बिना वेतन काम कर रहे कर्मी, हवाई अड्डों पर बढ़ा संकट
वॉशिंगटन। अमेरिका में सरकारी शटडाउन हुए 34 दिन बीत चुके हैं और इसका असर अब देश की हवाई सेवाओं पर साफ दिखाई देने लगा है। एयर ट्रैफिक नियंत्रक और सुरक्षा जांच करने वाले कर्मचारी बिना वेतन के काम कर रहे हैं। कई कर्मचारी आर्थिक दबाव के कारण ड्यूटी पर नहीं आ रहे, जिससे तमाम बड़े हवाई अड्डों पर उड़ानों का संचालन बुरी तरह प्रभावित हो गया है।
रिपोर्टों के अनुसार, नियंत्रक अतिरिक्त काम और दूसरी तरह की नौकरी करने को मजबूर हैं ताकि रोजमर्रा का खर्च चला सकें। इसका असर हवाई अड्डों की व्यवस्था पर दिख रहा है—सुरक्षा जांच में लंबी लाइनें, यात्री परेशान और सुरक्षा का भरोसा भी कम हो रहा है।
“हवाई तंत्र हर दिन थोड़ा और असुरक्षित होता जा रहा”
नेशनल एयर ट्रैफिक कंट्रोलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष निक डेनियल्स ने कहा कि लगातार बिना वेतन के काम करने से कर्मचारियों पर मानसिक दबाव बहुत बढ़ गया है। उनके मुताबिक जब दिमाग में किराया, बिल और घर के खर्च की चिंता रहती है, तो सौ प्रतिशत ध्यान दे पाना संभव नहीं है और यह स्थिति हवाई सुरक्षा को प्रभावित कर रही है।
परिवहन मंत्री की सफाई — उड़ानों में देरी सुरक्षा को बचाने के लिए
अमेरिका के परिवहन मंत्री सीन डफी का कहना है कि उड़ानों में देरी करना मजबूरी है, क्योंकि स्टाफ की कमी से जोखिम बढ़ गया है। उनका कहना है कि अगर स्थिति और बिगड़ी तो पूरा वायुक्षेत्र अस्थायी रूप से बंद भी करना पड़ सकता है। लेकिन सुरक्षा से किसी कीमत पर समझौता नहीं किया जाएगा।
कई बड़े हवाई अड्डों पर व्यवस्था चरमराई
शिकागो, डेनवर, ह्यूस्टन और नेवार्क जैसे बड़े विमानतल पर देरी लगातार बढ़ रही है। ह्यूस्टन के हवाई अड्डे ने यात्रियों को सूचना दी है कि सुरक्षा जांच में तीन घंटे तक लग सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार कई कर्मचारी अब मजबूरी में पहले अपने परिवार और जरूरतों को महत्व दे रहे हैं। कुछ नियंत्रकों ने तो कहा कि अगर वे ध्यान में कमी महसूस करते हैं, तो ड्यूटी पर न जाना ही बेहतर है ताकि हादसे का कोई जोखिम न बढ़े।
समस्या सुरक्षा से ज़्यादा भरोसे की हो गई है
यात्रा संगठनों का कहना है कि हवाई यात्रियों का भरोसा टूट रहा है, क्योंकि समय पर उड़ान और समय पर पहुंचने की उम्मीद खत्म होती जा रही है। यूनियन की ओर से फिर अपील की गई है कि सरकार को तुरंत खोला जाए। अब कर्मचारियों और यात्रियों के लिए इस स्थिति को और ज्यादा झेलना संभव नहीं है।
नोटिस के बाद भी कब्ज़ा न हटने पर प्रशासन ने सख्त कार्रवाई की
हरिद्वार। हरिद्वार जनपद में सरकारी भूमि को कब्ज़े से मुक्त कराने की प्रशासनिक कार्यवाही लगातार जारी है। इसी क्रम में रानीपुर कोतवाली क्षेत्र के पथरी रोह पुल के पास करीब दो बीघा सरकारी भूमि पर बने अवैध ढांचे को प्रशासन ने हटवा दिया। सिंचाई विभाग की ओर से पहले ही जिम्मेदारों को नोटिस भेज दिया गया था, लेकिन तय अवधि में अतिक्रमण स्वयं नहीं हटाया गया। जिसके बाद विभागीय आदेश के आधार पर आज बुलडोज़र लगाकर निर्माण को तोड़ा गया।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों के बाद प्रदेश के विभिन्न इलाकों में सरकारी जमीनों पर बनी अवैध संरचनाओं के खिलाफ अभियान तेज़ कर दिया गया है। अधिकारियों ने साफ कहा कि राज्य की भूमि पर किसी भी प्रकार का कब्ज़ा या अनधिकृत निर्माण स्वीकार नहीं किया जाएगा।
प्रशासनिक टीम के साथ बड़ी संख्या में पुलिस बल भी मौके पर मौजूद रहा ताकि कार्रवाई के दौरान कोई विवाद या बाधा न उत्पन्न हो। प्रशासन का कहना है कि आगे भी ऐसी सभी जगहों की पहचान कर क्रमबद्ध तरीके से कार्रवाई की जाएगी।
नवंबर की ठिठुरन शुरू होते ही शरीर में जकड़न, खिंचाव और दर्द महसूस होना सामान्य बात है। ठंडी हवा के कारण मांसपेशियां सिकुड़ जाती हैं, रक्त प्रवाह धीमा पड़ जाता है और इसी वजह से कमर, कूल्हों, कंधों और गर्दन में तनाव बढ़ने लगता है। दवाइयों की जगह अगर हम रोज़ कुछ मिनट साधारण योगाभ्यास करें तो शरीर के इन हिस्सों में गर्माहट आती है और अकड़न धीरे-धीरे कम होने लगती है। सर्द मौसम में योग सुबह की बजाय शाम के समय करना अधिक लाभकारी माना जाता है। अभ्यास से पहले हल्का वार्मअप ज़रूर करें। इसके साथ ही प्राणायाम जैसे अनुलोम-बिलोम और भ्रामरी को जोड़ लें, इससे शरीर में गर्म ऊर्जा बनी रहती है।
सर्दियों में अकड़न और दर्द को कम करने के लिए ये सरल योगासन उपयोगी माने जाते हैं—
भुजंगासन
यह आसन रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाता है और कमर दर्द को कम करता है। पेट के बल लेटकर हथेलियों को कंधों के समीप रखें और धीरे-धीरे ऊपरी भाग को उठाएं। इससे जमे हुए हिस्से खुलते हैं और पीठ में राहत मिलती है।
मार्जरीासन
इस आसन से पूरे पीठ के भाग में गति आती है। दोनों हथेलियों और घुटनों के सहारे शरीर को टिका लें। सांस लेते हुए पीठ को नीचे झुकाएं और सांस छोड़ते हुए शरीर को ऊपर गोल कर लें। इससे मांसपेशियों की जकड़न कम होती है और रीढ़ हल्की महसूस होती है।
बालासन
यह आसन शरीर और मन, दोनों को शांत करता है। घुटनों के बल बैठें, आगे की ओर झुकें और माथा भूमि पर टिकाएं। इससे निचले पीठ वाले भाग में तनाव कम होता है और रक्त संचार बढ़ता है।
ताड़ासन
सर्दियों में सुस्ती और खिंचाव को दूर करने के लिए यह आसन बेहद लाभकारी है। पैरों को साथ रखकर सीधे खड़े हों, सांस भरते हुए दोनों हाथों को ऊपर की ओर उठाएं और पूरे शरीर को खींचें। इससे शरीर में स्फूर्ति आती है और संतुलन बढ़ता है।
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राष्ट्रपति ने माता नैना देवी से देश की खुशहाली, शांति और समृद्धि की कामना की
नैनीताल। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार सुबह नैनीताल पहुँचकर मां नैना देवी मंदिर में पूजा-अर्चना की। दो दिवसीय प्रवास पर झील नगरी में मौजूद राष्ट्रपति ने यहां पहुंचकर माता नैना देवी से देश की खुशहाली, शांति और समृद्धि की कामना की। मंदिर परिसर में पहुंचने पर समिति के पदाधिकारियों ने उनका स्वागत किया। इस मौके पर उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (से.नि.) गुरमीत सिंह भी उनके साथ रहे।
मंदिर दर्शन के दौरान पुलिस और प्रशासन की ओर से सुरक्षा व्यवस्था बेहद चुस्त रही। राष्ट्रपति के आगमन के समय श्रद्धालुओं की आवाजाही को सीमित किया गया, लेकिन नगर में माहौल पूरे दिन भक्ति और उत्साह से भरा रहा।
51 शक्तिपीठों की सूची में शामिल मां नैना देवी मंदिर नैनीताल का मुख्य धार्मिक स्थल है, जहां स्थानीय लोगों के साथ पर्यटक भी हर सीजन में माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
मां नैना देवी के पुजारी पंडित जगदीश जोशी ने राष्ट्रपति मुर्मू को विधिवत पूजा कराई। राष्ट्रपति ने कुछ समय मंदिर के गर्भगृह में रुककर मां की स्तुति की और फिर अगले कार्यक्रमों के लिए रवाना हो गईं।
इन दिनों बॉक्स ऑफिस पर ‘थामा’ का हॉरर-कॉमेडी रंग छाया हुआ है, लेकिन इसी महीने एक और दमदार हॉरर फिल्म दर्शकों की धड़कनें बढ़ाने आ रही है। अरबाज खान, ऋतुपर्णा सेनगुप्ता, महेश मांजरेकर और आदित्य श्रीवास्तव स्टारर सुपरनैचुरल थ्रिलर ‘काल त्रिघोरी’ का टीज़र रिलीज कर दिया गया है। रिलीज से पहले सामने आया ये टीज़र काफी टेंशन, डर और सस्पेंस भरने वाला है।
टीज़र की शुरुआत ही चेतावनी के साथ होती है—“बेहतर अनुभव के लिए हेडफोन लगाए।” इसके बाद एक रहस्यमयी पुरानी हवेली, बिजली की गड़गड़ाहट, अंधेरे में मंडराता काल, डर पैदा करने वाली गुड़िया और एक काली बिल्ली जैसे विजुअल्स टीज़र को और भी spine-chilling बना देते हैं। वीडियो का हर सीन बता रहा है कि कहानी सिर्फ डर पर नहीं, बल्कि एक गहरी साजिश और आत्माओं की दुनिया से जुड़े रहस्यों पर आधारित है।
फिल्म की कहानी एक ऐसी हवेली में अनफोल्ड होती है, जहां इन्वेस्टीगेशन के लिए गए लोगों को अनोखे और अनसुलझे रहस्य मिलता है। गुड़िया को छूने की मनाही, और काली बिल्ली का रक्षक के रूप में होना—ये सब फिल्म को अलग तरह की उत्सुकता दे रहे हैं। ‘काल त्रिघोरी’ 14 नवंबर को थिएटर्स में रिलीज होगी और इसका ट्रेलर 5 नवंबर को आएगा।
इस फिल्म का निर्देशन नितिन वैद्य ने किया है और उन्होंने ही इसकी कहानी भी लिखी है। प्रोडक्शन शिरीष वैद्य, नितिन घटालिया और मानसुख तलसानिया कर रहे हैं। फिल्म में राजेश शर्मा, मुग्धा गोडसे सहित कई कलाकार भी अहम किरदारों में नजर आएंगे। टीज़र आने के बाद फैंस का एक्साइटमेंट बढ़ गया है और अरबाज खान के रिटर्न को लेकर भी दर्शकों की दिलचस्पी साफ दिख रही है।
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तेजस्वी बोले- किसानों को सिंचाई के लिए बिजली होगी बिल्कुल फ्री
पटना। बिहार में चुनावी सरगर्मी बढ़ते ही महागठबंधन के मुख्यमंत्री फेस तेजस्वी यादव ने मंगलवार को एक और बड़ा वादा कर दिया। उन्होंने कहा कि अगर महागठबंधन सत्ता में लौटता है तो “माई बहिन योजना” के तहत महिलाओं को एक साल की पूरी किस्त एकमुश्त 30 हजार रुपये सीधे खाते में ट्रांसफर किए जाएंगे। तेजस्वी ने दावा किया कि सरकार बनने के बाद 14 जनवरी के दिन पहली ही फाइल पर साइन कर यह राशि ट्रांसफर करा दी जाएगी।
तेजस्वी यादव ने आगे कहा कि जीविका (कम्युनिटी मोबिलाइजर) को स्थायी करने और उन्हें हर महीने 30 हजार रुपये मानदेय देने का फैसला भी सरकार बनते ही लागू कर दिया जाएगा। किसानों को सिंचाई के लिए बिजली मुफ्त देने का वादा दोहराते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान में 55 पैसा प्रति यूनिट वसूली जाती है, लेकिन महागठबंधन सरकार इसे शून्य कर देगी। साथ ही राज्य के 8463 पैक्स को जनप्रतिनिधि का दर्जा भी देने की बात कही।
नौकरी के मुद्दे पर तेजस्वी ने कहा कि हर परिवार के एक सदस्य को नौकरी देना उनकी प्राथमिकता है। बजट के सवाल पर उन्होंने कहा कि विशेषज्ञों से सलाह के बाद ही यह घोषणा हुई है। 17 महीने के अपने कार्यकाल का हवाला देते हुए कहा कि उन्होंने 5 लाख नौकरियां दी थीं और साढ़े तीन लाख नियुक्तियों की प्रक्रिया शुरू की थी। उन्होंने तंज करते हुए कहा कि भाजपा वाले इस पर कुछ नहीं बोलते, क्योंकि उन्हें मालूम है कि यह सब संभव है।
सीएम धामी ने की घोषणा — डिजिटल एक्स-रे मशीन भी की जाएगी उपलब्ध
उप जिला चिकित्सालय चौखुटिया के निर्माण कार्यों में आएगी तेजी — कृषक विपणन परिषद को सौंपी जिम्मेदारी
चौखुटिया के अस्पताल का विस्तार — स्वास्थ्य सुविधाओं में होगा बड़ा सुधार- मुख्यमंत्री धामी
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि सरकार प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि अल्मोड़ा जनपद के चौखुटिया में स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की क्षमता को बढ़ाते हुए इसे 30 बेड से विस्तारित कर 50 बेड का अस्पताल बनाया जाएगा। इसके साथ ही अस्पताल में अत्याधुनिक डिजिटल एक्स-रे मशीन भी उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे स्थानीय नागरिकों को बेहतर और त्वरित स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि पहाड़ के लोगों को बेहतर चिकित्सा सुविधाओं के लिए बड़े शहरों पर निर्भर न रहना पड़े। इसी उद्देश्य से चौखुटिया में उप जिला चिकित्सालय के निर्माण से संबंधित कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए उत्तराखंड कृषि उत्पादन विपणन परिषद को कार्यदायी संस्था नियुक्त किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है और प्रदेश में चिकित्सा सेवाओं को मजबूत बनाने की दिशा में लगातार व्यापक कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस अस्पताल के विस्तार से चौखुटिया और आसपास के क्षेत्रों के हजारों लोगों को लाभ मिलेगा तथा स्वास्थ्य उपचार में होने वाली देरी को रोका जा सकेगा।
महिलाओं के खिलाफ जघन्य क्रूरता व हिंसा अस्वीकार्य- कुसुम कण्डवाल
देहरादून। देहरादून की एक पीड़िता ने अपने पति पर लंबे समय से शारीरिक, मानसिक और यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए हैं। जिस पर उत्तराखण्ड राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष ने जानकारी मिलते ही संज्ञान लिया है, पीड़िता ने देहरादून ने थाना कोतवाली में दिए प्रार्थना पत्र में बताया कि उसके पति पुश्पांज रोहिला द्वारा लगातार मारपीट, गाली-गलौज और शराब के नशे में हिंसा, उत्पीड़न और अत्याचार किया जा रहा है।
पीड़िता के अनुसार, आरोपी पति शराब के नशे में आए दिन गाली-गलौज, मारपीट और अपमानजनक व्यवहार करता है। हाल ही में हुई एक घटना में उसने अत्यंत अमानवीय और अशोभनीय कृत्य किया, आरोपी द्वारा पीड़िता के गुप्तांगों पर बोतल द्वारा प्रहार किया गया है जिससे पीड़िता गंभीर रूप से घायल हो गई। पीड़िता ने यह भी बताया कि आरोपी ने उसके शैक्षणिक दस्तावेज़ नष्ट किए और जान से मारने की धमकी दी।
इस गंभीर प्रकरण पर उत्तराखण्ड राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने तत्काल संज्ञान लेते हुए एसपी सिटी देहरादून को कठोर व त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने कहा कि यह मामला अत्यंत संवेदनशील और भयावह है तथा इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
उन्होंने कहा, “महिलाओं के खिलाफ इस प्रकार की क्रूरता अस्वीकार्य है। उन्होंने पुलिस को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि आरोपी के विरुद्ध कानून की सबसे सख्त धाराओं में मुकदमा दर्ज कर त्वरित कार्रवाई की जाए। पीड़िता को हर संभव सुरक्षा और चिकित्सा सहायता प्रदान की जाए।”
अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने कहा कि “सरकार व महिला आयोग ऐसी घटनाओं पर शून्य टॉलरेंस की नीति पर काम कर रहा है। न्याय में देरी को अन्याय माना जाएगा, इसलिए इस प्रकरण की मॉनिटरिंग आयोग द्वारा की जाएगी।”
एसपी सिटी ने बताया कि वर्तमान में मामला दर्ज कर कार्रवाई की जा रही है। शीघ्र अतिशीघ्र कार्यवाही से आयोग को अवगत कराया जायेगा।
‘स्पर्श हिमालय महोत्सव 2025’ में मुख्य अतिथि के रूप में पधारे केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू
रिजिजू ने ‘लेखक ग्राम’ पहल की सराहना करते हुए इसे भारत के सांस्कृतिक, साहित्यिक एवं पारिस्थितिक पुनर्जागरण का जीवंत उदाहरण बताया
देहरादून। ‘स्पर्श हिमालय महोत्सव 2025’, जिसका विषय “अंतर्राष्ट्रीय साहित्य, संस्कृति एवं कला महोत्सव” था, देहरादून के लेखक गांव में सोमवार को बड़े उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर भगवान धनवंतरि की प्रतिमा का लोकार्पण भी किया गया। यह महोत्सव उत्तराखंड राज्य के गठन के 25 वर्ष एवं अटल बिहारी वाजपेयी के ‘लेखक ग्राम’ के स्वप्न के 25 वर्ष को समर्पित था।
केंद्रीय संसदीय कार्य एवं अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जिनका स्वागत पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने किया। रिजिजू ने ‘लेखक ग्राम’ को रचनात्मकता, ज्ञान और हिमालयी प्रेरणा का केंद्र बनाने के लिए डॉ. निशंक के उल्लेखनीय कार्य की प्रशंसा की।
अपने संबोधन में रिजिजू ने महोत्सव का हिस्सा बनने पर प्रसन्नता व्यक्त की और कहा कि वे स्वयं अरुणाचल प्रदेश से होने के कारण हिमालय से भावनात्मक रूप से जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि “हिमालय केवल पर्वत नहीं, बल्कि भारत की शक्ति, आध्यात्मिकता और पहचान के प्रतीक हैं।”
हिमालयी राज्यों की अपनी यात्राओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सीमा क्षेत्रों जैसे गुंजी में सड़क संपर्क एवं अवसंरचना के विस्तार हेतु किए जा रहे कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा, “भारत की सुंदरता इसकी विविधता में निहित है — हम भले अलग भाषाएँ बोलते हों और अलग परंपराएँ निभाते हों, परंतु हमारे मूल्य और दृष्टि हमें एक सूत्र में बांधते हैं।” उन्होंने आगे कहा, “हमारा संविधान लोकतंत्र को दिया गया सबसे सुंदर योगदान है — जो हमारी एकता, करुणा और सामूहिक भावना का जीवंत प्रतीक है।”
कार्यक्रम में डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने केंद्रीय मंत्री का स्वागत किया और महोत्सव को उत्तराखंड के 25 वर्ष एवं अटल बिहारी वाजपेयी जी के ‘ग्राम भारत’ के स्वप्न को समर्पित किया। उन्होंने कहा कि ‘लेखक ग्राम’ पहल का उद्देश्य गाँवों को रचनात्मकता, संस्कृति और शिक्षा के केंद्रों में विकसित करना है।
आचार्य बालकृष्ण, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, पतंजलि ने भारत की प्राचीन ज्ञान परंपराओं, आयुर्वेद और हिमालयी पारिस्थितिकी के संरक्षण में पतंजलि के योगदान का उल्लेख करते हुए रिजिजू का हार्दिक स्वागत किया।
प्रो. अनिल सहस्रबुद्धे ने ‘लेखक ग्राम’ की अवधारणा की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) की उस भावना का उत्कृष्ट उदाहरण है, जो पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक शिक्षा से जोड़ती है।
इस अवसर पर प्रो. सोमवीर (इंडोनेशिया) ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर लोकतांत्रिक और संसदीय संवाद को प्रोत्साहित करने में रिजिजू की भूमिका की सराहना की तथा भारत के ‘स्वच्छता अभियान’ की भी प्रशंसा की।
पद्मश्री डॉ. बी.के. संजय (एम्स गुवाहाटी) ने हिमालयी परंपराओं के समग्र स्वास्थ्य संवर्धन में महत्व को रेखांकित किया। स्वामी अवधेशानंद गिरि महाराज ने उपस्थित जनसमूह को आशीर्वाद दिया और जीवन में अध्यात्म, सेवा एवं नैतिक अनुशासन के महत्व पर बल दिया। प्रो. पृथ्वीराज, उपाध्यक्ष, ने डॉ. निशंक के हिमालयी एवं सांस्कृतिक विकास में योगदान की प्रशंसा की और उन्हें सम्मान स्वरूप स्मृति चिन्ह भेंट किया।
अंत में धन्यवाद ज्ञापन देते हुए डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने किरेन रिजिजू का आभार व्यक्त किया और कहा कि उनके प्रेरणादायी शब्दों ने हिमालय और जनमानस के बीच के गहरे संबंध को पुनः जीवंत कर दिया।
सर्दियों में तापमान गिरते ही सांस से जुड़ी दिक्कतें बढ़ने लगती हैं। गला बैठना, नाक बहना, ठंड लगना और खांसी-जुकाम इन दिनों आम हो जाता है। ऐसे वक्त में सिर्फ दवा लेना काफी नहीं, शरीर की इम्युनिटी को भीतर से मजबूत रखना भी ज़रूरी है। योगासन इस दिशा में बहुत प्रभावी माने जाते हैं। सही योगाभ्यास सांस लेने की क्षमता को बेहतर बनाते हैं, फेफड़ों की कार्यक्षमता बढ़ाते हैं और श्वसन तंत्र पर होने वाले मौसमी प्रेशर को कम करते हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक, जो लोग ठंड के मौसम में नियमित रूप से प्राणायाम और कुछ बेसिक आसन करते हैं, उन्हें खांसी-जुकाम, साइनस, जकड़न और सांस फूलने जैसी परेशानियों में राहत मिलती है।
कौन-से आसन इस मौसम में बेहद फायदेमंद
अनुलोम-विलोम
नाक की दोनों नाड़ियों को संतुलित करता है, बंद नाक और साइनस में आराम देता है तथा ठंड से होने वाली चिपचिपाहट कम करता है।
कपालभाति
फेफड़ों से जमा कफ को बाहर निकालने में मदद करता है। इससे ऑक्सीजन लेवल बढ़ता है और श्वसन तंत्र क्लीन रहता है।
भ्रामरी प्राणायाम
सर्दी की वजह से होने वाली बेचैनी और बैक-टू-बैक खांसी के अटैक में राहत देता है। मानसिक तनाव भी कम करता है।
सेतुबंधासन
छाती को खोलता है और सांस लेने की क्षमता को सहज बनाता है। ठंड से जकड़न और बलगम में फायदा मिलता है।
अर्ध मत्स्येन्द्रासन
शरीर में हीट जनरेट करता है, टॉक्सिन रिलीज करता है और इम्युनिटी बूस्ट करता है। संक्रमण से बचाव में उपयोगी है।
(साभार)
