लोक संस्कृति और जनसहभागिता से गूंज उठा उत्सव, रजत जयंती समारोह बना यादगार
पौड़ी। उत्तराखंड राज्य स्थापना दिवस की रजत जयंती पर जिला मुख्यालय पर भव्य समारोह का आयोजन किया गया। जिला मुख्यालय पौड़ी में आयोजित मुख्य समारोह की शुरुआत स्थानीय विधायक राजकुमार पोरी, जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया तथा मुख्य विकास अधिकारी गिरीश गुणवंत समेत पूर्व सैनिकों तथा जनप्रतिनिधियों द्वारा एजेंसी चौक स्थित शहीद स्मारक पर श्रद्धासुमन अर्पित कर की गयी। सभी ने राज्य आंदोलनकारियों को नमन करते हुए उनके योगदान और बलिदान को याद किया।
इसके उपरांत अतिथियों ने प्रेक्षागृह पहुंचकर विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए विभागीय स्टॉलों का निरीक्षण किया। तत्पश्चात शहीद राज्य आंदोलनकारियों के चित्रों पर पुष्पमाला अर्पित कर तथा दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया।
समारोह में विविध सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए तथा उत्कृष्ट कार्य करने वाले किसानों को सम्मानित किया गया। राज्य स्थापना की रजत जयंती पर उपस्थित जनसमूह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वर्चुअल संबोधन को भी सुना और उनके संदेश से प्रेरणा ली।
मुख्य अतिथि स्थानीय विधायक राजकुमार पोरी ने अपने संबोधन में कहा कि उत्तराखंड राज्य का गठन हजारों आंदोलनकारियों के त्याग, संघर्ष और बलिदान की परिणति है। उन्होंने कहा कि राज्य निर्माण के पीछे साधारण जनता की असाधारण भावना थी। एक ऐसा सपना, जिसमें पहाड़ का हर व्यक्ति शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सम्मान का जीवन चाहता था। विधायक ने कहा कि आज जब राज्य अपनी रजत जयंती मना रहा है, तब हमें यह संकल्प लेना चाहिए कि विकास की रोशनी प्रत्येक गांव और घर तक पहुंचे। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे स्वावलंबन की दिशा में आगे बढ़ें, स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा दें और विकसित उत्तराखंड – सशक्त उत्तराखंड के निर्माण में भागीदार बनें।
जिलाधिकारी ने राज्य आंदोलनकारियों को नमन करते हुए कहा कि उनका त्याग, संघर्ष और बलिदान ही उत्तराखंड के वर्तमान और भविष्य की नींव है। उन्हीं के साहस और समर्पण से हमें यह गौरवशाली राज्य प्राप्त हुआ है। उन्होंने कहा कि जनपद में हमारे बीच अनेक उदाहरण ऐसे हैं, जो आत्मनिर्भरता की मिसाल कायम कर उत्कृष्ट कार्य कर रहे हैं। हाल ही में बेड़ू फल को जीआई टैग मिलना इस दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है।
जिलाधिकारी ने कहा कि स्थानीय उत्पादों को पहचान मिलना न केवल राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठा दिलाता है, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नयी ऊर्जा भी प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि सर्वांगीण विकास के लिए भौतिक व सामाजिक प्रगति के साथ साथ भावनात्मक प्रगति भी आवश्यक है। इसलिए, विकास के साथ-साथ हमें अपनी जड़ों, संस्कृति और परंपराओं से भी जुड़ा रहना होगा। तभी यह विकास वास्तव में सार्थक कहलाएगा।
कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए राजकीय बालिका इंटर कॉलेज की छात्राओं ने स्वागत गीत से अतिथियों का अभिनंदन किया। हिल्स इंटरनेशनल स्कूल के विद्यार्थियों की सुंदर जागर प्रस्तुति तथा अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने सभी का मन मोह लिया। विभिन्न विद्यालयों और सांस्कृतिक दलों द्वारा प्रस्तुत लोकगीतों व नृत्यों से पूरा प्रांगण उत्सवमय वातावरण में सराबोर हो गया। आंदोलनकारियों, जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, नागरिकों और विद्यार्थियों की संयुक्त सहभागिता ने कार्यक्रम को एक जीवंत पर्व का रूप दे दिया। हर ओर उल्लास और उत्साह का माहौल दिखायी दिया, जिसने राज्य स्थापना की रजत जयंती समारोह को अविस्मरणीय बना दिया।
इस अवसर पर विकासखण्ड पौड़ी के ग्राम गहड़ के जय निरंकार स्वायत्त सहकारिता समूह व विकासखण्ड कोट के मंजोली तल्ला के मां भगवती ऑर्गेनिक फार्म स्वययत सहकारिता को कृषि विभाग के फार्म मशीनरी बैंक योजना के तहत 4-4 लाख के चैक वितरित किये गये। जबकि 10 कृषकों को कृषि यंत्र व मिनी बीज किट वितरित की गयी। इसके अलावा कृषि में उत्कृष्ट कार्य करने वाले 5 कृषकों को शॉल व प्रशस्ति पत्र भेंट कर सम्मानित किया गया। वहीं बाल विकास विभाग की ओर से 5 बालिकाओं को किशोरी किट व 5 लाभार्थियों को मुख्यमंत्री महालक्ष्मी किट वितरित की गयी। समाज कल्याण विभाग के 11 लाभार्थियों को दिव्यांग उपकरण वितरित किये गये। इस अवसर पर उद्योग विभाग के 26 लाभार्थियों को भी ऋण स्वीकृति पत्र एवं चैक वितरित किये गये।
इस अवसर पर अपर जिलाधिकारी अनिल गर्ब्याल, संयुक्त मजिस्ट्रेट दीक्षिता जोशी, परियोजना निदेशक डीआरडीए विवेक कुमार उपाध्याय, जिला विकास अधिकारी मनविंदर कौर, जिला पंचायती राज अधिकारी जितेंद्र कुमार, जिला शिक्षाधिकारी (माध्यमिक) रणजीत सिंह नेगी, पूर्व नगर पालिकाध्यक्ष यशपाल बेनाम, जसपाल नेगी सहित अन्य राज्य आंदोलनकारी, जनप्रतिनिधि, अधिकारी, कर्मचारी एवं भारी संख्या में आम नागरिक उपस्थित रहे।
पीएम मोदी ने प्रदेश को आठ हजार करोड़ रुपये से अधिक की विकास योजनाओं का दिया उपहार
देहरादून। देहरादून में उत्तराखंड राज्य स्थापना की रजत जयंती पर पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को एफआरआई मैदान में विशाल जनसभा को संबोधित किया। इस दौरान पीएम मोदी ने प्रदेश को आठ हजार करोड़ रुपये से अधिक की विकास योजनाओं का उपहार दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार हर स्थिति में उत्तराखंड के साथ खड़ी है और आने वाले 25 वर्ष उत्तराखंड के लिए निर्णायक होने वाले हैं। पीएम ने कहा — “इस सदी का तीसरा दशक उत्तराखंड का दशक होगा।”
पीएम मोदी ने अपने भाषण में पहाड़ से अपने आध्यात्मिक लगाव को याद किया, शहीदों को नमन किया और हालिया आदि कैलाश अल्ट्रा मैराथन का उदाहरण देते हुए कहा कि पहाड़ में adventure tourism की संभावनाएं लगातार बढ़ रही हैं। उन्होंने राज्य के पारंपरिक उत्पादों और जड़ी-बूटी आधारित अर्थव्यवस्था पर भी विशेष फोकस रखा।
यूसीसी लागू करने पर जताई तारीफ
प्रधानमंत्री ने धामी सरकार की नीतिगत पहल की सराहना करते हुए कहा कि उत्तराखंड ने गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने का साहस दिखाया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने धर्मांतरण रोकने, दंगा नियंत्रण और अवैध कब्जों व डेमोग्राफी बदलाव पर भी कठोर कानून बनाकर बड़ा फैसला लिया है।
आपदा के समय की व्यवस्थाओं और त्वरित फैसलों के लिए भी पीएम मोदी ने राज्य सरकार की प्रशंसा की। उन्होंने कहा — “उत्तराखंड पूरी मजबूती से विकास की नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है। संस्कृति और पहचान को बचाकर आगे ले जा रहा है।”
स्थानीय बोली में भाषण — जनता से सीधा कनेक्ट
कार्यक्रम में प्रधानमंत्री का पहाड़ी अंदाज विशेष आकर्षण का केंद्र बना। पीएम ने भाषण में कई बार गढ़वाली-कुमाऊनी वाक्य बोले और लोक पर्व हरेला, फुलदेई, भिटोली, नंदादेवी, जौलजीबी से लेकर दयारा बुग्याल के बटर फेस्टिवल तक का उल्लेख किया। लोगों ने भी पीएम के पहाड़ी अंदाज पर विशेष उत्साह दिखाया।
₹8000 करोड़ से अधिक की योजनाओं का लोकार्पण व शिलान्यास
कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने राज्यपाल गुरमीत सिंह और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के साथ लगभग 8000 करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न योजनाओं का लोकार्पण व शिलान्यास किया। इनमें सिंचाई, पेयजल, ऊर्जा, खेल, तकनीकी शिक्षा, पर्यटन, शहरी विकास और स्वास्थ्य क्षेत्र की बड़ी योजनाएं शामिल हैं — जिनका सीधा लाभ जनता को मिलेगा।
पुलिस से बचकर भाग रहा था युवक, 11 लोग घायल
वॉशिंगटन। फ्लोरिडा के टेम्पा शहर में एक दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को दहला दिया। पुलिस से बचकर भाग रहा एक युवक तेज रफ़्तार में कार लेकर ऐसे दौड़ा कि नियंत्रण खो बैठा और गाड़ी सीधे एक भीड़भाड़ वाले बार में जा घुसी। इस भीषण टक्कर में चार लोगों की मौत हो गई, जबकि 11 लोग घायल हो गए।
टेम्पा पुलिस के अनुसार करीब रात 12.40 बजे पेट्रोलिंग टीम ने एक सेडान को लापरवाही से चलाते हुए देखा और उसे रोकने का प्रयास किया। जैसे ही पुलिस आगे बढ़ी, कार चालक ने गति और बढ़ा दी और भागने लगा। पीछा करते हुए अचानक मोड़ पर कार अनियंत्रित हो गई और पास के बार के अंदर जा घुस गई, जहां बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे।
हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई। तीन लोगों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया, जबकि एक घायल ने अस्पताल ले जाते समय अपनी जान गंवा दी। कई घायल अभी भी अस्पताल में भर्ती हैं, जिनमें दो की हालत नाज़ुक बताई जा रही है।
पुलिस ने बताया कि आरोपी की पहचान 22 वर्षीय सिलास सिंपसन के रूप में की गई है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी इससे पहले भी स्ट्रीट रेसिंग में शामिल था और जब पुलिस ने उसे दोबारा तेज रफ़्तार में देखा तो वह बचकर निकलने की कोशिश कर रहा था।
आरोपी को गिरफ्तार कर हिल्सबोरो काउंटी जेल भेज दिया गया है। उसके खिलाफ लापरवाही से वाहन चलाने, पुलिस से बचकर भागने और जान से मारने जैसी गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।
आज की तेज गति वाली लाइफस्टाइल में हाई ब्लड प्रेशर अब आम स्वास्थ्य समस्या बन चुका है। विशेषज्ञ इसे ‘साइलेंट किलर’ कहते हैं, क्योंकि बिना किसी खास शुरुआती लक्षण के यह शरीर के अंदरूनी तंत्र पर दबाव बनाता रहता है। लगातार बढ़ा हुआ बीपी धमनियों की दीवारों को सख्त करने लगता है और यही भविष्य में कई गंभीर बीमारियों की जड़ बनता है।
हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक गलत भोजन आदतें, स्ट्रेस, बैठकर रहने की आदत और शारीरिक सक्रियता की कमी हाई बीपी को तेजी से बढ़ाती है। ऐसे में हाई बीपी के बढ़ने की स्थिति को हल्के में लेने की गलती नहीं करनी चाहिए।
हृदय संबंधी गंभीर जोखिम
हाई बीपी का सीधा असर आपके हृदय पर पड़ता है। लगातार अधिक दबाव के कारण हृदय की मांसपेशियों को खून पंप करने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ती है, जिससे हृदय की मांसपेशियां मोटी और कमजोर हो जाती हैं। इससे हार्ट फेलियर का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा धमनियों के सख्त होने से एथेरोस्क्लेरोसिस (धमनियों में फैट जमा होना) तेज होता है, जो हार्ट अटैक का प्रमुख कारण है।
मस्तिष्क और किडनी पर घातक असर
हाई बीपी मस्तिष्क की नाजुक रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाकर स्ट्रोक (मस्तिष्काघात) का सबसे बड़ा जोखिम पैदा करता है। वहीं किडनी पर दबाव पड़ने से उसकी फिल्टरिंग क्षमता कम हो जाती है, जिससे किडनी फेलियर का खतरा और बढ़ जाता है। यह दोनों ही स्थितियां जीवन की गुणवत्ता को गंभीर रूप से प्रभावित करती हैं।
बीपी अचानक बढ़ने पर क्या करें?
अगर आपका रक्तचाप अचानक बहुत अधिक बढ़ जाए, तो तुरंत शांत जगह पर बैठ जाएं। गहरी सांसें लें और तनाव कम करने की कोशिश करें। अपनी नियमित दवा लें। अगर 20 मिनट बाद भी बीपी नीचे नहीं आता है, या आपको सीने में दर्द, सांस लेने में दिक्कत या तेज सिरदर्द महसूस हो, तो तुरंत इमरजेंसी सेवा को कॉल करें या किसी नजदीकी डॉक्टर से संपर्क करें।
बीपी को नियंत्रित रखने के उपाय
हाई बीपी को नियंत्रित रखने के लिए नमक का सेवन सीमित करें, प्रतिदिन 1500 मिलीग्राम से कम नमक खाएं। डाइट में पोटैशियम (केला, पालक), मैग्नीशियम और फाइबर बढ़ाएं। रोजाना 30 मिनट वॉक करें, वजन नियंत्रित रखें, और धूम्रपान व शराब से दूर रहें। नियमित रूप से बीपी की जांच कराते रहें और डॉक्टर की सलाह को अनदेखा न करें।
(साभार)
GRAP-2 लागू, फिर भी नहीं सुधर रही राजधानी की हवा
दिल्ली के बाद नोएडा की हवा सबसे ज्यादा खराब, गाजियाबाद और ग्रेटर नोएडा भी ‘बेहद खराब’ श्रेणी में
नई दिल्ली। राजधानी समेत पूरे एनसीआर में वायु प्रदूषण लगातार खतरनाक स्तर पर बना हुआ है। शनिवार को एयर क्वालिटी इंडेक्स कई इलाकों में ‘गंभीर’ श्रेणी को पार कर गया। एम्स, अक्षरधाम और इंडिया गेट जैसे सेंसेटिव ज़ोन में AQI 380 से 420 के बीच दर्ज किया गया, जिसके बाद पर्यावरण एजेंसियों और स्वास्थ्य विभाग ने स्थिति पर चिंता जताई है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार, दिल्ली की फिजा में पीएम 2.5 की मात्रा लगातार बढ़ रही है, जो सीधे तौर पर सांस और हृदय संबंधी बीमारियों को प्रभावित करती है। पराली के धुएं की हिस्सेदारी भी तेजी से बढ़ रही है। शनिवार को दिल्ली की हवा में पराली से होने वाला प्रदूषण 30% से अधिक दर्ज किया गया और रविवार को यह 31% के पार जा सकता है।
सुबह की शुरुआत घने स्मॉग और धुंध के साथ हुई। सफदरजंग एयरपोर्ट पर सुबह 6:30 बजे दृश्यता 900 मीटर तक ही सीमित रही, जो थोड़ी देर बाद बढ़कर 1200 मीटर हो पाई। मास्क पहनकर सफर करते लोगों की संख्या भी बढ़ गई है। डॉक्टर्स का कहना है कि अस्थमा और सांस की समस्या वाले मरीजों को बाहर निकलते समय अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए।
एनसीआर में दिल्ली के बाद सबसे खराब स्थिति नोएडा की रही, जहां AQI 354 दर्ज किया गया। गाजियाबाद में 339, ग्रेटर नोएडा में 336 और गुरुग्राम में 236 दर्ज हुआ। इस दौरान फरीदाबाद की हवा अपेक्षाकृत बेहतर रही, लेकिन वह भी ‘खराब’ श्रेणी में ही रही।
CPCB का अनुमान है कि मंगलवार तक हवा की गुणवत्ता ‘बहुत खराब’ से ‘गंभीर’ श्रेणी में बनी रह सकती है। दीपावली के बाद से कई इलाकों में AQI लगातार नीचे नहीं आ रहा है, जबकि GRAP-2 के नियम अभी भी लागू हैं। हालांकि, दिल्ली में इस वर्ष अभी तक ‘अत्यधिक गंभीर’ श्रेणी वाला दिन दर्ज नहीं हुआ है, लेकिन विशेषज्ञों की मानें तो इस सप्ताह ऐसे हालात बन सकते हैं।
साउथ सुपरस्टार थलपति विजय की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘जन नायकन’ का पहला गाना रिलीज होते ही सोशल मीडिया पर ट्रेंड करने लगा। ‘थलपति कचेरी’ टाइटल वाले इस ट्रैक को संगीतकार अनिरुद्ध रविचंदर ने कंपोज किया है। वीडियो में विजय अपने सिग्नेचर स्टाइल में एनर्जेटिक डांस करते नजर आ रहे हैं। गाने में फिल्म के कुछ मसालेदार सीन भी शामिल किए गए हैं।
गाने के आउट होने के बाद मदुरै समेत तमिलनाडु के कई इलाकों में प्रशंसकों ने जश्न मनाया। टीवीके प्रमुख विजय के समर्थक सड़क पर पोस्टर लेकर थिरकते नजर आए। वीडियो कोरियोग्राफर शेखर ने इस गाने में विजय के आइकॉनिक मूव्स को फिर से जीवंत किया है।
इस बीच बुधवार शाम फिल्म का नया पोस्टर भी जारी हुआ, जिसमें भीड़ के बीच विजय की दमदार मौजूदगी दिखाई गई। नीली शर्ट और सनग्लासेस में विजय के इस पोस्टर ने फिल्म के प्रति उत्सुकता और बढ़ा दी।
‘जन नायकन’ का निर्देशन एच विनोथ ने किया है और यह फिल्म 9 जनवरी 2026 को पोंगल के अवसर पर रिलीज की जाएगी। पूजा हेगड़े और ममिता बैजू भी फिल्म में अहम किरदार निभा रही हैं। इंडस्ट्री में चर्चा है कि यह थलपति विजय की अंतिम फिल्म हो सकती है।
(साभार)
भारत दर्शन यात्रा के लिए भी मिलेगा प्रोत्साहन ऋण
देहरादून। अंतरराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष 2025 और उत्तराखंड राज्य की रजत जयंती के अवसर पर संस्कृति विभाग ऑडिटोरियम, दीपनगर में उत्तराखंड प्रादेशिक कोऑपरेटिव यूनियन के तत्वावधान में भव्य सहकारिता सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ सहकारिता मंत्री डॉ. धन सिंह रावत, निबंधक सहकारिता डॉ. मेहरबान सिंह बिष्ट एवं राष्ट्रीय सहकारी प्रशिक्षण परिषद (NCTC) की सचिव डॉ. मीनू शुक्ला पाठक द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया।
मुख्य अतिथि डॉ. धन सिंह रावत ने अपने संबोधन में कहा कि हमारी सरकार ने सहकारिता के क्षेत्र में अभूतपूर्व कार्य किए हैं। सहकारिता मंत्रालय के गठन के बाद पूरे देश में सहकारिता की नई क्रांति आई है, और उत्तराखंड ने इसमें विशेष भूमिका निभाई है।
उन्होंने कहा कि मिलेट्स मिशन योजना के तहत किसान आत्मनिर्भर बन रहे हैं। राज्य सरकार द्वारा समितियों के माध्यम से ₹4800 प्रति क्विंटल की दर से मुंडवा की सीधी खरीद किसानों को बड़ा आर्थिक सहारा दे रही है।
महिलाओं को व्यक्तिगत रूप से ₹21,000, ₹51,000 और ₹1,10,000 तक का ऋण बिना गारंटी के दिया जाएगा, जिससे महिलाएं रोजगार एवं आय सृजन से जुड़ी गतिविधियों को आगे बढ़ा सकें।
राष्ट्र की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर से जोड़ने हेतु सहकारिता मंत्री ने कहा कि भारत दर्शन यात्रा के लिए ₹1 लाख, ₹2 लाख और महिला समूहों को ₹3 लाख तक का ऋण प्रदान किया जाएगा।
अब स्कूली बच्चों को पढ़ाया जाएगा सहकारिता आंदोलन का पाठ
डॉ. रावत ने कहा कि उत्तराखंड के छात्र-छात्राओं को कक्षा 6 से सहकारिता आंदोलन का पाठ अनिवार्य रूप से पढ़ाया जाएगा। इस संबंध में निबंधक को एक समिति गठित करने के निर्देश दिए गए हैं। राज्य स्तर पर तैयार यह प्रस्ताव भारत सरकार को भी भेजा जाएगा ताकि केंद्रीय विद्यालयों में भी इसे पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जा सके।
सूक्ष्म ऋण योजना छोटे व्यवसायियों को 5% ब्याज पर ऋण
उन्होंने बताया कि उत्तराखंड राज्य सहकारी बैंक के माध्यम से अब ठेली-रेहड़ी व्यवसायियों को मात्र 5% ब्याज दर पर 3 से 5 दिन के अल्पकालिक ऋण उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे उनकी आय में वृद्धि हो सके।
जब आम व्यक्ति की आय बढ़ेगी, तभी प्रदेश और देश आत्मनिर्भर बन सकेगा,” डॉ. धन सिंह रावत ने कहा।
माधो सिंह भंडारी सामूहिक सहकारी खेती बनी सफलता का मॉडल
मंत्री ने बताया कि प्रदेश के विभिन्न जनपदों पौड़ी, रुद्रप्रयाग, अल्मोड़ा, बागेश्वर, पिथौरागढ़ में सहकारिता मेले सफलतापूर्वक संपन्न हो चुके हैं, जिनमें 70,000 से अधिक ग्रामीणों की भागीदारी रही। पौड़ी जनपद में बंजर भूमि पर फूलों की खेती “वेस्ट से बेस्ट” का प्रेरणादायक उदाहरण बन चुकी है। आगामी दिनों में उत्तरकाशी, टिहरी, चमोली, उधमसिंह नगर और चंपावत में भी सहकारिता मेले आयोजित किए जाएंगे।
निबंधक सहकारिता डॉ. मेहरबान सिंह बिष्ट ने कहा कि सहकारिता विभाग राज्य की प्रगति का आधार है। किसान यदि संपन्न होगा तो देश संपन्न होगा। हमें अभी सहकारिता समितियों (PACS) की नींव को और मजबूत करना होगा। उन्होंने दीनदयाल उपाध्याय ऋण वितरण योजना और मुख्यमंत्री घसियारी कल्याण योजना को माइलस्टोन बताते हुए इनके प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया।
डॉ. मीनू शुक्ला पाठक ने कहा ‘सहकारिता आंदोलन है जनभागीदारी का आंदोलन’
राष्ट्रीय सहकारी प्रशिक्षण परिषद की सचिव डॉ. मीनू शुक्ला पाठक ने अपने संबोधन में कहा कि सहकारिता आंदोलन तभी सफल होगा जब इसमें महिला शक्ति और युवाओं की सक्रिय भागीदारी होगी। उन्होंने अपने उत्तराखंड दौरे में ग्राउंड जीरो पर समितियों के कार्यों की सराहना की और कहा कि राज्य में सहकारिता का भविष्य अत्यंत उज्ज्वल है।
सम्मेलन के द्वितीय सत्र में उत्तराखंड रेशम फेडरेशन, राज्य सहकारी संघ, प्रादेशिक कोऑपरेटिव यूनियन, मत्स्य एवं डेयरी फेडरेशन द्वारा अपने-अपने कार्यों और योजनाओं पर प्रस्तुतियाँ दी गईं।
कार्यक्रम का मंच संचालन प्रादेशिक कोऑपरेटिव यूनियन के प्रबंध निदेशक मंगला त्रिपाठी द्वारा किया गया। उनके द्वारा सहकारिता विभाग के 25 वर्षों की यात्रा पर एक विस्तृत प्रेजेंटेशन प्रस्तुत किया गया, जिसमें उत्तराखंड राज्य बनने के बाद से अब तक के सभी सहकारिता मंत्री, सचिव और निबंधकों के विकास कार्यों को याद किया गया।
वरिष्ठ सहकार बंधुओं को सम्मान
सम्मेलन में उमेश त्रिपाठी, सुरेंद्र सिंह पनियाला, मातवर सिंह रावत, महावीर प्रसाद कुकरेती एवं मरणोपरांत हयात सिंह म्हारा को “सहकारिता सम्मान” से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि उत्तराखंड में सहकारिता आंदोलन जन-जन तक पहुंच रहा है। राज्य सरकार का लक्ष्य है कि हर गांव, हर किसान, हर महिला समूह सहकारिता से जुड़े, ताकि “सहकारिता से समृद्धि” का सपना साकार हो सके।
सहकारिता सम्मेलन में प्रादेशिक कोऑपरेटिव यूनियन के वर्तमान अध्यक्ष रामकृष्ण मेहरोत्रा, पूर्व अध्यक्ष रेशम फेडरेशन चौधरी अजीत सिंह, प्रदीप चौधरी, प्रादेशिक कोऑपरेटिव यूनियन के उपाध्यक्ष शैलेंद्र बिष्ट, मनोज सामंत, गोपाल बोरा, सार्थक त्रिपाठी, सत्येंद्र सिंह बिष्ट, अमित शाह, नरेंद्र सिंह रावत, सुभाष रमोला, सहकारिता विभाग के अधिकारी अपर निबंधक श्रीमती ईरा उप्रेती,आनंद शुक्ल, संयुक्त निबंधक नीरज बेलवाल, राज्य सहकारी बैंक के प्रबंध निदेशक प्रदीप मेहरोत्रा, उप निबंधक रमिंद्री मंदरवाल, सहायक निबंधक (मुख्यालय) राजेश चौहान सहित अन्य सभी जनपदों से उपस्थित जिला सहायक निबंधक, सचिव, महाप्रबंधक, अन्य अधिकारी-कर्मचारी एवं सहकारिता से जुड़े गणमान्य उपस्थित रहे।
सीएम ने कहा- 25 वर्षों की यह यात्रा केवल विकास की कथा नहीं, बल्कि संघर्ष, संस्कार और समर्पण की प्रेरणादायक कहानी है
देहरादून। उत्तराखंड राज्य स्थापना दिवस तथा रजत जयंती वर्ष पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई व शुभकामनाएं दीं। सीएम ने कहा कि 25 वर्षों की यह यात्रा केवल विकास की कथा नहीं, बल्कि संघर्ष, संस्कार और समर्पण की प्रेरणादायक कहानी है। उन्होंने कहा कि राज्य आंदोलन में योगदान देने वाले पूर्वजों, राज्य आंदोलनकारियों और भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को आज पूरा उत्तराखंड श्रद्धापूर्वक नमन करता है।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि अटल जी की दूरदृष्टि और संवेदनशील नेतृत्व ने देवभूमि उत्तराखंड को देश-दुनिया में नई पहचान दी थी। आज वही यात्रा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के विज़न के साथ निरंतर आगे बढ़ रही है।
सीएम ने कहा कि 25 वर्षों में उत्तराखंड ने संघर्ष से संकल्प और संकल्प से सफलता तक की ऐतिहासिक यात्रा तय की है। डबल इंजन सरकार के नेतृत्व में कनेक्टिविटी, इंफ्रास्ट्रक्चर, उद्योग, पर्यटन, शिक्षा, स्वास्थ्य और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में राज्य ने उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। चारधाम यात्रा, कांवड़ यात्रा और मंदिर पुनर्विकास परियोजनाओं ने धार्मिक पर्यटन को नई पहचान दी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस, समान नागरिक संहिता, धर्मांतरण विरोधी कानून और नकल विरोधी कानून जैसे फैसले राज्य में सुशासन और सामाजिक संतुलन को नई मजबूती दे रहे हैं।
धामी ने बताया कि प्रदेश में औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने के लिए रिकॉर्ड 3.5 लाख करोड़ रुपए के एमओयू साइन हुए हैं, जिनमें से 1 लाख करोड़ से अधिक निवेश जमीनी स्तर पर उतर चुका है। वहीं सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स इंडेक्स में भी उत्तराखंड देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है।
सीएम धामी ने कहा कि उत्तराखंड की आत्मा उसकी लोक संस्कृति, पर्वों और परंपराओं में बसी है और इन्हीं मूल्यों के आधार पर राज्य को आत्मनिर्भर, आधुनिक व समृद्ध प्रदेश बनाने की दिशा में राज्य आगे बढ़ रहा है। उन्होंने प्रदेशवासियों से उत्तराखंड के स्वर्णिम भविष्य निर्माण में योगदान देने की अपील की।
महिलाओं के योगदान को मिला सम्मान
हल्द्वानी। राज्य स्थापना की रजत जयंती के अवसर पर गौलापार स्थित मानसखंड खेल परिसर में शनिवार को महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग की ओर से “मातृ शक्ति उत्सव:-अमृत काल की नारी शक्ति: जननी भी, जननेता भी” कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या थीं।
कार्यक्रम में राज्य स्थापना से लेकर अब तक महिलाओं के संघर्ष, उपलब्धियों और योगदान को सजीव प्रस्तुतियों के माध्यम से प्रदर्शित किया गया। मंचीय प्रस्तुतियों में उत्तराखंड आंदोलन के दौर की झलक से लेकर आज के विकासशील उत्तराखंड की कहानी में नारी शक्ति की भूमिका को विशेष रूप से रेखांकित किया गया। मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि उत्तराखंड राज्य की स्थापना में मातृशक्ति ने निर्णायक योगदान दिया था और आज राज्य की प्रगति यात्रा में भी महिलाओं की भूमिका अग्रणी है। उन्होंने कहा कि अब हमारा अगला लक्ष्य 2047 के विकसित भारत के निर्माण में अपनी पूरी सामर्थ्य और समर्पण से योगदान देना है।
रेखा आर्या ने यह भी कहा कि उत्तराखंड की महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा और परिश्रम के दम पर राज्य का मान बढ़ा रही हैं। उन्होंने मातृशक्ति से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए आगे आने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में राज्य मंत्री शांति मेहरा, जिलाधिकारी नैनीताल ललित मोहन रयाल, महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग के निदेशक बी.एल. राणा, दुग्ध संघ लालकुआं अध्यक्ष मुकेश बोरा, ब्लॉक प्रमुख भीमताल हरीश बिष्ट, ब्लॉक प्रमुख ओखलकांडा केडी रुपाली, पूर्व ब्लॉक प्रमुख शांति भट्ट, राशन डीलर्स यूनियन प्रदेश अध्यक्ष रेवाधर बृजवासी, विभागीय उपनिदेशक विक्रम सिंह, मोहित चौधरी एवं नीतू फुलेरा सहित कई जनप्रतिनिधि व अधिकारी मौजूद रहे।
रैंप वॉक में दिखा संस्कृति और विकास का संगम
कार्यक्रम में उत्तराखंड की संस्कृति और साथ ही महिलाओं की विकास यात्रा का संगम देखने को मिला। इसमें न सिर्फ उत्तराखंड में परंपरागत रूप से खेती किसानी करने वाली महिलाओं को दर्शाया गया, साथ ही इंजीनियर, डॉक्टर, एयर होस्टेस, खिलाड़ी के रूप में भी प्रतिभागियों ने रैंप वॉक किया। इस प्रस्तुति को दर्शकों की सबसे ज्यादा सराहना मिली।
परिचर्चा में किया विशेषज्ञ महिलाओं ने मंथन
आयोजन में स्वास्थ्य, शिक्षक, सामाजिक कार्य, न्यायपालिका और सोशल मीडिया जैसे अन्य क्षेत्रों में काम कर चुकी महिला विशेषज्ञों की खुले मंच पर परिचर्चा भी आयोजित की गई । इसमें उन सभी ने उत्तराखंड में महिलाओं की विकास यात्रा और भविष्य में उसके समक्ष खडी चुनौतियों पर मंथन किया इससे एक विजन तैयार हुआ कि भविष्य में महिलाओं के लिए प्रदेश में किस तरह के प्रयास किए जाने की जरूरत है।
नृत्य नाटिका ने बटोरी तालियां
कार्यक्रम के दौरान एक नृत्य नाटिका के जरिए मातृ शक्ति के संघर्ष, परिश्रम और साहस को बहुत सुंदर तरीके से चित्रित किया गया । इसमें गौरा देवी के चिपको आंदोलन, राज्य निर्माण आंदोलन में महिलाओं की भूमिका, कमला देवी जैसे कलाकार और एकता बिष्ट जैसी क्रिकेटर, इन सभी का सफर दर्शाया गया। इस प्रस्तुति को दर्शकों ने काफी पसंद किया।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा—उत्तराखंड राज्य राजनीतिक फैसला नहीं, लाखों बलिदानों का परिणाम
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड राज्य स्थापना के रजत जयंती वर्ष के अवसर पर मुख्यमंत्री ने पुलिस लाइन में आयोजित राज्य आंदोलनकारी सम्मान समारोह में राज्य आंदोलनकारियों और शहीद राज्य आंदोलनकारियों के परिवारजनों को सम्मानित किया। कचहरी परिसर शहीद स्थल और पुलिस लाइन देहरादून में इस अवसर पर राज्य आंदोलनकारियों पर हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा भी की गई ।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड राज्य का निर्माण केवल राजनीतिक निर्णय नहीं, बल्कि देवभूमि के लाखों लोगों के बलिदान, संघर्ष और तप का परिणाम है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड आंदोलन के दौरान खटीमा, मसूरी और रामपुर तिराहा जैसी दर्दनाक घटनाएं हमारे इतिहास के अमर अध्याय हैं। राज्य निर्माण में अपने प्राणों की आहुति देने वाले सभी ज्ञात-अज्ञात बलिदानियों को नमन करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य सरकार आंदोलनकारियों के सम्मान को सर्वोच्च प्राथमिकता देती रही है और देती रहेगी। उन्होंने राज्य आंदोलनकारियों के लिए संचालित पेंशन एवं अन्य सुविधाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि यह केवल सहायता नहीं, बल्कि हमारी कृतज्ञता का प्रतीक है।
मुख्यमंत्री घोषणा
1.शहीद राज्य आन्दोलनकारियों के नाम पर उनके क्षेत्र की मुख्य अवस्थापना सुविधाओं का नामकरण किया जायेगा।
2 उत्तराखण्ड राज्य आन्दोलन के दौरान 7 दिन जेल गये अथवा राज्य आन्दोलन के दौरान घायल हुये आन्दोलनकारियों की पेंशन प्रतिमाह 6 हजार रुपए से बढ़ाकर 7 हजार रुपए प्रतिमाह की जाएगी।
3 उत्तराखण्ड राज्य आन्दोलन के दौरान जेल गये या घायल श्रेणी से भिन्न अन्य राज्य आन्दोलनकारियों की पेंशन प्रतिमाह 4500 रुपए से बढ़ाकर 5500 रुपए प्रतिमाह की जाएगी।
4 उत्तराखण्ड राज्य आन्दोलन के दौरान विकलांग होकर पूर्णतः शय्याग्रस्त हुए राज्य आन्दोलनकारियों की पेंशन प्रतिमाह 20,000 हजार रूपए से बढ़ाकर 30,000 हजार रुपए की जाएगी और उनकी देखभाल के लिए मेडिकल अटेंडेंड की व्यवस्था भी की जाएगी।
5 उत्तराखण्ड राज्य आन्दोलन के दौरान शहीद हुये राज्य आन्दोलनकारियों के आश्रितों की पेंशन प्रतिमाह 3000 रुपए से बढ़ाकर 5500 रुपए की जाएगी।
6 उत्तराखण्ड राज्य आन्दोलनकारियों के चिन्हीकरण हेतु वर्ष 2021 तक जिलाधिकारी कार्यालय में प्राप्त लम्बित आवेदन पत्रों के निस्तारण हेतु छः माह का समय विस्तार प्रदान किया जायेगा।
7 समस्त शहीद स्मारकों का सौंदर्यीकरण किया जायेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार आंदोलनकारियों के योगदान को सदैव सम्मानपूर्वक याद रखेगी और उनकी भावना को प्रत्येक नीति एवं निर्णय में स्थान देगी। उन्होंने अपील की कि राज्य स्थापना दिवस पर प्रदेशवासी अपने घरों में पाँच दीपक राज्य आंदोलनकारियों की स्मृति में अवश्य जलाएँ। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड को देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए राज्य आंदोलन की भावना ही हमारी प्रेरणा है। उन्होंने सभी से इस प्रयास में सहभागिता का आह्वान किया।
इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, सुबोध उनियाल, सांसद माला राज्यलक्ष्मी शाह, राज्यसभा सांसद एवं भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट, राज्यसभा सांसद नरेश बंसल, विधायक विनोद चमोली, खजानदास, उमेश शर्मा काऊ, सविता कपूर, उपाध्यक्ष राज्य आंदोलनकारी सम्मान परिषद सुभाष बड़थ्वाल, जिलाधिकारी देहरादून सविन बंसल, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय सिंह एवं राज्य आंदोलनकारी मौजूद थे।
