साउथ सुपरस्टार प्रभास की मोस्ट अवेटेड फिल्म ‘द राजा साब’ की शूटिंग आखिरकार पूरी हो गई है। फिल्म के निर्देशक मारुति ने सोशल मीडिया पर इस खबर की पुष्टि करते हुए बताया कि यह पल उनके लिए बेहद खास है, क्योंकि फिल्म की शूटिंग प्रभास के फिल्मी करियर की सालगिरह वाले दिन पूरी हुई।
डायरेक्टर मारुति ने अपने एक्स (ट्विटर) अकाउंट पर लिखा, “23 साल पहले आज ही के दिन प्रभास ने सिनेमा की दुनिया में कदम रखा था, और संयोग देखिए कि उसी दिन हमारी फिल्म ‘द राजा साब’ की शूटिंग पूरी हुई। प्रभास की इस शानदार जर्नी का हिस्सा बनकर खुद को सौभाग्यशाली मानता हूं। हमें यकीन है कि यह फिल्म दर्शकों के लिए एनर्जी और एंटरटेनमेंट से भरपूर अनुभव साबित होगी।”
‘द राजा साब’ एक हॉरर-कॉमेडी फिल्म है, जिसे मारुति ने लिखा और निर्देशित किया है। फिल्म में प्रभास के साथ संजय दत्त, मालविका मोहनन, निधि अग्रवाल, ऋद्धि कुमार और बोमन ईरानी जैसे दिग्गज कलाकार नज़र आएंगे। यह एक पैन इंडिया फिल्म है, जिसे कई भाषाओं में रिलीज किया जाएगा। फैंस इस फिल्म के लिए बेहद उत्साहित हैं।
फिल्म 9 जनवरी 2026 को दुनियाभर के सिनेमाघरों में रिलीज होगी।
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ऑटिज्म, बौद्धिक विकलांगता और मानसिक विकारों की स्थिति पर मिला ठोस प्रमाण, “हर बच्चे को देखभाल, सहयोग और अवसर”
देहरादून। उत्तराखंड में पहली बार बच्चों और किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य पर व्यापक अध्ययन किया गया है। राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, बाल एवं किशोर मनोरोग विभाग तथा सार्वजनिक स्वास्थ्य, रोग-गणना विज्ञान विभाग, निमहांस (राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य एवं तंत्रिका विज्ञान संस्थान), बेंगलुरु के सहयोग से गवर्नमेंट डून मेडिकल कॉलेज, देहरादून द्वारा यह सर्वेक्षण पूरा किया गया। इस रिपोर्ट का विमोचन 11 नवम्बर 2025 को चिकित्सा स्वास्थ्य निदेशालय, देहरादून में किया गया।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में तथा स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के मार्गदर्शन में राज्य सरकार मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में निरंतर प्रयासरत है। सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा डॉ. आर. राजेश कुमार के निर्देशन में राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण, उत्तराखंड द्वारा बच्चों और किशोरों में मानसिक विकारों की वास्तविक स्थिति का सर्वेक्षण करवाया गया। इस अध्ययन का उद्देश्य राज्य में बच्चों की मानसिक स्थिति की सटीक जानकारी प्राप्त कर भविष्य की नीति निर्धारण में सहयोग देना था। विमोचन कार्यक्रम में निमहांस की निदेशक डॉ. प्रतिमा मूर्ति मुख्य अतिथि रहीं। उनके साथ निदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य डॉ. शिखा जंगपांगी, निदेशक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन डॉ. रश्मि पंत, सलाहकार एसएचएसआरसी डॉ. तृप्ति बहुगुणा, निमहांस के विशेषज्ञ डॉ. प्रदीप और डॉ. के. जॉन विजय सागर, तथा मुख्य चिकित्सा अधिकारी देहरादून डॉ. मनोज शर्मा, मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण के सदस्य ललित जोशी मौजूद रहे। सभी विशेषज्ञों ने इस अध्ययन को राज्य की मानसिक स्वास्थ्य नीतियों के लिए एक ऐतिहासिक पहल बताया।
देश का पहला सामुदायिक आधारित मानसिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण
यह रिपोर्ट न केवल उत्तराखंड बल्कि पूरे देश में अपनी तरह का पहला सामुदायिक आधारित सर्वेक्षण है। इसमें 0 से 17 वर्ष के आयु वर्ग के 802 बच्चों और किशोरों को शामिल किया गया। अध्ययन देहरादून, पौड़ी, अल्मोड़ा और नैनीताल जिलों में किया गया, जिससे पहाड़ी और मैदानी दोनों भौगोलिक क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व हुआ। रिपोर्ट में पाया गया कि बच्चों और किशोरों में ऑटिज्म, बौद्धिक विकलांगता और सामान्य मानसिक विकारों के मामलों में समय पर पहचान और उपचार की आवश्यकता अत्यंत महत्वपूर्ण है। अध्ययन में यह भी सुझाव दिया गया कि स्वास्थ्य विभाग के विभिन्न कार्यक्रमों और विद्यालय स्वास्थ्य अभियानों में मानसिक स्वास्थ्य की स्क्रीनिंग को शामिल किया जाए। साथ ही शिक्षकों और स्वास्थ्यकर्मियों को मानसिक स्वास्थ्य की पहचान और सहायता हेतु विशेष प्रशिक्षण देने की भी अनुशंसा की गई है।
मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त करने की दिशा में कदम
निमहांस और उत्तराखंड सरकार पहले से ही “टेली-मानस” और “नमन” जैसी योजनाओं के माध्यम से राज्य में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने का कार्य कर रहे हैं। यह रिपोर्ट भविष्य में बनने वाली राज्य स्तरीय कार्ययोजना के लिए एक ठोस आधार बनेगी, ताकि प्रत्येक बच्चे को समय पर पहचान, परामर्श और उपचार मिल सके। निदेशक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन डॉ. रश्मि पंत का मानना है कि यदि इस रिपोर्ट की अनुशंसाओं को नीति स्तर पर लागू किया गया, तो उत्तराखंड बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक आदर्श राज्य बन सकता है। यह पहल राज्य सरकार की उस प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है जिसके तहत “हर बच्चे को देखभाल, सहयोग और अवसर” सुनिश्चित करने की दिशा में ठोस प्रयास किए जा रहे हैं।
तेजस्वी यादव ने कहा- बिहार की जनता ने इस बार बदलाव के पक्ष में मजबूती से मतदान किया
पटना। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों से पहले जारी एग्जिट पोल भले ही अलग-अलग तस्वीर दिखा रहे हों, लेकिन महागठबंधन के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार तेजस्वी यादव ने सरकार बनने का दावा किया है। उन्होंने कहा कि बिहार की जनता ने इस बार बदलाव के पक्ष में मजबूती से मतदान किया है और महागठबंधन को स्पष्ट बहुमत मिलने जा रहा है।
मीडिया से बातचीत में तेजस्वी यादव ने आत्मविश्वास भरे लहजे में कहा, “बिहार की जनता का आशीर्वाद हमें मिल चुका है। 14 नवंबर को मैं मुख्यमंत्री बनने जा रहा हूं।” उन्होंने कहा कि इस बार जनता का उत्साह और समर्थन पहले के मुकाबले कई गुना ज्यादा है। लोगों ने बेरोजगारी, महंगाई और भ्रष्टाचार के खिलाफ वोट देकर मौजूदा सरकार के खिलाफ स्पष्ट जनादेश दिया है।
महागठबंधन नेता ने सभी सहयोगी दलों, कार्यकर्ताओं और मतदाताओं का धन्यवाद करते हुए कहा कि लोकतंत्र के इस महापर्व में जनता ने नई दिशा तय की है। तेजस्वी ने कहा, “2020 की तुलना में इस बार 72 लाख ज्यादा लोगों ने मतदान किया है, जो इस बात का संकेत है कि जनता बदलाव चाहती है और अब सरकार बदलना तय है।”
एग्जिट पोल को लेकर तेजस्वी ने कहा कि वे इन सर्वे नतीजों से न खुशफहमी में हैं, न ही भ्रम में। उनका कहना था कि “एग्जिट पोल का मकसद केवल माहौल को प्रभावित करना है। भाजपा और एनडीए की बेचैनी बताती है कि इस बार उन्हें जनता ने नकार दिया है।”
उन्होंने दोहराया कि 14 नवंबर को नतीजों के बाद 18 नवंबर को शपथ ग्रहण समारोह होगा और बिहार में महागठबंधन की सरकार बनना अब तय है।
प्रतिनिधिमंडल ने नैनीसैंण-कालूसैंण-सांकरी कच्चे मोटर मार्ग का शीघ्र डामरीकरण करने की मांग की
देहरादून। ग्राम्य विकास मंत्री गणेश जोशी से आज जनपद चमोली के कर्णप्रयाग क्षेत्र के खत्याड़ी गांव से आए एक प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व क्षेत्र पंचायत सदस्य सेवानिवृत्त सूबेदार लेफ्टीनेंट नन्द किशोर थपलियाल ने किया।
इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने मंत्री गणेश जोशी को ज्ञापन सौंपते हुए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के अंतर्गत कालूसैंण से सेरापाखुडी होते हुए नैनीसैंण-कालूसैंण-सांकरी कच्चे मोटर मार्ग का शीघ्र डामरीकरण करने की मांग की। मंत्री गणेश जोशी ने प्रतिनिधिमंडल की मांग पर सकारात्मक आश्वासन देते हुए जल्द कार्रवाई करने का भरोसा दिलाया।

इस अवसर पर रि. सूबेदार राजेंद्र सिंह मनराल, विजय प्रसाद जोशी, योगेश्वर थपलियाल, उमा मनराल सहित अन्य ग्रामीण भी उपस्थित रहे।
चेहरे की सफाई हर महिला की स्किन केयर रूटीन का सबसे अहम हिस्सा होता है। अक्सर जल्दबाजी में या थकान के कारण कई महिलाएं वेट वाइप्स से चेहरा पोंछना आसान विकल्प समझ लेती हैं। ये त्वरित रूप से गंदगी, तेल और मेकअप तो हटा देते हैं, लेकिन इनका अधिक उपयोग आपकी त्वचा के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, वेट वाइप्स में मौजूद अल्कोहल, सुगंध और केमिकल्स चेहरे की नमी को छीन लेते हैं और स्किन की नैचुरल प्रोटेक्टिव लेयर को नुकसान पहुंचाते हैं। इससे त्वचा रूखी, संवेदनशील और समय से पहले बूढ़ी दिखने लगती है।
वेट वाइप्स से होने वाले नुकसान
1. त्वचा की नमी घटती है
वेट वाइप्स में मौजूद केमिकल्स स्किन के नेचुरल ऑयल को खत्म कर देते हैं। लगातार इस्तेमाल से चेहरा इतना ड्राय हो जाता है कि मॉइश्चराइज़र भी असर नहीं दिखा पाता।
2. एलर्जी और इरिटेशन का खतरा
चेहरे की त्वचा बेहद नाजुक होती है। बार-बार वेट वाइप्स के प्रयोग से इचिंग, रैशेज और एलर्जी जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। कई बार यह समस्या इतनी बढ़ जाती है कि डॉक्टर की सलाह लेनी पड़ती है।
3. सेंसिटिव स्किन वालों के लिए ज्यादा हानिकारक
अगर आपकी स्किन पहले से ही सेंसिटिव है, तो वेट वाइप्स का इस्तेमाल पिंपल्स, रेडनेस और जलन को बढ़ा सकता है। इससे चेहरा बेजान और खुरदुरा लगने लगता है।
4. जल्दी दिखने लगते हैं एजिंग साइन
वेट वाइप्स का बार-बार प्रयोग त्वचा की इलास्टिसिटी को कमजोर करता है। इससे झुर्रियां और फाइन लाइन्स जैसी एजिंग साइन जल्दी दिखाई देने लगते हैं।
क्या हैं सुरक्षित विकल्प?
स्किन को हेल्दी रखने के लिए वेट वाइप्स की जगह माइल्ड फोमिंग क्लींजर या माइस्लर वाटर का इस्तेमाल करें। ये चेहरे की सफाई तो करते हैं, लेकिन नमी बरकरार रखते हैं। इसके अलावा, एलोवेरा जेल या नारियल तेल से मेकअप हटाना भी एक सुरक्षित और नेचुरल विकल्प है। चेहरा धोने के बाद हमेशा मॉइश्चराइज़र लगाएं, ताकि त्वचा मुलायम और ग्लोइंग बनी रहे।
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सीएम ने साहसिक उपलब्धि पर दी बधाई और शुभकामनाएं
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से उनके शासकीय आवास पर माउंट एवरेस्ट फतह करने वाले 16 वर्षीय पर्वतारोही सचिन कुमार ने शिष्टाचार भेंट की। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर सचिन को उनकी अद्भुत और साहसिक उपलब्धि के लिए हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दीं।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि इतनी कम उम्र में विश्व की सबसे ऊंची चोटी पर तिरंगा फहराना सचिन के साहस, आत्मविश्वास, दृढ़ संकल्प और कठिन परिश्रम का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि सचिन ने यह सिद्ध कर दिया है कि लक्ष्य कितना भी ऊंचा क्यों न हो, हौसला और संकल्प उससे भी ऊंचे हो सकते हैं।

मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार युवाओं में खेल, साहसिक गतिविधियों और पर्वतारोहण को प्रोत्साहित करने के लिए अनेक योजनाएं चला रही है। इन पहलों के माध्यम से उत्तराखंड के युवा अपने सपनों को साकार कर देश-विदेश में प्रदेश का नाम रोशन कर रहे हैं।
एडीजी ने दिए आवश्यक दिशा-निर्देश
देहरादून। दिल्ली में हुए धमाके के बाद उत्तराखंड पुलिस मुख्यालय ने पूरे प्रदेश में हाई अलर्ट जारी कर दिया है। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय और अंतरराज्यीय सीमाओं पर चौकसी बढ़ा दी गई है। एडीजी कानून व्यवस्था डॉ. वी. मुरुगेशन ने गढ़वाल और कुमाऊं रेंज के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक कर सुरक्षा उपायों की समीक्षा की और आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए।
एडीजी ने बताया कि धमाके के बाद उत्तराखंड पुलिस लगातार दिल्ली पुलिस, उत्तर प्रदेश एटीएस और अन्य सीमावर्ती राज्यों की पुलिस के संपर्क में है। हिमाचल व सहारनपुर बॉर्डर पर विशेष निगरानी रखी जा रही है, जबकि नेपाल सीमा पर एसएसबी के साथ समन्वय को और मजबूत किया गया है।
प्रदेश में मौजूद सैन्य प्रतिष्ठानों, एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन, बस अड्डों, होटल, धर्मशालाओं और भीड़भाड़ वाले बाजारों में बम निरोधक दस्ते और श्वान दलों के साथ चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है। साथ ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी सतत निगरानी रखी जा रही है ताकि किसी तरह की अफवाह या संदिग्ध गतिविधि को तुरंत रोका जा सके।
डॉ. मुरुगेशन ने सभी जिलों को अलर्ट मोड पर रहने और इंटेलीजेंस से निरंतर संपर्क बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी आपात स्थिति में प्रतिक्रिया समय कम से कम हो, इसके लिए डायल 112 की रिस्पॉन्स टाइम सुधारने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। वर्तमान में कुछ पहाड़ी जिलों में यह समय 20 से 23 मिनट है, जबकि औसत 12 से 13 मिनट का है। इसे संतुलित करने के लिए संबंधित जिलों को निर्देश दिए गए हैं।
साथ ही एडीजी ने आदेश दिया कि वाहन चोरी और स्नैचिंग जैसी घटनाओं की समीक्षा जिला प्रभारी स्वयं करें और एसपी टेलीकॉम प्रत्येक माह स्ट्रीट क्राइम से संबंधित रिपोर्ट तैयार करें, ताकि अपराध नियंत्रण की दिशा में ठोस कार्रवाई की जा सके।
सीएम ने उत्कृष्ट प्रदर्शन पर दी बधाई और शुभकामनाएं
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से उनके शासकीय आवास पर वर्ल्ड कप विजेता भारतीय टीम की सदस्य एवं उत्तराखंड की बेटी स्नेह राणा ने शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने स्नेह राणा को उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए बधाई और शुभकामनाएं दीं।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि स्नेह राणा ने अपने समर्पण, अनुशासन और निरंतर उत्कृष्ट प्रदर्शन से न केवल उत्तराखंड बल्कि पूरे देश का नाम विश्व पटल पर रोशन किया है। उन्होंने कहा कि स्नेह राणा जैसी खिलाड़ी राज्य की उभरती हुई महिला खिलाड़ियों के लिए प्रेरणास्रोत हैं। उनकी उपलब्धियों ने प्रदेश की उन बेटियों के सपनों को पंख दिए हैं, जो खेल जगत में अपनी अलग पहचान बनाना चाहती हैं।
एप्लीकेशन तैयार, मार्गदर्शन के बाद होगा मॉडिफिकेशन और टेंडरिंग प्रोसेस की शुरुआत
देहरादून। मुख्य सचिव आनंद बर्धन की अध्यक्षता में परिसंपत्तियों यथा भूमि के क्रय – विक्रय का वर्चुअल रजिस्ट्रेशन करने के संबंध में समीक्षा बैठक आयोजित की गई।मुख्य सचिव ने संबंधित अधिकारियों से वर्चुअल रजिस्ट्रेशन के कार्यों की प्रगति का स्टेटस लेते हुए निर्धारित टाइमलाइन में इसका क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने कहा कि भूमि के क्रय – विक्रय का वर्चुअल रजिस्ट्रेशन पूर्ण करने के लिए सभी संबंधित हितधारकों से समन्वय स्थापित किया जाए।
उन्होंने निर्देश दिए कि संबंधित एप्लीकेशन /पोर्टल में इस तरह का प्रावधान किया जाए कि भूमि के क्रय – विक्रय से संबंधित जितने भी दस्तावेज विभिन्न हित धारकों, विभागों, निकायों और एजेंसियों के बीच शेयर करने होते हैं वे सभी दस्तावेज ऑटो मोड पर और पेपरलेस प्रक्रिया से त्वरित गति से शेयर हो जाए।
उन्होंने कहा कि इस परियोजना के तैयार होने से भूमि के क्रय- विक्रय में पारदर्शिता आएगी, विभिन्न विभागों, निकायों, एजेंसियों और हितधारकों के मध्य भूमि का एक जैसा और सही रिकॉर्ड साझा हो सकेगा तथा इससे भूमि के क्रय- विक्रय से जुड़े विवादों में भी कमी आएगी।
इस दौरान अधिकारियों ने अवगत कराया कि संबंधित एप्लीकेशन बन चुकी है तथा इस संबंध में आज प्राप्त हुए मार्गदर्शन के अनुसार इसका थोड़ा मॉडिफिकेशन किया जाएगा। उसके पश्चात इसके इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए टेंडरिंग प्रोसेस प्रारंभ की जाएगी।
अवगत कराया कि इस एप्लीकेशन /पोर्टल में भूमि के क्रय – विक्रय के संबंध में तीन तरह के विकल्प उपलब्ध रहेंगे।
पहले विकल्प के तहत भौतिक रूप से दस्तावेज सहित रजिस्ट्रेशन के लिए रजिस्ट्रार कार्यालय में उपस्थित होना होगा। दूसरे विकल्प के अंतर्गत रजिस्ट्रेशन कार्यालय में बिना किसी दस्तावेज़ के (पेपरलेस) उपस्थित होकर रजिस्ट्रेशन किया जा सकेगा। तीसरे विकल्प के अंतर्गत बिना किसी मीडिएटर के वर्चुअल (ऑनलाइन) माध्यम से भूमि की रजिस्ट्री की जा सकेगी।
कहा कि इस परियोजना को 1 अप्रैल 2026 से पूरे राज्य में लागू करने के प्रयास किए जाएंगे।
इस दौरान बैठक में सचिव दिलीप जावलकर, अपर सचिव श्रीमती सोनिका व आलोक कुमार पांडेय, सहायक महानिरीक्षक निबंधक अतुल शर्मा, उपसचिव सुनील सिंह सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।
मंत्री गणेश जोशी ने दिए कृषि और उद्यान विभाग के लंबित प्रकरण जल्द निपटाने के निर्देश
देहरादून। कृषि एवं उद्यान मंत्री गणेश जोशी ने आज गढ़ी कैंट स्थित सर्किट हाउस के औद्यानिक परिषद सभागार में विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक कर कृषि एवं उद्यान विभाग के लंबित प्रकरणों के शीघ्र निराकरण के निर्देश दिए।
बैठक में मंत्री जोशी ने कहा कि मिशन एप्पल और सेब की अति सघन बागवानी योजना के अंतर्गत किसानों के लंबित भुगतान शीघ्र किए जाएं। उन्होंने निर्देश दिए कि संबंधित किसानों का दो दिन के भीतर भौतिक सत्यापन कर लंबित भुगतान की कार्यवाही पूरी की जाए। साथ ही उन्होंने आपदा प्रभावित जनपद उत्तरकाशी के ए ग्रेड और बी ग्रेड के सेब काश्तकारों का भुगतान भी शीघ्र करने को कहा।
मंत्री जोशी ने पॉलीहाउस निर्माण में हो रही देरी पर नाराजगी जताते हुए अधिकारियों को निर्धारित समय सीमा में निर्माण कार्य पूरा करने के निर्देश दिए। बैठक में इस विषय पर भी चर्चा हुई कि पॉलीहाउस निर्माण का कार्य एजेंसी की बजाय किसानों द्वारा स्वयं कराए जाने और सरकार द्वारा डीबीटी के माध्यम से सब्सिडी दिए जाने की व्यवस्था पर भी चर्चा की गई।
उन्होंने राज्य के सभी जिलों में स्थित राजकीय उद्यानों और पौधशालाओं में 415 माली के पदों पर भर्ती प्रक्रिया शीघ्र शुरू करने के निर्देश दिए। साथ ही जायका परियोजना के कार्यों में भी तेजी लाने को कहा। मंत्री जोशी ने अधिकारियों को ड्रैगन फ्रूट नीति, कीवी और मिलेट नीति का ब्लॉक स्तर तक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश देते हुए कहा कि चौबटिया गार्डन सहित प्रदेश के 93 राजकीय उद्यानों को रिवाइब किया जाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में हॉर्टी टूरिज्म और फ्लोरीकल्चर की अपार संभावनाओं को देखते हुए इस दिशा में कार्य किया जाए। उन्होंने बैठक में अधिकारियों को लंबित प्रकरणों के शीघ्र निस्तारण के भी सख्त निर्देश दिए।
बैठक में महानिदेशक कृषि वंदना सिंह, अपर सचिव कृषि आनंद श्रीवास्तव, निदेशक कृषि परमाराम, संयुक्त निदेशक कृषि दिनेश कुमार, अपर निदेशक उद्यान रतन कुमार, बागवानी मिशन के निदेशक महेन्द्र पाल सहित विभाग के अन्य अधिकारीगण उपस्थित रहे।
