मानसिकता वाले लोग भ्रामक खबरों, फेक नैरेटिव और झूठे प्रचार के माध्यम से हमारी धार्मिक आस्था और समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं को बदनाम करने का प्रयास कर रहे हैं। ऐसे समय में किसी भी भ्रामक, तथ्यहीन या समाज-विरोधी सामग्री का न केवल तत्काल फैक्ट-चेक किए जाने की जरूरत है, बल्कि उसकी तथ्यात्मक जानकारी भी जन-जन तक पहुँचाए जाने की आवश्यकता है।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि कई बार कुछ नेगेटिव कंटेंट क्रिएटर्स सरकार, समाज, धर्म और प्रदेश के गौरव से जुड़ी खबरों को तोड़ मरोड़कर भ्रामक तथ्यों के साथ प्रस्तुत कर अधिक व्यूज और लाइक बटोरना चाहते हैं। लेकिन सभी को ये समझने की आवश्यकता है कि प्रसिद्धि और फॉलोअर्स की दौड़ के बीच एक बारीक रेखा हमारी नैतिक जिम्मेदारी और सामाजिक कर्तव्य की भी होती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने जब से देवभूमि उत्तराखंड के मूल स्वरूप की रक्षा के लिए विभिन्न कानून के माध्यम से अराजक तत्वों खिलाफ कठोर कदम उठाए हैं। तभी से कुछ राष्ट्र विरोधी तत्व और अर्बन नक्सल गैंग के लोग सोशल मीडिया पर अलग-अलग नामों से फर्जी अकाउंट बनाकर फेक नरेटिव बनाने का प्रयास कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कंटेंट क्रिएटर्स, इन्फ्लुएंसर्स से अपील करते हुए कहा कि सभी लोग अपने कंटेंट में उत्तराखंड के पर्यटन स्थलों, स्थानीय उत्पादों, सांस्कृतिक धरोहरों और सामाजिक उपलब्धियों को प्रमुखता से उजागर करें। इससे “ब्रांड उत्तराखंड” की पहचान और मजबूत होगी। इस मौके पर महानिदेशक सूचना बंशीधर तिवारी सहित अन्य अधिकारी उपस्थित हुए।
सोमेश्वर विधानसभा क्षेत्र के मजखाली मंडल के 5 गांवों में जन मिलन कार्यक्रम सम्पन्न
सोमेश्वर/अल्मोड़ा। उत्तराखंड कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने सोमेश्वर विधानसभा क्षेत्र के मजखाली मंडल के नैनी, डिगोटी, जाना,मल्ली रियूणी और गिनाई गांवों में जन मिलन कार्यक्रम आयोजित कर स्थानीय समस्याओं को सुना और विकास के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। उन्होंने पीड़ितों की शिकायतों के आधार पर पेयजल योजनाओं, सड़क निर्माण, सामुदायिक भवनों और स्कूलों के निर्माण व सुधार कार्यों के लिए विधायक निधि से धन राशि जारी करने की घोषणा की।
इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि प्रदेश सरकार विकास कार्यों के लिए प्रतिबद्ध है और जल्द ही सभी लंबित परियोजनाओं को पूरा कर दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी विकास की राजनीति करती है और बिहार विधानसभा चुनाव का परिणाम भी इसी का नतीजा है। कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि 2027 में उत्तराखंड में भी कुछ ऐसे ही नतीजे दोहराए जाने वाले हैं।
प्रमुख घोषणाएं और निर्देश
नैनी गांव: भंडार कक्ष निर्माण हेतु 3 लाख रुपये विधायक निधि से जारी किए जाएंगे।
डिगोटी गांव: प्राइमरी पाठशाला निर्माण के लिए 2 लाख, शिल्पकार बस्ती में सामुदायिक कक्ष के लिए 2.5 लाख, मजेटी में कालिका मंदिर सौंदर्यीकरण के लिए 2.5 लाख रुपये की घोषणा की गई। मजेटी में 10 सोलर लाइट लगाने की घोषणा भी की गई। सड़क निर्माण हेतु 1 लाख रुपये की घोषणा।
जाना गांव: पेयजल योजना के सुधार हेतु विधायक निधि से 2.5 लाख रुपये जारी होंगे।
गिनाई गांव: एएनएम सेवा सप्ताह में दो दिन मिलेगी। बरसात में स्थानांतरित प्राइमरी स्कूल की मरम्मत कर पुनः उसी भवन में शिफ्टिंग होगी। मंदिर सौंदर्यीकरण के लिए 3 लाख रुपये की घोषणा। 20 सोलर लाइट लगाने की घोषणा भी की गई।
मल्ली रियूणी: प्राचीन शिव मंदिर सौंदर्यीकरण के लिए 2.50 लाख रुपए, गांव में दो अलग-अलग सड़कों के लिए दो-दो लाख रुपए, 10 सोलर लाइट देने और रोजगार के लिए दो सिलाई मशीन देने की घोषणा
कार्यक्रम में मंडल अध्यक्ष दीपक बोरा, मंडल महामंत्री राज अधिकारी, दीपक रावत, जिला पंचायत सदस्य कन्नू शाह, विधायक प्रतिनिधि भुवन जोशी, ग्राम प्रधान हेमा बिष्ट, क्षेत्र पंचायत सदस्य सुशीला अधिकारी, ग्राम प्रधान हेमा देवी, हर्ष सिंह बिष्ट, पूरन सिंह बिष्ट, विनोद बिष्ट, महेंद्र बिष्ट, प्रदीप अधिकारी, दीवान राम, सौरभ अधिकारी, दिनेश वर्मा, राजू रावत, मंजू वर्मा, बूथ अध्यक्ष हरीश सिंह, और नरेंद्र नेगी सहित कई अन्य गणमान्य सदस्य उपस्थित रहे।
सरदार पटेल की 150वीं जयंती पर “यूनिटी मार्च” का आयोजन
बाघ के हमले में मारी गई रानी देवी के परिजनों से भी की मुलाकात
पौड़ी (चौबट्टाखाल)। स्वतंत्र भारत के प्रथम गृह मंत्री लौहपुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल का राष्ट्र के एकीकरण में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। प्रदेश सरकार मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में उनके आदर्शों पर चलकर प्रदेश में सभी वर्गों के सर्वांगीण विकास एवं उत्थान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
उक्त बात प्रदेश पर्यटन, लोक निर्माण, सिंचाई, पंचायतीराज, ग्रामीण निर्माण, जलागम, धर्मस्व एवं संस्कृति मंत्री एवं क्षेत्रीय विधायक सतपाल महाराज ने बुधवार को अपने विधानसभा क्षेत्र तहसील चौबट्टाखाल में लौहपुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती के पर आयोजित “यूनिटी मार्च” के समापन अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि अपने संबोधन में कही। उन्होंने कहा कि पूरे देश में जगह-जगह लौहपुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती पर भव्य आयोजन किए जा रहे हैं। उत्तराखण्ड में भी जगह-जगह कार्यक्रमों की श्रृंखला आयोजित की जा रही है। इसी कड़ी में भारतीय जनता पार्टी चौबट्टाखाल द्वारा “यूनिटी मार्च का शुभारंभ नौगांवखाल से होकर समापन तहसील चौबट्टाखाल में किया गया है।

महाराज ने कहा कि सरदार पटेल ने भारत की एकता और अखंडता के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। स्वतंत्रता के पश्चात उन्होंने 562 से अधिक रियासतों को एकत्रित करके भारत को मजबूत और एकजुट राष्ट्र बनाने में मदद की। उनकी जयंती के अवसर जो यूनिटी मार्च निकाला गया वह भारत की एकता और अखंडता के प्रति हमारी प्रतिबद्धता का प्रतीक है। यह यूनिटी मार्च हमें सरदार पटेल के आदर्शों और मूल्यों को याद दिलाता रहेगा।
कार्यक्रम में भाजपा मंडल अध्यक्ष राकेश नैथानी, जिला महामंत्री महिपाल नेगी, पूर्व ब्लाक प्रमुख नीरज पांथरी, सर्वेंद्र, शैलेश दर्शन, नरेंद्र डंडरियाल, वेद प्रकाश वर्मा, प्रभु शरण बुडाकोटी, गणेश रावत, देवेंद्र भट्ट, सुरेंद्र बिष्ट, सीमा सजवान सहित अनेक भाजपा कार्यकर्ता एवं क्षेत्रीय जनता मौजूद थी।
कार्यक्रम के पश्चात कैबिनेट मंत्री एवं चौबट्टाखाल विधायक सतपाल महाराज ने बाघ के हमले में मारी गई विकासखंड पोखडा, बगड़ीगाड निवासी रानी देवी पत्नी रमेशचंद्र के परिजनों से मुलाकात कर मृतक के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करते हुए पीड़ित परिवार की हर संभव मदद का आश्वासन दिया।
मखाना एक बेहद फायदेमंद ड्राई फ्रुट है। इसका सेवन करने के कई स्वास्थ्य लाभ हैं। मखाना अपनी उच्च पोषण क्षमता के कारण आजकल स्वास्थ्य प्रेमियों की पहली पसंद बन चुका है। प्रोटीन, कैल्शियम, मैग्नीशियम और फाइबर से भरपूर होने के कारण इसे सुपरफूड की श्रेणी में रखा जाता है। लेकिन किसी भी चीज़ की तरह, इसका अत्यधिक सेवन या बिना समझे इसका उपयोग कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म दे सकता है। इसलिए जरूरी है कि इसके लाभों के साथ-साथ इसके संभावित नुकसान भी समझे जाएं। इस लेख में हम जानेंगे कि मखाना किन परिस्थितियों में आपके शरीर को नुकसान पहुंचा सकता है और इसे कितना खाया जाना सुरक्षित है।
1. पाचन संबंधी परेशानी और कब्ज का खतरा
मखाने में फाइबर की मात्रा अधिक होती है, जो सामान्य मात्रा में शरीर के लिए लाभकारी है। लेकिन इसकी अधिक मात्रा का सेवन और पानी कम पीना पाचन तंत्र को धीमा कर देता है। ज्यादा मखाना खाने पर यह पेट में सूखकर सख्त रूप ले सकता है, जिससे गैस, पेट फूलना और कब्ज जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं। इसे खाने के बाद पर्याप्त पानी पीना जरूरी है।
2. शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन)
फाइबर युक्त भोजन को पचाने में शरीर को अतिरिक्त पानी की जरूरत होती है। अगर आप एक बार में अधिक मखाना खा लेते हैं लेकिन पानी का सेवन नहीं बढ़ाते, तो डिहाइड्रेशन की स्थिति बन सकती है। इससे न सिर्फ पाचन तंत्र प्रभावित होता है, बल्कि शरीर सुस्त महसूस करने लगता है।
3. किडनी स्टोन का बढ़ा जोखिम (ऑक्सालेट मौजूद)
कुछ शोध बताते हैं कि मखाने में ऑक्सालेट पाया जाता है। वही तत्व जो किडनी स्टोन बनने में योगदान देता है। जिन लोगों को पहले से पथरी, गाउट या किडनी से जुड़ी समस्या है, उन्हें बिना डॉक्टर की सलाह के मखाने का अधिक सेवन नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह स्टोन बनने के खतरे को बढ़ा सकता है।
4. एक दिन में कितने मखाने सुरक्षित हैं?
विशेषज्ञों के अनुसार एक स्वस्थ व्यक्ति के लिए प्रतिदिन लगभग 30 ग्राम (एक मुट्ठी) मखाना पर्याप्त है। यह मात्रा शरीर को जरूरी पोषक तत्व देती है और किसी प्रकार की पाचन समस्या भी नहीं पैदा करती।
कुछ लोग अपनी शारीरिक गतिविधि के आधार पर 30 से 50 ग्राम तक का सेवन भी कर सकते हैं, लेकिन इससे अधिक मात्रा में मखाना खाने पर कब्ज, गैस और डिहाइड्रेशन की समस्या होने की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए मात्रा तय करते समय अपने पानी के सेवन और जीवनशैली को भी ध्यान में रखें।
(साभार)
भारत-चीन सीमा के 51 और भारत-नेपाल सीमा के 40 गांवों में आधुनिक सुविधाओं के विकास को मिली गति
देहरादून। ग्राम्य विकास मंत्री गणेश जोशी ने आयुक्त, ग्राम्य विकास से वाइब्रेंट विलेज योजना (वीवीपी) की प्रगति रिपोर्ट विस्तृत रूप से प्राप्त की। मंत्री जोशी ने योजना के प्रभावी क्रियान्वयन, व्यापक प्रचार-प्रसार और समयबद्ध कार्यवाही के निर्देश देते हुए सीमांत गांवों के समग्र विकास पर जोर दिया।
ग्राम्य विकास मंत्री गणेश जोशी ने बताया कि सीमांत क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के सुदृढ़ीकरण, आजीविका सृजन और आबादी को रोकने के उद्देश्य से भारत सरकार द्वारा संचालित वाइब्रेंट विलेज योजना (वीवीपी) के तहत उत्तराखण्ड राज्य में भारत-चीन एवं भारत-नेपाल सीमा से सटे कुल 91 गांवों का चयन किया गया है। योजना का उद्देश्य इन दुर्गम सीमांत गांवों को मॉडल विलेज के रूप में विकसित कर वहां के नागरिकों को बेहतर जीवन-स्तर, सुविधा और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है।
वीवीपी-1 : भारत-चीन सीमा क्षेत्र में 51 गांव चयनित
भारत-चीन सीमा से लगे जनपदों में –उत्तरकाशी (भटवाड़ी ब्लॉक) – 10 गांव, चमोली (जोशीमठ ब्लॉक) – 14 गांव, पिथौरागढ़ (मुनस्यारी – 08, धारचूला – 17, कनालीछीना – 02 गांव) इस प्रकार कुल 51 गांवों को वीवीपी-1 के तहत चयनित किया गया है। इन गांवों में आर्थिक गतिविधियों को मजबूत करने, संपर्क मार्गों के निर्माण, स्थानीय संस्कृति एवं पर्यटन के प्रसार तथा आधुनिक सुविधाओं के विकास के लिए राज्य सरकार द्वारा (₹520.13 करोड़) गृह मंत्रालय को भेजी गई थीं, जिनमें से ₹110 करोड़ से अधिक की धनराशि राज्य को मिल गई है।
वीवीपी-2 : भारत-नेपाल सीमा के 40 गांव शामिल
वीवीपी-2 के अंतर्गत—चम्पावत – 11 गांव, पिथौरागढ़ – 24 गांव, ऊधम सिंह नगर – 06 गांव। इन 40 गांवों का चयन किया गया है। इन गांवों का डेटा संकलन और सत्यापन कार्य प्रगति पर है। वीवीपी के रोड कंपोनेंट के अंतर्गत पिथौरागढ़ जनपद में पीएमजीएसवाई की 5 सड़कों के निर्माण हेतु ₹119.44 करोड़ स्वीकृत किए गए हैं। इससे सीमा क्षेत्रों में आवाजाही, व्यापार और रणनीतिक दृष्टि से सड़क संपर्क और अधिक सुदृढ़ होगा।
ग्राम्य विकास मंत्री गणेश जोशी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का सीमांत गांवों के प्रति विशेष लगाव प्रेरणादायक है। उन्होंने कहा कि “माणा को देश का अंतिम नहीं, प्रथम गांव बनाने का संदेश प्रधानमंत्री मोदी की उत्तराखंड के प्रति संवेदनशीलता दर्शाता है। मंत्री जोशी ने कहा कि वाइब्रेंट विलेज योजना राज्य के दूरस्थ गांवों में आधुनिक सुविधाएं, स्थायी आजीविका, कृषि-बागवानी, सुरक्षित वातावरण और पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देगी। योजना के पूर्ण क्रियान्वयन से पलायन पर नियंत्रण और राष्ट्रीय सुरक्षा को सुदृढ़ करने में भी मदद मिलेगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह योजना उत्तराखंड के सीमांत गांवों को आत्मनिर्भर, सुरक्षित और उन्नत मॉडल विलेज में बदलने की दिशा में मील का पत्थर सिद्ध होगी।
मुख्यमंत्री धामी ने उच्च स्तरीय बैठक में अधिकारियों को दिए निर्देश
शीतकालीन यात्रा व्यवस्थाओं के विस्तार पर भी जोर
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को मुख्यमंत्री आवास में आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए कि राज्य के दोनों मंडलों में एक-एक स्प्रिचुअल इकोनॉमिक ज़ोन की स्थापना के लिए विस्तृत कार्ययोजना (रोडमैप) शीघ्र तैयार की जाए। सीएम ने कहा कि यह पहल उत्तराखंड को वैश्विक आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।
उन्होंने निर्देश दिए कि परियोजना के अंतर्गत धार्मिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक धरोहरों के संरक्षण के साथ-साथ तीर्थ स्थलों एवं उनके आसपास के क्षेत्रों का समग्र विकास किया जाए। इससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और राज्य की अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी। सीएम ने स्पष्ट किया कि इस वित्तीय वर्ष में ही इस योजना पर धरातल पर कार्य प्रारंभ किया जाए। योजना के तहत योग, ध्यान, आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा, स्थानीय हस्तशिल्प, पर्वतीय उत्पादों और सांस्कृतिक आयोजनों को भी बढ़ावा देने पर जोर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह पहल उत्तराखंड की पहचान ‘आध्यात्मिक राजधानी’ के रूप में और प्रबल करेगी।

मुख्यमंत्री ने बैठक में शीतकालीन यात्रा व्यवस्थाओं को और अधिक सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि शीतकालीन स्थलों पर बुनियादी सुविधाओं का विस्तार करते हुए यात्रा, आवास, परिवहन और सुरक्षा व्यवस्थाओं को मजबूत किया जाए, ताकि अधिक से अधिक पर्यटक राज्य की प्राकृतिक और सांस्कृतिक विविधता का अनुभव कर सकें। उन्होंने निर्देश दिए कि शीतकालीन स्थलों के प्रचार-प्रसार के लिए पारंपरिक और आधुनिक माध्यमों का इस्तेमाल करते हुए पर्यटन संभावनाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाया जाए।
सीएम ने कहा कि पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ ही जनसामान्य के जीवन स्तर में सुधार लाना और राज्य की प्राकृतिक व आध्यात्मिक धरोहरों को संरक्षित रखते हुए सतत विकास की दिशा में आगे बढ़ना सरकार का लक्ष्य है। उन्होंने अधिकारियों को ठोस कार्यनीति तैयार करने और समयबद्ध मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
बैठक में वर्चुअल माध्यम से पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज जुड़े। बैठक में बद्री-केदार मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी, मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन, प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम, सचिव शैलेश बगोली, धीराज सिंह गर्ब्याल, स्थानिक आयुक्त अजय मिश्रा, अपर सचिव अभिषेक रोहिला और संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।
अजय देवगन और रकुल प्रीत सिंह स्टारर ‘दे दे प्यार दे 2’ ने रिलीज के पांच दिन पूरे कर लिए हैं, लेकिन फिल्म का बॉक्स ऑफिस सफर उम्मीद के मुताबिक तेज नहीं चल पा रहा है। मिश्रित समीक्षाओं के बीच फिल्म की कमाई लगातार गिरावट के साथ आगे बढ़ रही है। मंगलवार को भी कलेक्शन बहुत खास नहीं रहा।
मंगलवार का धीमा प्रदर्शन
फिल्म ‘दे दे प्यार दे 2’ ने पांचवें दिन यानी मंगलवार को 5 करोड़ रुपये की कमाई की है। इससे पहले सोमवार को फिल्म ने 4.25 करोड़ रुपये कमाए थे। पांच दिन में फिल्म की कुल कमाई 44 करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है, जोकि फिल्म की स्केल और स्टार पावर के हिसाब से कम मानी जा रही है।
50 करोड़ का आंकड़ा अभी दूर
क्रिटिक्स ने फिल्म को मिश्रित रेटिंग दी थी, जबकि दर्शकों ने इसकी हल्की-फुल्की कहानी और कॉमिक स्टाइल को पसंद किया है। इसके बावजूद बॉक्स ऑफिस पर फिल्म की रफ्तार कमजोर बनी हुई है। रिलीज के पांच दिन बाद भी फिल्म अब तक 50 करोड़ रुपये का आंकड़ा नहीं छू पाई है। ट्रेड विशेषज्ञों का मानना है कि अगर फिल्म को स्थिर दर्शक नहीं मिले, तो यह माइलस्टोन हासिल करने में और समय लग सकता है।
बॉक्स ऑफिस पर कोई बड़ी चुनौती नहीं—फिर भी धीमी चाल
फिल्म के सामने फिलहाल कोई भी बड़ी हिंदी रिलीज नहीं है। पिछली फिल्मों — ‘हक’, ‘द गर्लफ्रेंड’ और साथ में रिलीज हुई ‘कांथा’ — की कमाई तेजी से कम हो चुकी है, ऐसे में इस समय केवल ‘दे दे प्यार दे 2’ ही करोड़ों में कमाई कर रही है। हालांकि, इस शुक्रवार को फरहान अख्तर की ‘120 बहादुर’ रिलीज होने जा रही है, जिससे फिल्म के कलेक्शन पर और दबाव बढ़ सकता है।
2019 की फिल्म का सीक्वल
‘दे दे प्यार दे 2’, 2019 में रिलीज हुई हिट फिल्म ‘दे दे प्यार दे’ का सीक्वल है। नए भाग की कहानी वहीं से आगे बढ़ती है, जहां पहली फिल्म खत्म हुई थी। पहली फिल्म में अजय देवगन, रकुल प्रीत और तब्बू की तिकड़ी दर्शकों को पसंद आई थी। वहीं, सीक्वल में आर. माधवन और मीजान जाफरी की एंट्री ने कहानी में नए ट्विस्ट जोड़े हैं।
(साभार)
अदालत ने माना—अपराध से अर्जित है 415 करोड़ की राशि, जांच में सहयोग जरूरी
नई दिल्ली। दिल्ली की एक विशेष अदालत ने अल-फलाह समूह के चेयरमैन और विश्वविद्यालय के संस्थापक जावद अहमद सिद्दीकी को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में 13 दिन की ईडी हिरासत में भेजने का निर्णय लिया है। मध्यरात्रि के बाद जज के चैंबर में हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने माना कि आरोप अत्यंत गंभीर हैं और जांच को आगे बढ़ाने के लिए अभियुक्त की कस्टडी आवश्यक है।
रात 11 बजे जज के आवास पर हुई कार्रवाई
साकेत अदालत की अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश शीतल चौधरी प्रधान के घर पर देर रात पेश किए गए जावद सिद्दीकी को अदालत ने विस्तृत सुनवाई के बाद ईडी को सौंप दिया। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि सिद्दीकी पर फर्जी मान्यता दिखाकर विश्वविद्यालय चलाने, अवैध धन हस्तांतरण और बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी के गंभीर आरोप हैं, जिनकी गहराई से जांच जरूरी है।
ईडी ने पीएमएलए धारा 19 के तहत की गिरफ्तारी
प्रवर्तन निदेशालय ने सिद्दीकी को 18 नवंबर की रात मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत गिरफ्तार किया था। एजेंसी ने अदालत को बताया कि जांच शुरुआती दौर में है और आरोपियों से पूछताछ कर उन लोगों की पहचान करनी है, जो धन के प्रवाह, फर्जी कागजात और वित्तीय अनियमितताओं में शामिल रहे।
ईडी का कहना है कि यदि हिरासत न मिली तो सबूत नष्ट होने और गवाहों पर दबाव बनाने की आशंका बढ़ सकती है।
415 करोड़ रुपये की संदिग्ध कमाई पर नजर
एजेंसी द्वारा कोर्ट में पेश वित्तीय आकलन के अनुसार, वर्ष 2018-19 से 2024-25 के बीच अल-फलाह संस्थान ने फीस और अन्य शैक्षणिक मदों से लगभग 415.10 करोड़ रुपये की आय प्राप्त की। ईडी का आरोप है कि यह पूरी कमाई गलत तरीके से प्राप्त की गई थी, क्योंकि इस दौरान विश्वविद्यालय की मान्यता और वैधानिक स्थिति को सार्वजनिक रूप से भ्रामक तरीके से प्रस्तुत किया गया था।
कोर्ट ने माना—धनराशि अपराध से अर्जित
अदालत ने आदेश में स्पष्ट किया कि उपलब्ध साक्ष्यों से यह संकेत मिलता है कि धन, धोखाधड़ी व जालसाजी जैसी गतिविधियों का प्रत्यक्ष परिणाम है और यह पीएमएलए के तहत दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है। इसी आधार पर ईडी की मांग स्वीकार करते हुए सिद्दीकी को 13 दिन की हिरासत में भेजा गया।
लाल किला कार बम धमाका मामले से जुड़े तार
जांच एजेंसियों के अनुसार, फरीदाबाद स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी लंबे समय से संदिग्ध वित्तीय और नेटवर्क गतिविधियों के कारण निगरानी में थी। लाल किला कार बम धमाके के मुख्य आरोपियों में से एक, डॉक्टर उमर नबी, इसी विश्वविद्यालय के अस्पताल से जुड़ा रहा है। इसके अलावा सफेदपोश आतंकी नेटवर्क में पकड़े गए कई व्यक्तियों के भी संस्थान से संबंध पाए गए।
दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा की दो FIR के आधार पर शुरू हुई मनी लॉन्ड्रिंग जांच में विश्वविद्यालय के करीब 25 ठिकानों पर छापेमारी की गई, जिसके बाद सिद्दीकी की गिरफ्तारी की गई।
नई दिल्ली। दोहा में खेले गए एशिया कप राइजिंग स्टार्स 2025 के महत्वपूर्ण मुकाबले में भारत ए टीम ने दमदार प्रदर्शन करते हुए ओमान ए को छह विकेट से हराया और सेमीफाइनल में जगह पक्की कर ली। इस जीत के साथ भारत ए ग्रुप बी से अंतिम-चार में पहुंचने वाली दूसरी टीम बन गई है। इससे पहले पाकिस्तान शाहीन्स ने नॉक आउट में प्रवेश किया था।
भारत ए की जीत और ग्रुप स्थिति
ओमान ए द्वारा दिए गए 136 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए भारतीय बल्लेबाजों ने पूरी मजबूती दिखाई और 17.5 ओवर में ही जीत दर्ज कर ली। कप्तान जितेश शर्मा की अगुआई में टीम ने ग्रुप स्टेज में तीन में से दो मैच जीतकर चार अंक हासिल किए और शानदार नेट रन रेट के सहारे दूसरे स्थान पर रही। वहीं पाकिस्तान टीम तीनों मुकाबले जीतकर ग्रुप बी में शीर्ष पर रही।
अब सेमीफाइनल में भारत ए का सामना ग्रुप ए की शीर्ष टीम से होगा, जबकि पाकिस्तान ग्रुप ए की दूसरे स्थान वाली टीम से भिड़ेगा। दोनों सेमीफाइनल मुकाबले 21 नवंबर को दोहा में ही खेले जाएंगे।
हर्ष दुबे की शानदार पारी बनी भारत की रीढ़
लक्ष्य का पीछा करते हुए भारत की शुरुआत कमजोर रही, लेकिन चौथे नंबर पर आए हर्ष दुबे ने मोर्चा संभालते हुए मैच को भारत की ओर मोड़ दिया। उन्होंने 41 गेंदों में अर्धशतक पूरा किया और अंत तक नाबाद रहते हुए 53 रन की प्रभावशाली पारी खेली।
उनके साथ नमन धीर (30) और नेहल वढेरा (23) ने भी अहम योगदान दिया। ओमान की ओर से ओडेड्रा, शाफिक, समय और आर्यन ने एक-एक विकेट झटके।
ओमान की पारी—वसीम अली का संघर्ष बेकार
ओमान ने टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी शुरू की और शुरुआती साझेदारी अच्छी रही। कप्तान हम्माद मिर्जा (32) और करन सोनावले ने टीम को ठीक शुरुआत दी, लेकिन बीच के ओवरों में विकेट लगातार गिरते रहे।
वसीम अली ने एक छोर संभालते हुए नाबाद 54 रन की पारी खेली और टीम को 135 तक पहुंचाया। ओमान के तीन बल्लेबाज दोहरी संख्या तक नहीं पहुंच सके, जबकि दो खिलाड़ी बिना खाता खोले पवेलियन लौट गए।
भारत के गेंदबाजों में गुरजपनीत सिंह और सुयश शर्मा ने दो-दो विकेट चटकाए। विशक, हर्ष और नमन ने 1-1 सफलता हासिल की।
